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                <title>Law and Order India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>पुणे का कलंक: समाज की संवेदनहीनता का सबसे काला अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानवता को झकझोर देने वाली यह घटना समाज की संवेदनहीनता को उजागर करती है। पुणे के भोर तहसील के नासरापुर गांव में </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को घटी यह घटना केवल अपराध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गहरी मानवीय त्रासदी है। लगभग चार वर्ष की मासूम बच्ची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे भोजन या बछड़ा दिखाने के लालच में पशुशाला में ले जाया गया। </span>65 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय व्यक्ति ने बेरहमी से अत्याचार कर पत्थर से सिर कुचलकर हत्या की और शव को गोबर के ढेर में छिपा दिया। सीसीटीवी कैमरों ने सच</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178225/the-stigma-of-pune-is-the-darkest-chapter-of-insensitivity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानवता को झकझोर देने वाली यह घटना समाज की संवेदनहीनता को उजागर करती है। पुणे के भोर तहसील के नासरापुर गांव में </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को घटी यह घटना केवल अपराध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गहरी मानवीय त्रासदी है। लगभग चार वर्ष की मासूम बच्ची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे भोजन या बछड़ा दिखाने के लालच में पशुशाला में ले जाया गया। </span>65 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय व्यक्ति ने बेरहमी से अत्याचार कर पत्थर से सिर कुचलकर हत्या की और शव को गोबर के ढेर में छिपा दिया। सीसीटीवी कैमरों ने सच सामने ला दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी प्रश्न है कि ऐसी घटनाएँ क्यों बढ़ रही हैं। क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक चेतना इतनी कमजोर हो चुकी है कि बच्चों की रक्षा भी सुनिश्चित नहीं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे समाज की गंभीर विफलता का प्रमाण है। आरोपी पर पहले भी यौन अपराध के मामले दर्ज थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे अपराधियों के बढ़ते हौसले और पुलिस-न्याय व्यवस्था की कमियों पर सवाल और गहरे होते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हालिया आंकड़ों के अनुसार महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारियों से भी स्पष्ट होता है कि अनेक क्षेत्रों में स्थिति दिन-प्रतिदिन अधिक गंभीर और असुरक्षित होती जा रही है। जो स्थान कभी सुरक्षित माने जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे अब अपराध और असुरक्षा के नए केंद्र बनते जा रहे हैं। समस्या केवल कानूनों की मौजूदगी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनके कमजोर क्रियान्वयन और प्रभावी निगरानी के अभाव में छिपी है। यदि एक मासूम बच्ची अपने ही घर के आसपास सुरक्षित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह पूरे सुरक्षा तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अपराधियों के बढ़ते हौसले का एक बड़ा कारण समाज की उदासीनता भी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो समय रहते चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था में गहरे सुधार के बिना ऐसी घटनाओं पर रोक संभव नहीं। पुलिस व्यवस्था और न्याय प्रणाली में ठोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावी बदलाव आवश्यक हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हुआ है और मुख्यमंत्री ने फास्ट-ट्रैक ट्रायल व कठोर सजा की घोषणा की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये कदम केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहने चाहिए। बाल यौन अपराध संरक्षण कानून के अंतर्गत लंबित मामलों की अधिक संख्या और दोषसिद्धि की कम दर व्यवस्था की कमजोरियों को स्पष्ट करती है। प्रत्येक जिले में </span>24 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे सक्रिय बाल संरक्षण इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होनी चाहिए। गाँवों और शहरों में निगरानी कैमरों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया जाए तथा महिला पुलिस की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए। न्याय प्रक्रिया को तेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शी और प्रभावी बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा की वास्तविक नींव समाज की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी पर ही टिकी होती है। केवल कानून या प्रशासन के भरोसे सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक समाज स्वयं सजग न हो। