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                <title>युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए : चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के हरैया विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता चंद्रमणि पांडे द्वारा युवा संवाद अभियान के 23वें दिन बीआर इंटर कॉलेज, हर्रैया में छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ ने कहा कि युवाओं को अपना समय और ऊर्जा दूसरों को परेशान करने में नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति और राष्ट्र निर्माण में लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सकारात्मक सोच, विकास की आकांक्षा और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर आगे बढ़ने की क्षमता से है। हमें पाकिस्तान की तरह दूसरों को परेशान करने में अपनी शक्ति व्यय करने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186087/youth-power-should-move-towards-nation-building-chandramani-pandey-sudama"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260822-wa0079.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के हरैया विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता चंद्रमणि पांडे द्वारा युवा संवाद अभियान के 23वें दिन बीआर इंटर कॉलेज, हर्रैया में छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ ने कहा कि युवाओं को अपना समय और ऊर्जा दूसरों को परेशान करने में नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति और राष्ट्र निर्माण में लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सकारात्मक सोच, विकास की आकांक्षा और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर आगे बढ़ने की क्षमता से है। हमें पाकिस्तान की तरह दूसरों को परेशान करने में अपनी शक्ति व्यय करने के बजाय भारत की तरह अपने विकास और लक्ष्य पर केंद्रित रहना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्री पाण्डेय ने कहा कि हम किसी राजनीतिक दल के समर्थक या विरोधी हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रविरोधी नहीं हो सकते। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, पर राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के विरुद्ध कार्य करने वाली ताकतों को समाज को अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से करारा जवाब देना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आज का युवा जिस वातावरण में रहेगा और समाज से जिस प्रकार का ज्ञान एवं संस्कार प्राप्त करेगा, उसके व्यवहार और भविष्य के परिणाम भी उसी अनुरूप होंगे। उन्होंने कम्प्यूटर का उदाहरण देते हुए कहा कि कम्प्यूटर में जैसा इनपुट दिया जाता है, उसी के अनुरूप आउटपुट प्राप्त होता है। इसी प्रकार युवाओं के मन-मस्तिष्क में ज्ञान, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक सोच का इनपुट दिया जाएगा तो समाज को उसी प्रकार का सकारात्मक परिणाम मिलेगा।उन्होंने कहा कि नवयुवकों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ उन्हें समाजोन्मुखी और राष्ट्र निर्माण की भावना से भी जोड़ना आवश्यक है। आने वाले समय में देश की बागडोर आज के इन्हीं युवाओं के हाथों में होगी। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील, अनुशासित और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">चन्द्रमणि पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश में हुए विभिन्न विकास कार्यों एवं परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद कानून-व्यवस्था, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को पिछली सरकारों के दौरान व्याप्त गुण्डाराज और जंगलराज की छवि से निकालकर विकासोन्मुख प्रदेश बनाने के लिए योगी सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्य किया है।</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन राजनीतिक दलों को अपनी कार्यशैली और नीतियों में सुधार करते हुए जनता के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोध को ही राजनीति का आधार बनाने से देश या समाज का भला नहीं हो सकता। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नकारात्मक राजनीति और अनावश्यक विवादों में अपनी ऊर्जा लगाने के बजाय अपने लक्ष्य, शिक्षा, रोजगार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें।</div>
<div style="text-align:justify;">श्री पाण्डेय ने कहा कि हमें पाकिस्तान से नहीं, हिंदुस्तान से सीख लेने की जरूरत है—दूसरों को परेशान करने के बजाय स्वयं को मजबूत बनाना, विवाद के बजाय विकास को प्राथमिकता देना और निराशा के बजाय लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना ही भारत की शक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने गांव, समाज और देश की समस्याओं के समाधान में अपनी भूमिका तय करें तथा शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी समझें। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य केवल सरकारों के भरोसे नहीं बनता, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से बनता है।</div>
