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                <title>breaking news India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>breaking news India RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>श्रद्धालु चांदी समझ वैष्णो देवी में चढ़ाते हैं चढ़ावा, निकला कैंसर फैलाने वाला जहरीला धातु!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाए गए चढ़ावे को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। भगवान को खुश करने के लिए श्रद्धालु चांदी का चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन अब इनकी पुष्टि ख़तरनाक जहरीला कैडमियम के रूप में हुई है। यानी वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चांदी के चढ़ावे में बड़ा घोटाला सामने आया है। ईटी ने रिपोर्ट दी है कि देश की मिंट यानी सरकारी टकसाल ने जाँच में पाया है कि भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चांदी में सिर्फ़ 5-6 प्रतिशत ही असली चांदी है। बाकी हिस्सा जहर जैसा जहरीला कैडमियम और सस्ता लोहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हर साल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177029/devotees-offer-silver-to-vaishno-devi-which-turns-out-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1776762818464_vishno_devi_mandir_silver_candium.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाए गए चढ़ावे को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। भगवान को खुश करने के लिए श्रद्धालु चांदी का चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन अब इनकी पुष्टि ख़तरनाक जहरीला कैडमियम के रूप में हुई है। यानी वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चांदी के चढ़ावे में बड़ा घोटाला सामने आया है। ईटी ने रिपोर्ट दी है कि देश की मिंट यानी सरकारी टकसाल ने जाँच में पाया है कि भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चांदी में सिर्फ़ 5-6 प्रतिशत ही असली चांदी है। बाकी हिस्सा जहर जैसा जहरीला कैडमियम और सस्ता लोहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर साल लाखों भक्त जम्मू-कश्मीर की ठंडी त्रिकुटा पहाड़ियों पर माता वैष्णो देवी के दर्शन करने जाते हैं। वे चांदी के सिक्के, गहने या अन्य चीजें खरीदकर माता को चढ़ाते हैं। भक्त सोचते हैं कि वे शुद्ध चांदी चढ़ा रहे हैं। लेकिन वे दरअसल, ऐसी जहरीली चीज चढ़ा रहे होते हैं जिसका इस्तेमाल प्रतिबंधित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने हाल ही में लगभग 20 टन जमा हुई चांदी की ऑफरिंग्स को सरकारी मिंट को भेजा। मिंट के अधिकारियों ने इसे पिघलाने और स्टोर करने की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन इसको टेस्ट करने वाले विशेषज्ञों ने चौंकाने वाली बात पाई। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़, मिंट के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि भक्तों द्वारा खरीदी और चढ़ाई गई इस धातु में सिर्फ 5-6 प्रतिशत ही असली चांदी है। बाक़ी कैडमियम और लोहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चांदी का भाव आजकल लगभग 2 लाख 75 हजार रुपये प्रति किलो है। वहीं रंग में चांदी जैसा ही दिखने वाला कैडमियम सिर्फ 400-500 रुपये प्रति किलो का है। लोहा तो और भी सस्ता है। श्राइन बोर्ड को उम्मीद थी कि 20 टन चांदी से करीब 500-550 करोड़ रुपये मिलेंगे। लेकिन असली चांदी की क़ीमत मुश्किल से 30 करोड़ रुपये के आसपास ही निकली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार मिंट ने इस समस्या को पिछले एक साल में कई बार उठाया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के ऑफिस और श्राइन बोर्ड को चिट्ठी लिखी है। एक चिट्ठी में मिंट ने लिखा है, 'श्री माता वैष्णो देवी मंदिर के आसपास ऐसे अनैतिक काम हो रहे हैं जो भक्तों को धोखा दे रहे हैं। भक्त चांदी के सामान खरीदते हैं लेकिन उन्हें पता नहीं कि उसमें कैडमियम मिला है, जो रंग से चांदी जैसा दिखता है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिंट ने आगे लिखा है कि कैडमियम बहुत जहरीला है। इससे काम करने वालों को स्वास्थ्य खतरा है और हवा व पानी में प्रदूषण फैल सकता है। इसलिए तुरंत ऐसे नकली चांदी के सामान बनाना बंद करना चाहिए। एक हालिया बैच में चढ़ावे वाली क़रीब 70 किलो चांदी मिंट को दी गई। उसमें सिर्फ 3 किलो ही असली चांदी निकली। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार मिंट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हमें तीन महीने तक लोगों को लगाकर सामान अलग-अलग करना पड़ा। फिर भी सिर्फ छोटे-छोटे हिस्सों में ज्यादा चांदी मिली, जिसे 25 लाख रुपये की महंगी मशीन से चेक किया गया।'