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                <title>national politics news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>national politics news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जंतर-मंतर पर छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज - कुंभकरण 6 महीने में जागा, PM को 27 दिन लगे। छात्र फास्ट ट्रैक नहीं, इस्तीफा मांग रहे हैं।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा बर्बर लाठीचार्ज किया गया। सबसे शर्मनाक बात यह है कि महिला छात्राओं के साथ अभद्रता और दुर्व्यवहार भी हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री जी 27 दिन बाद बोले हैं। कुंभकरण तो 6 महीने में जाग जाता था, आपको होश आने में 27 दिन लग गए। क्या भारत का प्रधानमंत्री भारत में नहीं रहता? साफ सुन लीजिए प्रधानमंत्री छात्र फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग नहीं कर रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">छात्र इस्तीफा मांग रहे हैं। चर्चा बहुत हो चुकी। देश की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184017/6a634ab21f1d7"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/623627.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा बर्बर लाठीचार्ज किया गया। सबसे शर्मनाक बात यह है कि महिला छात्राओं के साथ अभद्रता और दुर्व्यवहार भी हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री जी 27 दिन बाद बोले हैं। कुंभकरण तो 6 महीने में जाग जाता था, आपको होश आने में 27 दिन लग गए। क्या भारत का प्रधानमंत्री भारत में नहीं रहता? साफ सुन लीजिए प्रधानमंत्री छात्र फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग नहीं कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">छात्र इस्तीफा मांग रहे हैं। चर्चा बहुत हो चुकी। देश की जनता को मत घुमाइए। भारत का हवाला मत दीजिए। सब जाग चुके हैं। आपके समर्थक देश के बच्चों पर लाठियां चलवाते रहे और आप देखते रहे। शर्म आनी चाहिए। देश का हर नागरिक जल रहा है, रो रहा है। लेकिन आपको गद्दी प्यारी है, आप कुर्सी नहीं छोड़ रहे। इसी अंधकार में सिख सरदार समाज ने मानवता की मिसाल पेश की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आगे बढ़कर छात्रों की रक्षा की। भारतीय जन समाज पार्टी सिख समाज के सभी भाइयों कोटि-कोटि धन्यवाद देती है। आपने साबित कर दिया कि "सरदार भगत सिंह आज भी जिंदा हैं"और आज भी वो जंतर-मंतर पर छात्रों की ढाल बनकर खड़े हैं। भारतीय जन समाज पार्टी इस संघर्ष में छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हमारी सीधी मांग: प्रधानमंत्री घुमाइए मत इस्तीफा दो, गद्दी छोड़ो नारा: छात्र हित सर्वोपरि।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 17:00:33 +0530</pubDate>
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                <title>पांच राज्यों के चुनाव में बदलते समीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे राज्यों के चुनाव केवल क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और भविष्य की रणनीति तय करने वाले साबित हो सकते हैं। इन चुनावों में सबसे अधिक चर्चा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति को लेकर है, क्योंकि पार्टी अब केवल हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दक्षिण और पूर्वी भारत में भी अपने प्रभाव को निर्णायक रूप से स्थापित करने के प्रयास में है। इन चुनावों में भाजपा का फोकस विकास,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173809/changing-equations-in-elections-of-five-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे राज्यों के चुनाव केवल क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और भविष्य की रणनीति तय करने वाले साबित हो सकते हैं। इन चुनावों में सबसे अधिक चर्चा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति को लेकर है, क्योंकि पार्टी अब केवल हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दक्षिण और पूर्वी भारत में भी अपने प्रभाव को निर्णायक रूप से स्थापित करने के प्रयास में है। इन चुनावों में भाजपा का फोकस विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और कल्याणकारी योजनाओं के संतुलन पर है, जबकि विपक्षी दल क्षेत्रीय पहचान, सामाजिक न्याय और लोकल मुद्दों के सहारे मुकाबला कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम में जहां हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा सरकार अपने विकास मॉडल, बुनियादी ढांचे के विस्तार और ‘असमिया अस्मिता’ की रक्षा को मुख्य मुद्दा बना रही है, वहीं पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भाजपा की रणनीति पूरी तरह अलग और अधिक जटिल दिखाई देती है। असम में भाजपा अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है और यहां उसका फोकस सत्ता बनाए रखने पर है, जबकि बंगाल और दक्षिण भारत में वह विस्तारवादी रणनीति के तहत नई सामाजिक और राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में मुकाबला मुख्यतः भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच केंद्रित है, जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने इस बार 103 नए चेहरों को मैदान में उतारकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। फिल्मी