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                <title>डीपीआरओ - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>डीपीआरओ RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अफ़सरशाही की लापरवाही: कटेहरी बसंतपुर क्लस्टर में 1 महीने से सचिव का पद खाली, जनता बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कटेहरी (अम्बेडकरनगर):</strong> विकासखंड कटेहरी के बसंतपुर क्लस्टर में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। पिछले एक महीने से अधिक समय से यहां किसी सचिव की तैनाती नहीं हुई है। इस गंभीर लापरवाही के कारण क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम सभाओं के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। सबसे बड़ी मार उन आम नागरिकों पर पड़ रही है जो अपने जरूरी दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>21 दिन की समयसीमा बीती, अब तहसील की दौड़ लगाने को मजबूर जनता</strong></div><div style="text-align:justify;">नियम के मुताबिक, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन के 21</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185289/negligence-of-bureaucracy-post-of-secretary-in-katehari-basantpur-cluster"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001299300.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कटेहरी (अम्बेडकरनगर):</strong> विकासखंड कटेहरी के बसंतपुर क्लस्टर में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। पिछले एक महीने से अधिक समय से यहां किसी सचिव की तैनाती नहीं हुई है। इस गंभीर लापरवाही के कारण क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम सभाओं के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। सबसे बड़ी मार उन आम नागरिकों पर पड़ रही है जो अपने जरूरी दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>21 दिन की समयसीमा बीती, अब तहसील की दौड़ लगाने को मजबूर जनता</strong></div><div style="text-align:justify;">नियम के मुताबिक, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन के 21 दिनों के भीतर ब्लॉक स्तर पर आसानी से बन जाने चाहिए। सचिव न होने के कारण यह समयसीमा पार हो चुकी है। अब नियमों के फेर में फंसी जनता को इन प्रमाण पत्रों के लिए तहसील के चक्कर काटने पड़ेंगे। जो काम गांव और ब्लॉक स्तर पर आसानी से हो सकता था, वह अफ़सरों की सुस्ती के कारण अब आम जनता के लिए भारी मुसीबत बन गया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>डीपीआरओ के खोखले आश्वासन, 15 दिनों से सिर्फ मिल रही 'तारीख पर तारीख'</strong></div><div style="text-align:justify;">इस गंभीर समस्या को लेकर जब जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) से संपर्क किया गया, तो पिछले 15 दिनों से सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिल रहे हैं। डीपीआरओ हर बार फोन पर यही रटा-रटाया जवाब देते हैं कि "आज काम हो जाएगा" या "कल सचिव की तैनाती कर दी जाएगी"। लेकिन हकीकत यह है कि आज तक बसंतपुर क्लस्टर को कोई सचिव नहीं मिला है।अफ़सरों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। जनता का सीधा सवाल है कि आखिर अधिकारियों की इस सुस्ती और लापरवाही की सजा आम नागरिक क्यों भुगते?</div>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 19:25:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एडीओ पंचायत ने अपने सुविधा के अनुसार कुछ सफाईकर्मियों के कार्य क्षेत्र में किया बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले के कप्तानगंज विकासखंड के सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत ) सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अपने सुविधा शुल्क के अनुसार कुछ सफाईकर्मियों के कार्य क्षेत्र में बदलाव किया है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत ने ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर में 02 राजस्व गांवो में 06 सफाईकर्मियों की तैनाती किया था जिसको लेकर कई बार सम्मानित समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई थी सोशल मीडिया पर वायरल खबरों का संज्ञान लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर ने महुआ लखनपुर में राजस्व गांवों से अधिक सफाईकामियों को स्थांतरित करने का निर्देश दिया था लेकिन एडीओ पंचायत ने डीपीआरओ के निर्देश को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177699/ado-panchayat-changed-the-work-area-of-some-sweepers-as"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260430-wa0051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong>बस्ती जिले के कप्तानगंज विकासखंड के सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत ) सुशील कुमार श्रीवास्तव ने अपने सुविधा शुल्क के अनुसार कुछ सफाईकर्मियों के कार्य क्षेत्र में बदलाव किया