</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:24:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु में थमा चुनाव प्रचार, 23 अप्रैल को मतदान, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177019/election-campaign-stopped-in-west-bengal-tamil-nadu-strong-arrangements-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद अब कोई भी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार के समर्थन में जनसभा या रैली नहीं कर सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पश्चिम बंगाल की तो यहां इस बार दो चरणों में चुनाव संपन्न कराया जाना है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होना है। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इन मतदाताओं में एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं अपने मत का इस्तेमाल करेंगी। आरक्षण को लेकर बने माहौल के बीच इस बार पश्चिम बंगाल में महिलाओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल में पहले चरण में जहां मतदान होने हैं, उनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल अंचल के पांच जिले शामिल हैं।इनमें मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की 9, जलपाईगुड़ी की 7, अलीपुरद्वार की 5, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की 5, उत्तर दिनाजपुर की 9, दक्षिण दिनाजपुर की 6, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम ब‌र्द्धमान की 9, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झारग्राम की 4, पुरुलिया की 9 और बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु  राज्य में सभी सीटों पर एक चरण में ही चुनाव संपन्न कराया जाना है। 23 अप्रैल को ही सभी 234 सीटों पर मतदान होना है। तमिलनाडु में इस बार 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव में कुल 5.73 करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों की किस्मत लिखेंगे।इस बार चुनाव में सबकी निगाहें अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके पर टिकी हैं, क्योंकि कई सीटों पर उनको लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है, इसलिए चुनाव में उनकी भूमिका काफी अहम हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:08:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वाराणसी कोर्ट ने PM मोदी पर X पोस्ट को लेकर मधु किश्वर के खिलाफ शिकायत पर पुलिस रिपोर्ट मांगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>वाराणसी की एक कोर्ट में एक शिकायत दायर की गई है, जिसमें शिक्षाविद और लेखिका प्रो. मधु किश्वर के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य राजनीतिक नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, किश्वर ने कथित तौर पर X और अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने वेरिफ़ाइड सोशल मीडिया अकाउंट का दुरुपयोग करके लगातार गुमराह करने वाला, झूठा, भड़काऊ और मानहानिकारक कंटेंट फैलाया।</p>
<p style="text-align:justify;">वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शिकायत का संज्ञान लिया है, जिसमें पुलिस को निर्देश देने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175913/varanasi-court-seeks-police-report-on-complaint-against-madhu-kishwar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rahul-raises-questions-on-sir-says-cong-will-fight-it-politically-organisationally-legally-20260411t180304542jpg_1775910875079.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>वाराणसी की एक कोर्ट में एक शिकायत दायर की गई है, जिसमें शिक्षाविद और लेखिका प्रो. मधु किश्वर के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य राजनीतिक नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, किश्वर ने कथित तौर पर X और अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने वेरिफ़ाइड सोशल मीडिया अकाउंट का दुरुपयोग करके लगातार गुमराह करने वाला, झूठा, भड़काऊ और मानहानिकारक कंटेंट फैलाया।</p>
