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                <title>आपदा प्रबंधन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>आपदा प्रबंधन RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>तेज आंधी और बारिश से बस्ती में मचा हड़कंप, कई जगह गिरे पेड़ और यूनीपोल, सीआरओ ने संभाली राहत कार्यों की कमान</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> सोमवार को बस्ती शहर में आई तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। अचानक मौसम के बदले मिजाज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों में पेड़ और बिजली के पोल गिरने की घटनाएं सामने आईं। कई स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध हो गईं, जबकि महिला पीजी कॉलेज के पास एक विशालकाय पेड़ गिरने से कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में एक युवक घायल हो गया, जिसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया।घटना की सूचना मिलते ही मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) कीर्ति प्रकाश भारती मौके पर पहुंच गए और स्वयं राहत एवं बचाव</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181957/there-was-a-stir-in-the-colony-due-to-strong"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260622-wa0057.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> सोमवार को बस्ती शहर में आई तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। अचानक मौसम के बदले मिजाज के बीच शहर के विभिन्न इलाकों में पेड़ और बिजली के पोल गिरने की घटनाएं सामने आईं। कई स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध हो गईं, जबकि महिला पीजी कॉलेज के पास एक विशालकाय पेड़ गिरने से कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में एक युवक घायल हो गया, जिसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया।घटना की सूचना मिलते ही मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) कीर्ति प्रकाश भारती मौके पर पहुंच गए और स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की कमान संभाल ली। उनके साथ संबंधित उपजिलाधिकारी, एडीएम, नगर पालिका प्रशासन तथा बिजली विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर तत्काल राहत कार्य शुरू कराया।</div>
<div style="text-align:justify;">महिला पीजी कॉलेज के निकट पेड़ गिरने से एक युवक घायल हो गया। मानवता का परिचय देते हुए सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती ने घायल युवक को अपनी सरकारी गाड़ी से जिला अस्पताल पहुंचाया। समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण घायल का तत्काल उपचार शुरू हो सका। चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।तेज हवा और बारिश का असर शहर के प्रतिष्ठित कंपनी बाग क्षेत्र में भी देखने को मिला, जहां लोक निर्माण विभाग द्वारा स्थापित एक बड़ा यूनीपोल धराशायी हो गया। यूनीपोल गिरने की घटना के बाद इसकी गुणवत्ता और निर्माण मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यूनीपोल मजबूत और मानकों के अनुरूप स्थापित किया गया होता तो सामान्य बारिश और हवा में इसके गिरने की नौबत नहीं आती।</div>
<div style="text-align:justify;">शहर के कई अन्य क्षेत्रों में भी पेड़ बिजली के पोल और तारों के साथ सड़क पर गिर गए, जिससे विद्युत आपूर्ति और आवागमन बाधित हो गया। किसी बड़े हादसे से बचने के लिए सीआरओ ने सुरक्षा की दृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए। इसके बाद बिजली विभाग और नगर पालिका की टीमों ने संयुक्त रूप से पेड़ों को हटाने तथा विद्युत व्यवस्था को सुरक्षित करने का कार्य शुरू किया।</div>
<div style="text-align:justify;">राहत एवं बचाव अभियान के दौरान सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती लगातार मौके पर मौजूद रहे और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और सामान्य जनजीवन को जल्द से जल्द बहाल करना है। अधिकारियों की निगरानी में सड़कों से गिरे पेड़ों को हटाकर आवागमन बहाल कराने का कार्य तेजी से कराया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">तेज बारिश और आंधी के बीच प्रशासन की त्वरित सक्रियता से संभावित बड़े हादसों को टालने में सफलता मिली। हालांकि मौसम के इस अचानक बदले रुख ने एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों और सार्वजनिक ढांचों की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दिनांक: 22 जून 2026</div>
<div style="text-align:justify;">जिले के कलवारी क्षेत्र से भी तेज हवा के साथ बारिश और ओले गिरने की सूचना प्राप्त हुई है |समाजसेवी डॉक्टर प्रेम प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सोमवार दोपहर कलवारी क्षेत्र में अचानक तेज हवा के साथ जमकर बारिश हुई और ओले भी गिरे |</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 19:11:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ के अलीगंज में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग, तार के सहारे कूदकर बचाई जान, कई झुलसे, कई लोगों के फंसे होने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, संवाददाता।</strong></blockquote>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इमारत की तीसरी मंजिल पर स्थित गेमिंग जोन और सॉफ्टवेयर ऑफिस में लगी, जिसने देखते ही देखते पूरे फ्लोर को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय कार्यालय में बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जान बचाने के लिए कई लोगों को इमारत के बाहर लटक रहे तार के सहारे नीचे उतरना पड़ा, जबकि कुछ लोगों ने दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181927/huge-fire-in-a-multi-storey-building-in-aliganj-lucknow-lives"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/22_06_2026-lucknow_fire_news_m.