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                <title>aaj ki hindi khabar - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>रेखा सरकार के 100 दिन: उम्मीदों और चुनौतियों का सम्मिश्रण</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">हर्षवर्धन पान्डे<br />  <br />20 फरवरी 2025 को रेखा गुप्ता ने दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद 27 साल बाद दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हुआ और रेखा गुप्ता को इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी का नेतृत्व करने का मौका मिला।रेखा गुप्ता शालीमार बाग से पहली बार विधायक चुनी गई। हरियाणा के जींद में जन्मी और दिल्ली में पली-बढ़ीं रेखा गुप्ता का राजनीतिक सफर दिल्लीविश्वविद्यालय के छात्रसंघ की अध्यक्ष से शुरू हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">वह तीन बार दिल्ली नगर निगम की पार्षद और बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। उनकी नियुक्ति को</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152334/commonage-of-rekha-sarkars-100-days-of-expectations-and-challenges"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/harshvardhan_pande.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हर्षवर्धन पान्डे<br /> <br />20 फरवरी 2025 को रेखा गुप्ता ने दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद 27 साल बाद दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हुआ और रेखा गुप्ता को इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी का नेतृत्व करने का मौका मिला।रेखा गुप्ता शालीमार बाग से पहली बार विधायक चुनी गई। हरियाणा के जींद में जन्मी और दिल्ली में पली-बढ़ीं रेखा गुप्ता का राजनीतिक सफर दिल्लीविश्वविद्यालय के छात्रसंघ की अध्यक्ष से शुरू हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">वह तीन बार दिल्ली नगर निगम की पार्षद और बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। उनकी नियुक्ति को भाजपा की महिला सशक्तिकरण की परिकल्पना को साधने की रणनीति के रूप में देखा गया। उन्होनें 100 दिन के कार्यकाल में  अपनी सधी हुई शुरुआत से इसे साबित करके दिखाया है। न केवल दिल्ली की राजनीती में उन्होनें खुद को बेहतर ढंग से स्थापित करने की कोशिश की है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कार्यों से  खुद को अग्रिम पंक्ति में खड़ी सीएम  के तौर पर प्रस्तुत  किया है।<br /> <br />20 फरवरी 2025 को रेखा गुप्ता ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली जिसके बाद उनकी सरकार ने 30 मई 2025 को अपने 100 दिन पूरे किए। इस अवधि में भाजपा की नेतृत्व वाली सरकार ने दिल्ली को "विकसित, स्वच्छ और सुरक्षित" बनाने के वादे के साथ कई पहल शुरू की। सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना को लागू करने की मंजूरी दी। यह योजना दिल्लीवासियों को मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान करती है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है। रेखा गुप्ता सरकार ने केंद्र की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू किया जिसे पिछली आम आदमी पार्टी सरकार ने रोके रखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जा रहा है, साथ ही राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 5 लाख रुपये का टॉप-अप दिया जा रहा है। इसी प्रकार 'वयोवंदना योजना' के अंतर्गत 70 वर्ष से अधिक आयु के 6 लाख बुजुर्गों को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा सुनिश्चित किया गया। यह कदम बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 100 दिन में दिल्ली की सेहत सुधारने के लिए 100 दिन की सेवा में 12826 करोड रुपए का बजट दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">1139 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के निर्माण की योजना शुरू की गई। सभी सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र बनाने का फैसला लिया गया। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने, शिक्षकों की प्रशिक्षण प्रणाली को अपडेट करने और विद्यार्थियों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने का वादा किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का सुधार और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया गया है।<br /><br />रेखा गुप्ता ने सरकार की कमान संभालते  ही यमुना नदी की सफाई को प्राथमिकता दी। रेखा गुप्ता ने भलस्वा लैंडफिल साइट का दौरा कर वहाँ वृक्षारोपण और सफाई की शुरुआत की। यमुना के वसुदेव घाट पर उन्होंने कैबिनेट के साथ आरती की और नदी की सफाई को अपनी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता घोषित किया। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है।सरकार ने यमुना नदी को पुनर्जनन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के साथ एक एमओयू भी साइन किया जिसमें  वजीराबाद बैराज से जगतपुर तक फेरी और क्रूज सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के साथ 27 नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को मंजूरी दी गई और एक समग्र 'अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान' तैयार किया गया। यह दीर्घकालिक परियोजना है जिसके ठोस परिणाम अभी सामने नहीं आ पाए हैं। यमुना नदी की सफाई और सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध जैसे कदम भी उनकी प्राथमिकताओं में हैं। हालांकि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दीर्घकालिक योजना और संसाधनों की आवश्यकता होगी। </p>
<p style="text-align:justify;">रेखा गुप्ता ने मॉनसून से पहले दिल्ली के प्रमुख नालों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को सफाई के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने बाहरी रिंग रोड को गड्ढा-मुक्त करने का लक्ष्य भी रखा जो दिल्ली की बुनियादी ढांचे की समस्याओं को हल करने की दिशा में एक प्रयास है। यमुना की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण में प्रगति धीमी  है और दिल्ली अभी भी सबसे प्रदूषित राजधानियों में अग्रणी है।  सड़कों की स्थिति सुधारने, ट्रैफिक जाम को कम करने और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने के लिए नए प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><br />दिल्ली में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने मुंबई से अत्याधुनिक मशीनें मंगवाकर सीवर और नालों की सफाई शुरू की जिससे मिंटो ब्रिज जैसे क्षेत्रों में सुधार हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। शालीमार बाग में आयुर्वेदिक झुग्गी में सीवेज प्लांट की समस्या हल हुई वहीँ हैदरपुर गांव में नई नाली बनाई गई और मैक्स अस्पताल के पास खुले नाले को 34 लाख रुपये की लागत से ढका गया। ये कदम जल निकासी और स्वच्छता में सुधार ला रहे हैं लेकिन पूरी दिल्ली की तस्वीर बदलने में अभी लम्बा समय लगेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मई 2025 में दिल्ली में  एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 तक पहुंच गया, जो मई के महीने में अभूतपूर्व था। प्रदूषण  के निवारण के लिए अभी दिल्ली को किसी दीर्घकालिक योजना की दरकार है। 100 दिवस के कार्यकाल में 16 लाख मीट्रिक टन गाद यमुना से हटाई गई और 804 करोड़ की लागत से आठ अमृत परियोजनाओं को मंजूरी सरकार के द्वारा दी गई। यमुना की सफाई के लिए 40 एसटीपी मंजूर किये गए। 1167 जीपीएस टैंकर चलकर दिल्ली के टैंकर माफिया के खिलाफ बड़ा प्रहार किया गया। दिल्ली में आम जान से सुझाव मांगे  और 1 लाख  करोड़ का ऐतिहासिक बजट सरकार द्वारा पेश किया गया।<br /> <br />मुफ्त बिजली योजना के तहत सरकार ने 30  हजार तक अतिरिक्त सब्सिडी देने का फैसला किया है। आगामी तीन वर्षों में 2. 3 लाख घरों को  सोलर ऊर्जा से रोशन करने  का संकल्प लिया है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में सरकार ने 75 सीएम श्री स्कूल शुरू करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही 1 लाख 63 हजार बच्चों को फ्री नीट और जेईई की कोचिंग की सुविधा सरकार  द्वार दी गई। सरकार का वर्तमान में फोकस स्कूलों और नगर निगम के पुस्तकालयों को डिजिटल करने का है।</p>
