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                <title>Medical Negligence - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Medical Negligence RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>उपचार के दौरान युवक की मौत, परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format1"><strong>बिसवां, सीतापुर-कुलदीप अवस्थी </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">कस्बा बिसवां के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान 35 वर्षीय युवक की मौत हो जाने से परिजनों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने चिकित्सक पर उपचार में लापरवाही बरतने और गंभीर स्थिति के बावजूद समय रहते उच्च केंद्र रेफर न करने का आरोप लगाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार ग्राम कोटरा, थाना बिसवां निवासी सुनीता पत्नी छोटेलाल भार्गव ने पुलिस को दी सूचना में बताया कि उनके पति छोटेलाल भार्गव (35) को पीलिया की बीमारी के उपचार के लिए मोहल्ला शंकरगंज स्थित सीता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को उपचार के दौरान उनकी मौत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184037/young-man-dies-during-treatment-family-members-accuse-doctor-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-24-at-19.33.28.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1"><strong>बिसवां, सीतापुर-कुलदीप अवस्थी </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">कस्बा बिसवां के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान 35 वर्षीय युवक की मौत हो जाने से परिजनों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने चिकित्सक पर उपचार में लापरवाही बरतने और गंभीर स्थिति के बावजूद समय रहते उच्च केंद्र रेफर न करने का आरोप लगाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार ग्राम कोटरा, थाना बिसवां निवासी सुनीता पत्नी छोटेलाल भार्गव ने पुलिस को दी सूचना में बताया कि उनके पति छोटेलाल भार्गव (35) को पीलिया की बीमारी के उपचार के लिए मोहल्ला शंकरगंज स्थित सीता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मृतक के परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने समय रहते बेहतर उपचार के लिए रेफर नहीं किया, जिससे उनकी जान चली गई। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एक दिन पहले ही बाहर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की सलाह दे दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा की कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। पुलिस के अनुसार मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह सामान्य है तथा किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 22:55:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाज सरकारी, दवा बाजार से ! विक्रमजोत सीएचसी पर मरीजों के गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों पर मरीजों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सरकारी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं दी जातीं और अधिकांश दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने के लिए लिख दी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सरोज देवी, अनीता, कमला, राम करन और गोविंद प्रसाद सहित कई मरीजों ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से इलाज कराने आते हैं कि उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सुविधा और निःशुल्क दवाएं मिलेंगी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं, जिससे गरीब और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181321/serious-allegations-of-patients-on-vikramjot-chc-for-treatment-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0017.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों पर मरीजों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में सरकारी दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं दी जातीं और अधिकांश दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने के लिए लिख दी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरोज देवी, अनीता, कमला, राम करन और गोविंद प्रसाद सहित कई मरीजों ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल में इस उम्मीद से इलाज कराने आते हैं कि उन्हें बेहतर चिकित्सकीय सुविधा और निःशुल्क दवाएं मिलेंगी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिख देते हैं, जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मरीजों का कहना है कि सरकार द्वारा अस्पतालों में मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को उनका लाभ मिलना चाहिए। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से सीएचसी विक्रमजोत की व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:44:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लाइफ लाइन हास्पिटल बस्ती की लापरवाही से एक नवजात ने तोड़ा दम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिलेमें निजी अस्पतालों के गोरखधंधे का शिकार फिर एक नवजात हुई और लाइफ लाइन हास्पिटल के कर्मचारियों  की जालसाजी से उसकी जान चली गयी और अस्पताल प्रशासन द्वारा मृतका के तीमारदारों से फोन कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है परन्तु पीड़ित पक्ष बिना कार्यवाही किसी भी शर्त को मानने को तैयार नहीं है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार माधुरी पत्नी दिलीप निवासी परसामाफी , विकास खण्ड सांथा जनपद - संतकबीर नगर ने 12 मार्च 2026 को दिन में 4 बजे प्रतापपुर के एक सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र में नवजात को जन्म दिया। स्वास्थ्य केन्द्र पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174706/a-newborn-died-due-to-negligence-of-life-line-hospital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260330-wa0078.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिलेमें निजी अस्पतालों के गोरखधंधे का शिकार फिर एक नवजात हुई और लाइफ लाइन हास्पिटल के कर्मचारियों  की जालसाजी से उसकी जान चली गयी और अस्पताल प्रशासन द्वारा मृतका के तीमारदारों से फोन कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है परन्तु पीड़ित पक्ष बिना कार्यवाही किसी भी शर्त को मानने को तैयार नहीं है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार माधुरी पत्नी दिलीप निवासी परसामाफी , विकास खण्ड सांथा जनपद - संतकबीर नगर ने 12 मार्च 2026 को दिन में 4 बजे प्रतापपुर के एक सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र में नवजात को जन्म दिया। स्वास्थ्य केन्द्र पर बताया गया कि बच्चा जन्म के बाद रोया नही , कोई समस्या न हो इसलिए बच्चे को कहीं स्पेस्लिस्ट डाक्टर को दिखाया जाए। इसके बाद नवजात के परिजन उसे लेकर नंदौर आए और वहाँ पर एक पैथालोजी में सीबीसी व अन्य जाँच करवाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रिपोर्ट में इंफेक्शन की पुष्टि हुई और तुरन्त ही परिजन वहाँ से चलकर लाइफ लाइन अस्पताल बस्ती पहुँचे व रात कबीर 10.30 बजे भर्ती करा दिया , यहीं से फिर अस्पताल वालों के लूटपाट का खेला शुरु हो जाता है। एक सप्ताह भर्ती रहने के बाद प्रतिदिन अस्पताल प्रशासन द्वारा हजारो से ऊपर की दवाएं क्रय करायी गयी परन्तु मरीज के स्थिति में कोई अच्छा सुधार नहीं आया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिनाँक 21 मार्च को नवजात के तीमारदारों द्वारा अस्पताल प्रशासन से मरीर को रिफर करने की बात की गयी परन्तु अस्पताल के जिम्मेदारों द्वारा तीमारदारों को समझाया गया कि आज तक का जो हिसाब रुपया 36000 हजार बन रहा है उसे जमा करा दो बच्चा ठीक है दो चार दिन और रहो उसका कोई चार्ज नहीं देना पड़ेगा इसके बाद बच्चा पूर्णतः स्वस्थ्य हो जायेगा और हम उसे डिस्चार्ज कर देंगें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धीरे धीरे बच्चे की हालत  बिगड़ती गयी और दिनांक 28 मार्च दिन शनिवार को अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीज के तीमारदारों के पास फोन करके बताया गया कि आपका बच्चा स्वस्थ्य हो गया है आकर डिस्चार्ज करा लीजिए और तीमारदारों के आते ही पैसे की माँग करते हुए रुपये 7000 का और भुगतान कराया गया और आनन - फानन में मरीज को यह कहते हुए डिस्चार्ज कर दिया गया कि बच्चा स्वस्थ्य हो गया है इसे ले जाइए । घर पहुंचते ही बच्चा सीरियस होता गया और अगले दिन अर्थात् 29 मार्च को दम तोड़ दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बच्चे की मौत की खबर जब लाइफ लाइन हॉस्पिटल  को लगी तभी से अस्पताल प्रशासन व गोल्डी नामक कर्मचारी मामले को दबाने में लगे हैं । यद्यपि परिजन कार्यवाही के सिवाय किसी शर्त पर मानने को तैयार नहीं हैं और परिजन यहाँ तक कह रहे  हैं कि हमने खेत गिरवी रखकर  बच्चे की दवा कराया और अस्पताल वाले हमसे हमारा बच्चा भी छीन लिए और ऊपर से कर्ज का बोझ और लद गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लाइफ लाइन हॉस्पिटल के लिए यह कोई नयी बात नहीं है बिना जाँच ही तीमारदारों से जांच के पैसे जबरदस्ती जमा कराएं जाते हैं । पीड़ित दिलीप व माधुरी तथा अन्य तीमारदारों ने लाइफ लाइन हॉस्पिटल पर कठोर कार्यवाही करते हुए दवा के नाम पर गलत तरीके से वसूले गए पैसे को वापस कराने की मांग