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, संवाददाता।</strong></blockquote>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इमारत की तीसरी मंजिल पर स्थित गेमिंग जोन और सॉफ्टवेयर ऑफिस में लगी, जिसने देखते ही देखते पूरे फ्लोर को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय कार्यालय में बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जान बचाने के लिए कई लोगों को इमारत के बाहर लटक रहे तार के सहारे नीचे उतरना पड़ा, जबकि कुछ लोगों ने दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही पूरे परिसर में धुआं भर गया और लोगों के बीच भगदड़ मच गई। बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता न मिलने पर कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इमारत से बाहर निकलने का प्रयास किया। इस दौरान कई लोग घायल हो गए, जिनमें एक युवती के भी घायल होने की सूचना है। कुछ घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह कार्यालय अलीगंज स्थित एक पेट शॉप के ऊपर संचालित हो रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग तीसरी मंजिल से शुरू हुई और तेजी से फैलती चली गई। उस समय कार्यालय में 30 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे। अचानक आग लगने से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को जानकारी दी। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग लगने के बाद कुछ समय तक दमकल की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंच सकीं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। बाद में कई दमकल वाहन घटनास्थल पर पहुंचे और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिलहाल दमकल विभाग की टीमें आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि इमारत के भीतर अभी भी कुछ लोग फंसे हो सकते हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 6 से 7 लोगों के अंदर फंसे होने की संभावना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। बचाव दल लगातार तलाशी और राहत कार्य में जुटा हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने को कहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दमकल विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन आग पर पूरी तरह काबू पाने और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकास की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के संकेत दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समाचार लिखे जाने तक राहत एवं बचाव कार्य जारी था और दमकल कर्मी आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:42:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौत की फैक्ट्री ने खोली व्यवस्था की पोल,सबूतों के बाद भी यदि जिम्मेदार बच जाएं तो न्याय अधूरा रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">जयपुर के खोह नागोरियान क्षेत्र में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि यह हमारे प्रशासनिक तंत्र, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की वास्तविक तस्वीर को सामने लाने वाली त्रासदी है। आठ लोगों की दर्दनाक मौत, जिनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल था, केवल आंकड़ा नहीं है बल्कि उन परिवारों की जिंदगी का वह अंधेरा अध्याय है जिसे वे कभी भुला नहीं पाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसी अवैध गतिविधियां वर्षों तक प्रशासन और पुलिस की नजरों से कैसे बची रहती</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180920/the-death-factory-has-opened-the-systems-polls-even-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/feec3084-87ae-405c-9cf7-318a98f01ecb.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">जयपुर के खोह नागोरियान क्षेत्र में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि यह हमारे प्रशासनिक तंत्र, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की वास्तविक तस्वीर को सामने लाने वाली त्रासदी है। आठ लोगों की दर्दनाक मौत, जिनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल था, केवल आंकड़ा नहीं है बल्कि उन परिवारों की जिंदगी का वह अंधेरा अध्याय है जिसे वे कभी भुला नहीं पाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसी अवैध गतिविधियां वर्षों तक प्रशासन और पुलिस की नजरों से कैसे बची रहती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिस मकान में यह फैक्ट्री संचालित हो रही थी, वह रिहायशी इलाके के बीचोंबीच स्थित था। वहां करीब डेढ़ सौ मकानों में छह सौ से अधिक लोग रहते हैं। ऐसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में लगभग पचास किलो बारूद का भंडारण और पटाखों का निर्माण किसी भी समय बड़े हादसे को निमंत्रण देने जैसा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि फैक्ट्री के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था। मकान किराए पर दिया गया था, लेकिन न तो पुलिस सत्यापन कराया गया और न ही विधिवत किरायानामा तैयार किया गया। यह स्थिति बताती है कि नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद सामने आए तथ्यों ने व्यवस्था की कई परतों को उजागर किया है। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री पिछले कई वर्षों से संचालित थी और स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी थी। यदि आसपास रहने वाले लोग जानते थे कि यहां पटाखों का काम होता है तो फिर पुलिस, प्रशासन और अन्य जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। थाना क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी होती है। बीट कांस्टेबल से लेकर थाना प्रभारी तक की जवाबदेही तय होती है। ऐसे में यह मान लेना कठिन है कि किसी को इसकी जानकारी नहीं थी।