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                <title>public welfare scheme - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>public welfare scheme RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एक मील का पत्थर-जिला सूचना अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">
<p><strong>लखनऊः </strong></p>
<p><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p><strong>जिला सूचना अधिकारी </strong></p>
<p><strong>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ ।  </strong></p>
</blockquote>
<p>मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके जन्म को प्रोत्साहित करना और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। लंबे समय से भारतीय समाज में बेटियों को लेकर कई प्रकार की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ रही हैं। कहीं बेटियों को बोझ समझा जाता था, तो कहीं उनकी शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। इसी सोच को बदलने और बेटियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184439/chief-minister-kanya-sumangala-yojana-a-milestone-district-information-officer"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-19.15.33.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">
<p><strong>लखनऊः </strong></p>
<p><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p><strong>जिला सूचना अधिकारी </strong></p>
<p><strong>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ ।  </strong></p>
</blockquote>
<p>मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके जन्म को प्रोत्साहित करना और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। लंबे समय से भारतीय समाज में बेटियों को लेकर कई प्रकार की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ रही हैं। कहीं बेटियों को बोझ समझा जाता था, तो कहीं उनकी शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। इसी सोच को बदलने और बेटियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई।</p>
<p><br />यह योजना वर्ष 2019 में प्रारंभ की गई, जिसका लक्ष्य बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता प्रदान करना है। सरकार द्वारा दी जाने वाली यह सहायता बालिका के जीवन के विभिन्न चरणों में दी जाती है, जिससे उसके पालन-पोषण, शिक्षा और विकास में आर्थिक बाधाएँ कम हो सकें। योजना के अंतर्गत कुल 25,000 रुपये की सहायता राशि निर्धारित की गई है, जिसे छह अलग-अलग चरणों में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाता है। यह राशि क्ठज् यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से दी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो जाती है।</p>
<p><br />इस योजना के तहत बालिका के जन्म के समय 5,000 रुपये की सहायता दी जाती है, जिससे परिवार को प्रारंभिक खर्चों में सहयोग मिलता है। इसके बाद जब बालिका का टीकाकरण पूरा हो जाता है, तब 2,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है। जैसे-जैसे बालिका शिक्षा के विभिन्न चरणों में आगे बढ़ती है, उसे क्रमशः प्रथम कक्षा, छठी कक्षा, नौवीं कक्षा और बारहवीं के बाद उच्च शिक्षा में प्रवेश के समय आर्थिक सहायता दी जाती है। इस प्रकार यह योजना केवल जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि बालिका के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में निरंतर सहयोग प्रदान करती है।</p>
<p><br />इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना है। आज भी कई स्थानों पर बेटा और बेटी के बीच भेदभाव देखा जाता है, जिसके कारण बेटियों को शिक्षा और अवसरों से वंचित रहना पड़ता है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना इस सोच को बदलने का प्रयास करती है और यह संदेश देती है कि बेटियाँ भी परिवार और समाज की उतनी ही महत्वपूर्ण सदस्य हैं जितने बेटे। जब परिवार को यह विश्वास मिलता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है और उनकी बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है, तो वे बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा के प्रति अधिक जागरूक होते हैं।</p>
<p><br />योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को रोकने में भी सहायक है। जब बालिकाएँ शिक्षा प्राप्त करती हैं और उनके भविष्य को लेकर परिवार सजग होता है, तो वे कम उम्र में विवाह करने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती हैं। इससे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ता है और बालिकाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ती हैं।इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ पात्रता शर्ते निर्धारित की गई हैं। लाभार्थी बालिका उत्तर प्रदेश की निवासी होनी चाहिए और उसके परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, एक परिवार की अधिकतम दो बालिकाएँ ही इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकती हैं। यदि दूसरी संतान के रूप में जुड़वा बेटियाँ जन्म लेती हैं, तो दोनों को योजना का लाभ दिया जाता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।</p>
<p><br />आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराया गया है। ऑनलाइन आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है, जहाँ सभी आवश्यक विवरण भरकर दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। वहीं, ऑफलाइन आवेदन के लिए आंगनवाड़ी केंद्र, ब्लॉक कार्यालय या जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में जाकर आवेदन किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी सुविधा मिलती है जो डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं।</p>
