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                <title>maharastra - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>बाबा सिद्दीकी की हत्या के मुख्य आरोपी का दावा — पाकिस्तान के गैंगस्टर ने भारत से भागने में की मदद</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: </strong></p>
<p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के मुख्य आरोपियों में से एक जीशान अख्तर ने एक कथित वीडियो में दावा किया है कि वह पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी की मदद से भारत से भागा है.</p>
<p>सोशल मीडिया पर एक्टिव भट्टी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो अपलोड करते हुए लिखा: “…तुम मेरे भाई हो.”</p>
<p>अख्तर ने वीडियो में कहा, “मैं जीशान हूं. उन्होंने मेरे खिलाफ (बाबा सिद्दीकी मामले का ज़िक्र करते हुए) रेकी का मामला दर्ज किया है. शहजाद भाई ने इस मुश्किल समय में मेरा साथ दिया.</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169559/main-accused-in-baba-siddiquis-murder-claims-pakistani-gangster"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/baba-siddiki.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong></p>
<p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के मुख्य आरोपियों में से एक जीशान अख्तर ने एक कथित वीडियो में दावा किया है कि वह पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी की मदद से भारत से भागा है.</p>
<p>सोशल मीडिया पर एक्टिव भट्टी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो अपलोड करते हुए लिखा: “…तुम मेरे भाई हो.”</p>
<p>अख्तर ने वीडियो में कहा, “मैं जीशान हूं. उन्होंने मेरे खिलाफ (बाबा सिद्दीकी मामले का ज़िक्र करते हुए) रेकी का मामला दर्ज किया है. शहजाद भाई ने इस मुश्किल समय में मेरा साथ दिया. उन्होंने मुझे भारत से भागने में मदद की. मैं एशिया से बहुत दूर हूं. वह मेरे लिए बड़े भाई की तरह हैं. उन्होंने मुझे पनाह दिलाई. भारतीयों को पता चल जाएगा कि मैं किस देश में हूं.” हालांकि, वीडियो को बाद में हटा दिया गया है.<br />एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के आरोपी जीशान अख्तर को वीडियो में पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी का शुक्रिया अदा करते हुए सुना जा सकता है, जिसने उसे भारत से भागने में मदद की.</p>
<p>इसके बाद अख्तर ‘दुश्मनों’ को जान से मारने की धमकी देता है. पिछले महीने, मुंबई पुलिस ने बाबा सिद्दीकी हत्या मामले में 4,590 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें बताया गया कि हत्या कैसे की गई.</p>
<p>जांचकर्ताओं के अनुसार, जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल के इशारे पर यह गोलीबारी की गई थी. अनमोल वर्तमान में अमेरिका में भगोड़ा है. आरोपपत्र में 26 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जबकि अनमोल बिश्नोई, शुभम लोनकर और जीशान अख्तर को फरार घोषित किया गया है.</p>
<p>सिद्दीकी को पिछले साल 12 अक्टूबर को मुंबई के बांद्रा ईस्ट में बेटे जीशान के ऑफिस से बाहर निकलते समय गोली मार दी गई थी. घटनास्थल से दो आरोपियों को पकड़ा गया था.  कैसे मूल रूप से पंजाब के जालंधर का रहने वाला अख्तर जेल में रहने के दौरान बिश्नोई गिरोह के सदस्यों के संपर्क में आया. सूत्रों ने कहा कि अख्तर लोनकर के संपर्क में था और उसने अन्य आरोपियों को सिद्दीकी की गतिविधियों पर नज़र रखने का काम सौंपा था.</p>
<p>जांचकर्ताओं के अनुसार, भट्टी, जिसके दुबई में होने का संदेह है, बिश्नोई गिरोह का जाना-माना सहयोगी है. पिछले साल जून में बिश्नोई द्वारा भट्टी को ईद की शुभकामनाएं देने का एक वीडियो सामने आया था. मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमें वीडियो के बारे में पता है. वीडियो में किए गए दावों की प्रामाणिकता का पता लगाने के लिए जांच जारी है.”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नालासोपारा में भाजपा-महायुति की ताक़त का प्रदर्शन मंत्री नितेश राणे ने प्रचार रैली के ज़रिए चुनावी फूंका बिगुल </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format1"><strong>नालासोपारा </strong><br /><strong>पालघर महाराष्ट्र</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">वसई-विरार नगर निगम चुनावों के मद्देनजर, आज नालासोपारा (पश्चिम) के वार्ड नंबर 14,11  के पाटणकर पार्क,समेल पाड़ा, नीलेमोरे गांव देवी मंदिर में भाजपा महायुति के उम्मीदवारों के लिए प्रचार हेतु एक भव्य जनसभा आयोजित की गई, जिसमें नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिकों की इस सहज प्रतिक्रिया के साथ आयोजित इस प्रचार सभा में, नागरिकों ने बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा, स्वच्छता, जल आपूर्ति, सड़कों, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर नागरिकों से सीधे संवाद किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कई वर्षों से उपेक्षित रहे इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में लाना है तो यह अत्यंत आवश्यक है कि सत्ता सक्षम,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165574/minister-nitish-rane-demonstrated-the-strength-of-bjp-mahayuti-in-nalasopara"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/whatsapp-image-2026-01-09-at-01.41.35.