</div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि हादसे के समय वहां काम करने वाले मजदूर बेहद असुरक्षित परिस्थितियों में कार्य कर रहे थे। बारूद के बीच मजदूरों से काम लिया जा रहा था। वहीं खाना भी बनाया जाता था और घरेलू गैस सिलेंडर भी रखा हुआ था। सुरक्षा मानकों की ऐसी घोर अनदेखी किसी भी क्षण विनाश का कारण बन सकती थी। जब आग लगी तो मजदूर जान बचाने के लिए बाहर भागे। कई लोग बुरी तरह झुलस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उनके कपड़ों के साथ चमड़ी तक निकल गई थी। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने वाला है।</div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद राहत और बचाव कार्यों को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शुरुआती समय में आग इतनी भयावह थी कि घटनास्थल के निकट पहुंचना मुश्किल था। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घायलों को बाहर निकाला। यदि स्थानीय नागरिक साहस नहीं दिखाते तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी। यह तथ्य भी चिंताजनक है कि इतने बड़े हादसे के बावजूद घटनास्थल पर तत्काल और व्यवस्थित आपदा प्रबंधन व्यवस्था दिखाई नहीं दी। ऐसी घटनाओं में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन अक्सर हमारी व्यवस्थाएं इन्हीं क्षणों में कमजोर पड़ जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">यह पहला अवसर नहीं है जब अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ हो। देश के विभिन्न हिस्सों में हर वर्ष ऐसे हादसे होते हैं और दर्जनों लोग जान गंवाते हैं। कुछ महीने पहले खैरथल-तिजारा क्षेत्र में भी इसी प्रकार का हादसा हुआ था। उसके बाद हजारों फैक्ट्रियों की जांच की गई और बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए। लेकिन सवाल यह है कि नोटिस देने के बाद क्या हुआ। यदि कार्रवाई प्रभावी होती तो शायद जयपुर की यह घटना टाली जा सकती थी। केवल नोटिस जारी कर देना प्रशासनिक सफलता नहीं कहलाता। वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब नियमों का पालन सुनिश्चित हो और अवैध इकाइयों को समय रहते बंद कराया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण विषय जवाबदेही का है। अक्सर बड़े हादसों के बाद जांच समितियां गठित कर दी जाती हैं, रिपोर्ट मांगी जाती है और कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। मृतकों के परिजनों को मुआवजा देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है। लेकिन मुआवजा कभी किसी की जिंदगी वापस नहीं ला सकता। न्याय तभी होगा जब उन सभी लोगों की जिम्मेदारी तय होगी जिनकी लापरवाही या मिलीभगत के कारण यह अवैध कारोबार फलता-फूलता रहा। फैक्ट्री संचालक, मकान मालिक, निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी और नियमों के पालन की जांच करने वाले विभाग सभी की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;">समाज के सामने भी आत्ममंथन का अवसर है। कई बार लोग अपने आसपास चल रही अवैध गतिविधियों को देखकर भी चुप रहते हैं। भय, उदासीनता या व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण शिकायत नहीं करते। परिणाम यह होता है कि एक दिन वही गतिविधि किसी बड़े हादसे का रूप ले लेती है। नागरिक सतर्कता और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों मिलकर ही ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">आज जरूरत केवल शोक व्यक्त करने की नहीं है बल्कि कठोर और निर्णायक कार्रवाई की है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए सबसे बड़ी सांत्वना यही होगी कि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े। यदि इस घटना के स्पष्ट सबूतों और तथ्यों के बावजूद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को और कमजोर करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">खोह नागोरियान की यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और जवाबदेही के अभाव का परिणाम कितना भयावह हो सकता है। आठ लोगों की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है। अब देखना यह है कि जांच और कार्रवाई का वादा केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है या फिर वास्तव में दोषियों को सजा देकर यह संदेश दिया जाता है कि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है। पीड़ित परिवारों को वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब न्याय केवल कागजों पर नहीं बल्कि धरातल पर दिखाई देगा।</div>
<div style="text-align:justify;">   </div>
<div style="text-align:justify;">    <strong> *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
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<div class="adL"> </div>
</div>
<div class="adL"> </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:48:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व रेडक्रॉस दिवस पर रक्तदान शिविर एवं पोषण आहार वितरण कार्यक्रम आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही : </strong>इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, भदोही शाखा द्वारा विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर महाराजा चेत सिंह चिकित्सालय, ज्ञानपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 12 यूनिट रक्तदान किया गया। इसके उपरांत रेडक्रॉस सोसाइटी कार्यालय पर विश्व रेडक्रॉस दिवस समारोह का आयोजन संपन्न हुआ।<br />कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी श्री शैलेष कुमार ने कहा कि युद्ध एवं आपदा के समय रेड क्रॉस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रेडक्रॉस संस्था सेवा भावना के साथ आपदा एवं संकट की परिस्थितियों में निरंतर कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस को आर्थिक एवं सामाजिक रूप</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178629/blood-donation-camp-and-nutritional-food-distribution-program-organized-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260508-wa0032.