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                <title>public health crisis - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>public health crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>कोविड के बाद 3 वर्षों में 6 करोड़ मधुमेह रोगी बढ़े: भारत कैसे बन रहा 'डायबिटीज कैपिटल'</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p style="text-align:justify;">कोविड-19 खत्म हुए 3 साल हो गए, लेकिन उसकी एक चुप छाप अब भारत की सेहत पर भारी पड़ रही है। ICMR और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट बताती हैं कि 2021 से 2024 के बीच भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या में 6 करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ है। 2021मे भारत में डायबिटीज के मरीज करीब 7.7 करोड़ थे। 2024 में ये संख्या बढ़कर 8.98 करोड़ पहुंच गई। यानी 1.28 करोड़ का इजाफा सिर्फ 3 साल में। 2026 तक ICMR के मुताबिक देश में अब 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। 13 करोड़ लोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181550/6-crore-diabetic-patients-increased-in-3-years-after-covid"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p style="text-align:justify;">कोविड-19 खत्म हुए 3 साल हो गए, लेकिन उसकी एक चुप छाप अब भारत की सेहत पर भारी पड़ रही है। ICMR और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट बताती हैं कि 2021 से 2024 के बीच भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या में 6 करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ है। 2021मे भारत में डायबिटीज के मरीज करीब 7.7 करोड़ थे। 2024 में ये संख्या बढ़कर 8.98 करोड़ पहुंच गई। यानी 1.28 करोड़ का इजाफा सिर्फ 3 साल में। 2026 तक ICMR के मुताबिक देश में अब 10 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। 13 करोड़ लोग ऐसी स्थिति में हैं जहां अगर लाइफस्टाइल न बदली तो अगले 5-10 साल में वो डायबिटीज के मरीज बन जाएंगे। IDF की 'डायबिटीज एटलस 2025' कहती है कि भारत में 2050 तक ये संख्या 15.67 करोड़ तक पहुंच सकती है। कोविड का क्या रोल रहा? डॉक्टरों का मानना है कि महामारी ने डायबिटीज की रफ्तार को 5 साल आगे बढ़ा दिया। लाइफस्टाइल ठप- लॉकडाउन में शारीरिक गतिविधि कम हुई, स्क्रीन टाइम और बैठे रहने का समय बढ़ा। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की डॉ. अंजना कहती हैं कि कोविड के बाद फिजिकल इनएक्टिविटी डायबिटीज का बड़ा रिस्क फैक्टर बन गई। स्ट्रेस और अनियमित नींद काम का दबाव, अनिश्चितता और नींद का पैटर्न बिगड़ने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा।<br />डाइट में बदलाव- घर पर बैठे-बैठे प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय और फास्ट फूड की खपत बढ़ी। पोस्ट-कोविड इफेक्ट-  कई स्टडी में दिखा कि कोविड से उबरने वाले लोगों में पहले साल में डायबिटीज का खतरा 40% तक बढ़ गया। वायरस अग्न्याशय पर असर डाल सकता है। कौन सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है? शहर या गांव -  रांची, जमशेदपुर, धनबाद जैसे शहरों में 13-14% लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में ये 3-5% है। युवा और बच्चे-  अब ये बीमारी सिर्फ 45+ की नहीं रही। दिल्ली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों में भी मौतें दर्ज हुई हैं।<br />           आदिवासी इलाके-  झारखंड जैसे राज्यों में आदिवासी समुदाय में भी डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह प्रोसेस्ड फूड, मोबाइल-स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल और बदलती जीवनशैली है। <br />मौतें भी बढ़ीं- दिल्ली सरकार के MCCD डेटा के मुताबिक 2024 में डायबिटीज से 2,459 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में ये 1,823 थी। अस्पतालों में डायबिटीज से मौतें 544 बढ़ीं। राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में हर 9 सेकंड में एक मौत डायबिटीज की वजह से हुई। क्यों नहीं रुक रहा ये सिलसिला?<br />डॉक्टर 4 वजहें बताते हैं-  पश्चिमी डाइट तले-भुने, बेकरी प्रोडक्ट, मीठे ड्रिंक्स और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट का बढ़ता चलन। मोटापा देश में 60 करोड़ लोग ओवरवेट या ओबेस हैं। मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है।<br />जागरूकता की कमी- ज्यादातर लोग तब जांच कराते हैं जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। अनियंत्रित दवाएं-  दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के ली जा रही हैं, जिससे किडनी और पैंक्रियाज को नुकसान पहुंच रहा है। आगे का रास्ता-  स्क्रीनिंग बढ़ाओ-  30 साल से ऊपर हर व्यक्ति को साल में एक बार शुगर टेस्ट कराना चाहिए। लाइफस्टाइल रिवर्स करो- रोज 30 मिनट चलना, शुगर-प्रोसेस्ड फूड कम करना, नींद 7-8 घंटे। स्कूल लेवल पर बदलाव-  बच्चों में फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक पर रोक जरूरी है। सरकारी स्तर पर- NCD स्क्रीनिंग प्रोग्राम को ग्रामीण इलाकों तक ले जाना होगा। कोविड ने सिर्फ फेफड़े ही नहीं, मेटाबॉलिज्म भी खराब किया। 6 करोड़ नए मरीजों का मतलब है कि हर 2 सेकंड में एक भारतीय डायबिटीज की चपेट में आ रहा है। अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक भारत में हर 7वां व्यक्ति डायबिटिक होगा। ये सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, देश की अर्थव्यवस्था का भी संकट है, क्योंकि डायबिटीज दिल, किडनी और आंखों की बीमारियों का सीधा रास्ता है।  वैज्ञानिक तौर पर भले ही पुष्टि नहीं हुई हो, मगर कोविड काल के बाद लोगों में बीमारियां बढ़ने का रुझान देखा गया है। मधुमेह को लेकर कोविड काल के बाद आए राष्ट्रीय परिवार<br />कल्याण सर्वेक्षण -6 के आंकड़े भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:16:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तपता मार्च, सूखता पानी: क्या हम असली समस्या से भाग रहे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span>  35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span>  38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173411/hot-march-drying-water-are-we-running-away-from-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/drought_cape_town_932983790.