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                <title> kisan news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description> kisan news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ग्रामीण विकास की नई दिशा: रोजगार से समृद्धि तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के ग्रामीण विकास की कहानी समय के साथ लगातार बदलती रही है। कभी रोजगार गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य केवल गरीब परिवारों को अस्थायी राहत देना था, लेकिन अब देश गांवों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी सोच के साथ नया ग्रामीण रोजगार एवं विकास ढांचा सामने आया है, जिसका उद्देश्य केवल मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी विकास की नींव तैयार करना है।</p>
<p>नई व्यवस्था में रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक करने का प्रस्ताव ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179217/new-direction-of-rural-development-journey-from-employment-to-prosperity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/kishan.png" alt=""></a><br /><p>भारत के ग्रामीण विकास की कहानी समय के साथ लगातार बदलती रही है। कभी रोजगार गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य केवल गरीब परिवारों को अस्थायी राहत देना था, लेकिन अब देश गांवों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी सोच के साथ नया ग्रामीण रोजगार एवं विकास ढांचा सामने आया है, जिसका उद्देश्य केवल मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी विकास की नींव तैयार करना है।</p>
<p>नई व्यवस्था में रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक करने का प्रस्ताव ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे खेतिहर मजदूरों, छोटे किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अतिरिक्त आय का सहारा मिलेगा। साथ ही मजदूरी भुगतान को समयबद्ध और सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था पारदर्शिता को मजबूत करेगी।</p>
<p>इस नई योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोजगार को गांवों के विकास कार्यों से जोड़ा गया है। अब केवल अस्थायी काम कराने के बजाय जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था, ग्रामीण सड़कें, भंडारण केंद्र, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे जैसे कार्यों पर जोर दिया जाएगा। इससे गांवों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियां भी तैयार होंगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाएं कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगी, जबकि ग्रामीण बाजार और भंडारण सुविधाएं किसानों की आय में सुधार ला सकती हैं। इसके अलावा छोटे स्तर के ग्रामीण उद्योगों और स्थानीय उद्यमों को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण होगी। गांव स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यों का चयन होगा। इससे योजनाओं में स्थानीय भागीदारी बढ़ेगी और विकास अधिक प्रभावी बन सकेगा।</p>
<p>तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, भू-टैगिंग, सामाजिक ऑडिट और ऑनलाइन निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भ्रष्टाचार कम करने और जवाबदेही बढ़ाने में मदद करेंगी।</p>
<p>ग्रामीण भारत आज तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में केवल रोजगार देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। गांवों को मजबूत बुनियादी ढांचा, बेहतर कृषि व्यवस्था और स्थानीय आर्थिक अवसरों की जरूरत है। यही कारण है कि यह नया मॉडल रोजगार योजना से आगे बढ़कर ग्रामीण समृद्धि का आधार बनने की कोशिश करता दिखाई देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:27:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कहने को तो यहां पर नहरो का जाल विछा है पर नहरों में पानी नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बरेली। </strong>भदपुरा विकासखंड क्षेत्र की सभी शारदा खंड की नहरों में