<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/58463/soil-health" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>soil health - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/58463/rss</link>
                <description>soil health RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इफको कॉर्डेट, में नैनो उर्वरकों पर सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  इफको कॉर्डेट , फूलपुर, प्रयागराज में आज नैनो उर्वरकों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं किसानों के मध्य इनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रयागराज मंडल के सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग, लाभ एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप आयुक्त एवं उप निबंधक, सहकारिता प्रयागराज मंडल,  आशीष श्रीवास्तव रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  विशिष्ट अतिथि के रूप में इफको राज्य कार्यालय, लखनऊ से राज्य विपणन प्रबंधक  यतेन्द्र कुमार तेवतिया उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184063/organization-of-cooperative-training-program-on-nano-fertilizers-in-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260724-wa0065.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इफको कॉर्डेट , फूलपुर, प्रयागराज में आज नैनो उर्वरकों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं किसानों के मध्य इनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रयागराज मंडल के सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग, लाभ एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप आयुक्त एवं उप निबंधक, सहकारिता प्रयागराज मंडल,  आशीष श्रीवास्तव रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> विशिष्ट अतिथि के रूप में इफको राज्य कार्यालय, लखनऊ से राज्य विपणन प्रबंधक  यतेन्द्र कुमार तेवतिया उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रयागराज मंडल के समस्त अपर जिला सहकारी अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) तथा विभिन्न जनपदों के सहकारिता विभाग के अधिकारी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में मुख्य अतिथि  आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने किसानों से प्राप्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जिन किसानों ने नैनो उर्वरकों का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया है, उन्हें उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों को अधिकाधिक किसानों तक पहुँचाने के लिए सचिवों एवं किसानों के स्तर पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे इनका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य विपणन प्रबंधक  यतेन्द्र कुमार तेवतिया ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं अन्य नैनो उर्वरकों की वैज्ञानिक उपयोगिता, उनकी कार्यप्रणाली तथा पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में उनके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित अपर जिला सहकारी अधिकारियों एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों से आह्वान किया कि वे सहकारी समितियों के माध्यम से नैनो उर्वरकों की उपलब्धता एवं बिक्री को बढ़ावा दें तथा किसानों को इनके उपयोग के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों का व्यापक उपयोग आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान प्रयागराज मंडल के विभिन्न जनपदों से आए अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार एवं सहकारी समितियों के माध्यम से इनके व्यवसाय को सुदृढ़ बनाने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस अवसर पर प्रयागराज जनपद से सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता)  साधना सिंह, कौशाम्बी जनपद से  श्याम लाल मौर्य तथा प्रतापगढ़ जनपद से  उमाकांत कुशवाहा सहित अन्य अधिकारियों ने नैनो उर्वरकों के उपयोग, किसानों में जागरूकता तथा सहकारी समितियों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में उपस्थित अपर जिला सहकारी अधिकारियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने इफको के नैनो उर्वरकों से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका समाधान डॉ. डी.के. सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, इफको प्रयागराज मंडल द्वारा विस्तारपूर्वक एवं सरल भाषा में किया गया। उन्होंने नैनो उर्वरकों की उपयोग विधि, किसानों को होने वाले लाभ, वैज्ञानिक तथ्यों तथा विपणन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कॉर्डेट फूलपुर , इफको के प्रधानाचार्य डॉ. विवेक दीक्षित ने संस्थान की प्रशिक्षण व्यवस्था, अनुसंधान गतिविधियों तथा कृषि क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के समापन पर सभी अधिकारियों ने कॉर्डेट परिसर का भ्रमण किया गया । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के समापन पर सभी अधिकारियों ने इफको फूलपुर स्थित नैनो उर्वरक संयंत्र का भ्रमण किया तथा नैनो उर्वरकों के निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अधिकारियों ने यह जाना कि नैनो उर्वरकों का निर्माण किस प्रकार आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जाता है। साथ ही उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग एवं संयंत्र की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस दौरान अधिकारियों ने संयंत्र में अपनाई जा रही अत्याधुनिक तकनीकों की सराहना की तथा इसे भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में इफको प्रयागराज के क्षेत्र प्रतिनिधि  प्रतीक चौबे द्वारा सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184063/organization-of-cooperative-training-program-on-nano-fertilizers-in-iffco</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184063/organization-of-cooperative-training-program-on-nano-fertilizers-in-iffco</guid>
