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                <title>जैविक खेती - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>जैविक खेती RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिलाया विकसित कृषि का संकल्प।।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0182-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, जैविक खाद के उपयोग, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती से मिलने वाले लाभों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल, विधायकगण, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, महापौर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेत बचाओ अभियान–2026: प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण एवं पोषण सुरक्षा पर किसानों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181012/farm-save-campaign-%E2%80%93-2026-farmers-made-aware-on-natural"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0058-(45).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम, बीटीएम तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल ने किसानों से मिट्टी एवं जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। संयुक्त कृषि निदेशक श्रीराम बचन राम ने मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने तथा विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने पर बल दिया। उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य ने पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की, जबकि अमित शुक्ला ने युवाओं को कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वैज्ञानिक डॉ. वी. बी. सिंह ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, मृदा परीक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन एवं जल संरक्षण** की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अंजली वर्मा ने पोषण वाटिका, श्री अन्न, संतुलित आहार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा भोजन में तेल, नमक एवं चीनी की मात्रा कम करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ परिवार एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया | कार्यक्रम के दौरान किसानों को “मिट्टी बचाओ–खेत बचाओ, प्राकृतिक खेती अपनाओ, जल बचाओ–भविष्य बचाओ तथा स्वस्थ भोजन–स्वस्थ जीवन” का संदेश दिया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढ़  रहा है, कृषि वैज्ञानिक - प्रोफेसर प्यारेलाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर की समस्या नहीं रही यह सब सीधे हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैंजैसे अत्यधिक मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव और घटती वायु गुणवत्ता।ऐसे परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढता जा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">मौसम के बदलते तेवर से  किसानों बागवानो को  जहां बहुत अधिक लाभ  नहीं होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ इस साल का मानसून आम जनता को  भी  परेशान करेगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल सामान्य से कम वर्षा होगी और साथ में अल नीनो का प्रभाव  बहुत  ख़तरनाक होगा सूखा और गर्मी   बढ़ेगी जिसके कारण खरीफ की फसलों का उत्पादन काम होगा विशेष तौर पर उन क्षेत्रों में जहां फसलों की सिंचाई की सुविधा नही है वहां पर बिजाई देर से होगी।और उत्पादन भी कम होगा।और देश में महंगाई बढ़ेगी । आमदनी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम हहोगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज विश्व का हर देश ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से भयंकर महंगाई के मोहाने पर खड़ा हो गया है। परन्तु युद्ध लड़ने वालों को मौसम मानसून  महंगाई और जनता से सरोकार नहीं है।  बस अपने को शक्तिशाली दिखाने की होड़ विश्व पटल पर लगी है कि मैं महान विजेता हूं ।इस युद्ध से भारत भी बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।देश में महंगाई बढ़ रही है ऊर्जा का दाम बढ़ रहा है।तो वहीं यह मानसून भारत पर अलग तरह से कहर बरपाने का संकेत देकर भारत की गरीब जनता को और गरीबी में जीने के लिए मजबूर कर रहा है</p><p style="text-align:justify;">भारत को तीन  तरफ से मार पड़ेगा ।खराब मानूसन  खाद  की कमी और ऊर्जा ।