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                <title>education system india - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>education system india RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>देश की शिक्षा प्रणाली एक्सटोर्शन मशीन, बच्चों को दबाती-कुचलती है, इसे बदलना होगा: राहुल गांधी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग हब</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों की गूंज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को ‘प्रेशराइज’ (दबाव में) करता है। यह उन्हें ‘स्ट्रेस’ (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181544/the-countrys-education-system-is-an-extortion-machine-that-oppresses"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग हब</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों की गूंज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को ‘प्रेशराइज’ (दबाव में) करता है। यह उन्हें ‘स्ट्रेस’ (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश के भविष्य के लिए बिल्कुल सही नहीं है।’’ उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि आगे से किसी भी बच्चे को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मघाती</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कदम न उठाना पड़े।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि उनकी छात्रों और युवाओं के साथ इस संवाद का मकसद राजनीतिक नहीं है। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। इसमें भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा होगी कि इसमें क्या कमियां हैं और क्या सुधार करने की जरूरत है।’’ उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">यह बैठक आपके बारे में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह शाम आपके बारे में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन चुनौतियों के बारे में जिनका आप हर दिन सामना कर रहे हैं।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयार कर रहे पांच छात्रों को मंच पर बुलाया और उनसे बात की। उन्होंने एक छात्रा और उसके अभिभावकों से भी मंच पर बात की। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हम अभी आज राजनीतिक बात नहीं कर रहे हैं। मैं हिंदुस्तान के भविष्य की बात कर रहा हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपके भविष्य की बात कर रहा हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के भविष्य की बात कर रहा हूं। हमें इस (शिक्षा) प्रणाली को बदलना होगा और इस प्रणाली को ठीक करना होगा।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि हम ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहते हैं जो हर भारतीय को बड़ा सपना देखने का मौका दे और उसे पूरा करे। सबसे बड़ी बात आपका यह सपना न्यूनतम लागत पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना आपकी जेब से लाखों करोड़ रुपये छीने करना चाहिए। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">देश की शिक्षा प्रणाली हिंदुस्तान के सबसे गरीब मध्यम वर्ग के लोगों से एक परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितना शिक्षा का बजट है और पांच बड़ी परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितने पांच बड़े मंत्रालयों को बजट मिलता है। ये शर्मनाक है। हमें इसे बदलना होगा।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की शिक्षा प्रणाली शोषण (एक्सटोर्शन) मशीन है। ये आपसे पैसे लेने का ‘सिस्टम’ है। ये सिर्फ शिक्षा देने का ‘सिस्टम’ नहीं है। ये परीक्षा के आधार पर आपसे लाखों करोड़ रुपये छीनने का ‘सिस्टम’ है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कार्यक्रम इस आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से इससे जुड़ने और अपने सुझाव देने की अपील की कि हम इस प्रणाली को कैसे बदलें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:05:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दावे विश्वगुरु के लेकिन देश में एक परीक्षा भी नहीं करवा सकते',  राहुल का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को नीट पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए बड़ा हमला बोला। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि नीट, सीबीएसई,एसएससी और आज CUET, चार परीक्षाएं और एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश की शिक्षा व्यवस्था को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180381/claims-of-vishwaguru-but-cannot-even-conduct-an-examination-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images12.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को नीट पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए बड़ा हमला बोला। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि नीट, सीबीएसई,एसएससी और आज CUET, चार परीक्षाएं और एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश की शिक्षा व्यवस्था को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार एक ओर भारत के ‘विश्वगुरु’ होने का दावा करती है जबकि दूसरी ओर वह एक भी परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से आयोजित नहीं कर पा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि भारत भर में स्नातक डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) 2026 की परीक्षा में तकनीकी खराबी के कारण शनिवार को कुछ केंद्रों पर देरी हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नीट, सीबीएसई, एसएससी और आज सीयूईटी। चार परीक्षाएं। एक करोड़ बच्चे। एक भी (परीक्षा) ईमानदारी से नहीं हो पाई।’’