<p style="text-align:justify;">वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शिकायत का संज्ञान लिया है, जिसमें पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह कथित तौर पर मानहानिकारक पोस्ट के लिए किश्वर के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करे। कोर्ट ने इस मामले को एक विविध मामले के तौर पर दर्ज किया है और इस मामले पर पुलिस से एक रिपोर्ट भी मांगी है।इस मामले में शिकायत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लीगल सेल के संयोजक, वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दायर की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में विशेष रूप से आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ किश्वर द्वारा किए गए कुछ पोस्ट बहुत ज़्यादा गुमराह करने वाले थे और उनका समाज पर व्यापक असर पड़ सकता था। आगे यह तर्क दिया गया कि चूंकि किश्वर एक वेरिफ़ाइड सोशल मीडिया अकाउंट चलाती हैं, इसलिए उनके बयानों को जनता द्वारा ज़्यादा विश्वसनीय माने जाने की संभावना है, जिससे उनका असर और गंभीरता बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में यह भी कहा गया कि पहले किश्वर को कई कानूनी नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें उनसे अपने दावों को साबित करने और कथित तौर पर आपत्तिजनक कंटेंट को बदलने या हटाने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने कथित तौर पर कोई सहायक सामग्री पेश नहीं की और न ही कोई सुधार किया। यह तर्क दिया गया कि यह किश्वर की ओर से व्यवहार का एक दोहराया जाने वाला पैटर्न है, जिसका उद्देश्य समाज में भ्रम, असंतोष और कलह पैदा करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि ऐसा कंटेंट संस्थानों में जनता के विश्वास को कम कर सकता है, सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसी आधार पर, तत्काल कानूनी हस्तक्षेप और FIR दर्ज करने की मांग की गई। इस मामले की सुनवाई कोर्ट 15 अप्रैल को करेगा, तब तक पुलिस से अपनी रिपोर्ट जमा करने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मधु किश्वर का पीएम पर फिर हमला- उस फाइल में मोदी के खिलाफ क्या था, अफसर कौन था</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>बीजेपी और मोदी समर्थक मानुषी पत्रिका की संस्थापक संपादक प्रो. मधु किश्वर ने प्रधानमंत्री पर गुरुवार 2 अप्रैल को फिर हमला बोला है। इस बार उन्होंने मोदी से जुड़ी गोपनीय फाइल और एक आला अफसर का जिक्र किया है। पिछली बार महिलाओं को लेकर बोला था।</p>
<p style="text-align:justify;">मधु किश्वर ने गुरुवार को एक्स पर एक लंबे ट्वीट में लिखा है- यह चौंकाने वाली जानकारी मुझे एक ऐसे व्यक्ति से मिली है, जिसके पास प्रधानमंत्री के बारे में अंदरूनी सूचनाओं का अच्छा-खासा भंडार है। मूल तथ्यों की पुष्टि कोई भी व्यक्ति साधारण गूगल सर्च के जरिए कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175045/madhu-kishwar-attacks-pm-again-what-was-there-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/44.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>बीजेपी और मोदी समर्थक मानुषी पत्रिका की संस्थापक संपादक प्रो. मधु किश्वर ने प्रधानमंत्री पर गुरुवार 2 अप्रैल को फिर हमला बोला है। इस बार उन्होंने मोदी से जुड़ी गोपनीय फाइल और एक आला अफसर का जिक्र किया है। पिछली बार महिलाओं को लेकर बोला था।</p>
<p style="text-align:justify;">मधु किश्वर ने गुरुवार को एक्स पर एक लंबे ट्वीट में लिखा है- यह चौंकाने वाली जानकारी मुझे एक ऐसे व्यक्ति से मिली है, जिसके पास प्रधानमंत्री के बारे में अंदरूनी सूचनाओं का अच्छा-खासा भंडार है। मूल तथ्यों की पुष्टि कोई भी व्यक्ति साधारण गूगल सर्च के जरिए कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस दिन नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, उसी दिन मनमोहन सिंह के 2011 से कैबिनेट सचिव रहे अजीत कुमार सेठ उनसे मिलने पहुंचे। उनके पास एक मोटी फाइल थी और उन्होंने कहा, “डॉ. साहब (मनमोहन) ने सुझाव दिया है कि आप इस फाइल को ध्यान से देखें।”</p>
<p style="text-align:justify;">मधु किश्वर आगे लिखती हैं कि मोदी जी ने जैसे ही फाइल के पन्ने पलटने शुरू किए, उनका चेहरा फीका पड़ गया, क्योंकि उस फाइल में उनके खिलाफ कई आपत्तिजनक जानकारियां थीं। घबराए हुए मोदी ने सेठ से पूछा, “यह आपके पास कैसे पहुंची?” सेठ ने शांत स्वर में जवाब दिया, “कैबिनेट सचिव होने के नाते, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सभी महत्वपूर्ण फाइलें मेरे पास आती हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी जी ने चुपचाप फाइल लौटा दी और संकेत समझ गए। इसके बाद अजीत कुमार सेठ को न सिर्फ कार्यकाल विस्तार दिया गया, बल्कि उन्हें मोदी जी का ही कैबिनेट सचिव नियुक्त कर दिया गया। मधु के मुताबिक इसका मतलब यह हुआ कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री कार्यालय की गतिविधियों और निर्णयों तक पहुंच बनी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मधु किश्वर का ट्वीट में कहना है कि अजीत कुमार सेठ को 2014 में विस्तार दिया गया और वे जून 2015 तक इस पद पर रहे। क्या आपने दुनिया में कहीं सुना है कि कोई प्रधानमंत्री अपने कट्टर विरोधी के सबसे भरोसेमंद वरिष्ठ अधिकारी को अपने ही पीएमओ का प्रमुख नियुक्त करे? रिटायरमेंट के बाद भी सेठ को एक और पुरस्कार के रूप में सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड (PESB) का अध्यक्ष बना दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक्टिविस्ट मधु किश्वर ने उसी ट्वीट में लिखा है कि यह संभवतः इस बात से समझा सकता है कि तमाम तीखी बयानबाजी के बावजूद, तथाकथित “56 इंच की छाती” वाले नेता ने सोनिया गांधी, रॉबर्ट वाड्रा, चिदंबरम और अन्य लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई। जबकि वे खुद उन पर विदेशी खातों और अन्य आरोप लगाते रहे हैं। यह सिर्फ सोनिया गांधी ही नहीं हैं, बल्कि भारत और विदेशों में कई अन्य लोग भी हैं जिनके पास “महामानव” के कथित काले कारनामों की जानकारी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>मोदी के 56 इंच सीने का मज़ाक</strong></p>
<p style="text-align:justify;"> ट्वीट में मधु लिखती हैं- इसी वजह से मोदी जी को भारत के सबसे असुरक्षित राजनेताओं में से एक बताया जाता है, और यही कारण है कि वे बड़े-बड़े दावे और आक्रामक बयानबाजी करते नजर आते हैं। भारत और दुनिया में भ्रष्ट राजनेताओं की कमी नहीं है, लेकिन खुद को संत की छवि में पेश करने की इतनी कोशिश शायद ही किसी ने की हो, जितनी “56 इंच” वाले नेता करते हैं। जनता को संबोधित करते समय उनकी आवाज में लगातार उत्तेजना और खुद को निस्वार्थ महात्मा के रूप में प्रस्तुत करने का दिखावा इसी का हिस्सा बताया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी वजह से मोदी जी को भारत के सबसे असुरक्षित राजनेताओं में से एक बताया जाता है, और यही कारण है कि वे बड़े-बड़े दावे और आक्रामक बयानबाजी करते नजर आते हैं। भारत और दुनिया में भ्रष्ट राजनेताओं की कमी नहीं है, लेकिन खुद को संत की छवि में पेश करने की इतनी कोशिश शायद ही किसी ने की हो, जितनी “56 इंच” वाले नेता करते हैं। जनता को संबोधित करते समय उनकी आवाज में लगातार उत्तेजना और खुद को निस्वार्थ महात्मा के रूप में प्रस्तुत करने का दिखावा इसी का हिस्सा बताया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मधु किश्वर ने इसी बात का विस्तार करते हुए लिखा है- “रिकॉर्ड के लिए, 2014 के चुनाव अभियान के दौरान जब मोदी जी ने पहली बार “56 इंच की छाती” का जिक्र किया, तो मैंने व्यक्तिगत रूप से उनसे कहा था, “नरेंद्र भाई, ऐसा मत कहिए, यह अशोभनीय लगता है।”</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर उनका जवाब था, “आम जनता को यह पसंद है, मधु जी। केवल आप जैसे बुद्धिजीवी ही परिष्कृत भाषण चाहते हैं।” अब, मोदी जी के समर्थकों से सवाल है कि वे अपने “हृदय सम्राट” से पूछें कि उन्होंने मनमोहन सिंह के कैबिनेट सचिव को अपने ही पीएमओ का शीर्ष अधिकारी क्यों नियुक्त किया? और जितना आप झूठे और अशोभनीय आरोपों से उकसाएंगे, उतनी ही और जानकारियां सामने आएंगी, जो आपके “हृदय सम्राट” को उजागर करेंगी। यानी मधु किश्वर ने भविष्य में और भी खुलासे की चेतावनी भी लगे हाथ दे दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:52:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुग्राम में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हरियाणा में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई- स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच कराए जाने की मांग वाली याचिका पर हरियाणा सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त (सीपी) और मामले की जांच कर रहे अधिकारी (आईओ) को मामले के सभी रिकॉर्ड के साथ 25 मार्च को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के मामले में हरियाणा पुलिस की जांच से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174007/supreme-court-strict-in-case-of-rape-of-four-year"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/supream-court3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हरियाणा में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई- स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच कराए जाने की मांग वाली याचिका पर हरियाणा सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त (सीपी) और मामले की जांच कर रहे अधिकारी (आईओ) को मामले के सभी रिकॉर्ड के साथ 25 मार्च को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के मामले में हरियाणा पुलिस की जांच से भी नाराजगी जाहिर की और इस पर हैरानी जताई। हरियाणा के एडवोकेट जनरल को राज्य में कार्यरत महिला आईपीएस अधिकारियों के नाम सुझाने का भी निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर हलफनामे से पता चलता है कि पीड़ित से न्यायालय में जिस तरह से पूछताछ की गई, वह भी बेहद परेशान करने वाली है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। याचिका