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                <title>वित्तीय अनियमितता - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>वित्तीय अनियमितता RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वीडियो की सह परभानपुर में ग्राम प्रधान, सचिव व टीए की मिलीभगत से सरकारी धन का हो रहा लूट</title>
                                    <description><![CDATA[आनलाइन मस्टर रोलपंचायत चुनाव को नजदीक देख ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी ने सरकारी धन को लूटने में झोंकी पूरी ताकत सचिव प्रिया शुक्ला, तकनीकी सहायक एस ० के ० सिंह ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने में लगाया है पूरी ताकत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182770/video-government-money-is-being-looted-in-parbhanpur-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0094.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>बस्ती।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के विकास खंड हरैया केग्राम पंचायत भानपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी / सचिव प्रिया शुक्ला का चयन मंडी समिति में हो गया है लेकिन अभी तक सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया में कार्यरत हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया से जाते-जाते अपनी साफ सुथरी छवि धूमिल करने पर तुली हुई है यदि सचिव ग्राम प्रधान शकुंतला देवी को सह न देती तो ग्राम प्रधान शकुंतला देवी पानी से भरे तालाब में विकसित भारत की जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी न लगती । पानी से भरे तालाब में विकसित भारत जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगने पर सचिव प्रिया शुक्ला के कार्यों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है और तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह भी ग्राम पंचायत भानपुर में कमीशन के लालच पानी से भरे तालाब की फर्जी एमबी की तैयारी में जुटे हुए हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   सूत्रों की माने तो तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह ने ग्राम पंचायत भानपुर में पूर्व भी कई विकास कार्यों के नाम पर फर्जी एमबी कर चुके हैं और फर्जी एमबी के सहारे ग्राम प्रधान शकुंतला देवी फर्जी भुगतान प्राप्त कर चुकी हैं । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      विकसित भारत जी राम जी के कार्य को पलीता लगाने वाली रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व ग्राम प्रधान शकुंतला देवी के भ्रष्टाचार के आगे खंड विकास अधिकारी हरैया विनय कुमार द्विवेदी नतमस्तक हो चुके हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     मीडिया टीम धरातलीय पड़ताल में ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत भानपुर के राजस्व गांव नागपुर के सभी तालाब एवं गढही में पानी भरा है । सरकारी धन लूटने के उद्देश्य मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बातचीत में ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व ब्लॉक हरैया के जिम्मेदार अधिकारियों का कर्मचारियों की मनमानी से 05 वर्षों से ग्राम पंचायत भानपुर तरस रहा है । जब तक ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व अन्य भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तब तक ऐसे ही सरकारी धन के लूटने का खेल जारी रहेगा । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      अब देखना यह है कि डीसी मनरेगा संजय शर्मा के द्वारा उक्त प्रकरण में क्या कार्यवाही की जाती है ?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:14:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;">  काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181682/fake-payment-of-rs-5-crore-using-ai-photo-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781878450387.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;"> काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह आरोप लगाया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर लगभग 5 करोड़ सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया है। सरकार की मंशा के उलट बड़े पैमाने पर पैसे का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 2.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781878450406.jpg" alt="सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान" width="1080" height="556"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> निर्माण स्थल की कुल लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।  सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है। अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> फर्जी फोटो और AI का इस्तेमालः काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है।जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं।ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और</div><div style="text-align:justify;">अनुशासनात्मक कार्रवाई विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है। यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को पत्र भेज कर की गई है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format2">इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए जो टीम गठित की गई थी ।इसी मंडल के ही अधिकारी शामिल थे । जबकि शासनादेश है कि जिस मंडल का मामला होता है उस मंडल के अधिकारियों को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए। जिसे शासन ने संज्ञान में लेते हुए जांच टीम निरस्त कर दी और दूसरी जांच टीम गठित कर दी है। यह जांच टीम सिद्धार्थनगर कभी धमक सकती है।</blockquote></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:58:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निर्माण के नाम पर 1. 25 करोड़ खाते से निकालने में चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> शहरों और गांव के विकास के लिए मिलने वाले सरकारी धन को जालसाजी, धोखाधड़ी और कूट रचना के माध्यम से एक राय होकर हड़प करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे ही एक मामले में आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 409 ,419 ,420 ,467,468 ,471,504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना जांच शुरू कर दी है। डीआईजी के आदेश पर दर्ज हुई एफ आई आर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक 1.25 करोड़ की यह सरकारी धनराशि पूर्व सांसद की अनुशंसा पर 10 ग्राम पंचायतों में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181202/case-filed-against-four-for-withdrawing-rs-125-crore-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002003015.