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                <title>nitish kumar - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>nitish kumar RSS Feed</description>
                
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                <title>बिहार की राजनीति- निशांत कुमार का राजनीतिक उदय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="center">  </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173025/political-rise-of-nishant-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/mahendra_tiwari.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="center"> </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह 8 मार्च 2026 को पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में नारों की गूँज के साथ टूट गया। निशांत कुमार का राजनीति में औपचारिक प्रवेश केवल एक व्यक्ति का दल में शामिल होना नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक क्षेत्रीय दल के अस्तित्व को बचाने की उस छटपटाहट का परिणाम है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अक्सर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">वन मैन शो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाली पार्टियों में उनके शीर्ष नेता के सक्रिय राजनीति से दूर होने पर दिखाई देती है। नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जिस समाजवाद और वंशवाद विरोधी विचारधारा का झंडा बुलंद किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज उनकी पार्टी उसी वंशवाद के छाते तले खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। यह भारतीय राजनीति की एक कड़वी हकीकत है कि क्षेत्रीय दल विचारधारा से ज्यादा एक चेहरे से बंधे होते हैं और जब वह चेहरा धुंधला पड़ने लगता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ता किसी ऐसे नाम की तलाश करते हैं जो उस विरासत को संजो सके। निशांत कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे एक ऐसे पिता के उत्तराधिकारी बनकर आए हैं जिन्होंने अपनी शर्तों पर राजनीति की है। नीतीश कुमार वह शख्सियत रहे हैं जिन्होंने विधानसभा में संख्या बल कम होने के बावजूद गठबंधन के साथियों को अपनी उंगलियों पर नचाया और चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित किया कि राजनीति में करिश्मा और चाणक्य नीति का मेल क्या होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के विधानसभा चुनावों ने नीतीश कुमार की लोकप्रियता पर उठ रहे तमाम सवालों पर विराम लगा दिया था। उनके गिरते स्वास्थ्य और भूलने की बीमारी की चर्चाओं के बीच जब परिणाम आए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे चौंकाने वाले थे। जनता ने उन्हें न केवल वोट दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार के ग्रामीण अंचलों में आज भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन बाबू</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की धमक बरकरार है। यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी सफलता के पीछे भी नीतीश कुमार का वह अति पिछड़ा और महिला वोट बैंक सक्रिय था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो खामोशी से उनके पक्ष में लामबंद रहता है। लेकिन अपने राजनीतिक चरमोत्कर्ष पर नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला और पार्टी की बागडोर परोक्ष रूप से निशांत कुमार के हाथों में सौंपने की तैयारी ने कार्यकर्ताओं को हतप्रभ कर दिया है। निशांत के स्वागत में लगे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत हैं तो निश्चिंत हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे दरअसल कार्यकर्ताओं के उसी भय को दर्शाते हैं जो नीतीश के बिना पार्टी के बिखरने की आशंका से पैदा हुआ है। 40 वर्षीय निशांत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक सक्रिय राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए यह डगर कांटों भरी है। राजनीति कोई इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं है जहाँ फार्मूलों से नतीजे निकाले जा सकें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ समीकरण हर पल बदलते हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के उस मूल आधार—कुर्मी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोइरी और अति पिछड़ा वर्ग—को अपने साथ जोड़े रखने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो नीतीश कुमार के व्यक्तित्व के आकर्षण में जेडीयू के साथ रहा है। क्या एक सौम्य और राजनीति से दूर रहा युवा इन वर्गों की आकांक्षाओं को वह स्वर दे पाएगा जो उनके पिता ने दिया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेता पहले से ही बिहार की मिट्टी में अपनी जड़ें गहरी कर चुके हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री एक ऐसे समय में हुई है जब उनके प्रतिद्वंद्वी राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। तेजस्वी यादव ने जहाँ लालू प्रसाद यादव की विरासत को अपनी मेहनत और संघर्ष से एक नई ऊँचाई दी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं चिराग पासवान ने भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की