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                <title>सांस्कृतिक विरासत - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सांस्कृतिक विरासत RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन समारोह आयोजि</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण ट्रस्ट द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब के उपाध्यक्ष सभागार एनेक्सी में अभिनंदन एवं शुभकामना समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं नई दिल्ली नगर परिषद एनडीएमसी के सदस्य दिनेश प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में नवश्री धार्मिक लीला समिति, लालकिला के महामंत्री प्रकाश बैराठी तथा विश्व हिंदू परिषद,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181423/congratulatory-ceremony-organized-on-completion-of-12-years-of-prime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0003.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण ट्रस्ट द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब के उपाध्यक्ष सभागार एनेक्सी में अभिनंदन एवं शुभकामना समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं नई दिल्ली नगर परिषद एनडीएमसी के सदस्य दिनेश प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में नवश्री धार्मिक लीला समिति, लालकिला के महामंत्री प्रकाश बैराठी तथा विश्व हिंदू परिषद, इंद्रप्रस्थ प्रांत के प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेंद्र गुप्ता ने की।अपने संबोधन में प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में आधारभूत संरचना, अर्थव्यवस्था और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है।अध्यक्षीय संबोधन में सुरेंद्र गुप्ता ने सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने समाज की सुरक्षा और सहायता के लिए संचालित हिंदू हेल्पलाइन की जानकारी दी। साथ ही दिल्ली के ऐतिहासिक महत्व और इंद्रप्रस्थ की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की आवश्यकता पर बल दिया।समारोह के अंत में इंद्रप्रस्थ पुनर्जागरण ट्रस्ट की ओर से सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में ट्रस्ट के संयोजक सुशांत अग्रवाल,सह-संयोजक हर्ष कप्तान तथा सह-संयोजक गरिमा बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 20:08:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महुआ डाबर महोत्सव में गूंजा शहीदों का स्मरण, मशाल यात्रा से क्रांतिवीरों को दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय “महुआ डाबर महोत्सव-2026” के दूसरे दिन ऐतिहासिक क्रांति स्थल पर भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव में स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कई प्रेरणादायी आयोजन हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्मित आधे घंटे की ऐतिहासिक एवं मार्मिक ऑडियो डॉक्यूमेंट्री ‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ का श्रवण कराया गया। डॉक्यूमेंट्री सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे। इसमें ‘गैर-चिरागी’ महुआ डाबर के आम लोगों के अनुभवों के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180938/remembrance-of-martyrs-echoed-in-mahua-dabur-mahotsav-tribute-paid"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0028.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय “महुआ डाबर महोत्सव-2026” के दूसरे दिन ऐतिहासिक क्रांति स्थल पर भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव में स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कई प्रेरणादायी आयोजन हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्मित आधे घंटे की ऐतिहासिक एवं मार्मिक ऑडियो डॉक्यूमेंट्री ‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ का श्रवण कराया गया। डॉक्यूमेंट्री सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे। इसमें ‘गैर-चिरागी’ महुआ डाबर के आम लोगों के अनुभवों के साथ महुआ डाबर का उत्खनन करने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार, महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक डॉ. शाह आलम राना तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन की पूर्व विशेष सचिव ईशा प्रिया के विचार शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ की स्क्रिप्ट एवं प्रस्तुति नवोदिता मिश्रा ने की है। वाचन स्वर रितु राजपूत तथा नाट्यांश स्वर मनोज मयंकर का है। गीत के रचयिता कर्नल तिलकराज और गायक डॉ. ग़ज़ल श्रीनिवास हैं। आकाशवाणी संवाददाता दीपांकर मिश्र, प्रस्तुति सहयोगी शिवाली एवं संयोजन राम अवतार बैरवा का रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के समापन पर महुआ डाबर के क्रांतिवीरों को मशालों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सैकड़ों युवाओं ने हाथों में जलती मशाल लेकर क्रांति स्थल की परिक्रमा की और शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर क्रांतिकारी वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि वर्ष 1857 में अंग्रेजों ने महुआ डाबर को ‘गैर-चिरागी’ घोषित कर यहां दीपक और चिराग जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। आज मशाल जलाकर यह संदेश दिया गया है कि शहीदों की स्मृति का चिराग 169 वर्ष बाद भी बुझा नहीं है। उन्होंने कहा कि मशाल क्रांति की वह ज्वाला है जो कभी बुझनी नहीं चाहिए। युवाओं को मशाल सौंपकर यह संकल्प दिलाया गया कि वे महुआ डाबर के गौरवशाली इतिहास को देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों ने बताया कि 10 जून को ‘शौर्य दिवस’ के अवसर पर सुबह शहीद स्थल पर सशस्त्र पुलिस गारद द्वारा सलामी दी जाएगी। इसके बाद ‘विरासत संरक्षण संकल्प सभा’ का आयोजन होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, इतिहास प्रेमियों, युवाओं एवं समाजसेवियों का विशेष सहयोग रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अतुल सिंह, नासिर खान, केपी राठौर, मोहम्मद कैफ, ऋतिक कुमार, सुनील पंडित, श्रवण कुमार, फ़कीर मोहम्मद, विनोद कुमार यादव, मुमताज़ खान, अनूप कुमार एडवोकेट, रमजान खान, धर्मेन्द्र, प्रणब मुखर्जी, आदिल खान, रामकेश गौतम, प्रभाकर चौधरी, नागेंद्र प्रताप</div>
