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                <title>आज की खबर - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>आज की खबर RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बिस्कोहर में पूर्व मंत्री की अगुवाई में निकली तिरंगा यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बिस्कोहर(सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी  की ओर से गुरुवार को बिस्कोहर मंडल में 15 अगस्त के उपलक्ष्य में एक विशाल तिरंगा  यात्रा  निकाली गई। पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा की शुरुआत सुबह  9:30 बजे कस्बे के ऐतिहासिक परशुराम तिराहा से शुरू हुई।इसके बाद देशभक्ति के गगनभेदी नारों के बीच यात्रा मंगल बाजार रोड, मुख्य कस्बा, चौक रोड व उत्तर यादव डीह मार्ग से होते हुए दोपहर 11:15 बजे अटल नगर बेलवा स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंचकर संपन्न हुई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस भव्य राष्ट्रीय उत्सव में नगर अध्यक्ष अजय गुप्ता, अधिशासी अधिकारी अखिलेश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185209/tricolor-march-under-the-leadership-of-former-minister-in-biskohar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1786630682471.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बिस्कोहर(सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी  की ओर से गुरुवार को बिस्कोहर मंडल में 15 अगस्त के उपलक्ष्य में एक विशाल तिरंगा  यात्रा  निकाली गई। पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा की शुरुआत सुबह  9:30 बजे कस्बे के ऐतिहासिक परशुराम तिराहा से शुरू हुई।इसके बाद देशभक्ति के गगनभेदी नारों के बीच यात्रा मंगल बाजार रोड, मुख्य कस्बा, चौक रोड व उत्तर यादव डीह मार्ग से होते हुए दोपहर 11:15 बजे अटल नगर बेलवा स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंचकर संपन्न हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस भव्य राष्ट्रीय उत्सव में नगर अध्यक्ष अजय गुप्ता, अधिशासी अधिकारी अखिलेश दीक्षित, फतेहबहादुर सिंह उर्फ पप्पू सिंह, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, मण्डल अध्यक्ष कुंवर मिश्रा, जय प्रकाश पाण्डेय, बलराम मिश्रा,अनुपम पाण्डेय निवर्तमान प्रधान पतिनिधि,राम नरेश पासवान, नृपेंद्र सिंह, हर्षित श्रीवास्तव, अमन चौरसिया, कुटूर पाण्डेय, रवि सिंह, लवकुश शुक्ला, अमित पाण्डेय, कन्हैया वरुण, मनीराम प्रजापति, बलराम मिश्रा अरविन्द गुप्ता,पिंकू मोदनवाल, राजमणि दुबे, लालू नाई, सूर्यमणि चौधरी, मोनू गुप्ता,सहित पूर्व माध्यमिक विद्यालय व बीआईसीटी के शिक्षक और बच्चे भारी संख्या में शामिल रहे। सुरक्षा के लिए थाना प्रभारी हरेकृष्ण उपाध्याय त्रिलोकपुर , चौकी बिस्कोहर अमित कुमार शाही,पुलिस टीम पूरी यात्रा में मुस्तैद रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 20:28:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तपता मार्च, सूखता पानी: क्या हम असली समस्या से भाग रहे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span>  35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span>  38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173411/hot-march-drying-water-are-we-running-away-from-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/drought_cape_town_932983790.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह की हवा में अब वसंत की ठंडक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्मी की तीखी आहट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही हाल कई शहरों में फैल चुका है। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिल्ली में पारा</span> 35.7°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंचा – पहले सप्ताह का </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का सबसे गर्म मार्च – जबकि गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदर्भ और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान</span> 38-42°C <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गया। लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भोपाल, इंदौर जैसे शहर भी इस असामान्य गर्मी की चपेट में हैं। यह क्षणिक बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती जलवायु की स्पष्ट तस्वीर है जो पूरे देश की दिनचर्या में समा रही है। जो मार्च कभी हल्की धूप और सुकून का महीना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तपिश और सूखेपन का अनुभव बन गया है। यह बदलाव अचानक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लंबे समय की अनदेखी का नतीजा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम ‘नया सामान्य’ मानने लगे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च के शुरुआती दिनों में ही बढ़ती गर्मी ने मौसम की पुरानी धारणाएं तोड़ दी हैं। जो तपिश कभी अप्रैल–मई तक सीमित थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब पहले ही सप्ताह में रिकॉर्ड बना रही है। यह सिर्फ समय का बदलाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन का संकेत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया गया। चिंताजनक यह है कि पहाड़ी क्षेत्र भी अब इससे अछूते नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ है कि जलवायु परिवर्तन सीमाएं पार कर चुका है। यह फैलता संकट हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है और हमें सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या हमने प्रकृति से अपना संतुलन खो दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बढ़ती गर्मी के साथ जल संकट भी तेजी से गहराता जा रहा है। बड़े जलाशयों