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंगनवाड़ियों और खेल स्थलों को पूर्ण सुरक्षा क्षेत्र घोषित कर कठोर निगरानी आवश्यक है। अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए ताकि वे संभावित खतरों को पहचान सकें। स्थानीय समुदायों में सतर्कता समूह बनाए जाने चाहिए जो संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत सूचना दें। बच्चों को आत्मरक्षा और सुरक्षित व्यवहार की शिक्षा देना भी अत्यंत आवश्यक है। जब तक समाज सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक केवल कानून व्यवस्था पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी और गहरी चुनौती आज भी हमारी जड़ जमाई हुई मानसिकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वर्षों से बदली नहीं है। कई बार पीड़ित को ही प्रश्नों के घेरे में खड़ा कर दिया जाता है और पुरानी सोच से प्रभावित प्रतिक्रियाएँ दी जाती हैं। यह धारणा बदलनी होगी कि खतरा केवल अजनबियों से होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि वास्तविकता यह है कि कई बार परिचित और भरोसेमंद लोग ही अपराधी बन जाते हैं। शिक्षा प्रणाली में लिंग संवेदनशीलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहमति का सम्मान और नैतिक मूल्यों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। मीडिया को भी अत्यंत जिम्मेदारी से कार्य करना होगा ताकि ऐसी घटनाओं को सनसनी के रूप में प्रस्तुत न किया जाए। दोषियों के लिए कठोरतम दंड पर गंभीर सामाजिक और कानूनी मंथन आवश्यक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बदलते समय में सुरक्षा को मजबूत करने की कुंजी आधुनिक तकनीक के प्रभावी और व्यापक उपयोग में निहित है। एआई आधारित उन्नत निगरानी प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के लिए सुरक्षित पहनने योग्य उपकरण और स्थान आधारित सुरक्षा तंत्र को बड़े स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। महिला सहायता केंद्रों को अधिक सशक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया देने योग्य बनाया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों तक तकनीकी सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि गाँव और शहर के बीच सुरक्षा की खाई कम हो सके। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक का उपयोग केवल सुरक्षा के उद्देश्य से हो और उसका किसी भी रूप में दुरुपयोग न हो। तकनीक तभी वास्तविक रूप से सार्थक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी सुरक्षा पहुँचा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी मासूम और कमजोर जिंदगियों की सुरक्षा से होती है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल योजना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र की नैतिक जिम्मेदारी है। इस घटना ने स्पष्ट किया कि दोषी अक्सर परिचित होता है और बार-बार जेल से छूटने वाले अपराधी समाज के लिए बड़ा खतरा हैं। पुणे की मासूम बच्ची यह कठोर सच याद दिलाती है कि विकास तभी सार्थक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब जीवन सुरक्षित हो। यदि आने वाली पीढ़ियाँ भय में जीने को मजबूर होंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो विकास के दावे अधूरे रह जाएँगे। समाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और परिवार—सभी को मिलकर सुरक्षित वातावरण बनाना होगा। नागरिकों की सतर्कता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून का कठोर पालन और न्याय व्यवस्था की सक्रियता ही समाधान दे सकती है। यह समय केवल सहानुभूति का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ठोस और निरंतर कार्रवाई का है। अगर अब भी नहीं जागे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल और कितनी मासूम चीखें दब जाएँगी</span>?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:56:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मासूमियत पर हमला: सूरत की घटना ने झकझोरा समाज तीन साल की बच्ची के साथ दरिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">सूरत जैसे विकसित और व्यस्त शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को भीतर तक हिला दिया है। एक तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे, पारिवारिक सतर्कता और नैतिक मूल्यों पर भी गहरी चोट पहुंचाती है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें इंसान अपनी इंसानियत खोकर दरिंदगी की हद तक गिर जाता है। जिस उम्र में एक बच्ची ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाती, उस उम्र में उसके साथ इस तरह का अमानवीय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177225/attack-on-innocence-surat-incident-shocked-the-society-brutality-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rape.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">सूरत जैसे विकसित और व्यस्त शहर में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को भीतर तक हिला दिया है। एक तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे, पारिवारिक सतर्कता और नैतिक मूल्यों पर भी गहरी चोट पहुंचाती है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें इंसान अपनी इंसानियत खोकर दरिंदगी की हद तक गिर जाता है। जिस उम्र में एक बच्ची ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाती, उस उम्र में उसके साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार समाज के लिए शर्मनाक और चिंताजनक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना का विवरण जितना दुखद है, उतना ही भयावह भी है। बच्ची अपने ही घर में सुरक्षित समझी जाने वाली जगह पर थी, लेकिन एक दरिंदे ने मौके का फायदा उठाकर उसकी मासूमियत को रौंदने की कोशिश की। यह सवाल उठता है कि आखिर एक व्यक्ति किस हद तक संवेदनहीन हो सकता है कि उसे एक छोटी बच्ची पर भी दया नहीं आती। यह केवल एक व्यक्ति की विकृत मानसिकता का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक गिरावट का संकेत भी है जहां इंसान अपने नैतिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने