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                <title>अंतरराष्ट्रीय समाचार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अंतरराष्ट्रीय समाचार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हिंसा राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकार संकट के बीच घिरा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) एक बार फिर गंभीर अशांति और हिंसा का केंद्र बन गया है। विधानसभा चुनावों से पहले भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को तनाव और अनिश्चितता के माहौल में धकेल दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार अब तक लगभग 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। स्थिति</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180926/pakistan-occupied-kashmir-surrounded-by-violence-political-instability-and-human"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) एक बार फिर गंभीर अशांति और हिंसा का केंद्र बन गया है। विधानसभा चुनावों से पहले भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को तनाव और अनिश्चितता के माहौल में धकेल दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार अब तक लगभग 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान को अतिरिक्त सुरक्षा बल और रेंजर्स तैनात करने पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">यह हिंसा केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक असंतोष की लंबी पृष्ठभूमि मौजूद है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। चुनाव से पहले जिस प्रकार सीटों के आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद पैदा हुआ, उसने लोगों के भीतर पहले से मौजूद नाराजगी को और अधिक भड़का दिया। यही कारण है कि प्रदर्शन केवल किसी एक निर्णय के विरोध तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे व्यापक असंतोष के रूप में सामने आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">रावलकोट में हुई झड़पों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद हिंसा तेजी से फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई स्थानों पर गोलीबारी भी हुई। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ इलाकों में बिना पर्याप्त चेतावनी के बल प्रयोग किया गया, जिससे भगदड़ मच गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। इन घटनाओं ने स्थानीय जनता के भीतर सेना और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति असंतोष को और गहरा कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान संकट का एक बड़ा कारण 27 जुलाई को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव भी हैं। चुनावों में 45 में से 12 सीटों को शरणार्थियों के लिए आरक्षित किए जाने के फैसले का व्यापक विरोध हो रहा है। विरोधी संगठनों का कहना है कि इस व्यवस्था से स्थानीय निवासियों के राजनीतिक अधिकार प्रभावित होंगे और उनकी वास्तविक भागीदारी कम हो जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने आंदोलन तेज किया है। बंद और प्रदर्शन की घोषणाओं ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब यह असंतोष केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठानी शुरू कर दी है। ब्रिटेन में पाकिस्तान के दूतावास के बाहर प्रदर्शन किए गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और बल प्रयोग के खिलाफ नारे लगाए। इससे स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">ब्रिटेन के लगभग 50 सांसदों द्वारा इस विषय पर चिंता व्यक्त किया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से मामले पर ध्यान देने और राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि किसी भी क्षेत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए तथा राजनीतिक मतभेदों का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठती ऐसी आवाजें पाकिस्तान के लिए नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकार संबंधी प्रश्नों से ध्यान हटाने के लिए भ्रामक सूचनाओं और दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है। भारत का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पीओके में घट रही घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों का सम्मान हो। भारत लंबे समय से पीओके में लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करता रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और संचार व्यवस्था में व्यवधान की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है। कई इलाकों में लोगों को सूचना और संवाद के साधनों से वंचित होना पड़ा है। आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में सूचना तक पहुंच को एक महत्वपूर्ण अधिकार माना जाता है। ऐसे में संचार माध्यमों पर नियंत्रण से लोगों के बीच असुरक्षा और अविश्वास की भावना और अधिक बढ़ सकती है। इससे प्रशासन और जनता के बीच संवाद की संभावनाएं भी कमजोर होती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान संकट पाकिस्तान के सामने एक बड़े राजनीतिक प्रश्न को भी खड़ा करता है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन, जनाक्रोश और प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ रहा हो, तो केवल सुरक्षा बलों के सहारे स्थिति को लंबे समय तक नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए आवश्यक है कि जनता की शिकायतों को सुना जाए, राजनीतिक संवाद को बढ़ावा दिया जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाया जाए। इतिहास गवाह है कि जब भी जनभावनाओं की उपेक्षा की जाती है, तब असंतोष और अधिक तीव्र रूप में सामने आता है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि वहां के लोग अपने राजनीतिक अधिकारों, बेहतर प्रशासन और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर पहले से अधिक मुखर हो चुके हैं। यदि इन मांगों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और जटिल हो सकती है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, प्रशासन की जवाबदेही और मानवाधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दे आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण बनेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भड़की हिंसा केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह उस गहरे असंतोष का परिणाम है जो लंबे समय से वहां मौजूद है। बढ़ती मौतें, सैकड़ों घायल, व्यापक प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय चिंता और राजनीतिक विवाद यह दर्शाते हैं कि पीओके एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार किस प्रकार इस संकट का समाधान करती है, यह न केवल क्षेत्र की स्थिरता बल्कि उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि और लोकतांत्रिक विश्वसनीयता को भी प्रभावित करेगा। पीओके के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक समाधान ही इस संकट से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी मार्ग साबित हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>           </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>*कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्मनी की राजनीति में बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले जर्मनी को इस सप्ताह एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की अस्थायी सदस्यता के चुनाव में जर्मनी को हार का सामना करना पड़ा, जिससे देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान में जर्मनी आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रहा। पश्चिमी यूरोपीय समूह की सीटों के लिए हुए चुनाव में ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को सफलता मिली, जबकि जर्मनी