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                <title>Supreme Court order 2026 - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Supreme Court order 2026 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यह डरावना है कि 7.95 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं 6 महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा, "आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।" </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176301/it-is-scary-that-more-than-795-lakh-execution-petitions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supream-court4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा, "आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई व्यवस्था के बारे में उन्हें जानकारी दें।कोर्ट ने आदेश दिया, "अगली सुनवाई की तारीख़, यानी 07.10.2026 तक, हर हाईकोर्ट हमें संक्षेप में बताएगा कि एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के प्रभावी और जल्द निपटारे के लिए उन्होंने क्या व्यवस्था बनाई या अपने-अपने ज़िला न्यायालयों को किस तरह के निर्देश जारी किए।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ऐसे मामलों के समय-सीमा के भीतर निपटारे के लिए दिए गए अपने निर्देशों के पालन की निगरानी कर रहा था। 16 अक्टूबर, 2025 तक पूरे देश में 8.82 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित थीं। उस समय कोर्ट ने इन आंकड़ों को बेहद निराशाजनक और चिंताजनक बताया था। हाईकोर्ट से छह महीने के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने और प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने ताज़ा आदेश में कोर्ट ने पाया कि निपटारे में प्रगति के बावजूद, लंबित मामलों की संख्या अभी भी बहुत ज़्यादा है। कोर्ट ने पाया कि मौजूदा आंकड़े दिखाते हैं कि 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं अभी भी छह महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने पाया कि 6 मार्च, 2025 से जब उसने एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं के समय-सीमा के भीतर निपटारे का निर्देश दिया था, तब से 10 अप्रैल, 2026 तक कुल 7,69,731 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं का फ़ैसला किया गया और उनका निपटारा किया गया। इसमें 6 मार्च, 2025 के निर्देशों के बाद पहले चरण में निपटाए गए 3,38,685 मामले और 16 अक्टूबर, 2025 के बाद निपटाए गए 4,31,046 अन्य मामले शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने राज्य-वार आंकड़ों पर प्रकाश डाला, जो यह दिखाते हैं कि मामले अभी भी लंबित हैं। उत्तर प्रदेश में 26,943 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 3,057 मामलों में कार्यवाही ऊपरी अदालतों द्वारा रोक दी गई। महाराष्ट्र में, 3,95,960 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 11,966 मामलों पर रोक लगी हुई है। पश्चिम बंगाल में 28,192 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 1,008 मामलों में कार्यवाही पर रोक है। मध्य प्रदेश में, 50,579 लंबित एग्ज़ीक्यूशन याचिकाओं में से 2,537 मामले रोक के अंतर्गत हैं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट  ने इलाहाबाद हाईकोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे उन मामलों की जांच करें, जिनमें कार्यवाही पर रोक लगी हुई और यह सुनिश्चित करें कि ऐसे मामलों को जल्द-से-जल्द उठाया जाए ताकि एग्ज़ीक्यूशन की कार्यवाही में देरी न हो। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 21:19:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अरुणाचल के सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों की होगी सीबीआई जांच, 1270 करोड़ के घोटाले का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175321/cbi-probe-into-contracts-related-to-arunachal-cms-family-allegation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को मामले की सुनवाई के दौरान सुरक्षित रखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में प्रस्तुत याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले 10 वर्षों में चार कंपनियों को, जो सीएम पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी हैं, करीब 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके दिए गए। याचिकाकर्ता एनजीओ, सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों में स्पष्ट कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट पाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सीएम पेमा खांडू, उनके पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रिमा और भतीजा त्सेरिंग ताशी को पार्टी प्रतिवादी बनाया गया है। दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और अप्रैल 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हुआ था। याचिका में यह भी बताया गया कि रिंचिन ड्रिमा की कंपनी, ब्रांड ईगल्स को कई सरकारी ठेके मिले, जो विवादित और पारिवारिक संबंधों के कारण सवाल उठाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से अब राज्य में सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और सीएम परिवार के ठेकों की कानूनी जांच संभव हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:07:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जेलों में भीड़भाड़ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा ताजा डाटा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>देशभर की जेलों में बढ़ती भीड़भाड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी जेलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। यह आदेश जेलों में भीड़भाड़ से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में न्यायमित्र नियुक्त वकील गौरव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के पास राज्यवार जेलों की ताजा स्थिति से जुड़ा कोई अपडेट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने स्पष्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173872/supreme-court-strict-on-overcrowding-in-jails-seeks-latest-data"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/supream-court2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>देशभर की जेलों में बढ़ती भीड़भाड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी जेलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। यह आदेश जेलों में भीड़भाड़ से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में न्यायमित्र नियुक्त वकील गौरव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के पास राज्यवार जेलों की ताजा स्थिति से जुड़ा कोई अपडेट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जेलों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें हर जेल की क्षमता, वहां बंद कैदियों की कुल संख्या (विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों), तथा प्रत्येक जेल में भीड़भाड़ का प्रतिशत शामिल होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों की जानकारी भी मांगी है।</p><p style="text-align:justify;">अदालत ने महिलाओं की जेलों पर विशेष ध्यान देते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं का ब्योरा भी मांगा । सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये सभी हलफनामे संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिव की ओर से दाखिल किए जाएं। इसके लिए अंतिम तारीख 18 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:36:24 +0530</pubDate>
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