गांधी ने कहा, ‘‘दावे विश्वगुरु के, लेकिन देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।’’ कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।’’ राहुल गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक की निगरानी भी की थी। बता दें कि राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से लगातार नीट पेपर लीक और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर सरकार को घेरते नजर आ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की विफलता पर मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई न करना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, न कि लाखों छात्रों के भविष्य की। कांग्रेस नेता ने उन छात्रों के साथ अपनी पिछली बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया, जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) परीक्षा दी थी और पेपर लीक के मद्देनजर परीक्षा प्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180381/claims-of-vishwaguru-but-cannot-even-conduct-an-examination-in</link>
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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:55:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीबीएसई का डिजिटल प्रयोग बना छात्रों की सबसे बड़ी परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सुधार के नाम पर व्यवस्था ही संकट बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब शिक्षा तंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सीबीएसई</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में कक्षा </span>12 <span lang="hi" xml:lang="hi">की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग</span>  (<span lang="hi" xml:lang="hi">ओएसएम</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रणाली लागू की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पारदर्शिता और गति की दिशा में बड़ा कदम माना गया। उद्देश्य था निष्पक्ष और त्रुटिरहित मूल्यांकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वास्तविकता ने लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ दिया। धुंधली स्कैनिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गलत उत्तर पुस्तिकाओं का अपलोड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई उत्तरों का बिना जाँच छूटना और पोर्टल की तकनीकी विफलताओं ने वर्षों की मेहनत पर संकट खड़ा कर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180137/cbses-digital-experiment-becomes-the-biggest-test-of-students"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/student-5-390x220.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सुधार के नाम पर व्यवस्था ही संकट बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब शिक्षा तंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सीबीएसई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में कक्षा </span>12 <span lang="hi" xml:lang="hi">की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग</span> (<span lang="hi" xml:lang="hi">ओएसएम</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रणाली लागू की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पारदर्शिता और गति की दिशा में बड़ा कदम माना गया। उद्देश्य था निष्पक्ष और त्रुटिरहित मूल्यांकन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वास्तविकता ने लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ दिया। धुंधली स्कैनिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गलत उत्तर पुस्तिकाओं का अपलोड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई उत्तरों का बिना जाँच छूटना और पोर्टल की तकनीकी विफलताओं ने वर्षों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया। नतीजतन पास प्रतिशत गिरकर </span>85.2% <span lang="hi" xml:lang="hi">पर आ गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सात वर्षों का सबसे निचला स्तर रहा। कई मेधावी छात्र अचानक कम अंकों से स्तब्ध रह गए। यह केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सपनों पर पड़ा गहरा आघात बन गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ शिक्षा सपनों को उड़ान देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं डिजिटल अव्यवस्था ने हजारों छात्रों के भविष्य पर विराम लगा दिया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जेईई मेन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पास करने वाले कई मेधावी छात्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओएसएम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की खामियों के कारण क्लास </span>12 <span lang="hi" xml:lang="hi">में अपेक्षित अंक नहीं ला सके। कई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मेधावी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">छात्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपेक्षित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अंकों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर</span> 