माता-पिता की जिम्मेदारी पर भी चर्चा को जन्म दिया है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में अक्सर ऐसा होता है कि छोटे बच्चों को कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया जाता है, यह सोचकर कि वे घर के अंदर सुरक्षित हैं। लेकिन यह घटना बताती है कि खतरा केवल बाहर नहीं, बल्कि आसपास भी हो सकता है। बच्चों की सुरक्षा केवल दरवाजे बंद करने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी और सतर्कता आवश्यक है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस मामले में बच्ची की मां की सतर्कता ने एक बड़ी अनहोनी को रोका। समय पर पहुंचकर उन्होंने आरोपी को रंगेहाथ पकड़ लिया, जिससे यह साबित होता है कि जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन हर मामले में ऐसा संभव नहीं होता, इसलिए समाज को मिलकर ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिस क्षेत्र में आरोपी बिना किसी किरायानामा के रह रहा था, वहां की निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर थी, यह स्पष्ट होता है। यदि किरायेदारों का सही रिकॉर्ड रखा जाता और नियमित जांच होती, तो शायद ऐसे अपराधियों पर पहले ही नजर रखी जा सकती थी। पुलिस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें पहले से ही ऐसे संभावित खतरों को पहचानने और रोकने की दिशा में काम करना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज में बढ़ते अपराधों के पीछे एक बड़ा कारण बदलती जीवनशैली और तकनीक का गलत उपयोग भी है। मोबाइल और इंटरनेट ने जहां दुनिया को जोड़ा है, वहीं यह कई बार गलत दिशा में भी ले जा रहा है। अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता और उस पर नियंत्रण की कमी ने कुछ लोगों की सोच को विकृत कर दिया है। हालांकि हर व्यक्ति पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन जिनकी मानसिकता पहले से कमजोर होती है, वे इससे प्रभावित होकर गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी जरूरी है कि हम बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षा और जागरूकता के बारे में सिखाएं। भले ही तीन साल की बच्ची इतनी समझदार नहीं होती कि वह खुद को बचा सके, लेकिन बड़े होते बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी है। इससे वे किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं और अपने माता-पिता को बता सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना के बाद समाज में गुस्सा और आक्रोश स्वाभाविक है। लोगों द्वारा आरोपी की पिटाई करना उनके भीतर के आक्रोश को दर्शाता है, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि कानून अपने तरीके से काम करता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिले ताकि यह दूसरों के लिए एक उदाहरण बन सके। पॉक्सो एक्ट जैसे कानून इसी उद्देश्य से बनाए गए हैं, लेकिन इनका प्रभाव तभी दिखेगा जब उनका सख्ती से पालन किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना ने यह भी दिखाया है कि समाज में सामूहिक जिम्मेदारी की कितनी आवश्यकता है। केवल पुलिस या सरकार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हर व्यक्ति को अपने आसपास के माहौल पर नजर रखनी होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देनी होगी। पड़ोसियों के बीच आपसी संवाद और सतर्कता भी ऐसे मामलों को रोकने में मदद कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। क्या हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर रहे हैं जहां बच्चे सुरक्षित नहीं हैं? क्या हमारी प्रगति केवल आर्थिक और तकनीकी तक सीमित रह गई है, जबकि नैतिक और सामाजिक मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं? इन सवालों के जवाब हमें खुद तलाशने होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जरूरत इस बात की है कि हम इस घटना को केवल एक खबर की तरह न देखें, बल्कि इससे सीख लें और अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। अभिभावक अधिक सतर्क रहें, समाज अधिक जागरूक बने और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए। तभी हम एक ऐसा वातावरण बना पाएंगे जहां हर बच्चा सुरक्षित और निश्चिंत होकर अपना बचपन जी सके। इस तरह की घटनाएं केवल पीड़ित परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को घायल करती हैं। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाएं और एक सुरक्षित समाज के निर्माण में अपना योगदान दें। तभी हम सच्चे अर्थों में मानवता को बचा पाएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य दे सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:37:17 +0530</pubDate>
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                <title>पुरानी बस्ती थानाक्षेत्रमे 7 साल की बच्ची के साथ14साल के किशोर नें की गंदी हरकत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में नाबालिकों का यौन उत्पीड़न नहीं रूक रहा है जबकि लोगों द्वारा नाबालिक बच्चियों को निशाना बना रहे हैं जिले में अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है अपराधियों पर शिकंजा नहीं कर पा रहे हैं पुलिसकर्मी कैसे बच्चियों सुरक्षित रहेंगे ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र की एक गांव का है मासूम 7 साल की बच्ची के साथ 14सालकिशोर नें की गंदी हरकत कर डाला नहीं खौफ है पुलिस का ऐसे बच्चों में जिनके संस्कार में ओछी हरकत दिखाई दे रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुरानी बस्ती थाना अंतर्गत 07 वर्षीय बच्ची के साथ 14 वर्षीय बालक द्वारा गलत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175873/14-year-old-teenager-did-dirty-acts-with-a-7"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/6.