<p style="text-align:justify;">सार्वजनिक परिवहन को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने 460 इलेक्ट्रानिक बसें चलाई। इस साल के अंत तक शहर में 4,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि झुग्गियों को तोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि वहां पेयजल, सीवर पाइपलाइन और शौचालय जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।यह नीति झुग्गीवासियों के लिए राहत लेकर आई जो पहले वोट बैंक के रूप में देखे जाते थे और तोड़े जाने के डर से जूझते थे।  एक समावेशी कदम है, जो गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर कर सकता है लेकिन संसाधन आवंटन और कार्यान्वयन की चुनौती बनी हुई है। अभी भी दिल्ली गैस चैंबर बानी हुई है और जाम की समस्या से हर घंटे  जूझ रही है।<br />  <br />ओखला लैंडफिल साइट पर 60 मीटर ऊंचे कचरे के पहाड़ को बायो-माइनिंग तकनीक से 20 मीटर तक कम किया गया। 62 एकड़ में फैले इस लैंडफिल के 30 एकड़ को उपयोगी बनाया गया और 56 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण हुआ। दिसंबर 2025 तक 30 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरे को हटाने का लक्ष्य है, जिसे अक्टूबर तक पूरा करने की कोशिश है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक ठोस कदम है लेकिन तय समय सीमा में लक्ष्यों को पूरा करना सरकार की दक्षता पर निर्भर करेगा। रेखा गुप्ता ने निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने के लिए अध्यादेश लाने की योजना का खुलासा किया ताकि माता-पिता पर अनुचित बोझ न पड़े। यह शिक्षा को सुलभ बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम है लेकिन निजी संस्थानों के साथ समन्वय और कानूनी प्रक्रिया इसे जटिल बना सकती है।<br /> <br />रेखा गुप्ता ने विश्वास, विकास और व्यवस्था पर शुरूआती 100 दिनों में सधी हुई शुरुआत की है। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में '100 दिन सेवा के' कार्यक्रम में अभिनेता अनुपम खेर के साथ संवाद ने जनता को उत्साहित किया। रेखा गुप्ता की सक्रियता और जमीनी स्तर पर काम करने की शैली को जनता ने भी सराहा है। उनके द्वारा सड़कों पर उतरकर नालों का निरीक्षण और यमुना आरती जैसे कदमों को जनता से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा गया।डबल और ट्रिपल इंजन सरकार के नारे के साथ भाजपा पर दिल्ली को विश्वस्तरीय बनाने की जिम्मेदारी है जो आसान नहीं है। शुरूआती 100 दिनों में रेखा गुप्ता ने  प्रशासनिक ढांचे को सुधारने, सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर कड़ी नज़र रखने का वादा किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें सरकारी दफ्तरों में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देना और नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना शामिल है। इन कदमों से उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होगा। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने, शिक्षकों की प्रशिक्षण प्रणाली को अपडेट करने और विद्यार्थियों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने का वादा किया गया है। इसके साथ ही, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का सुधार और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया गया है।