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1"><strong>नालासोपारा </strong><br /><strong>पालघर महाराष्ट्र</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">वसई-विरार नगर निगम चुनावों के मद्देनजर, आज नालासोपारा (पश्चिम) के वार्ड नंबर 14,11  के पाटणकर पार्क,समेल पाड़ा, नीलेमोरे गांव देवी मंदिर में भाजपा महायुति के उम्मीदवारों के लिए प्रचार हेतु एक भव्य जनसभा आयोजित की गई, जिसमें नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिकों की इस सहज प्रतिक्रिया के साथ आयोजित इस प्रचार सभा में, नागरिकों ने बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा, स्वच्छता, जल आपूर्ति, सड़कों, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर नागरिकों से सीधे संवाद किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कई वर्षों से उपेक्षित रहे इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में लाना है तो यह अत्यंत आवश्यक है कि सत्ता सक्षम, ईमानदार और विकासोन्मुखी नेतृत्व के हाथों में हो। इसके लिए उन्होंने भाजपा-महायुति के उम्मीदवारों से आगामी चुनावों में अधिक से अधिक मतदान करने और जीत हासिल करने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">सभा में पार्षद पद के उम्मीदवार विधायक राजन नाइक के साथ-साथ भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 16:22:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झोपड़ी पुनर्वसन विकासक की मनमानी को लेकर मकबूल कंपाउंड की जनता में आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>रिपोर्ट राम कृष्ण मिश्रा</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मुंबई</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मलाड मकबूल कंपाउंड  पठानवाडी मलाड (पूर्व)  दिंडोशी देवी विजय लक्ष्मी सहकारी गृहनिर्माण संस्था (नियोजित) व शिव सृष्टि दिंडोशी सहकारी गृहनिर्माण संस्था (नियोजित) के रहिवासी एवं कार्यकर्ताओ ने जनसभा किया सभा में उपस्थित प्रकाश मनुभाई वकानी,सुशील कुमार पाठक, नंदकुमार लखन, मनु भाई वकानी, प्रभु मोहिते, कैलाश सिंह, परवेज खान, डाबरी अनीता गुप्ता आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे उन्होंने अपने परिसर में चल रहे झोपड़पट्टी पुनर्वसन सर्वेक्षण कार्यो के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि परिसर में चल रहे झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना में कार्य संस्था अपनी विकास कर रही है कुछ झोपड़ी धारकों को बहला फुसलाकर धमकाकर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153651/outrage-among-the-people-of-maqbool-compound-regarding-the-arbitrariness"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/1000814474.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>रिपोर्ट राम कृष्ण मिश्रा</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मुंबई</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मलाड मकबूल कंपाउंड  पठानवाडी मलाड (पूर्व)  दिंडोशी देवी विजय लक्ष्मी सहकारी गृहनिर्माण संस्था (नियोजित) व शिव सृष्टि दिंडोशी सहकारी गृहनिर्माण संस्था (नियोजित) के रहिवासी एवं कार्यकर्ताओ ने जनसभा किया सभा में उपस्थित प्रकाश मनुभाई वकानी,सुशील कुमार पाठक, नंदकुमार लखन, मनु भाई वकानी, प्रभु मोहिते, कैलाश सिंह, परवेज खान, डाबरी अनीता गुप्ता आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे उन्होंने अपने परिसर में चल रहे झोपड़पट्टी पुनर्वसन सर्वेक्षण कार्यो के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि परिसर में चल रहे झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना में कार्य संस्था अपनी विकास कर रही है कुछ झोपड़ी धारकों को बहला फुसलाकर धमकाकर एग्रीमेंट कराया जा रहा है और करारनामा की कॉपी की प्रति झोपड़ीधारकों को नहीं दी जा रही है l</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्योंकि विकासक और उनके स्वयं शंभू कार्यकर्ता जनता का विकास नहीं अपना विकास सोच रहे हैं । बीते 25 वर्षों से सिर्फ और सिर्फ कई विकासक को लाकर हर बार जनता को गुमराह करते रहे और अपना विकास करते रहे । जब भी कोई झोपड़ीधारक विकास की बात करता हैं तो विकासक और उनके स्वयं शंभू कार्यकर्ता कुछ ना कुछ बहाना करके लोगों को गुमराह करते रहे हैं । जब एक विकासक से पेट भर जाता हैं तो दूसरे विकासक को लाकर जनता को ऐसे बताते हैं कि अब आपका विकास ये करेंगे लेकिन सच्चाई अब जनता जान चुकी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि मकबूल कंपाउंड की ७० प्रतिशत के करीब जमीन मालिक की जगह रहते हुए अभी तक किसी विकासक ने जगह लेने का प्रयास नहीं किया क्योंकि उनके स्वयं शंभू कार्यकर्ता विकासक को गुमराह करते थे और अपना विकास करते थे उनका विकास से कुछ लेना-देना नहीं था इसके लिए उन्होंने कभी भी विकासक को सही मार्गदर्शन नहीं दिया गुमराह करके सिर्फ और सिर्फ अपना विकास किया । एक विकासक थक जाता था तो वह दूसरा विकासक लेकर आते हैं l</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर जमीन मालिक की जमीन है तो उसे जमीन को खरीदने के बाद ही उसे जमीन का विकास किया जा सकता है इसके लिए मेसर्स उनवल रियल्टर मालाड LLP ने सही तरीके से जो जमीन के मालिक है उनसे जमीन खरीदने का प्रयास किया है और हमारे परिसर का भी विकास मेसर्स उनवल रियल्टर मालाड LLP ही करेगी और हम सभी मकबूल कंपाउंड के रहिवासी मेसर्स उनवल रियल्टर मालाड LLP के साथ है वही विकास कर सकते हैं। जानकार बनिए सतर्क रहिए और स्वयं शंभू कार्यकर्ताओं से बचकर रहिए और अपने परिसर का विकास करिए ऐसा वहां के लोगों का कहना है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/153651/outrage-among-the-people-of-maqbool-compound-regarding-the-arbitrariness</link>