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> शहरों और गांव के विकास के लिए मिलने वाले सरकारी धन को जालसाजी, धोखाधड़ी और कूट रचना के माध्यम से एक राय होकर हड़प करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे ही एक मामले में आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 409 ,419 ,420 ,467,468 ,471,504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर जाने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना जांच शुरू कर दी है। डीआईजी के आदेश पर दर्ज हुई एफ आई आर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक 1.25 करोड़ की यह सरकारी धनराशि पूर्व सांसद की अनुशंसा पर 10 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु उपलब्ध कराई गई थी ,जिसे विभिन्न व्यक्तियों के नामों से खातों से निकाल लिया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय को आपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड लालबाग लखनऊ के अध्यक्ष एवं निदेशक पद के लिए भी निर्वाचित रहे जीतेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा कोतवाली बस्ती में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2018 में पूर्व सासंद हरीश द्विवेदी की अनुशंसा पर वर्ष 2018 में नार्दन कोल्ड फील्ड सिंगरौली से निगमित सामाजिक दायित्व के अन्तर्गत 10 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 1.25 करोड रूपये प्राप्त हुए थे ,जिसे भारतीय को-आपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड बस्ती की बैंक आफ इन्डिया शाखा बस्ती में एकाउन्ट खोलकर जमा किये गए थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एफ आई आर के अनुसार पवन कुमार पाण्डेय पुत्र गिरीश दत्त पाण्डेय बेलसर जिला गोण्डा, आशीष कुमार पाठक पुत्र मथुरा प्रसाद इस्माइलगंज इण्डस्ट्रीयल एरिया लखनऊ के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित इसी खाते से पवन कुमार पाण्डेय पुत्र गिरीश दत्त पाण्डेय, आशीष कुमार पाठक, शिवेन्द्र प्रताप सिंह, मो0 आमिर आदि द्वारा एक राय होकर मिली भगत करते हुए खाते से भिन्न भिन्न व्यक्तियों के नाम से सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 1.25 करोड रूपये प्राप्त धनराशि खाते से निकाल ली। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोपों के मुताबिक इसके उपरान्त नार्दन कोल्ड फील्ड सिंगरौली के सभी कार्य पूर्ण नहीं होने के बाद भी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र जमा कर दिया गया। जबकि निर्माण कार्यों के पूरा नहीं होने से संबंधित कई शिकायती पत्र ग्राम प्रधान द्वारा पहले ही भेजे जा चुके थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जान से मारने की धमकी और गाली गलौज करने का भी आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने वाले अध्यक्ष और निर्वाचित निदेशक भी रहे दहिलामऊ सिविल लाइन प्रतापगढ़ निवासी जीतेन्द्र कुमार अग्रवाल के मुताबिक उपरोक्त सभी ने भारतीय को-आपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड लिमिटेड लालबाग लखनऊ की छवि खराब करने के साथ-साथ जालसाजी कर कूटरचित अभिलेख तैयार करते हुए धनराशि का गबन धोखाधड़ी, अवैध लेनदेन और हेरा फेरी की है। अवगत कराते चलें कि संबंधित मामले में इसके पहले भी दो और मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। फिलहाल पुलिस अग्रिम कार्रवाई के लिए मामले की गहन विवेचना में लगातार जुटी हुई है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181202/case-filed-against-four-for-withdrawing-rs-125-crore-from</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर:वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में ग्राम पंचायत सचिव निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खुनियांव विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  चार ग्राम पंचायतों में  जांच के बाद कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अभिलेखों में कूटरचित, नियम विरुद्ध भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप भी जांच</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180893/siddharthnagar-gram-panchayat-secretary-suspended-on-charges-of-financial-irregularities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/download1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खुनियांव विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> चार ग्राम पंचायतों में  जांच के बाद कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अभिलेखों में कूटरचित, नियम विरुद्ध भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप भी जांच में सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है।जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा को ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को निलंबित करने तथा आगे की विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले की पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर हुए इस कथित गबन ने वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब पूरे प्रकरण की गहन जांच कर यह भी पता लगाने की तैयारी में है कि अनियमित भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग में अन्य किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। यह मामला सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) खुनियांव द्वारा ग्राम पंचायत खखरा-खखरी, बगहवा, सिरसिया और तेलियाडीह के निरीक्षण के बाद तैयार की गई जांच रिपोर्ट से उजागर हुआ। इस रिपोर्ट में विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर तथ्य सामने आए थे।जांच के अनुसार, ग्राम पंचायत खखरा-खखरी में आंगनबाड़ी केंद्र की मरम्मत और डस्टबिन इंस्टालेशन कार्यों में अनियमितता बरती गई। </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 21:13:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर में वित्तीय अनियमितता उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173370/draft-add-your-title-financial-irregularities-exposed-in-pwd-sultanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1003411464.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन किया जा रहा है। सड़क निर्माण कार्यों के खाते में स्टोर से सामग्री की खरीद और उसके परिवहन का खर्च सीधे डाला जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंडल स्तर पर न तो कोई MAS (मासिक लेखा सारांश) खाता है और न ही स्टॉक तथा T&amp;P (उपकरण एवं संयंत्र) का कोई उचित हिसाब-किताब रखा जा रहा है। संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) ने इन लेनदेन को मुख्य लेखा बहियों से बाहर रखा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वित्त विभाग के वर्ष 2022 के शासनादेश के अनुसार, सीधी बुकिंग के माध्यम से बिटुमेन या इमल्शन जैसी सामग्री खरीदना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, यहां धड़ल्ले से विभागीय खरीद जारी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 19:46:33 +0530</pubDate>
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