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                <title>व्यक्तित्व विकास - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>व्यक्तित्व विकास RSS Feed</description>
                
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                <title>इस दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रयागराज ग्रुप की विभिन्न बटालियनों से लगभग 550 से अधिक कैडेट्स सहभागिता करेंगे। शिविर का उद्देश्य कैडेट्स में सैन्य अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, राष्ट्रीय एकता एवं सेवा भावना का विकास करना है। </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज</strong> <strong>::</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  युवा शक्ति में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन एवं नेतृत्व क्षमता के विकास हेतु एन.सी.सी. ग्रुप मुख्यालय प्रयागराज के तत्वावधान में 16 यूपी बटालियन एन.सी.सी. प्रयागराज द्वारा संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर–63 का आयोजन 20 मई 2026 से 29 मई 2026 तक बी.बी.एस. विद्या मन्दिर, कादिलपुर, प्रयागराज में किया जाएगा। शिविर का संचालन 16 यूपी बटालियन एन.सी.सी. प्रयागराज के नेतृत्व में संपन्न होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रयागराज ग्रुप की विभिन्न बटालियनों से लगभग 550 से अधिक कैडेट्स सहभागिता करेंगे। शिविर का उद्देश्य कैडेट्स में सैन्य अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, राष्ट्रीय एकता एवं सेवा भावना का विकास</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179625/organization-of-joint-annual-training-camp-63-under-the-leadership-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260519-wa0083.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज</strong> <strong>::</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> युवा शक्ति में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन एवं नेतृत्व क्षमता के विकास हेतु एन.सी.सी. ग्रुप मुख्यालय प्रयागराज के तत्वावधान में 16 यूपी बटालियन एन.सी.सी. प्रयागराज द्वारा संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर–63 का आयोजन 20 मई 2026 से 29 मई 2026 तक बी.बी.एस. विद्या मन्दिर, कादिलपुर, प्रयागराज में किया जाएगा। शिविर का संचालन 16 यूपी बटालियन एन.सी.सी. प्रयागराज के नेतृत्व में संपन्न होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रयागराज ग्रुप की विभिन्न बटालियनों से लगभग 550 से अधिक कैडेट्स सहभागिता करेंगे। शिविर का उद्देश्य कैडेट्स में सैन्य अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, राष्ट्रीय एकता एवं सेवा भावना का विकास करना है। प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को ड्रिल, शस्त्र प्रशिक्षण, मैप रीडिंग, फील्ड क्राफ्ट, आपदा प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास एवं सामाजिक जागरूकता से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भीषण गर्मी एवं उष्ण लहर जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद कैडेट्स का उत्साह एवं मनोबल उच्च बना हुआ है। 16 यूपी बटालियन एन.सी.सी. प्रयागराज द्वारा कैडेट्स की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। शिविर परिसर में वाटर कूलर, कूलर, पंखा एवं शीतल पेयजल की समुचित व्यवस्था के साथ चिकित्सकीय सहायता एवं विश्राम स्थलों की विशेष व्यवस्था की गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह शिविर कैम्प कमांडेंट कर्नल निशांत बरियार एवं डिप्टी कैम्प कमांडेंट मेजर संतोष जायसवाल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न होगा। उक्त जानकारी 16 यूपी बटालियन एन.सी.सी. प्रयागराज के कमान अधिकारी एवं कैम्प कमांडेंट कर्नल निशांत बरियार ने दी।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 20:51:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संयम का कवच और क्रोध पर विजय का मार्ग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में संयम का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला आधार स्तंभ है। यदि व्यक्ति हर परिस्थिति में स्वयं को संयमित रख सकता है, तो वह वास्तव में शिक्षित और परिपक्व कहलाने योग्य है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति अपने मन की उत्तेजनाओं और आवेगों पर नियंत्रण नहीं रख पाता, उसकी शिक्षा और योग्यता भी व्यर्थ सिद्ध हो जाती है। जीवन में सफलता पाने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति स्वयं का स्वामी बने और अपनी भावनाओं को संतुलित रखे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि आत्मसंयम के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175596/the-shield-of-restraint-and-the-path-to-victory-over"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में संयम का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक नैतिक गुण नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला आधार स्तंभ है। यदि व्यक्ति हर परिस्थिति में स्वयं को संयमित रख सकता है, तो वह वास्तव में शिक्षित और परिपक्व कहलाने योग्य है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति अपने मन की उत्तेजनाओं और आवेगों पर नियंत्रण नहीं रख पाता, उसकी शिक्षा और योग्यता भी व्यर्थ सिद्ध हो जाती है। जीवन में सफलता पाने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति स्वयं का स्वामी बने और अपनी भावनाओं को संतुलित रखे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि आत्मसंयम के अभाव ने अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तियों के जीवन को नष्ट कर दिया। उनकी उच्च आकांक्षाएं, अद्भुत योग्यताएं और उपलब्धियां इसलिए निष्फल हो गईं क्योंकि वे अपने मन को नियंत्रित नहीं कर सके। जब व्यक्ति उत्तेजनाओं के प्रवाह में बह जाता है, तब वह अपने विवेक को खो देता है और वही क्षण उसके पतन का कारण बनता है। अनेक ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहां लोग क्षणिक क्रोध के कारण ऐसे निर्णय ले लेते हैं, जिनका दुष्परिणाम उन्हें जीवनभर भुगतना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज में प्रतिदिन ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं, जहां क्रोध के आवेश में आकर व्यक्ति हिंसक हो जाता है और अपने ही जीवन को संकट में डाल देता है। क्रोध कुछ क्षणों का होता है, लेकिन उसका प्रभाव स्थायी हो सकता है। यह व्यक्ति के चरित्र पर ऐसा दाग छोड़ जाता है, जिसे मिटाना कठिन होता है। क्रोध के प्रभाव में व्यक्ति का विवेक नष्ट हो जाता है, उसके विचारों की दिशा बदल जाती है और वह सही-गलत का भेद भूल जाता है। परिणामस्वरूप उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और वह पश्चाताप की अग्नि में जलता रहता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्रोध केवल मानसिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी पड़ता है। यह एक प्रकार का आत्मदाह है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की ऊर्जा और शांति को नष्ट करता है। वैज्ञानिक शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि क्रोध व्यक्ति की कार्यक्षमता को कम कर देता है और शरीर में हानिकारक तत्वों का निर्माण करता है। इस प्रकार क्रोध न केवल मानसिक संतुलन को बिगाड़ता है, बल्कि शरीर को भी नुकसान पहुंचाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यक्ति का स्वभाव उसके जीवन को निर्धारित करता है। यदि कोई व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का होता है, तो उसका प्रभाव केवल उसी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और समाज पर भी पड़ता है। एक क्रोधी व्यक्ति के कारण परिवार की शांति भंग हो जाती है और संबंधों में तनाव उत्पन्न हो जाता है। लोग ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाना पसंद करते हैं, क्योंकि उसका व्यवहार अप्रत्याशित और अस्थिर होता है। इस प्रकार क्रोध व्यक्ति को अकेला कर देता है और उसे सामाजिक रूप से भी कमजोर बना देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संयम का अर्थ केवल क्रोध को दबाना नहीं है, बल्कि अपने मन को इस प्रकार प्रशिक्षित करना है कि वह परिस्थितियों के अनुसार संतुलित प्रतिक्रिया दे सके। जब व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं पर नियंत्रण रखना सीख लेता है, तब वह हर परिस्थिति में स्थिर और शांत रह सकता है। यह स्थिति उसे जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने में सहायता करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तेजनाओं से बचने के लिए सबसे आवश्यक है आत्मचेतना। व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि क्रोध का कोई लाभ नहीं है, बल्कि यह केवल हानि ही पहुंचाता है। जब भी क्रोध उत्पन्न हो, उस समय तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ समय के लिए मौन धारण करना चाहिए। थोड़ी देर के लिए उस स्थान से हट जाना या किसी अन्य कार्य में लग जाना भी सहायक हो सकता है। इस प्रकार व्यक्ति अपने मन को शांत कर सकता है और अनावश्यक विवाद से बच सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, सहिष्णुता और क्षमा का भाव भी अत्यंत आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति हमारे प्रति कठोर व्यवहार करता है, तो हमें भी उसी प्रकार प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं है। मुस्कराकर और धैर्यपूर्वक स्थिति को संभालना ही सच्ची समझदारी है। जब हम क्रोध के स्थान पर शांति का मार्ग अपनाते हैं, तो सामने वाला व्यक्ति भी धीरे-धीरे शांत हो जाता है। इस प्रकार हम न केवल स्वयं को बल्कि दूसरों को भी सकारात्मक दिशा में प्रेरित कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जीवन का उद्देश्य अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना है। संयम इस यात्रा का मार्गदर्शक है, जो हमें सही दिशा में ले जाता है। यदि हम अपने जीवन में संयम को अपनाते हैं और क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहते हैं, तो हमारा जीवन अधिक सुखी और सफल बन सकता है। संयम हमें आंतरिक शक्ति प्रदान करता है और हमें एक बेहतर मनुष्य बनने की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि संयम ही वह कवच है, जो हमें जीवन की कठिन परिस्थितियों से बचाता है। यह हमें न केवल बाहरी संघर्षों से सुरक्षित रखता है, बल्कि हमारे भीतर की अशांति को भी समाप्त करता है। यदि हम संयम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लें, तो हम निश्चित रूप से एक संतुलित, शांत और सफल जीवन जी सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:57:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अध्ययन,मनन से संस्कार और ज्ञान के खुलते चक्षु</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में अध्ययन जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक मनन और चिंतन भी है। केवल पुस्तक पढ़ना ही संपूर्ण मानवीय उद्देश्य ना होकर उससे प्राप्त ज्ञानामृत का मनन एवं चिंतन भी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी पुस्तक का अध्ययन मनन एवं उस पर चिंतन मनुष्य के संस्कारों को परिष्कृत करता है एवं जीवन के उच्च आदर्शों को प्राप्त करने में सदैव सहायक सिद्ध होता है। अतः मनुष्य को सदैव निरंतर ज्ञानवर्धक पुस्तकों से न सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना चाहिए अपितु  उसका निरंतर मनन तथा चिंतन भी करना होगा तब जाकर हमारे संस्कार,संस्कृति एवं जीवन के उद्देश्य सफल होंगे।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173421/eyes-open-to-values-and-knowledge-through-study-and-meditation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/asfsd.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में अध्ययन जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक मनन और चिंतन भी है। केवल पुस्तक पढ़ना ही संपूर्ण मानवीय उद्देश्य ना होकर उससे प्राप्त ज्ञानामृत का मनन एवं चिंतन भी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी पुस्तक का अध्ययन मनन एवं उस पर चिंतन मनुष्य के संस्कारों को परिष्कृत करता है एवं जीवन के उच्च आदर्शों को प्राप्त करने में सदैव सहायक सिद्ध होता है। अतः मनुष्य को सदैव निरंतर ज्ञानवर्धक पुस्तकों से न सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना चाहिए अपितु  उसका निरंतर मनन तथा चिंतन भी करना होगा तब जाकर हमारे संस्कार,संस्कृति एवं जीवन के उद्देश्य सफल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा है कि पुराने वस्त्र पहनों पर नई पुस्तकें खरीदोl उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तकों का महत्व रत्नों से कहीं अधिक है, क्योंकि पुस्तकें अंतःकरण को उज्जवल करती हैं। सच्चाई भी यही है कि पुस्तकें ज्ञान के अंतःकरण और सच्चाईयों का भंडार होती है। आत्मभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी होती हैं। जिन्होंने पुस्तके नहीं पढी हैं या जिन्हें पुस्तक पढ़ने में रूचि नहीं है वे जीवन की कई सच्चाईयों से अनभिज्ञ रह जाते हैं। पुस्तकें पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हम जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझने की शक्ति से परिचित हो जाते हैं,और समस्या कितनी भी बड़ी हो हम उससे जीतकर निजात पा जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कठिन से कठिन समय पर पुस्तकें हमारा मार्गदर्शन एवं दिग्दर्शन करती है। जिन मनीषियों ने पुस्तक लिखी है और जिन्हें पुस्तकें पढ़ने का शौक है उन्हें ज्ञानार्जन के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं होतीहैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे कलाम साहब ने कहा