भले टी वी डिवेट  पर सरकार के समर्थक  लोग आंकड़ों के जाल में जनता को फंसाते रहे परन्तु सच्चाई इन  आंकड़ों से इतर है। युद्ध कब तक चलेगा यह अगस्त या आगे तक भी चल सकता है फिर देश में नोट बन्दी की तरह हर चीज पर प्रतिबंध जैसे बैंकों से कम रुपया निकालना तेल गैस पर प्रतिबंध हर चीज का सीमित उपयोग।आदि  क ई तरह के उपाय करने पड़ सकते हैं। खाद के संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक जुन से तीस जुन तक खेत बचाओ अभियान शुरू करने जा रहा है जिसमे कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग कम करने हरी खाद को बढ़ावा देने याद गोबर की खाद का अधिक उपयोग करने के फायदे बतायेंगे ।</p><p style="text-align:justify;">किसानों को अपने खेत की कम होती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कौन-सा सही तरीका लाभ कारी होगा साथ में खेती में लागत कम लगे और उत्पादन बढे यह एक सही कदम है।अब किसानों को आधुनिक खेती के साथ पुरानी खेती को अपनाने की जरुरत है जिसमें हरी खाद कमृपोष्ट खाद का बहुत महत्व है परन्तु बहुत से छोटे मझोले किसानों के पास पशुधन यानि बैल गाय भैंस नहीं के बराबर है जिससे गोबर की खाद बनेऔर खेत बचे साथ में उत्पादन भी बढ़े।सत्तर के दशक में कम्पोस्ट खाद बनाने की सरकार द्वारा योजना चला ई ग ई किसानों ने  गोबर गैस  प्लांट लगवाया खाद का उपयोग किया खेती से मजदुरो का पलायन होना शुरू हुआ पशुधन कम हुए तो गोबर गैस प्लांट बंद होते गये।अब खेती ट्रैक्टर रासायनिक खाद पर निर्भर है।</p><p style="text-align:justify;">हिमाचल के साथ देश भर में पिछले दो महीने से रुक रुक कर बे मौसमी बारिश ओला तेज हवा के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है । जनहानि भी हुई है।मौसम की यह बेरूखी  ऊपरी हिमाचल में सेव  के किसानों और अन्य फल के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है  । यह भी  एक अनुमान है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष में 5000 से 6000 करोड़ का सेव  का कारोबार  हर साल होता है। जो इस साल  बे मौसम बरसात ओलावृष्टि से सेव का उत्पादन कम होने का अनुमान है। जिसके कारण  किसानों को 1500 से 2000 करोड़ का नुकसान होगा।  कम पैदावार का नुकसान आम जनता को भी उठाना पड़ता है कि फल सब्जियां अनाज दूध तेल सब महगे दामो  पर बिकेंगे गरीब और गरीब होता जाएगा व्यापारी अमीर होता जाएगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">आईएमडी के अनुसार बरसात  कम हो सकती है प्रशांत महासागर  में अल नीनो का प्रभाव बढ़ रहा   है। मानसून इस साल जल्दी आयेगा ।उत्तर और मध्य भारत में कम बारिश हो सकती है खेती में फसलों के साथ फल  जैसे सेव  नाशपाती  का उत्पादन के साथ  बिजली उत्पादन कम हो सकता है।  मानसून कमजोर होने पर सीधा असर  फसलो  किसानों की आय और खाद्यान्न की कीमतों पर पड़ता है।   कमजोर मानसून से कम पैदावार होगी खरीफ की फसलों के साथ सब्जी फल  महंगें होगे। सिंचाई की लागत भी बढेगी सरकार का प्रयास रहा है कि जल संचयन को बढ़ावा  जाए।  यह प्रयास बहुत अच्छा नहीं हो पाया गांव-गांव अमृत सरोवर बन रहा है।  परंतु लाभ उतना नहीं मिलता है जितनी उम्मीद सरकार कर रही है अमृतसरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है यदि किसानों को यह जानकारी पहले से हो कि मानसून कमजोर है और कम वर्षा होगी तो  अधिक पानी की फसलों की जगह कम पानी की फसलो जैसे बाजार ज्वार मक्का उड़द मूंग  तिल अन्य मिलट की फसलों की बिजाई करने से बहुत लाभ हो सकता है ।  </p><p style="text-align:justify;">सरकार को इन फसलों की खरीद  को भी सुनिश्चित करना होगा।  अरहर  मूग उड़द बाजरा के साथ मिश्रित खेती अधिक लाभकारी होगी ।जब मानसून कमजोर होता है तब इस तरह की खेती किसानों के लिए लाभदायक होती  है। इस वर्ष   ओलावृष्टि वारिस जो  हिमाचल और भारत के अन्य प्रदेशों में हो रही है।  जिसके परिणामस्वरूप  सबसे ज्यादा सेवव फल   उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं ।इस बदले मानसून से हिमाचल  मे सेव  का उत्पादन 50 से 70% कम होगा। बे मौसमी  बारिश से सेव  के पौधों में फूल काम हो गए हैं । मधुमक्खियां  से परगण भी काम हुआ है ।  हिमाचल में ढाई लाख परिवार बागवानी विशेष तौर पर सेव के ऊपर  निर्भर है।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर  है तो दूध उत्पादन में पहले पायदान पर दुनिया में टिका हुआ है । सब्जी फल उत्पादन में भी दुनिया में अपना स्थान बनाया हुआ है।  