75% <span lang="hi" xml:lang="hi">कट-ऑफ</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पीछे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एनआईटी</span>/<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आईआईटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आदि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रवेश प्रभावित हुआ। फिजिक्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केमिस्ट्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैथ्स और इंग्लिश में अप्रत्याशित कम अंकों ने वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कोचिंग का खर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जागी रातें और सुनहरे सपने एक तकनीकी गड़बड़ी के आगे बिखरते दिखे। यह केवल रिजल्ट की भूल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि युवाओं के करियर और आत्मविश्वास पर गहरा आघात है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब एक गलती मार्कशीट से निकलकर मन तक पहुँच जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उसका असर सबसे भयावह हो जाता है। पूरी मेहनत और समर्पण से तैयारी करने वाले हजारों छात्र अचानक चिंता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निराशा और मानसिक दबाव में घिर गए। सोशल मीडिया पर उठते “हमारी मेहनत क्यों बर्बाद</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे सवाल व्यवस्था की संवेदनहीनता उजागर करने लगे। कई विद्यार्थियों की नींद छिन गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार तनाव में डूब गए और कॉलेज एडमिशन की डेडलाइन ने युवाओं को टूटन के कगार पर पहुँचा दिया। शिक्षा का उद्देश्य आत्मविश्वास जगाना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि युवाओं को असुरक्षा में धकेलना। लेकिन सीबीएसई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की लापरवाही ने हजारों घरों की शांति और भरोसा दोनों हिला दिए।</span>  <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल गलती का यह प्रभाव अब केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि घर-घर की बेचैनी बन गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब जांच की प्रक्रिया ही भरोसे के संकट में घिर जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि पूरा परिणाम दोबारा मैनुअल तरीके से क्यों न तैयार कराया जाए। जिन स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को छात्र स्वयं स्पष्ट रूप से नहीं पढ़ पा रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी डिजिटल प्रारूप में निष्पक्ष री-इवैल्यूएशन कैसे संभव माना जाए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि मैनुअल री-चेकिंग की मांग अब सबसे न्यायपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है। शिक्षक जब वास्तविक कॉपी देखकर जाँच करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब वे लिखावट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर की संरचना और सोच की क्रमबद्धता को बेहतर समझ पाते हैं। इसके विपरीत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओएसएम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में धुंधली इमेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमित दृश्यता और स्क्रीन थकान के कारण कई सही उत्तर भी अनदेखे रह गए। यही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कारण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लिए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैनुअल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">री-चेकिंग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">या</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्ण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समीक्षा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मांग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपूर्ण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकल्प</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उभरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल व्यवस्था की चमक उस समय बिखर गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब पोर्टल की खामियां छात्रों के लिए नई परेशानी बन गईं। उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने और री-इवैल्यूएशन के लिए छात्रों को घंटों पोर्टल पर जूझना पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बार-बार तकनीकी गड़बड़ियों ने पूरी प्रक्रिया को अव्यवस्थित बना दिया। पेमेंट फेल होने के बावजूद राशि कट जाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैप्चा गायब होना और आवेदन ‘पेंडिंग’ रहना जैसी समस्याओं ने तनाव कई गुना बढ़ा दिया। कई छात्रों को आर्थिक नुकसान झेलने के बाद भी प्रक्रिया अधूरी और अनिश्चित बनी रही। सीबीएसई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा फीस कम करना और डेडलाइन बढ़ाना राहत जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर यह केवल अस्थायी उपाय है। असली संकट कमजोर डिजिटल ढांचे का है। तकनीक तभी वरदान बनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी नींव