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                <title>हाईकोर्ट आदेश - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>हाईकोर्ट आदेश RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गोविंद नगरके ब्लॉक-8 पार्क पर कब्जे की कोशिश के खिलाफ डीएम से कार्यवाही मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर स्थित ब्लॉक-8 के सार्वजनिक पार्क पर कथित अवैध कब्जों और निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश वीर आर्य ने जिलाधिकारी कानपुर को शिकायती पत्र देकर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पार्क में हो रहे नए निर्माण एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।</div>
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<div style="text-align:justify;">  शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते पार्क के लगभग 70% हिस्से पर कब्जा हो चुका है तथा वहां अवैध निर्माण एवं धार्मिक संरचनाएं खड़ी कर दी गई हैं। कई बार IGRS</div>
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<div style="text-align:justify;">ज्ञापन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178854/demand-for-action-from-dm-against-attempt-to-capture-block-8"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001895508.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर स्थित ब्लॉक-8 के सार्वजनिक पार्क पर कथित अवैध कब्जों और निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश वीर आर्य ने जिलाधिकारी कानपुर को शिकायती पत्र देकर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पार्क में हो रहे नए निर्माण एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते पार्क के लगभग 70% हिस्से पर कब्जा हो चुका है तथा वहां अवैध निर्माण एवं धार्मिक संरचनाएं खड़ी कर दी गई हैं। कई बार IGRS पर शिकायतें किए जाने के बावजूद नगर निगम द्वारा “पुराना निर्माण” बताकर फर्जी निस्तारण किया जाता रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> प्रकाश वीर आर्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 22 अप्रैल 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय ने स्वयं पार्क भूमि पर हुए निर्माण पर गंभीर टिप्पणी की थी तथा समस्त अतिक्रमण हटाकर पार्क को मूल स्वरूप में बहाल करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वर्तमान में फिर से निर्माण और मूर्ति स्थापना कर कब्जा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जो न्यायालय की अवमानना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में मांग की गई है कि पार्क से सभी अवैध कब्जे हटाए जाएं, नगर निगम द्वारा कराई गई इंटरलॉकिंग हटाकर पार्क को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए तथा दोषी अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:16:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मस्जिद ध्वस्तीकरण नोटिस पर हाईकोर्ट सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट में मस्जिद ध्वस्तीकरण नोटिस को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने फिलहाल मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए प्रशासन को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से रोक दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह याचिका वक्फ मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और यह कार्रवाई मनमानी तथा अवैध है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178183/high-court-strict-on-mosque-demolition-notice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260504-wa0086-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट में मस्जिद ध्वस्तीकरण नोटिस को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने फिलहाल मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए प्रशासन को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से रोक दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह याचिका वक्फ मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और यह कार्रवाई मनमानी तथा अवैध है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना। अदालत ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा कि नोटिस जारी करने से पहले किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को भी अपने पक्ष में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिससे संबंधित स्थल पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या प्रशासनिक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई को निर्धारित की है। उस दिन दोनों पक्षों को विस्तृत रूप से अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। इस आदेश के बाद फिलहाल क्षेत्र में स्थिति शांत बनी हुई है, जबकि दोनों पक्ष अगली सुनवाई की तैयारी में जुट गए हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 22:06:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा- चाइनीज मांझे पर रोक को लेकर क्या कार्रवाई की गई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे पर रोक को लेकर की गई कार्रवाई पर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को सरकार से एक महीने में निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह आदेश देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है। इसमें गृह विभाग के प्रमुख सचिव और डीजीपी को पक्षकार बनाया गया है।</p><p style="text-align:justify;">कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 2015 में जनहित याचिका अनुराग मिश्रा बनाम राज्य मामले में चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173870/allahabad-high-court-asked-what-action-was-taken-regarding-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/allahabad-high-court4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चाइनीज मांझे पर रोक को लेकर की गई कार्रवाई पर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को सरकार से एक महीने में निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह आदेश देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है। इसमें गृह विभाग के प्रमुख सचिव और डीजीपी को पक्षकार बनाया गया है।</p><p style="text-align:justify;">कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 2015 में जनहित याचिका अनुराग मिश्रा बनाम राज्य मामले में चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए थे। 14 जनवरी 2026 को एक और जनहित याचिका हिमांशु श्रीवास्तव बनाम राज्य में भी कोर्ट ने पुराने आदेशों को दोहराते हुए सख्ती से पालन कराने के लिए कहा था। इसके बावजूद प्रतिबंधित मांझा खुलेआम बिक रहा है।</p><p style="text-align:justify;">याची ने दलील दी है कि अधिकारियों की लापरवाही और आदेशों की अवहेलना से कई घटनाएं हो चुकी हैं। 22 जनवरी 2026 को प्रयागराज में गले में मांझा फंसने से अधिवक्ता अनूप श्रीवास्तव घायल हो गए थे। जौनपुर, उन्नाव, मेरठ और लखनऊ सहित कई जिलों में एक साल में कई लोगों की मौत और कई के घायल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।</p><p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने दलील दी कि यह मांझा न सिर्फ दुकानों पर, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से उपलब्ध है। यह अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने याची को निर्देश दिया है कि वे 48 घंटे के भीतर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को याचिका की प्रति उपलब्ध कराएं। एक माह बाद अगली सुनवाई होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:33:03 +0530</pubDate>
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