                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:36:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260724-wa0065.jpg"                         length="84126"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव तथा जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती ने किसानों को नई राह तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक परंपरागत सोच की वापसी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक अनुभवों से मजबूत हुआ एक नया कृषि आंदोलन बनता जा रहा है। गुजरात के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) के हालिया शोध ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183198/steps-towards-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव तथा जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती ने किसानों को नई राह तलाशने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि आज बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक परंपरागत सोच की वापसी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक अनुभवों से मजबूत हुआ एक नया कृषि आंदोलन बनता जा रहा है। गुजरात के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) के हालिया शोध ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है, बल्कि जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, पर्यावरण संतुलन और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में भी प्रभावी भूमिका निभाती है। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय ने सौराष्ट्र क्षेत्र के विभिन्न जिलों में मिट्टी के नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर प्राकृतिक खेती के प्रभावों का अध्ययन किया।  इस शोध में सामने आया कि जिन खेतों में लगातार पांच वर्षों तक प्राकृतिक खेती अपनाई गई, वहां मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.45 प्रतिशत से बढ़कर 0.93 प्रतिशत तक पहुंच गई। किसी भी कृषि भूमि के लिए ऑर्गेनिक कार्बन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यही मिट्टी की उर्वरता, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता और पौधों के पोषण का आधार होता है। ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ने का अर्थ है कि मिट्टी अधिक जीवंत, उपजाऊ और दीर्घकाल तक उत्पादन देने में सक्षम हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोध में यह भी पाया गया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले खेतों में वर्षा और सिंचाई का पानी पहले की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में मिट्टी के भीतर समा रहा है। पानी के समाने की दर 6.50 सेंटीमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 14.50 सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गई। इससे वर्षा जल का बेहतर संरक्षण संभव हुआ और भूजल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिला। इसी प्रकार मिट्टी की नमी संग्रहण क्षमता 12.75 प्रतिशत से बढ़कर 19.84 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसका सीधा लाभ किसानों को सूखे की स्थिति में मिलता है क्योंकि मिट्टी लंबे समय तक नमी बनाए रखती है और फसलों को बार-बार सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;">मिट्टी की संरचना में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। प्राकृतिक खेती वाले खेतों में मिट्टी की छिद्रता 34.63 प्रतिशत से बढ़कर 41.08 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा और पानी मिलना संभव हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं मिट्टी का घनत्व भी कम हुआ, जिससे भूमि अधिक भुरभुरी और खेती के लिए अनुकूल बनी। ऐसी मिट्टी में जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधे अधिक स्वस्थ रहते हैं। सौराष्ट्र के विभिन्न जिलों में किए गए अध्ययन से यह भी सामने आया कि ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा हर जिले में अलग-अलग है। पोरबंदर की मिट्टी में सबसे अधिक 0.82 प्रतिशत ऑर्गेनिक कार्बन दर्ज किया गया, जबकि गिर सोमनाथ में 0.75 प्रतिशत और जूनागढ़ में 0.72 प्रतिशत पाया गया। दूसरी ओर सुरेंद्रनगर, भावनगर और जामनगर में यह मात्रा अपेक्षाकृत कम रही। पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र का औसत ऑर्गेनिक कार्बन 0.57 प्रतिशत दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती का विस्तार होगा, वहां यह स्तर आने वाले वर्षों में और बेहतर हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती का सबसे बड़ा लाभ केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का सीमित उपयोग, फसल अवशेषों का पुनर्चक्रण, जीवामृत और अन्य प्राकृतिक घोलों का प्रयोग तथा न्यूनतम जुताई जैसी तकनीकों से मिट्टी में कार्बन संग्रहण की क्षमता बढ़ती है। शोध के अनुसार प्राकृतिक खेती के माध्यम से प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष चार से आठ टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का जलवायु लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है और खेती जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहयोगी बनती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही कारण है कि आज प्राकृतिक खेती को केवल वैकल्पिक कृषि पद्धति नहीं बल्कि "क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर" के रूप में देखा जा रहा है। बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी परिस्थितियों में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता इसे भविष्य की कृषि व्यवस्था का मजबूत आधार बना रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देशभर में प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में हजारों किसान इस पद्धति को अपना चुके हैं। केंद्र और राज्य सरकारें भी प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही हैं। किसानों के सफल अनुभव दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जो किसान पहले रासायनिक खेती छोड़ने को लेकर आशंकित थे, वे अब प्राकृतिक खेती के सकारात्मक परिणाम देखकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राकृतिक खेती का आर्थिक पक्ष भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और महंगे कृषि रसायनों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गोबर, गोमूत्र, जैविक अवशेष और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक तरीके से उत्पादित खाद्यान्न, फल और सब्जियों की बाजार में मांग भी बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बन रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी प्राकृतिक खेती का महत्व लगातार बढ़ रहा है। रासायनिक अवशेषों से मुक्त खाद्यान्न उपभोक्ताओं को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हैं। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के कारण लोग प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे किसानों के लिए नए बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय का शोध यह स्पष्ट संदेश देता है कि प्राकृतिक खेती केवल भावनात्मक या पारंपरिक विचार नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित एक प्रभावी कृषि प्रणाली है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने जैसे अनेक क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ चुके हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यदि देश में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ता है, तो यह केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के राष्ट्रीय उद्देश्यों को भी नई दिशा देगी। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय का यह शोध इसी परिवर्तन की मजबूत वैज्ञानिक पुष्टि है और यह विश्वास जगाता है कि भविष्य की समृद्ध खेती प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत </strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183198/steps-towards-natural-farming</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/183198/steps-towards-natural-farming</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:09:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/images-%282%291.jpg"                         length="145542"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहकार से समृद्धि सहकारिता सप्ताह अभियान के तहत किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>विकास खंड बिथरी चैनपुर में सहकारिता सप्ताह के उपलक्ष्य में "धरती माता बचाओ अभियान" एवं "नैनो उर्वरक : महत्व एवं उपयोग" विषय पर आधारित किसान सभा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बरेली  बृजेश सिंह परिहार रहे। क्षेत्र अधिकारी इफको,  कार्तिक सिंह,  हरीश गंगवार,प्रबंधक इफ्को एमसी,  कृष्ण मोहन, अपर जिला सहकारी अधिकारी  सुधीश गौतम अपर जिला सहकारी अधिकारी तथा समिति के सचिव संकल्प उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के शुभारंभ उपरान्त क्षेत्र अधिकारी इफको श्री कार्तिक सिंह द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि, लागत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182739/farmer-awareness-seminar-organized-under-sahakar-se-samriddhi-cooperative-week"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260704-wa0007-(2).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>विकास खंड बिथरी चैनपुर में सहकारिता सप्ताह के उपलक्ष्य में "धरती माता बचाओ अभियान" एवं "नैनो उर्वरक : महत्व एवं उपयोग" विषय पर आधारित किसान सभा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बरेली  बृजेश सिंह परिहार रहे। क्षेत्र अधिकारी इफको,  कार्तिक सिंह,  हरीश गंगवार,प्रबंधक इफ्को एमसी,  कृष्ण मोहन, अपर जिला सहकारी अधिकारी  सुधीश गौतम अपर जिला सहकारी अधिकारी तथा समिति के सचिव संकल्प उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के शुभारंभ उपरान्त क्षेत्र अधिकारी इफको श्री कार्तिक सिंह द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी तथा बेहतर गुणवत्ता आदि साथ ही परंपरागत उर्वरकों के अधिक उपयोग से मृदा , जल एवं वायु पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव साथ ही क्षीण हो रहे मिट्टी की उर्वरता के बारे में जानकारी दी गई एवं मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या को बढ़ाने हेतु कॉन्सर्टिया के उपयोग हेतु प्रेरित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही किसानों को नैनों उर्वरकों की विशेषता, विभिन्न फसलों में उपयोग विधि, उपयोग हेतु उचित समय, सही मात्रा आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। हरीश गंगवार  ने फसल सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी और किसान सुरक्षा बीमा योजना के बारे में किसानों को अवगत करवाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि  बृजेश सिंह परिहार ने अपने संबोधन में सहकारिता सप्ताह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सहकारी समितियां किसान हितों के लिए समर्पित संस्थाएं हैं और विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को निरंतर लाभान्वित कर रही हैं। साथ ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग कर नैनो उर्वरकों के प्रयोग हेतु किसानों से आग्रह किया गया एवं समितियों के द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया गया। किसने की समस्याओं को सुना गया और सभी किसानों से फार्मर आईडी बनवाने के लिए अनुरोध किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182739/farmer-awareness-seminar-organized-under-sahakar-se-samriddhi-cooperative-week</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182739/farmer-awareness-seminar-organized-under-sahakar-se-samriddhi-cooperative-week</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 23:04:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260704-wa0007-%282%29.jpg"                         length="205411"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिलाया विकसित कृषि का संकल्प।।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0182-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, जैविक खाद के उपयोग, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती से मिलने वाले लाभों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल, विधायकगण, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, महापौर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:14:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260619-wa0182-%281%29.jpg"                         length="243381"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg"                         length="160824"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिविर के पांचवें दिन जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान चला कर ग्रामीणों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित खेती अपनाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। यह कार्यक्रम बलराम महाविद्यालय के प्रबंधिका श्रीमती उमा सिंह के निर्देशन में संचालक पूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके कार्यक्रमाधिकारी गौरव वर्मा एसोसिएट डायरेक्टर शाश्वत मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर शालिनी श्रीवास्त प्राचार्य डॉ अरुण कुमार सिंह डॉ अशोक उत्तम डॉ0 वी0 पी0 सिंह, डॉ अजय सिंह, संध्या पाण्डेय, आशीष पाण्डेय, बृजेश कुमार और ग्रामीण उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:56:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg"                         length="140267"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        