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में नाबालिकों का यौन उत्पीड़न नहीं रूक रहा है जबकि लोगों द्वारा नाबालिक बच्चियों को निशाना बना रहे हैं जिले में अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है अपराधियों पर शिकंजा नहीं कर पा रहे हैं पुलिसकर्मी कैसे बच्चियों सुरक्षित रहेंगे ताजा मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र की एक गांव का है मासूम 7 साल की बच्ची के साथ 14सालकिशोर नें की गंदी हरकत कर डाला नहीं खौफ है पुलिस का ऐसे बच्चों में जिनके संस्कार में ओछी हरकत दिखाई दे रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुरानी बस्ती थाना अंतर्गत 07 वर्षीय बच्ची के साथ 14 वर्षीय बालक द्वारा गलत काम किये जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले मे सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर आरोपी को हिरासत मे लिया है। घटना 12 अप्रैल की है। उससे पूछताछ जारी है। क्षेत्राधिकारी सदर सतेन्द्र भूषण तिवारी ने बताया कि थाना अंतर्गत लखनौरा गांव मे 07 वर्षीय एक बच्ची के साथ पड़ोस के 14 साल के किशोर ने दुष्कर्म की वारदात का अंजाम दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> डायल 112 से सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल फोरेंसिंक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा किया। पीड़िता का मेडिकल कराया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही आरोपी से पूछताछ किया जा रहा है क्षेत्राधिकार सदर द्वारा मामले को गंभीरता से जांच की जा रही है जल्द ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 20:12:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस थानों में काम कर रहे सीसीटीवी की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को तलब किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को पुलिस थानों में काम करने वाले (functional) सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर केंद्र सरकार से सवाल करते हुए केंद्रीय गृह सचिव को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया. जब न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि केरल में सबसे बेहतर व्यवस्था है, तो जस्टिस नाथ ने कहा, ‘यदि आप कहते हैं कि केरल में सबसे बेहतर व्यवस्था है, तो अन्य राज्य इसे क्यों नहीं अपना सकते?’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि इस पर संबंधित अधिकारियों द्वारा चर्चा की जानी चाहिए.न्याय मित्र दवे ने अदालत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175449/supreme-court-summons-union-home-secretary-over-lack-of-functioning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supreme-court-3.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को पुलिस थानों में काम करने वाले (functional) सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर केंद्र सरकार से सवाल करते हुए केंद्रीय गृह सचिव को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया. जब न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि केरल में सबसे बेहतर व्यवस्था है, तो जस्टिस नाथ ने कहा, ‘यदि आप कहते हैं कि केरल में सबसे बेहतर व्यवस्था है, तो अन्य राज्य इसे क्यों नहीं अपना सकते?’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि इस पर संबंधित अधिकारियों द्वारा चर्चा की जानी चाहिए.न्याय मित्र दवे ने अदालत को बताया कि अधिकांश राज्यों ने सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं और वे केंद्रीकृत डैशबोर्ड स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं. सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की थी, जिसमें पिछले आठ महीनों में 11 हिरासत में मौतों का उल्लेख था और इसे पुलिस थानों में कार्यरत सीसीटीवी कैमरों की कमी से जोड़ा गया था.</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसी एजेंसियों के ऑफिस में हिरासत में यातना रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने के न्यायिक निर्देश पर केंद्र के कोई जवाब न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर, 2025 को पूछा था कि क्या केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को ‘बहुत हल्के में’ ले रही है.</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल 2020 में जस्टिस रोहिंटन एफ. नरीमन (अब रिटायर्ड) की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले में केंद्र को पुलिस थानों में हिरासत में अत्याचार रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण ज़रूरी तौर पर लगाने का निर्देश दिया था.</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई), सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (सीएफआईओ) और ‘कोई भी एजेंसी जो पूछताछ करती है और गिरफ्तार करने की शक्ति रखती है’, के कार्यालयों में सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था.