मजबूत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित और भरोसेमंद हो</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्यथा वही सुविधा शिक्षा पर अतिरिक्त बोझ बन जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक तकनीकी गलती छात्रों की प्रतिभा तय नहीं कर सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसने सीबीएसई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओएसएम की खामियों ने साफ कर दिया कि चूक प्रणाली की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों की मेहनत की नहीं। जेईई मेन जैसी कठिन परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों की योग्यता किसी पोर्टल त्रुटि से कम नहीं हो जाती। ऐसे समय में छात्रों को अपना आत्मविश्वास और तैयारी बनाए रखनी चाहिए। नए कौशल और वैकल्पिक अवसर आगे की राह मजबूत करेंगे। सफलता केवल अंकों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संघर्ष और धैर्य से तय होती है। यह संकट छात्रों का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सीबीएसई की डिजिटल व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जिम्मेदारी सीबीएसई और नीति-निर्माताओं की है। शिक्षा व्यवस्था में भरोसा लौटाना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल सफाई नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठोस सुधार जरूरी हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आई-आई-टी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे संस्थानों की मदद से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओएसएम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रणाली को मजबूत बनाया जा सकता है। प्रभावित छात्रों के लिए मैनुअल री-चेकिंग तुरंत शुरू होनी चाहिए। जब डिजिटल मूल्यांकन पर इतने सवाल उठ चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पूरा परिणाम दोबारा मैनुअल तरीके से क्यों न तैयार कराया जाए। शिक्षा मंत्री ने रिपोर्ट मांगी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब जरूरत निर्णायक कार्रवाई की है। छात्रों की आवाज आज शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब एक तकनीकी व्यवस्था लाखों सपनों को संदेह में डाल दे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल रिजल्ट की गड़बड़ी नहीं रह जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी डिजिटल शिक्षा प्रणाली पर सवाल बन जाती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब लाखों छात्र एक साथ प्रभावित हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब चुप्पी समाधान नहीं बन सकती। यदि सीबीएसई छात्र हित को केंद्र में रखकर मैनुअल री-चेकिंग और तकनीकी सुधार लागू करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो खोया भरोसा लौट सकता है। अब बोर्ड को स्वनिर्णय लेते हुए पूरे परिणाम की निष्पक्ष मैनुअल समीक्षा करानी चाहिए। छात्रों को भी अपनी मेहनत और संघर्ष पर विश्वास बनाए रखना होगा। यह कठिन दौर बीत जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रणाली सुधरेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन युवाओं की लगन ही देश का असली भविष्य तय करेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>​&quot;प्रतियोगी परीक्षाओं का निरस्तीकरण और परीक्षार्थियों की मनोदशा&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">​प्रतियोगी परीक्षाएँ आज केवल आजीविका प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का मुख्य द्वार भी हैं। इन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना युवाओं के सपनों, आत्मसम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की दिशा तय करने का आधार बन चुका है। लाखों विद्यार्थी वर्षों तक अपने घर और परिजनों से दूर रहकर कठिन परिश्रम, आर्थिक संघर्ष और मानसिक दबाव के बीच तैयारी करते हैं। ऐसे में जब कोई प्रश्नपत्र लीक होता है या अनियमितताओं के कारण परीक्षा निरस्त की जाती है, तो उसका प्रभाव केवल प्रशासनिक निर्णयों तक सीमित नहीं रहता।</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179254/cancellation-of-competitive-examinations-and-the-mood-of-the-candidates"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/exam-2_20260513024607.webp" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">​प्रतियोगी परीक्षाएँ आज केवल आजीविका प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का मुख्य द्वार भी हैं। इन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना युवाओं के सपनों, आत्मसम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की दिशा तय करने का आधार बन चुका है। लाखों विद्यार्थी वर्षों तक अपने घर और परिजनों से दूर रहकर कठिन परिश्रम, आर्थिक संघर्ष और मानसिक दबाव के बीच तैयारी करते हैं। ऐसे में जब कोई प्रश्नपत्र लीक होता है या अनियमितताओं के कारण परीक्षा निरस्त की जाती है, तो उसका प्रभाव केवल प्रशासनिक निर्णयों तक सीमित नहीं रहता। इसका सर्वाधिक प्रहार परीक्षार्थियों की मनोदशा पर पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​विशेषकर वे परीक्षार्थी अधिक आहत होते हैं, जिनके पेपर अच्छे गए थे और जिनके चयन की प्रबल संभावना थी। उनके मन में कई कई  तरह के प्रश्न जन्म लेने लगते हैं: क्या आगामी परीक्षा का स्तर पहले से कठिन होगा? क्या वे पुनः उसी दक्षता के साथ प्रदर्शन कर पाएंगे? वहीं दूसरी ओर, जिनके पेपर अच्छे नहीं हुए थे, उनके लिए यह एक नए अवसर के रूप में आता है। हालांकि, परीक्षा के बाद जो मानसिक विश्राम की स्थिति आती है, उससे निकलकर पुनः उसी लय और एकाग्रता के साथ परीक्षा तैयारी करना एक बड़ी चुनौती होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में, जहाँ सीमित अवसरों के बीच आरक्षण नीति और तीव्र प्रतिस्पर्धा मौजूद है, इन परीक्षाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक-एक पद के लिए लाखों अभ्यर्थी संघर्ष करते हैं। कई परिवार कर्ज लेकर बच्चों को बड़े शहरों में कोचिंग कराते हैं। ऐसी स्थिति में परीक्षा का निरस्त होना उनके लिए केवल एक सूचना नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक और आर्थिक आघात होता है।