<div style="text-align:justify;">आदि लोग मौजूद रहे.</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:49:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री से मिले महापौर। प्रयागराज के विकास और सौंदर्यीकरण पर की विस्तृत चर्चा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">महा पौर।गणेश केसरवानी ने लखनऊ में योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट कर प्रयागराज के विकास, सौंदर्यीकरण एवं जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान शहर के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, यातायात व्यवस्था, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विकास, स्वच्छता तथा जनसुविधाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">महापौर गणेश केसरवानी ने मुख्यमंत्री को नगर निगम द्वारा संचालित विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रयागराज को आधुनिक, स्वच्छ, सुव्यवस्थित एवं आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179644/the-mayor-met-the-chief-minister"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260519-wa0068.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महा पौर।गणेश केसरवानी ने लखनऊ में योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट कर प्रयागराज के विकास, सौंदर्यीकरण एवं जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान शहर के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, यातायात व्यवस्था, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विकास, स्वच्छता तथा जनसुविधाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महापौर गणेश केसरवानी ने मुख्यमंत्री को नगर निगम द्वारा संचालित विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रयागराज को आधुनिक, स्वच्छ, सुव्यवस्थित एवं आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था तथा नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष बल दिया। साथ ही शहर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए नए फ्लाईओवर और स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था की आवश्यकता को भी प्रमुखता से उठाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान महापौर ने प्रयागराज के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का प्रस्ताव भी रखा। इनमें रामसेतु निर्माण, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना, साहित्य तीर्थ निर्माण तथा आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की स्थापना जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल रहे। महापौर ने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रयागराज को शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और तकनीकी विकास के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर⁶ने नगर निगम प्रयागराज द्वारा स्थापित महान विभूतियों की प्रतिमाओं के अनावरण कार्यक्रम को लेकर भी मुख्यमंत्री से विशेष अनुरोध किया। उन्होंने भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की प्रतिमाओं के अनावरण हेतु मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के विकास एवं सौंदर्यीकरण से संबंधित प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रयागराज उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रयागराज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है तथा आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के संतुलन के साथ शहर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 22:30:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आदर्श लघु माध्यमिक विद्यालय बर्डपुर में शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/1777990111811.jpg" alt="1777990111811" width="1200" height="1200" />सिद्धार्थनगर ।</strong> आदर्श लघु माध्यमिक विद्यालय में शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार हस्तशिल्प सेवा केंद्र, वाराणसी द्वारा तीन दिवसीय शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम मंगलवार को शुरू हुआ ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजन का उद्देश्य विद्यालय के छात्रों को भारतीय पारंपरिक शिल्पों से परिचित कराना, उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता बताना तथा बच्चों में कला के प्रति रुचि उत्पन्न करना है। कार्यक्रम में छात्रों को विभिन्न शिल्प कलाओं का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि वे इन कलाओं की तकनीक, उपयोग और सौंदर्य को करीब से समझ सकें। प्रशिक्षण देने के लिए वाराणसी से तीन और एक गोरखपुर से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178257/organization-of-craft-demonstration-cum-awareness-program-in-adarsh-small"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1777990111785.