पानी न आने से किसान परेशान हो गए हैं। सरसों गेहूं गन्ने की फसल खेतों में पानी की को तरस रही हैं। इससे किसानों की चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। उधर गन्ने के भुगतान न होने से बच्चों के स्कूल का खर्चा घरेलू काम काज के लिए रुपए की जरूरत पूरी नहीं होती है। ऐसे में किसान खेतों में पानी कहा से लगाए। नहरों में पानी न आने जाने से क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत किसानों का नुक़सान हो जाएगा। अब तक कुछ नहरों की सफाई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147021/it-is-said-that-there-is-a-network-of-canals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/कहने-को-तो-यहां-पर-नहरो-का-जाल-विछा-है-पर-नहरों-में-पानी-नहीं .jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बरेली। </strong>भदपुरा विकासखंड क्षेत्र की सभी शारदा खंड की नहरों में पानी न आने से किसान परेशान हो गए हैं। सरसों गेहूं गन्ने की फसल खेतों में पानी की को तरस रही हैं। इससे किसानों की चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। उधर गन्ने के भुगतान न होने से बच्चों के स्कूल का खर्चा घरेलू काम काज के लिए रुपए की जरूरत पूरी नहीं होती है। ऐसे में किसान खेतों में पानी कहा से लगाए। नहरों में पानी न आने जाने से क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत किसानों का नुक़सान हो जाएगा। अब तक कुछ नहरों की सफाई तक नहीं की गई है, लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं।</div>
<div> </div>
<div> खेतों में इस वक्त सरसों गेहूं की फसल तैयार की जा रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी की अत्यधिक जरूरत है। उनका कहना है कि नहरों की सफाई नहीं हुई है। ऐसे में पानी छोड़े जाने पर नहर कटने की संभावना अधिक रहेगी। और जहां सफाई हो गई है उसमें फिर से घास उग आई है। लेकिन पानी नहीं आया।</div>
<div> </div>
<div>किसान कांता प्रसाद, सुनील कुमार ,रमेश पाल, रामकुमार अमरसिंह वृदांवन, छेदा लाल आदि का कहना है कि जब जरूरत होती है तो नहर में पानी बिल्कुल नहीं आता है, जबकि किसानों को पानी की जरूरत नहीं होती है, तब नहर में पानी छोड़ा जाता है। बेमौसम पानी छोड़ जाने से फसलों को क्षति पहुंचती है।</div>
<div> </div>
<div>इस समय नहर में पानी नहीं होने से किसान सिंचाई नहीं कर पाते पर पानी नहीं  हैं। वही जंगली जानवर भी गांव की तरफ पानी की तलाश में आ जाते हैं इस समय बोरिंग से किसानों को खेत की सिंचाई करनी पड़ रही है। शारदा नहर के रजबाहे नवदिया,कुंवरपुर तुलसी पट्टी, सिठौरा, नकटी नारायणपुर होते हुए निकलती हैं। वही क्षेत्र में दूसरा रजवाहा परतीतपुर, कटैया आत्मा राम, सरोरा, डडिया नज्मुलनीशा, ढकिया बर्कली साहब होते हुए तिगरी निकलती है। लेकिन न तो नहर की सफाई हुई है न ही किसी नहर में अब तक पानी आया है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 17:43:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान गोष्ठी में मोटे अनाज पर चर्चा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div>  <strong>सीतापुर </strong>3 मार्च 2024 उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार योजनांतर्गत श्रीअन्न /मोटाअनाज जागरुकता कार्यक्रम  ग्राम रैंथा, विकासखंड -चिनहट में श्री रामचंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक विकास अधिकारी, काकोरी  विजय शंकर मिश्रा टी  ए सी प्रदीप सैनी ,प्रमोद कुमार, बी टी एम सतीश चंद तिवारी, कृष्ण अवतार एटीएम विकासखंड चिनहट, के अतिरिक्त वरि .प्राविधिक सहायक प्रथम वीरेंद्र कुमार वर्मा व सलाहकार (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन) सुरेश कुमार राजपूत व अन्य कार्मिकों के  साथ 120 कृषकों द्वारा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया। उक्त कार्यक्रम में कृषकों को सुरेश कुमार राजपूत सलाहकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139131/discussion-on-coarse-grains-in-farmers-seminar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240303-wa0002.