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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 20:27:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र के युवक का डुमरियागंज में संदिग्ध परस्थितियों में  फंदा से लटकता मिला शव*</title>
                                    <description><![CDATA[मृतक फाइल फोटो ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/152726/maharashtra-youth-found-dead-body-hanging-from-a-noose-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-06/1750435666276.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर-हरीश चौधरी </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के डुमरियागंज नगर पंचायत के महाराजा अग्रसेननगर में एक दुकान पर कारीगरी करने वाले युवक कर निर्माणाधीन भवन के दूसरे तल फंदे से लटकता शव मिला। घटना की सूचना मिलते ही हड़कंप मचा गया और मौके पर लोग इकट्ठा हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सचिन छगन चव्हाण (27) पुत्र छगन चव्हाण मोहल्ला गुजरकी मल्लाकरंजे गांव करंजे थाना खानापुर जिला सांगली महाराष्ट्र का निवासी था। वह डुमरियागंज रोडवेज स्थित एक सोना, चांदी टंच करने वाले दुकान पर काम करता था। प्रतिदिन की तरह रात में खाना खाकर सो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सुबह उठकर अपने मालिक योगेश तामवड़े पुत्र शाहजी तामवड़े निवासी मिकवड़ीबक जिला सांगली महाराष्ट्र हाल मुकाम महाराजा अग्रसेननगर थाना डुमरियागंज के निर्माणाधीन मकान के दूसरे तल के रोशनदान में  रस्सी बांधकर  कुर्सी पर खड़ा होकर गले में फंदा लगाकर फांसी लगा लिया। मृतक सचिन आविवाहित था और अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। पिता की मृत्यु हो चुकी हैं और दो बहनों की शादी हो चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घर पर महाराष्ट्र में केवल बीमार मां अकेले रहती हैं। सचिन अभी कुछ माह पहले घर से आया था। वह डुमरियागंज में अपने मालिक योगेश के पास लगभग दो साल से सोना चांदी टंच करने का काम करता था। प्रतिदिन की भांति गुरुवार रात में दुकान में अपने साथी अबासो दादासो पाटिल के साथ रात में 11 बजे खाना खाकर बजे सो गया था। सुबह करीब पांच से साढ़े पांच बजे के बीच उठकर दुकान के बगल के एक होटल पर चाय पीने गया। उसके बाद सुबह घूम रहा था। उसके बाद किसी ने नहीं देखा कि सचिन कहा गया। सुबह लगभग 8 बजे जब मालिक योगेश ने दूसरे साथी अबासो दादासो पाटिल को फोन कर नहाने और दुकान को खोलने के लिए कहा तो पता चला कि सचिन का फोन नहीं लग रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरे दुकान की चाभी सचिन के पास थी। दुकान की चाभी न मिलने पर मालिक ने सोचा कि दुकान का ताला तोड़कर दुकान खोल दिया जाए बाद में दूसरा ताला लगा दिया जाएगा। ताला काटने के लिए जब अबासो दादासो पाटिल निर्माणाधीन मकान के दूसरे तल पर लोहे की आरी लाने गया तो उसके होश उड़ गए। उसने देखा कि उसका साथी सचिन गत्ते बांधने वाले प्लास्टिक की रस्सी से रोशनदान में बांधकर फांसी लगा कर लटका हुआ है। उसने तुरंत अपने मालिक को सूचना दी और मालिक योगेश ने पुलिस को घटना की सूचना डी। मौके पर पुलिस पहुंची और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य संकलित करते हुए युवक के बॉडी का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बताया कि पोस्टमार्टम के बाद युवक के लाश को अंतिम संस्कार के लिए महाराष्ट्र उसके ले जाएंगे। प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश यादव ने बताया कि घटना की जानकारी है। युवक के लाश का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Jun 2025 22:18:51 +0530</pubDate>
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                <title>देश के ' बप्पा ' आप नहीं गणेश जी है</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गणपति जी पधार रहे है ।  महाराष्ट्र वालों ने गणपति यानि गणेश जी को 'बप्पा ' क्या कहा ,अब वे पूरे देश में और दुनिया में जहाँ -जहाँ भारतीय रहते हैं वहां -वहां '  ' बप्पा ' के नाम से ही जाने जाते हैं। दरअसल हमारे यहां असल नामों से ज्यादा उपनाम [निक नेम ] ज्यादा जल्दी ग्राह्य होते है।  जैसे राहुल गांधी को  भाजपा ने ' पप्पू ' कहा तो वे पूरे देश में इसी नाम से जाने -पहचाने लगे ।  अपने मोदी जी के साथ ' फेंकू ' शब्द ऐसा चस्पा हुआ जो लाख कोशिशों कके बावजूद हट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134824/the-father-of-the-country-is-not-you-but-ganesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/देश-के-&#039;-बप्पा-&#039;-आप-नहीं-गणेश-जी-है.jpg" alt=""></a><br /><p>गणपति जी पधार रहे है ।  महाराष्ट्र वालों ने गणपति यानि गणेश जी को 'बप्पा ' क्या कहा ,अब वे पूरे देश में और दुनिया में जहाँ -जहाँ भारतीय रहते हैं वहां -वहां '  ' बप्पा ' के नाम से ही जाने जाते हैं। दरअसल हमारे यहां असल नामों से ज्यादा उपनाम [निक नेम ] ज्यादा जल्दी ग्राह्य होते है।  जैसे राहुल गांधी को  भाजपा ने ' पप्पू ' कहा तो वे पूरे देश में इसी नाम से जाने -पहचाने लगे ।  अपने मोदी जी के साथ ' फेंकू ' शब्द ऐसा चस्पा हुआ जो लाख कोशिशों कके बावजूद हट नहीं पा रहा।</p>