का घटता स्तर किसी सामान्य मौसमी उतार-चढ़ाव का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गंभीर असंतुलन का संकेत है। मार्च में ही जब पानी आधा रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले महीनों का संकट साफ दिखाई देता है। इसका असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों में किसान फसलों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। नदियां कमजोर पड़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूजल नीचे जा रहा है और पानी की हर बूंद की अहमियत बढ़ती जा रही है। यह हालात स्पष्ट करते हैं कि जलवायु परिवर्तन केवल गर्मी नहीं बढ़ा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारे जल संसाधनों को भी तेजी से खत्म कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तापमान और प्रदूषण का साथ इस संकट को और खतरनाक बना रहा है—एक ऐसा दोहरा प्रहार जो शरीर और पर्यावरण दोनों को प्रभावित कर रहा है। गर्मी बढ़ते ही हवा में मौजूद जहरीले कण और सक्रिय हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। दिल्ली और आसपास की खराब होती हवा यह दिखा रही है कि समस्या सिर्फ गर्मी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसी हवा की है जिस पर जीवन निर्भर है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों और बीमारों पर पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ संकेत है कि यह अब पर्यावरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे हालात में वर्ल्ड बैंक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट (</span>300 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिलियन)</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की उम्मीद जगाता है। साफ हवा के लिए मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि और उद्योग सुधार सकारात्मक कदम हैं। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या ये पर्याप्त हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या हम सिर्फ ऊपर-ऊपर से समस्या को संभाल रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉनिटरिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और कृषि सुधार जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जब तक ये व्यापक और दीर्घकालिक नीति से नहीं जुड़ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक इनका असर सीमित ही रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक चुनौती उन जड़ों पर प्रहार करने की है जहां से यह संकट पैदा हो रहा है। तेज औद्योगिकीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवाश्म ईंधनों पर बढ़ती निर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों की कटाई और अव्यवस्थित शहरी विस्तार ने प्राकृतिक संतुलन को गहराई से बिगाड़ दिया है। फिर भी हम प्रदूषण को मौसमी मानकर टाल देते हैं और गर्मी को अस्थायी असुविधा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने साफ कर दिया है कि यह सोच अब खतरे से खाली नहीं। जब असामान्यता ही सामान्य लगने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका मतलब है कि हमने समस्या को स्वीकार तो कर लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उससे लड़ने की तैयारी अब भी अधूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस बदलते दौर का सबसे भारी असर आम लोगों की जिंदगी पर दिख रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां रोजमर्रा अब सहज नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष बन गई है। एक साधारण परिवार के लिए पानी बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संभालना और स्वास्थ्य सुरक्षित रखना लगातार चुनौती है। बच्चों का बाहर खेलना घट गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्गों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा है और कामकाजी लोगों के लिए काम की गति बनाए रखना कठिन हो रहा है। यह सिर्फ पर्यावरणीय संकट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता को भी गहरा कर रहा है—जहां साधन वाले खुद को बचा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कमजोर वर्ग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे अहम सवाल यही है कि क्या हम सब कुछ देखते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार चेतावनियां सामने हैं—बढ़ता तापमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक रिपोर्टें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसम के संकेत—सब एक ही खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके बावजूद हमारी प्रतिक्रिया अक्सर सतही ही रहती है। हम तात्कालिक राहत के उपाय अपनाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ठंडक के लिए एसी या पानी का अस्थायी इंतजाम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने से बचते हैं। यह सोच हमें कुछ समय जरूर दे सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर समस्या का हल नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जरूरत है कि इस संकट को पूरी गंभीरता से स्वीकार कर ठोस बदलाव की दिशा में आगे बढ़ा जाए। स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संरक्षण को प्राथमिकता देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित क्षेत्र बढ़ाना और नीतियों में सख्ती लाना अब विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनिवार्यता बन चुके हैं। साथ ही हर व्यक्ति की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर अब भी हम नहीं चेते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा जाएगा। मार्च </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की यह तपिश केवल एक मौसम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य का संकेत है—अब तय हमें करना है कि हम इसे चेतावनी समझते हैं या अपनी नियति।