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div> <strong>सीतापुर </strong>3 मार्च 2024 उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार योजनांतर्गत श्रीअन्न /मोटाअनाज जागरुकता कार्यक्रम  ग्राम रैंथा, विकासखंड -चिनहट में श्री रामचंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक विकास अधिकारी, काकोरी  विजय शंकर मिश्रा टी  ए सी प्रदीप सैनी ,प्रमोद कुमार, बी टी एम सतीश चंद तिवारी, कृष्ण अवतार एटीएम विकासखंड चिनहट, के अतिरिक्त वरि .प्राविधिक सहायक प्रथम वीरेंद्र कुमार वर्मा व सलाहकार (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन) सुरेश कुमार राजपूत व अन्य कार्मिकों के  साथ 120 कृषकों द्वारा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया। उक्त कार्यक्रम में कृषकों को सुरेश कुमार राजपूत सलाहकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन द्वारा श्री अन्न के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए श्री अन्न की खेती, उत्पादन, पोषक तत्वों एवं उपभोग करने से होने वाले लाभों के बारे में चर्चा की गई।</div>
<div> </div>
<div>विजय शंकर मिश्रा सहायक विकास अधिकारी द्वारा जायद में उगाई जाने वाली फसलों की खेती के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञ डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि निरंतर कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ किसानों को मिल रहा है उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विधिवत् चर्चा की। वरिष्ठ प्राविधिक सहायक प्रथम वीरेंद्र कुमार वर्मा द्वारा जनपद में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।  पी एम किसान सम्मान निधि से संबंधित कृषकों की समस्याओं का मौके पर समस्या समाधान किया गया।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 16:36:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुशखबरीः इस बार बंटाईदार भी सरकारी क्रय केन्द्र पर बेच सकेंगे गेहूं</title>
                                    <description><![CDATA[-एक मार्च से शुरू हो गये जनपद में 89 क्रय केन्द्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139076/good-news-this-time-sharecroppers-will-also-be-able-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/01-uphmathura-01.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><strong>मथुरा।</strong> सरकार ने इस बार किसानों से गेहूं खरीद के लिए पुख्ता और सुविधाजनक व्यवस्था की है। जनपद में एक मार्च से कुल 89 क्रय केन्द्र स्थापित कर दिये गये हैं। जिसमें सदर तहसील में 18, गोवर्धन तहसील में 13, छाता तहसील में 20, महावन में 19, मांट में 19 कुल 89 क्रय केन्द्र बनाये गये हैं। विपणन शाखा के 10, पीसीयू के 11, पीसीएफ के 61, भारतीय खाद्य निगम के पांच तथा मंडी समिति के दो क्रय केन्द्र स्थापित किये गये हैं।</p>
<p>इस बार सरकार ने गैहूं का समर्थन मूल्य 2275 रुपये तय किया है जबकि 20 रुपये उतराई और छनाई के लिए तय किये हैं। पिछले साल समर्थन मूल्य 2125 रुपये थे जिसमें इस बार 150 रुपये की बडी बढत की गई है। सरकार ने इस बार सुविधा की है कि बंटाईदार भी क्रय केन्द्र पर अपना गेहूं बेच सकता है। इससे पहले बंटाईदार को यह सुविधा नहीं मिलती थी। पैसा भी बंटाईदार के ही खाते में आयेगा लेकिन उसे खेत की खतौनी रजिस्ट्रेशन में लगानी होगी और क्रय केन्द्र पर पहुंचने पर मूल किसान के एवज में एफिडेविट भी लगाना होगा।<br /><br /><strong>मौसम रहा है अनुकूल, होगा बंपर उत्पादन</strong><br />इस बार मौसम गेहूं की फसल के अनुकूल रहा है। करीब 40 दिन की कड़ाके सर्दी इस बार पडी है। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उत्पादन अच्छा होगा। जनपद में इस बार गैहूं की फसल का रकवा  करीब 194250 हेक्टेयर रहा है, यानी कि गेहूं की बुआई बडे क्षेत्रफल में हुई है। कुल संभावित उत्पादन 729082 मीट्रिक टन आंका जा रहा है। जबकि औसत उत्पादकता 37.53 हेक्टेयर प्रति क्विंटल होने की संभावना है।