<p>गणेश जी हमारे भारतीय आस्थाओं का एक ऐसा प्रतीक हैं जो चाहे मिटटी के बनाये जाएँ चाहे प्लास्टर आफ पेरिस के या फिर गोबर के ,रहते गणेश ही है।  उनके नाम का स्मरण करते ही जो तस्वीर हमारे जेहन में उभरती  है वो स्थायी ,एकरूप वाली होती है । यानि लम्बोदर ,गज-वदन मनोहर वाली। इस तस्वीर को कभी कोई मिटा नहीं पाया अर्थात ये तस्वीर अविनाशी है।  इसे किसी मुगल से,किसी अंग्रेज से या किसी उदयनिधि से कोई खतरा नहीं है ।  </p>
<p>गणेश जी हमारी संस्कृति के ऐसे नायक हैं जो जन-जन के प्रिय है।  उनकी काया  में गज और मनुष्य दोनों का समावेश है । उनका  ठेका कोई नहीं ले सकता। हालांकि देश में पहली बार विघ्नहर्ता गणेश के समारोह में सियासत ने भांजी मारने की कोशिश की है ।  देश की संसद का विशेष सत्र गणेश चतुर्थी के दिन ही आहूत किया गया है ,तमाम विरोध के बावजूद। लेकिन मुझे नहीं लगता की गणेश जी ने इसका बुरा माना होगा। क्योंकि वे जानते हैं कि उनके समारोह में विघ्न डालने वाले देश के असली बप्पा नहीं है। असली बप्पा तो वे खुद हैं।<br />  <br /> हमारी संस्मृति में श्री गणेश ऐसे अकेले नायक हैं जो लोकनायक भी हैं। उनकी अपनी विरासत है ,गणेश जी को लेकर अनेक  रोचक कथाएं और किंवदंतियां उनके साथ जुड़ी है।  वे सियासत में जिस तरह हमारे तमाम भाग्य विधाता लोकप्रिय हैं उसी तरह जनमानस में गणेश जी की लोकप्रियता किसी भी इंडेक्स में सबसे ऊपर है। उनके एक नहीं पूरे 108 नाम हैं ,जो उनके माता-पिता ने नहीं बल्कि उनके भक्तों ने रखे है। विसंगतियों  से भरपूर गणेश जी का एक दांत टूटा है लेकिन वे कभी किसी डेंटिस्ट के पास नहीं ले जाये गए। उनके अभिभावक चाहते तो उनका टूटा दांत भी बदला जा सकता था । क्योंकि उनकी इच्छा से गणेश जी का सिर बदला गया ,किन्तु वे जैसे थे ,वैसे ही मनोहर थे ,थे क्या हैं। उनका पेट बड़ा है लेकिन उन्होंने कभी डायटिंग पर ध्यान नहीं दिया। वे मोदक प्रिय है ।  लड़ाकू भी हैं और विद्वान भी। आशुलेखक भी हैं और बाल सुलभ चंचलताओं से भी भरे हुए हैं।</p>
<p>भगवान गणेश जी के बारे में दुनिया सब जानती हैं ।  कम से भारतीय तो जानते ही है। गणेश जी के बारे में बताने के लिए मेरे पास भी कुछ नया नहीं है। जो कुछ है ,सब पुराना है ।  नया है तो केवल प्रार्थना। वो भी देश में लोकतंत्र को बचाने की प्रार्थना। हम भारतीय अगर कुछ कर सकते हैं तो वो है प्रार्थना। हमारी प्रार्थनाएं कभी सुनी भी जाती हैं और कभी नहीं भी सुनी जाती ।  ये गणेश जी के मूड पर निर्भर करता है कि जनता की प्रार्थना को सुनें या न सुने।  गणेश जी आदि विश्वगुरु हैं। और जो विश्वगुरु होता है वो कुछ भी कर सकता है। विश्वगुरुओं की हरेक हरकत काबिले बर्दाश्त मानी जाती है।</p>
<p>मै उन लोगों में से हों जो अक्सर मंदिर नहीं जाता । मंदिरों की भव्यता और वहां के पंडा -पुजारी तंत्र से मुझे भय लगता है ,लेकिन आप यकीन कीजिये की मै पहली बार पांच घंटे कतार में लगकर लाल बाग़ के राजा के दर्शन करने गया था। मैंने देखा की आम जन मानस में श्री गणेश के प्रति अपार शृद्धा है। और शायद गणेश जी की इसी लोकप्रियता का आकलन कर बाल गंगाधर तिलक ने उन्हें भारतीय जन जागरण के लिए निमित्त बनाया था। महाराष्ट्र शृद्धा भक्ति के मामले में भी उतना ही समर्पित है जितना की दूसरे मामलों में है। दूसरे मामले कहें तो जैसे भ्र्ष्टाचार,जैसे शिष्टाचार या दुर्व्यवहार। अंतुले भी यही के थे और अजित पंवार भी यहीं के हैं।<br />बहरहाल बात गणेश जी की हो रही है ।  मेरे घर भी वे हर साल अतिथि बनकर आते हैं। वे आते हैं तो उनके  पीछे -पीछे सब कुछ आता है ,और जो नहीं आना चाहता वो भाग जाता है। जैसे हमारे फन्ने मियाँ हर काम की शुरुआत के लिए विस्मिल्लाह करना कहते हैं,वैसे ही हम लोग किसी भी काम को आरम्भ करने के लिए 'श्रीगणेश ' करना कहते हैं। संसद  के विशेष सत्र का श्रीगणेश भी इसी परम्परा के अनुसार हो रहा है ।  ये नया संसद भवन हमें गुलामी के प्रतीक पुराने संसद भवन से मुक्त करने जा रहा है ।  अब हम पुराने संसद भवन की और पलट कर भी नहीं देखेंगे। हम तो अब पुराने भारत यानि ' इंडिया' की तरफ भी पलट कर नहीं देखने का इंतजाम इसी नए संसद भवन में करने वाले हैं। हमने पहले भी पुराने नोटों को नए नोटों में बदला ही था भाई !</p>
<p>हमारे ज्योतिषाचार्य बता रहे हैं कि करीब 300 साल बाद एक एक ऐसा योग बना है कि मिथुन,मकर और  मेष राशि के जातकों के लिए शुभ फल की प्राप्ति होगी। भाग्योदय हो सकता है। लंबे समय से अटका और फंसा हुआ धन मिल सकता है।अब अपनी राशि तो तुला है इसलिए अपने को तो कुछ मिलने वाला है नहीं ,लेकिन जिन  राशियों वालों को लाभ मिलना है उन्हें मेरी शुभकामनाएं हैं।</p>
<p>हमने बचपन से गणेश जी कि जो कहानी सुनी है उसके अनुसार गणेश को जन्म न देते हुए माता पार्वती ने उनके शरीर की रचना की। उस समय उनका मुख सामान्य था। माता पार्वती के स्नानागार में गणेश की रचना के बाद माता ने उनको घर की पहरेदारी करने का आदेश दिया। माता ने कहा कि जब तक वह स्नान कर रही हैं तब तक के लिये गणेश किसी को भी घर में प्रवेश न करने दे। तभी द्वार पर भगवान शंकर आए और बोले "पुत्र यह मेरा घर है मुझे प्रवेश करने दो।" गणेश के रोकने पर प्रभु ने गणेश का सर धड़ से अलग कर दिया। गणेश को भूमि में निर्जीव पड़ा देख माता पार्वती व्याकुल हो उठीं। तब शिव को उनकी त्रुटि का बोध हुआ और उन्होंने गणेश के धड़ पर गज का सर लगा दिया। उनको प्रथम पूज्य का वरदान मिला इसीलिए सर्वप्रथम गणेश की पूजा होती है।</p>
