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                <title>Financial Irregularities - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Financial Irregularities RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन: ग्राम प्रधान और सचिव से 5.15 लाख रुपये की होगी वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के विकास खंड परसरामपुर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत लोहरौली में सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना ने सख्त कार्रवाई करते हुए ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव से ₹5,15,151 की वसूली का आदेश जारी किया है।जिलाधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता अजीत कुमार सिंह की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग (PWD) और नलकूप खंड के अभियंताओं से जांच कराई गई। जांच में बिना हैंडपंप रीबोर कराए धनराशि निकाले जाने तथा 41 शौचालयों का निर्माण न होने के बावजूद भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को कारण बताओ नोटिस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184150/big-action-by-district-magistrate-rs-515-lakh-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260726-wa0050.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के विकास खंड परसरामपुर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत लोहरौली में सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना ने सख्त कार्रवाई करते हुए ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव से ₹5,15,151 की वसूली का आदेश जारी किया है।जिलाधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता अजीत कुमार सिंह की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग (PWD) और नलकूप खंड के अभियंताओं से जांच कराई गई। जांच में बिना हैंडपंप रीबोर कराए धनराशि निकाले जाने तथा 41 शौचालयों का निर्माण न होने के बावजूद भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। दोनों के जवाब से असंतुष्ट होने पर जिला लेखा परीक्षा अधिकारी (सहकारी समितियां) से पुनः जांच कराई गई, जिसमें भी दोनों को दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार हैंडपंप रीबोर मद में ₹23,151 तथा शौचालय निर्माण मद में ₹4,92,000 का अनियमित भुगतान पाया गया। इस प्रकार कुल ₹5,15,151 की वित्तीय अनियमितता सामने आई।जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार कुल धनराशि का आधा हिस्सा ₹2,57,576 ग्राम प्रधान से भू-राजस्व के रूप में वसूला जाएगा, जबकि शेष ₹2,57,576 ग्राम सचिव के वेतन से वसूले जाने का आदेश दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी धन के दुरुपयोग पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 22:34:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>45.70 करोड़ का बजट पास, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी बोर्ड बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर, शाहजहांपुर।</strong> नगर पालिका परिषद की वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट बोर्ड बैठक गुरुवार को विकास योजनाओं से अधिक भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जवाबदेही के सवालों के कारण सुर्खियों में रही। करीब 45.70 करोड़ रुपये का बजट तो सर्वसम्मति से पारित हो गया, लेकिन बैठक के दौरान सभासदों ने पालिका प्रशासन पर एक के बाद एक गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे, संदिग्ध टेंडर, सूचना छिपाने और मनमानी कार्यशैली जैसे मुद्दों पर जमकर हंगामा हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चेयरमैन हाजरा बेगम और अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बजट प्रस्तुत करते हुए अधिकारियों ने नगर विकास,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183042/budget-of-rs-4570-crore-passed-but-board-meeting-surrounded"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260709-wa0033-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर, शाहजहांपुर।</strong> नगर पालिका परिषद की वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट बोर्ड बैठक गुरुवार को विकास योजनाओं से अधिक भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जवाबदेही के सवालों के कारण सुर्खियों में रही। करीब 45.70 करोड़ रुपये का बजट तो सर्वसम्मति से पारित हो गया, लेकिन बैठक के दौरान सभासदों ने पालिका प्रशासन पर एक के बाद एक गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे, संदिग्ध टेंडर, सूचना छिपाने और मनमानी कार्यशैली जैसे मुद्दों पर जमकर हंगामा हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चेयरमैन हाजरा बेगम और अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बजट प्रस्तुत करते हुए अधिकारियों ने नगर विकास, सड़क, नाला निर्माण, सफाई, वेतन और पेंशन को प्राथमिकता देने की बात कही। अधिकारियों के दावों के बीच ही सभासदों ने व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए। सभासद दिलीप कुमार सक्सेना (अक्कू) ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्तियों से जुड़े मुकदमों में पालिका का अधिवक्ता ही नगर हितों के विपरीत काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभासद सुशील कुमार सिंह ने वर्ष 2024 से लंबित सूचना न दिए जाने को पारदर्शिता पर सवाल बताते हुए कहा कि आखिर ऐसी कौन-सी जानकारी है जिसे दो वर्ष बाद भी छिपाया जा रहा है। उन्होंने 16 लाख रुपये के नाला सफाई टेंडर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जब मलबा हटाने का काम पालिका कर्मचारियों से कराया गया तो ठेकेदार को लाखों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया। उन्होंने सरकारी कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच की मांग उठाई। मामला उस समय और गरमा गया जब चेयरमैन आवास पर कार्यरत बताए जा रहे 15 संविदा कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया। आरोप है कि स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल की गई, जिस पर सभासदों और पालिका प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में कई सभासदों ने नगर पालिका की जमीनों पर अवैध कब्जे न हटाने, जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा, फोन तक न उठाने, बदहाल सड़कें, जलभराव और चरमराई सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन को घेरा। उनका कहना था कि नगर की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में विकास दिखाने में व्यस्त हैं।