​जब परीक्षा निरस्त होती है, तो परीक्षार्थियों में गहरा मानसिक तनाव उत्पन्न होता है। वर्षों की तैयारी अचानक निरर्थक लगने लगती है। नई तिथि की अनिश्चितता और फिर से उसी दबाव भरे चक्र में लौटना अत्यंत कष्टकारी होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई परीक्षार्थी अवसाद , निराशा और क्रोध का शिकार हो जाते हैं। विशेष रूप से वे अभ्यर्थी, जो आर्थिक रूप से विपन्न हैं या अपनी आयु-सीमा के अंतिम पड़ाव पर हैं, उनके लिए यह स्थिति अत्यंत पीड़ादायक होती है। उन्हें महसूस होता है कि व्यवस्था की लापरवाही ने उनकी मेहनत का मूल्य छीन लिया है।​इसका दूसरा बड़ा प्रभाव व्यवस्था के प्रति अविश्वास के रूप में प्रकट होता है। बार-बार पेपर लीक और भ्रष्टाचार की खबरें युवाओं का भरोसा चयन प्रणाली से उठा देती हैं। जब ईमानदार परिश्रम का परिणाम संदिग्ध हो जाए, तो समाज में एक नैतिक संकट उत्पन्न होना स्वाभाविक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से यह समस्या विकराल होती जा रही है। अनिद्रा, चिंता  और सामाजिक अलगाव के साथ-साथ कई बार सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें तनाव को और बढ़ा देती हैं। अत्यंत संवेदनशील मामलों में यह हताशा आत्मघाती विचारों तक ले जाती है, जो राष्ट्र के लिए चिंताजनक है।​इसके साथ ही, आर्थिक क्षति भी एक बड़ा पक्ष है। विद्यार्थियों को यात्रा, आवास और अध्ययन सामग्री पर बार-बार व्यय करना पड़ता है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह दोहरा आर्थिक बोझ उनके भविष्य की योजनाओं को डगमगा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">​</div>
<div style="text-align:justify;">​इस समस्या के समाधान के लिए परीक्षा नियामक निकायों में स्वच्छ छवि वाले और ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति अनिवार्य है। इसके साथ ही आवश्यक हैं ​(अ)नकल माफिया और दोषियों के विरुद्ध त्वरित अदालती कार्यवाही और कठोर सजा प्रावधान(ब) प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए डिजिटल निगरानी और आधुनिक तकनीक का उपयोग।(स)परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और कोचिंग सेंटरों की निगरानी व जवाबदेही सुनिश्चित करना।(द) परीक्षार्थियों के लिए सरकारी स्तर पर हेल्पलाइन और परामर्श की व्यवस्था।</div>
<div style="text-align:justify;">​</div>
<div style="text-align:justify;">अतः प्रतियोगी परीक्षाओं को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर 'राष्ट्रीय प्रतिभा' के संरक्षण की प्रक्रिया समझा जाना चाहिए। यदि देश का युवा व्यवस्था पर विश्वास करेगा, तभी वह सकारात्मक ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दे पाएगा। पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध परीक्षा प्रणाली आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 21:25:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर क्यों सुसाइड कर रहे हैं एनआइटी के होनहार? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के प्रतिष्ठित कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में द्वितीय वर्ष की एक छात्रा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाई गई, जिससे पिछले दो महीनों में परिसर में संदिग्ध छात्र मृत्यु का यह चौथा मामला सामने आया है।एनआईटी कुरुक्षेत्र में एक और छात्रा की आत्महत्या! यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का संकेत है।एनआइटी में प्रवेश पाने के लिए छात्र छात्राओं द्वारा कठोर परिश्रम कर पढ़ाई कर प्रवेश परीक्षा पास कर तकनीकी शिक्षा लेने का सपना पूरा करने का मौका बिरले छात्रों को मिल पाता है लेकिन जब ऐसे होनहार छात्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176926/why-are-nit-aspirants-committing-suicide"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/sad_1_10-09-2020.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के प्रतिष्ठित कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में द्वितीय वर्ष की एक छात्रा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाई गई, जिससे पिछले दो महीनों में परिसर में संदिग्ध छात्र मृत्यु का यह चौथा मामला सामने आया है।एनआईटी कुरुक्षेत्र में एक और छात्रा की आत्महत्या! यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता का संकेत है।एनआइटी में प्रवेश पाने के लिए छात्र छात्राओं द्वारा कठोर परिश्रम कर पढ़ाई कर प्रवेश परीक्षा पास कर तकनीकी शिक्षा लेने का सपना पूरा करने का मौका बिरले छात्रों को मिल पाता है लेकिन जब ऐसे होनहार छात्र छात्राओं द्वारा मौत को गले लगाने का सिलसिला चलता है तो इस संस्थान के माहौल पर भी सवालिया निशान लगता है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि छात्रों का मानसिक दबाव, संस्थागत संवेदनहीनता और सपोर्ट सिस्टम की कमी अब खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है।