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                <title>environmental crisis - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>environmental crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आज का मॉनसून, कल का इतिहास नहीं — भविष्य का फैसला है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी पहाड़ों से टूटते मलबे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी एक रात की बारिश में ढह गए घरों की खामोशी में। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून भी ऐसा ही एक मौन संदेश था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनसुना करना आने वाले कल से आंखें मूंदना होगा। जून में सामान्य से लगभग</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी ने खेतों की उम्मीदें सुखा दीं। एल नीनो के प्रभाव में किसान आसमान निहारते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बादल बेरुख़ रहे। फिर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183626/todays-monsoon-is-not-yesterdays-history-%E2%80%93-it-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी पहाड़ों से टूटते मलबे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी एक रात की बारिश में ढह गए घरों की खामोशी में। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून भी ऐसा ही एक मौन संदेश था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनसुना करना आने वाले कल से आंखें मूंदना होगा। जून में सामान्य से लगभग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी ने खेतों की उम्मीदें सुखा दीं। एल नीनो के प्रभाव में किसान आसमान निहारते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बादल बेरुख़ रहे। फिर जुलाई ने अचानक करवट बदली। मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायनाड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रत्नागिरी सहित कई क्षेत्रों में कुछ दिनों की मूसलाधार बारिश ने साबित कर दिया कि अब खतरा बारिश के कम या अधिक होने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके बेकाबू और असंतुलित स्वरूप में है। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून इस सच्चाई की गवाही बन गया कि जलवायु परिवर्तन ने मौसम का मिज़ाज बदल दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह बदलाव आकस्मिक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विज्ञान की वर्षों पुरानी चेतावनी का साकार रूप है। वैज्ञानिकों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्म होती पृथ्वी का वातावरण पहले से अधिक नमी समेट रहा है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का बढ़ता तापमान इसे ऊर्जा दे रहा है। नतीजा यह है कि बादल अब ठहरकर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटकर बरसते हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुलाई के शुरुआती दिनों में मुंबई (सांताक्रुज स्टेशन) में </span>600–900 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जुलाई के पूरे महीने के औसत का बड़ा हिस्सा थी। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायनाड में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दो दिनों की मूसलाधार बारिश ने टनल निर्माण स्थल पर मिट्टी का पहाड़ ढहा दिया। इस हादसे में कई मजदूरों की जान गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लापता रहे। यह महज़ हादसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलते जलवायु दौर की भयावह तस्वीर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ कम वर्षा वाला मौसम भी विनाश की इबारत लिख सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने केवल शहरों को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी विकास-दृष्टि को भी कठघरे में खड़ा कर दिया। कंक्रीट के फैलते जंगलों ने पानी के प्राकृतिक रास्ते निगल लिए। नतीजा था—मुंबई के मानखुर्द में चॉल ढह गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पालघर में बाढ़ दस से अधिक जिंदगियां बहा ले गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ उखड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दीवारें गिरीं और शहर दिनों तक थम गए। यह तबाही सिर्फ आसमान से बरसे पानी की नहीं थी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जर्जर ड्रेनेज व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिक्लेम्ड भूमि पर अनियोजित निर्माण और प्रकृति की कीमत पर खड़ा विकास भी इसके भागीदार थे। जलवायु विशेषज्ञ वर्षों से चेताते रहे हैं कि मध्य भारत में </span>1950 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद अत्यधिक वर्षा की घटनाएं लगभग तीन गुना बढ़ चुकी हैं। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने उस चेतावनी को आंकड़ों से उठाकर सड़कों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस्तियों और ज़िंदगियों पर लिख दिया। अब बारिश मौसम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ घंटों में पूरे महीने का संतुलन और शहरों की व्यवस्था बहा ले जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने एक भ्रम तोड़ दिया—सूखा और बाढ़ अब विरोधी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक ही जलवायु संकट के दो रूप हैं। एल नीनो ने पहले बारिश रोकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर गर्म वातावरण ने संचित नमी उलीच दी। सूखी धरती पानी सोख न सकी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वही जल मैदानों में बाढ़ और पहाड़ों में भूस्खलन बन गया। बदलता मौसम चेतावनी है कि अब खतरा वर्षा की मात्रा से अधिक उसकी तीव्रता और असंतुलन में है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक तापमान </span>1.5-2 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस बढ़ने पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कई क्षेत्रों में आर्द्र गर्मी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीर संकट बन सकती है। यानी आने वाले समय में चुनौती केवल सूखे और बाढ़ की नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बारिश के बाद की दमघोंटू उमस जनस्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रम