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही : </strong>इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, भदोही शाखा द्वारा विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर महाराजा चेत सिंह चिकित्सालय, ज्ञानपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 12 यूनिट रक्तदान किया गया। इसके उपरांत रेडक्रॉस सोसाइटी कार्यालय पर विश्व रेडक्रॉस दिवस समारोह का आयोजन संपन्न हुआ।<br />कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी श्री शैलेष कुमार ने कहा कि युद्ध एवं आपदा के समय रेड क्रॉस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रेडक्रॉस संस्था सेवा भावना के साथ आपदा एवं संकट की परिस्थितियों में निरंतर कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने हेतु और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए तथा उनके सामाजिक उत्थान के लिए आगे आना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रेडक्रॉस शासन और जनता के मध्य एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य कर रही है तथा जनपद में संस्था द्वारा किए जा रहे कार्य अत्यंत प्रशंसनीय हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"><br />इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री शैलेष कुमार द्वारा रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से 100 क्षय रोग पीड़ितों को पोषण आहार वितरित किया गया तथा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई। उन्होंने कहा कि नियमित दवा एवं संतुलित पोषण आहार से क्षय रोग से शीघ्र मुक्ति संभव है। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में रेडक्रॉस सोसाइटी एवं अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से अब तक 2000 से अधिक पोषण पोटलियों का वितरण किया जा चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"><br />कार्यक्रम के दौरान पोषण पोटली वितरण में आर्थिक सहयोग प्रदान करने वाले आर डी डायग्नोस्टिक, सौरभ डायग्नोस्टिक, कान्हा अल्ट्रासाउंड एवं सुभद्रा डायग्नोस्टिक के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।<br />मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक ने कहा कि चिकित्सा विभाग रेडक्रॉस सोसाइटी के सभी जनकल्याणकारी कार्यों में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।<br />इस अवसर पर श्री हरेंद्र प्रताप सिंह ने रेडक्रॉस भदोही की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जबकि मोहम्मद इरशाद खान ने रेडक्रॉस की स्थापना एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत श्री हरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा बैज लगाकर किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"><br />कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी श्री बाल गोविंद शुक्ला, डॉ. ओ.पी. शुक्ला, डॉ. विवेक श्रीवास्तव, अभय श्रीवास्तव, एम.आई. खान, सौरभ जायसवाल, डॉ. आर.एन. सिंह, डॉ. राजेश कुमार, श्वेता जायसवाल, डॉ. जया त्रिपाठी, मनीष मिश्रा, अखिलेश शुक्ला, मुकेश कुमार, मनोज कुमार यादव, प्रमोद दुबे, डॉ. जयप्रकाश, रामपाल, अनिल कुमार दुबे, सुषमा, संध्या मौर्य, डॉ. घनश्याम दास गुप्ता अध्यक्ष नगर पंचायत, माबूद खां सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।<br />कार्यक्रम का संचालन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष श्री हरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा किया गया। </div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 20:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> जीवन की कीमत पर मौत की अठखेलियाँ </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">सिर्फ पंद्रह दिन के अन्तराल पर जल पर्यटन के दौरान खुशिया मना रहे बेगुनाह पर्यटकों के मौत के आगोश में समाने की दूसरी वारदात सामने आई है इससे पहले 10 अप्रैल को यूपी के वृंदावन में एक नाव पलटने से सोलह धार्मिक पर्यटको की नदी में डूबकर मौत हुई। पंजाब के लुधियाना और मुक्तेश्वर से श्रद्धालुओं का दल मथुरा वृंदावन के दर्शन करने के लिए पहुंचा था. 10 अप्रैल को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर निधिवन घूमने के बाद श्रद्धालु यमुना नदी में सैर करने की इच्छा जताई. 37 श्रद्धालु दो नाव में केसी घाट से घूमने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178077/hj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;">सिर्फ पंद्रह दिन के अन्तराल पर जल पर्यटन के दौरान खुशिया मना रहे बेगुनाह पर्यटकों के मौत के आगोश में समाने की दूसरी वारदात सामने आई है इससे पहले 10 अप्रैल को यूपी के वृंदावन में एक नाव पलटने से सोलह धार्मिक पर्यटको की नदी में डूबकर मौत हुई। पंजाब के लुधियाना और मुक्तेश्वर से श्रद्धालुओं का दल मथुरा वृंदावन के दर्शन करने के लिए पहुंचा था. 10 अप्रैल को वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर निधिवन घूमने के बाद श्रद्धालु यमुना नदी में सैर करने की इच्छा जताई. 37 श्रद्धालु दो नाव में केसी घाट से घूमने के लिए निकले थे.