लगातार बढ़ते विरोध और आरोपों के बीच अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार ने सभी शिकायतों की जांच कराने और दोष पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद हंगामे के बीच ही 45.70 करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया गया।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिराहिमपुर ग्राम पंचायत की त्रिनेत्र योजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मलिहाबाद, लखनऊ।</strong>  मलिहाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत बिराहिमपुर के मजरा रामपुर बस्ती में सरकार की महत्वाकांक्षी त्रिनेत्र योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन ग्राम प्रधान राम शंकर कश्यप ने ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया। वहीं ग्राम पंचायत सचिव पर भी इस योजना में प्रधान के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन हड़पने का आरोप है| ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई और</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260705-wa0007.jpg" alt="बिराहिमपुर ग्राम पंचायत की त्रिनेत्र योजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप" width="440" height="293" /></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182804/serious-allegations-of-corruption-in-trinetra-scheme-of-birampur-gram"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मलिहाबाद, लखनऊ।</strong> मलिहाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत बिराहिमपुर के मजरा रामपुर बस्ती में सरकार की महत्वाकांक्षी त्रिनेत्र योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन ग्राम प्रधान राम शंकर कश्यप ने ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया। वहीं ग्राम पंचायत सचिव पर भी इस योजना में प्रधान के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन हड़पने का आरोप है| ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई और समाचार भी प्रकाशित हुआ, लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/img-20260705-wa0007.jpg" alt="बिराहिमपुर ग्राम पंचायत की त्रिनेत्र योजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप" width="440" height="293"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार, त्रिनेत्र योजना के तहत गांव में 16 CCTV कैमरे लगाए गए। आरोप है कि इन कैमरों की खरीद और स्थापना के नाम पर करीब 2 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि बाजार में इन कैमरों की वास्तविक कीमत लगभग 35 से 40 हजार रुपये के बीच है। ऐसे में ग्रामीणों ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं की निजता पर सबसे बड़ा सवाल</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि CCTV कैमरों का उपयोग गांव की सुरक्षा के बजाय महिलाओं और युवतियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रतिदिन रात के समय प्रधान के कुछ करीबी लोग CCTV की रिकॉर्डिंग देखते हैं, जबकि ऐसा कार्य केवल अधिकृत सरकारी अधिकारियों द्वारा ही किया जाना चाहिए। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह महिलाओं की निजता, सम्मान और उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार की गई और खबरें भी प्रकाशित हुईं, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर जांच शुरू नहीं की गई। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो जाने के कारण अधिकारी अब कार्रवाई से बच रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या किसी ग्राम प्रधान, नेता या जनप्रतिनिधि का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद उसके कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच नहीं होगी? क्या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप केवल समय बीत जाने से समाप्त हो जाते हैं, या फिर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने मांग की है कि त्रिनेत्र योजना के पूरे खर्च का तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए, CCTV कैमरों की खरीद से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच की जाए, रिकॉर्डिंग तक किस-किस की पहुंच रही इसकी भी जांच हो और यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अब पूरा मामला प्रशासन की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई पर टिका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले में भी कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार की योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:29:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वीडियो की सह परभानपुर में ग्राम प्रधान, सचिव व टीए की मिलीभगत से सरकारी धन का हो रहा लूट</title>
                                    <description><![CDATA[आनलाइन मस्टर रोलपंचायत चुनाव को नजदीक देख ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी ने सरकारी धन को लूटने में झोंकी पूरी ताकत सचिव प्रिया शुक्ला, तकनीकी सहायक एस ० के ० सिंह ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने में लगाया है पूरी ताकत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182770/video-government-money-is-being-looted-in-parbhanpur-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0094.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>बस्ती।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के विकास खंड हरैया केग्राम पंचायत भानपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी / सचिव प्रिया शुक्ला का चयन मंडी समिति में हो गया है लेकिन अभी तक सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया में कार्यरत हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया से जाते-जाते अपनी साफ सुथरी छवि धूमिल करने पर तुली हुई है यदि सचिव ग्राम प्रधान शकुंतला देवी को सह न देती तो ग्राम प्रधान शकुंतला देवी पानी से भरे तालाब में विकसित भारत की जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी न लगती । पानी से भरे तालाब में विकसित भारत जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगने पर सचिव प्रिया शुक्ला के कार्यों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है और तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह भी ग्राम पंचायत भानपुर में कमीशन के लालच पानी से भरे तालाब की फर्जी एमबी की तैयारी में जुटे हुए हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   सूत्रों की माने तो तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह ने ग्राम पंचायत भानपुर में पूर्व भी कई विकास कार्यों के नाम पर फर्जी एमबी कर चुके हैं और फर्जी एमबी के सहारे ग्राम प्रधान शकुंतला देवी फर्जी भुगतान प्राप्त कर चुकी हैं । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      विकसित भारत जी राम जी के कार्य को पलीता लगाने वाली रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व ग्राम प्रधान शकुंतला देवी के भ्रष्टाचार के आगे खंड विकास अधिकारी हरैया विनय कुमार द्विवेदी नतमस्तक हो चुके हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     मीडिया टीम धरातलीय पड़ताल में ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत भानपुर के राजस्व गांव नागपुर के सभी तालाब एवं गढही में पानी भरा है । सरकारी धन लूटने के उद्देश्य मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बातचीत में ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व ब्लॉक हरैया के जिम्मेदार अधिकारियों का कर्मचारियों की मनमानी से 05 वर्षों से ग्राम पंचायत भानपुर तरस रहा है । जब तक ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व अन्य भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तब तक ऐसे ही सरकारी धन के लूटने का खेल जारी रहेगा । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      अब देखना यह है कि डीसी मनरेगा संजय शर्मा के द्वारा उक्त प्रकरण में क्या कार्यवाही की जाती है ?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:14:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा चोरी - आस्था पर लगा दाग और सवालों के घेरे में सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
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<div>
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<div class="m_6862890073122296727WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने सिर्फ पैसे की हेराफेरी का मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधा हमला है। </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi">  लोगों के खिलाफ पहली </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज कराई है। सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। बहुत बड़ी विडंबना है कि जो मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है इन चोरों ने उसे भी नहीं छोड़ा। राम मंदिर आंदोलन के बाद से अब तक पूरे देश के हिंदुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। लेकिन </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद भी सवाल</span></p></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182466/ram-temple-offering-stolen-faith-tainted-and-system-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
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<div>
<div lang="en-us" xml:lang="en-us">
<div class="m_6862890073122296727WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने सिर्फ पैसे की हेराफेरी का मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधा हमला है। </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों के खिलाफ पहली </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज कराई है। सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। बहुत बड़ी विडंबना है कि जो मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है इन चोरों ने उसे भी नहीं छोड़ा। राम मंदिर आंदोलन के बाद से अब तक पूरे देश के हिंदुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। लेकिन </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद भी सवाल खत्म नहीं हुए। बल्कि नए सवाल खड़े हो गए हैं। क्या हुआ था</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सीसीटीवी में साफ दिखा कि मंदिर के दानपात्रों से निकली नकदी की गिनती करने वाले कर्मचारी ही चोरी कर रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरोपियों में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लवकुश मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुकल्प मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अविनाश शुक्ला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनीष यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रमाशंकर मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे शामिल हैं। इनमें से छह कैशियर हैं। सुभाष श्रीवास्तव काउंटिंग इंचार्ज था। टिन्नू यादव का काम कैश की गिनती सुपरवाइज़ करके बैंक तक ले जाना था। यानी जिन पर भरोसा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही बेईमान निकले। एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए महीने की नौकरी करने वाले कर्मचारियों ने </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल में करोड़ों की संपत्ति बना ली। एक ने डेढ़ करोड़ की जमीन खरीदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरे ने </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख का प्लॉट लिया। शुरुआती अनुमान </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ के घोटाले का है। एफआईआर दर्ज हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर देर से क्यों</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रस्ट ने चोरी की जांच के लिए </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को एसआईटी बनवाई। </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को एफआईआर हुई। यानी </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन लग गए। जागरण की रिपोर्ट बताती है कि इससे पहले भी दो कर्मचारियों को गुपचुप तरीके से पकड़ा गया था। बिना एफआईआर के ही रिकवरी की जा रही थी। पुलिस ट्रस्ट के साथ मिलकर पूछताछ कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल ये है: जब चोरी का शक था तो तुरंत पुलिस को क्यों नहीं बताया गया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या ट्रस्ट पहले अपने स्तर पर मामला दबाना चाहता था</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े नाम गायब क्यों हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है। लेकिन उनका ड्राइवर टिन्नू यादव आरोपी है। विपक्ष का आरोप है कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। बीएनएस की धारा </span>306, 316(5), 317(4), 317(5) <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>61<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत केस दर्ज हुआ है। इनमें उम्रकैद तक की सजा है। अगर टिन्नू यादव चोरी कर रहा था तो क्या चंपत राय को पता नहीं चला</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">या उन्होंने आंखें बंद कर लीं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">एसआईटी की दूसरी रिपोर्ट आने तक ये सवाल बना रहेगा। सिस्टम में खामी कहां थी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर के चढ़ावे की गिनती तीन स्तर पर होती है: </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्राइवेट कर्मचारी नोट गिनते हैं। </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> ट्रस्ट कर्मचारी निगरानी करते हैं। </span>14 SBI <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>TCS <span lang="hi" xml:lang="hi">के ऑडिटर होते हैं। इतनी लेयर के बावजूद चोरी हो गई। जांच में सामने आया कि एक पदाधिकारी ने कैमरे लगाने का विरोध किया था। यानी सिस्टम में पारदर्शिता की कमी थी। </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर निगरानी नहीं थी। ऑडिट था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भरोसा अंधा था। आगे क्या होना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पहला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एसआईटी की जांच सिर्फ </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> आरोपियों तक सीमित न रहे। पूरी चेन की जांच हो। किसके इशारे पर चोरी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैसा कहां गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये साफ होना चाहिए। </span>CM <span lang="hi" xml:lang="hi">योगी ने कहा है कि "दूध का दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी का पानी" होगा। जनता यही उम्मीद कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रस्ट को अपनी वित्तीय व्यवस्था सार्वजनिक करनी होगी। हर महीने कितना चढ़ावा आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहां खर्च हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका डिजिटल डिस्प्ले मंदिर परिसर में लगे। तिरुपति बालाजी मंदिर की तरह रियल टाइम अपडेट सिस्टम बने। तीसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैश हैंडलिंग खत्म हो। </span>QR <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दिया जाए। जितना कैश कम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चोरी की गुंजाइश उतनी कम होगी। चौथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रस्ट में सरकारी प्रतिनिधि बढ़ाए जाएं। अभी सिर्फ एक आईएएस अधिकारी है। </span>CAG <span lang="hi" xml:lang="hi">से सालाना ऑडिट अनिवार्य हो। राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है। ये </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के संघर्ष के बाद मिली आस्था की जीत है। </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जनवरी </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> को प्राण प्रतिष्ठा के दिन जो भाव देश ने देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो अनमोल है। अगर चंद लोग उस आस्था को कैश कराने लगेंगे तो मंदिर का मतलब खत्म हो जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">पहली कार्रवाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिरी नहीं। असली इम्तहान अब शुरू हुआ है - क्या ट्रस्ट दोषियों को सजा दिला पाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वो कितना भी बड़ा हो</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या व्यवस्था बदलेगी ताकि फिर कोई टिन्नू यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लवकुश मिश्रा आस्था का सौदा न कर सके</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जनता देख रही है। राम देख रहे हैं। लोग तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं और लोगों के सवाल तब ही शांत होंगे जब इस पूरे मामले पय ठीक ढंग से पर्दा उठेगा। फिलहाल उम्मीद है कि जांच सही दिशा में हो रही है।</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:04:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेवा के अंतिम दौर में बीडीओ ने 22 जून को तालाब व खेल मैदान पर लगवाया फर्जी हाज़िरी*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>कप्तानगंज बीडीओ चन्द्रभान उपाध्याय रिटायर्ड की रेखा पर खड़े हुए हैं ।और उनके द्वारा किए/कराए गए भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर बनी हुई है ।पिछले दिनों ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा पर तालाब खुदाई कार्य में हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीसी मनरेगा बस्ती द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया था ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साहब के आदेशों को पैर की जुती समझ कर 20 दिन बाद भी वीडीओ आख्या प्रेषित करना मुनासिब नहीं समझते। जिसका नतीजा यह है कि सचिव पंकज सिंह का भ्रष्ट्राचार रुक नहीं रहा है कार्यवाही न होने से पुनः एक बार फिर उसी साइड पर मस्टररोल जारी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182458/in-the-last-round-of-service-bdo-imposed-fake-attendance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260624-wa0090.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>कप्तानगंज बीडीओ चन्द्रभान उपाध्याय रिटायर्ड की रेखा पर खड़े हुए हैं ।और उनके द्वारा किए/कराए गए भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर बनी हुई है ।पिछले दिनों ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा पर तालाब खुदाई कार्य में हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीसी मनरेगा बस्ती द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साहब के आदेशों को पैर की जुती समझ कर 20 दिन बाद भी वीडीओ आख्या प्रेषित करना मुनासिब नहीं समझते। जिसका नतीजा यह है कि सचिव पंकज सिंह का भ्रष्ट्राचार रुक नहीं रहा है कार्यवाही न होने से पुनः एक बार फिर उसी साइड पर मस्टररोल जारी कर रोजगार सेवक सुनील राव ने फर्जी हाजिरी लगाना शुरू कर दिया ।