<div style="text-align:justify;">युवा संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार एवं प्रश्न भी रखे। श्री पाण्डेय ने उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्हें सकारात्मक सोच, अनुशासन, निरंतर अध्ययन, सामाजिक सरोकार और राष्ट्रहित को अपने जीवन का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि आज के युवा केवल भविष्य के नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान भारत की शक्ति भी हैं। यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ेंगे तो विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का सपना निश्चित रूप से साकार होगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 19:27:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनसीसी कैडेटों ने लिया सैन्य प्रशिक्षण एवं आधुनिक तकनीक का अनुभव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज भ्भ्</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा सैनिक पीजी कॉलेज मई , देवकली, प्रयागराज में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (सीएटीसी-69) का दूसरा दिन सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक एवं व्यक्तित्व विकास पर आधारित विविध गतिविधियों के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिविर में भाग ले रहे 660 एनसीसी कैडेटों ने दिनभर आयोजित प्रशिक्षण सत्रों में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दिन की शुरुआत प्रातःकालीन शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) से हुई, जिसके उपरांत ड्रिल परेड आयोजित की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेटों में अनुशासन, शारीरिक क्षमता, नेतृत्व, समन्वय एवं टीम भावना का विकास किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दिवस का प्रमुख</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183615/ncc-cadets-experienced-military-training-and-modern-technology"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260714-wa01021.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज भ्भ्</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा सैनिक पीजी कॉलेज मई , देवकली, प्रयागराज में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (सीएटीसी-69) का दूसरा दिन सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक एवं व्यक्तित्व विकास पर आधारित विविध गतिविधियों के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिविर में भाग ले रहे 660 एनसीसी कैडेटों ने दिनभर आयोजित प्रशिक्षण सत्रों में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिन की शुरुआत प्रातःकालीन शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) से हुई, जिसके उपरांत ड्रिल परेड आयोजित की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेटों में अनुशासन, शारीरिक क्षमता, नेतृत्व, समन्वय एवं टीम भावना का विकास किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिवस का प्रमुख आकर्षण लाइव फायरिंग अभ्यास रहा, जिसमें जूनियर डिवीजन एवं जूनियर विंग के कैडेटों ने प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की निगरानी में पहली बार हथियार से फायरिंग का अनुभव प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण से कैडेटों का आत्मविश्वास बढ़ा तथा उन्हें हथियारों के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग की मूलभूत जानकारी प्राप्त हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं सीनियर डिवीजन एवं सीनियर विंग के कैडेटों को मैप रीडिंग, शस्त्र प्रशिक्षण, तकनीकी विषयों तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे उनके सैन्य ज्ञान एवं व्यावहारिक दक्षता में वृद्धि हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर के दौरान ड्रोन तकनीक पर एक विशेष परिचयात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें कैडेटों को ड्रोन की कार्यप्रणाली, उपयोगिता एवं संचालन संबंधी मूलभूत जानकारी दी गई। आगामी दिवस पर कैडेटों को व्यावहारिक ड्रोन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें ड्रोन संचालन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सायंकालीन सत्र में सेंट्रल गेम्स का आयोजन किया गया, जिसने कैडेटों में खेल भावना, टीमवर्क एवं शारीरिक दक्षता को प्रोत्साहित किया। इसके पश्चात ऑपरेशन रेड विंग्स पर आधारित एक प्रशिक्षण फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से कैडेटों को सैन्य नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा, साहस एवं सशस्त्र सेनाओं के मूल्यों की प्रेरणादायक जानकारी प्राप्त हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कैम्प कमांडेंट कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि शिविर की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि कैडेटों को सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकी ज्ञान, शारीरिक दक्षता एवं जीवनोपयोगी कौशल का संतुलित प्रशिक्षण प्राप्त हो। </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:01:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एनसीसी कैडेटों ने लिया सैन्य प्रशिक्षण एवं आधुनिक तकनीक का अनुभव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<div>15 यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा सैनिक पीजी कॉलेज मई , देवकली, प्रयागराज में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (सीएटीसी-69) का दूसरा दिन सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक एवं व्यक्तित्व विकास पर आधारित विविध गतिविधियों के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिविर में भाग ले रहे 660 एनसीसी कैडेटों ने दिनभर आयोजित प्रशिक्षण सत्रों में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।</div>
<div>  </div>
<div>दिन की शुरुआत प्रातःकालीन शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) से हुई, जिसके उपरांत ड्रिल परेड आयोजित की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेटों में अनुशासन, शारीरिक क्षमता, नेतृत्व, समन्वय एवं टीम भावना का विकास किया गया।</div>
<div>  </div>
<div>दिवस का प्रमुख आकर्षण लाइव फायरिंग अभ्यास रहा,</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183390/chances-of-humid-summer-due-to-weak-monsoon-activity-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260714-wa0102.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<div>15 यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा सैनिक पीजी कॉलेज मई , देवकली, प्रयागराज में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (सीएटीसी-69) का दूसरा दिन सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक एवं व्यक्तित्व विकास पर आधारित विविध गतिविधियों के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिविर में भाग ले रहे 660 एनसीसी कैडेटों ने दिनभर आयोजित प्रशिक्षण सत्रों में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।</div>
<div> </div>
<div>दिन की शुरुआत प्रातःकालीन शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) से हुई, जिसके उपरांत ड्रिल परेड आयोजित की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से कैडेटों में अनुशासन, शारीरिक क्षमता, नेतृत्व, समन्वय एवं टीम भावना का विकास किया गया।</div>
<div> </div>
<div>दिवस का प्रमुख आकर्षण लाइव फायरिंग अभ्यास रहा, जिसमें जूनियर डिवीजन एवं जूनियर विंग के कैडेटों ने प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की निगरानी में पहली बार हथियार से फायरिंग का अनुभव प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण से कैडेटों का आत्मविश्वास बढ़ा तथा उन्हें हथियारों के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग की मूलभूत जानकारी प्राप्त हुई।</div>
<div> </div>
<div>वहीं सीनियर डिवीजन एवं सीनियर विंग के कैडेटों को मैप रीडिंग, शस्त्र प्रशिक्षण, तकनीकी विषयों तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे उनके सैन्य ज्ञान एवं व्यावहारिक दक्षता में वृद्धि हुई।</div>
<div> </div>
<div>शिविर के दौरान ड्रोन तकनीक पर एक विशेष परिचयात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें कैडेटों को ड्रोन की कार्यप्रणाली, उपयोगिता एवं संचालन संबंधी मूलभूत जानकारी दी गई। आगामी दिवस पर कैडेटों को व्यावहारिक ड्रोन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें ड्रोन संचालन का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा।</div>
<div> </div>
<div>सायंकालीन सत्र में सेंट्रल गेम्स का आयोजन किया गया, जिसने कैडेटों में खेल भावना, टीमवर्क एवं शारीरिक दक्षता को प्रोत्साहित किया। इसके पश्चात ऑपरेशन रेड विंग्स पर आधारित एक प्रशिक्षण फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से कैडेटों को सैन्य नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा, साहस एवं सशस्त्र सेनाओं के मूल्यों की प्रेरणादायक जानकारी प्राप्त हुई।</div>
<div> </div>
<div>कैम्प कमांडेंट कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि शिविर की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि कैडेटों को सैन्य प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकी ज्ञान, शारीरिक दक्षता एवं जीवनोपयोगी कौशल का संतुलित प्रशिक्षण प्राप्त हो। </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 22:13:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ताइक्वांडो खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र देकर किया गया सम्मानित</title>