जिला प्रशासन से किया है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 20:04:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गर्भवती नाबालिग की असंवेदनशील काउंसलिंग के लिए मेडिकल बोर्ड को फटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते मेडिकल बोर्ड और चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएएमओ), हाथरस को तब फटकारा, जब वे एक समय-संवेदनशील रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में लगभग 30 हफ़्ते की गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भपात की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता के प्रति उनकी असंवेदनशीलता पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की: "आज, याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से मिले निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि मेडिकल बोर्ड बस उसके पास गया और उससे कहा,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173554/allahabad-high-court-reprimands-the-medical-board-for-insensitive-counseling"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/allahabad-high-court3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते मेडिकल बोर्ड और चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएएमओ), हाथरस को तब फटकारा, जब वे एक समय-संवेदनशील रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में लगभग 30 हफ़्ते की गर्भावस्था के उन्नत चरण में गर्भपात की मांग की गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता के प्रति उनकी असंवेदनशीलता पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की: "आज, याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से मिले निर्देशों के आधार पर कोर्ट को सूचित किया कि मेडिकल बोर्ड बस उसके पास गया और उससे कहा, 'आपका ख्याल रखा जाएगा'। इसके अलावा कुछ नहीं कहा; और अब उपर्युक्त रिपोर्ट जमा कर दी गई, जो मेडिकल बोर्ड की असंवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।"</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने पहले सीएमओ, हाथरस को 'युद्ध स्तर' पर एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। इस बोर्ड को याचिकाकर्ता को गर्भपात की स्थिति में उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले परिणामों के बारे में परामर्श देना था। साथ ही यह भी समझाना था कि यदि वह बच्चे को जन्म देने का विकल्प चुनती है तो उस पर न तो चिकित्सा खर्च की कोई ज़िम्मेदारी होगी और न ही बच्चे की, जिसे गोद दे दिया जाएगा; और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी राज्य की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने गौर किया कि विशिष्ट निर्देशों के बावजूद, "मेडिकल बोर्ड की जो रिपोर्ट हमारे सामने रखी गई, उसमें हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, HIV, HBs, Ag, और HCV से संबंधित जांचों के अलावा; और भ्रूण की गर्भावस्था की अवधि से संबंधित जांचों के अलावा, कहीं भी यह संकेत नहीं मिलता कि याचिकाकर्ता ने गर्भपात करवाने या गर्भावस्था जारी रखने की अपनी इच्छा के बारे में क्या कहा था।"</p>
<p style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि पहले याचिकाकर्ता के वकील ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि हाईकोर्ट द्वारा कोई सदस्य नामित नहीं किया जाता है तो पैनल असंवेदनशील हो सकता है, कोर्ट ने पाया कि मेडिकल बोर्ड ने वास्तव में असंवेदनशील तरीके से काम किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने जे एन  कॉलेज अस्पताल, अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय , अलीगढ़ के प्रिंसिपल को एक आवश्यक पक्ष के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। इसने DALSA, हाथरस के सचिव को तत्काल एक बैठक आयोजित करने और पहले से गठित मेडिकल बोर्ड में J.N. कॉलेज, अलीगढ़ के प्रिंसिपल के परामर्श से मनोवैज्ञानिक को शामिल करने का निर्देश दिया</p>
<p style="text-align:justify;">जहाँ गर्भपात से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाना हो। या (ii) क्या लीगल सर्विसेज़ कमेटी के किसी पैनल वकील को नियुक्त करना संभव है, जो उपर्युक्त कमेटी के कार्यों का समन्वय करे और उसकी अध्यक्षता करे। साथ ही सीधे संबंधित अदालत को रिपोर्ट करे? यह उन मामलों में किया जा सकता है, जहां गर्भपात के लिए याचिकाएं विचाराधीन हों और मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगने का निर्देश जारी किया गया हो।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 21:09:58 +0530</pubDate>
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