रोजगार सेवक सुनील राव के हौसले इस कदर बुलंद है कि बिना काम फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है यदि यही आलम चलता रहा तो अन्य ग्राम पंचायत के रोजगार सेवक भी सुनील राव की तरह माल समेटने में जुट जाएंगे ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेवानिवृत होने वाले कप्तानगंज वीडीओ चंद्रभान उपाध्याय तो चले जाएंगे लेकिन आने वाले नवागत अधिकारी के ऊपर भ्रष्टाचार के कार्यवाहियों की तमाम चुनौतियां यादगार के लिए दे जा रहे है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त समाचार के अनुसार -खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज चंद्रभान उपाध्याय दिनांक 30 जून 2026 सायं 5 बजे कार्यकाल समाप्त हो रहा है ।विकास खंड कप्तानगंज में  जिस प्रकार से दर्जनों ग्राम पंचायतो में मनरेगा भ्रष्टाचार एवं शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगना एव परिसर मयखाना में तब्बदील होने की लगातार खबरे प्रकाशित हो चुकी है तो वही स्थानीय मीडिया के साथ राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिला अध्यक्ष कृष्णा ननंद ने बीडीओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्ट्राचार को लेकर ऑन कैमरा बीडीओ की पोल खोली गयी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उससे हर कोई वाकिफ हैं। बीडीओ का गैर जिम्मेदाराना बयान मीडिया सहित आम जनता में चर्चा का माहौल दिनो दिन बढ़ता जा रहा है।जब मीडिया टिम ने फोन पर बीडीओ कप्तानगंज से ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा तालाब खुदाई के संबंधों में जानकारी लेनी चाहि तो माकूल जवाब नही मिला।22 जून को मनरेगा पटल पर 45 मजदूरों की फर्जी हाजिरी तो लगी है।बड़ा सवाल यह है कि बीडीओ की कार्यवाही एवं मीडिया के सवालो के जबाब जलेबी की तरह होती यदि कार्यवाही हुयी है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:50:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या: राम मंदिर का दान और संपत्ति की खरीदारी - 'श्रद्धा के पैसे' का हिसाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस इनकी जांच करेगी और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा करेगी। इन सात अभियुक्तों के घरों से पुलिस को सोने चांदी के गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्के व नकदी भी मिली है जो यह साबित कर रही है कि कहीं न कहीं मंदिर की दान चोरी में इनका हांथ है। रामलला के दर्शन के लिए रोज लाखों श्रद्धालु आते हैं। दानपात्रों में नकद</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182331/ayodhya-ram-temple-donation-and-purchase-of-property-accounting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas25.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस इनकी जांच करेगी और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा करेगी। इन सात अभियुक्तों के घरों से पुलिस को सोने चांदी के गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्के व नकदी भी मिली है जो यह साबित कर रही है कि कहीं न कहीं मंदिर की दान चोरी में इनका हांथ है। रामलला के दर्शन के लिए रोज लाखों श्रद्धालु आते हैं। दानपात्रों में नकद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेक सब गिरता है। लेकिन अब वही </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धा का पैसा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद में है। एक तरफ ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन खरीदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की करोड़ों की संपत्ति। दान कितना आता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश से लेकर घर तक- विदेशी दान- महाकुंभ के दौरान अकेले जनवरी-फरवरी </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में अमेरिका समेत </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> देशों से </span>57<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये का विदेशी दान मिला।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण निधि से अब तक देश-विदेश के करोड़ों भक्तों ने आस्था से दान दिया है। भाजपा नेता रजनीश सिंह के मुताबिक ये पैसा "किसी व्यक्ति का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है"। शुरुआत </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से ट्रस्ट को पहला दान मोदी सरकार ने </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये नकद देकर किया था। ट्रस्ट ने क्या खरीदा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">चार महीने में </span>36.61<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की जमीन। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तेजी से जमीन खरीद रहा है। पिछले </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने अयोध्या के हैबतपुर में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> जगहों पर </span>4.29<span lang="hi" xml:lang="hi"> एकड़ जमीन खरीदी गई। जिसकी कुल कीमत: </span>36.61<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये है। सबसे बड़ी डील-  </span>11,194<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्क्वायर फीट की एक जमीन अकेले।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रानोपाली में भी </span>5,490<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्क्वायर फीट की जमीन अलग से ली गई है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर विस्तार और सुविधाओं के लिए जमीन ली जा रही है। विवाद का केंद्र: चढ़ावे की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चोरी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और करोड़ों की संपत्ति यही सबसे बड़ा मुद्दा है। आरोप है कि दानपात्रों से करोड़ों रुपये गायब हुए। </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> की नौकरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों की संपत्ति- नोट गिनने वाले </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी सिर्फ </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये महीना है। लेकिन उनमें से कुछ ने </span>1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की जमीन</span>, 40<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख का प्लॉट खरीद लिया। कैसे पकड़े गए- </span>18-20<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार सैलरी वाले दो कर्मचारियों की डेढ़ करोड़ की जमीन खरीद से पूरा मामला खुला।