<br /> <br /><strong>वर्जन</strong><br />गेहूं क्रय केन्द्र स्थापित कर दिये गये हैं। सभी केंद्रों पर पूरी व्यवस्था की गई है हालांकि जनपद में एक अप्रैल के आसपास ही गेहूं की आवक क्रय केन्द्रों पर प्रारंभ होगी। हमने सभी तैयारियां सुनिश्चित कर ली हैं। इस बार बंटाईदार को भी सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने की सुविधा दी गई है।<br />-संतोष कुमार जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी मथुरा<br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Mar 2024 16:09:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा किसानों को दिया गया प्रशिक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>मऊ</strong> जनपद में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा मऊ नगर स्थित रोज गार्डन में किसानों की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई । इस कार्यशाला में "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" माइक्रो इरिगेशन योजना में ड्रिप इरिगेशन, मिनी और पोर्टेबल स्प्रिंकलर की सिंचाई विधि के बारे में किसानों को अवगत कराया गया। प्रशिक्षण में कम लागत में  अधिक मुनाफा की खेती कैसे की जाए और साथ ही साथ जल संरक्षण कैसे किया जाए, इस बारे में किसानों को विस्तार से बताया गया।</div>
<div>  </div>
<div>जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त ने  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में  पर ड्रॉप मोर क्रॉप माइक्रो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138991/training-given-to-farmers-by-horticulture-and-food-processing-department"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/img-20240226-wa0016.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>मऊ</strong> जनपद में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा मऊ नगर स्थित रोज गार्डन में किसानों की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई । इस कार्यशाला में "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" माइक्रो इरिगेशन योजना में ड्रिप इरिगेशन, मिनी और पोर्टेबल स्प्रिंकलर की सिंचाई विधि के बारे में किसानों को अवगत कराया गया। प्रशिक्षण में कम लागत में  अधिक मुनाफा की खेती कैसे की जाए और साथ ही साथ जल संरक्षण कैसे किया जाए, इस बारे में किसानों को विस्तार से बताया गया।</div>
<div> </div>
<div>जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त ने  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में  पर ड्रॉप मोर क्रॉप माइक्रो इरिगेशन कार्यक्रम में 90  प्रतिशत तक अनुदान और योजना में पंजीकरण के साथ लाभ लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज के सत्र में 50 किसानों के लिए एक वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया, जिसमें किसानों को योजना से जुड़ी हुई जानकारी तथा योजना का लाभ वो कैसे लेंगे, इस बारे में बताया गया। इसके साथ ही ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई को डेमो चलवा कर लाइव प्रदर्शन भी दिखाया गया।</div>
<div> </div>
<div>इसके पार्ट्स और प्रयोग किसान कैसे करेंगे इन सब के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही पूरे देश और प्रदेश में जल संरक्षण का जो अभियान चल रहा है इसमें हम अपनी योजना के माध्यम से कैसे  सहयोग कर सकते हैं, इसके बारे में भी किसानों को समझाया गया। इस इस अवसर पर गार्डन में मिनी सेंटर आफ एक्सीलेंस में किसानों को उन्नत साग भाजी बेहन की पौध उत्पादन तथा सरकार द्वारा छूट पर 02 रुपये में प्रति पौध की विक्रय दर से भी किसानों को अवगत कराते हुए नगद मूल्य पर 1000 से अधिक बेहन पौध भी विक्रय की गई।</div>
<div> </div>
<div>बेहन तकनीकी के बारे में विभागीय कर्मचारी राम समुझ यादव द्वारा जानकारी विस्तार से दी गई। कल भी 50 किसानों का प्रशिक्षण सत्र होगा जिसमें दोहरी घाट, फतेहपुर मंडाव, परदहा, घोसी एव बड़राव के किसान होंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षण कार्यक्रम में उद्यान निरिक्षक अरुण कुमार यादव, मिथिलेश कुमार सिंह, विकासखंड प्रभारी चंद्रभान, सुनील कुमार गुप्त, बालजीत, राजकुमार, अमरनाथ यादव, हिमांशु , रामसमुझ सहित कृषक उपस्थित रहे।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/138991/training-given-to-farmers-by-horticulture-and-food-processing-department</link>