सितारों की संख्या घटाकर आम और जमीनी स्तर से जुड़े उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना यह दर्शाता है कि टीएमसी एंटी-इन्कम्बेंसी को कम करने और नए वोटरों को आकर्षित करने की रणनीति अपना रही है। इसके जवाब में भाजपा का फोकस ‘परिवर्तन’ के नारे, भ्रष्टाचार के आरोप, केंद्रीय योजनाओं के लाभ और ‘डबल इंजन सरकार’ के वादे पर है। भाजपा बंगाल में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और घोटालों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है, जिससे वह शहरी और मध्यम वर्ग के साथ-साथ युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल में भाजपा की एक और महत्वपूर्ण रणनीति हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को स्थानीय पहचान के साथ जोड़ने की है, जिसमें धार्मिक स्थलों, परंपराओं और त्योहारों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा रहा है। हालांकि यह रणनीति पूरी तरह सफल होगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भाजपा स्थानीय बंगाली अस्मिता के साथ कितनी सहजता से खुद को जोड़ पाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केरल में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है, लेकिन यहां पार्टी लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केरल की राजनीति परंपरागत रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के बीच घूमती रही है, लेकिन भाजपा अब इस द्विध्रुवीय राजनीति को तोड़ने की कोशिश में है। भाजपा का फोकस यहां सबरीमाला मंदिर मुद्दा, हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण, और केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों को जोड़ने पर है। साथ ही पार्टी ईसाई समुदाय के साथ भी संवाद बढ़ाकर सामाजिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में भाजपा की चुनौती और भी बड़ी है, क्योंकि यहां द्रविड़ राजनीति का गहरा प्रभाव है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच पारंपरिक मुकाबले में भाजपा खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यहां भाजपा का चुनावी विजन ‘संस्कृति बनाम द्रविड़ विचारधारा’ के साथ-साथ विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता, केंद्र की योजनाएं और राष्ट्रीय मुद्दों को स्थानीय संदर्भ में प्रस्तुत करना भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी राज्यों में भाजपा जिन प्रमुख मुद्दों पर जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, उनमें सबसे पहले विकास और बुनियादी ढांचे का विस्तार है। सड़क, रेलवे, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को पार्टी अपने सबसे बड़े उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। दूसरा बड़ा मुद्दा ‘डबल इंजन सरकार’ का है, जिसमें यह दावा किया जाता है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने से विकास तेजी से होता है। तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा कल्याणकारी योजनाएं हैं, जैसे मुफ्त राशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और पीएम आवास योजना, जिनके लाभार्थियों को भाजपा अपने स्थायी वोट बैंक में बदलने की कोशिश कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सख्ती और भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी भाजपा के चुनावी अभियान का हिस्सा हैं। वहीं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदुत्व भी कई राज्यों में पार्टी के लिए प्रभावी हथियार बने हुए हैं, हालांकि दक्षिण भारत में इसे अधिक सावधानी से इस्तेमाल किया जा रहा है।इस बार के चुनावों में यह भी देखने को मिल रहा है कि भाजपा स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति अपना रही है, ताकि यह धारणा खत्म की जा सके कि पार्टी केवल केंद्रीय नेतृत्व पर निर्भर है। साथ ही सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेन और डेटा आधारित चुनावी रणनीति का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्षी दल भी अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। बंगाल में टीएमसी जहां ‘दीदी के 10 संकल्प’ और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं और गरीब वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं केरल में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस बदलाव का नारा दे रही है। इन सबके बीच चुनावी मुकाबला केवल नीतियों का नहीं, बल्कि नैरेटिव और धारणा का भी बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि पांच राज्यों के ये चुनाव केवल क्षेत्रीय सत्ता का संघर्ष नहीं हैं, बल्कि यह भाजपा के राष्ट्रीय विस्तार, विपक्ष की एकजुटता और भारतीय राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने वाले हैं। भाजपा जहां विकास, राष्ट्रवाद और कल्याणकारी योजनाओं के सहारे अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष स्थानीय मुद्दों, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर उसे चुनौती दे रहा है। आने वाले परिणाम यह तय करेंगे कि क्या भाजपा अपनी रणनीति में सफल होती है या फिर क्षेत्रीय दल अपनी पकड़ बनाए रखते है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:18:24 +0530</pubDate>
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