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:39:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेरह साल का इंतज़ार और एक कठिन विदाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव जीवन की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि कभी-कभी जीवन और मृत्यु के बीच की रेखा बहुत धुंधली हो जाती है। सामान्यतः हम जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जीवन को ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार माना जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियाँ ऐसी भी होती हैं जब जीवन केवल सांसों का चलना भर रह जाता है और उसमें चेतना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद और मानवीय गरिमा लगभग समाप्त हो जाती है। हाल के दिनों में चर्चा में आए हरीश राणा का मामला इसी विडंबना का एक अत्यंत मार्मिक उदाहरण बनकर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173408/thirteen-years-of-waiting-and-a-difficult-farewell"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images-(1)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव जीवन की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि कभी-कभी जीवन और मृत्यु के बीच की रेखा बहुत धुंधली हो जाती है। सामान्यतः हम जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जीवन को ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार माना जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियाँ ऐसी भी होती हैं जब जीवन केवल सांसों का चलना भर रह जाता है और उसमें चेतना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद और मानवीय गरिमा लगभग समाप्त हो जाती है। हाल के दिनों में चर्चा में आए हरीश राणा का मामला इसी विडंबना का एक अत्यंत मार्मिक उदाहरण बनकर सामने आया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह चिकित्सा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कानून</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं के जटिल प्रश्नों को सामने लाने वाली घटना है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरीश राणा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले एक युवा थे। वर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2013 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में एक दुर्घटना ने उनका जीवन पूरी तरह बदल दिया। बताया जाता है कि वह पढ़ाई के दौरान एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई और वह स्थायी कोमा जैसी अवस्था में चले गए। इस स्थिति को चिकित्सा भाषा में </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें व्यक्ति जीवित तो रहता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसके मस्तिष्क की चेतन क्रियाएँ लगभग समाप्त हो जाती हैं। वह न बोल सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न चल सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न अपने आसपास की दुनिया को समझ सकता है। हरीश पिछले तेरह वर्षों तक इसी अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूलते रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन वर्षों में उनका जीवन केवल चिकित्सा उपकरणों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दवाइयों और कृत्रिम पोषण के सहारे चल रहा था। परिवार ने उनकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी। माता-पिता ने अपने बेटे को जीवित रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। कई अस्पतालों में इलाज कराया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ली गई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। समय बीतने के साथ-साथ यह स्पष्ट होता गया कि अब उनके ठीक होने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है। डॉक्टरों ने भी यही राय दी कि मस्तिष्क को हुई गंभीर क्षति के कारण उनका सामान्य जीवन में लौटना लगभग असंभव है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी माता-पिता के लिए यह स्थिति अत्यंत पीड़ादायक होती है। एक ओर उनके सामने अपने बच्चे को खो देने का भय होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर उसे इस तरह निर्जीव अवस्था में वर्षों तक देखना भी कम कष्टदायक नहीं होता। हरीश राणा के परिवार ने लगभग तेरह वर्षों तक इस पीड़ा को सहा। उन्होंने अपने बेटे की सेवा में दिन-रात बिताए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंततः यह प्रश्न उनके सामने खड़ा हो गया कि क्या केवल सांस चलना ही जीवन कहलाता है। जब किसी व्यक्ति की चेतना समाप्त हो जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह अपने अस्तित्व का अनुभव भी न कर सके</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब क्या उसे कृत्रिम साधनों के सहारे जीवित रखना मानवीय है या अमानवीय</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">?</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन्हीं सवालों के साथ हरीश के परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि उनके बेटे को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">इच्छा मृत्यु</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अर्थात् पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी जाए। यह एक अत्यंत संवेदनशील और जटिल कानूनी विषय है। भारत में सक्रिय इच्छामृत्यु यानी किसी व्यक्ति को जानबूझकर दवा देकर मृत्यु देना कानूनन अवैध है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पैसिव यूथेनेशिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की अनुमति दी जा सकती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपचार या उपकरणों को हटाया जाता है और मरीज को प्राकृतिक रूप से मृत्यु आने दी जाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए हरीश राणा के जीवन-रक्षक उपचार को हटाने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और उसी प्रकार गरिमा के साथ मरने का अधिकार भी मानवीय अधिकारों का हिस्सा है। अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती किया जाए और चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया अपनाई जाए।