तभी स्टीमर पलट गया और सोलह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया और ठीक बीस दिन के अंतराल के बाद </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में बरगी डैम के पास हुआ क्रूज नाब हादसा केवल एक दुःखद दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी पर्यटन व्यवस्था, सुरक्षा संस्कृति और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली त्रासदी है। एक सुखद सैर के लिए निकले लोग कुछ ही मिनटों में मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष करने लगे। नौ लोगों की मौत, कई लोगों का लापता होना और रेस्क्यू के दौरान सामने आई मां-बेटे की वह हृदयविदारक तस्वीर, जिसमें मौत के बाद भी मां अपने मासूम बच्चे को सीने से लगाए रही, किसी भी संवेदनशील समाज को भीतर तक झकझोर देने के लिए पर्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह दृश्य केबल मातृत्व की अमर करुणा का प्रतीक नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का मौन अभियोग भी है। बरगी डैम लंबे समय से पर्यटन का आकर्षण रहा है। वर्ष 2006 से यहां क्रूज सेवा संचालित हो रही थी और इसे सुरक्षित माना जाता था। लेकिन किसी सेवा का लंबे समय तक चलना उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकता। सुरक्षा कोई दिखावटी व्यवस्था नहीं, बल्कि लगातार सतर्कता, प्रशिक्षण, उपकरणों की तैयारी और मौसम संबंधी चेतावनियों के पालन से जुड़ी जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस हादसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब मौसम विभाग ने एक दिन पहले 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं की चेतावनी दी थी, तब क्रूज संचालन की अनुमति क्यों दी गई? क्या पर्यटन से होने वाली  आय यात्रियों की जान से अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी? घटना के समय क्रूज में लगभग 40 यात्री सवार थे, जबकि उसकी क्षमता करीब 90 लोगों की बताई गई। पहली नजर में यह लग सकता है कि क्षमता से कम यात्री होने के कारण जोखिम कम होना चाहिए था, लेकिन नाव या क्रूज की सुरक्षा केवल यात्रियों की संख्या से तय नहीं होती। मौसम, हवा की गति, पानी की स्थिति, यात्रियों की आवाजाही, संतुलन और आपातकालीन तैयारी, ये सभी कारक समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। जब तेज तूफान आया और यात्री ऊपर वाले डेक पर चले गए, तब वजन का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घबराहट में लोगों का एक तरफ से दूसरी तरफ भागना स्थिति को और खतरनाक बना गया। लेकिन यही तो वह स्थिति थी जिसके लिए क्रूज प्रबंधन को पहले से तैयार होना चाहिए था। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि हादसे के समय लाइफ जैकेट यात्रियों के शरीर पर नहीं, बल्कि सीलबंद पन्नियों में बंद थीं। यह दृश्य सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविकता को उजागर करता है। लाइफ जैकेट कोई सजावटी वस्तु नहीं है जिसे आपातकाल आने पर पैकेट से निकाला जाए। ऐसे जल परिवहन में यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले ही लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य होना चाहिए। यदि क्रूज के कर्मचारी हादसे के समय सीलबंद पैकेट फाड़कर जैकेट निकाल रहे थे, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की खुली अवहेलना है। जब तक उपकरण उपयोग योग्य स्थिति में यात्रियों तक नहीं पहुंचते, तब तक उनका होना भी न होने के बराबर है। चश्मदीदों के अनुसार, करीब आधे घंटे तक लोग पानी और मौत से लड़ते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आधा घंटा उन परिवारों के लिए जीवन का सबसे भयावह समय रहा होगा। किसी ने सीट पकड़ी होगी, किसी ने अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की होगी, कोई मदद के लिए चीखा होगा, कोई प्रार्थना कर रहा होगा। लेकिन ऐसी स्थिति में सामान्य यात्री क्या कर सकता है? उसका जीवन पूरी तरह उन लोगों पर निर्भर होता है जिन पर संचालन, सुरक्षा और बचाव की जिम्मेदारी होती है। यदि वे प्रशिक्षित न हों, यदि सुरक्षा अभ्यास नियमित न हो, यदि आपातकालीन योजना केवल कागज पर हो, तो दुर्घटना के समय पूरी व्यवस्था बिखर जाती है। हादसे के बाद प्रशासन ने कुछ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कीं, कुछ अधिकारियों को निलंचित किया और उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। यह कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इतनी कार्रवाई पर्यास है? हर बड़े हादसे के बाद जांच समितियां बनती हैं, निलंबन होते हैं, बयान जारी होते हैं और भविष्य में सख्त नियम बनाने की घोषणा की जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन कुछ समय बाद वही डिलाई, वही लापरवाही और वहीं भूल फिर किसी दूसरी जगह नए हादसे का कारण बन जाती है। देश में अनेक दुर्घटनाओं का इतिहास बताता है कि हमारी समस्या नियमों की कमी से अधिक, नियमों के पालन की कमी है। पर्यटन विभाग द्वारा क्रूज संचालन के लिए नए और सख्त नियम तैयार करने की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन यह घोषणा तभी सार्थक होगी जब इसे जमीन पर ईमानदारी से लागू किया जाए। हर जल पर्यटन सेवा में मौसम संबंधी चेतावनी के आधार पर संचालन रोकने का स्पष्ट नियम होना चाहिए। क्रूज या नाव में सवार होने से पहले प्रत्येक यात्री के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होनी चाहिए। यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले दो मिनट का सुरक्षा निर्देश दिया जाना चाहिए। क्रूज स्टाफ को नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल से गुजरना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर यात्रा से पहले सुरक्षा उपकरणों की जांच होनी चाहिए और उसका रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए। केवल टिकट बेचकर यात्रियों को पानी में भेज देना पर्यटन नहीं, गैरजिम्मेदारी है। इस हादसे ने यह भी दिखाया कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा को अक्सर औपचारिकता समझ लिया जाता है। चमकदार रिसॉर्ट, सुंदर टिकट काउंटर, आकर्षक प्रचार और मनोरंजन सुविधाएं तो बना दी जाती हैं, लेकिन सबसे जरूरी व्यवस्था मानव जीवन की सुरक्षा पीछे छूट जाती है। जब तक सुरक्षा को खर्च नहीं, निवेश माना जाएगा, तब तक ऐसे हादसों को रोका नहीं जा सकेगा। पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षित वापसी से मापी जानी चाहिए। बरगी हादसा हमें यह याद दिलाता है कि लापरवाही कभी छोटी नहीं होती। बह धीरे-धीरे जमा होती है और एक दिन त्रासदी बनकर सामने आती है। मौसम चेतावनी को नजरअंदाज करना, यात्रियों को बिना लाइफ जैकेट यात्रा कराना, आपातकालीन तैयारी की कमी, प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव और निगरानी की ढिलाई, ये सब मिलकर मौत का कारण बने। इसलिए जिम्मेदारी केवल एक पायलट, हेल्पर या टिकट प्रभारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए। अब जरूरी है कि इस हादसे को केवल शोक और मुआवजे तक सीमित न किया जाए। मृतकों के परिवारों को न्याय, घायलों को सहायता और लापता लोगों के परिजनों को हर संभव सहयोग मिलना चाहिए। साथ ही, ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें किसी भी पर्यटन सेवा को मौसम चेतावनी, सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ के बिना संचालन की अनुमति न मिले। बरगी डैम की त्रासदी से यदि व्यवस्था ने सचमुच सबक नहीं लिया, तो यह उन नौ मृतकों की स्मृति के साथ भी अन्याय होगा। यह हादसा एक चेतावनी है, पर्यटन आनंद दे सकता है, लेकिन सुरक्षा के बिना वही आनंद मृत्यु का सफर बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बरगी की डूबी हुई नाव केवल पानी में नहीं डूबी; उसके साथ व्यवस्था की लापरवाही, सुरक्षा की खोखली तैयारी और जवाबदेही को कमी भी उजागर हो गई। अब जरूरत है कि यह हादसा केवल खबर बनकर न रह जाए, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव की शुरुआत बने।यदि इन हादसों से सरकारों ने कोई सबक नही लिया तो यह सिलसिला खत्म नही होगा क्या पर्यटक जान की कीमत पर मौत के साए में पर्यटन की अठखेलियाँ कर जान गंवाते रहेंगे? (लेखक राष्ट्रवादी चिंतक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीएम ने संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए दिया आवश्यक निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले में में संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु गुरूवार को जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक कलेक्टेªट सभागार में आयोजित की गयी।</div>
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<div style="text-align:justify;">बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को बाढ से पूर्व तैयारियों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिये गये। जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए समन्वित प्रयास एवं सर्तकता आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने अधिशासी अभियन्ता बाढ़ दिनेश कुमार को निर्देशित किया कि तटबंधो की मरम्मत, कटान संभावित स्थलों की पहचान तथा आवश्यक सुरक्षा कार्य शीघ्र पूर्ण</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177715/dm-gave-necessary-instructions-to-deal-effectively-with-possible-flood"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260430-wa0058.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले में में संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु गुरूवार को जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक कलेक्टेªट सभागार में आयोजित की गयी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को बाढ से पूर्व तैयारियों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिये गये। जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए समन्वित प्रयास एवं सर्तकता आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने अधिशासी अभियन्ता बाढ़ दिनेश कुमार को निर्देशित किया कि तटबंधो की मरम्मत, कटान संभावित स्थलों की पहचान तथा आवश्यक सुरक्षा कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जाय। साथ ही निचले एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हॉकन करने का भी निर्देश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सभी सीएचसी/पीएचसी को सक्रिय रखें, मेडिकल कैंप लगाने की व्यवस्था रखें तथा प्रत्येक बाढ़ चौकी पर स्वास्थ्य कर्मी तैनात करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान सांप काटने पर लगने वाले इंजेक्शन तथा अन्य जीवन रक्षक दवाएं, क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस घोल की समुचित व्यवस्था रखें। उन्होंने पशुपालन विभाग को निर्देशित किया कि समय से भूसा एवं चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा बाढ़ के समय में लगने वाले पशुओं के टीका की आपूर्ति सुनिश्चित कराएं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही अस्थायी गोशालाओं के लिए स्थल चिन्हित कर लें। उन्होंने आपूर्ति विभाग को निर्देशित किया कि शासन द्वारा निर्धारित मानक के अनुरूप बाढ़ राहत सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को बाढ़ के समय विद्युत आपूर्ति रोकने तथा उसे चालू करने में सतर्कता बरतने का विशेष निर्देश दिया है। समीक्षा में उन्होंने पाया कि जनपद में कुल 17 तटबंध है, जिनके मरम्मत एवं रख-रखाव का कार्य बाढ़ खंड प्रथम द्वारा किया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिशासी अभियन्ता दिनेश कुमार ने बताया कि जनपद में स्थित सभी तटबंधों के लिए बाढ़ खण्ड के सहायक अभियन्ता तथा अवर अभियन्ता की तैनाती करते हुए उनका मुख्यालय निर्धारित कर दिया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में सीडीओ सार्थक अग्रवाल, एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, सीटीओ अशोक कुमार प्रजापति, डीएफओ डा. शिरीन, सीएमओ डा. राजीव निगम, डीडीओ अजय कुमार सिंह, पीडी राजेश कुमार, उप जिलाधिकारी शत्रुध्न पाठक, मनोज प्रकाश, हिमांशु कुमार तथा सत्येन्द्र कुमार सिंह, डीएसओ विमल शुक्ला, ईओ नगरपालिका अंगद गुप्ता,  आपदा विशेषज्ञ रंजीत रंजन तथा विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहें।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:33:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम का विज्ञान: जो केवल बताता नहीं, जीवन बचाता है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षितिज पर अचानक छा जाने वाला घना अंधकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्र की गर्जन करती लहरें और प्रकृति की अनिश्चित चाल—मौसम का यह स्वरूप केवल परिवर्तन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि चेतावनी का संकेत भी है। </span>23 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का विश्व मौसम दिवस इसी संकेत को समझकर उसे मानव सुरक्षा में बदलने का सशक्त संदेश देता है। इस वर्ष की थीम “आज का अवलोकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कल की सुरक्षा” केवल शब्दों का संयोजन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आधुनिक विज्ञान की वह आधारशिला है जिस पर सुरक्षित भविष्य निर्मित होता है। आज पृथ्वी के हर कोने से एकत्रित होने वाला सूक्ष्म डेटा हमें</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173813/the-science-of-weather-that-doesnt-just-tell-saves-lives"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1280x720_1856267-1.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षितिज पर अचानक छा जाने वाला घना अंधकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्र की गर्जन करती लहरें और प्रकृति की अनिश्चित चाल—मौसम का यह स्वरूप केवल परिवर्तन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि चेतावनी का संकेत भी है। </span>23 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का विश्व मौसम दिवस इसी संकेत को समझकर उसे मानव सुरक्षा में बदलने का सशक्त संदेश देता है। इस वर्ष की थीम “आज का अवलोकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कल की सुरक्षा” केवल शब्दों का संयोजन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आधुनिक विज्ञान की वह आधारशिला है जिस पर सुरक्षित भविष्य निर्मित होता है। आज पृथ्वी के हर कोने से एकत्रित होने वाला सूक्ष्म डेटा हमें संभावित खतरों से पहले ही सतर्क कर देता है। यही वजह है कि मौसम विज्ञान अब सिर्फ पूर्वानुमान की सीमा में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन रक्षा के एक प्रभावी और अनिवार्य साधन के रूप में स्थापित हो चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति के रहस्यों को जानने की मानव जिज्ञासा ने ही विश्व मौसम दिवस की मजबूत नींव रखी। </span>23 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>1950 <span lang="hi" xml:lang="hi">को इसकी औपचारिक शुरुआत एक वैश्विक संगठन के रूप में हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने दुनिया के देशों को एक साझा मंच पर जोड़ा। इसका उद्देश्य स्पष्ट और व्यापक था—मौसम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु और जल संसाधनों को बेहतर ढंग से समझने के लिए सहयोग और सूचनाओं का मुक्त आदान-प्रदान सुनिश्चित करना। समय के साथ यह दिवस केवल औपचारिक आयोजन न रहकर एक प्रभावशाली जागरूकता अभियान बन गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह संदेश देता है कि प्रकृति को समझे बिना संतुलित विकास संभव नहीं। यह दिन उस ऐतिहासिक निर्णय की याद दिलाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब विश्व ने मौसम विज्ञान को मानव कल्याण का आधार स्वीकार किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज मौसम विज्ञान अत्याधुनिक तकनीकों से संचालित एक सशक्त और विस्तृत तंत्र बन चुका है। उपग्रहों की सतत निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रडार की सटीक प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री उपकरणों की सक्रियता और स्वचालित मौसम केंद्र मिलकर पृथ्वी के हर हिस्से पर नजर रखते हैं। प्रतिदिन एकत्रित विशाल आंकड़ों का विश्लेषण सुपर कंप्यूटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से किया जाता है। इनसे तैयार पूर्वानुमान केवल मौसम की जानकारी तक सीमित नहीं रहते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और आपदा प्रबंधन को भी स्पष्ट दिशा प्रदान करते हैं। यह तंत्र जितना जटिल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतना ही अनिवार्य भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसी के माध्यम से अनिश्चित परिस्थितियों को पहले से समझकर उनसे बचाव संभव होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">आज का अवलोकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कल की सुरक्षा” थीम इस पूरी व्यवस्था का मूल और प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत करती है। आज किया गया हर मापन और हर अवलोकन भविष्य के संभावित संकटों को टालने का मजबूत आधार बनता है। किसी छोटे गांव में दर्ज तापमान या समुद्र से प्राप्त एक संकेत भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। यह थीम स्पष्ट रूप से बताती है कि अवलोकन केवल वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। जब किसान मौसम के संकेतों को समझता है या सामान्य नागरिक चेतावनियों पर ध्यान देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब वह भी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बन जाता है। यह थीम विज्ञान और समाज के बीच एक सशक्त और आवश्यक सेतु का निर्माण करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर चेतावनी ही वह शक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने मौसम विज्ञान को जीवन रक्षक बना दिया है। प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली इस अवलोकन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम है। बीते दशकों में यह सिद्ध हो चुका है कि समय पर दी गई चेतावनी लाखों जानें बचा सकती है। पहले जहां प्राकृतिक आपदाएं अचानक विनाश लेकर आती थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं अब उनके आने से पहले ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल जनहानि कम होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक नुकसान भी नियंत्रित रहता है। आधुनिक तकनीक और सटीक डेटा के कारण अब चक्रवात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाढ़ और सूखे जैसी घटनाओं का पूर्वानुमान संभव हो गया है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर सही जानकारी कितनी निर्णायक हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निरंतर प्रगति के साथ भारत में मौसम विज्ञान एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहा है। भारत में मौसम विज्ञान का क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है और यह वैश्विक स्तर पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित आधुनिक उपकरण और अनुसंधान केंद्र निरंतर डेटा एकत्र कर रहे हैं। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान किसानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मछुआरों और आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहे हैं। विशेष रूप से आपदा के समय यह तंत्र जीवन रक्षक बन जाता है। भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक नेटवर्क में भी सक्रिय योगदान दे रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व मौसम दिवस हमें व्यक्तिगत स्तर पर भी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। आज के डिजिटल युग में हर व्यक्ति के हाथ में ऐसी तकनीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके माध्यम से वह मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकता है और दूसरों तक पहुंचा सकता है। यदि हम समय-समय पर मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक रहें और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हम इस वैश्विक प्रयास का हिस्सा बन सकते हैं। यह दिवस हमें यह समझाता है कि सुरक्षित भविष्य केवल सरकारों या वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय की मांग को समझने वाला यह दिवस केवल एक तिथि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सोच बदलने का सशक्त संदेश है—ऐसा दृष्टिकोण जो वर्तमान के ज्ञान को भविष्य की सुरक्षा में बदलने की क्षमता रखता है। विश्व मौसम दिवस हमें याद दिलाता है कि आज का हर अवलोकन आने वाले कल को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। जब विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक और जागरूकता एक साथ जुड़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ऐसा विश्व संभव होता है जहां आपदाएं भय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि तैयारी का संकेत बन जाती हैं। यही इस दिवस का सार है कि हम प्रकृति को समझें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे सीखें और उसके साथ संतुलन बनाकर एक सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सशक्त और स्थायी भविष्य की ओर आगे बढ़ें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 17:31:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दैवीय आपदा मामलों में पोस्टमार्टम अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> उत्तर प्रदेश विधान परिषद की दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति की बैठक में आपदा से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। समिति के सभापति डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जनपद के अधिकारियों के साथ आपदा प्रबंधन तैयारियों और राहत कार्यों की समीक्षा की गई।बैठक में डॉ. निर्मल ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दैवीय आपदाओं, विशेषकर सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम अनिवार्य रूप से कराया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को सहायता राशि मिलने में कोई बाधा न हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान अधीक्षण अभियंता विद्युत भदोही के</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173549/post-mortem-mandatory-in-natural-disaster-cases"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas11.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> उत्तर प्रदेश विधान परिषद की दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति की बैठक में आपदा से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। समिति के सभापति डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जनपद के अधिकारियों के साथ आपदा प्रबंधन तैयारियों और राहत कार्यों की समीक्षा की गई।बैठक में डॉ. निर्मल ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दैवीय आपदाओं, विशेषकर सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम अनिवार्य रूप से कराया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को सहायता राशि मिलने में कोई बाधा न हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान अधीक्षण अभियंता विद्युत भदोही के बैठक में अनुपस्थित रहने पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी को स्पष्टीकरण मांगने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।समिति ने आपदा से बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। प्राथमिक विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को आपदा मित्रों के माध्यम से प्रशिक्षण देने, बाढ़ व आपदा प्रभावित क्षेत्रों में किए गए कार्यों का विवरण प्रस्तुत करने तथा विभिन्न विभागों द्वारा किए गए कार्यों का ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके साथ ही डेंगू, मलेरिया व फाइलेरिया जैसे रोगों की पांच वर्षों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने, संचारी रोग अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने और मजदूरों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने आश्वस्त किया कि बैठक में दिए गए सभी निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा। बैठक में पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</div></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 20:59:53 +0530</pubDate>
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