है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत ने ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर में 02 राजस्व गांवो में 06 सफाईकर्मियों की तैनाती किया था जिसको लेकर कई बार सम्मानित समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई थी सोशल मीडिया पर वायरल खबरों का संज्ञान लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर ने महुआ लखनपुर में राजस्व गांवों से अधिक सफाईकामियों को स्थांतरित करने का निर्देश दिया था लेकिन एडीओ पंचायत ने डीपीआरओ के निर्देश को दरकिनार करके 04 सफाईकर्मियों का स्थानांतरण करने के बजाए मात्र 01 सफाई कर्मी का स्थानांतरण किया है जिस सफाई कर्मी का स्थानांतरण हुआ है वही सफाईकर्मी निरन्तर डियूटी करता था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानांतरित सफाईकर्मी का स्थानांतरण इसीलिए एडीओ पंचायत ने किया है कि जब सभी सफाईकर्मी डियूटी पर नही आते हैं तो एक सफाईकर्मी का डियूटी पर आने से कोई मतलब नहीं है क्योंकि प्रतिदिन डियूटी पर आने वाला सफाईकर्मी अन्य डियूटी से गायब सफाईकर्मियों की पोल खोल देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों की माने तो सरकारी शासनादेश के अनुसार एक राजस्व गांव में एक ही सफाई कर्मी की नियुक्ति होनी चाहिए । ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर में 02 राजस्व गांवो में 06 सफाईकर्मियों की तैनाती करना ही एडीओ पंचायत के बड़े भ्रष्टाचार का संकेतक है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">    ग्राम पंचायत महुआ लखनपुर समेत अन्य लगभग एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में सफाईकर्मियों की तैनाती में बड़ा खेल किया है । कुछ ग्राम पंचायतों में राजस्व गांव अधिक है वहां राजस्व गांवों की अपेक्षा सफाईकर्मियों की तैनाती कम है और जहां राजस्व गांव कम है वहां सफाईकर्मियों की तैनाती ज्यादा है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सूत्रों की माने तो कप्तानंगज में एक दर्जन से अधिक सफाईकर्मियों को नेतागिरी करने की छूट दी गई है चाहे वह सफाई घर पर बैठकर , जिला मुख्यालय पर बैठकर, सरकारी कार्यालयों में बैठकर नेतागिरी करता हो । एडीओ पंचायत सुशील कुमार श्रीवास्तव के लापरवाही / मनमानी से सफाई कर्मियों की तैनाती व डियूटी में बड़ा खेल चल रहा है और ग्राम पंचायतों में साफ सफाई की व्यवस्था पूरी तरह चौपट होती जा रही है लेकिन एडीओ पंचायत को मात्र अपने जेब भरने की चिन्ता सता रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत सुशील कुमार श्रीवास्तव के भ्रष्टाचार को लेकर जल्द ही उच्च अधिकरियों से शिकायत करने की तैयारी चल रही है क्योंकि जब तक एडीओ पंचायत के कारनामों को उजागर नहीं किया जायेगा तब तक ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मी नियमित डियूटी नही करेंगे और न ही ग्राम पंचायतों में साफ सफाई की व्यवस्था ठीक होगी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त प्रकरण में जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर से फोन के माध्यम से जानकारी लेना चाहा तो जिला पंचायत राज अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:00:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11.17 करोड़ के खर्च पर सवाल: अभिलेख न देने पर 18 सचिवों का वेतन रोका, जमीनी हकीकत पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173462/questions-raised-on-expenditure-of-rs-1117-crore-salary-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/bhrastachar.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा किया गया, जिसमें कई स्थानों पर संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। समिति ने इसे गंभीर मानते हुए धनराशि के दुरुपयोग की आशंका जताई और रिपोर्ट विभाग को भेजी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />कई बार नोटिस व पत्राचार के बावजूद अभिलेख प्रस्तुत न करने पर डीपीआरओ लालजी दूबे ने 18 सचिवों के मार्च माह के वेतन पर रोक लगा दी है और स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों ने पूरे मामले को लेकर जमीनी हकीकत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य केवल कागजों में ही दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता में मौके पर कार्य अधूरे या न के बराबर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी बिल-वाउचर के जरिए भुगतान दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभागीय आंकड़ों के अनुसार खर्च की गई कुल धनराशि 11.17 करोड़ रुपये है, लेकिन अभिलेख प्रस्तुत न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इसमें से कितनी राशि का वास्तविक और सत्यापित हिसाब उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्थानीय स्तर पर अब मामले की निष्पक्ष जांच और जमीनी सत्यापन की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:44:55 +0530</pubDate>
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