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                <title>municipal negligence - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>municipal negligence RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>फुटपाथ पर कब्जा कर बेंच रहे मौरंग, गिट्टी व बालू</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> शहर की सड़कों से लेकर ग्रामीण सड़कों का फुटपाथ कमाई का अड्ढा बन गया है। बिल्डिंग मैटेरियल बेंचने वालों ने भी अपना माल फुटपाथ पर जमा कर रखा है। इससे हजारों राहगीर रोजाना जाम की समस्या से जूझते हैं। पर कोई देखने सुनने वाला नहीं है। इसलिए अतिक्रमणकारियों की अराजकता का दौर जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">रहने के लिए घर व काम-धंधे के लिए मार्केट बनाने के प्रयोग में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी, मौरंग व बालू यातायात व्यवस्था के लिए खलनायक बन गई है। दुल्हा चौराहे से लेकर ककरहवा तक सड़क पर जगह-जगह गिट्टी, मौरंग, सीमेंट, बालू व सरिया के ढेर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177005/mauranga-is-occupying-the-footpath-and-selling-gravel-and-sand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1776866493562.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> शहर की सड़कों से लेकर ग्रामीण सड़कों का फुटपाथ कमाई का अड्ढा बन गया है। बिल्डिंग मैटेरियल बेंचने वालों ने भी अपना माल फुटपाथ पर जमा कर रखा है। इससे हजारों राहगीर रोजाना जाम की समस्या से जूझते हैं। पर कोई देखने सुनने वाला नहीं है। इसलिए अतिक्रमणकारियों की अराजकता का दौर जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रहने के लिए घर व काम-धंधे के लिए मार्केट बनाने के प्रयोग में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी, मौरंग व बालू यातायात व्यवस्था के लिए खलनायक बन गई है। दुल्हा चौराहे से लेकर ककरहवा तक सड़क पर जगह-जगह गिट्टी, मौरंग, सीमेंट, बालू व सरिया के ढेर लगे नजर आते हैं। रोड किनारे पैदल आने-जाने वालों के लिए बना फुटपाथ ने गोदाम का रूप ले रखा है। नागरिकों की मानें तो ज्यादातर असरदार लोग इस गोरखधंधे में लगे हैं। वे मनमानी करने से रोकने-टोकने पर गाली-गलौज व मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई  सड़कें जगह-जगह अवैध कब्जों की गवाह बनी हैं। यातायात व्यवस्था चौपट है पर किसी को कोई परवाह नहीं है। राहगीरों के दुख-दर्द को दूर करने के एवं अतिक्रमण हटाने के लिए केवल कागजी घोड़े ही दौड़ाए जा रहे हैं। बंद कमरों में जारी उच्चाधिकारियों के  आदेश कागज की फाइलों में कैद होकर दम तोड़ रहे हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:45:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झूंसी में जलनिकासी संकट: नैका सहित कई इलाकों में नालियों का अभाव बना बड़ी समस्या।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज । सरस सिंह की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। विशेष रूप से नैका, नई बस्ती, कटका, और आसपास के कई मोहल्लों में नालियों के अभाव और जर्जर जलनिकासी व्यवस्था ने स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर कर दिया है। हर साल बारिश के मौसम में यह समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बरसात में बनता है ‘तालाब’।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी के नैका इलाके में हल्की बारिश भी सड़कों को तालाब में बदल देती है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174374/drainage-crisis-in-jhunsi-lack-of-drains-has-become-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260327-wa0053.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज । सरस सिंह की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। विशेष रूप से नैका, नई बस्ती, कटका, और आसपास के कई मोहल्लों में नालियों के अभाव और जर्जर जलनिकासी व्यवस्था ने स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर कर दिया है। हर साल बारिश के मौसम में यह समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बरसात में बनता है ‘तालाब’।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी के नैका इलाके में हल्की बारिश भी सड़कों को तालाब में बदल देती है। पानी निकासी का उचित प्रबंध न होने के कारण गंदा पानी कई दिनों तक सड़कों और गलियों में जमा रहता है। इससे न केवल आवागमन बाधित होता है बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार घरों में भी पानी घुस जाता है, जिससे घरेलू सामान को नुकसान उठाना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नालियों का अधूरा निर्माण और खराब रखरखाव</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई जगहों पर नालियों का निर्माण कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन अधूरा छोड़ दिया गया। जहां नालियां बनी भी हैं, वहां नियमित सफाई नहीं होने के कारण वे कचरे से भरी रहती हैं। परिणामस्वरूप पानी का बहाव रुक जाता है और जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्थानीय लोगों में आक्रोश।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नैका और आसपास के इलाकों के निवासियों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों से शिकायत की, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वादे तो करते हैं, लेकिन बाद में समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गंदे पानी के जमाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">जिम्मेदार कौन?</div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी भी इस समस्या का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। योजनाएं बनती हैं, बजट भी पास होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अधूरा रह जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या कहते हैं अधिकारी?।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में जलनिकासी सुधार के लिए योजनाएं बनाई गई हैं और जल्द ही काम शुरू होगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का विश्वास अब इन दावों पर कम ही रह गया है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 22:15:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तालाब पाटकर बसाई कॉलोनी, अब तीन मोहल्ले जलमग्न जिम्मेदारों पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर खीरी।</strong> कस्बा खीरी के मोहल्ला हनिया टोला में वर्षों पहले अवैध रूप से तालाब पाटकर की गई प्लाटिंग अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। जल निकासी का रास्ता बंद होने से कस्बे के तीन मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं और सड़कों पर गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों का जीना दूभर हो गया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस तालाब को नगर पंचायत के अभिलेखों में दर्ज बताया जाता है, उसे पहले पाट दिया गया और फिर उस पर प्लॉट काटकर रजिस्ट्री तक कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इतना ही नहीं, कई मकानों का निर्माण भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173696/colony-settled-after-filling-pond-now-three-localities-submerged-questions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/0.0044.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर खीरी।</strong> कस्बा खीरी के मोहल्ला हनिया टोला में वर्षों पहले अवैध रूप से तालाब पाटकर की गई प्लाटिंग अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। जल निकासी का रास्ता बंद होने से कस्बे के तीन मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं और सड़कों पर गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों का जीना दूभर हो गया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस तालाब को नगर पंचायत के अभिलेखों में दर्ज बताया जाता है, उसे पहले पाट दिया गया और फिर उस पर प्लॉट काटकर रजिस्ट्री तक कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतना ही नहीं, कई मकानों का निर्माण भी हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि यह सब लंबे समय तक प्रशासन की नजरों से ओझल रहा।समस्या बढ़ने पर मोहल्ले के लोगों ने शिकायत की, जिसके बाद नगर पंचायत ने तालाब पाटने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी किया है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब तालाब पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग और निर्माण हो रहा था, तब जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहां थे? मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पीस कमेटी की बैठक में स्थानीय लोगों ने यह मुद्दा सीओ/सहायक पुलिस अधीक्षक विवेक तिवारी, सदर एसडीएम  अश्विनी सिंह और नायब तहसीलदार के सामने उठाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पर सदर एसडीएम ने अधिशासी अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार तालाबों के संरक्षण के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर खुलेआम तालाब पाटकर कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन तालाब को पुनः खुदवाकर उसकी मूल स्थिति बहाल करेगा या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।फिलहाल गंदे पानी से जूझ रहे लोग राहत की आस लगाए प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 18:12:25 +0530</pubDate>
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