सरकार और प्रशासन इन मौतों का मूक दर्शक बने हैं आखिर कब जागेंगे ?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुरुवार 16 अप्रैल, 2026 को जब दीक्षा दुबे ने अपने दोस्तों के फोन का जवाब नहीं दिया, तो वे उसके कमरे में पहुँचे और कमरा अंदर से बंद पाया। सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीमें दोपहर करीब 3 बजे मौके पर पहुँचीं और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो वह मृत पाई गईं। शव को पोस्टमार्टम के लिए एलएनजेपी सिविल अस्पताल भेज दिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">घटना के पीछे का सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। आगे की कार्यवाही जांच के निष्कर्षों और परिवार के बयानों पर निर्भर करेगी। फरवरी से अब तक एनआईटी कुरुक्षेत्र में यह चौथा मामला दर्ज किया गया है। आपको बता दें 16 फरवरी को तेलंगाना निवासी अंगोद शिव (19) अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए। प्रथम सेमेस्टर के छात्र अंगोद शिव संस्थान में कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (सीएसई) की डिग्री हासिल कर रहे थे। नूह के एक अन्य छात्र ने 31 मार्च को एनआईटी कुरुक्षेत्र में आत्महत्या कर ली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तीसरी संदिग्ध मौत की सूचना 8 अप्रैल को मिली, जब हरियाणा के सिरसा निवासी प्रियांशु शर्मा अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए। वह सिविल इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के तीसरे वर्ष के छात्र थे। हाल ही में 16 अप्रेल बिहार की रहने वाली 19 वर्षीय बीटेक छात्रा दीक्षा दुबे ने बृहस्पतिवार को कथित तौर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद यह समिति गठित की गई है। छात्रा की मृत्यु के बाद परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। दीक्षा दुबे की मृत्यु पिछले दो महीनों में परिसर में हुई इस तरह की चौथी घटना थी।इतना ही नहीं 18 अप्रैल शनिवार देर रात करीब 12 बजे कल्पना छात्रावास में एक छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया लेकिन मौके पर मौजूद अन्य छात्रों ने समय रहते उसे बचा लिया.  इस घटना के बाद कैंपस में तनाव और बढ़ गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन संदिग्ध मौतों के चलते कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र देर रात मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्रावास के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं था और उन्होंने स्थिति से निपटने के तरीके पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने घटना के सामने आने के बाद प्रतिक्रिया में लगने वाले समय पर भी सवाल उठाया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र ने परिसर में हाल में छात्रों के आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही छात्रों की समस्याओं की जांच के लिए तीन अलग-अलग समितियां भी बनाई हैं। जांच समिति इस मुद्दे पर छात्रों, प्रोफेसर, वार्डन और अन्य कर्मचारियों के साथ बातचीत करेगी। एनआईटी के जनसंपर्क अधिकारी प्रोफेसर ज्ञान भूषण ने रविवार को कहा कि परिसर में हाल में हुई आत्महत्या की घटनाओं की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति की अध्यक्षता छात्र कल्याण विभाग की डीन प्रोफेसर लिली दीवान कर रही हैं और इसमें प्रोफेसर जे.के. कपूर, प्रोफेसर प्रवीण अग्रवाल, डॉ. संदीप सिंघल और डॉ. मनोज सिन्हा शामिल हैं।पुलिस ने बताया था कि दुबे की कथित आत्महत्या के बाद शुक्रवार रात को बीटेक प्रथम वर्ष की एक अन्य छात्रा ने भी कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्थान में मौजूदा स्थिति को देखते हुए और सभी छात्रों के सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्रों के लिए अगले आदेश तक अवकाश रहेगा। एनआईटी प्रशासन की ओर से जारी एक नोटिस के अनुसार, उन्हें 19 अप्रैल तक अपने छात्रावास खाली करने होंगे। छात्रावासों में रह रहे लगभग 5,300 छात्रों में से 2,500 से अधिक छात्रों ने संस्थान के नोटिस के बाद शनिवार तक अपने कमरे खाली कर दिए। दूरदराज के राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशासन ने कहा कि प्रायोगिक परीक्षाओं समेत संशोधित परीक्षा कार्यक्रम की सूचना उचित समय पर दी जाएगी। छात्रों को परीक्षा शुरू होने से काफी पहले सूचित कर दिया जाएगा। हालांकि छात्रों का आरोप है कि पहले बनी जांच कमेटी ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया. कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें मानसिक दबाव और परेशान किया जा रहा है. इधर, बढ़ते विवाद के बीच एनआइटी प्रशासन ने 17 अप्रैल से 4 मई तक छुट्टियां घोषित कर दी हैं. छात्रों को हॉस्टल खाली करने का नोटिस दिया गया है. इस पर भी छात्रों ने नाराजगी जताई है और कहा है कि उन्हें जबरदस्ती घर भेजकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल उठता है कि एक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थान में ऐसी क्या गड़बड़ी है कि भविष्य संवारने के लिए आए होनहार छात्र छात्राओं को सुसाइड करने की मजबूरी आन पड़ी है? इस के पीछे क्या संस्थान के शिक्षक प्रबंधन प्रशासन की कोई गड़बड़ी जिम्मेदार है या छात्रों के बीच में