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<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>नगर पंचायत शोहरतगढ़ के ओपेन जिम पार्क में चल रहे दस दिवसीय ताइक्वांडो खेल एवं मेडिटेशन शिविर का समापन रविवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हुआ। शिविर में प्रशिक्षण हासिल करने वाले दर्जनों खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र व मेडल देकर सम्मानित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">शोहरतगढ़ के ओपन जिम पार्क में जिला ताइक्वांडो अकादमी सिद्धार्थनगर के तरफ से ताइक्वांडो ट्रेनिंग सेंटर  शोहरतगढ़ द्वारा 10 दिवसीय ताइक्वांडो खेल एवं मेडिटेशन शिविर का संचालन आयोजन जिला सचिव बजरंगी राजपूत के मार्गदर्शन में हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">शिविर में आत्मरक्षा प्रशिक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी देने के साथ बच्चों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181838/taekwondo-players-were-honored-with-certificates"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782051538822.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>नगर पंचायत शोहरतगढ़ के ओपेन जिम पार्क में चल रहे दस दिवसीय ताइक्वांडो खेल एवं मेडिटेशन शिविर का समापन रविवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हुआ। शिविर में प्रशिक्षण हासिल करने वाले दर्जनों खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र व मेडल देकर सम्मानित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">शोहरतगढ़ के ओपन जिम पार्क में जिला ताइक्वांडो अकादमी सिद्धार्थनगर के तरफ से ताइक्वांडो ट्रेनिंग सेंटर  शोहरतगढ़ द्वारा 10 दिवसीय ताइक्वांडो खेल एवं मेडिटेशन शिविर का संचालन आयोजन जिला सचिव बजरंगी राजपूत के मार्गदर्शन में हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">शिविर में आत्मरक्षा प्रशिक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी देने के साथ बच्चों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, आत्मरक्षा मेडिटेशन एवं योग, अनुशासन एवं व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस विकास की जानकारी दी गई। </div>
<div style="text-align:justify;"> जिला ताइक्वांडो अकादमी के अध्यक्ष उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि ताइक्वांडो प्रशिक्षण के जरिए ताइक्वांडो के उभरते खिलाड़ियों  के अंदर खेल प्रतिभा को विकसित करने का प्रयास है। मुख्य अतिथि  नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रवि अग्रवाल ने कहा कि नगर में क्रिकेट व अन्य खेल के साथ-साथ ताइक्वांडो खिलाड़ियों को आवश्यकता अनुसार सहयोग प्रदान किया जा रहा है। क्रिकेट,ताइक्वांडो आदि के साथ जल्द ही बैडमिंटन के खिलाड़ियों को भी एक बेहतर मंच नगर में मिल सकेगा। शिविर समापन पर  मुख्य अतिथि रवि अग्रवाल व विशिष्ट अतिथि श्याम जायसवाल ने शिविर में शामिल खिलाड़ी अंकित कनौजिया, अभिषेक यादव,आराध्या, आंचल चौधरी, आशीष, विनय, ऋषि, सूरज साहनी, आदित्य साहनी ,नित्य आदि खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।</div>
</div>
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<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 12:14:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योग मानव जीवन की समस्याओं का समाधान और आत्मिक उत्कर्ष का मार्ग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक दिवस नहीं, बल्कि मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक बनाने की एक वैश्विक चेतना का प्रतीक है। योग भारत की प्राचीन संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है जिसने आज विश्व के करोड़ों लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा के बाद योग की महत्ता और भी अधिक बढ़ी है तथा आज दुनिया का लगभग हर देश इसकी उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है।</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181570/yoga-is-the-solution-to-the-problems-of-human-life"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक दिवस नहीं, बल्कि मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक बनाने की एक वैश्विक चेतना का प्रतीक है। योग भारत की प्राचीन संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है जिसने आज विश्व के करोड़ों लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा के बाद योग की महत्ता और भी अधिक बढ़ी है तथा आज दुनिया का लगभग हर देश इसकी उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय का मनुष्य अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है। जीवन की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा, तनाव, असुरक्षा, आर्थिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाएँ उसे निरंतर मानसिक रूप से विचलित करती रहती हैं। कभी शरीर रोगों से ग्रस्त होता है तो कभी मन चिंता, अवसाद और असंतोष से भर जाता है। व्यक्ति एक समस्या का समाधान खोजता है तो दूसरी उसके सामने खड़ी हो जाती है। परिणामस्वरूप उसका जीवन तनाव, भय, निराशा और मानसिक द्वंद्व का शिकार बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज अधिकांश लोग सुख की तलाश में हैं, परंतु वास्तविक सुख उनसे दूर होता जा रहा है। बाहरी उपलब्धियों के बावजूद भीतर शांति का अभाव दिखाई देता है। ऐसे समय में योग एक प्रकाश स्तंभ की भाँति मनुष्य को सही दिशा प्रदान करता है। योग व्यक्ति को समस्याओं से भागना नहीं सिखाता, बल्कि उनका संतुलित और सकारात्मक ढंग से सामना करना सिखाता है।