<p>आज के विश्व गुरु और हमारे विश्व गुरु गणेश जी में जमीन-आसमान का अन्तर है। हमारे आज के विश्वगुरु रणछोड़दास हैं लेकिन कहते हैं कि गणेश जी ने एक छोड़  दो विवाह किये। सियासत के गणेश अक्सर शादी- विवाह से भागते है।  कर भी लें तो निभाते नहीं हैं। राहुल गांधी ने तो विवाह किया ही नही।  शायद वे मोदी जी के वंशवाद के आरोप से डर गए हैं ।उन्हें  देशहित में शादी कर लेना चाहिए। वे यदि शादी कर लें तो भाजपा वालों द्वारा उनकी विदेश यात्राओं को लेकर जो हल्ला किया जाता है वो शांत हो सकता है।</p>
<p> दरअसल मै ठहरा गोबर -गणेश ,इसलिए मुझसे अक्सर ये गलती हो जाती है कि में सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ खड़ा हो जाता हूँ। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए किन्तु श्रीगणेश जी मुझसे ऐसा करवा लेते हैं। गणेश जी कहते हैं कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किसी की गोदी में बैठने से बेहतर है कि हर समय सत्ता - प्रतिष्ठान के खिलाफ खड़े रहो । फिर चाहे सत्ता किसी भी दल  की हो। गणेश जी की बात  करें तो उनकी खासियत है कि उन्होंने किसी भी दल को अपने नाम पर सियासत करने की इजाजत नहीं दी ।  उन्होंने किसी भी दल या सत्ता से अपने लिए मंदिर बनाने के लिए चन्दा इकठ्ठा करने को नहीं कहा। वे दगडू सेठ के बनाये मंदिर में आसीन हो जाते हैं और लालबाग के मजूरों के बनाये पंडाल में भी ।  गणेश जी पक्के समाजवादी हैं।उनकी जन्मभूमि को लेकर कहीं कोई झगड़ा नहीं है।  </p>
<p>मेरे सभी देशवासियों पर [ इन्हीं में मेरे पाठक ,मेरे प्रशंसक ,मेरे मित्र-शत्रु ,सहयोगी और मेरे लेखों के लिए मुझे प्रतिदिन एक रुपया देने वाले और न देने वाले शुभचिंतक भी शामिल हैं ]गणेश जी सदा अपनी कृपा बनाये रखें यही कामना है ,शुभकामना है ।  आप सभी को ढेरों बधाइयाँ। हाँ ध्यान रखिये कि गणेशजी को सिन्दूर और दूब चढ़ाने से विशेष फल मिलता है। इसके अतिरिक्त उन्हें गुड़ के मोदक और बूंदी के लड्डू , शामी वृक्ष के पत्ते तथा सुपारी भी प्रिय है। गणेश जी को लाल धोती तथा हरा वस्त्र चढ़ाने का भी विधान है।</p>
<p><strong>राकेश अचल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Sep 2023 12:26:54 +0530</pubDate>
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                <title>देश की फ़िक्र कीजिये, दलों की नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इस समय देश की सत्ता देश से ज्यादा दलों की चिंता में दुबली हो रही है ।  सत्तारूढ़ दल के सामने देश से पहले चुनाव है। देश का पूर्वी हिस्सा जल रहा है लेकिन हमारी सरकार महाराष्ट्र के रण में उलझी है। सत्तारूढ़ दल की ये कामयाबी है कि नाकामी ये जब तय होगा ,तब तय होगा लेकिन तब तक देश का बहुत बड़ा नुक्सान हो चुका होगा।</p>
<p>महाराष्ट्र और मणिपुर की राशि एक ही है ।  महाराष्ट्र भाजपा की लगाईं आग में जल रहा है और मणिपुर भी।  मणिपुर को जलते हुए दो महीना दो दिन हो चुके हैं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131873/worry-about-the-country-not-the-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/देश-की-फ़िक्र-कीजिये,-दलों-की-नहीं.jpg" alt=""></a><br /><p>इस समय देश की सत्ता देश से ज्यादा दलों की चिंता में दुबली हो रही है ।  सत्तारूढ़ दल के सामने देश से पहले चुनाव है। देश का पूर्वी हिस्सा जल रहा है लेकिन हमारी सरकार महाराष्ट्र के रण में उलझी है। सत्तारूढ़ दल की ये कामयाबी है कि नाकामी ये जब तय होगा ,तब तय होगा लेकिन तब तक देश का बहुत बड़ा नुक्सान हो चुका होगा।</p>
<p>महाराष्ट्र और मणिपुर की राशि एक ही है ।  महाराष्ट्र भाजपा की लगाईं आग में जल रहा है और मणिपुर भी।  मणिपुर को जलते हुए दो महीना दो दिन हो चुके हैं लेकिन वहां क़ानून का शासन स्थापित नहीं हो पा रहा है ।  केंद्र सरकार की और से राज्य में शांति स्थापना के अब तक किये गए सारे जतन नाकाम हो चुके है।  यहां तक की सेना और अर्द्ध सैनिक बल भी मणिपुर की आग नहीं बुझा पा रहे हैं ,और सूबे की डबल इंजिन की सरकार बेशरमी के साथ तमाशबीन बनी  बैठी है। मणिपुर की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कांग्रेस नहीं है ,बल्कि सत्तारूढ़ दल है। अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए ही लगता है कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में चिंगारी सुलगायी है।</p>
<p>सच कहें तो महाराष्ट्र देश के लिए उतनी बड़ी चिंता नहीं है जितनी बड़ी चिंता मणिपुर है ।  मणिपुर में जातीय हिंसा के साथ अलगाव की आग फिर भड़क उठी है ।  मणिपुर में कुछ लोग फिर से अलग राष्ट्र का मुद्दा उठा चुके हैं ,लेकिन केंद्र सरकार गुड़ खाकर बैठी ह।  चार साल पहले जम्मू-कश्मीर में  एक विधान,दो निशान का मुद्दा उछालकर सूबे की अस्मिता से खलवाड़ करते हुए जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में विभाजित करने वाली केंद्र सरकार के लिए मणिपुर गले की हड्डी बनकर रह गया है। मणिपुर पर न हमारे देश के प्रधानमंत्री    किसी मंच से बोल रहे हैं और न किसी को बोलने दे रहे हैं। पोल खुलने का डर है ,लेकिन संसद के वर्षाकालीन सत्र में तो उन्हें अपना मुंह खोलना ही पडेगा। मुमकिन है कि वे संसद को भी ठेंगे पर रखें और कुछ न बोले। और देश का ध्यान महाराष्ट्र पर ही अटकाए रखने की कोशिश करें।</p>