ही शेरों की खाल में कोई सियार छिपे हुए हैं और छात्र छात्राओं के साथ कोई अनैतिकता या अमानवीयता कर उन्हें सुसाइड करने के लिए मजबूर किया जा रहा है? की बार नशे के सौदागर और साइबर ठगी या निवेश के जाल मे फंसा कर ब्लेक मेल करने वाले गिरोह भी ऐसे वारदातों के पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। क्या वजह है कि सरकार ने एक के बाद एक हो रही सुसाइड की वारदातों को गंभीरता से नहीं लिया आखिर कब तक हमारे उच्च शिक्षा संस्थान होनहार बच्चों के सपनों को रौंद कर उनके जीवन से खिलवाड़ करते रहेंगे। जो भी हो इन सुसाइड मामलों की गंभीरता से जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:06:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अधिकारों की तुलना में कर्तव्य और जिम्मेदारियां के प्रति हम ज्यादा अनभिग्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन का प्रश्न केवल संवैधानिक बहस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आईना भी है।  इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176919/we-are-more-ignorant-of-duties-and-responsibilities-than-rights"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dgkdjgbvax1605352666.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन का प्रश्न केवल संवैधानिक बहस का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आईना भी है।  इसी प्रकार भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि कानून और नियम केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि नागरिकों की चेतना और कार्यों में जीवित रहते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> आज हम जिस दौर में खड़े हैं, वहाँ एक ओर जनसंख्या का विस्तार, स्त्री-पुरुष अनुपात की जटिलता और शिक्षा का असमान वितरण दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर अधिकारों के प्रति तीव्र आग्रह और जिम्मेदारियों के प्रति अपेक्षाकृत शिथिल उदासीनता भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है। यह विडंबना ही है कि जिस देश ने विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् और कर्तव्य ही धर्म है जैसे विचार दिए, उसी समाज में आज अधिकारों की माँग तो प्रमुखता से अंगीकार और स्वीकार करने की चाहत रखता है, परंतु कर्तव्यों और जिम्मेदारियां के निर्वहन में परिपक्वता का अभाव एवं दुराग्रह दिखाई देता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत की जनसंख्या, जो अब विश्व में शीर्षतम जनसंख्या वाले देशों में शामिल है, यहां केवल संख्या का विषय नहीं बल्कि गुणवत्ता का प्रश्न भी है यह गुणवत्ता शिक्षा, सामाजिक समझ और संवैधानिक चेतना, जागरूकता पर आधारित होती है। जब हम स्त्री-पुरुष अनुपात की बात करते हैं, तो यह केवल आंकड़ों का संतुलन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता का संकेतक है। किंतु जब तक दोनों ही वर्ग अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को समान रूप से नहीं समझेंगे, तब तक वास्तविक प्रगति अधूरी और दिवा-स्वप्न ही रहेगी। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">शिक्षा इस पूरे विमर्श का केंद्र बिंदु है, क्योंकि शिक्षित समाज ही अधिकार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है, परंतु भारत में शिक्षा का प्रसार अभी भी समरूप नहीं है।ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच, स्त्री और पुरुष के बीच, तथा विभिन्न आर्थिक वर्गों के बीच एक गहरी और बड़ी खाई मौजूद है। परिणामस्वरूप, एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों के प्रति तो जागरूक हो रहा है, परंतु कर्तव्यों के प्रति उसकी समझ अभी भी सीमित संकुचित है। भारतीय संविधान, जो नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है, </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उसी के साथ मौलिक कर्तव्यों की भी स्पष्ट व्याख्या करता है, किंतु व्यवहारिक जीवन में अधिकारों की चर्चा अधिक होती है और कर्तव्यों की उपेक्षा। महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” परंतु आधुनिक समाज में यह विचार धीरे-धीरे पृष्ठभूमि में चला गया है। इसी प्रकार डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय यह स्पष्ट किया था कि “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे, तो वह असफल हो जाएगा,” यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि कानून और नियम केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि नागरिकों की चेतना में जीवित रहते हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत में कानूनों की कमी नहीं है सड़क सुरक्षा से लेकर महिला संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण से लेकर शिक्षा के अधिकार तक हर क्षेत्र में स्पष्ट नियम बनाए गए हैं, लेकिन उनका पालन तभी संभव है जब नागरिक स्वयं जिम्मेदारी का परिचय दें। उदाहरण के लिए, सड़क पर यातायात नियमों का उल्लंघन केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन की कमी का संकेत है।इसी प्रकार, महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून तब तक प्रभावी नहीं हो सकते जब तक समाज में लैंगिक संवेदनशीलता और सम्मान की भावना विकसित न हो। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्त्री-पुरुष समानता के संदर्भ में भी यह स्पष्ट है कि अधिकारों की माँग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है।