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                <title>टेंडर घोटाला - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>टेंडर घोटाला RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ठेकेदारों से नेताओं और अधिकारियों की कमाई के लालच से भ्रष्टाचार का पर्याय बना कानपुर नगर निगम </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> यहां का नगर निगम भ्रष्टाचार का पर्याय बना हुआ है। जिसकी वजह है ठेकेदारों के माध्यम से नेताओं और अधिकारियों की कमाई का लालचl यह खेल करोड़ों रुपये के टेंडरों के माध्यम से चल रहा था, लेकिन रंग में भंग तब हो गया जब इस खेल की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हो गई अधिकारियों के पेंच कस दिए। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद नगर निगम की ठेकेदारी व्यवस्था की परतें खुलने लगी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां तक अब तक की गई कार्रवाई का सवाल है शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186698/kanpur-municipal-corporation-became-synonymous-with-corruption-due-to-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002254798.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> यहां का नगर निगम भ्रष्टाचार का पर्याय बना हुआ है। जिसकी वजह है ठेकेदारों के माध्यम से नेताओं और अधिकारियों की कमाई का लालचl यह खेल करोड़ों रुपये के टेंडरों के माध्यम से चल रहा था, लेकिन रंग में भंग तब हो गया जब इस खेल की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हो गई अधिकारियों के पेंच कस दिए। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद नगर निगम की ठेकेदारी व्यवस्था की परतें खुलने लगी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां तक अब तक की गई कार्रवाई का सवाल है शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर निरस्त किए जा चुके हैं। सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और छह मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। दो ठेकेदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि पूरे सिंडिकेट का कथित सरगना गोविंद शर्मा फरार है। जांच में टेंडर हासिल करने के तरीके को लेकर भी चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक, ठेकेदारों का एक सिंडिकेट सक्रिय था । आरोप है कि इसी सिंडिकेट के जरिए तय किया जाता था कि किस काम का टेंडर कौन डालेगा और किस फर्म को काम मिलेगा. कई मामलों में करीब 15 फीसदी कम रेट पर टेंडर डलवाने और फिर तय फर्म को काम दिलाने का खेल होने की बात सामने आई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, कुछ ठेकेदारों पर दबाव बनाया जाता था और दूसरे लोगों को टेंडर प्रक्रिया से दूर रखने की कोशिश होती थी. जांच में लकी ड्रॉ के नाम पर टेंडर मैनेज किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की पूरी सच्चाई एसआईटी की जांच के बाद ही साफ होगी।मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त कर दिए हैं. विकास कार्यों से जुड़े भुगतान पर भी रोक लगाई गई है। नई फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पुलिस ने दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज समेत फर्मों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं. जगदंबा इंटरप्राइजेज के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हुए हैं।एसआईटी अब सिर्फ ठेकेदारों तक सीमित नहीं है. नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांची जा रही है। टीम ने टेंडर, भुगतान, फर्म पंजीकरण और विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें मांगी हैं। नगर निगम में अधिकारियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अगर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही थी तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। इस सवाल के जवाब में अधिकारियों की भी मिली भगत मानी जा रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 21:13:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैफई  आयुर्विज्ञान  संस्थान मॉनिटर घोटाला-2 !</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण जनता की भलाई के लिए और उसकी बीमारी में अच्छे इलाज के लिए सैफई आयुर्विजान संस्थान की स्थापना की गयी थी परन्तु चिकित्सा शिक्षा विभाग के शातिर दलालों और भ्र्ष्ट अधिकारीयों की मिलीभगत ने उक्त संसथान को लूट का अड्डा बना दिया है और जेम पोर्टल को लूट का हथियार, घटिया से घटिया चीनी उपकरण महँगी दरों पर खरीद करके लगातार स्थापित किये जा रहे है शातिर दलालों की कंपनियों के द्वारा, भ्र्ष्ट अधिकारीयों द्वारा जेम पोर्टल के माध्यम से सीटिंग करके टेंडर किये जा रहे है</p>