<p>ऊपर से महाबली दिखाई देने वाली भाजपा भीतर से बहुत भयभीत हो चुकी है ।  देश के तमाम राज्य  विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का जादू नहीं चल पाया ,ऐसे में भाजपा अब क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को अपने फंदे में फंसाने में लगी है।  उत्तर प्रदेश में भाजपा ने ईडी और सीबीआई के बल पर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी को पहले ही बधिया बना दिया है। आप पहले से भाजपा की बी  टीम बनी हुई है।  बिहार में भाजपा रामविलास पासवान और जीतनराम माझी की  पार्टियों का सलाद पहले ही बना चुकी है ।  जेडी यूं और राजद पर भाजपा का विभाजनकारी विष काम नहीं कर पाया ,किन्तु महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी इस जहर से दो फाड़ हो गयी। राजस्थान और मध्य्प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ ने भी भाजपा को ठेंगा दिखा दिया।</p>
<p>भाजपा को कायदे से महाराष्ट्र जीतने के बजाय मणिपुर जीतने की कोशिश करना चाहिए ,क्योंकि मणिपुर देश की सुरक्षा सम्प्रभुता से जुड़ा राज्य है। मणिपुर की अशांति बहुत भारी पड़ सकती है। देश का ध्यान बंटाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  पिछले दिनों मध्यप्रदेश में चुनावी शंखनाद करते हुए समान नागरिक संहिता का मुद्दा उछाल चुके हैं। देश के सामने अभी समान नागरिक संहिता प्रमुख मुद्दा नहीं है ।  मुद्दा मणिपुर है ।  मणिपुर पर केंद्र कुछ भी बोलने को राजी नहीं है ।  विपक्ष भी केंद्र का मुंह खुलवाने में नाकाम रहा है ।  विपक्ष को देश की एकता के बजाय विपक्ष की एकता की पड़ी है। सत्तारूढ़ दल भी मणिपुर की जगह विपक्ष की एकता तोड़ने में लगा है। महाराष्ट्र में उसे आंशिक कामयाबी भी मिल गयी है ,लेकिन इससे देश का कोई फायदा नहीं है। देश को विपक्ष की एकता से ज्यादा मणिपुर में शांति की बहाली चाहिए।<br />जम्मू-कश्मीर में विखंडन   कर वहां धारा 370  हटाने में कामयाब हुई भाजपा सरकार मणिपुर में नाकाम साबित क्यों हो रही है ? इस विषय पर राष्ट्रव्यापी बहस की जरूरत है। ये बहस जब भाजपा रोक रही है तो विपक्ष को इसकी शुरूवात करना चाहिये ।  कांग्रेस के राहुल गांधी ने अग्निदग्ध मणिपुर का दौरा कर इसकी शुरुवात की किन्तु इसे आगे नहीं बढ़ाया। आज समान नागरिक संहिता के मुद्दे के जबाब में मणिपुर पर केंद्र की चुप्पी सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है। किन्तु कांग्रेस और समूचे विपक्ष को मणिपुर की आग को राष्ट्रीय नड्डा बनाने में या तो कामयाबी नहीं मिली या फिर उसने इसकी कोशिश ही नहीं की।  </p>
<p>मणिपुर के 60  साल के इतिहास में भाजपा को पहली   बार शासन करने का मौक़ा मिला और पहली   बार में ही मणिपुर की डबल इंजिन की सरकार ने मणिपुर को आग में झौंक दिया । मनीपुर में सबसे ज्यादा 09  बार शासन करने वाली कांग्रेस से केंद्र सरकार को मणिपुर की आग बुझाने में सहयोग लेने में शर्म आ रही है। कांग्रेस के राहुल गांधी की मणिपुर यात्रा को लेकर भी भाजपा ने संविद पात्रा और स्मृति ईरानी जैसे अपने विद्वान प्रवक्ताओं की सारी ऊर्जा खर्च करा दी फिर भी कुछ हासिल नहीं हुआ। मणिपुर में नागरिक अधिकार एक तरह से अराजक हाथों में है।  प्रतिद्वंदी जातीय समूह एक-दूसरे का खून बहाने में लगे हुए हैं लेकिन केंद्र  और राज्य की भाजपा सरकार तमाशबीनों की तरह निरीह खड़ी नजर आ रही है।</p>
<p>महाराष्ट्र से मणिपुर तक सत्ता का  भाजपाई लालच देश को बहुत मंहगा पड़ रहा है। इसकी कीमत हर भारतीय को अदा करना पड़ rhi  है। देश की जनता जागरुक है ,सब देख रही है लेकिन दुर्भाग्य ये है की जनांदोलन सिरे से गायब है।  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सही कहते हैं की दुनिया झुक सकती  है लेकिन कोई उसे झुकाने वाला तो हो ! देश का विपक्ष पिछले 9  साल में भाजपा की सरकार और जिद्दी प्रधानमंत्री को झुकाने में उसी तरह नाकाम रहा है जैसे केंद्र सरकार मणिपुर के मामले में नाकाम साबित हो रही है।</p>
<p> देश के बाहर महाराष्ट्र की राजनितिक उठापटक से ज्यादा मणिपुर को लेकर उत्सुकता है। मणिपुर की आग के लिए केंद्र सरकार न पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा पा रही है और न चीन   को ।  चीन   के बारे में तो सरकार एक शब्द भी नहीं बोल पाती। कांग्रेस को मणिपुर के लिए जिम्मेदार ठहराना आसान नहीं ,क्योंकि जनादेश तो भाजपा के नाम है।  ऐसे में मणिपुर की दुर्दशा का ठीकरा तो ले-देकर भाजपा के सर पर ही फूटेगा। मणिपुर में भाजपा की नाकामी का पता पूरे देश को होना चाहिये ।  विपक्ष ही  ये काम कर सकता है ,किन्तु कर नहीं पा रहा है । देश में आने वाले दिनों में होने वाले तमाम चुनाव मणिपुर के ही मुद्दे पर लड़ लिए जाएँ तो देश के मूड का पता चल सकता है। समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर देश एक बार फिर भीतर ही भीतर विभाजित  होगा ,इसकी शुरुवात हो चुकी ह।  यूसीसी   के समर्थन और विरोध में लोग खड़े होने लगे हैं और आम चुनावों तक पूरा देश दो हिस्सों में बनता दिखाई देगा।</p>