जहाँ महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं, वहीं समाज के सभी वर्गों को उनके प्रति सम्मान और सहयोग का कर्तव्य निभाना होगा। शिक्षा का स्तर बढ़ने के बावजूद यदि नैतिक शिक्षा और नागरिकता के मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तो केवल डिग्रीधारी नागरिक तैयार होंगे, जागरूक और जिम्मेदार कर्तव्य निस्ट नागरिक नहीं। आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने अधिकारों की आवाज़ को मजबूत किया है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> लेकिन कई बार यह जागरूकता एकतरफा हो जाती है, जहाँ केवल अधिकारों की बात होती है और जिम्मेदारियों की चर्चा गौण हो जाती है। यही असंतुलन समाज में तनाव और गहरे हरेअसंतोष को जन्म देता है। आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा प्रणाली में प्रारंभ से ही नागरिक कर्तव्यों पर बल दिया जाए, परिवार और समाज में जिम्मेदारी की भावना को विकसित किया जाए, और शासन स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह समझाया जाए कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जब तक आम नागरिक स्वयं कानूनों का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक कोई भी व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकती। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नागरिक ही सर्वोच्च शक्ति हैं, और उनकी परिपक्वता ही राष्ट्र की दिशा और दशा तय करती है। इसलिए यह सही समय आत्ममंथन का है क्या हम केवल अपने अधिकारों के लिए सजग हैं, या अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतने ही प्रतिबद्ध हैं?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यदि इस प्रश्न का उत्तर पूर्ण ईमानदारी और सजगता  से खोजा जाए, तो स्पष्ट होगा कि हमें अभी लंबा सफर तय करना है। जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के समन्वय से ही वह दिन आएगा जब भारत केवल अधिकारों के प्रति नहीं, बल्कि कर्तव्यों के प्रति भी समान रूप से परिपक्व राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा जिससे विकास की गति को सदैव सशक्त बल मिलेगा और विकास की संभावना चारों दिशाओं में व्याप्त होगी ।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:47:29 +0530</pubDate>
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                <title>सिद्धार्थनगर :  1741परीक्षक, 363218 उत्तर पुस्तिकाओं का करेंगे  मूल्यांकन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong> माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के निर्देश पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कॉपियों की जांच के लिए जिले में तीन मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर  कुल 1741 परीक्षक और प्रधान परीक्षक  दोनों मिलाकर तैनात किए गए हैं। जिसमें कुल 363218  उत्तर पुस्तिकाओं  का मूल्यांकन करेंगे,</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन रतनसेन इंटर कॉलेज बांसी में होगा।  जबकि हाईस्कूल की कॉपियों की जांच शिवपति इंटर कॉलेज शोहरतगढ़ और तिलक इंटर कॉलेज बांसी में की जाएगी। प्रशासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग मूल्यांकन कार्य को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा करने की तैयारियों पूर्ण कर ली है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मूल्यांकन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173433/siddharthnagar-1741-examiners-will-evaluate-363218-answer-sheets"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/education.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong> माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के निर्देश पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कॉपियों की जांच के लिए जिले में तीन मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर  कुल 1741 परीक्षक और प्रधान परीक्षक  दोनों मिलाकर तैनात किए गए हैं। जिसमें कुल 363218  उत्तर पुस्तिकाओं  का मूल्यांकन करेंगे,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन रतनसेन इंटर कॉलेज बांसी में होगा।  जबकि हाईस्कूल की कॉपियों की जांच शिवपति इंटर कॉलेज शोहरतगढ़ और तिलक इंटर कॉलेज बांसी में की जाएगी। प्रशासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग मूल्यांकन कार्य को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा करने की तैयारियों पूर्ण कर ली है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मूल्यांकन केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, उत्तर पुस्तिकाओं का सुरक्षित रख-रखाव, पेयजल और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। अधिकारी केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर रहे हैं ताकि मूल्यांकन के दौरान कोई अव्यवस्था न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला विद्यालय निरीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि 18 मार्च से शुरू होने वाले मूल्यांकन कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई  हैं। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार केंद्रों पर सुरक्षा, पेयजल, बैठने की व्यवस्था समेत सभी जरूरी इंतजाम सुनिश्चित किए गए  हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:27:21 +0530</pubDate>
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