पहली बार इस तरह की महत्वपूर्ण हार का सामना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180771/big-shock-in-german-politics"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/76959563_1006.webp" alt=""></a><br /><p>यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले जर्मनी को इस सप्ताह एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की अस्थायी सदस्यता के चुनाव में जर्मनी को हार का सामना करना पड़ा, जिससे देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान में जर्मनी आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रहा। पश्चिमी यूरोपीय समूह की सीटों के लिए हुए चुनाव में ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को सफलता मिली, जबकि जर्मनी पहली बार इस तरह की महत्वपूर्ण हार का सामना कर रहा है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में जर्मनी की विदेश नीति, विशेषकर यूक्रेन युद्ध, इज़राइल समर्थन और विदेशी सहायता बजट में कटौती जैसे मुद्दों ने कई देशों को उससे दूर कर दिया। यही कारण रहा कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अनेक देशों का अपेक्षित समर्थन जर्मनी को नहीं मिल सका।</p>
<p>जर्मनी के विदेश मंत्री और सरकारी अधिकारियों ने इस परिणाम पर निराशा व्यक्त की है। सरकार का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेगी और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान देती रहेगी। हालांकि विपक्षी दलों ने इसे सरकार की कूटनीतिक विफलता करार दिया है और विदेश नीति की समीक्षा की मांग की है।</p>
<p>इस हार के बाद जर्मनी में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप और वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच संतुलन बनाने में जर्मनी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाया। इसके चलते उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को झटका लगा है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल एक चुनावी हार नहीं बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत भी है। आने वाले समय में जर्मनी को अपनी विदेश नीति, विकास सहयोग कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को और मजबूत करना होगा ताकि वह विश्व मंच पर अपनी प्रभावशाली भूमिका बनाए रख सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180771/big-shock-in-german-politics</link>
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:32:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'मित्र देशों के जहाज गुजर सकेंगे', भारत सहित  5 देश के लिए ईरान ने खोला होर्मुज का दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="font-family:mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span>पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईरान ने ऐलान किया है कि वह भारत समेत पांच मित्र देशों से संबंधित जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिससे उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल जाएगी, जबकि अन्य देशों के लिए पहुंच सीमित रहेगी। क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174313/ships-of-friendly-countries-will-be-able-to-pass-through"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="font-family:mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span>पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईरान ने ऐलान किया है कि वह भारत समेत पांच मित्र देशों से संबंधित जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिससे उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल जाएगी, जबकि अन्य देशों के लिए पहुंच सीमित रहेगी। क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है और कुछ ऐसे देशों को प्रतिबंधों से छूट दी गई हैm जिनके साथ ईरान के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, अराघची ने कहा, "शत्रु को जलडमरूमध्य से गुजरने देने का कोई कारण नहीं है। हमने कुछ ऐसे देशों को गुजरने की अनुमति दी है, जिन्हें हम मित्र मानते हैं। हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को आने-जाने की अनुमति दी है।"</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को शत्रु माना जाता है या जो मौजूदा संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाज, जो वर्तमान संकट में भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अराघची ने महत्वपूर्ण जलमार्ग पर ईरान के नियंत्रण पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने दशकों बाद इस क्षेत्र में अपना अधिकार प्रदर्शित किया है।उन्होंने कहा कि जब ईरान ने शुरू में होर्मुज जलडमरूमध्य की आंशिक नाकाबंदी की घोषणा की थी ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 21:00:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच एकजुट हुए 22 देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया के 22 देशों ने मिलकर ईरान से अपील की है कि वह अपने हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। इन देशों में यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी,  जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई बड़े देश शामिल हैं। इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी करके ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ईरान ने हाल ही में बिना हथियार वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले किए, तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य को</p>
<p style="text-align:justify;">एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173881/22-countries-united-amid-west-asia-crisis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/48.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया के 22 देशों ने मिलकर ईरान से अपील की है कि वह अपने हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। इन देशों में यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया समेत कई बड़े देश शामिल हैं। इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी करके ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ईरान ने हाल ही में बिना हथियार वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले किए, तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक संयुक्त बयान में देशों ने कहा कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही की आजादी अंतरराष्ट्रीय कानून का अहम हिस्सा है। ईरान की इन हरकतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर गरीब और कमजोर देशों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा। जिन 22 देशों ने यह पत्र लिखा है- उसमें संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन, लिथुआनिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का व्यापार होता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी। ईरान के नए सर्वोच्च नेता और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में कहा है कि ईरान अपने मारे गए लोगों का बदला जरूर लेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की नीति जारी रहेगी और पड़ोसी देशों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी बंद करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में चल रहे इस संघर्ष में भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, ईरान में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, लेबनान में 1000+ मौतें और लाखों लोग बेघर हुए हैं। वहीं इस्राइल में 15 लोगों की मौत हुई है और अमेरिका में 13 सैनिकों की मौत हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:52:03 +0530</pubDate>
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