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                <title>development politics India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>जंगलराज से विकासराज तक : उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर और नई आर्थिक शक्ति बनने का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश लंबे समय तक देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य के रूप में जाना जाता रहा, लेकिन अब उसकी पहचान तेजी से बदल रही है। आज उत्तर प्रदेश केवल आबादी के आधार पर नहीं, बल्कि विकास, निवेश, उद्योग, आधारभूत संरचना और आर्थिक प्रगति के कारण देश की अग्रणी शक्ति के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में जिस गति से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है, उसने प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की है। कभी कानून-व्यवस्था और पिछड़ेपन की चर्चा के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181588/changing-picture-of-uttar-pradesh-from-jungle-raj-to-vikas"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश लंबे समय तक देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य के रूप में जाना जाता रहा, लेकिन अब उसकी पहचान तेजी से बदल रही है। आज उत्तर प्रदेश केवल आबादी के आधार पर नहीं, बल्कि विकास, निवेश, उद्योग, आधारभूत संरचना और आर्थिक प्रगति के कारण देश की अग्रणी शक्ति के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में जिस गति से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है, उसने प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की है। कभी कानून-व्यवस्था और पिछड़ेपन की चर्चा के लिए सुर्खियों में रहने वाला उत्तर प्रदेश आज एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश परियोजनाओं के लिए जाना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव में 570 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के दौरान प्रदेश के विकास मॉडल को रेखांकित करते हुए कहा कि अब उत्तर प्रदेश में योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि धरातल पर उतरती हैं और जनता तक उनका लाभ पहुंचता है। उन्होंने कहा कि उन्नाव को स्टेट कैपिटल रीजन का हिस्सा बनाया गया है और लखनऊ से उन्नाव होते हुए कानपुर तक रैपिड रेल चलाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल परिवहन को गति देगी, बल्कि औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश में विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क को उत्तर प्रदेश की प्रगति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने का कार्य कर रही हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्नाव के लोग अब लखनऊ को बाईपास करते हुए सीधे दिल्ली और प्रयागराज तक पहुंच सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए डिफेंस कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्नाव में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के लिए लगभग 700 एकड़ भूमि तथा औद्योगिक क्लस्टर के लिए 200 एकड़ भूमि तैयार की गई है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि उद्योगों के विस्तार से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उत्तर प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय बदलाव देखा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार यह कहते रहे हैं कि निवेश और विकास के लिए सुरक्षित वातावरण आवश्यक है। यही कारण है कि प्रदेश में अपराध और माफिया गतिविधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई। इसका परिणाम यह हुआ कि देश और विदेश के निवेशकों का विश्वास प्रदेश में बढ़ा है। निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण उत्तर प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो भविष्य में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का आधार बनेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार ग्रामीण विकास और किसानों के उत्थान को भी समान महत्व दे रही है। कानपुर में आयोजित प्राकृतिक कृषि प्रोत्साहन कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राकृतिक खेती को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होगी, भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को जीवामृत, बीजामृत तथा गो-आधारित प्राकृतिक खेती की जानकारी देकर उन्हें आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">किसानों के साथ-साथ गरीब और वंचित वर्गों के लिए भी अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन वितरण और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं ने लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि अब योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव और सिफारिश के सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। इससे शासन के प्रति जनता का विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;">आधारभूत संरचना के विकास में भी उत्तर प्रदेश ने नई उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश में नए एयरपोर्ट विकसित किए जा रहे हैं और कई हवाई अड्डों का विस्तार किया जा रहा है। अयोध्या, कुशीनगर और जेवर जैसे एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर रहे हैं। सड़क, रेल और हवाई परिवहन के क्षेत्र में हो रहे निवेश से प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता अब दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सड़कों की बराबरी कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन भी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों के विकास ने पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय महाधिवक्ता ने कहा कि पिछली सरकारों के समय जहां नई योजनाओं की गति सीमित थी, वहीं वर्तमान सरकार ने विकास कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश आज जिस तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है, उसने विपक्ष को भी राज्य की बदलती ताकत का एहसास करा दिया है। अरबों रुपये की लागत वाली परियोजनाएं प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">वास्तव में उत्तर प्रदेश का यह परिवर्तन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़कों, उद्योगों, निवेश, रोजगार, कृषि, पर्यटन और जनकल्याण योजनाओं के रूप में धरातल पर दिखाई देता है। राज्य सरकार का दावा है कि विकास की यह यात्रा आने वाले वर्षों में और अधिक गति पकड़ेगी। यदि वर्तमान योजनाएं निर्धारित समय पर पूरी होती हैं और निवेश परियोजनाएं सफलतापूर्वक जमीन पर उतरती हैं, तो उत्तर प्रदेश न केवल भारत की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, बल्कि देश के विकास इंजन के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा। यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश की चर्चा केवल राजनीति के संदर्भ में नहीं, बल्कि विकास, सुशासन और आर्थिक प्रगति के मॉडल के रूप में भी की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">          *कांतिलाल मांडोत*</div>