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस निर्णय के बाद जब हरीश राणा को एम्स ले जाया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब परिवार के बीच अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। परिवार के लोग उनके पास खड़े होकर उन्हें विदा दे रहे थे। एक आध्यात्मिक कार्यकर्ता ने उनके पास खड़े होकर कहा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, “</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सबको माफ करते हुए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह शब्द केवल एक व्यक्ति के लिए विदाई नहीं थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन की गहरी सच्चाइयों को व्यक्त करने वाले शब्द थे। उस क्षण में वर्षों की पीड़ा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आशा और निराशा सब एक साथ दिखाई दे रहे थे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह घटना केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है। इसने पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दिया है। सवाल यह है कि क्या जीवन को हर कीमत पर बनाए रखना आवश्यक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर कभी-कभी व्यक्ति की गरिमा और पीड़ा को देखते हुए उसे प्राकृतिक मृत्यु की अनुमति देना अधिक मानवीय हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान का उद्देश्य जीवन को बचाना है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब जीवन केवल कृत्रिम उपकरणों पर निर्भर रह जाए और उसमें चेतना का कोई संकेत न हो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब डॉक्टरों और परिवार के सामने नैतिक दुविधा खड़ी हो जाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस मामले ने यह भी दिखाया कि चिकित्सा निर्णय केवल वैज्ञानिक नहीं होते</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनमें गहरी मानवीय संवेदनाएँ भी शामिल होती हैं। डॉक्टरों के लिए भी यह आसान निर्णय नहीं होता कि किसी मरीज के जीवन-रक्षक उपकरण हटाए जाएँ। इसलिए ऐसी स्थितियों में कई स्तरों पर चिकित्सकीय और कानूनी समीक्षा की जाती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निर्णय पूरी तरह मानवीय</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिक और कानूनी आधार पर लिया गया है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरीश राणा का मामला भारत में इच्छामृत्यु से जुड़ी बहस के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इससे पहले भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणा शानबाग</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मामलों ने इस विषय पर चर्चा को जन्म दिया था। लेकिन हरीश राणा का मामला इसलिए अलग है क्योंकि इसमें अदालत ने पहली बार स्पष्ट रूप से जीवन-रक्षक उपचार हटाने की अनुमति दी और इसे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">गरिमा के साथ मृत्यु</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">” </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के अधिकार से जोड़ा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस घटना का सबसे मार्मिक पक्ष यह है कि इसमें किसी प्रकार की सनसनी नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि केवल मानवीय पीड़ा और करुणा है। एक परिवार ने अपने बेटे को तेरह वर्षों तक संभालकर रखा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीद की कि शायद कोई चमत्कार हो जाए। लेकिन जब यह स्पष्ट हो गया कि वह कभी सामान्य जीवन में वापस नहीं लौट पाएगा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब उन्होंने भारी मन से उसे मुक्त करने का निर्णय लिया। यह निर्णय लेना किसी भी माता-पिता के लिए शायद दुनिया का सबसे कठिन निर्णय होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि वह अनिश्चित है। कभी-कभी जीवन हमें ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करता है जहाँ कोई भी विकल्प आसान नहीं होता। हरीश राणा की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन केवल सांसों का नाम नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि चेतना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुभव और सम्मान के साथ जीने का नाम है। जब ये सब समाप्त हो जाएँ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब शायद मृत्यु भी एक प्रकार की मुक्ति बन जाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस घटना ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। यह संदेश करुणा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदना और मानवीय गरिमा का है। यह हमें याद दिलाता है कि कानून और चिकित्सा के निर्णय केवल नियमों से नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मनुष्यता की गहराई से भी जुड़े होते हैं। हरीश राणा की कहानी अंततः हमें यही सिखाती है कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति प्रेम है</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और कभी-कभी प्रेम का सबसे कठिन रूप किसी प्रिय व्यक्ति को शांति से विदा कर देना भी होता है।</span> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:35:05 +0530</pubDate>
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