<h5 style="text-align:justify;">  <br /><strong>LOW END मॉनिटर की बिड में फेल और HIGH END मॉनिटर की</strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173772/saifai-institute-of-medical-sciences-monitor-scam-2"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/photo-41.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण जनता की भलाई के लिए और उसकी बीमारी में अच्छे इलाज के लिए सैफई आयुर्विजान संस्थान की स्थापना की गयी थी परन्तु चिकित्सा शिक्षा विभाग के शातिर दलालों और भ्र्ष्ट अधिकारीयों की मिलीभगत ने उक्त संसथान को लूट का अड्डा बना दिया है और जेम पोर्टल को लूट का हथियार, घटिया से घटिया चीनी उपकरण महँगी दरों पर खरीद करके लगातार स्थापित किये जा रहे है शातिर दलालों की कंपनियों के द्वारा, भ्र्ष्ट अधिकारीयों द्वारा जेम पोर्टल के माध्यम से सीटिंग करके टेंडर किये जा रहे है</p>
<h5 style="text-align:justify;"> <br /><strong>LOW END मॉनिटर की बिड में फेल और HIGH END मॉनिटर की बिड में पास </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ताजा प्रकरण के अनुसार जेम पोर्टल की बिड संख्या में  GEM/2025/B/6713344 DATED के माध्यम से संस्थान के ICU में स्थापित करने के लिए की आवश्यकता दिखाते हुए 50 QTY HIGH END MONITOR की खरीद के लिए टेंडर निकाला गया था, जिसमे कंपनियों ने प्रतिभाग किया और भ्र्ष्ट अधिकारीयों ने शातिर दलालों से मिलकर केवल 03 कंपनियों को पास किया और बाकि 09 कंपनियों की निविदा को टेक्निकल   बिड में ही रिजेक्ट कर दिया, और सेटिंग के अनुसार शातिर दलाल की सेटिंग वाली कंपनी HIMACHAL PHARMACEUTICALS को QTY 50, HIGH END MONITOR के लिए क्रय आदेश जारी कर दिया गया, MAKE-CLARITY, MODEL-SPECTRA GOLD, VALUE RS. – 22400000/- <br /> <br />M/s CLARITY की चोरी पकड़ी गयी.</p>
<p style="text-align:justify;">इसी संसथान के भ्र्ष्ट अधिकारीयों द्वारा जेम पोर्टल की निविदा संख्या GEM/2025/B/6752797 के माध्यम से मरीजों के इलाज के लिए QTY 200 LOW END MONITOR खरीदे, उक्त निविदा में 17 कंपनियों ने प्रतिभाग किया था और 16 कंपनियों की निविदा को टेक्निकल बिड में निरस्त करके सिंगल  निविदा दाता M/s SMITH MEDICARE, LUCKNOW क्रय आदेश जारी कर दिया  MAKE-MEASTROS, MODEL-VITAL TRACK, QTY- 200, VALUE-RS. 13500000/- , अब सवाल यह उठता है जो कंपनी M/s. CLARITY LOW END MONITOR की टेक्निकल बिड में रिजेक्ट थी उसके घटिया उत्पाद को HIGH END MONITOR की बिड में कैसे पास कर दिया गया??????</p>
<h5 style="text-align:justify;"><br /><strong>फर्ज़ीवाड़े के लिए कुख्यात कंपनी M/s CLARITY </strong></h5>
<p style="text-align:justify;">M/s CLARITY COMPANY फर्ज़ीवाड़े के लिए कुख्यात है , M/s CLARITY COMPANY द्वारा राजस्थान सरकार के जेके लोन अस्पताल और महिला अस्पताल जयपुर में HIGH END MONITOR QTY 1140, RATE RS. 77040 प्रत्येक की दर से, परन्तु सारे मॉनिटर घटियाचीनी मॉनिटर निकले, उसपर मेक इन इंडिया का स्टिकर और क्लैरिटी का स्टिकर लगा कर सप्लाई कर दिया था, NELCORE AND MASIMO टेक्नोलॉजी के SPO2 की बजाय घटिया चीनी SPO2 प्लेट लगा रखी थी और उस पर भी मेक इन इंडिया का स्टिकर और क्लैरिटी का स्टिकर लगा दिया था, ऐसी फ़र्ज़ी कंपनियों के साथ मिलकर भ्र्ष्ट अधिकारी संस्थान को लूट रहे है और अपनी जेबें भरकर उत्तर प्रदेश की गरीब जनता को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं<br />इस निविदा  में भी ब्लैकलिस्टेड रही कंपनी SS MEDICALS SYSTEM (I) PVT LTD ने भी प्रतिभाग किया हैं</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>लूट पर संसथान का गोल मोल जवाब</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस सम्बन्ध में जब संवादाता द्वारा संसथान के क्रय अधिकारी से बात की गयी तो स्पष्ट जवाब देने के बजाय वो टाल मटोल करने लगे और कहने लगे की सब वीसी साहब और संयुक्त निदेशक के आदेश से होता है, वीसी और जेडी से सम्पर्की किया गया तो उनका फ़ोन ही नहीं उठा</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 01:56:32 +0530</pubDate>
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