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                <title>sustainable agriculture - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>sustainable agriculture RSS Feed</description>
                
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                <title>इफको कॉर्डेट, में नैनो उर्वरकों पर सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  इफको कॉर्डेट , फूलपुर, प्रयागराज में आज नैनो उर्वरकों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं किसानों के मध्य इनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रयागराज मंडल के सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग, लाभ एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप आयुक्त एवं उप निबंधक, सहकारिता प्रयागराज मंडल,  आशीष श्रीवास्तव रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  विशिष्ट अतिथि के रूप में इफको राज्य कार्यालय, लखनऊ से राज्य विपणन प्रबंधक  यतेन्द्र कुमार तेवतिया उपस्थित रहे।</div>
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<div style="text-align:justify;">अपने</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184063/organization-of-cooperative-training-program-on-nano-fertilizers-in-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260724-wa0065.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इफको कॉर्डेट , फूलपुर, प्रयागराज में आज नैनो उर्वरकों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं किसानों के मध्य इनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रयागराज मंडल के सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग, लाभ एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप आयुक्त एवं उप निबंधक, सहकारिता प्रयागराज मंडल,  आशीष श्रीवास्तव रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> विशिष्ट अतिथि के रूप में इफको राज्य कार्यालय, लखनऊ से राज्य विपणन प्रबंधक  यतेन्द्र कुमार तेवतिया उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रयागराज मंडल के समस्त अपर जिला सहकारी अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) तथा विभिन्न जनपदों के सहकारिता विभाग के अधिकारी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में मुख्य अतिथि  आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि नैनो उर्वरक भारतीय कृषि के लिए एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने किसानों से प्राप्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जिन किसानों ने नैनो उर्वरकों का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया है, उन्हें उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों को अधिकाधिक किसानों तक पहुँचाने के लिए सचिवों एवं किसानों के स्तर पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे इनका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य विपणन प्रबंधक  यतेन्द्र कुमार तेवतिया ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं अन्य नैनो उर्वरकों की वैज्ञानिक उपयोगिता, उनकी कार्यप्रणाली तथा पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में उनके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित अपर जिला सहकारी अधिकारियों एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों से आह्वान किया कि वे सहकारी समितियों के माध्यम से नैनो उर्वरकों की उपलब्धता एवं बिक्री को बढ़ावा दें तथा किसानों को इनके उपयोग के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों का व्यापक उपयोग आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान प्रयागराज मंडल के विभिन्न जनपदों से आए अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार एवं सहकारी समितियों के माध्यम से इनके व्यवसाय को सुदृढ़ बनाने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस अवसर पर प्रयागराज जनपद से सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता)  साधना सिंह, कौशाम्बी जनपद से  श्याम लाल मौर्य तथा प्रतापगढ़ जनपद से  उमाकांत कुशवाहा सहित अन्य अधिकारियों ने नैनो उर्वरकों के उपयोग, किसानों में जागरूकता तथा सहकारी समितियों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में उपस्थित अपर जिला सहकारी अधिकारियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने इफको के नैनो उर्वरकों से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका समाधान डॉ. डी.के. सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, इफको प्रयागराज मंडल द्वारा विस्तारपूर्वक एवं सरल भाषा में किया गया। उन्होंने नैनो उर्वरकों की उपयोग विधि, किसानों को होने वाले लाभ, वैज्ञानिक तथ्यों तथा विपणन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कॉर्डेट फूलपुर , इफको के प्रधानाचार्य डॉ. विवेक दीक्षित ने संस्थान की प्रशिक्षण व्यवस्था, अनुसंधान गतिविधियों तथा कृषि क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के समापन पर सभी अधिकारियों ने कॉर्डेट परिसर का भ्रमण किया गया । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के समापन पर सभी अधिकारियों ने इफको फूलपुर स्थित नैनो उर्वरक संयंत्र का भ्रमण किया तथा नैनो उर्वरकों के निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अधिकारियों ने यह जाना कि नैनो उर्वरकों का निर्माण किस प्रकार आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जाता है। साथ ही उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग एवं संयंत्र की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस दौरान अधिकारियों ने संयंत्र में अपनाई जा रही अत्याधुनिक तकनीकों की सराहना की तथा इसे भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में इफको प्रयागराज के क्षेत्र प्रतिनिधि  प्रतीक चौबे द्वारा सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184063/organization-of-cooperative-training-program-on-nano-fertilizers-in-iffco</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 20:36:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बरेली उप कृषि निदेशक (शोध) संभागीय कृषि परीक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र, बिलवा में हुआ आयोजित </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>यह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक(शोध) पवन कुमार प्रजापति  एवं विशिष्ट अथिति डॉ नरेन्द्र प्रताप (वानस्पतिविद) तथा  कार्यक्रम का शुभारंभ  कार्तिक सिंह क्षेत्र अधिकारी इफको बरेली द्वारा  उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में इफको के नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी) की प्रयोग विधि, कार्यप्रणाली एवं कृषि में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने *संभागीय कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र, बिलवा फार्म पर किए जा रहे नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी के प्रदर्शन के संदर्भ में जानकारी देते हुए।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182875/bareilly-deputy-agriculture-director-research-divisional-agricultural-testing-and-demonstration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1.---------------------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>यह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक(शोध) पवन कुमार प्रजापति  एवं विशिष्ट अथिति डॉ नरेन्द्र प्रताप (वानस्पतिविद) तथा  कार्यक्रम का शुभारंभ  कार्तिक सिंह क्षेत्र अधिकारी इफको बरेली द्वारा  उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में इफको के नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी) की प्रयोग विधि, कार्यप्रणाली एवं कृषि में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने *संभागीय कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र, बिलवा फार्म पर किए जा रहे नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी के प्रदर्शन के संदर्भ में जानकारी देते हुए। उनके उद्देश्यों से कर्मचारियों को अवगत कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि पवन कुमार प्रजापति  ने अपने संबोधन में सभी कर्मचारियों से इफको द्वारा संचालित नैनो उर्वरक प्रयोगों को सफल बनाने का आह्वान किया ।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग एवं उनके कृषि उत्पादन में योगदान पर विस्तृत चर्चा की।इस कार्यक्रम में बीज परीक्षण प्रभारी  कृतज्ञ गंगवार , परीक्षण प्रभारी संजीव कुमार , फार्म अधीक्षक' हेमंत गंगवार जैव उर्वरक प्रभारी विकास कुमार  कुमार सहित सभी कर्मचारी उपस्थित रहें ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिलाया विकसित कृषि का संकल्प।।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0182-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, जैविक खाद के उपयोग, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती से मिलने वाले लाभों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल, विधायकगण, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, महापौर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेत बचाओ अभियान–2026: प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण एवं पोषण सुरक्षा पर किसानों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181012/farm-save-campaign-%E2%80%93-2026-farmers-made-aware-on-natural"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0058-(45).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम, बीटीएम तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
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<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल ने किसानों से मिट्टी एवं जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। संयुक्त कृषि निदेशक श्रीराम बचन राम ने मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने तथा विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने पर बल दिया। उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य ने पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की, जबकि अमित शुक्ला ने युवाओं को कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वैज्ञानिक डॉ. वी. बी. सिंह ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, मृदा परीक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन एवं जल संरक्षण** की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अंजली वर्मा ने पोषण वाटिका, श्री अन्न, संतुलित आहार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा भोजन में तेल, नमक एवं चीनी की मात्रा कम करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ परिवार एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया | कार्यक्रम के दौरान किसानों को “मिट्टी बचाओ–खेत बचाओ, प्राकृतिक खेती अपनाओ, जल बचाओ–भविष्य बचाओ तथा स्वस्थ भोजन–स्वस्थ जीवन” का संदेश दिया गया।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शिविर के पांचवें दिन जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान चला कर ग्रामीणों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित खेती अपनाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। यह कार्यक्रम बलराम महाविद्यालय के प्रबंधिका श्रीमती उमा सिंह के निर्देशन में संचालक पूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके कार्यक्रमाधिकारी गौरव वर्मा एसोसिएट डायरेक्टर शाश्वत मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर शालिनी श्रीवास्त प्राचार्य डॉ अरुण कुमार सिंह डॉ अशोक उत्तम डॉ0 वी0 पी0 सिंह, डॉ अजय सिंह, संध्या पाण्डेय, आशीष पाण्डेय, बृजेश कुमार और ग्रामीण उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:56:25 +0530</pubDate>
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