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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2024 16:54:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मूंगफली की उन्नत कृषि पद्धतियों एवं विपणन व्यवस्था पर प्रशिक्षण का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[ गन्ने के साथ मूंगफली की खेती से बढ़ी आमदनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138755/organization-of-training-on-advanced-agricultural-methods-and-marketing-system"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/screenshot_20240213_181410.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>सीतापुर </strong>वर्ष 2017 से सीतापुर जनपद को उसकी पुरानी पहचान "मूंगफली की खेती" को वापस लाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र कटिया सीतापुर और मूंगफली अनुसन्धान निदेशालय जूनागढ़ गुजरात आपसी सामंजस्य से कार्य कर रहे हैं। जिनके सुखद परिणामों के तहत किसानों को रबी, खरीफ और जायद तीनों ही मौसम में मूंगफली की खेती करने में मिलेगी सफलता।मूंगफली की उन्नत कृषि पद्धतियों एवं विपणन व्यवस्था पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र कटिया सीतापुर के प्रसार वैज्ञानिक एवं अखिल भारतीय मूंगफली अनुसन्धान परियोजना के समन्वयक शैलेन्द्र सिंह ने अपने अनुभवों को साझा किया। </div>
<div> </div>
<div>श्री सिंह ने बताया कि मूंगफली अनुसन्धान निदेशालय जूनागढ़ के साथ इस पहल से पूर्व सीतापुर व आस-पास के निकटवर्ती जनपदों में केवल वर्षा कालीन मूंगफली की खेती का प्रचलन हुआ करता था जबकि अब तकनीकी और प्रजातियों के सही मिश्रण से वसंत कालीन मूंगफली भी पूरी सफलता के साथ की जा रही है और इसका तीव्र विस्तार वसंत कालीन गन्ना के साथ अन्तःफसल के रूप में हुआ है।</div>
<div> </div>
<div>श्री सिंह बताते है कि यहां के किसानो का मूंगफली के साथ जुड़ाव व क्षेत्र विस्तार की प्रवल सम्भावना को देखते हुए मूंगफली अनुसन्धान निदेशालय द्वारा वर्ष २०२१ में कृषि विज्ञान केंद्र को अखिल भारतीय मूंगफली अनुसन्धान परियोजना के तहत वोलन्टीयर केंद्र के रूप में नामित किया गया जिसके क्रम में केंद्र के प्रक्षेत्र पर निरंतर परीक्षण व प्रदर्शन कार्य किये जा रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि अभी किसानो के पास वसंत और खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त प्रजातियां हैं लेकिन हम प्रयासरत है कि रबी मौसम में बुवाई के लिए भी एक उन्नत प्रजाति किसानो को दे पायें। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ दया शंकर श्रीवास्तव ने कहा कि सीतापुर के किसानो के लिए मूंगफली के क्षेत्र में बीज उत्पादन कि प्रवल सम्भावना है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बीज उत्पादन के लिए उपयुक्त मानसून और मिट्टी की गुणवत्ता है, जो कि मूंगफली की उच्च उत्पादकता के लिए आवश्यक है।</div>
<div> </div>
<div>इसके साथ ही, जिला प्रशासन द्वारा "सीतापुर मूंगफली" को जिओग्राफिकल इंडेक्स (जी आई टैग) देने की योजना बन रही है। इससे न केवल इस क्षेत्र को विशिष्ट पहचान मिलेगी, बल्कि इसके विपणन में भी अधिक सुगमता आएगी। जी आई टैग की प्राप्ति से स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलेगी, जिससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी मात्रा में लाभ होगा।</div>
<div> </div>
<div>केंद्र के मृदा वैज्ञानिक श्री सचिन प्रताप तोमर ने बताया कि मूंगफली अनुसन्धान निदेशालय जनगढ़ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र का यह साझा प्रयास सीतापुर जनपद के किसानों को नए और उन्नत खेती तकनीकों से परिचित कराने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही मूंगफली की विपणन व्यवस्था को और भी मजबूत बनाने के लिए केंद्र कई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि उत्पादकों के लिए मूंगफली की उन्नत खेती के लिए जरूरी ज्ञान एवं कौशल प्रदान कर रहा है ताकि वे नई तकनीकों का उपयोग कर सकें और अपनी उत्पादकता को बढ़ा सकें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Feb 2024 16:21:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान का बेटा बना अभियोजन अधिकारी  जिले का बढ़ाया मान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><strong>सीतापुर से वसीम बेग</strong></p>