है कि एक पुस्तक कई मित्रों के बराबर होती है और पुस्तकें सर्वश्रेष्ठ मित्र होती हैं। शिक्षाविद चार्ल्स विलियम इलियट ने कहा कि पुस्तके मित्रों में सबसे शांत व स्थिर हैं, वे सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान होती हैं और शिक्षकों में सबसे धैर्यवान तथा श्रेष्ठ होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निसंदेह पुस्तकें ज्ञानार्जन करने मार्गदर्शन एवं परामर्श देने में में विशेष भूमिका निभाती है। पुस्तकें मनुष्य के मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक,नैतिक, चारित्रिक, व्यवसायिक एवं राजनीतिक विकास में अत्यंत सहायक एवं सफल दोस्त का फर्ज अदा करती हैं। प्राचीन काल से ही बच्चों तथा नौनिहालों के विकास के लिए पुस्तकें लिखे जाने का चलन तथा रिवाज रहा है। 'पंचतंत्र'तथा 'हितोपदेश' इसके बहुत बड़े उदाहरण हैं। पंचतंत्र,हितोपदेश में ज्ञानार्जन के लिए एवं संस्कृति सभ्यता और शिक्षा के उपयोग की बातें जो दैनिक जीवन में अत्यंत प्रभावशाली तथा उपयोगी होती है, लिखी गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">और यही पुस्तकें इस देश की सभ्यता संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाती आई है। इसी तरह की पुस्तकों ने ज्ञान का विस्तार भी किया है। विश्व की हर सभ्यता मे लेखन सामग्री का बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुस्तकों के माध्यम से ही धर्म जाति संस्कृति एवं शिक्षा की मार्गदर्शिका से ही समाज आगे बढ़ा है। अच्छी किताबें अच्छे मार्गदर्शक तथा शिक्षित तथा अशिक्षित समाज को चेतना तथा सद्गुणों से संचारित करती है, व्यक्ति के अंदर मानसिक क्षमता का विकास भी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐतिहासिक किताबें हमें इतिहास, धर्म, राजनीति, संस्कृति के अनेक पहलुओं से अवगत भी कराती है,जिससे व्यक्तित्व विकास में अत्यंत सहायता मिलती है। पुस्तकों के महत्व को देखते हुए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा कि पुस्तके वह साधन है जिसके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृति एवं समाज के बीच सेतु का निर्माण कर सकते हैं। पुस्तके वह मित्र होती हैं जो हर परिस्थिति तत्काल में सहायक होती है, और यही कारण है कि अनेक लोग गुरुवाणी, हनुमान चालीसा अभी अपने पास रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान युग डिजिटल युग कहलाता है अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रिंट मीडिया के स्थान पर अपने पैर जमा लिए हैं। इस डिजिटल युग में इंटरनेट का महत्व काफी बढ़ गया है। पहले हम बचपन में चंदा मामा, नंदन, बालभारती और अन्य किताबों से ज्ञान से लेकर मनोरंजन तक प्राप्त करते थे। आज इंटरनेट के बढ़ते बाजार की दिशा में युवक पुस्तकों को विभिन्न साइटों मैं खंगाल कर पढ़ लेते हैं। अब डिजिटल किताबें भी आ गई है साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी भी धीरे-धीरे विकसित हो रही है। पर कई कंपनियां विविध किताबों को साइट पर प्रकाशित कर बच्चों के पढ़ने के लिए उपलब्ध करा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ कर लाभान्वित हो रहे हैं। इस दिशा में भारत सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा डिजिटल कार्यक्रमों के अंतर्गत ई शिक्षा तथा ई पुस्तकों के पुस्तकालयों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही पठन सामग्रियां बच्चों की जिज्ञासा को शांत करने का काम कर रही है। डिजिटल किताबों तथा पुस्तकालयों से यह लाभ है कि देश विदेश में किसी भी भाग में रहकर लोग अपनी इच्छा के अनुसार पुस्तकों पत्रिकाओं आदि को पढ़ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट अब अध्ययन का सुलभ साधन बन गया है। पर दूसरी तरफ इससे कुछ नुकसान भी हो रहे हैं, उचित मार्गदर्शन वाली किताबें न पढ़कर भ्रामक पुस्तकों का अध्ययन कर अपने को दिग्भ्रमित कर रहे हैं और इससे बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। इसके लिए छोटे बच्चों को अपनी निगरानी में इंटरनेट से किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना अन्यथा दिगभ्रमित साहित्य बच्चों की मानसिकता पर विकृत प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि पुस्तकें ज्ञान देने के साथ मार्गदर्शन तथा चरित्र निर्माण का सर्वोत्तम साधन है। पुस्तकों से राष्ट्र की युवा कर्ण धारों को नई दिशा दी जा सकती है तथा एकता और अखंडता का संदेश देकर एक महान और सशक्त राष्ट्र की पृष्ठभूमि रखी जा सकती है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:01:12 +0530</pubDate>
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