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/1777990111811.jpg" alt="1777990111811" width="4160" height="3120"></img>सिद्धार्थनगर ।</strong> आदर्श लघु माध्यमिक विद्यालय में शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार हस्तशिल्प सेवा केंद्र, वाराणसी द्वारा तीन दिवसीय शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम मंगलवार को शुरू हुआ ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजन का उद्देश्य विद्यालय के छात्रों को भारतीय पारंपरिक शिल्पों से परिचित कराना, उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता बताना तथा बच्चों में कला के प्रति रुचि उत्पन्न करना है। कार्यक्रम में छात्रों को विभिन्न शिल्प कलाओं का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि वे इन कलाओं की तकनीक, उपयोग और सौंदर्य को करीब से समझ सकें। प्रशिक्षण देने के लिए वाराणसी से तीन और एक गोरखपुर से विशेषज्ञ शिल्प प्रशिक्षक विद्यालय पहुंचे हैं।इनमें गोरखपुर से हस्त शिल्प की विशेषज्ञ हरिओम आजाद, बस्ती से हाथ से निर्मित ज्वेलरी शिल्पी प्रहलाद शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिसमें वाराणसी से कालीन प्रशिक्षण अधिकारी धनजीत कुमार,अंबेडकर संस्थान के निर्देशक संजय कुमार पाण्डेय प्रशिक्षकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में रचनात्मकता बढ़ाने में सहायक होते हैं और उन्हें भारतीय कला की विविधता से जोड़ते हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन सदर विधायक श्यामधनी राही ने किया। प्रबंधक राजकुमारी पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय शिल्प कला सदियों पुरानी धरोहर है और विद्यालय में इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और संजोने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम में पहले ही दिन छात्रों में भारी उत्साह देखा गया। बच्चे अलग-अलग शिल्प विधाओं को सीखने के साथ-साथ उनके पीछे की पारंपरिक कहानियों और तकनीकों को भी जान रहे हैं। तीन दिनों तक जारी रहने वाले इस आयोजन में लाइव डेमो, प्रैक्टिकल गतिविधियाँ और शिल्प प्रदर्शनी भी शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान विद्यालय के संचालक/सभासद नितेश पाण्डेय, समाजसेवी संजय कुमार पाण्डेय, प्रधान प्रतिनिधि बर्डपुर न०5 विजय चौरसिया, भाजपा नेता फूलचंद्र जायसवाल, गणेश जायसवाल, पूर्व प्रधान श्यामप्रकाश जायसवाल, रामनिवास विश्वकर्मा, धर्मपाल, रामपाल, जयराम , विनय कुमार, राकेश कुमार , शिवम मिश्रा, अरुण जायसवाल राजेंद्र विश्वकर्मा अजय प्रजापति विनोद प्रजापति, उर्मिला, पूनम सहित विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं क्षेत्रीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 21:24:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय नवसंवत्सर का स्वर्णिम आरंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173466/golden-beginning-of-indian-new-year"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindu-new-year-2025.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह केवल गणनात्मक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रकृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खगोल और मानव जीवन के गहरे संबंधों पर आधारित है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का आधार विक्रम संवत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक प्राचीन कालगणना प्रणाली है और आज भी भारत तथा नेपाल के कई भागों में प्रचलित है। यह पंचांग चंद्र और सूर्य दोनों की गति पर आधारित होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे लूनी सोलर कैलेंडर कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए समय-समय पर अतिरिक्त माह अर्थात अधिमास को भी जोड़ता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ऋतुओं और पर्वों का संतुलन बना रहे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारतीय ऋषियों ने समय की गणना को केवल गणित नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन और प्रकृति के समन्वय के रूप में देखा था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह दिन सृष्टि के आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि हिन्दू नववर्ष को केवल सामाजिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन मनुष्य को अपने जीवन की दिशा पर पुनर्विचार करने</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने और आत्मशुद्धि का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में हिन्दू नववर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">19 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को प्रारंभ होकर विक्रम संवत </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2083 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का आरंभ करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक विशेष वर्ष भी माना जा रहा है क्योंकि इसमें अधिमास के कारण </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">13 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महीने होंगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तथ्य इस बात को और भी रोचक बनाता है कि भारतीय कालगणना कितनी सूक्ष्म और वैज्ञानिक रही है। यह नववर्ष वसंत ऋतु के आगमन के साथ आता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब प्रकृति में नवपल्लव फूटते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फूल खिलते हैं और वातावरण में एक नई ताजगी का संचार होता है। यह दृश्य स्वयं इस बात का प्रतीक है कि जीवन में परिवर्तन और नवाचार अनिवार्य हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की सांस्कृतिक विविधता इस पर्व में अत्यंत सुंदर रूप से झलकती है। देश के विभिन्न भागों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाल में पोइला बैसाख और सिंधी समाज में चेती चांद।