परंतु अभी तक हमारे वैज्ञानिकों ने मौसम के अनुकूल या कम बारिश होने पर उस तरह के बीजों का ईजाद नहीं कर पाए हैं जो कम पानी में अधिक पैदावार दे सके। कुछ किस्में हैं  परन्तु उतना लाभदायक नहीं है। कमजोर मानसुन होने पर खाघानो के साथ फल सब्जियों का उत्पादन कम न हो । और देश में कम उत्पादन के कारण महंगाई न बढ़े परन्तु ऐसा नहीं हो पा रहा है।</p><p style="text-align:justify;"> किसानों को भी खेती से घाटा न हो वह भी  राहत महसुस करें कि कमजोर मानसून होने पर आय कम नहीं होंगी बस फसल बदल दे तो निश्चित ही आय होगी। यह देखा गया है कि धान लगाने वाला किसान जल्दी फसल नहीं बदलते है । वह धान पर ही टिका रहता है धान में अधिक सिंचाई के कारण लागत बढ़ जाता है।बाजार में सही मूल्य नहीं मिलता  है।तब किसानो  को नुकसान उठाना ही होता है ।अगर मानुसन के अनुरूप किसान सही फसल का चयन कर लेता है तो कभी भी किसान नुकसान में नहीं होगा बस उसके उत्पाद का सही बाजार मूल्य सरकार दे।<br /></p><p style="text-align:justify;">खरीफ के मौसम में  अधिकांश तौर पर पंजाब हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजस्थान के किसान धान की खेती करते हैं कम बारिश के कारण धान की खेती में अधिक सिंचाई की जरूरत होगी जो महंगे डीजल के कारण पैदावार में लागत  मूल्य को बढ़ाता है।बाजार में मूल्य कम मिलता है। कमजोर मानसून से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बस मोटे अनाजों की खेती है  एक मात्र सही उपाय है।जिसमें पानी की बहुत कम जरुरत होती है। मिश्रित खेती जैसे बाजरा उड़द अरहर बाजरा अहरह उड़द की खेती लाभ कारी होगी।। </p><p style="text-align:justify;">इस तरह की खेती से डीजल और  बिजली की बचत भी हो सकती है।  साथ में रसायनिक खाद की जरुरत भी कम पड़ती है।इस वर्ष किसानों पर तीन तरह से   मार पड़ेगी पहली मार कि मानसुन कमजोर है। बारिश कम होंगी। दुसरी मार खाद भी कम मात्रा में मिलेगा।  तीसरा ऊर्जा की कमी ।कारण ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध से देश में यूरिया के साथ साथ पोटाश फास्फोरस जैसे खादों का जो आयात होता वह भी कम होगा जिससे किसानों को खरीफ के फसलों के लिए भरपूर रसायनिक खाद नहीं मिलेगा।</p><p style="text-align:justify;">पिछले साल देश ने बड़े शोर के साथ मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग पर बहुत गोष्ठी और सेमीनार करके किसानों को जागरूक किया और इन मोटे अनाजों के उपयोग से लाभ के बारे में भी खुब चर्चा हुई परन्तु उत्पादन बढ़ा कितना इस पर बात उसके बाद नही हुआ। नहीं यह बताया गया कि देश में क्या यह भोजन की थाली में आया या बस पशुचारा में गया मुफ्त अनाज योजना में मोटे अनाज को वितरित किया गया परन्तु अधिकांश परिवारो  को जो मुफ्त में दिया गया उसे बाजार में बेच दिये।अब देश को मुफ्त अनाज वितरण को बन्द करें।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our</link>
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 23:16:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177724/indian-agriculture-is-at-a-critical-juncture-now-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे फसल की पैदावार भी कम हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm.jpeg" alt="भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय" width="527" height="351"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बहुत बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन यही क्षेत्र मौसम के बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। अगर मानसून कमजोर पड़ जाए या अचानक गर्मी बढ़ जाए, तो इसका असर सिर्फ खेत तक नहीं रहता—किसानों की आय, बाजार के दाम और पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अब “जलवायु के हिसाब से खेती” अपनाना जरूरी हो गया है। इसका मतलब है पानी का सही इस्तेमाल, मौसम के अनुसार फसल चुनना, मिट्टी की सेहत बनाए रखना और पराली जलाने से बचना। ये छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बड़ा फर्क ला सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात ये है कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। कई संस्थाएं किसानों को नई तकनीकें सिखा रही हैं। सरकार भी कई योजनाओं के जरिए मदद कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पानी बचाने पर जोर दिया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को पता चलता है कि खेत में किस तरह की खाद कितनी मात्रा में डालनी है। परंपरागत कृषि विकास योजना से जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन मौसम के असर को कम करने पर काम