योग का वास्तविक स्वरूप योग का सामान्य अर्थ जोड़ या मिलन है। भारतीय दर्शन के अनुसार योग आत्मा और परमात्मा के मिलन की प्रक्रिया है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने वाली एक समग्र साधना है। योग शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महर्षि पतंजलि ने योग को "चित्तवृत्ति निरोध" कहा है, अर्थात मन की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित करना। जब मन स्थिर और शांत होता है, तब व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान पाता है। यही योग का मूल उद्देश्य है। योग व्यक्ति को बाहरी संसार के साथ-साथ अपने अंतर्जगत को समझने की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य और योग का गहरा संबंध है।आज चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करने लगा है कि अनेक रोगों का संबंध केवल शरीर से नहीं, बल्कि मन और जीवनशैली से भी होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, अनिद्रा, चिंता और अवसाद जैसी अनेक समस्याएँ तनाव और असंतुलित जीवन का परिणाम हैं। योग इन समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योगासन शरीर को लचीला, सशक्त और स्वस्थ बनाते हैं। प्राणायाम श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित कर शरीर में ऊर्जा का संतुलन स्थापित करता है। ध्यान मन को शांत और एकाग्र बनाता है। नियमित योगाभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है तथा व्यक्ति स्वयं को अधिक ऊर्जावान अनुभव करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राचीन भारत में योग जीवन का अभिन्न अंग था। उस समय लोगों का स्वास्थ्य प्राकृतिक जीवनशैली और योगाभ्यास पर आधारित था। आधुनिक युग में भी योग उसी परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">तनावमुक्त जीवन का आधार</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान युग को तनाव का युग कहा जाता है। भौतिक सुविधाओं में वृद्धि होने के बावजूद मनुष्य मानसिक रूप से अधिक अशांत होता जा रहा है। जीवन की जटिलताओं ने उसे भीतर से कमजोर बना दिया है। ऐसे वातावरण में योग तनावमुक्त जीवन का सबसे प्रभावी साधन सिद्ध हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग व्यक्ति को वर्तमान क्षण में जीना सिखाता है। यह मन को अनावश्यक चिंताओं और नकारात्मक विचारों से मुक्त करता है। जब मन शांत होता है तो निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, आत्मविश्वास विकसित होता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न होता है। योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं बनाता, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">योग का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करता है। नियमित योगाभ्यास से आत्मानुशासन, धैर्य, सहनशीलता, एकाग्रता और आत्मविश्वास का विकास होता है। व्यक्ति अपने भीतर छिपी हुई शक्तियों को पहचानने लगता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग हमें सिखाता है कि वास्तविक शक्ति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि हमारे भीतर निहित है। जब मनुष्य अपने अंतर्मन से जुड़ता है, तब उसके भीतर सकारात्मक परिवर्तन प्रारंभ होते हैं। उसके विचार, व्यवहार और दृष्टिकोण में परिष्कार आता है। यही कारण है कि योग को व्यक्तित्व रूपांतरण का माध्यम कहा जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व में  योग की लोकप्रियता बढ़ रही है। एक समय था जब योग केवल भारत तक सीमित माना जाता था, किंतु आज इसकी लोकप्रियता विश्वव्यापी हो चुकी है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अनेक देशों में योग केंद्र स्थापित हो चुके हैं। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, कार्यालयों और चिकित्सा संस्थानों में योग को अपनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विदेशी समाज भौतिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद मानसिक शांति की खोज में योग की ओर आकर्षित हुआ है। अनेक विदेशी भारत आकर योग का अध्ययन करते हैं और इसकी गहन साधना से लाभान्वित होते हैं। यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण है कि उसकी हजारों वर्ष पुरानी परंपरा आज विश्व का मार्गदर्शन कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक जीवन में योग की भूमिका अहम मानी जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग केवल व्यक्तिगत कल्याण का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम है। समाज में बढ़ते अपराध, हिंसा, नशाखोरी और नैतिक पतन के मूल में मानसिक असंतुलन और आत्मसंयम का अभाव है। योग व्यक्ति में आत्मनियंत्रण, करुणा, सहिष्णुता और नैतिक मूल्यों का विकास करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब व्यक्ति का मन संतुलित होता है तो उसका व्यवहार भी संतुलित हो जाता है। योग परिवार, समाज और राष्ट्र के बीच सकारात्मक संबंधों को मजबूत करता है। यह मानवता, सहयोग और सद्भाव की भावना को विकसित करता है। इसलिए योग केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी आधार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अध्यात्म की ओर ले जाने वाला मार्ग है।