में सीबीआई से जांच की मांग की गई है और हरियाणा पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पीड़िता के माता-पिता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा पीड़िता माता-पिता को एफआईआर वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने ये भी कहा कि जब मजिस्ट्रेट ने बच्ची के बयान दर्ज किए तो उस वक्त आरोपी भी अदालत के वेटिंग रूम में मौजूद थे, जबकि कानून आरोपी को पीड़िता के इतने करीब आने की इजाजत नहीं देता। </div><div style="text-align:justify;">    </div><div style="text-align:justify;">मजिस्ट्रेट ने 3 साल की रेप पीड़‍िता बच्‍ची से कहा- 'सच बोलो', सुप्रीम कोर्ट नाराज सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में तीन साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म मामले की जांच को लेकर हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई है. अदालत ने जांच के तरीके को ‘बेहद चौंकाने वाला’ और ‘असंवेदनशील’ करार देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोमवार हुई सुनवाई में कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने आरोपियों के बेहद करीब बैठाकर दर्ज किया गया. अदालत ने इसे प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है.यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जॉयमाला बागजी और विपुल पंचोली की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारी को 25 मार्च को पर्सनली पेश होने का निर्देश दिया है </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> का जांच अधिकारी (IO) पहले भी पॉक्सो (POCSO) केस में रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड हो चुका है और इस केस में भी परिवार को मामला आगे न बढ़ाने की सलाह दी गई. उन्होंने कोर्ट से मांग की कि गुरुग्राम पुलिस को जांच से हटाकर मामला या तो CBI को सौंपा जाए या विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए.</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस पर कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘चार साल की बच्ची के साथ इस तरह की असंवेदनशीलता बेहद चौंकाने वाली है.’ अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में शिकायत का इंतजार किए बिना भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी.</div><div style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि शुरुआत में महिला अधिकारी जांच कर रही थी, लेकिन उसके निलंबन के बाद एसएचओ ने जांच संभाली. हालांकि कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में हुई खामियों पर असंतोष जताते हुए मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 20:55:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी गैंगस्टर एक्ट के गंभीर परिणाम होते हैं, इसलिए प्रक्रिया का सख्ती से पालन अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कथित गैंगस्टर गब्बर सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने यह फैसला गैंग चार्ट तैयार करने की सिफारिश भेजने की प्रक्रिया में हुई प्रक्रियागत अनियमितताओं का हवाला देते हुए दिया, जिसमें गब्बर सिंह का नाम शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का स्पष्टीकरण खारिज करते हुए कोर्ट ने उस स्थापित सिद्धांत को दोहराया कि जब कोई कानून यह निर्धारित करता है कि कोई काम किसी विशेष तरीके से ही किया जाना चाहिए तो उसे उसी तरीके से किया जाना चाहिए, अन्यथा बिल्कुल नहीं;</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173877/up-gangster-act-has-serious-consequences-hence-strict-adherence-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/supream-court2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कथित गैंगस्टर गब्बर सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने यह फैसला गैंग चार्ट तैयार करने की सिफारिश भेजने की प्रक्रिया में हुई प्रक्रियागत अनियमितताओं का हवाला देते हुए दिया, जिसमें गब्बर सिंह का नाम शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का स्पष्टीकरण खारिज करते हुए कोर्ट ने उस स्थापित सिद्धांत को दोहराया कि जब कोई कानून यह निर्धारित करता है कि कोई काम किसी विशेष तरीके से ही किया जाना चाहिए तो उसे उसी तरीके से किया जाना चाहिए, अन्यथा बिल्कुल नहीं; खासकर तब जब किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता दांव पर हो।  जब कोई विशेष कार्य किया जाना हो, तो उसे उसी तरीके से किया जाना चाहिए जैसा कि निर्धारित है—यहां कानून द्वारा निर्धारित—अन्यथा उसे बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। विशेष रूप से तब, जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता दांव पर हो; एक ऐसी स्वतंत्रता जो सभी के लिए अनमोल है और जिसका उल्लंघन केवल कानून के अनुसार ही किया जा सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें उसने FIR को खारिज करने से इनकार किया था। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि गैंग चार्ट को तैयार करने और उसे आगे भेजने की प्रक्रिया में हुई स्पष्ट प्रक्रियागत अनियमितताओं ने FIR की पूरी बुनियाद को ही कमजोर (दोषपूर्ण) बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, "गैंग चार्ट के लिए यह अनिवार्य है कि उसमें नोडल अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की सिफारिशें शामिल हों, जिन्हें पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमोदित किया गया हो। ये सिफारिशें लिखित रूप में होनी चाहिए और अनुमोदन पर हस्ताक्षर होने चाहिए। इस मामले में न तो अनिवार्य सिफारिशें उपलब्ध हैं और न ही किसी के हस्ताक्षर मौजूद हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला बहराइच में 1986 के अधिनियम की धारा 3(1) के तहत दर्ज एक FIR से जुड़ा है। इस FIR में आरोप लगाया गया कि अपीलकर्ता (आरोपी) एक ऐसे गिरोह का हिस्सा था, जो जमीन पर अवैध कब्जा, रंगदारी वसूली और जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त था। अभियोजन पक्ष ने कानून के कड़े प्रावधानों को लागू करने के लिए पूरी तरह से इस "गैंग चार्ट" पर ही भरोसा किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:44:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉलेजियम सही जजों की रक्षा करने में नाकाम रहा है: जस्टिस दीपांकर दत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शनिवार को टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अतीत में उन जजों की रक्षा करने में नाकाम रहा है जिन्होंने साहस और ईमानदारी दिखाई; उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं से जज अपने करियर की तरक्की के बजाय नैतिकता को प्राथमिकता देने से हतोत्साहित हो सकते हैं।"</p>
<p>जस्टिस दत्ता 'न्यायिक शासन की नई कल्पना' (Reimagining Judicial Governance) विषय पर आयोजित 'पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन राष्ट्रीय सम्मेलन 2026' में बोल रहे थे। उन्होंने आग्रह किया कि कॉलेजियम के सदस्यों को इस मौके पर आगे आना चाहिए और अपने साथी जजों की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173874/justice-dipankar-dutta-says-collegium-has-failed-to-protect-true"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images-(1)5.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शनिवार को टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अतीत में उन जजों की रक्षा करने में नाकाम रहा है जिन्होंने साहस और ईमानदारी दिखाई; उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं से जज अपने करियर की तरक्की के बजाय नैतिकता को प्राथमिकता देने से हतोत्साहित हो सकते हैं।"</p>
<p>जस्टिस दत्ता 'न्यायिक शासन की नई कल्पना' (Reimagining Judicial Governance) विषय पर आयोजित 'पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन राष्ट्रीय सम्मेलन 2026' में बोल रहे थे। उन्होंने आग्रह किया कि कॉलेजियम के सदस्यों को इस मौके पर आगे आना चाहिए और अपने साथी जजों की रक्षा करनी चाहिए। </p>
<p>जस्टिस दत्ता सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के एक भाषण का ज़िक्र कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि जजों को सही फैसला लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए, भले ही इसकी कीमत उन्हें अपने प्रमोशन (पदोन्नति) के रूप में चुकानी पड़े या इससे सत्ता में बैठे लोग नाराज़ हो जाएं।</p>
<p>हाल ही में केरल हाई कोर्ट में आयोजित 'दूसरे टी.एस. कृष्णमूर्ति अय्यर स्मारक व्याख्यान' में बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा था: "भले ही जजों को पता हो कि अलोकप्रिय फैसलों की कीमत उन्हें अपने प्रमोशन, कार्यकाल में विस्तार (एक्सटेंशन) के रूप में चुकानी पड़ सकती है, लेकिन यह बात उनके फैसलों के आड़े नहीं आनी चाहिए।</p>
<p>आखिरकार, हर जज का अपना दृढ़ विश्वास, साहस और स्वतंत्रता ही सबसे ज़्यादा मायने रखती है।   काबिलियत, ईमानदारी, स्वभाव और मेहनत के आधार पर किया जाना चाहिए।  जुड़ाव, सामाजिक निकटता, लॉबिंग, अनौपचारिक सिफारिशें, या सत्ता में बैठे लोगों के साथ कथित नज़दीकी—चाहे वह न्यायिक हो, राजनीतिक हो या किसी और तरह की—को पूरी तरह से बाहर रखा जाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:40:35 +0530</pubDate>
