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                <title>political news india - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>political news india RSS Feed</description>
                
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                <title>विधानसभा चुनाव: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण से पहले चुनाव आयोग सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूत्रों के अनुसार, आयोग ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त (सीपी), सभी उपायुक्त (डीसीपी), जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित थाना स्तर तक के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास विस्फोटक सामग्री पाई जाती है या डराने-धमकाने की कोई रणनीति अपनाई जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी को इसके</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177429/election-commission-strict-before-the-second-phase-of-assembly-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/navjivanindia_2026-04-25_svf60re9_election-commision.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूत्रों के अनुसार, आयोग ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त (सीपी), सभी उपायुक्त (डीसीपी), जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित थाना स्तर तक के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास विस्फोटक सामग्री पाई जाती है या डराने-धमकाने की कोई रणनीति अपनाई जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी को इसके लिए सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को अभूतपूर्व परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने सभी पुलिस अधिकारियों को अगले 24 घंटों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार की अवैध या संदिग्ध सामग्री, विशेषकर विस्फोटक पदार्थों को तत्काल जब्त करने को कहा गया है। साथ ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। आयोग का मानना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे हर हाल में रोका जाना जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन से यह भी कहा गया है कि वे स्थानीय खुफिया तंत्र को सक्रिय रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएं। इसके अलावा, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि वह चुनावों के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। 29 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए मतदान होगा। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:28:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आचार संहिता: ईसी ने पीएम के बयान की जाँच की बात कही तो बीजेपी खड़गे के पीछे पड़ी!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> पीएम मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों की ईसीआई की जाँच की ख़बर आने के बीच ही बीजेपी ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री खड़गे के ख़िलाफ़ शिकायत करने ईसीआई पहुँच गए। इस बीच, ममता बनर्जी ने भी बंगाल में बीजेपी पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कई राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी एमसीसी तोड़ने का आरोप लगा रही हैं। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष की शिकायत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177025/when-ec-asked-to-investigate-pms-statement-bjp-went-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/69e76d9fabede-bjp-demands-apology-from-kharge-212914289-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> पीएम मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों की ईसीआई की जाँच की ख़बर आने के बीच ही बीजेपी ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री खड़गे के ख़िलाफ़ शिकायत करने ईसीआई पहुँच गए। इस बीच, ममता बनर्जी ने भी बंगाल में बीजेपी पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी एमसीसी तोड़ने का आरोप लगा रही हैं। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष की शिकायत की जांच करने का फैसला किया है। विपक्ष की शिकायत के बाद आयोग ने यह निर्णय लिया है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह संबोधन चुनाव के बीच मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्षी नेताओं, वामपंथी पार्टियों और क़रीब 700 एक्टिविस्टों व आम नागरिकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने सरकारी प्रसारक दूरदर्शन और आकाशवाणी का इस्तेमाल करके चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की।सीपीआई (एम) के महासचिव एम ए बेबी ने लिखा कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन चुनाव वाले राज्यों में जनमत प्रभावित करने वाला था। इससे चुनाव में बराबरी का मौका नहीं मिलता और लोकतंत्र की नींव हिल जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस शिकायत की जाँच मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट डिवीजन करेगा। बता दें कि मॉडल कोड 15 मार्च से लागू है और 4 मई तक रहेगा, जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती होगी।दूसरी ओर, बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। बुधवार को तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह शामिल थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निर्मला सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने तमिलनाडु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री को 'आतंकवादी' कहा, जो बहुत गलत और निंदनीय है। यह पूरे देश के लोगों के दिए गए जनादेश का अपमान है। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस हार के डर से निराश होकर ऐसा बोल रही है। बीजेपी ने मांग की कि खड़गे और कांग्रेस देश से माफी मांगें। किरेन रिजिजू ने इसे 'घृणित कृत्य' बताया और कहा कि चुनाव आयोग को इतनी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए कि आगे कोई प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहने की हिम्मत न करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खड़गे ने चेन्नई में कहा था कि मोदी लोकतंत्र को आतंकित कर रहे हैं, एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। बाद में उन्होंने सफाई दी थी कि उन्होंने शाब्दिक रूप से 'आतंकवादी' नहीं कहा, बल्कि उनका मतलब था कि वह 'आतंकित कर रहे हैं'। खड़गे ने कहा, 'वे लोगों और राजनीतिक पार्टियों को आतंकित (terrorise) कर रहे हैं। मैंने कभी यह नहीं कहा कि वे शाब्दिक रूप से आतंकवादी हैं।' उन्होंने जोड़ा कि मोदी सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबा रही है। बीजेपी ने मंगलवार को भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर खड़गे से सार्वजनिक माफी मांगने और उनके खिलाफ BNS की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:19:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी पर FIR मामले में कोर्ट ने अपना आदेश बदला, कहा- बिना नोटिस केस दर्ज करना ठीक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) मामले में FIR दर्ज करने संबंधी अपने ही आदेश को बदल दिया है। कोर्ट ने शनिवार को अपनी वेबसाइट पर संशोधित आदेश जारी किया।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई की। याचिकाकर्ता समेत केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से कोर्ट ने पूछा कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत है? सभी पक्षों ने नोटिस की कोई आवश्यकता नहीं बताई। इसके बाद कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176643/the-court-changed-its-order-in-the-fir-case-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/untitled-design-2026-04-18t173530.154.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) मामले में FIR दर्ज करने संबंधी अपने ही आदेश को बदल दिया है। कोर्ट ने शनिवार को अपनी वेबसाइट पर संशोधित आदेश जारी किया।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई की। याचिकाकर्ता समेत केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से कोर्ट ने पूछा कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत है? सभी पक्षों ने नोटिस की कोई आवश्यकता नहीं बताई। इसके बाद कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, आदेश के टाइप होने से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने फैसले की फिर से समीक्षा की। पुराने प्रेसिडेंट केसों और कानूनी प्रक्रिया का अध्ययन करने के बाद उन्होंने पाया कि ऐसे मामलों में आरोपी को नोटिस जारी करना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस दिए राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश उचित नहीं है। इसलिए कोर्ट ने अपने पिछले आदेश को संशोधित कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 (सोमवार) के लिए तय कर दी है। इस सुनवाई में राहुल गांधी या उनके वकील को नोटिस जारी करने और उनका पक्ष सुनने के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। याचिकाकर्ता कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने कहा वह CJI से मामले की शिकायत करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता और वकील हैं। उन्होंने 2024 से इस मामले पर लगातार शिकायतें की हैं। इसमें शामिल हैं। मई 2024 में चुनाव आयोग को आपत्ति, 2024 में हाईकोर्ट में PIL (जिसे खारिज कर MHA को जवाब देने को कहा गया), जुलाई 2024 में गृह मंत्रालय को विस्तृत शिकायत और वीडियो सबूत, तथा 2025 में BNSS की धारा 173(4) के तहत रायबरेली की ACJM कोर्ट में FIR की मांग।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता का मुख्य दावा यह है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की एक कंपनी के वार्षिक रिटर्न में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया और लंदन का पता दिया। उनके पास यूके सरकार के कुछ 'गुप्त ईमेल और दस्तावेज' भी होने का दावा है। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 318, 335, 340, 236, 237, 61, 148, 147, 152, 238, 336(3), 351 आदि के साथ Official Secrets Act 1923, Passport Act 1967 और Foreigners Act 1946 भी शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:33:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हुमायूं कबीर से ओवैसी ने तोड़ा गठबंधन, बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने साफ कहा है कि अब वह पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। यह फैसला कबीर के एक कथित वायरल वीडियो के बाद उठे विवाद के बीच लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एआईएमआईएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि हुमायूं कबीर के हालिया खुलासों ने बंगाल के मुसलमानों की असुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 'हुमायूं कबीर के खुलासों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175793/owaisi-breaks-alliance-with-humayun-kabir-and-announces-to-contest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/humayun-kabir-owaisijpg_1775789314059.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने साफ कहा है कि अब वह पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। यह फैसला कबीर के एक कथित वायरल वीडियो के बाद उठे विवाद के बीच लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एआईएमआईएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि हुमायूं कबीर के हालिया खुलासों ने बंगाल के मुसलमानों की असुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 'हुमायूं कबीर के खुलासों ने बंगाल के मुसलमानों की असुरक्षा को उजागर किया है। एआई एमआईएम ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं कर सकती, जिससे मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठे। आज से एआईएमआईएम ने कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन वापस ले लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार (9 अप्रैल) को हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। वीडियो में वह कथित तौर पर BJP नेताओं से संपर्क और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने की रणनीति पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए और मामले की जांच की मांग की। पार्टी ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रधानमंत्री कार्यालय से कबीर की कथित नजदीकियों की जांच कराने की मांग उठाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में यह भी दावा किया जा रहा है कि हुमायूं कबीर अल्पसंख्यक वोटों को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से अलग करने की रणनीति पर का एकम कर रहे थे, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही कथित तौर पर उन्होंने इस योजना को लागू करने के लिए बड़ी धनराशि की जरूरत का भी जिक्र किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 22:49:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बंगाल चुनाव: 'यहां से दफा हो जाओ', टीएमसी नेताओं से चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175582/bengal-elections-get-lost-from-here-tmc-leaders-make-serious"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/vkfbk1c5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन उनमें से किसी का भी न तो जवाब दिया गया और न ही कोई संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में गंभीर मामला है, क्योंकि एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चिट्ठियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ओ’ब्रायन के मुताबिक, बैठक सुबह करीब 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू हुई और 7-8 मिनट में ही खत्म हो गई। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनका संबंध भारतीय जनता पार्टी से है। उन्होंने ऐसे 6 उदाहरण चुनाव आयोग के सामने रखे और कहा कि इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्तियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर इस तरह के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव हो पाएंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने ये मुद्दे उठाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें बीच में रोक दिया और कथित तौर पर "यहां से निकल जाओ" कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अपने 22 साल के राजनीतिक करियर और 16 साल के संसदीय अनुभव में उन्होंने कभी भी किसी संवैधानिक संस्था के साथ ऐसी स्थिति नहीं देखी। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग के पास बैठक का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि सच सामने आ सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका प्रतिनिधिमंडल बाहर निकल रहा था, तब उनके एक सहयोगी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई दी कि वे भारत के इतिहास में पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनके खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में हटाने के नोटिस दिए गए हैं।ओ’ब्रायन ने आगे बताया कि इस मुद्दे को लेकर सभी विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब वे बैठक में पहुंचे, तो शुरुआत में ही यह कहा गया कि उनका प्रतिनिधिमंडल अधिकृत नहीं है, जबकि वे पूरी तरह अधिकृत होकर गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने मुद्दे रखने शुरू किए, तो उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया गया।ओ’ब्रायन ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता बेहद जरूरी है और अगर इस पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चिंता की बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:17:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अरुणाचल के सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों की होगी सीबीआई जांच, 1270 करोड़ के घोटाले का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175321/cbi-probe-into-contracts-related-to-arunachal-cms-family-allegation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को मामले की सुनवाई के दौरान सुरक्षित रखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में प्रस्तुत याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले 10 वर्षों में चार कंपनियों को, जो सीएम पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी हैं, करीब 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके दिए गए। याचिकाकर्ता एनजीओ, सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों में स्पष्ट कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट पाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सीएम पेमा खांडू, उनके पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रिमा और भतीजा त्सेरिंग ताशी को पार्टी प्रतिवादी बनाया गया है। दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और अप्रैल 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हुआ था। याचिका में यह भी बताया गया कि रिंचिन ड्रिमा की कंपनी, ब्रांड ईगल्स को कई सरकारी ठेके मिले, जो विवादित और पारिवारिक संबंधों के कारण सवाल उठाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से अब राज्य में सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और सीएम परिवार के ठेकों की कानूनी जांच संभव हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:07:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रामकृष्णनगर में चुनावी प्रचार चरम पर, बीजेपी बनाम कांग्रेस में कड़ा मुकाबले का संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि -</strong>  श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला अब और भी दिलचस्प होता जा रहा है। वर्तमान के दो बार विधायक एवं बीजेपी प्रत्याशी विजय मालाकार तथा कांग्रेस प्रत्याशी, वकील और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुरुचि राय दोनों ही सभाओं और रैलियों के जरिए जोरदार प्रचार अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सुरुचि राय ने अपने जनसभाओं में शिक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के दुल्लभछड़ा,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174670/election-campaign-at-its-peak-in-ramakrishnanagar-indicating-tough-contest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001397049.