<br /> <br />रेखा गुप्ता के 100 दिनों में आयुष्मान भारत, यमुना सफाई, जलभराव समाधान, झुग्गी सुधार और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कदम उठाए गए हैं। हालांकि, 100 दिन किसी सरकार के प्रदर्शन का पूर्ण मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। प्रदूषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और बुनियादी ढांचे की पुरानी समस्याएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली चुनावों के दौरान भाजपा ने बड़े जोर शोर से महिलाओं के लिए महिला समृद्धि योजना लागू करने के वादे बड़े जोर शोर से किये थे जिसमें  2500 रु देने की बात कही थी लेकिन भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद भी यह योजना अभी तक अधर में लटकी है और विपक्ष के निशाने पर भाजपा है। प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत' के साथ 'विकसित दिल्ली'  अभी दूर की गोटी है। आने वाला समय इस दिशा में उनकी काबिलियत को परखेगा।<br /> <br />रेखा गुप्ता के पहले 100 दिन दिल्ली में बीजेपी की नई सरकार के लिए एक मजबूत शुरुआत का प्रतीक रहे। महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर उनके कदम जनता के बीच विश्वास जगाने की कोशिश करते हैं। हालांकि प्रदूषण, जाम ,जलभराव और चुनावी वादों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की पहाड़ सरीखी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के शुरूआती 100 दिनों में कई महत्वपूर्ण बदलाव और फैसले हुए हैं। कहा जा सकता है कि उनके पहले 100 दिन आम नागरिकों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहे हैं।<br /> <br />(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं)</p>]]>
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                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 16:20:12 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी, कलंक कथा-2</title>
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                        <![CDATA[इसी क्रम में उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की एक अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (अब सेवा निवृत) आयुष विभाग की तत्कालीन अपर मुख्य सचिव रही आराधना शुक्ला के द्वारा यूपी आयुष सोसाइटी से सांठ गाँठ करके किये गए सीसीटीवी कैमरा घोटाले से सम्बंधित है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131055/corrupt-ias-officers-of-the-useful-government-of-uttar-pradesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/उत्तर-प्रदेश-की-उपयोगी-सरकार-के-भ्रष्ट-आईएएस-अधिकारी,-कलंक-कथा-2 .jpg" alt=""></a><br /><h6><strong>विशेष संवाददाता, <a title="स्वतंत्र प्रभात" href="https://epaper.swatantraprabhat.com">स्वतंत्र प्रभात,</a> लखनऊ </strong></h6>
<p><br />भारतीय प्रशासनिक सेवा का पद सम्मान का पद होता है, लाखों का वेतन, भत्ते, गाड़ी, बँगला, नौकर चाकर, सुरक्षाकर्मी, अनेको सुख सुविधाओं के बाद भी आईएएस अधिकारी भ्रष्ट हो जाता है, दिनांक 16 जून 2023 के अंक में प्रकाशित समाचार में शीर्षक उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी, कलंक कथा 1 में पाठकों ने उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत त्रिवेदी के काले कारनामे और भ्र्ष्टाचार की कथा को पढ़ा था,</p>
<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/aradhna_shukla-ias.jpeg" alt="aradhna_SHUKLA IAS"></img>

<h6><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>आराधना शुक्ला-आईएएस अधिकारी (अब सेवा निवृत)</strong></span></h6>


<p> </p>
<p> इसी क्रम में उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की एक अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (अब सेवा निवृत) आयुष विभाग की तत्कालीन अपर मुख्य सचिव रही आराधना शुक्ला के द्वारा यूपी आयुष सोसाइटी से सांठ गाँठ करके किये गए सीसीटीवी कैमरा घोटाले से सम्बंधित है, मामला कुछ इस प्रकार से है, उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग द्वारा 871 आयुष वेलनेस सेंटर्स, 19 आयुष महाविद्यालयों और 11 पचास शैया आयुष अस्पतालों के लिए सीसीटीवी कैमरा और बायोमेट्रिक अटेंडेंस की मशीनो की खरीद की जानी थी, </p>
<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/mahendraverma.jpg" alt="Mahendra Verma Lucknow"></img>

