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                <title>विभागीय जांच - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>विभागीय जांच RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;">  काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181682/fake-payment-of-rs-5-crore-using-ai-photo-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781878450387.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;"> काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह आरोप लगाया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर लगभग 5 करोड़ सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया है। सरकार की मंशा के उलट बड़े पैमाने पर पैसे का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 2.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781878450406.jpg" alt="सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान" width="1080" height="556"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> निर्माण स्थल की कुल लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।  सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है। अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> फर्जी फोटो और AI का इस्तेमालः काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है।जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं।ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और</div><div style="text-align:justify;">अनुशासनात्मक कार्रवाई विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है। यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को पत्र भेज कर की गई है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format2">इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए जो टीम गठित की गई थी ।इसी मंडल के ही अधिकारी शामिल थे । जबकि शासनादेश है कि जिस मंडल का मामला होता है उस मंडल के अधिकारियों को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए। जिसे शासन ने संज्ञान में लेते हुए जांच टीम निरस्त कर दी और दूसरी जांच टीम गठित कर दी है। यह जांच टीम सिद्धार्थनगर कभी धमक सकती है।</blockquote></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आख़िरकार सीएमओ, डिप्टी सीएमओ व बाबू ने जांच के नाम पर कर दिया खेला</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनमानी ड्यूटी चल रही है लगभग 10% कर्मचारी सीएमओ के अंदर में नहीं आ रहे हैं कैसे होगा स्वास्थ्य विभाग का बेड़ा पार आख़िरकार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम, डिप्टी सीएमओ अशोक कुमार चौधरी व बाबू अभिषेक पाल ने बिना सूचना के डियूटी से गायब रहने वाले व निजी क्लीनिक चलाने वाले डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के मामले में जांच पड़ताल के नाम पर लेन देन करके मामले को रफा - दफा कर दिया है जो कि मामला उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री / उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निजी सचिव</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181639/ultimately-cmo-deputy-cmo-and-babu-played-with-the-name"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0106.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनमानी ड्यूटी चल रही है लगभग 10% कर्मचारी सीएमओ के अंदर में नहीं आ रहे हैं कैसे होगा स्वास्थ्य विभाग का बेड़ा पार आख़िरकार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम, डिप्टी सीएमओ अशोक कुमार चौधरी व बाबू अभिषेक पाल ने बिना सूचना के डियूटी से गायब रहने वाले व निजी क्लीनिक चलाने वाले डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के मामले में जांच पड़ताल के नाम पर लेन देन करके मामले को रफा - दफा कर दिया है जो कि मामला उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री / उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निजी सचिव के जानकारी में था जब स्वास्थ्य मंत्री के निजी सचिव के जानकारी में होने के बावजूद भी मामले में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों ने लीपापोती करके पूरा मामला खत्म कर दिया है तो आमजन के शिकायत पर कैसे जांच व कार्यवाही होगी ? इस प्रकार स्पष्ट है कि अब स्वास्थ्य विभाग में पीड़ितों को न्याय मिलना आसान नही रह गया है । सीएमओं डा० राजीव निगम *पैसा फेकों तमासा देखों* की नीति पर पूरी तरह कार्य कर रहे हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप को बता दे कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर पर तैनात डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता दिनांक - 20-04-2026 से लेकर दिनांक - 23-04-2026 को बिना किसी सूचना के डियूटी से गायब थे और डियूटी के दौरान घर पर निजी क्लीनिक पर इलाज कर रहे थे जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था । सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादुरपुर अधीक्षक डा० पवन वर्मा ने नोटिस जारी किया था और डेन्टल हाईजिनिस्ट ने अधीक्षक के नोटिस का जबाव ही नही दिया था बाद में अधीक्षक ने मजबूर होकर बिना सूचना के डियूटी से गायब रहने के मामले में वेतन कटौती करने का आदेश दिनांक - 28-04-2026 को दिया था और निजी क्लीनिक चलाने के मामले की जांच डिप्टी सीएमओ डा० ए० के ० चौधरी को मिली थी । डिप्टी सीएमओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच किया था और जांच के दौरान निजी क्लीनिक पर कार्य करते डेन्टल हाईजिनिस्ट मिले थे । जांच अधिकारी ने तत्काल निजी क्लीनिक को सीज किया था और भविष्य में पुनः संचालित न करने की चेतावनी दी थी । डिप्टी सीएमओ ने समस्त जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है लेकिन दो महीने से अधिक का समय बीतने के बाद भी मनमानी डियूटी करने वाले डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही नही हो पाई है । जांच रिपोर्ट प्रेषित होने के बाद भी डेन्टल हाईजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई न होने से डेन्टल हाईजिनिस्ट का मनोबल जबरदस्त बढ़ा है जिससे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है यदि ऐसे ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया रहा तो स्वास्थ्य विभाग में कभी भी भ्रष्टाचार खत्म नही होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> इस संम्बध में डिप्टी सीएमओ डा० अशोक चौधरी ने फोन के माध्यम से बताया है हमने जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दिया है और कार्यवाही सीएमओ के स्तर से होगी कह कर मामले से पल्ला झाड़ लिया और सीएमओ डा० राजीव निगम ने बताया कि कार्यवाही हेतु बाबू अभिषेक पाल को निर्देशित किया है वही बाबू अभिषेक पाल ने बताया कि लेन - देन करके मामले को रफा-दफा कर दिया गया है अर्थात् सभी ने मिलकर जांच व कार्यवाही के नाम पर खेला करने में भरपूर सहयोग किया है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 20:41:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>संस्कृत महाविद्यालयों में फर्जी नियुक्ति को लेकर मचा हुआ है बवाल। </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मीरजापुर। </strong>मिर्जापुर श्री० प० सकठा  प्रसाद वैध सस्कृति महाविद्यालय पखवईया  मीरजापुर मे अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर मचा हुआ है बवाल मोटी रकम लेने के बाद संस्कृत विद्यालयों में हो रही अध्यापकों की नियुक्ति सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संस्कृत महाविद्यालय में मोटी रकम लेकर जिनके पास कोई वैध डिग्री नहीं है  नियुक्ति पूरी तरह से मानक विहीन है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिनका मोटी रकम लेकर विभाग के द्वारा किया जा रहा है नियुक्ति डिग्री लेने वाले अध्यापक दर-दर भटक रहे हैं बिना डिग्री के लोग पैसा देकर करवा ले रहे हैं संस्कृत विद्यालयों में भर्ती आए दिन नियुक्ति में फर्जीवाड़ा देखने को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178134/there-is-an-uproar-over-fake-appointments-in-sanskrit-colleges"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001517658.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मीरजापुर। </strong>मिर्जापुर श्री० प० सकठा  प्रसाद वैध सस्कृति महाविद्यालय पखवईया  मीरजापुर मे अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर मचा हुआ है बवाल मोटी रकम लेने के बाद संस्कृत विद्यालयों में हो रही अध्यापकों की नियुक्ति सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संस्कृत महाविद्यालय में मोटी रकम लेकर जिनके पास कोई वैध डिग्री नहीं है  नियुक्ति पूरी तरह से मानक विहीन है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिनका मोटी रकम लेकर विभाग के द्वारा किया जा रहा है नियुक्ति डिग्री लेने वाले अध्यापक दर-दर भटक रहे हैं बिना डिग्री के लोग पैसा देकर करवा ले रहे हैं संस्कृत विद्यालयों में भर्ती आए दिन नियुक्ति में फर्जीवाड़ा देखने को मिलता रहता है इसके पूर्व में भी संस्कृत पाठशाला में नियुक्ति को लेकर काफी मोटी रकम की हुई है वसूली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब दोबारा फिर मोटी रकम लेकर हो रहा है वशुली संस्कृत पाठशाला में फर्जी नियुक्ति फर्जी नियुक्ति रुकवाने के लिए लोगों ने किया शासन से मांग और विभागीय अधिकारियों के उपर पर कार्रवाई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178134/there-is-an-uproar-over-fake-appointments-in-sanskrit-colleges</link>
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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 18:55:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर में वित्तीय अनियमितता उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173370/draft-add-your-title-financial-irregularities-exposed-in-pwd-sultanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1003411464.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन किया जा रहा है। सड़क निर्माण कार्यों के खाते में स्टोर से सामग्री की खरीद और उसके परिवहन का खर्च सीधे डाला जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंडल स्तर पर न तो कोई MAS (मासिक लेखा सारांश) खाता है और न ही स्टॉक तथा T&amp;P (उपकरण एवं संयंत्र) का कोई उचित हिसाब-किताब रखा जा रहा है। संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) ने इन लेनदेन को मुख्य लेखा बहियों से बाहर रखा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वित्त विभाग के वर्ष 2022 के शासनादेश के अनुसार, सीधी बुकिंग के माध्यम से बिटुमेन या इमल्शन जैसी सामग्री खरीदना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, यहां धड़ल्ले से विभागीय खरीद जारी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 19:46:33 +0530</pubDate>
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