<p>मै तो कहता हूँ कि केंद्र सरकार खुशी से धारा 370  हटाने की तरह देश में समान नागरिक संहिता लागू करा दे। लेकिन पहले मणिपुर को बचा ले।  मणिपुर को जम्मु-कश्मीर की तरह तीन हिस्सों में विभाजित नहीं किया जा सकता। यदि मणिपुर कोई आग न बुझी तो पूरब के दूसरे राज्य भी इस आग की चपेट में आ सकते है।  यदि ऐसा हुआ तो महाराष्ट्र या राष्ट्र में परचम फहराने से क्या लाभ होने वाला है ?</p>
<p> राकेश अचल</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 11:50:43 +0530</pubDate>
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                <title>लिव-इन रिलेशनशिप पर फिर सवालिया निशान</title>
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<p>बीते कुछ माह में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली प्रेम कहानियों का जैसे दर्दनाक तरीके से अंत और ‘भरोसे’ की हत्या हुई, उसने लिव-इन रिलेशनशिप पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इन संबंधों में बर्बरता, वहशीपन और इंसानियत को शर्मसार कर देने की सारी मर्यादाएं टूट गई हैं। नृशंस तरह से हत्या के ऐसे मामले यह सोचने को मजबूर कर देते हैं कि कोई इंसान अपनी ही प्रेमिका के साथ ऐसी दरिंदगी कर सकता है। बीते साल दिल्ली के श्रद्धा हत्याकांड ने शुरू हुआ सिलसिला अब भले ही मुंबई की सरस्वती तक पहुंच गया हो, लेकिन बीच में कई ऐसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130423/question-mark-on-live-in-relationship"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/लिव-इन-रिलेशनशिप-पर-फिर-सवालिया-निशान.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
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<p>बीते कुछ माह में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली प्रेम कहानियों का जैसे दर्दनाक तरीके से अंत और ‘भरोसे’ की हत्या हुई, उसने लिव-इन रिलेशनशिप पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इन संबंधों में बर्बरता, वहशीपन और इंसानियत को शर्मसार कर देने की सारी मर्यादाएं टूट गई हैं। नृशंस तरह से हत्या के ऐसे मामले यह सोचने को मजबूर कर देते हैं कि कोई इंसान अपनी ही प्रेमिका के साथ ऐसी दरिंदगी कर सकता है। बीते साल दिल्ली के श्रद्धा हत्याकांड ने शुरू हुआ सिलसिला अब भले ही मुंबई की सरस्वती तक पहुंच गया हो, लेकिन बीच में कई ऐसी युवतियां हैं, जो लिव-इन रिलेशन के नाम पर भेंट चढ़ गई। मंगलवार को मुंबई में सामने आए सरस्वती हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया।</p>
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<p>हाल ही में महाराष्ट्र के मुंबई में एक 56 साल के व्यक्ति मनोज साने ने 32 साल की युवती सरस्वती की हत्या कर दी। शुरुआती जानकारी आई कि बीते कुछ सालों से वे दोनों लिव-इन में रह रहे थे। हालांकि गिरफ्तार होने के बाद मनोज साने दावा कर रहा है कि वह उसकी बेटी जैसी थी। मनोज साने ने पहले सरस्वती की हत्या की और फिर शव को चेनसॉ (पेड़ काटने वाली मशीन) से 100 टुकड़ों में काट दिया। बदबू नहीं आए इसलिए वह शव के टुकड़ों को प्रेशर कुकर में उबालकर मिक्सर में पीस देता था और कुत्तों को खिला देता था। ये घटना 8 जून 2023 को सामने आई है। सरस्वती हत्याकांड ने अतीत के अन्य सभी हत्याकांड की याद ताजा कर दी, जिसमें कई मशहूर चर्चित हत्याकांड ने लोगों में गुस्सा भर दिया था। जिस तरह से इन लोगों ने लड़कियों के साथ बर्बरता की वो एक साधारण इंसान कभी करने की सोच भी नहीं सकता। गौरी श्रीवास्तव हत्याकांड,निक्की यादव हत्याकांड,मेघा थोरवी हत्याकांड ,श्रद्धा वालकर हत्याकांड,रिबिका पहाड़िया हत्याकांड ऐसे कई उदाहारह है जिसमे दिल भर जाने पर लड़के ने अपने साथ  लिव-इन रिलेशनशिप  रह रही लड़की की बरबर्ता पुर्ण तरीके से हत्या कर दी ।</p>
<p>लगातार इस प्रकार के सनसनीखेज मामले सामने आने के बाद एक बार फिर  से ये बहस छिड़ गई है कि लिव इन रिलेशनशिप में रहना लड़कियों के लिए कितना सुरक्षित रह गया है? सवाल ये भी है कि ऐसे रिश्तों में हत्या की कई वारदातें होने के बाद भी पश्चिमी सभ्यता वाली इस संस्कृति का प्रचलन भारत में इतनी तेजी से आखिर क्यों बढ़ रहा है? ग़ौरतलब है कि बीते तीन महीने में दिल्ली में यह दूसरा ऐसा मामला है,जब लिव इन में रह रही अपनी पार्टनर की हत्या करके आरोपी ने उसके शव को फ्रिज में छुपाकर रख दिया। 23 साल की निक्की यादव का शव वेलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी को उसके प्रेमी साहिल गहलोत के परिवार के एक रेस्तरां में फ्रिज के अंदर मिला था। निक्की और साहिल पिछले लंबे समय से लिव इन पार्टनर के तौर पर रह रहे थे।</p>
<p>हत्या के आरोपी 24 वर्षीय साहिल गहलोत को हालांकि पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताते हैं कि साहिल के किसी दूसरी महिला से शादी करने को लेकर दोनों के बीच बीती 9 फरवरी को करीब तीन घंटे तक झगड़ा हुआ था। पुलिस के मुताबिक लड़ाई बढ़ने पर साहिल ने मोबाइल चार्जिंग केबल का इस्तेमाल कर निक्की का गला घोंट दिया। कत्ल करने के बाद वह निक्की के शव को कार में लेकर 10 फरवरी को हरियाणा स्थित अपने गांव मितराऊं पहुंचा। जहां अपने परिवार के एक ढाबे में शव को बड़े फ्रीज़र में रखकर ठिकाने लगा दिया।हैरानी की बात ये है कि उसी दिन उसने दूसरी महिला से शादी भी रचा ली, जो रिश्ता उसके घरवालों ने तय किया था।कहते हैं कि कातिल कितना भी चतुर क्यों न हो लेकिन उसका जुर्म बहुत ज्यादा दिनों तक छुपा नहीं रहता और कानून के लंबे हाथ उसे अपने शिकंजे में कस ही लेते हैं। </p>
