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                <title>Hindu festival news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Hindu festival news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गुरु पूजन के साथ पूर्णिमा पर कानपुर के गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>आज यहां बुधवार को गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर छात्रों के साथ ही गुरु में आस्था और विश्वास रखने वाले लोगों ने भी अपने गुरुओं की पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आज गुरु पूर्णिमा के इस मौके पर विभिन्न धार्मिक संस्थाओं समेत स्कूलों में भी विशेष आयोजन किए गए। वहीं दूसरी गुरु पूर्णिमा के इस पावन मौके पर परमट और बिठूर गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्त आज सुबह से ही बड़ी संख्या में गंगा घाट पहुंचे और गंगा में डुबकी लगाने के साथ ही अपने गुरु का ध्यान करते हुए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184239/crowd-of-devotees-gathered-at-ganga-ghats-of-kanpur-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260728-wa01051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>आज यहां बुधवार को गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर छात्रों के साथ ही गुरु में आस्था और विश्वास रखने वाले लोगों ने भी अपने गुरुओं की पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज गुरु पूर्णिमा के इस मौके पर विभिन्न धार्मिक संस्थाओं समेत स्कूलों में भी विशेष आयोजन किए गए। वहीं दूसरी गुरु पूर्णिमा के इस पावन मौके पर परमट और बिठूर गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्त आज सुबह से ही बड़ी संख्या में गंगा घाट पहुंचे और गंगा में डुबकी लगाने के साथ ही अपने गुरु का ध्यान करते हुए पूजा-अर्चना भी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के खासा इंतजाम देखे गए। यहां पुलिस वालों के अलावा गोताखोर भी तैनात रहे।  इसी के साथ गंगा घाटों पर लोगों की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम भी रहे। नहाते समय कोई गंगा में डूब ना जाए। इसके लिए गहरे पानी से पहले बांस-बल्ली लगाई गई थी। आज गुरु पूर्णिमा पर्व पर शिवली के शोभन मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताते चलें कि यहां शोभन आश्रम की आधारशिला रखने वाले ब्रह्मलीन महाराज रघुनंदन दास जी महराज और शोभन को विकसित करने वाले ब्रह्मलीन विरिक्ततानंद जी महाराज के प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में अनेकों भक्त मौजूद हैं। दूसरी ओर छात्रों ने भी अपने गुरुओं के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। इसके लिए स्कूल कॉलेज में भीसमारोह आयोजित किए गए आज गुरु पूर्णिमा और इसके बाद सावन के पहले सोमवार को लेकर तगड़ी तैयारियां पहले से ही की जा चुकी हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 19:42:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सनातनी त्योहार,वट सावित्री व्रत को लेकर महिला शिक्षक शिक्षक संघ पदाधिकारियों ने ज्ञापन दिया </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली।</strong> महिला शिक्षक संघ बरेली की जिलाध्यक्ष राखी सक्सेना के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा अधिकारी को सनातन धर्म के पावन पर्व “वट सावित्री व्रत”के लिए एक दिन का विशेष अवकाश (महिला अवकाश) घोषित किए जाने को लेकर ज्ञापन सौंपा,ज्ञापन में मांग की , 16 मई 2026 को विभिन्न जनपदों में मनाए जाने वाले सनातन धर्म के पावन पर्व “वट सावित्री व्रत” को धूम धाम से मनाने के लिए महिला शिक्षकों एवं कार्मिकों को उक्त दिवस का विशेष अवकाश घोषित किया जाए, जिससे वे श्रद्धापूर्वक सावित्री व्रत एवं पूजा-अर्चना संपन्न कर सकें।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संघ ने दिव्यांग, अस्वस्थ या गंभीर बीमारियों से ग्रस्त</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179250/women-teachers-association-officials-gave-a-memorandum-regarding-the-sanatani"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/2.-----------------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली।</strong> महिला शिक्षक संघ बरेली की जिलाध्यक्ष राखी सक्सेना के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा अधिकारी को सनातन धर्म के पावन पर्व “वट सावित्री व्रत”के लिए एक दिन का विशेष अवकाश (महिला अवकाश) घोषित किए जाने को लेकर ज्ञापन सौंपा,ज्ञापन में मांग की , 16 मई 2026 को विभिन्न जनपदों में मनाए जाने वाले सनातन धर्म के पावन पर्व “वट सावित्री व्रत” को धूम धाम से मनाने के लिए महिला शिक्षकों एवं कार्मिकों को उक्त दिवस का विशेष अवकाश घोषित किया जाए, जिससे वे श्रद्धापूर्वक सावित्री व्रत एवं पूजा-अर्चना संपन्न कर सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संघ ने दिव्यांग, अस्वस्थ या गंभीर बीमारियों से ग्रस्त शिक्षिकाएं, गर्भवती शिक्षिकाएं को जनगणना ड्यूटी से मुक्त करने तथा समायोजन में महिला शिक्षिकाओं से विकल्प लेने की अपील की गयी। ज्ञापन देने वालों में जिलामंत्री संगीता मित्तल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपाली सक्सेना, मोना सिंह, शैली कपूर आदि पदाधिकारी मौजूद रहीं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 21:20:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाथी, घोड़ा, ऊंट के साथ भव्य 21 सौ कलश यात्रा निकाली गई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।  </strong>जनपद  बलरामपुर के मधपुर पकड़ी गांव में आयोजित दस दिवसीय श्रीराम कथा के शुभारंभ अवसर पर मंगलवार को भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। सुबह करीब 10 बजे से कथा स्थल से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा सेमरी, बेलवा और बिस्कोहर बस स्टाप होते हुए बूढ़ी राप्ती नदी के परसोहन घाट पर जा पहुंची। लगभग दो किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालुओं ने करीब सात किलोमीटर की पैदल दूरी तय की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शोभायात्रा में 21 सौ कलश शामिल रहे,  महिलाओं और बालिकाओं ने सिर पर कलश रखकर पूरे श्रद्धा भाव के साथ  कलश यात्रा में भाग लिया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176899/grand-21-hundred-kalash-yatra-was-taken-out-with-elephant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1776784276567.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।  </strong>जनपद  बलरामपुर के मधपुर पकड़ी गांव में आयोजित दस दिवसीय श्रीराम कथा के शुभारंभ अवसर पर मंगलवार को भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। सुबह करीब 10 बजे से कथा स्थल से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा सेमरी, बेलवा और बिस्कोहर बस स्टाप होते हुए बूढ़ी राप्ती नदी के परसोहन घाट पर जा पहुंची। लगभग दो किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालुओं ने करीब सात किलोमीटर की पैदल दूरी तय की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोभायात्रा में 21 सौ कलश शामिल रहे,  महिलाओं और बालिकाओं ने सिर पर कलश रखकर पूरे श्रद्धा भाव के साथ  कलश यात्रा में भाग लिया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत और पुष्पवर्षा की गई, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। यात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट और सुसज्जित रथों पर भगवान श्रीराम की आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं, हेलीकॉप्टर से की गई पुष्पवर्षा ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजक समिति के धनीराम प्रजापति ने बताया कि श्रीराम कथा का आयोजन 30 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें अवधपुरी से पधारे जगतगुरु श्री दिनेशाचार्य जी महाराज श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराएंगे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई थी। इस अवसर पर पंडित दुर्गेश शुक्ला, पूर्व विधायक शैलेन्द्र प्रताप सिंह , बिस्कोहर चेयर मैन अजय गुप्ता, फतेह बहादुर सिंह उर्फ पप्पू सिंह,नृपेन्द्र सिंह, राम नरेश पासवान, रक्षा राम प्रजापति, पंकज कुमार प्रजापति, धर्मेन्द्र शुक्ला, मनी राम प्रजापति, सियाराम प्रजापति, आदि लोग सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 21:41:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>धूमधाम से मनाई गई  परशुराम  जयंती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> उसका बाजार कस्बा के सुभाष नगर वार्ड में समाज सेवी राज नारायण पाण्डेय की अगुवाई में रविवार को  भगवान परशुराम की जयंती धूमधाम से बनाई गई। इस अवसर पर उन्होंने कहा की अक्षय तृतीया का पर्व  हर साल वैशाख मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का खास महत्व होता है। क्योंकि इसी दिन भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जो कि पृथ्वी पर अन्याय और अधर्म का नाश करने के लिए त्रेतायुग में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176669/parshuram-jayanti-celebrated-with-pomp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1776609047880.