योग का अंतिम उद्देश्य केवल रोगों से मुक्ति नहीं, बल्कि आत्मबोध और आत्मिक विकास है। यह मनुष्य को भौतिकता से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाता है। योग के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर स्थित अनंत संभावनाओं और दिव्य शक्तियों का अनुभव कर सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अध्यात्म का अर्थ संसार से भागना नहीं, बल्कि स्वयं को जानना है। योग हमें बाहरी उपलब्धियों के साथ-साथ आंतरिक समृद्धि का भी महत्व समझाता है। जब व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तब जीवन में स्थायी शांति और आनंद का अनुभव होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की अनुपम देन है। यह मानव जीवन की समस्याओं का व्यावहारिक और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। योग शरीर को स्वस्थ, मन को शांत, बुद्धि को निर्मल और आत्मा को जागृत करता है। आज जब पूरी दुनिया तनाव, अशांति और असंतुलन से जूझ रही है, तब योग मानवता के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग बाहर नहीं, हमारे भीतर है। यदि हम योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लें तो न केवल व्यक्तिगत जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ, शांतिपूर्ण और नैतिक समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। वास्तव में योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़कर अनंत आनंद और आत्मिक उत्कर्ष की ओर अग्रसर करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   <strong> <em>कांतिलाल मांडोत</em></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181570/yoga-is-the-solution-to-the-problems-of-human-life</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:48:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अध्ययन,मनन से संस्कार और ज्ञान के खुलते चक्षु</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में अध्ययन जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक मनन और चिंतन भी है। केवल पुस्तक पढ़ना ही संपूर्ण मानवीय उद्देश्य ना होकर उससे प्राप्त ज्ञानामृत का मनन एवं चिंतन भी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी पुस्तक का अध्ययन मनन एवं उस पर चिंतन मनुष्य के संस्कारों को परिष्कृत करता है एवं जीवन के उच्च आदर्शों को प्राप्त करने में सदैव सहायक सिद्ध होता है। अतः मनुष्य को सदैव निरंतर ज्ञानवर्धक पुस्तकों से न सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना चाहिए अपितु  उसका निरंतर मनन तथा चिंतन भी करना होगा तब जाकर हमारे संस्कार,संस्कृति एवं जीवन के उद्देश्य सफल होंगे।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173421/eyes-open-to-values-and-knowledge-through-study-and-meditation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/asfsd.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मनुष्य के जीवन में अध्ययन जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक मनन और चिंतन भी है। केवल पुस्तक पढ़ना ही संपूर्ण मानवीय उद्देश्य ना होकर उससे प्राप्त ज्ञानामृत का मनन एवं चिंतन भी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी पुस्तक का अध्ययन मनन एवं उस पर चिंतन मनुष्य के संस्कारों को परिष्कृत करता है एवं जीवन के उच्च आदर्शों को प्राप्त करने में सदैव सहायक सिद्ध होता है। अतः मनुष्य को सदैव निरंतर ज्ञानवर्धक पुस्तकों से न सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना चाहिए अपितु  उसका निरंतर मनन तथा चिंतन भी करना होगा तब जाकर हमारे संस्कार,संस्कृति एवं जीवन के उद्देश्य सफल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा है कि पुराने वस्त्र पहनों पर नई पुस्तकें खरीदोl उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तकों का महत्व रत्नों से कहीं अधिक है, क्योंकि पुस्तकें अंतःकरण को उज्जवल करती हैं। सच्चाई भी यही है कि पुस्तकें ज्ञान के अंतःकरण और सच्चाईयों का भंडार होती है। आत्मभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी होती हैं। जिन्होंने पुस्तके नहीं पढी हैं या जिन्हें पुस्तक पढ़ने में रूचि नहीं है वे जीवन की कई सच्चाईयों से अनभिज्ञ रह जाते हैं। पुस्तकें पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हम जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझने की शक्ति से परिचित हो जाते हैं,और समस्या कितनी भी बड़ी