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कौन शामिल-  लवकुश मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुकल्प मिश्रा समेत </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी दान गिनती प्रक्रिया में थे। सीसीटीवी फुटेज में पैसे चुराते पकड़े गए। कितना घोटाला</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आशंका </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये से अधिक की है। अब तक </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> कर्मचारियों से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ नकद</span>, 1<span lang="hi" xml:lang="hi"> कार</span>, 3<span lang="hi" xml:lang="hi"> आईफोन बरामद हुए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> जांच कहां तक पहुंची</span>? SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">और राजनीति क्या कहती है - एसआईटी का गठन - योगी सरकार ने मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> सदस्यीय एसआईटी बनाई। </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। एसआईटी ने अपना काम शुरू कर दिया है और आठ में से सात लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है जिनके पास से काफी संपत्ति के सबूत मिले हैं। ट्रस्ट की शिकायत पर </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों के खिलाफ </span>BNS <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा </span>306, 316, 317, 61<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत केस दर्ज हुआ है। सपा का आरोप- अखिलेश यादव ने कहा कि चंदे के पैसों से मकान खरीदे गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट के रिटायर जज से जांच कराने की मांग की है। ट्रस्ट का बयान-  नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि ये विवाद </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जमीन खरीद विवाद</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से भी ज्यादा गंभीर है। उन्होंने एक अनुभवी </span>CEO <span lang="hi" xml:lang="hi">की नियुक्ति की जरूरत बताई।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता की मांग: हिसाब कौन देगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा नेता रजनीश सिंह ने </span>PM <span lang="hi" xml:lang="hi">को पत्र लिखकर ट्रस्ट के बनने से अब तक का पूरा वित्तीय लेन-देन वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका तर्क है कि "हर भक्त को यह जानने का नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है कि दान में मिले पैसे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहनों का इस्तेमाल कैसे हुआ"। आस्था बनाम जवाबदेही- राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों लोगों की आस्था है। ट्रस्ट जमीन खरीदकर विस्तार कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ठीक है। लेकिन अगर </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> सैलरी वाला कर्मचारी करोड़पति बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सवाल उठना लाजमी है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट तय करेगी कि ये </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तिगत गबन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है या सिस्टम की चूक। फिलहाल </span>8 <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग सलाखों के पीछे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और करोड़ों श्रद्धालु हिसाब मांग रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:28:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC के बैंक खातों में रखे 440 करोड़ रुपये फ्रीज; बागी विधायकों की शिकायत पर कार्रवाई।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी बगावत का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में रखे गए क़रीब </span>440<span lang="hi" xml:lang="hi">  करोड़ रुपये की निकासी पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई पार्टी के बागी विधायकों की शिकायत पर हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने इन पैसों के स्रोत की जाँच की मांग की थी। पहले से ही बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब इस कार्रवाई से एक और बड़ा झटका लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस ताज़ घटना से पार्टी में पैसे के लेन देन पर नियंत्रण को लेकर चल रही आंतरिक लड़ाई और भी तेज हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181815/action-on-the-complaint-of-rebel-mlas-to-freeze-rs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas18.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी बगावत का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में रखे गए क़रीब </span>440<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये की निकासी पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई पार्टी के बागी विधायकों की शिकायत पर हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने इन पैसों के स्रोत की जाँच की मांग की थी। पहले से ही बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब इस कार्रवाई से एक और बड़ा झटका लगा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस ताज़ घटना से पार्टी में पैसे के लेन देन पर नियंत्रण को लेकर चल रही आंतरिक लड़ाई और भी तेज हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी का गुट अब पार्टी के लेन देन में गड़बड़ी का आरोप लगा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्राइवेट सेक्टर के एक बैंक में रखे गए इन तीन खातों पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डेबिट फ्रीज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">लगा दिया गया है। इसका मतलब है कि इन खातों से पैसे निकाले या बाहर ट्रांसफर नहीं किए जा सकते हैं। हालााँकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन खातों में पैसे जमा किए जा सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कार्रवाई हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में चल रही टूट-फूट के बीच हुई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में क़रीब </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> विधायकों ने बगवात की है। अब पार्टी के संगठन और पैसे पर नियंत्रण की कोशिश चल रही है। ऋतब्रत बनर्जी गुट के </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें एफआईआर दर्ज करने तथा पूरी जांच कराने की मांग