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                <title>सकारात्मक ऊर्जा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सकारात्मक ऊर्जा RSS Feed</description>
                
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                <title>पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़, झारखंड:-  </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आमड़ापाड़ा पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस परिसर में एक भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन देशभर में मनाए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आयोजित किया गया, जिसका राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम  प्रधानमंत्री द्वारा कोलकाता, पश्चिम बंगाल से संबोधित किया गया।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (WBPDCL), बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा प्रा. लि. तथा शार प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के 100 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बीजीआर  के वाईस प्रेजिडेंट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181893/international-yoga-day-celebrated-with-enthusiasm-at-pachchwara-north-coal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-4-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़, झारखंड:-  </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आमड़ापाड़ा पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस परिसर में एक भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन देशभर में मनाए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आयोजित किया गया, जिसका राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम  प्रधानमंत्री द्वारा कोलकाता, पश्चिम बंगाल से संबोधित किया गया।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (WBPDCL), बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा प्रा. लि. तथा शार प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के 100 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बीजीआर  के वाईस प्रेजिडेंट  दिलीप तमान ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। इसके पश्चात प्रतिभागियों ने आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित कॉमन योगा प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योगासन, प्राणायाम, ध्यान एवं विश्राम अभ्यास किए।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि योग आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में मानसिक शांति, कार्यक्षमता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। विशेष रूप से खनन एवं औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए योग स्वास्थ्य संरक्षण और तनाव प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण साधन है।कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह एवं अनुशासन के साथ योगाभ्यास किया। योग सत्र के दौरान एकता, समर्पण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश  दिया। प्रतिभागियों ने नियमित रूप से योग करने और इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस में आयोजित यह कार्यक्रम कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कल्याण के प्रति WBPDCL, बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा प्रा. लि. तथा शार प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. की प्रतिबद्धता को दर्शाया। इस  आयोजन ने कर्मचारियों के बीच योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण अभियान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:34:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नव संवत्सर: समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के समन्वय का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​हिंदू नववर्ष केवल कैलेंडर या विक्रम संवत के परिवर्तन का संकेत मात्र नहीं है, बल्कि यह समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के उस संगम का उत्सव है जो भारतीय जीवन-दृष्टि की वैज्ञानिक पहचान को अभिव्यक्त करता है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सनातनी परंपराओं को न भुलाने और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की ऊर्जा प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय चिंतन की सबसे बड़ी विशेषता समय को रेखीय न मानकर चक्रीय मानना है। यहाँ हर अंत, एक नए आरंभ का सूत्रपात है। नव संवत्सर इसी शाश्वत चक्र की याद दिलाता है। यह संदेश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173463/new-year-is-the-festival-of-coordination-of-creation-sensitivity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/gudhi-padwa.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​हिंदू नववर्ष केवल कैलेंडर या विक्रम संवत के परिवर्तन का संकेत मात्र नहीं है, बल्कि यह समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के उस संगम का उत्सव है जो भारतीय जीवन-दृष्टि की वैज्ञानिक पहचान को अभिव्यक्त करता है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सनातनी परंपराओं को न भुलाने और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की ऊर्जा प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय चिंतन की सबसे बड़ी विशेषता समय को रेखीय न मानकर चक्रीय मानना है। यहाँ हर अंत, एक नए आरंभ का सूत्रपात है। नव संवत्सर इसी शाश्वत चक्र की याद दिलाता है। यह संदेश है कि जीवन में परिवर्तन और नवीनीकरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। अतः यह दिवस  उत्सव मनाने के साथ-साथ,  अपने विचारों और कर्मों को नए सिरे से परिभाषित और परिष्कृत करने का अवसर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​सनातन परंपरा के अनुसार, इसी पावन तिथि को ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का प्रारंभ किया था। प्रकृति की दृष्टि से भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। चैत्र मास में वसंत ऋतु अपने चरमोत्कर्ष पर होती है; वृक्षों में नई कोपलें फूटती हैं और खेतों में फसलें लहलहाती हैं। प्रकृति के इस परिवर्तन को भारतीय संस्कृति ने केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि जीवन के 'पुनर्जागरण' के रूप में स्वीकार करने का संदेश दिया है। यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच उस गहरे भावनात्मक संबंध यानी 'संवेदना' को पुनर्जीवित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​धार्मिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है  क्योंकि इसी तिथि से 'वासंतिक नवरात्रि' का शुभारंभ होता है। नौ दिनों की यह शक्ति-उपासना प्रत्येक मानव को साधना, संयम और आत्म-अनुशासन का मार्ग दिखाती है। यह समय बाहरी कोलाहल के बीच आंतरिक जागरण और सकारात्मक ऊर्जा के संचय का  है, जिससे हम एक अनुशासित जीवन जीने का संकल्प ले सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारत की विशाल सांस्कृतिक विविधता में यह नववर्ष का प्रथम दिवस अलग-अलग नामों और रूपों में रचा-बसा है। महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा', आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 'उगादि', कश्मीर में 'नवरेह' और सिंधी समाज में 'चेटी चंड' के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। संकेत स्पष्ट है कि विशाल भारत में भले ही नाम और रीतियाँ भिन्न हों, लेकिन समय के स्वागत और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना सर्वत्र एक समान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​आज के तकनीकी और भौतिकवादी युग में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह नव संवत्सर हमें याद दिलाता है कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों से मापी जाती है। इस पवित्र पर्व के दिन यदि हम प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, समाज में सह-अस्तित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान का संकल्प लें, तो यह पर्व एक परंपरा से आगे बढ़कर उज्ज्वल भविष्य की नींव बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​नव संवत्सर हमें यह स्मरण भी कराता है कि प्रत्येक नया वर्ष केवल तारीखों का बदलना नहीं, बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने का एक ईश्वरीय आमंत्रण है। आइए, इस पावन अवसर पर हम सब भारतीय समय और सृष्टि के साथ कदम मिलाते हुए एक श्रेष्ठ समाज एवं आत्मनिर्भर विकसित राष्ट्र के निर्माण का संकल्प लेते हैं।मेरा ऐसा मानना है कि विश्व के लोग यदि इस पर्व के मर्म को समझ पाते, तो आज जो वैश्विक अशांति और युद्ध का वातावरण व्याप्त है, उससे मुक्ति मिल जाती और 'विश्व बंधुत्व' की भावना को बल मिलता।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:48:28 +0530</pubDate>
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