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                <title>Cyber Investigation - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Cyber Investigation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को वापस मिले 19 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केथाना दुबौलिया की साइबर सेल टीम ने साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के खाते में 19 हजार रुपये वापस कराकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने बस्ती पुलिस का आभार जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी कलवारी प्रदीप त्रिपाठी के नेतृत्व में चलाए जा रहे साइबर अपराध रोकथाम अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार थाना क्षेत्र के ऊंजी गांव निवासी दीनानाथ पुत्र परमात्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। उनके खाते से 19 हजार रुपये</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181133/victim-of-cyber-fraud-got-back-rs-19-thousand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0090.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केथाना दुबौलिया की साइबर सेल टीम ने साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के खाते में 19 हजार रुपये वापस कराकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने बस्ती पुलिस का आभार जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी कलवारी प्रदीप त्रिपाठी के नेतृत्व में चलाए जा रहे साइबर अपराध रोकथाम अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार थाना क्षेत्र के ऊंजी गांव निवासी दीनानाथ पुत्र परमात्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। उनके खाते से 19 हजार रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। पीड़ित ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर दर्ज कराई थी।शिकायत मिलने के बाद थाना दुबौलिया के प्रभारी निरीक्षक जीवन त्रिपाठी के निर्देशन में साइबर सेल प्रभारी अजय कुमार पांडेय एवं महिला कांस्टेबल साधना पांडेय ने मामले की जांच शुरू की। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई धनराशि को होल्ड कराया। इसके बाद नई एसओपी-2 के तहत एमआरएम (मनी रिस्टोरेशन मैकेनिज्म) पोर्टल की सहायता से पूरी 19 हजार रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस करा दी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रकम वापस मिलने पर दीनानाथ ने थाना दुबौलिया पुलिस और साइबर सेल टीम की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने तथा किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन 1930 या एनसीसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।</div>
</div>
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<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 19:05:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोशल मीडिया पर अदालत और न्यायाधीशों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी दो सगे भाई गिरफ्तार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर अदालत और न्यायाधीश के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कैंट पुलिस ने दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन वे यह स्पष्ट नहीं कर सके कि उन्होंने ऐसा आपत्तिजनक कमेंट क्यों किया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए दोनों भाई जालौन जिले के उरई थाना क्षेत्र के रूरा अड्डू और पिया निरंजनपुर गांव के निवासी हैं। उनकी पहचान दीपक कुमार और देविंदर कुमार के रूप में हुई है। दोनों भाई खेती का काम करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की जानकारी मिलने के बाद कैंट पुलिस ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173326/indecent-comments-against-the-court-and-judges-on-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260312-wa0175.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर अदालत और न्यायाधीश के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कैंट पुलिस ने दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन वे यह स्पष्ट नहीं कर सके कि उन्होंने ऐसा आपत्तिजनक कमेंट क्यों किया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए दोनों भाई जालौन जिले के उरई थाना क्षेत्र के रूरा अड्डू और पिया निरंजनपुर गांव के निवासी हैं। उनकी पहचान दीपक कुमार और देविंदर कुमार के रूप में हुई है। दोनों भाई खेती का काम करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की जानकारी मिलने के बाद कैंट पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संबंधित फेसबुक आईडी की जांच शुरू की। इसके लिए पुलिस ने Meta से संपर्क कर फेसबुक आईडी के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी। जांच के दौरान दोनों भाइयों के नाम सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने अभद्र टिप्पणी करने के पीछे कोई खास कारण नहीं बताया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर किसी भी संस्था या न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक या अभद्र टिप्पणी करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 23:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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