</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में कहा था कि सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण का इस्तेमाल सम्मान और जीवन के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए सुरक्षा के तौर पर किया जाएगा. जस्टिस नरीमन ने निर्देश दिया था, ‘क्योंकि इनमें से ज़्यादातर एजेंसियां अपने ऑफिस में पूछताछ करती हैं, इसलिए उन सभी ऑफिस में सीसीटीवी लगाना ज़रूरी होगा जहां ऐसी पूछताछ और आरोपी को हिरासत में लिया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पुलिस थानों में होता है.’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 20:32:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दीवानी मामलों के लिए पुलिस के पास जाने की प्रवृत्ति कानून के शासन को कमज़ोर करती है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात को 'परेशान करने वाला' बताया कि जनता दीवानी मामलों के समाधान के लिए पुलिस और कलेक्टरों के पास जाती है, क्योंकि यह प्रवृत्ति कानून के शासन की बुनियाद को कमज़ोर करती है। ऐसे मामलों में समाधान के लिए उन गैर-कानूनी एजेंसियों को बढ़ावा देती है, जिनका उन मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दलजीत सिंह और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।उनकी याचिका में एक FIR को चुनौती दी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175319/the-tendency-to-approach-the-police-for-civil-matters-undermines"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात को 'परेशान करने वाला' बताया कि जनता दीवानी मामलों के समाधान के लिए पुलिस और कलेक्टरों के पास जाती है, क्योंकि यह प्रवृत्ति कानून के शासन की बुनियाद को कमज़ोर करती है। ऐसे मामलों में समाधान के लिए उन गैर-कानूनी एजेंसियों को बढ़ावा देती है, जिनका उन मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दलजीत सिंह और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।उनकी याचिका में एक FIR को चुनौती दी गई, जो मूल रूप से एक व्यावसायिक विवाद से संबंधित थी। यह विवाद याचिकाकर्ताओं द्वारा अपने माल को अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने के लिए किराए पर लिए गए वाहनों के भाड़े का भुगतान न करने को लेकर था।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उस पर गोली चलाई गई, लेकिन गोली किसी को लगी नहीं। खंडपीठ ने गौर किया कि यह पहली नज़र में "दिखावटी आरोप" था, जिसे जान-बूझकर एक दीवानी विवाद को आपराधिक रंग देने के लिए गढ़ा गया।खंडपीठ ने टिप्पणी की, "यह बहुत परेशान करने वाली बात है कि समाज के हर तबके के लोग सभी प्रकार के दीवानी मामलों के समाधान के लिए पुलिस और ज़िलों के कलेक्टरों के पास जाने की ज़िद करते हैं, जबकि इन मामलों पर अधिकार क्षेत्र दीवानी अदालत का होता है। यह प्रवृत्ति, जिसे समाज के सभी वर्गों द्वारा बढ़ावा दिया जाता है, कानून के शासन की बुनियाद को कमज़ोर करने और ऐसे मामलों में समाधान के लिए उन गैर-कानूनी एजेंसियों को बढ़ावा देने की संभावना रखती है, जिनका उन मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता।"</p>
<p style="text-align:justify;">इस पृष्ठभूमि में पहली नज़र में मामला बनता देख, अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली और नोटिस जारी किए।खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी और निर्देश दिया कि जब तक कोई अगला आदेश नहीं आ जाता, तब तक उन्हें BNS की धारा 109(1), 116(2) और 352 के तहत दर्ज FIR में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।। अदालत ने मुरादाबाद के सीनियर पुलिस अधीक्षक से एक हलफनामा भी मांगा, जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया कि पुलिस ने यह FIR किस आधार पर दर्ज की। इस मामले को 15 अप्रैल को आदेश के लिए सूचीबद्ध किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175319/the-tendency-to-approach-the-police-for-civil-matters-undermines</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:03:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुग्राम में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हरियाणा में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई- स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच कराए जाने की मांग वाली याचिका पर हरियाणा सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त (सीपी) और मामले की जांच कर रहे अधिकारी (आईओ) को मामले के सभी रिकॉर्ड के साथ 25 मार्च को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के मामले में हरियाणा पुलिस की जांच से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174007/supreme-court-strict-in-case-of-rape-of-four-year"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/supream-court3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हरियाणा में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई- स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच कराए जाने की मांग वाली याचिका पर हरियाणा सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त (सीपी) और मामले की जांच कर रहे अधिकारी (आईओ) को मामले के सभी रिकॉर्ड के साथ 25 मार्च को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के मामले में हरियाणा पुलिस की जांच से भी नाराजगी जाहिर की और इस पर हैरानी जताई। हरियाणा के एडवोकेट जनरल को राज्य में कार्यरत महिला आईपीएस अधिकारियों के नाम सुझाने का भी निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर हलफनामे से पता चलता है कि पीड़ित से न्यायालय में जिस तरह से पूछताछ की गई, वह भी बेहद परेशान करने वाली