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                <title>higher education India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>राजनीतिक हस्तक्षेप से परे हो - छात्रसंघ चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में विश्वविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों का इतिहास स्वतंत्रता पूर्व काल से जुड़ा हुआ है। उस दौर में छात्र संगठनों ने न केवल विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। स्वतंत्रता के बाद देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से आयोजित होने लगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निस्संदेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों ने देश को अनेक कुशल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शी और जनप्रिय नेता दिए हैं। ऐसे अनेक जनप्रतिनिधि छात्र राजनीति से निकलकर लोकसभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा तथा केंद्र एवं राज्य</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183622/be-beyond-political-interference-student-union-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/orig_49_1659309656.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में विश्वविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों का इतिहास स्वतंत्रता पूर्व काल से जुड़ा हुआ है। उस दौर में छात्र संगठनों ने न केवल विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। स्वतंत्रता के बाद देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से आयोजित होने लगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निस्संदेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों ने देश को अनेक कुशल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शी और जनप्रिय नेता दिए हैं। ऐसे अनेक जनप्रतिनिधि छात्र राजनीति से निकलकर लोकसभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण पदों तक पहुँचे और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों और छात्र हितों के प्रतीक बने रहे। उनकी सकारात्मक गूँज गाँवों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बों और महानगरों तक सुनाई देती थी। किंतु समय के साथ राजनीति के बढ़ते दखल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धनबल और बाहुबल के प्रभाव ने छात्रसंघ चुनावों की गरिमा को प्रभावित किया। परिणामस्वरूप अनेक राज्यों में ये चुनाव हिंसक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवादास्पद और अत्यधिक खर्चीले होते चले गए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान सहित कई राज्यों में छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे मुख्य कारण छात्र गुटों के बीच बढ़ती हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाहरी तत्वों का हस्तक्षेप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वविद्यालय परिसरों में भय का वातावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों एवं प्राध्यापकों को धमकाना तथा गंभीर आपराधिक घटनाएँ रहीं। यही कारण है कि कई राज्यों में आज भी प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध लागू है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके विपरीत दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में राज्य सरकारों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निर्धारित कड़े नियमों के अंतर्गत आज भी प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराए जाते हैं। वहीं कुछ राज्यों में चुनाव केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति का इतिहास इस बात का साक्षी है कि लगभग प्रत्येक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल में ऐसे अनेक नेता हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की और आगे चलकर देश एवं राज्यों के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता इस बात की है कि सभी राज्यों में विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ चुनाव स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांतिपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्पक्ष और लोकतांत्रिक वातावरण में संपन्न कराए जाएँ। इसके लिए राज्य सरकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वविद्यालय प्रशासन तथा सभी राजनीतिक दलों को दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक पहल करनी होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक हस्तक्षेप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धनबल और बाहुबल से मुक्त होकर केवल छात्रों के जनसमर्थन और लोकप्रियता के आधार पर संपन्न होने चाहिए। यही व्यवस्था लोकतंत्र की वास्तविक भावना को मजबूत करेगी और विद्यार्थियों में नेतृत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करेगी। यदि युवा पीढ़ी को छात्र जीवन से ही लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में देश को अधिक संवेदनशील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्षम और उत्तरदायी नेतृत्व प्राप्त होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम विश्वविद्यालय में 20 जुलाई से लैंगिक संवेदनशीलता व POSH अधिनियम पर सप्ताहव्यापी कार्यशाला।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">असम विश्वविद्यालय में 20 से 25 जुलाई तक "जेंडर सेंसिटाइजेशन, POSH अधिनियम एवं महिला सशक्तिकरण" विषय पर सप्ताहव्यापी कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) तथा मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC), असम विश्वविद्यालय चैप्टर द्वारा किया जा रहा है। कार्यशाला में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, प्रशासक और विषय-विशेषज्ञ भाग लेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला का उद्घाटन 20 जुलाई को प्रातः 10 बजे विश्वविद्यालय के बिपिन चंद्र पाल सेमिनार हॉल में होगा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत करेंगे, जबकि डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183559/week-long-workshop-on-gender-sensitivity-and-posh-act-from-20th"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001629548.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम विश्वविद्यालय में 20 से 25 जुलाई तक "जेंडर सेंसिटाइजेशन, POSH अधिनियम एवं महिला सशक्तिकरण" विषय पर सप्ताहव्यापी कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) तथा मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC), असम विश्वविद्यालय चैप्टर द्वारा किया जा रहा है। कार्यशाला में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, प्रशासक और विषय-विशेषज्ञ भाग लेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला का उद्घाटन 20 जुलाई को प्रातः 10 बजे विश्वविद्यालय के बिपिन चंद्र पाल सेमिनार हॉल में होगा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत करेंगे, जबकि डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता मुख्य अतिथि होंगी। स्वागत भाषण आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्ष प्रो. करबी दत्ता चौधरी देंगी। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. प्रदोष किरण नाथ, एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. रमैया बालकृष्णन, उपनिदेशक प्रो. अजय कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलसचिव प्रो. एम. डी. महताब आलम रिज़वी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मानबेन्द्र दत्ता चौधरी, कलकत्ता विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. शांता दत्ता डे, नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सेक्रेटेरियट ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट (ISTM) की संयुक्त निदेशक नमिता मलिक, जादवपुर विश्वविद्यालय की आईसीसी की बाह्य सदस्य डॉ. अनिंदिता बंद्योपाध्याय तम्टा, एनआईटी दुर्गापुर की आईसीसी अध्यक्ष प्रो. सीमा सरकार, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल तथा सेवानिवृत्त शिक्षाविद् प्रो. विनोद नौटियाल संसाधन विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार साझा करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों की ओर से डॉ. सोभन कुमार बेदाज्ञा ने बताया कि कार्यशाला के दौरान लैंगिक संवेदनशीलता, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) अधिनियम, महिला अधिकार, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी से यह कार्यशाला जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 19:13:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम विश्वविद्यालय सिलचर में “आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत और उससे आगे” विषय पर 5 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>असम विश्वविद्यालय, सिलचर (AUS) के भौतिकी विभाग द्वारा पुणे स्थित इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) तथा IUCAA सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ICARD) के सहयोग से आज “आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत और उससे आगे” विषय पर पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला गत 20 से 24 अप्रैल 2026 तक भौतिकी विभाग के मेघनाद साहा कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान और उन्नत शोध-स्तरीय समझ के बीच की खाई को कम करना है, जिससे छात्रों एवं शोधार्थियों को आधुनिक भौतिकी की गहन अवधारणाओं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176820/5-day-international-workshop-on-%E2%80%9Ceinsteins-general-relativity-theory-and-beyond%E2%80%9D"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001441242.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>असम विश्वविद्यालय, सिलचर (AUS) के भौतिकी विभाग द्वारा पुणे स्थित इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) तथा IUCAA सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ICARD) के सहयोग से आज “आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत और उससे आगे” विषय पर पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला गत 20 से 24 अप्रैल 2026 तक भौतिकी विभाग के मेघनाद साहा कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान और उन्नत शोध-स्तरीय समझ के बीच की खाई को कम करना है, जिससे छात्रों एवं शोधार्थियों को आधुनिक भौतिकी की गहन अवधारणाओं की बेहतर समझ मिल सके।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता भौतिकी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. अशोक कुमार सेन ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक एवं प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. पैट्रिक दासगुप्ता उपस्थित रहे। मंच पर विभागाध्यक्ष प्रो. हिमाद्रि शेखर दास, कार्यशाला समन्वयक एवं स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज के डीन प्रो. अत्रि देशमुख्य, तथा IUCAA समन्वयक डॉ. अप्रतिम गांगुली सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इसके अतिरिक्त आईएसआई कोलकाता की डॉ. भास्वती मंडल एवं आईआईटी गुवाहाटी के डॉ. सयान चक्रवर्ती सहित अन्य विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतीकात्मक पौधारोपण के साथ की गई। इसके पश्चात उद्घाटन व्याख्यान में प्रो. अत्रि देशमुख्य ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन विशेष रूप से उन विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिन्हें सामान्य सापेक्षता जैसे जटिल विषयों पर व्यवस्थित प्रशिक्षण कम मिलता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डॉ. अप्रतिम गांगुली ने IUCAA की शैक्षणिक भूमिका और ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं प्रो. हिमाद्रि शेखर दास ने विभाग की शैक्षणिक उपलब्धियों और निरंतर आयोजित होने वाली अकादमिक गतिविधियों का उल्लेख किया। मुख्य अतिथि प्रो. पैट्रिक दासगुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में भी गणितीय समस्याओं को स्वयं हल करने की प्रक्रिया शोधकर्ताओं के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतिभागियों की भागीदारी</strong></div><div style="text-align:justify;">इस कार्यशाला में कुल 61 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें पीएचडी शोधार्थी, एम.एससी. छात्र तथा स्नातक स्तर के विद्यार्थी शामिल हैं। प्रतिभागी असम एवं त्रिपुरा के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन सुश्री संचाली नाथ मजूमदार द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:54:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्वविद्यालय में आयोजित होगा 13 अप्रैल एक दिवसीय कार्यशाला</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर द्वारा 13 अप्रैल 2026 को “विकसित भारत के संदर्भ में शिक्षा, उद्यानिकी एवं सुशासन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप शिक्षा के विस्तार, उद्यानिकी के माध्यम से कृषक सशक्तिकरण तथा सुशासन की अवधारणा को जमीनी स्तर तक सुदृढ़ करना है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का उद्घाटन प्रातः 11:00 बजे कुलपति प्रो. कविता शाह की अध्यक्षता में होगा। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी  बलराम सिंह तथा विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रो. नौशाद (कम्युनिटी मेडिसिन, एम.पी. त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय) उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175898/one-day-workshop-will-be-organized-in-the-university-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/410.jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर द्वारा 13 अप्रैल 2026 को “विकसित भारत के संदर्भ में शिक्षा, उद्यानिकी एवं सुशासन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप शिक्षा के विस्तार, उद्यानिकी के माध्यम से कृषक सशक्तिकरण तथा सुशासन की अवधारणा को जमीनी स्तर तक सुदृढ़ करना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का उद्घाटन प्रातः 11:00 बजे कुलपति प्रो. कविता शाह की अध्यक्षता में होगा। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य विकास अधिकारी  बलराम सिंह तथा विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रो. नौशाद (कम्युनिटी मेडिसिन, एम.पी. त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय) उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन के पश्चात चार तकनीकी सत्र एवं समापन सत्र आयोजित होंगे, जिनमें प्रो. नीता यादव, प्रो. सौरभ, कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. रविकांत सहित अन्य प्राध्यापक अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुलपति प्रो. कविता शाह ने आयोजित होने वाली कार्यशाला की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के “विश्वविद्यालय चला गांव की ओर” अभियान के अंतर्गत गांवों को विश्वविद्यालय से जोड़ने का सतत प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यशाला के माध्यम से ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम स्तर के नेतृत्व को जोड़ते हुए विश्वविद्यालय एवं ग्रामीण समाज के बीच संवाद और समन्वय को सुदृढ़ किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य युवाओं, कृषकों एवं अभिभावकों को शिक्षा, उद्यानिकी, कौशल एवं सुशासन के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे विकास की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागी बन सकें। विश्वविद्यालय अपने सामाजिक दायित्व के अंतर्गत ऐसे कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन कर रहा है और यह कार्यशाला उसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उक्त जानकारी विश्वविद्यालय के सूचना जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने दी।</div>
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</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 20:56:51 +0530</pubDate>
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                <title>बौद्धिक संपदा अधिकार आज के ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला:  कुलपति प्रो.कविता शाह</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु  के विज्ञान संकाय द्वारा बुधवार  को गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में भारत सरकार  के लक्ष्य विकसित भारत 2047 के संदर्भ  में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व से अवगत कराने के उद्देश्य से “बौद्धिक संपदा अधिकार: विकसित भारत2047 में प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० कविता शाह एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो० आशु रानी की  उपस्थिति में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो० आशु रानी ने कहा कि  बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। </div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173542/intellectual-property-rights-are-the-cornerstone-of-todays-knowledge-based-society"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773844986201.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु  के विज्ञान संकाय द्वारा बुधवार  को गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में भारत सरकार  के लक्ष्य विकसित भारत 2047 के संदर्भ  में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व से अवगत कराने के उद्देश्य से “बौद्धिक संपदा अधिकार: विकसित भारत2047 में प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० कविता शाह एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति प्रो० आशु रानी की  उपस्थिति में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो० आशु रानी ने कहा कि  बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं डिज़ाइन जैसे अधिकार न केवल शोधकर्ताओं और आविष्कारकों के कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में भी सक्षम बनाते हैं। साथ ही, यह भी बताया गया कि आईपीआर   का प्रभावी उपयोग देश की आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अपने अध्यक्षीय उद्बोधन  में प्रो० कविता शाह ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार आज के ज्ञान-आधारित समाज की आधारशिला हैं। यदि हम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मकता को बढ़ावा देना होगा तथा उनके संरक्षण के लिए प्रभावी आईपीआर   प्रणाली को अपनाना होगा।” विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो० प्रकृति राय ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों में नवाचार की भावना विकसित करें । प्रो एस के श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उपस्थित  सभी के  आभार व्यक्त किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, परीक्षा नियंत्रक दीनानाथ यादव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव ,शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो जितेंद्र कुमार सिंह   सिंह  , प्रो कौशलेन्द्र चतुर्वेदी , डॉ. लक्ष्मण सिंह,  डॉ. अमित साहनी , डॉ. मयंक कुशवाहा,  डॉ. अब्दुल हफीज, डॉ  शिवम शुक्ला , डॉ. रेनू त्रिपाठी, ,डॉ विमल वर्मा सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ शिल्पी श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का  समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर  सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के मध्य शोध सहयोग एवं शैक्षणिक विकास हेतु समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरितसिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर एवं डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के मध्य शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के बीच अनुसंधान सहयोग, संयुक्त विकास कार्यक्रमों तथा पाठ्यक्रम साझेदारी  को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान  दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने आपसी सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आई  क्यू ए सी निदेशक प्रो. सौरभ ने बताया कि समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से शोध परियोजनाओं पर कार्य करेंगे, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए आदान-प्रदान कार्यक्रम संचालित करेंगे तथा विभिन्न विषयों में विशेषज्ञता साझा करेंगे। इसके साथ ही, नवीन पाठ्यक्रमों के विकास, कार्यशालाओं, सेमिनारों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन भी किया जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 20:47:48 +0530</pubDate>
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