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                <title>नारी सशक्तिकरण - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>नारी सशक्तिकरण RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>“गार्गी और मैत्री जैसी शिक्षा प्राप्त करें छात्राएं&quot; : उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक </title>
                                    <description><![CDATA[स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज, आलमबाग लखनऊ में स्व. पं. दिनेश तिवारी जी के जन्मदिन को संस्थापक दिवस के रूप में मनाया गया। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने छात्राओं को गार्गी और मैत्री जैसी शिक्षा प्राप्त करने का संदेश दिया। पढ़ें पूरा समाचार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185128/%E2%80%9Cgirl-students-should-get-education-like-gargi-and-maitri-deputy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260811-wa0060.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज, स्नेह नगर, आलमबाग में मंगलवार को स्व. पं. दिनेश तिवारी जी के जन्मदिन को संस्थापक दिवस के रूप में भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शुरू हुआ।</p>
<p>मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री माननीय ब्रजेश पाठक जी रहे। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में अनिल सिंह (विधायक, पुरवा उन्नाव), अवनीश सिंह (विधान परिषद सदस्य), अनुराग अवस्थी (जिला अध्यक्ष भाजपा), बृज बहादुर पाठक (प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा), दयाशंकर सिंह (कैबिनेट मंत्री एवं परिवहन मंत्री), अधिवक्ता सुनील शुक्ला, मीडिया प्रभारी ब्रजेश शुक्ला, जितेन्द्र प्रताप सिंह एवं पारस दुबे आदि उपस्थित रहे।<br />स्वतंत्र ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के अंतर्गत आने वाले सभी कॉलेजों की छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की शुरुआत श्री गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुई। मुख्य आकर्षण ‘देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, नारी सशक्तिकरण एवं संस्कृति’ पर आधारित प्रस्तुतियां रहीं। कृष्ण लीला नृत्य नाटिका सहित विभिन्न नृत्यों में छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया।</p>
<p>उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी ने कृष्ण लीला झांकी कार्यक्रम की छात्राओं को पुरस्कृत किया। साथ ही इसकी तैयारी में सहयोग करने वाली शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।</p>
<p>अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शास्त्रों में अपने पति ऋषि याज्ञवल्क्य को हराने वाली गार्गी एवं मैत्री जैसी शिक्षा प्राप्त करें। उन्होंने सभी छात्राओं को आशीस्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज</p>
<p>संस्थापक दिवस</p>
<p>ब्रजेश पाठक</p>
<p>उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश</p>
<p>आलमबाग लखनऊ</p>
<p>गार्गी मैत्री शिक्षार्वाद प्रदान करते हुए कहा कि शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।</p>
<p>इस अवसर पर स्वतंत्र गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्रबंधक श्रीमती शोभा तिवारी, निदेशक श्री विनीत तिवारी, श्री अंकित तिवारी, श्री अंकुर तिवारी, प्राचार्या डॉ. रीना अस्थाना, स्वतंत्र गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. प्रतीक्षा श्रीवास्तव सहित शिक्षकगण, कर्मचारियों और अभिभावकों की बड़ी संख्या मौजूद रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 20:12:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[सचिन बाजपेई]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गणगौर - शिव-पार्वती के अनन्य प्रेम का पर्व बने नारी अस्मिता का उत्सव ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना विशिष्ट महत्व है। ये पर्व केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक भी हैं। इन्हीं में से एक है गणगौर एक ऐसा पावन उत्सव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण और वैवाहिक आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से मध्यप्रदेश और राजस्थान में व्यापक रूप से प्रचलित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई हिस्सों में भी इसकी गूंज सुनाई देती है।</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173819/gangaur-the-festival-of-exclusive-love-of-shiva-parvati-became"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना विशिष्ट महत्व है। ये पर्व केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक भी हैं। इन्हीं में से एक है गणगौर एक ऐसा पावन उत्सव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण और वैवाहिक आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से मध्यप्रदेश और राजस्थान में व्यापक रूप से प्रचलित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई हिस्सों में भी इसकी गूंज सुनाई देती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर’ शब्द स्वयं में ही इस पर्व के सार को समेटे हुए है ‘गण’ अर्थात भगवान शिव और ‘गौर’ अर्थात माता पार्वती। यह शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का उत्सव है। इस दिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की स्थिरता के लिए व्रत और पूजा करती हैं। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की कामना से माता पार्वती की आराधना करती हैं। निस्संदेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पर्व नारी की श्रद्धा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था और पारिवारिक मूल्यों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर उत्सव की शुरुआत होलिका दहन से होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब महिलाएं जवारे बोती हैं। कई स्थानों पर यह उत्सव </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों तक चलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कहीं इसकी अवधि संक्षिप्त भी होती है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेहंदी रचाती हैं और लोकगीतों व नृत्यों के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। अंतिम दिन सुसज्जित प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाती है और विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। गांव-गांव में मेले और सांस्कृतिक आयोजन इस पर्व को सामुदायिक उत्सव का रूप दे देते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक टेक्नोलॉजी से लेंस इस युग में सवाल यह है कि क्या गणगौर का अर्थ केवल “अच्छे पति की कामना” तक सीमित रह जाना चाहिए </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक समय में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब समाज तीव्र गति से बदल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आवश्यक हो जाता है कि हम इस पर्व के मूल संदेश को नए दृष्टिकोण से समझें।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर का वास्तविक भाव केवल वैवाहिक सुख तक सीमित नहीं है। यह नारी के आत्मबल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी इच्छाओं और उसके अस्तित्व के सम्मान का भी प्रतीक हो सकता है और होना चाहिए। यदि इस पर्व को केवल श्रृंगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेहंदी और परंपरागत अनुष्ठानों तक सीमित कर दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके व्यापक सामाजिक संदेश के साथ अन्याय होगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता इस बात की है कि गणगौर को नारी सशक्तिकरण के एक सशक्त माध्यम के रूप में पुनर्परिभाषित किया जाए। यह पर्व हमें याद दिला सकता है कि समर्पण के साथ-साथ सम्मान और समानता भी उतनी ही आवश्यक है। प्रेम तभी सार्थक होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसमें आत्मसम्मान और अधिकारों की बराबरी शामिल हो।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों और शहरों में आयोजित मेलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गीतों और उत्सवों के बीच हमें इस पर्व की आत्मा को नहीं भूलना चाहिए समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम और संतुलन। लेकिन यह संतुलन तभी पूर्ण होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसमें समानता और गरिमा का समावेश हो।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर केवल अतीत की परंपरा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान और भविष्य के समाज को दिशा देने वाला सांस्कृतिक अवसर है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसे केवल एक अनुष्ठान बनाए रखें या इसे नारी गरिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समानता और सामाजिक प्रगति के उत्सव में परिवर्तित करें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center"><strong>अरविंद रावल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:42:56 +0530</pubDate>
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