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span> 35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span> 38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या में समा रही है। जो मार्च कभी हल्की धूप और सुकून का महीना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तपिश और सूखेपन का अनुभव बन गया है। यह बदलाव अचानक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लंबे समय की अनदेखी का नतीजा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम ‘नया सामान्य’ मानने लगे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च के शुरुआती दिनों में ही बढ़ती गर्मी ने मौसम की पुरानी धारणाएं तोड़ दी हैं। जो तपिश कभी अप्रैल–मई तक सीमित थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब पहले ही सप्ताह में रिकॉर्ड बना रही है। यह सिर्फ समय का बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन का संकेत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया गया। चिंताजनक यह है कि पहाड़ी क्षेत्र भी अब इससे अछूते नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ है कि जलवायु परिवर्तन सीमाएं पार कर चुका है। यह फैलता संकट हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है और हमें सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या हमने प्रकृति से अपना संतुलन खो दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट भी तेजी से गहराता जा रहा है। बड़े जलाशयों का घटता स्तर किसी सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गंभीर असंतुलन का संकेत है। मार्च में ही जब पानी आधा रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले महीनों का संकट साफ दिखाई देता है। इसका असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों में किसान फसलों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। नदियां कमजोर पड़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूजल नीचे जा रहा है और पानी की हर बूंद की अहमियत बढ़ती जा रही है। यह हालात स्पष्ट करते हैं कि जलवायु परिवर्तन केवल गर्मी नहीं बढ़ा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारे जल संसाधनों को भी तेजी से खत्म कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तापमान और प्रदूषण का साथ इस संकट को और खतरनाक बना रहा है—एक ऐसा दोहरा प्रहार जो शरीर और पर्यावरण दोनों को प्रभावित कर रहा है। गर्मी बढ़ते ही हवा में मौजूद जहरीले कण और सक्रिय हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। दिल्ली और आसपास की खराब होती हवा यह दिखा रही है कि समस्या सिर्फ गर्मी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसी हवा की है जिस पर जीवन निर्भर है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों और बीमारों पर पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ संकेत है कि यह अब पर्यावरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे हालात में वर्ल्ड बैंक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट (</span>300 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिलियन)</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की उम्मीद जगाता है। साफ हवा के लिए मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि और उद्योग सुधार सकारात्मक कदम हैं। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या ये पर्याप्त हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या हम सिर्फ ऊपर-ऊपर से समस्या को संभाल रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉनिटरिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और कृषि सुधार जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जब तक ये व्यापक और दीर्घकालिक नीति से नहीं जुड़ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक इनका असर सीमित ही रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक चुनौती उन जड़ों पर प्रहार करने की है जहां से यह संकट पैदा हो रहा है। तेज औद्योगिकीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवाश्म ईंधनों पर बढ़ती निर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों की कटाई और अव्यवस्थित शहरी विस्तार ने प्राकृतिक संतुलन को गहराई से बिगाड़ दिया है। फिर भी हम प्रदूषण को मौसमी मानकर टाल देते हैं और गर्मी को अस्थायी असुविधा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने साफ कर दिया है कि यह सोच अब खतरे से खाली नहीं। जब असामान्यता ही सामान्य लगने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका मतलब है कि हमने समस्या को स्वीकार तो कर लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उससे लड़ने की तैयारी अब भी अधूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बदलते दौर का सबसे भारी असर आम लोगों की जिंदगी पर दिख रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां रोजमर्रा अब सहज नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष बन गई है। एक साधारण परिवार के लिए पानी बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संभालना और स्वास्थ्य सुरक्षित रखना लगातार चुनौती है। बच्चों का बाहर खेलना घट गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा है और कामकाजी लोगों के लिए काम की गति बनाए रखना कठिन हो रहा है। यह सिर्फ पर्यावरणीय संकट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता को भी गहरा कर रहा है—जहां साधन वाले खुद को बचा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कमजोर वर्ग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे अहम सवाल यही है कि क्या हम सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार चेतावनियां सामने हैं—बढ़ता तापमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक रिपोर्टें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसम के संकेत—सब एक ही खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके बावजूद हमारी प्रतिक्रिया अक्सर सतही ही रहती है। हम तात्कालिक राहत के उपाय अपनाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ठंडक के लिए एसी या पानी का अस्थायी इंतजाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने से बचते हैं। यह सोच हमें कुछ समय जरूर दे सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर समस्या का हल नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जरूरत है कि इस संकट को पूरी गंभीरता से स्वीकार कर ठोस बदलाव की दिशा में आगे बढ़ा जाए। स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संरक्षण को प्राथमिकता देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित क्षेत्र बढ़ाना और नीतियों में सख्ती लाना अब विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिवार्यता बन चुके हैं। साथ ही हर व्यक्ति की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर अब भी हम नहीं चेते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा जाएगा। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की यह तपिश केवल एक मौसम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य का संकेत है—अब तय हमें करना है कि हम इसे चेतावनी समझते हैं या अपनी नियति।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:39:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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