<h5><strong>Mahendra Verma Lucknow</strong></h5>


<p> </p>
<p>जिसके लिए तत्कालीन अपर मुख्य सचिव आयुष विभाग आराधना शुक्ला द्वारा उत्तर प्रदेश आयुष सोसाइटी को निविदा करने के लिए अधिकृत कर दिया, यूपी आयुष सोसाइटी द्वारा सीसीटीवी कैमरा और बायोमेट्रिक अटेंडेंस की मशीनो की खरीद के लिए 21 जनवरी को जेम पोर्टल पर निविदा निकाली गयी थी, उक्त निविदा निकलने से पहले ही घोटाले की पटकथा तैयार कर ली गयी थी,</p>
<h2 class="tag_h1 node_title"><a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131103/corrupt-ias-officers-of-the-useful-government-of-uttar-pradesh"><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी, कलंक कथा 1</strong></span></a></h2>
<p>उक्त निविदा में सप्लायर खदरा निवासी प्रतीक गुप्ता मालिक फर्म प्रतीक एंटर प्राइज से सांठ गाँठ करके पहले से ही चीनी कंपनी हॉक विजन के स्पेसिफिकेशन डाले गए और फिर 29 जनवरी को 30 मिनट के भीतर जेम पोर्टल पर तीन सप्लायर ने निविदा डाली, प्रतीक इंटरप्राइज, शिवगंगा इलेक्ट्रिकल, त्रयंबकेश्वर गोदावरी ट्रेडर्स, यह तीनो लखनऊ स्थित फर्मे है और कोई भी निर्माता नहीं है, किसी के पास भी किसी सरकारी विभाग में इन उपकरणों की पूर्व सप्लाई का अनुभव नहीं था,</p>
<p> जोकि निविदा की महत्वपूर्ण शर्तों में से एक था और तीनो फर्मों की दरों में ज्यादा  अंतर नहीं है, इसके अतिरिक्त चीनी कंपनी हॉक विजन के उत्पाद बेहद घटिया है और यह कंपनी कई देशों में ब्लैकलिस्टेड है, और इस कंपनी पर भारत में जासूसी का भी आरोप है, परन्तु उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के घोटालेबाज़ अफसरों को इन सबसे कोई लेना देना नहीं है, देश हित से ऊपर उनका भ्र्ष्टाचार है, अपने स्वार्थ सिद्धि को देखते हुए 2 मई को प्रतीक इंटर प्राइज को करोड़ों का क्रय आदेश जारी कर दिया गया है, जो कैमरा बाजार में 2000 रूपये का है उसे 6715 रूपये प्रति कैमरे की दर से, और बायोमेट्रिक अटेंडेंस मशीन 9495 रूपये प्रति की दर से खरीदी गयी है जो बाजार में लगभग 5000 रूपये में उपलब्ध है, </p>
<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/prateek-gupta-1.jpeg" alt="PRATEEK GUPTA 1"></img>

<h5><strong>PRATEEK GUPTA Lucknow</strong></h5>


<p> </p>
<p>शासन में शिकायत होने पर प्रमुख सचिव आयुष लीना जौहरी द्वारा उत्तर प्रदेश आयुष सोसाइटी मिशन निदेशक आईएएस महेंद्र वर्मा को जांच सौपी गयी है, आईएएस महेंद्र वर्मा द्वारा 6 सदस्य की जांच कमिटी का गठन किया गया है, परन्तु जांच के नाम पर खानापूर्ति करके अंदरखाने से प्रतीक एंटरप्राइज को भुगतान की तैयारी चल रही है और कुछ ही दिनों में उसको भुगतान होने वाला है, यह है उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के घोटाले बाज़ आईएएस अधिकारीयों का सच, स्वास्य्थ विभाग भृष्ट अफसरों के लिए वरदान है, अब समझना यह है की स्वास्थ्य विभाग में तैनात अधिकारी घोटाला करते है या घोटालेबाज़ अधिकारीयों की ही तैनाती स्वास्थ्य विभाग में की जाती है,</p>
<p> क्युकी किसी भी जांच में किसी भी अधिकारी को सजा नहीं हुयी है, स्वास्थ्य का बड़ा बजट गरीबों को स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर इस्तेमाल किया जाता है परन्तु गरीब अस्पतालों में मरता रहता है और घोटालेबाज़ ऐश करते रहते है, सरकार में किसका वरदहस्त प्राप्त है इन घोटालेबाज़ों को यह भी बड़ा सवाल है ?? </p>
<h5><br /><a href="https://www.swatantraprabhat.com"><span style="color:rgb(53,152,219);"><strong>अगले शुक्रवार एक नए घोटालेबाज़ आईएएस के काले कारनामों के साथ आपका अपना दैनिक स्वतंत्र प्रभात</strong></span></a></h5>
<p> </p>
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<h2 class="tag_h1 node_title"><span style="color:rgb(186,55,42);"><a style="color:rgb(186,55,42);" href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129411/corrupt-ias-officer-amit-mohan-prasad-became-synonymous-with-corruption"><strong>भ्रस्टाचार का पर्यायवाची बने भृष्ट आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद</strong></a></span></h2>