<p>बिसवां तहसील के सकरन क्षेत्र के ग्राम बेलवा बसहिया निवासी आराध्य मिश्रा ने एपीओ बनकर जनपद के नाम रोशन किया है।</p>
<p>जनपद की बिसवां तहसील के थाना सकरन क्षेत्र के ग्राम बेलवा बसहिया निवासी रामनरेश मिश्र जो कि एक किसान है एवं सेवानिवृत्त शिक्षिका विमला मिश्रा के सबसे छोटे बेटे का चयन अभियोजन अधिकारी बनने पर क्षेत्रवासियों सहित जिले में खुशी की लहर है.</p>
<p>छः भाई एवं दो बहनो में सबसे छोटे आराध्य की कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई बिसवां के सेठ देवेश्वर  दयाल मोंटेसरी स्कूल से की। उसके बाद हाईस्कूल एवं इंटर की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131622/became-the-son-of-a-farmer"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/img-20230629-wa0162.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><strong>सीतापुर से वसीम बेग</strong></p>
<p>बिसवां तहसील के सकरन क्षेत्र के ग्राम बेलवा बसहिया निवासी आराध्य मिश्रा ने एपीओ बनकर जनपद के नाम रोशन किया है।</p>
<p>जनपद की बिसवां तहसील के थाना सकरन क्षेत्र के ग्राम बेलवा बसहिया निवासी रामनरेश मिश्र जो कि एक किसान है एवं सेवानिवृत्त शिक्षिका विमला मिश्रा के सबसे छोटे बेटे का चयन अभियोजन अधिकारी बनने पर क्षेत्रवासियों सहित जिले में खुशी की लहर है.</p>
<p>छः भाई एवं दो बहनो में सबसे छोटे आराध्य की कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई बिसवां के सेठ देवेश्वर  दयाल मोंटेसरी स्कूल से की। उसके बाद हाईस्कूल एवं इंटर की पढ़ाई श्री राम चम्पा देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज बिसवां से की।</p>
<p>एलएलबी लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध जे एन पी जी कॉलेज(केकेसी) चारबाग़ से किया तथा एलएलएम एमिटी यूनिवर्सिटी 2019 से किया। मिश्रा का चयन फरवरी में ही उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित अभियोजन अधिकारी के पद पर ओवरऑल चौबीसवीं रैंक पर हुआ था.</p>
<p>बुधवार को घोषित अंतिम परिणाम में आराध्य ने पूरे प्रदेश में ओवरआल पांचवीं रैंक हासिल की है। आराध्य ने अपनी सफलता का श्रेय विशेषरूप से अपनी माता ,गुरुजनो, भाई राहुल और आकाश सहित अपने मित्रों मनोज, निशांत एवं शैलजा को दिया है.।इस उपलब्धि पर गाँव सहित नगर में खुशी का माहौल बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 20:45:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीधी बुआई से होगी  धान की अच्छी उपज, पानी की होगी बचत : डॉ एस के तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/img-20230617-wa0083.jpg" alt="IMG-20230617-WA0083" />ब्युरो-शत्रुघ्न मणि त्रिपाठी</strong></p>
<p>गोरखपुर ।  कृषि अनुसंधान केंद्र बेलीपार  के बैज्ञानिक डॉक्टर एस के तोमर ने धान की सीधी बुआई का टिप्स किसान भाई के बीच लाने के लिए मीडिया के माध्यम से बताया किसान भाई कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें, धान की सीधी बुआई के लिए प्रति एकड़ हमारी जो देसी प्रजातियां हैं जिनको ओपन पोलनेट प्रजातियां कहते हैं, उनका 12 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ के हिसाब से गिराए सभी मशीनों में बीज गिराने की दर निर्धारित करने के लिए व्यवस्था होती है, उसको सेट कर ले दूसरी चीज जब किसान भाई हाइब्रिड बीज की बुवाई करता है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/img-20230617-wa0083.jpg" alt="IMG-20230617-WA0083"></img>ब्युरो-शत्रुघ्न मणि त्रिपाठी</strong></p>