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> उसका बाजार कस्बा के सुभाष नगर वार्ड में समाज सेवी राज नारायण पाण्डेय की अगुवाई में रविवार को  भगवान परशुराम की जयंती धूमधाम से बनाई गई। इस अवसर पर उन्होंने कहा की अक्षय तृतीया का पर्व  हर साल वैशाख मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का खास महत्व होता है। क्योंकि इसी दिन भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जो कि पृथ्वी पर अन्याय और अधर्म का नाश करने के लिए त्रेतायुग में अवतरित हुए थे। ज्ञान, तप और शक्ति के प्रतीक माने जाने वाले भगवान परशुराम अष्टचिरंजीवी में से एक हैं और हर युग में पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कमल सोनी, प्रह्लाद, अंकित, मनीष अग्रहरी, सत्य प्रकाश वर्मा, अंकित पाण्डेय, शिव कुमार जायसवाल, शिव कुमार आदि रहे। भनवापुर।भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के फत्तेपुर गांव निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख पंडित चंद्र प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में पड़िया गांव स्थित भगवान परशुराम मंदिर पर परशुराम जयंती के अवसर पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। बताया जाता है कि वर्ष 1982 में जब पंडित चंद्र प्रकाश मिश्रा पहली बार भनवापुर के ब्लॉक प्रमुख बने थे, उसी वर्ष उन्होंने पड़िया गांव में बरम बाबा स्थान के उत्तर दिशा में भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापित कराई थी। तभी से इस मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती आ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित भंडारे में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और पूजा-अर्चना में भाग लिया। इस दौरान भूपेंद्र मिश्र, कुंवर मिश्र, सच्चिदानंद पांडे, सत्यदेव मिश्र, दीनानाथ मिश्रा, दद्दन पांडे, रामफेर तिवारी, बब्बू मिश्रा, रघुराज तिवारी, रूपनारायण सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज एवं अन्य वर्गों के लोग मौजूद रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बर्डपुर /पराक्रम, धर्मनिष्ठा और न्याय के प्रतीक , भगवान विष्णु जी के छठवें अवतार,भगवान परशुराम की जयंती के पावन अवसर पर रविवार को नगर पंचायत कपिलवस्तु क्षेत्र अंतर्गत वार्ड सुद्दोधननगर के टोला शिवपुर में भगवान परशुराम की जयंती पर उपस्थित लोगों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस दौरान भाजपा नेता/ नामित सभासद नितेश पाण्डेय ने कहा कि भगवान परशुराम की कृपा से सभी के जीवन में साहस और सफलता का संचार हो तथा हर अन्याय के विरुद्ध सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की शक्ति प्राप्त हो यही प्रार्थना किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस दौरान श्यामबिहारी मिश्र, शिवम मिश्र,  आशीष मिश्र, राकेश मिश्रा दुर्गेश पाण्डेय बदमली मिश्र अमित मिश्र बलदेव मिश्र गुड्डू मिश्र अंगद मिश्र, रजत उपाध्याय, दुर्गेश कुमार, अश्वनी,सत्यम,संतोष मिश्र,भोपाल मिश्र आदि ने भगवान परशुराम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिस्कोहार  / नगर पंचायत बिस्कोहर में रविवार को अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम जयंती परशुराम तिराहा वार्ड नंबर 15 विश्वनाथनगर में मनाते हुए पूर्व मंत्री डॉ सतीश  चंद्र द्विवेदी व नगर पंचायत बिस्कोहर के नगर अध्यक्ष अजय गुप्ता एवं सभासद पदाधिकारी  बड़े धूमधाम से मनाते हुए  पूर्व मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी  ने कहा कि हमारे जगत में भगवान परशुराम ने सभी का कल्याण किया और अपने महत्त्व पर सुझाव बताया। इस मौके पर पूर्व मंत्री डॉ  सतीश चंद्र द्विवेदी, नगर अध्यक्ष अजय गुप्ता, सभासद सत्यनारायण दुबे निर्पेंद्र सिंह, सूर्य मणि चौधरी, अमित कुमार पाण्डेय, राम नरेश पासवान, शिव जी तिवारी, विद्यासागर गुप्ता, सत्य प्रकाश बाबा, घनश्याम मौर्य, पिंकू मोदनवाल, अटल प्रजापति, लालू नाई, मगरे मौर्य, तोलन गुप्ता, राम हेरन शास्त्री, भोला पाण्डेय, विनोद पासवान, अजीत मौर्य, अमन चौरसिया , कुटूर पाण्डेय, सदा नंद शुक्ला, अनूप पांड, बैज नाथ गुप्ताआदि लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 21:21:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>गणगौर - शिव-पार्वती के अनन्य प्रेम का पर्व बने नारी अस्मिता का उत्सव ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना विशिष्ट महत्व है। ये पर्व केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक भी हैं। इन्हीं में से एक है गणगौर एक ऐसा पावन उत्सव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण और वैवाहिक आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से मध्यप्रदेश और राजस्थान में व्यापक रूप से प्रचलित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई हिस्सों में भी इसकी गूंज सुनाई देती है।