<p><br />इस योजना का प्रभाव समाज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। बेटियों के जन्म को लेकर लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। अब अधिक से अधिक परिवार बेटियों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। स्कूलों में बालिकाओं की उपस्थिति बढ़ी है और वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। इसके साथ ही, यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि शिक्षित और आत्मनिर्भर महिलाएँ ही समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।</p>
<p><br />हालांकि योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण कई लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा पाते। कई बार आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता भी एक बड़ी बाधा बन जाती है। इसके अलावा, डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण ऑनलाइन आवेदन में भी कठिनाइयाँ आती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे जागरूकता अभियान चलाना, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जानकारी पहुँचाना और आवेदन प्रक्रिया को और सरल बनाना।</p>
<p><br />कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एक ऐसी पहल है जो न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सोच को बदलने का कार्य भी करती है। यह योजना इस बात का प्रतीक है कि सरकार बालिकाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह निश्चित रूप से एक सशक्त, शिक्षित और समान समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:25:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार रोकने में मुख्य विकास अधिकारी नाकाम धरातल पर 10 मजदूर, कागजों में 61 की हाजिरी गोरखर में मनरेगा कार्य की खुली रही पोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मेंमनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना केवल फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने तक पहुंच गयी है। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत गोरखर में सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहद तक नाला खुदाई एवं सफाई कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही है संबंधित मस्टर रोल में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है, जबकि मौके पर मात्र 10</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181316/chief-development-officer-failed-to-stop-corruption-attendance-of-61"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0018.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मेंमनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना केवल फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने तक पहुंच गयी है। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत गोरखर में सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहद तक नाला खुदाई एवं सफाई कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही है संबंधित मस्टर रोल में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है, जबकि मौके पर मात्र 10 मजदूर ही कार्य करते पाए गए।</div>
<div> </div>
<div>इतना ही नहीं, कार्यस्थल पर दो किशोर भी काम करते मिले, जो मनरेगा प्रावधानों एवं बाल संरक्षण कानूनों की सीधा उल्लंघन किया जा रहा है। शेष 51 मजदूरों को अनुपस्थित रहने के बावजूद हाजिर दर्शाया गया है। सरकारी अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टि कर सरकारी धन के दुरुपयोग उजागर हो रहा है। रोजगार सेवक रामतौल मौर्य एवं पंचायत सचिव अमरनाथ गौतम की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी लगाकर मनरेगा की धनराशि का गबन करने का प्रयास किया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>सरकारी धन के इस दुरुपयोग से न केवल मनरेगा की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है, बल्कि योजना के मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने को भी नुकसान पहुंच रहा है।सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि जब मौके पर केवल 10 मजदूर मौजूद थे तो 61 की हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गयी है और 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराने की अनुमति किसने दी? ब्लाक प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आखिर नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?यदि ऐसे ही फर्जी हाजिरी रजिस्टर में दर्ज होता रहेगा तो सरकारी धन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:40:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के  उपाध्यक्ष ने गो संरक्षण एवं संवर्धन समिति की किया बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशील पहल के क्रम में  कलेक्ट्रेट सभागार में गौ संरक्षण, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के माननीय उपाध्यक्ष  महेश कुमार शुक्ल एवं सदस्य श्री दीपक गोयल ने जिलाधिकारी संजय चौहान तथा पुलिस अधीक्षक सरवणन टी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ जनपद में संचालित व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के उपरांत उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से मुखातिब होते हुए बताया कि माननीय मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176746/vice-chairman-of-uttar-pradesh-cow-service-commission-held-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/2-12.