छवि से निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। इन दोनों नेताओं के विपरीत निशांत को राजनीति विरासत में मिली तो है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने कभी अपने पिता के साथ धूप-छाँव में संघर्ष नहीं किया। वे नीतीश कुमार के उन राजनीतिक दांव-पेंचों के साक्षी नहीं रहे हैं जिन्होंने जेडीयू को बार-बार संकट से उबारा। ऐसे में पार्टी के भीतर मौजूद </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">घाघ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और पुराने नेताओं के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए अग्निपरीक्षा जैसा होगा। जेडीयू के भीतर कई ऐसे दिग्गज नेता हैं जो खुद को नीतीश का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानते रहे हैं। राजीव रंजन सिंह और संजय झा जैसे नेताओं की मौजूदगी में निशांत को अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी होगी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वरना यह आशंका हमेशा बनी रहेगी कि वे केवल एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रबर स्टैंप</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर रह जाएंगे और पार्टी की दूसरी लाइन के नेता उन्हें अपने हितों के लिए इस्तेमाल करेंगे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और गंभीर चुनौती भारतीय जनता पार्टी के साथ संबंधों को लेकर है। बिहार में बीजेपी अब वह छोटी पार्टी नहीं रही जो नीतीश कुमार के पीछे चलती थी। 2025 के नतीजों के बाद बीजेपी अब खुद को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका में देख रही है। गठबंधन की राजनीति अक्सर क्रूर होती है और हर बड़ी पार्टी अपने छोटे सहयोगी को निगलने या उसे अप्रासंगिक बनाने की कोशिश करती है। बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति बिहार में अपना मुख्यमंत्री लाने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद जेडीयू के लिए जूनियर पार्टनर बनकर अपनी स्वायत्तता बचाए रखना लगभग असंभव सा कार्य होगा। बीजेपी चाहेगी कि भविष्य में जेडीयू का उसमें विलय हो जाए या फिर वह इतनी कमजोर हो जाए कि उसका अपना कोई अस्तित्व न बचे। निशांत कुमार को इस </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रवत हमले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से पार्टी को बचाना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जेडीयू केवल एक चुनाव जिताने वाली मशीन न बनकर रह जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसका अपना वैचारिक स्टैंड भी बना रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत के पक्ष में एक बात यह जाती है कि वे शिक्षित हैं और उनकी छवि साफ-सुथरी है। बिहार की युवा पीढ़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और शिक्षा की बात करती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत में एक उम्मीद देख सकती है। लेकिन राजनीति में केवल शिक्षा और सौम्यता काफी नहीं होती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ जनमानस से जुड़ने के लिए पसीना बहाना पड़ता है। नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में जब वे सदस्यता ले रहे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें एक गहरा संदेश छिपा था। नीतीश ने शायद यह जतलाने की कोशिश की कि वे अभी भी वंशवाद के खिलाफ हैं और निशांत का आना पार्टी की इच्छा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी निजी जिद नहीं। हालांकि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संदेश आम जनता तक किस रूप में पहुँचता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखने वाली बात होगी। क्या जनता इसे नीतीश की मजबूरी समझेगी या एक सोची-समझी रणनीति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि जनता के बीच यह संदेश गया कि जेडीयू अब केवल एक परिवार को बचाने की कोशिश कर रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो नीतीश कुमार द्वारा दशकों में कमाई गई </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की साख को धक्का लग सकता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जेडीयू की सांगठनिक स्थिति वर्तमान में नाजुक है। 2010 में 115 सीटें जीतने वाली पार्टी 2020 में 45 पर सिमट गई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि 2025 में उसने फिर से 85 सीटों के साथ वापसी की। यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और वह गठबंधन के साथी की मजबूती पर निर्भर करता है। नीतीश कुमार का करिश्मा ही वह गोंद था जो इस गठबंधन को वजन देता था। अब जब गठबंधन की कमान निशांत की ओर झुक रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें साबित करना होगा कि वे केवल नीतीश के पुत्र नहीं हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी हैं। उन्हें उन विधायकों और नेताओं को टूटने से रोकना होगा जो सत्ता के नए केंद्रों की तलाश में दूसरी पार्टियों का रुख कर सकते हैं। अटकलें हैं कि उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है या पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष। पद चाहे जो भी मिले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">असली चुनौती सड़क पर उतरकर कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतने की होगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने पिता के </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्गदर्शन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग किस सीमा तक करते हैं। नीतीश कुमार ने भले ही कह दिया हो कि "मैं हूँ ना"</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दिल्ली की राजनीति और पटना की जमीन के बीच का फासला बहुत बड़ा होता है। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दल अक्सर कमजोर कड़ियों की तलाश में रहते हैं। यदि निशांत ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय जल्द नहीं दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो जेडीयू का अस्तित्व बीजेपी के बढ़ते प्रभुत्व और तेजस्वी यादव के आक्रामक विपक्ष के बीच सैंडविच बनकर रह सकता है। बिहार की राजनीति में यह एक नए अध्याय की शुरुआत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विरासत का बोझ है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिद्वंद्वियों की चुनौती है और एक ऐसी जनता की उम्मीदें हैं जो अब पुराने नारों से आगे निकलना चाहती है। निशांत कुमार को यह समझना होगा कि उनके पिता ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उन्हें शिखर पर बने रहने के लिए शून्य से शुरुआत करनी है। यह चुनौती किसी भी युद्ध से बड़ी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यहाँ हारने के लिए एक पूरी विरासत है और जीतने के लिए केवल संघर्ष।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राह में सबसे बड़ी बाधा वह </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूडो-पॉलिटिकल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ढांचा भी है जिसे उनके पिता ने बड़ी कुशलता से बुना था। नीतीश कुमार ने अधिकारियों के भरोसे शासन चलाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता अक्सर खुद को उपेक्षित महसूस करते रहे। यदि निशांत भी इसी रास्ते पर चलते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ताओं का उत्साह जल्दी ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा। उन्हें पार्टी के भीतर लोकतंत्र को बहाल करना होगा और उन कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा जो अब तक केवल नीतीश के नाम पर वोट मांगते आए हैं। बिहार का भविष्य अब इस बात पर टिका है कि क्या यह नया नेतृत्व सुशासन की उस लौ को जलाए रख पाता है या फिर सत्ता की इस खींचतान में जेडीयू इतिहास के पन्नों में एक और क्षेत्रीय दल के रूप में दर्ज हो जाती है जो अपने नायक के जाने के बाद अपनी पहचान खो बैठा। 8 मार्च की वह शाम पटना के आकाश में नई उम्मीदें लेकर आई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन उम्मीदों को हकीकत में बदलना निशांत कुमार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राज्यसभा के रास्ते नीतीश कुमार का वानप्रस्थ गमन!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा का पर्चा भर कर वानप्रस्थ गमन का रास्ता चुन लिया है। पिछले करीब 20 सालों से बिहार की राजनीति के केंद्र में नीतीश कुमार का दबदबा रहा है । सरकारें बदलीं, गठबंधन बदले, चुनाव आए-गए, लेकिन एक छोटी सी अवधि को छोड़ दिया जाए तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही बने रहे। 2005 से बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले इस नेता ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी कर ली है, और इसके साथ ही सूबे की सियासत में एक बड़ा बदलाव शुरू होने वाला लगता है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172602/nitish-kumars-last-journey-through-rajya-sabha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/nitish-kumar-5-march-2026-.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा का पर्चा भर कर वानप्रस्थ गमन का रास्ता चुन लिया है। पिछले करीब 20 सालों से बिहार की राजनीति के केंद्र में नीतीश कुमार का दबदबा रहा है । सरकारें बदलीं, गठबंधन बदले, चुनाव आए-गए, लेकिन एक छोटी सी अवधि को छोड़ दिया जाए तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही बने रहे। 2005 से बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले इस नेता ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी कर ली है, और इसके साथ ही सूबे की सियासत में एक बड़ा बदलाव शुरू होने वाला लगता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा राज्यसभा का नामांकन भरने से  यह बात स्पष्ट हो गयी है कि बिहार की राजनीति से एक युग का अब अवसान होने जा रहा है। बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से यदि किसी एक नेता का सबसे अधिक प्रभाव रहा है, तो वह नाम है नीतीश कुमार। वर्ष 2005 से लेकर अब तक बिहार की सत्ता का केंद्र लगभग लगातार उनके इर्द-गिर्द ही घूमता रहा है। अलग-अलग गठबंधनों, बदलते राजनीतिक समीकरणों और कई चुनावी उतार-चढ़ावों के बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर अपनी पकड़ बनाए रखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में नीतीश के द्वारा मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का ऐलान बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव के रुप में देखा जा रहा है। अगर देखा जाए लगभग साढ़े तीन दशकों तक बिहार की राजनीति दो नामों के इर्द-गिर्द भूमती रही, ये दो नाम हैं लालू प्रसाद यादव और नीतीश। इन दोनों नेताओं ने न केवल बिहार की सत्ता को आकार दिया, बल्कि राज्य की सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा भी तय की। अब जब दोनों ही नेता सक्रिय राजनीति से दूर हो रहे हैं, तब बिहार एक नए दौर के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1990 के दशक में जब लालू प्रसाद यादव सत्ता में आए, तब बिहार की राजनीति में एक नई सामाजिक चेतना का उदय हुआ। लालू ने 'सामाजिक न्याय' को केवल एक राजनीतिक नारा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे एक आंदोलन का रूप दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचित समुदायों की राजनीतिक भागीदारी को उन्होंने केंद्र में रखा। लंबे समय से सत्ता के गलियारों से दूर रहे वर्गों को उन्होंने राजनीतिक पहचान और आवाज दी। सत्ता की भाषा बदली, राजनीतिक चेहरे बदले और शासन के केंद्र में सामाजिक प्रतिनिधित्व की नई धारा दिखाई देने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें कोई दोमत नहीं है कि जेपी आंदोलन से निकले नेताओं की एक पूरी पीढ़ी ने पिछले तीन दशकों तक बिहार की राजनीति को दिशा दी। इस पीढ़ी में पुरानी पीड़ी के पीछे हटने का अर्थ है कि बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी के नेताओं को अवसर मिलेगा। इन सबके बीच अगर बात नीतीश की की जाए तो, बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका केवल एक मुख्यमंत्री की नहीं रही है, बल्कि वे लंबे समय तक राज्य की राजनीति के सर्वमान्य नेता रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोग भी उन्हें स्वीकार करते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गठबंधन की राजनीति में कई बार वैचारिक मतभेद होने के बावजूद उन्होंने गठबंधन धर्म निभाया और राजनीतिक संतुलन बनाए रखा। उनकी खास पहचान उनकी सामाजिक योजनाओं और प्रशासनिक छवि से बनी। खास तौर पर महिलाओं के बीच उनकी पकड़ काफी मजबूत रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं का समर्थन एनडीए की जीत का एक बड़ा कारण माना गया था। इसी कारण जब तक वह बिहार की राजनीति में सक्रिय थे, तब तक विपक्षी दलों के लिए उन्हें सीधे चुनौती देना आसान नहीं था। हालांकि, इसी दौर में बिहार की छवि पर कई सवाल भी उठे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई और 'जंगलराज' जैसे शब्द राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गए। विकास की रफ्तार धीमी पड़ने और उद्योगों के बंद होने से बिहार की अर्थव्यवस्था कमजोर होती गई। राज्य से बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हुआ और बिहार प्रवासी मजदूरों के प्रदेश के रूप में पहचाना जाने लगा। चीनी मिलों, जूट फैक्ट्रियों और कई छोटे उद्योगों के बंद होने से रोजगार के अवसर घटते गए। इस दौर में बिहार की पहचान सामाजिक न्याय की राजनीति के साथ-साथ पिछड़ेपन और आर्थिक संकट से भी जुड़ने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2005 में बिहार की राजनीति ने एक बड़ा मोड़ लिया जब नीतीश कुमार सत्ता में आए। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव की शुरुआत भी थी। नीतीश कुमार ने सामाजिक न्याय की राजनीति को विकास और प्रशासनिक सुधारों के साथ जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी और बिहार में सड़कों तथा पुलों का व्यापक जाल बिछाया। राज्य के दूरदराज इलाकों को राजधानी पटना से बेहतर तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया। एक समय ऐसा था जब बिहार के कई जिलों से पटना पहुंचने में पूरा दिन लग जाता था, लेकिन सड़क नेटवर्क के विस्तार के बाद यात्रा का समय काफी कम हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह बदलाव केवल भौतिक संरचना का नहीं था, बल्कि राज्य की मानसिकत्ता और विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम था। नीतीश कुमार ने शासन को अधिक प्रशासनिक रूप देने की कोशिश की और कानून-व्यवस्था को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाया। उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई कई योजनाओं ने समाज पर गहरा प्रभाव डाला। छात्राओं के लिए साइकिल योजना ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया बदलाव लाया। पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने से स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी। छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा दिया। इन कदमों ने बिहार की सामाजिक संरचना को धीरे-धीरे बदलने में भूमिका निभाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश कुमार की छवि 'सुशासन बाबू' के रूप में स्थापित हुई। उन्होंने प्रशासनिक सुधार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी विकास को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनके शासनकाल में बिहार की छवि धीरे-धीरे बदलने लगी। रष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार को विकास के नए प्रयासों के संदर्भ में चर्चा मिलने लगी। विहार के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा। बिहार में सड़कों, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में जो बदलाव हुए, उससे राज्य में परिवर्तन आया। मगर भूलना नहीं चाहिए कि राजनीति में बदलाव हमेशा अनिश्चितता लेकर आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश के संभावित फैसले से भी बिहार की राजनीति में कई नए सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जदयू अपनी पुरानी ताकत बनाए रख पाएगी? क्या भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री चनाएगी ? क्या नई पीढ़ी के नेताओं को मौका मिलेगा ? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका निभाएंगे ? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिलेंगे। लेकिन इतना तय है कि कुमार का यह फैसला केवल एक व्यक्ति के पद परिवर्तन की कहानी नहीं है। यह बिहार की राजनीति के एक लंबे अध्याय के समापन और एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें नीतीश का राज्यसभा जाना सिर्फ पद का बदलाव नहीं है; यह करीब 5 दशक लंबी राजनीतिक यात्रा का एक नया अध्याय भी हो सकता है। हाल ही में नीतीश कुमार ने खुद कहा है कि अपनी लंबी राजनीतिक जिंदगी में वे बिहार विधानसभा के सदस्य, विधान परिषद के सदस्य और लोकसभा के सांसद रह चुके हैं। अब वे राज्यसभा में भी सेवा देना चाहते हैं। और उसके बाद अगर उन्हें केंद्र सरकार में कोई भूमिका मिली, तो बिहार की राजनीति का यह बड़ा चेहरा फिर से राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिख सकता है। राजनीति में समय के साथ भूमिकाएं बदलती रहती हैं, लेकिन कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनकी छाया लंबे समय तक बनी रहती है। नीतीश भी ऐसे ही नेताआ में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका चाहे समाप्त हो जाए, लेकिन बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी मौजूदगी आगे भी चर्चा और प्रभाव का विषय बनी रहेगी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें 2020 के बाद एनडीए में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। सीटों की संख्या साफ दिखा रही थी कि भाजपा के पास ज्यादा विधायक हैं, फिर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहे। आखिर ऐसा क्यों? इसके 2 मुख्य कारण अक्सर बताए जाते हैं। पहला कारण उनकी सामाजिक आधार है। बिहार में नीतीश कुमार ने अति पिछड़े वर्गों और महिला मतदाताओं से बहुत मजबूत जुड़ाव बनाया है। शराबबंदी जैसी नीतियां और महिलाओं के लिए कल्याण योजनाओं ने उन्हें एक भरोसेमंद और विश्वसनीय नेता की छवि दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 साल की उम्र में स्वास्थ्य कारणों से नीतीश कुमार अब कम मेहनत वाला रोल चुनना चाहते हैं। ऐसे में राज्यसभा उनके लिए एक सम्मानजनक और महत्वपूर्ण मंच हो सकता है। लेकिन बात यहां सिर्फ पद बदलने की नहीं है। यह पार्टी के भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश भी हो सकती है। चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में आ सकते हैं और उन्हें राज्य सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:53:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में लाडो लक्ष्मी योजना में हुआ बड़ा बदलाव, पढ़ें पूरी जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf0">Haryana Lado Laxmi Yojana: हरियाणा सरकार पंडित </span><span class="cf0">दीनदयाल</span> <span class="cf0">लाडो</span><span class="cf0"> लक्ष्मी योजना में बड़ा परिवर्तन </span><span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बदलाव</span> <span class="cf0">बिहार</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एनडीए</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जीत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">वहां</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">आर्थिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">सकारात्मक</span> <span class="cf0">असर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">प्रेरित</span><span class="cf0"> माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संकेत दिए हैं कि योजना के तहत </span><span class="cf0">मिलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">मासिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">राशि</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">अब</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दो</span> <span class="cf0">बार</span> <span class="cf0">एकमुश्त</span> <span class="cf0">किस्त</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">रूप</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दिया</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मासिक</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जगह</span> <span class="cf0">मिलेगी</span><span class="cf0"> 12,600 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">किस्त</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वर्तमान</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">लाडो</span> <span class="cf0">लक्ष्मी</span> <span class="cf0">योजना</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">अंतर्गत</span> <span class="cf0">गरीब</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">महीने</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">रुपये</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160897/haryana-big-change-in-lado-lakshmi-yojana-in-haryana-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/lado-laxmi-yojana-(5).