हो हम उससे जीतकर निजात पा जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कठिन से कठिन समय पर पुस्तकें हमारा मार्गदर्शन एवं दिग्दर्शन करती है। जिन मनीषियों ने पुस्तक लिखी है और जिन्हें पुस्तकें पढ़ने का शौक है उन्हें ज्ञानार्जन के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं होतीहैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे कलाम साहब ने कहा है कि एक पुस्तक कई मित्रों के बराबर होती है और पुस्तकें सर्वश्रेष्ठ मित्र होती हैं। शिक्षाविद चार्ल्स विलियम इलियट ने कहा कि पुस्तके मित्रों में सबसे शांत व स्थिर हैं, वे सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान होती हैं और शिक्षकों में सबसे धैर्यवान तथा श्रेष्ठ होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निसंदेह पुस्तकें ज्ञानार्जन करने मार्गदर्शन एवं परामर्श देने में में विशेष भूमिका निभाती है। पुस्तकें मनुष्य के मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक,नैतिक, चारित्रिक, व्यवसायिक एवं राजनीतिक विकास में अत्यंत सहायक एवं सफल दोस्त का फर्ज अदा करती हैं। प्राचीन काल से ही बच्चों तथा नौनिहालों के विकास के लिए पुस्तकें लिखे जाने का चलन तथा रिवाज रहा है। 'पंचतंत्र'तथा 'हितोपदेश' इसके बहुत बड़े उदाहरण हैं। पंचतंत्र,हितोपदेश में ज्ञानार्जन के लिए एवं संस्कृति सभ्यता और शिक्षा के उपयोग की बातें जो दैनिक जीवन में अत्यंत प्रभावशाली तथा उपयोगी होती है, लिखी गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">और यही पुस्तकें इस देश की सभ्यता संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाती आई है। इसी तरह की पुस्तकों ने ज्ञान का विस्तार भी किया है। विश्व की हर सभ्यता मे लेखन सामग्री का बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुस्तकों के माध्यम से ही धर्म जाति संस्कृति एवं शिक्षा की मार्गदर्शिका से ही समाज आगे बढ़ा है। अच्छी किताबें अच्छे मार्गदर्शक तथा शिक्षित तथा अशिक्षित समाज को चेतना तथा सद्गुणों से संचारित करती है, व्यक्ति के अंदर मानसिक क्षमता का विकास भी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐतिहासिक किताबें हमें इतिहास, धर्म, राजनीति, संस्कृति के अनेक पहलुओं से अवगत भी कराती है,जिससे व्यक्तित्व विकास में अत्यंत सहायता मिलती है। पुस्तकों के महत्व को देखते हुए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा कि पुस्तके वह साधन है जिसके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृति एवं समाज के बीच सेतु का निर्माण कर सकते हैं। पुस्तके वह मित्र होती हैं जो हर परिस्थिति तत्काल में सहायक होती है, और यही कारण है कि अनेक लोग गुरुवाणी, हनुमान चालीसा अभी अपने पास रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान युग डिजिटल युग कहलाता है अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रिंट मीडिया के स्थान पर अपने पैर जमा लिए हैं। इस डिजिटल युग में इंटरनेट का महत्व काफी बढ़ गया है। पहले हम बचपन में चंदा मामा, नंदन, बालभारती और अन्य किताबों से ज्ञान से लेकर मनोरंजन तक प्राप्त करते थे। आज इंटरनेट के बढ़ते बाजार की दिशा में युवक पुस्तकों को विभिन्न साइटों मैं खंगाल कर पढ़ लेते हैं। अब डिजिटल किताबें भी आ गई है साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी भी धीरे-धीरे विकसित हो रही है। पर कई कंपनियां विविध किताबों को साइट पर प्रकाशित कर बच्चों के पढ़ने के लिए उपलब्ध करा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ कर लाभान्वित हो रहे हैं। इस दिशा में भारत सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा डिजिटल कार्यक्रमों के अंतर्गत ई शिक्षा तथा ई पुस्तकों के पुस्तकालयों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही पठन सामग्रियां बच्चों की जिज्ञासा को शांत करने का काम कर रही है। डिजिटल किताबों तथा पुस्तकालयों से यह लाभ है कि देश विदेश में किसी भी भाग में रहकर लोग अपनी इच्छा के अनुसार पुस्तकों पत्रिकाओं आदि को पढ़ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट अब अध्ययन का सुलभ साधन बन गया है। पर दूसरी तरफ इससे कुछ नुकसान भी हो रहे हैं, उचित मार्गदर्शन वाली किताबें न पढ़कर भ्रामक पुस्तकों का अध्ययन कर अपने को दिग्भ्रमित कर रहे हैं और इससे बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। इसके लिए छोटे बच्चों को अपनी निगरानी में इंटरनेट से किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना अन्यथा दिगभ्रमित साहित्य बच्चों की मानसिकता पर विकृत प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि पुस्तकें ज्ञान देने के साथ मार्गदर्शन तथा चरित्र निर्माण का सर्वोत्तम साधन है। पुस्तकों से राष्ट्र की युवा कर्ण धारों को नई दिशा दी जा सकती है तथा एकता और अखंडता का संदेश देकर एक महान और सशक्त राष्ट्र की पृष्ठभूमि रखी जा सकती है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:01:12 +0530</pubDate>
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