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशील पहल के क्रम में  कलेक्ट्रेट सभागार में गौ संरक्षण, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के माननीय उपाध्यक्ष  महेश कुमार शुक्ल एवं सदस्य श्री दीपक गोयल ने जिलाधिकारी संजय चौहान तथा पुलिस अधीक्षक सरवणन टी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ जनपद में संचालित व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के उपरांत उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से मुखातिब होते हुए बताया कि माननीय मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में “गो सेवा” को केवल प्रशासनिक दायित्व न मानते हुए मानवीय, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार किया गया है। इसी दृष्टि से प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण, संवर्धन एवं समुचित देखभाल के लिए व्यापक और बहुआयामी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहां निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं, जहां 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह व्यवस्था न केवल गोवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ बना रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं तथा 24×7 निगरानी प्रणाली लागू है, जिससे सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। “मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना” के माध्यम से गो संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है। योजना के अंतर्गत अब तक लाखों गोवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार गोपालकों को सुपुर्द किए जा चुके हैं। प्रत्येक गोवंश के पालन-पोषण हेतु 50 रुपये प्रतिदिन की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे एक ओर गोवंश का संरक्षण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गोपालकों की आय में भी वृद्धि हो रही है। जनपद अमेठी में भी गो संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जनपद में 128 गो-आश्रय स्थल क्रियाशील हैं, जिनमें 27,492 गोवंश का संरक्षण एवं पालन-पोषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 2,747 प्रगतिशील गोपालकों द्वारा सहभागिता योजना के अंतर्गत 3,591 गोवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समीक्षा बैठक में गो-आश्रय स्थलों में चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल, छांव एवं चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चारागाह भूमि पर हरे चारे की बुवाई, उसकी सुरक्षा के लिए फेंसिंग की व्यवस्था एवं समुचित रखरखाव की स्थिति का भी बारीकी से आकलन किया गया। उद्यान विभाग को निर्देशित किया गया कि गौशालाओं से गोबर खाद की खरीद को बढ़ावा दिया जाए, जिससे जैविक खेती को प्रोत्साहन मिले। वहीं वन विभाग को प्रत्येक गौशाला में सहजन, नीम, पीपल एवं बरगद जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों का रोपण कराने के निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम 1955 के अंतर्गत गोवंश की सुरक्षा के प्रति पूर्ण प्रतिबंध लागू है। “जीरो टॉलरेंस नीति” के तहत गोवंश संरक्षण से संबंधित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही भ्रामक प्रचार फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध भी सख्त रुख अपनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपाध्यक्ष ने बताया कि आयोग एवं संबंधित अधिकारी नियमित रूप से गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निराश्रित गोवंश की सेवा एवं संरक्षण में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अनिल चतुर्वेदी, अपर निदेशक पशुपालन विभाग अयोध्या मंडल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. शुक्ला सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 19:41:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत 90 हजार लाभार्थियों को ₹900 करोड़ की पहली किश्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 90 हजार लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से ₹900 करोड़ की अनुदान राशि की पहली किश्त का अंतरण किया। इस योजना के अंतर्गत जनपद प्रयागराज के 3379 लाभार्थियों को भी आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों के लाभार्थियों से वर्चुअल संवाद भी किया। इसी क्रम में उन्होंने प्रयागराज की लाभार्थी अर्चना से बातचीत कर योजना से मिले लाभ और आवास निर्माण की प्रगति के बारे में जानकारी ली।</div>
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<div style="text-align:justify;">अर्चना ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173423/first-installment-of-%E2%82%B9900-crore-to-90-thousand-beneficiaries-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0201.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 90 हजार लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से ₹900 करोड़ की अनुदान राशि की पहली किश्त का अंतरण किया। इस योजना के अंतर्गत जनपद प्रयागराज के 3379 लाभार्थियों को भी आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त हुई।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों के लाभार्थियों से वर्चुअल संवाद भी किया। इसी क्रम में उन्होंने प्रयागराज की लाभार्थी अर्चना से बातचीत कर योजना से मिले लाभ और आवास निर्माण की प्रगति के बारे में जानकारी ली।</div>
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<div style="text-align:justify;">अर्चना ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए बताया कि योजना के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता से उनका अपना घर बनाने का सपना साकार हो रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी गरीब परिवार बिना घर के न रहे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के माध्यम से पात्र परिवारों को चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपना घर बना सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे और निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाएं गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से जुड़े लाभार्थियों ने भी योजना के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:05:05 +0530</pubDate>
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