</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173819/gangaur-the-festival-of-exclusive-love-of-shiva-parvati-became"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images9.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना विशिष्ट महत्व है। ये पर्व केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक भी हैं। इन्हीं में से एक है गणगौर एक ऐसा पावन उत्सव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण और वैवाहिक आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से मध्यप्रदेश और राजस्थान में व्यापक रूप से प्रचलित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई हिस्सों में भी इसकी गूंज सुनाई देती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर’ शब्द स्वयं में ही इस पर्व के सार को समेटे हुए है ‘गण’ अर्थात भगवान शिव और ‘गौर’ अर्थात माता पार्वती। यह शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का उत्सव है। इस दिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की स्थिरता के लिए व्रत और पूजा करती हैं। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की कामना से माता पार्वती की आराधना करती हैं। निस्संदेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पर्व नारी की श्रद्धा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था और पारिवारिक मूल्यों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर उत्सव की शुरुआत होलिका दहन से होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब महिलाएं जवारे बोती हैं। कई स्थानों पर यह उत्सव </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों तक चलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कहीं इसकी अवधि संक्षिप्त भी होती है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेहंदी रचाती हैं और लोकगीतों व नृत्यों के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। अंतिम दिन सुसज्जित प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाती है और विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। गांव-गांव में मेले और सांस्कृतिक आयोजन इस पर्व को सामुदायिक उत्सव का रूप दे देते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक टेक्नोलॉजी से लेंस इस युग में सवाल यह है कि क्या गणगौर का अर्थ केवल “अच्छे पति की कामना” तक सीमित रह जाना चाहिए </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक समय में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब समाज तीव्र गति से बदल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आवश्यक हो जाता है कि हम इस पर्व के मूल संदेश को नए दृष्टिकोण से समझें।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर का वास्तविक भाव केवल वैवाहिक सुख तक सीमित नहीं है। यह नारी के आत्मबल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी इच्छाओं और उसके अस्तित्व के सम्मान का भी प्रतीक हो सकता है और होना चाहिए। यदि इस पर्व को केवल श्रृंगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेहंदी और परंपरागत अनुष्ठानों तक सीमित कर दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके व्यापक सामाजिक संदेश के साथ अन्याय होगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता इस बात की है कि गणगौर को नारी सशक्तिकरण के एक सशक्त माध्यम के रूप में पुनर्परिभाषित किया जाए। यह पर्व हमें याद दिला सकता है कि समर्पण के साथ-साथ सम्मान और समानता भी उतनी ही आवश्यक है। प्रेम तभी सार्थक होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसमें आत्मसम्मान और अधिकारों की बराबरी शामिल हो।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों और शहरों में आयोजित मेलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गीतों और उत्सवों के बीच हमें इस पर्व की आत्मा को नहीं भूलना चाहिए समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम और संतुलन। लेकिन यह संतुलन तभी पूर्ण होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसमें समानता और गरिमा का समावेश हो।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणगौर केवल अतीत की परंपरा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान और भविष्य के समाज को दिशा देने वाला सांस्कृतिक अवसर है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसे केवल एक अनुष्ठान बनाए रखें या इसे नारी गरिमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समानता और सामाजिक प्रगति के उत्सव में परिवर्तित करें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center"><strong>अरविंद रावल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:42:56 +0530</pubDate>
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