की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायत में इन बागी विधायकों ने पूछा है कि इन खातों में जमा इतना बड़ा पैसा कहाँ से आया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने जाँच एजेंसियों से यह पता लगाने को कहा है कि क्या यह पैसा वैध स्रोतों से आया या कट-मनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घोटालों आदि गैरकानूनी गतिविधियों से जमा किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बागियों की शिकायत की कॉपी में कहा गया है कि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि गैरकानूनी गतिविधियों से पैसा जमा किया गया हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्रभाव का दुरुपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेईमानी से वित्तीय लेन-देन और अवैध वसूली शामिल है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाग़ी विधायकों की शिकायत से कुछ दिन पहले ही वरिष्ठ टीएमसी नेता अरूप विश्वास ने बैंक को चिट्ठी लिखकर खातों की सुरक्षा और ट्रांजेक्शन रोकने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी के </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये से ज़्यादा के जमा को तब तक किसी को ऑपरेट नहीं करने देना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक पार्टी में नेतृत्व विवाद सुलझ न जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बिस्वास ने खातों के मैनेजमेंट और कंट्रोल को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें फ्रीज़ करने की मांग की थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं बागी विधायकों ने अब फंड के सोर्स की आपराधिक जांच की मांग की है। खास बात यह है कि ये शिकायतें उसी साइबर क्राइम थाने में की गई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां पहले अरूप विश्वास के ख़िलाफ़ लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे वाले विवाद में केस चल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 19:20:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;">  काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181682/fake-payment-of-rs-5-crore-using-ai-photo-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781878450387.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;"> काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह आरोप लगाया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर लगभग 5 करोड़ सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया है। सरकार की मंशा के उलट बड़े पैमाने पर पैसे का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 2.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781878450406.jpg" alt="सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान" width="1080" height="556"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> निर्माण स्थल की कुल लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।  सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है। अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> फर्जी फोटो और AI का इस्तेमालः काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है।जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं।ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और</div><div style="text-align:justify;">अनुशासनात्मक कार्रवाई विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है। यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को पत्र भेज कर की गई है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format2">इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए जो टीम गठित की गई थी ।इसी मंडल के ही अधिकारी शामिल थे । जबकि शासनादेश है कि जिस मंडल का मामला होता है उस मंडल के अधिकारियों को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए। जिसे शासन ने संज्ञान में लेते हुए जांच टीम निरस्त कर दी और दूसरी जांच टीम गठित कर दी है। यह जांच टीम सिद्धार्थनगर कभी धमक सकती है।</blockquote></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती PWD में 27 साल से जमे अधिकारी पर गंभीर आरोप, पत्नी की फर्म और 65 लाख के लेन-देन की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181126/serious-allegations-against-officer-stuck-in-basti-pwd-for-27"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0095.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र  द्वारा ठेकेदारों व कर्मचारियों का लगातार दोहन किया जा रहा है तथा सरकारी अभिलेखों में भी फेरबदल किये जाने की शिकायत पूर्व में जन प्रतिनिधियों द्वारा की जाती रही है परन्तु  प्रेमचन्द्र की  ऊँची पहुँच के कारण मण्डलीय कार्यालय पर तैनाती लेते रहे हैं, जिससे इनके भ्रष्टाचार एवं कागजी हेरफेर के कारण सरकारी कार्यों में भी गोपनीयता भंग की जाती रही है.</div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस को जारी विज्ञप्ति में संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रेमचन्द्र ने अपनी सेवा अवधि का लगभग 90 प्रतिशत समय बस्ती वृत्त, बस्ती कार्यालय में ही व्यतीत किया है. बाबू पद से लेकर प्रशासनिक अधिकारी पद तक की उनकी अधिकांश सेवा बस्ती मण्डल में ही रही है. इतने लंबे समय तक एक ही मंडलीय कार्यालय में तैनाती से प्रशासनिक निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विभागीय कार्यप्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं.</div>
<div style="text-align:justify;">बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन यह भी पढ़ें: बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन</div>
<div style="text-align:justify;">पत्नी की फर्म के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप</div>
<div style="text-align:justify;">श्री पगार ने बताया कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपने पद एवं प्रभाव का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारी व्यवस्था में हस्तक्षेप किया जाता रहा है. आरोप है कि उनके द्वारा कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने, विभागीय गोपनीय सूचनाओं को प्रभावित करने तथा ई-टेण्डरिंग प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव डालने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई गई है. इसके अतिरिक्त यह भी गंभीर आरोप है कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती सीमा के नाम से संचालित फर्म मेसर्स बुद्धा इंटरप्राइजेज का उपयोग स्वयं एवं अपने परिवार के सदस्यों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है. उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उक्त फर्म की प्रोपराइटर श्रीमती सीमा है, जिसका पता रौतापार, गांधी नगर, बस्ती दर्शाया गया है. उक्त फर्म का  यूनियन बैंक में है.तीन साल में खाते से 65 लाख का लेन-देन, जांच की उठी मांग</div>