</div>
</div>
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</div>]]>
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                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 16:10:32 +0530</pubDate>
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                <title>जिम्मेदारियों के बोझ तले कुचलता मासूम बचपन</title>
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<p><strong>(अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस विशेष - 12 जून 2023)</strong></p>
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<p>बाल श्रम एक कानूनी अपराध और समाज में लगा अभिशाप है जो बच्चों को उनके स्कूल जाने के अधिकार से वंचित करता है और गरीबी को बढ़ाने में सहायक है। फिर भी अनेक बाल श्रम प्रतिबंधित कानून और जन जागरूकता के बावजूद बाल मजदूरी ख़त्म नहीं हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के सहायक वर्ग के रूप में कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन,  बाल श्रम को परिभाषित करते हुए कहता है कि, "बाल श्रम अर्थात ऐसा काम जो बच्चों को उनके बचपन, उनकी क्षमता और उनकी गरिमा से वंचित करता है, और</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130426/innocent-childhood-crushed-under-the-burden-of-responsibilities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/जिम्मेदारियों-के-बोझ-तले-कुचलता-मासूम-बचपन.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><strong>(अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस विशेष - 12 जून 2023)</strong></p>
<p> </p>
<p>बाल श्रम एक कानूनी अपराध और समाज में लगा अभिशाप है जो बच्चों को उनके स्कूल जाने के अधिकार से वंचित करता है और गरीबी को बढ़ाने में सहायक है। फिर भी अनेक बाल श्रम प्रतिबंधित कानून और जन जागरूकता के बावजूद बाल मजदूरी ख़त्म नहीं हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के सहायक वर्ग के रूप में कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन,  बाल श्रम को परिभाषित करते हुए कहता है कि, "बाल श्रम अर्थात ऐसा काम जो बच्चों को उनके बचपन, उनकी क्षमता और उनकी गरिमा से वंचित करता है, और जो शारीरिक और मानसिक विकास के लिए हानिकारक है।" यह समस्या आगे चलकर अनेक गंभीर सामाजिक समस्याओं को बढ़ावा देती है। बाल श्रम के विरोध में जनजागृति हेतु हर साल 12 जून को “अंतराष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस” पूरी दुनिया में मनाया जाता है ताकि बच्चों को उनका हक़ मिले। इस साल 2023 के लिए यूएन द्वारा जाहिर थीम "सभी के लिए सामाजिक न्याय और बाल श्रम खत्म करो" यह है। बाल मजदूरी के खिलाफ हम सबको मिलकर लड़ना होगा तभी इस समस्या से निजात मिलेगी।</p>
<p>मनुष्य के सम्पूर्ण जीवनकाल में निस्वार्थ भाव और सुखमय समय बचपन का कहलाता है, तब बच्चे गीली मिट्टी की भांति होते है अर्थात निराकार। उन्हें योग्य वातावरण में अच्छी शिक्षा-संस्कार देकर समाज में एक जिम्मेदार नागरिक और कर्तृत्ववान मानव बनाया जाता है, ताकि बच्चे बड़े होकर खुद के, समाज के, देश के और समस्त मानव जाती के कल्याण और विकास में अपना योगदान दे सकें। बचपन में बच्चों द्वारा ली जाने वाली शिक्षा उन्हें जीवन विकास का बेहतर मार्ग प्रशस्त करता है। शिक्षा उन्हें परिपूर्ण  बनाती है और जीवन में सतत प्रगति पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करती है, इससे व्यक्ति के विकास के साथ, समाज और देश का भी विकास होता है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का आधार है, यदि बच्चों के हाथ में किताबों की जगह जिम्मेदारी का बोझ दिया जाये तो वे अपने विकास से वंचित हो जायेंगे, उनकी मासूमियत कुचल दी जाएगी, उनका हक़ छीना जाएगा। जीवन अनमोल है, बाल मजदूरी बच्चे का आने वाला सुनहरा कल तबाह करती है। बच्चे स्कूलों में जाने के लिए होते है, कार्यस्थलों पर नहीं। बाल श्रम शिक्षा के लिए एक प्रमुख बाधा के रूप में कार्य करता है, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, स्वास्थ्य विकास भी रोकता है। मासूम बचपन बचाने के लिए हमें बड़ा जन अभियान चलाना होगा।</p>
