<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/60142/eco-friendly" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>eco friendly - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/60142/rss</link>
                <description>eco friendly RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मानसून में फलदार वृक्षों की गुठलियाँ लगाएँ, पर्यावरण की सुरक्षा करें योगेंद्र कुमार सह अधीक्षक तिहाड़ जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182461/plant-kernels-of-fruit-trees-in-monsoon-and-protect-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260627-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की गुठलियाँ और बीज ही लगाए जाएँ। हमने इस विचार को व्यवहार में उतारा और वर्षा ऋतु में बड़ी संख्या में जामुन, आम, इमली, बेर तथा अन्य फलदार वृक्षों की गुठलियाँ बोईं। अगले मानसून तक उनसे लगभग ढाई से तीन फीट ऊँचे स्वस्थ पौधे तैयार हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद हमने इन पौधों का निःशुल्क वितरण शुरू किया और स्वयं भी उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित किया। आज हमारा पौधारोपण अभियान पूरी तरह निःशुल्क है।मैं आप सभी से भी विनम्र आग्रह करता हूँ कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस मानसून में फलों की गुठलियाँ और बीज अवश्य लगाएँ। अगले वर्ष मानसून में तैयार पौधों को किसी उपयुक्त स्थान पर रोपित करें। बिना किसी बड़े खर्च के हम सभी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।पिछले वर्ष तिहाड़ जेल के बंदियों एवं स्टाफ के सहयोग से हमने बड़ी संख्या में जामुन की गुठलियाँ लगाई थीं, जो आज 2–3 फीट ऊँचे पौधों में विकसित हो चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष मानसून के दौरान दिल्ली सरकार के 'वन महोत्सव' अभियान में हम इन पौधों का निःशुल्क वितरण करेंगे तथा उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित भी करेंगे।फलदार वृक्ष लगाने के अनेक लाभ हैं। ये न केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाते हैं, बल्कि फल खाने वाले सुंदर पक्षियों को भी पुनः उनके प्राकृतिक आवास में लौटने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही हमें भी बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के ताज़े और पौष्टिक फल प्राप्त होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त ये वृक्ष प्रदूषण कम करने, वातावरण को शुद्ध रखने तथा भरपूर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।आइए, इस मानसून एक संकल्प लें—हर घर, हर परिवार और हर नागरिक कम से कम एक फलदार वृक्ष की गुठली अवश्य लगाए। यही छोटा-सा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण की नींव बनेगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182461/plant-kernels-of-fruit-trees-in-monsoon-and-protect-the</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182461/plant-kernels-of-fruit-trees-in-monsoon-and-protect-the</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:54:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260627-wa0005.jpg"                         length="1407963"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर पर चिड़ियों का डेरा लगने से मन में होती है खुशी : कंचन वर्मा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong>बर्डपुर क्षेत्र के सूर्यकुड़िया निवासी कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हैं। इन्होंने अपने घर पर गौरैयों की सुरक्षा के लिए घोसले बना रखे हैं। पानी देने के लिए विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं, जिसमें दाना देकर उनका पेट भरने का प्रयास करते हैं। कंचन के घर पर हर रोज चिड़ियों का डेरा जमता है। उनके इस प्रयास से परिजनों के मन में खुशी होती है।कंचन वर्मा बताते हैं कि घर में हरियाली है। बच्चों से परिवार खुशहाल है, बर्डपुर क्षेत्र के कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा  गौरैया की सुरक्षा के लिए घर पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173658/kanchan-verma-feels-happy-when-birds-camp-at-home"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773931876896.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong>बर्डपुर क्षेत्र के सूर्यकुड़िया निवासी कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हैं। इन्होंने अपने घर पर गौरैयों की सुरक्षा के लिए घोसले बना रखे हैं। पानी देने के लिए विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं, जिसमें दाना देकर उनका पेट भरने का प्रयास करते हैं। कंचन के घर पर हर रोज चिड़ियों का डेरा जमता है। उनके इस प्रयास से परिजनों के मन में खुशी होती है।कंचन वर्मा बताते हैं कि घर में हरियाली है। बच्चों से परिवार खुशहाल है, बर्डपुर क्षेत्र के कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा  गौरैया की सुरक्षा के लिए घर पर घोसला बनाने के बाद विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके लिए रोज दाने का बंदोबस्त कटोरे में ही कर देते हैं। उन्होंने बताया कि कई साल से गौरैयों संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं। अपने घर की छत पर गौरेया के दाने-पानी के लिए विशेष इंतजाम किया है। वह बताते हैं कि सुबह में  जब चिड़ियों का डेरा घर पर होता है तो यह मन को सुखद अहसास कराता है।  उन्होंने कहा कि  पंक्षी प्रेमियों से अपील की कि प्लास्टिक के डिब्बों या लकड़ी के बने घोसले ऐसे स्थान पर लगा सकते हैं जहां पक्षियों को आने-जाने में आसानी हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खुद ऐसा करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। जब लोग गौरैया का ख्याल रखेंगे तो आंगन में जरूर फुदकेगी और आपके मन को खुशी मिलेगी सुरक्षा की दृष्टि से इस बात का ख्याल रखें कि बिल्ली की पहुंच न हो। इसके अलावा जिस स्थान पर घोसला हो वहां छत के पंखे दूरी पर हों। इसके साथ ही गौरैया के लिए दाना-पानी का ध्यान रखते हैं </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173658/kanchan-verma-feels-happy-when-birds-camp-at-home</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173658/kanchan-verma-feels-happy-when-birds-camp-at-home</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:37:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1773931876896.jpg"                         length="132996"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        