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                <title>farmers concern - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>farmers concern RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>तालाब की भूमि की पैमाइश के दौरान 150 एअर जमीन पर मिला अवैध कब्जा - हल्का लेखपाल अख्तर आलम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के तहसील हरैया के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बसन्तपुर में सोमवार को शाम 04 बजे राजस्व टीम ने गोयरी तालाब की पैमाइश किया । राजस्व टीम की पैमाइश के दौरान पता चला कि बैनामे की जमीन के आड़ में तिलकराम पुत्र सुक्खू बसन्तपुर निवासी द्वारा तालाब की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है । राजस्व टीम के पैमाइश के दौरान बैनामेदार तिलक राम द्वारा लगभग 150 एअर भूमि पर अवैध अतिक्रमण मिला ।</div>
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<div style="text-align:justify;">  आप को बता दे कि रामचेत पुत्र स्व० भगवान दत्त एवं समस्त ग्रामवासी ग्राम बसन्तपुर  सेमरहिया थाना दुबौलिया जिला बस्ती ने आरोप</div>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181318/illegal-occupation-of-150-acres-of-land-found-during-measurement"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0019.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के तहसील हरैया के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बसन्तपुर में सोमवार को शाम 04 बजे राजस्व टीम ने गोयरी तालाब की पैमाइश किया । राजस्व टीम की पैमाइश के दौरान पता चला कि बैनामे की जमीन के आड़ में तिलकराम पुत्र सुक्खू बसन्तपुर निवासी द्वारा तालाब की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है । राजस्व टीम के पैमाइश के दौरान बैनामेदार तिलक राम द्वारा लगभग 150 एअर भूमि पर अवैध अतिक्रमण मिला ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> आप को बता दे कि रामचेत पुत्र स्व० भगवान दत्त एवं समस्त ग्रामवासी ग्राम बसन्तपुर  सेमरहिया थाना दुबौलिया जिला बस्ती ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत बसन्तपुर में गोयरी नामक तालाब है जिस‌का गाटा सं०-375 है इसी तालाब में अमृत सरोबर का भी निर्माण हुआ है। इसी तालाब में पूरब तरफ प्रधान प्रतिनिधि सोमनाथ शर्मा के सहयोग से तिलक राम पुत्र सुक्खू ग्रा० बसन्तपुर ( सेमरहिया ) द्वारा जे० सी०बी लगाकर अवैध कब्जा किया जा रहा था जिसपर ग्रामीण रामचेत पुत्र भगवान दत्त द्वारा 112 पर पुलिस को फोन करके सूचना दी गयी थी 112 पुलिस द्वारा उस समय कार्य बन्द करा दिया गया था 112 पुलिस जाने के बाद पुनः कार्य किया जाने लगा। तालाब से एक नाला निकला हुआ था जो मनोरमा नदी में गिरता था जिसे बन्द कर दिया दिया गया था इसी नाले से होकर 08 से 10 गांवों का पानी बारिश के मौसम में नदी में जाता था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस नाले के बन्द होने से सभी 10 गांवों के लोग परेशान हैं एवं उनके फसल को काफी नुकसान होने की संभावना है । न्याय हित में ग्रामीणों ने थाना दिवस के दिन  दुबौलिया थाने पर लिखित शिकायत किया था । राजस्व टीम ने ग्राम प्रधान समेत अन्य ग्रामीणों की मौजूदगी में पैमाइश किया । बैनामे दार तिलक राम पर 150 एअर जमीन अवैध कब्जा करने की पुष्टि होने पर ग्रामीणों ने तत्काल तालाब की जमीन को खाली करने की मांग कर रहे हैं और तालाब की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले भूमाफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं । उक्त प्रकरण में हल्का लेखपाल अख्तर आलम ने बताया कि तालाब की जमीन का पैमाइश निष्पक्ष रूप से किया गया जिस पर बैनामे दार द्वारा तालाब की 150 एअर अवैध कब्जा पाया गया है जिसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को प्रेषित की जायेगी जिसके आधार पर अग्रिम कार्यवाही की जायेगी ।</div>
</div>
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<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:42:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने बढ़ाई किसानों की चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">गुजरात में अचानक बदले मौसम ने आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। गुरुवार को राज्य के अनेक जिलों में तेज हवाओं, धूल भरी आंधियों, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने ऐसा रूप लिया कि कई स्थानों पर हालात किसी छोटे तूफान जैसे प्रतीत हुए। इस अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन ने जहां लोगों को गर्मी से कुछ राहत दी, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी रबी फसलों के लिए यह किसी आपदा से कम नहीं रहा। विशेष रूप से उस समय जब गेहूं, चना, जीरा और सौंफ जैसी फसलें कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173803/unseasonal-rain-and-strong-storm-increased-farmers-worries"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/749bb5fd-9819-4ca1-934f-c65e06696b05_1759760607963.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">गुजरात में अचानक बदले मौसम ने आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। गुरुवार को राज्य के अनेक जिलों में तेज हवाओं, धूल भरी आंधियों, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने ऐसा रूप लिया कि कई स्थानों पर हालात किसी छोटे तूफान जैसे प्रतीत हुए। इस अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन ने जहां लोगों को गर्मी से कुछ राहत दी, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी रबी फसलों के लिए यह किसी आपदा से कम नहीं रहा। विशेष रूप से उस समय जब गेहूं, चना, जीरा और सौंफ जैसी फसलें कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी थीं, इस तरह की बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का खतरा बढ़ा दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राज्य के विभिन्न हिस्सों में दर्ज की गई वर्षा ने यह स्पष्ट कर दिया कि मौसम ने व्यापक रूप से असर डाला है। अमरेली जिले की बगसरा तहसील में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि सुरेंद्रनगर के चोटीला, राजकोट शहर और जूनागढ़ की भैंसाण तहसील में भी लगभग डेढ़ इंच तक पानी गिरा। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम वर्षा हुई। दिनभर में कुल बहत्तर तहसीलों में वर्षा दर्ज होना इस बात का संकेत है कि यह बदलाव केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में इसका प्रभाव दिखाई दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजकोट में तो स्थिति और भी गंभीर रही, जहां केवल एक घंटे की तेज बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए, होर्डिंग्स गिर गए और कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई। इसी प्रकार जामनगर में धूल भरी आंधी के कारण दृश्यता कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को काफी कठिनाई हुई। कई जगहों पर सौर ऊर्जा पैनल उड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे संपत्ति का नुकसान भी हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पाटण जिले के सांतलपुर और समी क्षेत्रों में तूफानी हवाओं ने भारी तबाही मचाई। कई मकानों के छप्पर उड़ गए और दीवारें गिर गईं, जिससे लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। छोटे रण क्षेत्र में रहने वाले अगरिया समुदाय को भी बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि नमक उत्पादन प्रभावित हुआ और सौर ऊर्जा उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। यह केवल प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि उन लोगों के जीवन और आजीविका पर सीधा प्रहार है जो पहले से ही सीमित संसाधनों के सहारे जीवन यापन करते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">महेसाणा, वडोदरा और जूनागढ़ सहित अन्य जिलों में भी तेज हवाओं और बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कई स्थानों पर ओलावृष्टि की भी खबरें सामने आईं, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका और बढ़ गई है। ओले गिरने से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे किसानों को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे में यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार साबित होती है।एक ओर उत्पादन घटता है और दूसरी ओर आय भी कम हो जाती है।</div><div style="text-align:justify;">मौसम विभाग के अनुसार इस अचानक बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण की भूमिका है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इन कारणों से राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश और आंधी की स्थिति बनी। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले चौबीस घंटों तक ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है और कुछ क्षेत्रों में इक्कीस मार्च तक बेमौसम बारिश जारी रह सकती है। विशेष रूप से बनासकांठा, पाटण, साबरकांठा, कच्छ और दक्षिण गुजरात के क्षेत्रों में इस प्रकार की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">किसानों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा होता है। महीनों की मेहनत के बाद जब फसल तैयार होती है, तभी इस तरह का मौसम उनकी सारी उम्मीदों को झटका दे देता है। बारिश के कारण कटाई में देरी होती है, फसल भीग जाती है और कई बार पूरी तरह खराब हो जाती है। इसके अलावा तेज हवाओं से फसलें गिर जाती हैं, जिससे कटाई और भी कठिन हो जाती है। इससे उत्पादन में कमी आती है और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मौसम परिवर्तन अब पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहे हैं, जो जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकते हैं। बदलते मौसम के इस स्वरूप ने खेती को पहले से अधिक जोखिम भरा बना दिया है। ऐसे में किसानों को नई तकनीकों और सावधानियों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि वे इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकें। कृषि विभाग ने भी किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं और मौसम की जानकारी पर लगातार नजर बनाए रखें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की अपील की है। आपात स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस तरह की प्राकृतिक घटनाओं के सामने मानव प्रयास सीमित ही साबित होते हैं, लेकिन समय पर चेतावनी और सावधानी से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह बेमौसम बारिश और आंधी केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि मौसम का स्वरूप बदल रहा है और इसके प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं। किसानों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि इसी प्रकार का मौसम बार-बार होता रहा, तो उनकी आय और जीवन दोनों पर इसका गहरा असर पड़ेगा। इसलिए आवश्यक है कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः कहा जा सकता है कि गुजरात में आया यह मौसम परिवर्तन केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें अपने पर्यावरण और कृषि प्रणाली को अधिक मजबूत और अनुकूल बनाने की दिशा में कदम उठाने होंगे। किसानों की सुरक्षा और उनके भविष्य को सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है, क्योंकि वही हमारे अन्नदाता हैं और उनकी समृद्धि में ही पूरे समाज की समृद्धि निहित है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:01:53 +0530</pubDate>
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