<p>ऐसा ही इस मामले में भी हुआ लेकिन सवाल है कि ऐसी कितनी श्रद्धा। पिछले दो दशक में हमारे यहां जिस तेजी से लिव-इन रिलेशनशिप का कल्चर बढ़ रहा है, वो चौंकाने के साथ ही चिंताजनक भी है।इसलिये कि कुछ महानगरों को छोड़ दें,तो ऐसे रिश्ते को आज भी पूरी तरह से सामाजिक मान्यता नहीं मिली है,फिर भी नौकरी पेशा युवतियों में इस तरह की रिलेशनशिप को अपनाने का क्रेज़ तेजी से बढ़ा है।शायद इसकी बड़ी वजह ये है कि इसमें शादी के रिश्ते जैसा कोई बंधन नहीं है और दोनों को अपनी मर्जी से जीने की आज़ादी मिलती है।लेकिन इसी आजादी की शुरुआत झगड़े से होती है,जिसका अंजाम किसी बड़े जुर्म के साथ खत्म होता है लेकिन अक्सर इसका शिकार लड़की ही बनती है।साल 2018 में एक सर्वे हुआ था। इस सर्वे में शामिल 80 फीसदी लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप को किसी भी तरह से गलत न मानते हुए इसका खुलकर सपोर्ट किया था। इनमें से 26 प्रतिशत  ने कहा था कि अगर मौका मिला, तो वो भी लिव-इन रिलेशन में रहना ही पसंद करेंगे।</p>
<p><br />हालांकि फिलीपींस, फ्रांस, कनाडा, ऑस्‍ट्रेलिया, स्‍कॉटलैंड, यूके, अमेरिका समेत दर्ज़न भर देशों में अलग-अलग कानूनी परिभाषाओं के अंतर्गत लिव इन रिलेशनशिप को मान्‍यता मिली हुई है।लेकिन हमारे देश में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कोई कानून नहीं हैं। कानून बेशक नहीं है लेकिन फिर भी लिव-इन में रहना कोई अपराध भी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों के फैसलों ने लिव-इन रिलेशनशिप को एक तरह से कानूनी मान्यता दे रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसलों के ज़रिए ऐसे रिश्तों के क़ानूनी दर्जे को साफ़ किया है। साल 2006 के एक केस में फ़ैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि, "वयस्क होने के बाद व्यक्ति किसी के भी साथ रहने या शादी करने के लिए आज़ाद है।" उस फ़ैसले के साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप को क़ानूनी मान्यता मिल गई। अदालत ने कहा था कि कुछ लोगों की नज़र में 'अनैतिक' माने जाने के बावजूद ऐसे रिश्ते में रहना कोई 'अपराध नहीं है'।सुप्रीम कोर्ट ने अपने इसी फ़ैसले का हवाला साल 2010 में अभिनेत्री खुशबू के 'प्री-मैरिटल सेक्स' और 'लिव-इन रिलेशनशिप' के संदर्भ और समर्थन में दिए गए बयान के मामले में भी दिया था।अगर लिवइन रिलेशन में बच्चा पैदा होता है, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बच्‍चे पर अधिकार ठीक उसी आधार पर तय होगा, जैसा कि शादी के कानून के अंतर्गत होता है।</p>
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<p>हालांकि, अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति बिना तलाक लिए किसी के साथ लिव-इन में रहे तो ये गैर-कानूनी माना जाता है। लेकिन दो साल पहले  पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला दिया था कि , 'शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन में रहना कोई जुर्म नहीं है और इससे भी फर्क नहीं पड़ता कि पुरुष ने तलाक की प्रक्रिया शुरू की है या नहीं।' पर, सच तो ये है कि अभी भी समाज में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता है। ऐसे रिलेशन में रहने वाली लड़कियों के चरित्र पर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शिव कुमार शर्मा कहते हैं कि इस व्यवस्था के लिए भी कानून तो होना ही चाहिए। विवाह की तरह लिव इन का भी रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, संबंध तोड़ने में भी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना आवश्यक बनाया जाना चाहिए।</p>
<p>एक स्टडी के मुताबिक भारत में लिव इन के सबसे ज्यादा मामले बेंगलुरू में हैं जो आईटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा हब है।देश के तमाम राज्यों के युवा वहां दर्जनों कंपनियों में कार्यरत हैं।दोनों के बीच प्रेम जब परवान चढ़ता है,तो फिर वे साथ में ही रहने लगते हैं।लिव इन रिलेशन की वजह से शादी से पहले सेक्‍स के मामले भी बढ़ रहे है।नतीजा ये है कि बिना शादी के गर्भवती होने के मामले भी बेहद तेजी से बढ़े हैं।ज्‍यादातर लिव इन रिलेशन में जब दोनों के बीच नहीं पटती है, तो लड़कियां अपने साथी के खिलाफ रेप केस करने की धमकियां भी देती हैं।ऐसी सूरत में उसका पार्टनर या तो डर कर समझौता करने में ही अपनी भलाई समझता है या फिर उस आवाज़ को हमेशा के लिये खामोश करने के मकसद से हत्या कर देता है। समाजशास्त्र के एक  प्रोफेसर के अनुसार  विवाह स्त्री व पुरुष को पारिवारिक जीवन में प्रवेश कराने की एक संस्था है। वैवाहिक संबंधों के स्थायित्व का मूलतत्व अंतर्निर्भरता है। वैवाहिक संबंधों में बंधे स्त्री और पुरुष अलग-अलग परिवेश से आते हैं, इस कारण कई बिंदुओं पर असहमति हो सकती है। लेकिन, वैवाहिक संबंध समय के साथ मजबूत बनते हैं। वर्तमान परिदृश्य में लिव इन रिलेशनशिप जैसे संबंधों में उत्तरदायित्वों के बजाय अधिकारों पर बल दिया जा रहा है। आत्मकेंद्रितता एवं स्वश्रेष्ठता के कारण युवाओं में अपने जीवनसाथी के प्रति हीनता का भाव उत्पन्न हो रहा है, जिसकी परिणति अनेक घटनाओं को रूप में सामने आ रही है। सरकार व समाज को ऐसे मामले रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरुरत है ।</p>
<p><strong>अशोक भाटिया,</strong><br /><strong>वरिष्ठ  लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jun 2023 16:32:33 +0530</pubDate>
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