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                <title>जेलों में भीड़भाड़ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा ताजा डाटा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>देशभर की जेलों में बढ़ती भीड़भाड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी जेलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। यह आदेश जेलों में भीड़भाड़ से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में न्यायमित्र नियुक्त वकील गौरव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के पास राज्यवार जेलों की ताजा स्थिति से जुड़ा कोई अपडेट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने स्पष्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173872/supreme-court-strict-on-overcrowding-in-jails-seeks-latest-data"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/supream-court2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>देशभर की जेलों में बढ़ती भीड़भाड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी जेलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। यह आदेश जेलों में भीड़भाड़ से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में न्यायमित्र नियुक्त वकील गौरव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के पास राज्यवार जेलों की ताजा स्थिति से जुड़ा कोई अपडेट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जेलों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें हर जेल की क्षमता, वहां बंद कैदियों की कुल संख्या (विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों), तथा प्रत्येक जेल में भीड़भाड़ का प्रतिशत शामिल होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों की जानकारी भी मांगी है।</p><p style="text-align:justify;">अदालत ने महिलाओं की जेलों पर विशेष ध्यान देते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं का ब्योरा भी मांगा । सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये सभी हलफनामे संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिव की ओर से दाखिल किए जाएं। इसके लिए अंतिम तारीख 18 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:36:24 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतें बढ़ेंगी, एमएसएमई पर चोट पहुंचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिमी एशिया में चल रही जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसे लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार का घेराव किया।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी- ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार चाहे इसे 'नॉर्मल' बताए, लेकिन हकीकत ये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173868/rahul-gandhi-attacks-modi-government-prices-of-petrol-diesel-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi-modi-government-congress.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिमी एशिया में चल रही जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसे लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार का घेराव किया।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी- ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार चाहे इसे 'नॉर्मल' बताए, लेकिन हकीकत ये है कि उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे। एमएसएमई को सबसे ज्यादा चोट लगेगी। रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे। एफआईआई का पैसा और तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने आगे कहा कि यानी हर परिवार की जेब पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है। और यह सिर्फ वक्त की बात है, चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल, और एलपीजी की कीमतें भी बढ़ा दी जाएंगी। मोदी सरकार के पास न दिशा है, न रणनीति, सिर्फ बयानबाजी है। सवाल यह नहीं कि सरकार क्या कह रही है, सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों राहुल गांधी ने कहा था कि दुनिया तेजी से बदल रही है। संकट हमारे दरवाजे पर है। अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो एलपीजी, पेट्रोल और डीजल करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन जाएंगे। सच्चाई साफ है, केंद्र सरकार ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा था कि कमजोर और दिशाहीन विदेश नीति ने देश को इस खतरनाक स्थिति में ला खड़ा किया है। अब समय है सच बताने का और देश को तैयार करने का। वरना इसकी कीमत भारत के आम लोग चुकाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:29:56 +0530</pubDate>
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