<div style="text-align:justify;">उपलब्ध बैंक विवरण के अनुसार पिछले लगभग तीन वर्षों में उक्त फर्म के खाते में लगभग 65 लाख रुपये की क्रेडिट एवं डेबिट प्रविष्टियां पाई गई हैं, जिससे लेन-देन की प्रकृति, धन के स्रोत तथा संबंधित ठेकेदारों से संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है. आरोप है कि वे अपने पूर्व कार्यकाल से संबंधित अभिलेखों, कथित अनियमितताओं एवं आने वाली निविदा/ई-टेण्डरिंग प्रक्रियाओं हस्तक्षेप बनाए रखने के उद्देश्य से उसी कार्यालय में बने रहना चाहते हैं. प्रेमचन्द्र ने अपना आलीशान मकान लखनऊ में बनवा लिया है.</div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार की शिकायतें पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय स्तर पर उठाई जाती रही हैं. हाल ही में भी कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा  प्रेमचन्द्र के विरुद्ध शासन स्तर पर लिखित शिकायतें प्रेषित की गई, जिसके क्रम में शासन द्वारा धारा 7 के अंतर्गत मुख्य अभियंता, बस्ती से रिपोर्ट मांगी गई. किंतु मुख्य अभियंता, बस्ती  आनन्द कुमार द्वारा एक माह से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद शासन को अपेक्षित रिपोर्ट प्रेषित नहीं की गई. जबकि शासन की प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी गंभीर शिकायत के क्रम में संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त कर स्थानांतरण अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई की जाती है.</div>
<div style="text-align:justify;">स्थानांतरण प्रक्रिया की पूर्व निर्धारित समय-सीमा 31 मई तक थी, परंतु रिपोर्ट समय से न भेजे जाने के कारण आवश्यक कार्रवाई प्रभावित हुई. वर्तमान में शासन द्वारा स्थानांतरण प्रक्रिया की समय-सीमा 30 जून तक बढ़ा दी गई है, इसलिए जनहित एवं प्रशासनिक पारदर्शिता की दृष्टि से यह आवश्यक है कि मुख्य अभियंता स्तर से लंबित रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाए तथा प्रेमचन्द्र का स्थानांतरण करते हुए उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए.</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 18:55:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर:वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में ग्राम पंचायत सचिव निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खुनियांव विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  चार ग्राम पंचायतों में  जांच के बाद कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अभिलेखों में कूटरचित, नियम विरुद्ध भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप भी जांच</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180893/siddharthnagar-gram-panchayat-secretary-suspended-on-charges-of-financial-irregularities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/download1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खुनियांव विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> चार ग्राम पंचायतों में  जांच के बाद कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अभिलेखों में कूटरचित, नियम विरुद्ध भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप भी जांच में सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है।जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा को ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को निलंबित करने तथा आगे की विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले की पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर हुए इस कथित गबन ने वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब पूरे प्रकरण की गहन जांच कर यह भी पता लगाने की तैयारी में है कि अनियमित भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग में अन्य किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। यह मामला सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) खुनियांव द्वारा ग्राम पंचायत खखरा-खखरी, बगहवा, सिरसिया और तेलियाडीह के निरीक्षण के बाद तैयार की गई जांच रिपोर्ट से उजागर हुआ। इस रिपोर्ट में विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर तथ्य सामने आए थे।जांच के अनुसार, ग्राम पंचायत खखरा-खखरी में आंगनबाड़ी केंद्र की मरम्मत और डस्टबिन इंस्टालेशन कार्यों में अनियमितता बरती गई। </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180893/siddharthnagar-gram-panchayat-secretary-suspended-on-charges-of-financial-irregularities</link>
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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 21:13:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर में वित्तीय अनियमितता उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173370/draft-add-your-title-financial-irregularities-exposed-in-pwd-sultanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1003411464.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन किया जा रहा है। सड़क निर्माण कार्यों के खाते में स्टोर से सामग्री की खरीद और उसके परिवहन का खर्च सीधे डाला जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंडल स्तर पर न तो कोई MAS (मासिक लेखा सारांश) खाता है और न ही स्टॉक तथा T&amp;P (उपकरण एवं संयंत्र) का कोई उचित हिसाब-किताब रखा जा रहा है। संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) ने इन लेनदेन को मुख्य लेखा बहियों से बाहर रखा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वित्त विभाग के वर्ष 2022 के शासनादेश के अनुसार, सीधी बुकिंग के माध्यम से बिटुमेन या इमल्शन जैसी सामग्री खरीदना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, यहां धड़ल्ले से विभागीय खरीद जारी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 19:46:33 +0530</pubDate>
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