<p>यूनिसेफ इंडिया और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन अनुसार, 2011 की जनगणना के आंकड़े दर्शाते है कि, भारत में बाल श्रमिकों की संख्या 10,100,000 है, जिनमें 56 लाख लड़के और 45 लाख  लड़कियां हैं। भारत में 4.27 करोड़ से अधिक बच्चे स्कूल से बाहर हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश मिलकर भारत में कुल कामकाजी बच्चों का लगभग 55% हैं। सेव द चिल्ड्रन, 2016 अनुसार, उत्तर प्रदेश में बाल श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक है, भारत में 20% से अधिक बाल श्रमिक अकेले इस राज्य के हैं। कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन और 2011 की जनगणना के अनुमानों की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्तमान साल 2023 में 78 लाख बाल श्रमिक होंगे, जिसमें लड़के-लड़कियों की हिस्सेदारी क्रमशः 57% और 43% होगी। कोरोना काल ने बाल श्रम बढ़ाने में विशेष योगदान दिया है।</p>
<p>विश्व स्तर पर बाल श्रम में कुल 15.20 करोड़ बच्चे (8.8 करोड़ लड़के और 6.4 करोड़ लड़कियां) होने का अनुमान है, जो दुनिया भर में सभी बच्चों में से लगभग दस में से एक है। यूनिसेफ कहता है कि दुनिया के सबसे गरीब सबसे कम विकसित देशों में, हर 5 में से 1 से अधिक बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं। साल 2012 में बाल श्रमिकों का वैश्विक आंकड़ा 16.8 करोड़ है। एशिया और प्रशांत क्षेत्र में अभी भी बाल श्रमिकों की सबसे बड़ी संख्या लगभग 7.8 करोड़ या बाल आबादी का 9.3% है, लेकिन उप-सहारा अफ्रीका बाल श्रम की उच्चतम संख्या 5.9 करोड़, 21% से अधिक वाला क्षेत्र बना हुआ है। विश्व स्तर पर, कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा बाल श्रमिक पाए जा सकते हैं अर्थात 9.8 करोड़ और सेवाएँ 5.4 करोड़, उद्योग में 1.2 करोड़ बाल मजदुर हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ के अनुसार, 300000 से अधिक बाल सैनिकों को सशस्त्र युद्ध में मजबूर किया गया।</p>
<p>बाल श्रम को समाप्त करने की लड़ाई में सरकार की मदद करने के लिए यूनिसेफ, केयर इंडिया, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन, ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर, स्माइल फाउंडेशन, डॉन बॉस्को बालप्रफुल्टा, सेव द चिल्ड्रन, चाइल्ड राइट एंड यू, हैंड इन हैंड इंडिया, बचपन बचाओ आंदोलन, तलाश एसोसिएशन, जैसे अनेक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) कार्यरत है। हैंड इन हैंड इंडिया एनजीओ, जिसने 300,000 से अधिक बच्चों (पूर्व बाल मजदूरों) को वापस स्कूल में भेजा। बाल मजदूरी करने की मजबूरी कोई भी हो, लेकिन बाल श्रम गलत है, अपराध है। सरकार ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए विभिन्न कानून नीति और कार्यक्रम शुरू किए हैं, सरकारी नियमों का कड़ाई से पालन हों, यह हम सबकी जिम्मेदारी है। सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा बाल श्रम रोकने के लिए पेंसिल पोर्टल बनाया है। कही पर भी बाल मजदुर नजरआये तो बाल श्रम संबंधित शिकायत के लिए तुरंत पेंसिल पोर्टल पर लॉगिन कर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या 1098 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें अन्यथा नजदीकी पुलिस स्टेशन से भी संपर्क कर सकते है। गैर सरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन के हेल्पलाइन नंबर 1800-102-7222 पर भी कॉल कर सकते हैं। हमारी जागरूकता किसी मासूम का भविष्य उज्जवल बना सकती है।</p>
<p><strong>डॉ. प्रितम भि. गेडाम</strong></p>]]>
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                <pubDate>Sat, 10 Jun 2023 16:47:37 +0530</pubDate>
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