है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। याचिका में सीबीआई से जांच की मांग की गई है और हरियाणा पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पीड़िता के माता-पिता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा पीड़िता माता-पिता को एफआईआर वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने ये भी कहा कि जब मजिस्ट्रेट ने बच्ची के बयान दर्ज किए तो उस वक्त आरोपी भी अदालत के वेटिंग रूम में मौजूद थे, जबकि कानून आरोपी को पीड़िता के इतने करीब आने की इजाजत नहीं देता। </div><div style="text-align:justify;">    </div><div style="text-align:justify;">मजिस्ट्रेट ने 3 साल की रेप पीड़‍िता बच्‍ची से कहा- 'सच बोलो', सुप्रीम कोर्ट नाराज सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में तीन साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म मामले की जांच को लेकर हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई है. अदालत ने जांच के तरीके को ‘बेहद चौंकाने वाला’ और ‘असंवेदनशील’ करार देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोमवार हुई सुनवाई में कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने आरोपियों के बेहद करीब बैठाकर दर्ज किया गया. अदालत ने इसे प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है.यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जॉयमाला बागजी और विपुल पंचोली की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारी को 25 मार्च को पर्सनली पेश होने का निर्देश दिया है </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> का जांच अधिकारी (IO) पहले भी पॉक्सो (POCSO) केस में रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड हो चुका है और इस केस में भी परिवार को मामला आगे न बढ़ाने की सलाह दी गई. उन्होंने कोर्ट से मांग की कि गुरुग्राम पुलिस को जांच से हटाकर मामला या तो CBI को सौंपा जाए या विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए.</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस पर कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘चार साल की बच्ची के साथ इस तरह की असंवेदनशीलता बेहद चौंकाने वाली है.’ अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में शिकायत का इंतजार किए बिना भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी.</div><div style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि शुरुआत में महिला अधिकारी जांच कर रही थी, लेकिन उसके निलंबन के बाद एसएचओ ने जांच संभाली. हालांकि कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में हुई खामियों पर असंतोष जताते हुए मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 20:55:54 +0530</pubDate>
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                <title>पारिवारिक रंजिश के चलते एक व्यक्ति ने दूसरे पर तेज़ाब फेंका</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong>  थाना फीलखाना क्षेत्रान्तर्गत पटकापुर स्थित एक चप्पल कारखाने में एक व्यक्ति ने एक युवक शाहिद पुत्र सैयद अली उम्र लगभग 38-40 वर्ष के ऊपर एक अज्ञात ज्वलनशील/रासायनिक पदार्थ फेंक दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस उपायुक्त पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि इनमें आपस में रंजिश की जानकारी मिली है दोनों लोग एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पुलिस ने ज्वलनशील पदार्थ फैंकने वाले व्यक्ति गुलफाम को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि घटना में युवक के हाथ, चेहरे एवं पैर पर जलने के चिन्ह पाए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173486/due-to-family-rivalry-one-person-threw-acid-on-another"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/cc5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना फीलखाना क्षेत्रान्तर्गत पटकापुर स्थित एक चप्पल कारखाने में एक व्यक्ति ने एक युवक शाहिद पुत्र सैयद अली उम्र लगभग 38-40 वर्ष के ऊपर एक अज्ञात ज्वलनशील/रासायनिक पदार्थ फेंक दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस उपायुक्त पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि इनमें आपस में रंजिश की जानकारी मिली है दोनों लोग एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पुलिस ने ज्वलनशील पदार्थ फैंकने वाले व्यक्ति गुलफाम को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि घटना में युवक के हाथ, चेहरे एवं पैर पर जलने के चिन्ह पाए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुँची तथा घायल को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों द्वारा उसका समुचित उपचार किया जा रहा है।घटना के संबंध में आरोपी गुलफान को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उससे पूछताछ की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रारंभिक पूछताछ में दोनों पक्षों के मध्य आपसी/पारिवारिक विवाद एवं अन्य कारण प्रकाश में आए हैं, जो कि जांच का विषय है। दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त कर विधिक कार्यवाही की जा रही है तथा मुकदमा पंजीकृत किया जा रहा है। प्रकरण में साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम विधिक कार्यवाही प्रचलित है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 18:21:11 +0530</pubDate>
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