<div style="text-align:justify;">कांतिलाल मांडोत</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:11:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>पांच राज्यों के चुनाव में बदलते समीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे राज्यों के चुनाव केवल क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और भविष्य की रणनीति तय करने वाले साबित हो सकते हैं। इन चुनावों में सबसे अधिक चर्चा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति को लेकर है, क्योंकि पार्टी अब केवल हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दक्षिण और पूर्वी भारत में भी अपने प्रभाव को निर्णायक रूप से स्थापित करने के प्रयास में है। इन चुनावों में भाजपा का फोकस विकास,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173809/changing-equations-in-elections-of-five-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे राज्यों के चुनाव केवल क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और भविष्य की रणनीति तय करने वाले साबित हो सकते हैं। इन चुनावों में सबसे अधिक चर्चा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति को लेकर है, क्योंकि पार्टी अब केवल हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दक्षिण और पूर्वी भारत में भी अपने प्रभाव को निर्णायक रूप से स्थापित करने के प्रयास में है। इन चुनावों में भाजपा का फोकस विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और कल्याणकारी योजनाओं के संतुलन पर है, जबकि विपक्षी दल क्षेत्रीय पहचान, सामाजिक न्याय और लोकल मुद्दों के सहारे मुकाबला कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम में जहां हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा सरकार अपने विकास मॉडल, बुनियादी ढांचे के विस्तार और ‘असमिया अस्मिता’ की रक्षा को मुख्य मुद्दा बना रही है, वहीं पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भाजपा की रणनीति पूरी तरह अलग और अधिक जटिल दिखाई देती है। असम में भाजपा अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है और यहां उसका फोकस सत्ता बनाए रखने पर है, जबकि बंगाल और दक्षिण भारत में वह विस्तारवादी रणनीति के तहत नई सामाजिक और राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में मुकाबला मुख्यतः भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच केंद्रित है, जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने इस बार 103 नए चेहरों को मैदान में उतारकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। फिल्मी सितारों की संख्या घटाकर आम और जमीनी स्तर से जुड़े उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना यह दर्शाता है कि टीएमसी एंटी-इन्कम्बेंसी को कम करने और नए वोटरों को आकर्षित करने की रणनीति अपना रही है। इसके जवाब में भाजपा का फोकस ‘परिवर्तन’ के नारे, भ्रष्टाचार के आरोप, केंद्रीय योजनाओं के लाभ और ‘डबल इंजन सरकार’ के वादे पर है। भाजपा बंगाल में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और घोटालों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है, जिससे वह शहरी और मध्यम वर्ग के साथ-साथ युवा मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल में भाजपा की एक और महत्वपूर्ण रणनीति हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को स्थानीय पहचान के साथ जोड़ने की है, जिसमें धार्मिक स्थलों, परंपराओं और त्योहारों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा रहा है। हालांकि यह रणनीति पूरी तरह सफल होगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भाजपा स्थानीय बंगाली अस्मिता के साथ कितनी सहजता से खुद को जोड़ पाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केरल में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है, लेकिन यहां पार्टी लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केरल की राजनीति परंपरागत रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के बीच घूमती रही है, लेकिन भाजपा अब इस द्विध्रुवीय राजनीति को तोड़ने की कोशिश में है। भाजपा का फोकस यहां सबरीमाला मंदिर मुद्दा, हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण, और केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों को जोड़ने पर है। साथ ही पार्टी ईसाई समुदाय के साथ भी संवाद बढ़ाकर सामाजिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में भाजपा की चुनौती और भी बड़ी है, क्योंकि यहां द्रविड़ राजनीति का गहरा प्रभाव है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच पारंपरिक मुकाबले में भाजपा खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यहां भाजपा का चुनावी विजन ‘संस्कृति बनाम द्रविड़ विचारधारा’ के साथ-साथ विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता, केंद्र की योजनाएं और राष्ट्रीय मुद्दों को स्थानीय संदर्भ में प्रस्तुत करना भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी राज्यों में भाजपा जिन प्रमुख मुद्दों पर जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, उनमें सबसे पहले विकास और बुनियादी ढांचे का विस्तार है। सड़क, रेलवे, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को पार्टी अपने सबसे बड़े उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। दूसरा बड़ा मुद्दा ‘डबल इंजन सरकार’ का है, जिसमें यह दावा किया जाता है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने से विकास तेजी से होता है। तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा कल्याणकारी योजनाएं हैं, जैसे मुफ्त राशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और पीएम आवास योजना, जिनके लाभार्थियों को भाजपा अपने स्थायी वोट बैंक में बदलने की कोशिश कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सख्ती और भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी भाजपा के चुनावी अभियान का हिस्सा हैं। वहीं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदुत्व भी कई राज्यों में पार्टी के लिए प्रभावी हथियार बने हुए हैं, हालांकि दक्षिण भारत में इसे अधिक सावधानी से इस्तेमाल किया जा रहा है।इस बार के चुनावों में यह भी देखने को मिल रहा है कि भाजपा स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति अपना रही है, ताकि यह धारणा खत्म की जा सके कि पार्टी केवल केंद्रीय नेतृत्व पर निर्भर है। साथ ही सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेन और डेटा आधारित चुनावी रणनीति का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्षी दल भी अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। बंगाल में टीएमसी जहां ‘दीदी के 10 संकल्प’ और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं और गरीब वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं केरल में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस बदलाव का नारा दे रही है। इन सबके बीच चुनावी मुकाबला केवल नीतियों का नहीं, बल्कि नैरेटिव और धारणा का भी बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि पांच राज्यों के ये चुनाव केवल क्षेत्रीय सत्ता का संघर्ष नहीं हैं, बल्कि यह भाजपा के राष्ट्रीय विस्तार, विपक्ष की एकजुटता और भारतीय राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने वाले हैं। भाजपा जहां विकास, राष्ट्रवाद और कल्याणकारी योजनाओं के सहारे अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष स्थानीय मुद्दों, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर उसे चुनौती दे रहा है। आने वाले परिणाम यह तय करेंगे कि क्या भाजपा अपनी रणनीति में सफल होती है या फिर क्षेत्रीय दल अपनी पकड़ बनाए रखते है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:18:24 +0530</pubDate>
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