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नाम भले ही अलग हों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु सभी में एक ही भावना निहित है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई शुरुआत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का स्वागत। यही विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एकता में अनेकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को भी सुदृढ़ करता है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नए वस्त्र धारण करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार के साथ मिलकर विशेष भोजन का आनंद लेते हैं। घरों को फूलों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आम के पत्तों और रंगोली से सजाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक होता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सब केवल परंपरा नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया भी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो व्यक्ति को पुराने नकारात्मक अनुभवों को छोड़कर नए सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका आध्यात्मिक स्वरूप है। चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी इसी दिन से होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। यह साधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्म-अनुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम और आत्मबल को विकसित करने का माध्यम है। उपवास</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान और जप के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करना सीखता है और जीवन के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल बाहरी उत्सव नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आंतरिक परिवर्तन का भी अवसर है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत होता है। बीते हुए वर्ष की गलतियों और अनुभवों से सीख लेकर हम नए वर्ष में बेहतर निर्णय ले सकते हैं। यह पर्व हमें आशा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और सकारात्मकता का संदेश देता है। यह हमें यह याद दिलाता है कि समय चक्र निरंतर चलता रहता है और हर नया वर्ष हमें स्वयं को सुधारने और आगे बढ़ने का अवसर देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक समय में जब वैश्वीकरण और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और हमारी पहचान को मजबूत करता है। यह युवा पीढ़ी को यह समझने का अवसर देता है कि हमारी परंपराएं केवल अतीत की धरोहर नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ ही</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा देता है। वसंत ऋतु में शरीर और मन दोनों में एक नई ऊर्जा का संचार होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस समय वातावरण शुद्ध होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्य की किरणें शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं और जीवन में संतुलन स्थापित करने का अवसर मिलता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के डिजिटल युग में भी हिन्दू नववर्ष अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह पर्व नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है और लोग इसे नए उत्साह के साथ मना रहे हैं। यह परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय का उदाहरण है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां प्राचीन मूल्य आधुनिक साधनों के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः हिन्दू नववर्ष एक ऐसा पर्व है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें जीवन के मूल सिद्धांतों की याद दिलाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">—</span><span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मकता और निरंतर विकास। यह केवल एक तिथि का परिवर्तन नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर है। जब हम इस दिन नए संकल्प लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल व्यक्तिगत नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति की दिशा में भी एक कदम होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस नववर्ष पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी संस्कृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और मूल्यों को संजोकर रखेंगे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएंगे। यही हिन्दू नववर्ष का वास्तविक संदेश है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नवीनता के साथ परंपरा का सम्मान और जीवन में संतुलन का मार्ग। यही वह सवेरा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल एक वर्ष का नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे जीवन का मार्गदर्शन करता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नव संवत्सर: समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के समन्वय का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​हिंदू नववर्ष केवल कैलेंडर या विक्रम संवत के परिवर्तन का संकेत मात्र नहीं है, बल्कि यह समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के उस संगम का उत्सव है जो भारतीय जीवन-दृष्टि की वैज्ञानिक पहचान को अभिव्यक्त करता है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सनातनी परंपराओं को न भुलाने और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की ऊर्जा प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय चिंतन की सबसे बड़ी विशेषता समय को रेखीय न मानकर चक्रीय मानना है। यहाँ हर अंत, एक नए आरंभ का सूत्रपात है। नव संवत्सर इसी शाश्वत चक्र की याद दिलाता है। यह संदेश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173463/new-year-is-the-festival-of-coordination-of-creation-sensitivity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/gudhi-padwa.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">​हिंदू नववर्ष केवल कैलेंडर या विक्रम संवत के परिवर्तन का संकेत मात्र नहीं है, बल्कि यह समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के उस संगम का उत्सव है जो भारतीय जीवन-दृष्टि की वैज्ञानिक पहचान को अभिव्यक्त करता है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सनातनी परंपराओं को न भुलाने और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की ऊर्जा प्रदान करता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">​भारतीय चिंतन की सबसे बड़ी विशेषता समय को रेखीय न मानकर चक्रीय मानना है। यहाँ हर अंत, एक नए आरंभ का सूत्रपात है। नव संवत्सर इसी शाश्वत चक्र की याद दिलाता है। यह संदेश है कि जीवन में परिवर्तन और नवीनीकरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। अतः यह दिवस  उत्सव मनाने के साथ-साथ,  अपने विचारों और कर्मों को नए सिरे से परिभाषित और परिष्कृत करने का अवसर है।</div>
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<div style="text-align:justify;">​सनातन परंपरा के अनुसार, इसी पावन तिथि को ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का प्रारंभ किया था। प्रकृति की दृष्टि से भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। चैत्र मास में वसंत ऋतु अपने चरमोत्कर्ष पर होती है; वृक्षों में नई कोपलें फूटती हैं और खेतों में फसलें लहलहाती हैं। प्रकृति के इस परिवर्तन को भारतीय संस्कृति ने केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि जीवन के 'पुनर्जागरण' के रूप में स्वीकार करने का संदेश दिया है। यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच उस गहरे भावनात्मक संबंध यानी 'संवेदना' को पुनर्जीवित करता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">​धार्मिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है  क्योंकि इसी तिथि से 'वासंतिक नवरात्रि' का शुभारंभ होता है। नौ दिनों की यह शक्ति-उपासना प्रत्येक मानव को साधना, संयम और आत्म-अनुशासन का मार्ग दिखाती है। यह समय बाहरी कोलाहल के बीच आंतरिक जागरण और सकारात्मक ऊर्जा के संचय का  है, जिससे हम एक अनुशासित जीवन जीने का संकल्प ले सकें।</div>
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<div style="text-align:justify;">​भारत की विशाल सांस्कृतिक विविधता में यह नववर्ष का प्रथम दिवस अलग-अलग नामों और रूपों में रचा-बसा है। महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा', आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 'उगादि', कश्मीर में 'नवरेह' और सिंधी समाज में 'चेटी चंड' के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। संकेत स्पष्ट है कि विशाल भारत में भले ही नाम और रीतियाँ भिन्न हों, लेकिन समय के स्वागत और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना सर्वत्र एक समान है।</div>
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<div style="text-align:justify;">​आज के तकनीकी और भौतिकवादी युग में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह नव संवत्सर हमें याद दिलाता है कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों से मापी जाती है। इस पवित्र पर्व के दिन यदि हम प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, समाज में सह-अस्तित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान का संकल्प लें, तो यह पर्व एक परंपरा से आगे बढ़कर उज्ज्वल भविष्य की नींव बन सकता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">​नव संवत्सर हमें यह स्मरण भी कराता है कि प्रत्येक नया वर्ष केवल तारीखों का बदलना नहीं, बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने का एक ईश्वरीय आमंत्रण है। आइए, इस पावन अवसर पर हम सब भारतीय समय और सृष्टि के साथ कदम मिलाते हुए एक श्रेष्ठ समाज एवं आत्मनिर्भर विकसित राष्ट्र के निर्माण का संकल्प लेते हैं।मेरा ऐसा मानना है कि विश्व के लोग यदि इस पर्व के मर्म को समझ पाते, तो आज जो वैश्विक अशांति और युद्ध का वातावरण व्याप्त है, उससे मुक्ति मिल जाती और 'विश्व बंधुत्व' की भावना को बल मिलता।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:48:28 +0530</pubDate>
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