क्षमता और अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने एक नया शब्द सिखाया है—</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वैरिएबिलिटी</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। अब बारिश का आकलन उसकी कुल मात्रा से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवधि और तीव्रता से होगा। कई दिनों का सूखा और फिर एक-दो दिनों में पूरे महीने जितनी वर्षा—यही नया पैटर्न खेती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण और शहरों की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। किसानों को कम अवधि वाली फसलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु-अनुकूल बीज और सटीक मौसम पूर्वानुमान अपनाने होंगे। शहरों को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्पॉन्ज सिटी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल विकसित करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि वर्षा जल सड़कों पर बहने के बजाय जमीन में समा सके। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां वैज्ञानिक आकलन और कठोर मानकों से संचालित हों</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि बदलते मौसम में यही विकास की सबसे विश्वसनीय बुनियाद है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी भूल यह होगी कि जलवायु संकट का समाधान केवल राष्ट्रीय योजनाओं में खोजा जाए। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून बताता है कि पिछले दो वर्षों की अच्छी वर्षा से अधिकांश जलाशय भरे होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर भारी तबाही हुई। साफ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े बांध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घोषणाएं और राहत पैकेज तब तक पर्याप्त नहीं होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक हर शहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांव और पहाड़ी क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार न हो। वेटलैंड्स का संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वनों की अंधाधुंध कटाई पर रोक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नदियों और प्राकृतिक जलमार्गों का पुनर्जीवन तथा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सस्टेनेबल डेवलपमेंट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को विकास की आधारशिला बनाना अब विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन भविष्य की आशंका नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान का यथार्थ है—और इसकी सबसे बड़ी कीमत आने वाली पीढ़ियां नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज का समाज चुका रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर आपदा केवल नुकसान नहीं छोड़ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह हमारी प्राथमिकताओं का भी परीक्षण करती है। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून इसी कसौटी पर हमें परख गया। उसने स्पष्ट कर दिया कि प्रकृति की सीमाओं की अनदेखी कर किया गया विकास टिकाऊ नहीं हो सकता। अब समय राहत और मुआवजे की घोषणाओं से आगे बढ़कर विकास की दिशा बदलने का है। इंफ्रास्ट्रक्चर को जलवायु-अनुकूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप और विकास को पर्यावरण का प्रतिद्वंद्वी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका सहभागी बनाना होगा। चेतावनी स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णय हमारे हाथ में है। यदि इस संकेत को भी अनसुना किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले मॉनसून केवल नई आपदाएं नहीं लाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारी विकास-यात्रा की नींव को भी कठघरे में खड़ा कर देंगे। यही </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून की सबसे बड़ी सीख है और यही हमारे समय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हर मिनट उजड़ते ग्यारह फुटबॉल मैदान जितने जंगल—मानव विकास या विनाश ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंगल और जमीन—प्रकृति के ये तीनों आधार स्तंभ समस्त जीव-जगत के जीवन की धुरी हैं। किंतु विडंबना यह है कि आधुनिक और शिक्षित मानव ने अपने तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में इन्हीं आधारों का निर्मम दोहन किया है। जंगलों की बलि देकर खड़ी की जा रही विकास यात्रा आज भी अनवरत जारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसके दुष्परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वनों के अंधाधुंध विनाश ने न केवल भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया को भीषण तापमान वृद्धि के संकट में धकेल दिया है। एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि हर मिनट लगभग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177782/forests-the-size-of-eleven-football-fields-getting-destroyed-every"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/bda2766099334b289bdd5c002811a16c42b9df191b1b13f64afedfe2c7b67eb7.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंगल और जमीन—प्रकृति के ये तीनों आधार स्तंभ समस्त जीव-जगत के जीवन की धुरी हैं। किंतु विडंबना यह है कि आधुनिक और शिक्षित मानव ने अपने तथाकथित विकास की अंधी दौड़ में इन्हीं आधारों का निर्मम दोहन किया है। जंगलों की बलि देकर खड़ी की जा रही विकास यात्रा आज भी अनवरत जारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसके दुष्परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वनों के अंधाधुंध विनाश ने न केवल भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया को भीषण तापमान वृद्धि के संकट में धकेल दिया है। एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि हर मिनट लगभग ग्यारह फुटबॉल मैदान के बराबर जंगल नष्ट किए जा रहे हैं। यह आंकड़ा भले ही अविश्वसनीय लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यही आज की कठोर सच्चाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेरीलैंड विश्वविद्यालय की ‘ग्लोबल लैंड एनालिसिस एंड डिस्कवरी लैब’ की रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिवर्ष लगभग </span>43 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार वर्ग किलोमीटर जंगल समाप्त हो जाते हैं—जो कि डेनमार्क जैसे देश के बराबर क्षेत्रफल है। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी मानवता के लिए चेतावनी भी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सन् </span>2021 <span lang="hi" xml:lang="hi">में आयोजित जलवायु शिखर सम्मेलन में </span>100 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक देशों ने वनों की कटाई पर रोक लगाने का संकल्प लिया था। दुर्भाग्यवश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकल्प को गिने-चुने देशों ने ही गंभीरता से निभाया। परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है।आज बढ़ता तापमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असमय बाढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूस्खलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पेयजल संकट ये सभी प्रकृति के असंतुलन के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। हिमालयी क्षेत्रों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ कभी पंखे की आवश्यकता नहीं पड़ती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज वहाँ एयर कंडीशनर की मांग बढ़ रही है। यह परिवर्तन केवल जीवनशैली का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जलवायु संकट का स्पष्ट संकेत है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए वनों का संरक्षण एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हर वर्ष बढ़ती गर्मी और प्राकृतिक आपदाएँ इस संकट को और गहरा कर रही हैं। ऐसे में आवश्यक है कि केंद्र और राज्य सरकारें कठोर कानून बनाएं और हर नागरिक की जिम्मेदारी तय करें।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि वनों का विनाश इसी गति से जारी रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले दो दशकों में मानव अस्तित्व पर गंभीर संकट मंडरा सकता है। अतः समय की मांग है कि हम सभी वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाएं और ईमानदारी से जंगलों के पुनर्निर्माण में योगदान दें।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है।</span></strong></p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 17:00:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सूखी नहरे सूखे तालाब पानी की तलाश में भटक रहे बेजुबान जानवर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177402/dry-canals-dry-ponds-dumb-animals-wandering-in-search-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर आ रहे हैं पानी के लिए तड़प रहे बेजुबान सूखी नहर तालाब जिम्मेदार बेपरवाह जिले के हरैया तहसील क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पशु पक्षियों की हालत गंभीर जंगली जानवर गांव की तरफ पलायन कर रहे हैं जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान होने की आशंका है नहर तालाब और पोखरे पूरी तरह सूख चुके  जिससे पानी के अभाव में जानवर दर-दर भटकने को मजबूर ग्रामीण क्षेत्रों में इनका आवागमन हो गया है पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे जानवर ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा रहे हैं क्षेत्र में जलस्रोतों की हालत बद से बदतर हो चुकी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित. धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कागजों में लाखों रुपए का जलाशय भराव के लिए पैसा खर्च हो जा रहा है लेकिन स्थित सुखी तालाब नहरे बयां कर रही है कि भ्रष्टाचार करके जल स्रोतों का भंडारण नहीं हो पा रहा है नदिया सुख रही है नदियों की सफाई नहीं की जा रही जिसके कारण पानी नहीं रख रहा हैजमीनी स्तर पर राहत के कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं पानी की तलाश में पशु-पक्षी गांव और सड़कों की ओर भटक रहे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पानी की व्यवस्था कराने और सूखे जलस्रोतों को भरवाने की मांग की व्यवस्था करनी चाहिए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थिति भयावह हो सकती है बड़ी संख्या में बेजुबान जानवरों की जान जा सकती हैसवाल यह है कि आखिर कब जागेगा जिला प्रशासन बेजुबानों को कब जल का व्यवस्था कराएगी सरकार केवल कागजों में तालाबों में पानी भरा जा रहा है नहरे में पानी सप्लाई हो रही है लेकिन सब सुखी नजर आ रही है कहीं पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है जिला प्रशासन आदेश देकर के अपने एक ऑफिस में बैठे रहते हैं जंगली जानवर और बेजुबान पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:45:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तपता मार्च, सूखता पानी: क्या हम असली समस्या से भाग रहे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span>  35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span>  38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173411/hot-march-drying-water-are-we-running-away-from-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/drought_cape_town_932983790.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span> 35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span> 38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या में समा रही है। जो मार्च कभी हल्की धूप और सुकून का महीना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तपिश और सूखेपन का अनुभव बन गया है। यह बदलाव अचानक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लंबे समय की अनदेखी का नतीजा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम ‘नया सामान्य’ मानने लगे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च के शुरुआती दिनों में ही बढ़ती गर्मी ने मौसम की पुरानी धारणाएं तोड़ दी हैं। जो तपिश कभी अप्रैल–मई तक सीमित थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब पहले ही सप्ताह में रिकॉर्ड बना रही है। यह सिर्फ समय का बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन का संकेत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया गया। चिंताजनक यह है कि पहाड़ी क्षेत्र भी अब इससे अछूते नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ है कि जलवायु परिवर्तन सीमाएं पार कर चुका है। यह फैलता संकट हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है और हमें सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या हमने प्रकृति से अपना संतुलन खो दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट भी तेजी से गहराता जा रहा है। बड़े जलाशयों का घटता स्तर किसी सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गंभीर असंतुलन का संकेत है। मार्च में ही जब पानी आधा रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले महीनों का संकट साफ दिखाई देता है। इसका असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों में किसान फसलों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। नदियां कमजोर पड़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूजल नीचे जा रहा है और पानी की हर बूंद की अहमियत बढ़ती जा रही है। यह हालात स्पष्ट करते हैं कि जलवायु परिवर्तन केवल गर्मी नहीं बढ़ा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारे जल संसाधनों को भी तेजी से खत्म कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तापमान और प्रदूषण का साथ इस संकट को और खतरनाक बना रहा है—एक ऐसा दोहरा प्रहार जो शरीर और पर्यावरण दोनों को प्रभावित कर रहा है। गर्मी बढ़ते ही हवा में मौजूद जहरीले कण और सक्रिय हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। दिल्ली और आसपास की खराब होती हवा यह दिखा रही है कि समस्या सिर्फ गर्मी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसी हवा की है जिस पर जीवन निर्भर है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों और बीमारों पर पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ संकेत है कि यह अब पर्यावरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे हालात में वर्ल्ड बैंक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट (</span>300 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिलियन)</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की उम्मीद जगाता है। साफ हवा के लिए मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि और उद्योग सुधार सकारात्मक कदम हैं। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या ये पर्याप्त हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या हम सिर्फ ऊपर-ऊपर से समस्या को संभाल रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉनिटरिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और कृषि सुधार जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जब तक ये व्यापक और दीर्घकालिक नीति से नहीं जुड़ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक इनका असर सीमित ही रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक चुनौती उन जड़ों पर प्रहार करने की है जहां से यह संकट पैदा हो रहा है। तेज औद्योगिकीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवाश्म ईंधनों पर बढ़ती निर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों की कटाई और अव्यवस्थित शहरी विस्तार ने प्राकृतिक संतुलन को गहराई से बिगाड़ दिया है। फिर भी हम प्रदूषण को मौसमी मानकर टाल देते हैं और गर्मी को अस्थायी असुविधा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने साफ कर दिया है कि यह सोच अब खतरे से खाली नहीं। जब असामान्यता ही सामान्य लगने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका मतलब है कि हमने समस्या को स्वीकार तो कर लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उससे लड़ने की तैयारी अब भी अधूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बदलते दौर का सबसे भारी असर आम लोगों की जिंदगी पर दिख रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां रोजमर्रा अब सहज नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष बन गई है। एक साधारण परिवार के लिए पानी बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संभालना और स्वास्थ्य सुरक्षित रखना लगातार चुनौती है। बच्चों का बाहर खेलना घट गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा है और कामकाजी लोगों के लिए काम की गति बनाए रखना कठिन हो रहा है। यह सिर्फ पर्यावरणीय संकट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता को भी गहरा कर रहा है—जहां साधन वाले खुद को बचा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कमजोर वर्ग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे अहम सवाल यही है कि क्या हम सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार चेतावनियां सामने हैं—बढ़ता तापमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक रिपोर्टें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसम के संकेत—सब एक ही खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके बावजूद हमारी प्रतिक्रिया अक्सर सतही ही रहती है। हम तात्कालिक राहत के उपाय अपनाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ठंडक के लिए एसी या पानी का अस्थायी इंतजाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने से बचते हैं। यह सोच हमें कुछ समय जरूर दे सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर समस्या का हल नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जरूरत है कि इस संकट को पूरी गंभीरता से स्वीकार कर ठोस बदलाव की दिशा में आगे बढ़ा जाए। स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संरक्षण को प्राथमिकता देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित क्षेत्र बढ़ाना और नीतियों में सख्ती लाना अब विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिवार्यता बन चुके हैं। साथ ही हर व्यक्ति की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर अब भी हम नहीं चेते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा जाएगा। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की यह तपिश केवल एक मौसम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य का संकेत है—अब तय हमें करना है कि हम इसे चेतावनी समझते हैं या अपनी नियति।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:39:18 +0530</pubDate>
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