करता है, और फसल बीमा योजना मुश्किल समय में किसानों को आर्थिक सहारा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिशा सही है, लेकिन काम को और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि मौसम तेजी से बदल रहा है, तो हमें भी उतनी ही जल्दी कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सीधी बात है—आज जो फैसले हम लेंगे, वही कल की खेती तय करेंगे। अगर अभी सही कदम उठाए गए, तो हम किसानों को मजबूत बना सकते हैं, खाने की सुरक्षा बनाए रख सकते हैं और गांव की अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं। अब समय है—किसानों का साथ देने का, पर्यावरण को बचाने का और सही दिशा में आगे बढ़ने का।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नवाज़ अहमद खान<br />प्रोफेसर<br />आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेठी में श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए भव्य रोड शो आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जनपद में संचालित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को श्रीअन्न (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने और इसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु जनपद स्तरीय रोड शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी संजय चौहान ने कलेक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर किया। यह रोड शो लगभग 100 दोपहिया वाहनों और दो प्रचार वाहनों के माध्यम से कलेक्ट्रेट गौरीगंज से कृषि भवन ताला तक निकाला गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक सतेन्द्र कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी संदीप कुमार, जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह सहित अन्य</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173720/grand-road-show-organized-in-amethi-to-promote-sri-anna"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/2-6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जनपद में संचालित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को श्रीअन्न (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने और इसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु जनपद स्तरीय रोड शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी संजय चौहान ने कलेक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर किया। यह रोड शो लगभग 100 दोपहिया वाहनों और दो प्रचार वाहनों के माध्यम से कलेक्ट्रेट गौरीगंज से कृषि भवन ताला तक निकाला गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक सतेन्द्र कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी संदीप कुमार, जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। उप कृषि निदेशक ने बताया कि इस रोड शो का मुख्य उद्देश्य किसानों और आमजन को मिलेट्स (ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कोदो, सांवा, चेना, कुटकी, रामदाना एवं कुट्ट) के महत्व के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि मिलेट्स को “सुपर फूड” कहा जाता है, क्योंकि इनमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि श्रीअन्न ग्लूटेन-फ्री होने के साथ-साथ विटामिन, एंजाइम और इनसॉल्युबल फाइबर से भरपूर होता है। इसके अलावा इसमें बीटा-कैरोटीन, नियासिन, विटामिन बी-6, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम और जस्ता जैसे खनिज भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से श्रीअन्न अत्यंत लाभकारी है। इसके सेवन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, शरीर में ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म संतुलित रहता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उच्च फाइबर होने के कारण यह पाचन में सहायक है और डायबिटीज मरीजों में ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। साथ ही यह ब्लड प्रेशर नियंत्रण, हृदय रोगों से बचाव और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक है। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को श्रीअन्न की खेती अपनाने और आमजन को इसे दैनिक आहार में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173720/grand-road-show-organized-in-amethi-to-promote-sri-anna</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 19:07:29 +0530</pubDate>
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