<p>गोरखपुर ।  कृषि अनुसंधान केंद्र बेलीपार  के बैज्ञानिक डॉक्टर एस के तोमर ने धान की सीधी बुआई का टिप्स किसान भाई के बीच लाने के लिए मीडिया के माध्यम से बताया किसान भाई कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें, धान की सीधी बुआई के लिए प्रति एकड़ हमारी जो देसी प्रजातियां हैं जिनको ओपन पोलनेट प्रजातियां कहते हैं, उनका 12 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ के हिसाब से गिराए सभी मशीनों में बीज गिराने की दर निर्धारित करने के लिए व्यवस्था होती है, उसको सेट कर ले दूसरी चीज जब किसान भाई हाइब्रिड बीज की बुवाई करता है ,जिसको कुछ किसान भाई डंकल बीज  भी कहते हैं, उनकी बुवाई के लिए 8 से 9 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है। दूसरे किसान भाई यह ध्यान रखें कि जब भी हम बुवाई करते हैं। चाहे सुपर सीडर से करे या  जीरो टिल मशीन  मशीन से करे अथवा मल्टी क्रॉप प्लांटर प मशीन से करें बुवाई के समय खेत में पर्याप्त मात्रा मैं नमी होनी चाहिए I</p>
<p>धान की सीधी बुआई के लिए धान बोने की गहराई 2 से ढाई सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक गहराई पर बुवाई करने से जमाव प्रभावित होता है ,कल्लो की संख्या कम निकलती है तथा जो करले देर से निकलते हैं, उनमें बालियां छोटी रह जाती। इस बात का ध्यान किसान भाई को रखना चाहिए ।अगली महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान भाई जब धान की सीधी बिजाई करते हैं तो रोपाई के मुकाबले धान की सीधी बिजाई में खरपतवारओं का जमाव अधिक होता है ।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/img-20230617-wa0087.jpg" alt="IMG-20230617-WA0087"></img></p>
<p>इसलिए सही समय पर खरपतवार नाशी का छिड़काव करके खरपतवार को नियंत्रित करना बहुत जरूरी होता है ,और इसके लिए किसान भाई को चाहिए कि जब भी आप धान की सीधी बिजाई करते हैं, शाम के समय बिजाई के बाद खेत में पेंदीमैथलीन नाम की दवा का 1 एकड़ में 1.3 लीटर दवाई 200 से ढाई सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। इस दवाई को छिड़काव करते समय ध्यान रखें कि मौसम साफ हो और बरसात होने की उस दिन कोई संभावना ना हो I यदि आप समय से पहले मशीन का छिड़काव नहीं कर पाए हैं तो बुवाई के 10 से 15 दिन पर जब पहली सिंचाई करते हैं।</p>
<p>सिंचाई के बाद जब खेत में चलने लायक हो जाए उस समय कौन काउंसिल एक्टिव खरपतवार नाशी की 90 ग्राम मात्रा को सवा 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें ,यह ध्यान रखें कि छिड़काव करते समय खेत में नमी होनी चाहिए। इसके बाद 30 दिन पर आप के खेत में यदि खरपतवार ओं का जमाव है ,तथा खरपतवार दो से चार पत्ती के हो गए हैं ,उस अवस्था में आप    नॉमिनी गोल्ड के नाम से जानते हैं 100ml दवाई के साथ में 80   ग्राम pyrozodulfuron (Sathi) सवा 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर दें। इससे आपकी धान की सीधी बिजाई में सारे खरपतवार नियंत्रित हो जाएंगे, और आपको बहुत अच्छी धान की पैदावार मिलेगी ।आप सभी किसान भाई जानते हैं कि आजकल रोपाई बहुत महंगी हो गई है और रोपाई से पहले लेव लगाने में भी काफी पैसा खर्च होता है। और अगर हम यह कहते हैं कि धान की खेती में जितना पानी लगता है उसका लगभग 45% पानी धान के लिए  लीव लगाने में प्रयोग होता है। इसलिए हमें पानी को भी बचाना है। हमको खेती की लागत भी कम करनी है, और हमको समय को भी बचाना है तो सभी किसान भाई इन चीजों को ध्यान में रखते हुए ज्यादा से ज्यादा किसान भाई धान की सीधी बुवाई करें ,और इस चीज को जरूर ध्यान रखें ,कभी भी धान की सीधी बुवाई आप सूखे खेत में ना करें ।कुछ किसान भाई सुखी खेत में  बुवाई कर देते हैं और फिर बाद में पानी चलाते हैं इससे खरपतवार का जमाव ज्यादा होता है। इसलिए पहले पानी चलाएं और फिर बुवाई करें I</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>किसान</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/130745/direct-sowing-will-give-good-yield-of-paddy-water-will</link>
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                <pubDate>Sat, 17 Jun 2023 17:06:24 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>

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