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि -</strong> श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला अब और भी दिलचस्प होता जा रहा है। वर्तमान के दो बार विधायक एवं बीजेपी प्रत्याशी विजय मालाकार तथा कांग्रेस प्रत्याशी, वकील और पूर्व जिला परिषद सदस्य सुरुचि राय दोनों ही सभाओं और रैलियों के जरिए जोरदार प्रचार अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सुरुचि राय ने अपने जनसभाओं में शिक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के दुल्लभछड़ा, निविया, चेरागी और रंगपुर जैसे दूरदराज़ इलाकों के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए कई किलोमीटर दूर रामकृष्णनगर जाना पड़ता है, जिससे मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने वादा किया कि जीतने पर क्षेत्र में डिग्री कॉलेज, सर्कल ऑफिस और अन्य आवश्यक सरकारी संस्थानों की स्थापना की जाएगी। साथ ही, उन्होंने पिछले पंचायत चुनाव में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए पारदर्शी प्रशासन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। वहीं, बीजेपी उम्मीदवार विजय मालाकार विकास के मुद्दे को केंद्र में रखकर प्रचार कर रहे हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस के लंबे शासनकाल की तुलना में बीजेपी ने कम समय में कहीं अधिक विकास कार्य किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पहले क्षेत्र में संचार व्यवस्था कमजोर थी और कानून-व्यवस्था भी चिंताजनक थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इन क्षेत्रों में सुधार किया है। उन्होंने जनता से पिछले और वर्तमान हालात की तुलना करने की अपील की और अपनी जीत को लेकर आशावाद जताया। कुल मिलाकर, रामकृष्णनगर में इस बार का चुनाव विकास बनाम बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर केंद्रित होकर बेहद प्रतिस्पर्धी बन चुका है। अब देखना होगा कि मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं और इस कड़े मुकाबले में जीत किसकी होती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:33:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांच राज्यों के चुनाव में कानून व्यवस्था सबसे बड़ी कसौटी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174550/law-and-order-is-the-biggest-criterion-in-the-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_20260325_1748291.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि राज्य में प्रशासनिक तंत्र निष्पक्ष नहीं है और मतदाताओं को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। इन आरोपों के बाद मामला भारत निर्वाचन आयोग तक पहुंच चुका है। यह स्थिति कानून व्यवस्था की दृष्टि से चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि जब सत्तारूढ़ दल पर ही इस प्रकार के आरोप लगते हैं तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया है। राज्य में पहले भी चुनावों के दौरान हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बार भी पूरक मतदाता सूची को लेकर असमंजस और लाखों नामों पर विचाराधीन स्थिति ने प्रशासनिक चुनौती को और बढ़ा दिया है। स्पष्ट है कि बंगाल में कानून व्यवस्था चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और इसे संभालना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर के राज्य असम में भी स्थिति पूरी तरह शांत नहीं कही जा सकती। यहां कांग्रेस और एआईयूडीएफ कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की घटना सामने आई है, जिसने चुनावी माहौल में तनाव का संकेत दिया है। यह घटना दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कभी-कभी टकराव का रूप ले लेती है। हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ पक्ष लगातार यह दावा कर रहा है कि कानून व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाएं चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में स्थिति अपेक्षाकृत शांत दिखती है, लेकिन यहां भी राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हैं। नामांकन, रैलियां और जनसंपर्क कार्यक्रमों के बीच प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कहीं भी अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बने। विभिन्न दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी जरूर तेज है, परंतु अभी तक बड़े स्तर पर हिंसक घटनाओं की खबर नहीं है। यह राज्य परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण चुनावों के लिए जाना जाता है, लेकिन सतर्कता यहां भी जरूरी है क्योंकि चुनावी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दक्षिण भारत के ही केरल में चुनावी प्रक्रिया एक अलग ही स्वरूप में नजर आती है। यहां राजनीतिक चेतना उच्च स्तर की मानी जाती है और मतदाता सक्रिय रूप से भागीदारी करते हैं। इस बार भी बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा शुरू की गई है, जो लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि यहां प्रत्यक्ष हिंसा की घटनाएं कम देखने को मिलती हैं, फिर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और वैचारिक टकराव लगातार जारी रहता है। कानून व्यवस्था की दृष्टि से राज्य अपेक्षाकृत संतुलित नजर आता है, लेकिन प्रशासन को पूरी सतर्कता बनाए रखनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां सीमित दायरे में होती हैं, लेकिन यहां भी राजनीतिक समीकरण काफी जटिल होते हैं। छोटे क्षेत्रफल के बावजूद यहां गठबंधन राजनीति का प्रभाव अधिक है। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है, क्योंकि छोटी घटनाएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। हालांकि अब तक यहां से किसी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं है, लेकिन चुनावी माहौल को देखते हुए सावधानी आवश्यक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन पांचों राज्यों की स्थिति का समग्र विश्लेषण यह बताता है कि जहां एक ओर लोकतंत्र का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है। चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं होते, बल्कि यह जनता के विश्वास और प्रशासन की निष्पक्षता की भी परीक्षा होते हैं। यदि मतदाता भयमुक्त होकर मतदान नहीं कर पाएंगे तो चुनाव का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीतिक दलों को भी यह समझना होगा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। प्रशासन और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका इस समय सबसे अहम हो जाती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि इन चुनावों में जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा है। कानून व्यवस्था की स्थिति ही तय करेगी कि यह चुनाव लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनेंगे या फिर अव्यवस्था की मिसाल। देश की नजरें इन पांच राज्यों पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:43:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतें बढ़ेंगी, एमएसएमई पर चोट पहुंचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिमी एशिया में चल रही जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसे लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार का घेराव किया।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी- ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार चाहे इसे 'नॉर्मल' बताए, लेकिन हकीकत ये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173868/rahul-gandhi-attacks-modi-government-prices-of-petrol-diesel-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi-modi-government-congress.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिमी एशिया में चल रही जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसे लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार का घेराव किया।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी- ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार चाहे इसे 'नॉर्मल' बताए, लेकिन हकीकत ये है कि उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे। एमएसएमई को सबसे ज्यादा चोट लगेगी। रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे। एफआईआई का पैसा और तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने आगे कहा कि यानी हर परिवार की जेब पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है। और यह सिर्फ वक्त की बात है, चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल, और एलपीजी की कीमतें भी बढ़ा दी जाएंगी। मोदी सरकार के पास न दिशा है, न रणनीति, सिर्फ बयानबाजी है। सवाल यह नहीं कि सरकार क्या कह रही है, सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों राहुल गांधी ने कहा था कि दुनिया तेजी से बदल रही है। संकट हमारे दरवाजे पर है। अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो एलपीजी, पेट्रोल और डीजल करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन जाएंगे। सच्चाई साफ है, केंद्र सरकार ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा था कि कमजोर और दिशाहीन विदेश नीति ने देश को इस खतरनाक स्थिति में ला खड़ा किया है। अब समय है सच बताने का और देश को तैयार करने का। वरना इसकी कीमत भारत के आम लोग चुकाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 19:29:56 +0530</pubDate>
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                <title>धार्मिक आजादी को लेकर संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए केन्द्र सरकार है जिम्मेदार- प्रमोद तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज-प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने देश में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिकी अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग वर्ष 2026 की रिपोर्ट को गंभीर चिंता का विषय करार दिया है। उन्होने आयोग की सलाना रिपोर्ट के हवाले से यह दावा जताया है कि इसमें खुफिया एजेंसी रॉ तथा भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वारा अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में हस्तक्षेप किये जाने की पुष्टि की गयी है। उन्होने कहा कि इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व खुफिया एजेंसी रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173439/central-government-is-responsible-for-violation-of-constitutional-rights-regarding"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260317-wa0110.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज-प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने देश में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिकी अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग वर्ष 2026 की रिपोर्ट को गंभीर चिंता का विषय करार दिया है। उन्होने आयोग की सलाना रिपोर्ट के हवाले से यह दावा जताया है कि इसमें खुफिया एजेंसी रॉ तथा भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वारा अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में हस्तक्षेप किये जाने की पुष्टि की गयी है। उन्होने कहा कि इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व खुफिया एजेंसी रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग के द्वारा देश में धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के द्वारा आरएसएस और रॉ पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गयी है।उन्होने कहा कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है ऐसे में आयोग की यह सालाना रिपोर्ट विदेशों में भी देश की छवि को धूमिल बना गयी है। उन्होने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट को लेकर देश के अधिकतर राजनैतिक दलों ने भी ताजा चिन्ता व्यक्त की है।  उन्होने कहा कि अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर आयोग की रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि भारत के संविधान में सभी धर्मो को मानने वाले लोगों को प्रदत्त अधिकार का खुला उल्लंघन हो रहा है। सांसद प्रमोद तिवारी का बयान मंगलवार को यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:44:51 +0530</pubDate>
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