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf0">Haryana Lado Laxmi Yojana: हरियाणा सरकार पंडित </span><span class="cf0">दीनदयाल</span> <span class="cf0">लाडो</span><span class="cf0"> लक्ष्मी योजना में बड़ा परिवर्तन </span><span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बदलाव</span> <span class="cf0">बिहार</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एनडीए</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जीत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">वहां</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">आर्थिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">सकारात्मक</span> <span class="cf0">असर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">प्रेरित</span><span class="cf0"> माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संकेत दिए हैं कि योजना के तहत </span><span class="cf0">मिलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">मासिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">राशि</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">अब</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दो</span> <span class="cf0">बार</span> <span class="cf0">एकमुश्त</span> <span class="cf0">किस्त</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">रूप</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दिया</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">मासिक</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जगह</span> <span class="cf0">मिलेगी</span><span class="cf0"> 12,600 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">किस्त</span></strong></p>
<p><span class="cf0">वर्तमान</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">लाडो</span> <span class="cf0">लक्ष्मी</span> <span class="cf0">योजना</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">अंतर्गत</span> <span class="cf0">गरीब</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">महीने</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">आर्थिक</span><span class="cf0"> सहायता दी जाती है। लेकिन इसे बदलकर हर छह महीने में 12,600 रुपये की </span><span class="cf0">एकमुश्त</span><span class="cf0"> राशि देने पर विचार किया जा रहा </span><span class="cf0">है।एक</span><span class="cf0"> वर्ष में यह कुल राशि 25,200 रुपये बनती है।</span></p>
<p><span class="cf0">सरकार का मानना है कि </span><span class="cf0">एकमुश्त</span><span class="cf0"> राशि महिलाओं के लिए अधिक उपयोगी साबित होगी</span><span class="cf0">। यह राशि </span><span class="cf0">रोजगार शुरू करने, घर</span><span class="cf2">–</span><span class="cf0">परिवार की </span><span class="cf0">ज़रूरतों</span><span class="cf0"> या व्यक्तिगत कार्यों में यह रकम बेहतर तरीके से उपयोग की जा सकती है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">बिहार </span><span class="cf0">मॉडल</span><span class="cf0"> क्यों बना आधार?</span></strong></p>
<p><span class="cf0">बिहार में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10,000</span><span class="cf2">–</span><span class="cf1">10,000 </span><span class="cf0">रुपये दिए गए थे। इस आर्थिक सहायता ने चुनाव नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और महिलाओं का व्यापक समर्थन </span><span class="cf0">एनडीए</span><span class="cf0"> को मिला।</span></p>
<p><span class="cf0">हरियाणा सरकार भी इसी सफल </span><span class="cf0">मॉडल</span><span class="cf0"> को अपने राज्य में लागू करना चाहती है। बिहार में उस समय करीब 25 लाख महिलाओं के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (</span><span class="cf1">DBT) </span><span class="cf0">के माध्यम से राशि भेजी गई थी।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">कितनी महिलाएं होंगी लाभार्थी?</span></strong></p>
<p><span class="cf0">हरियाणा में नवंबर से शुरू हुई योजना वर्तमान में उन महिलाओं को कवर कर रही है जिनके परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रुपये तक है। अब </span><span class="cf0">तक</span> <span class="cf0">करीब</span><span class="cf0"> 6 </span><span class="cf0">लाख</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">खातों</span><span class="cf0"> में 2100-2100 रुपये डाले जा चुके हैं।</span></p>
<p><span class="cf0">पूरे राज्य में लगभग 20 लाख महिलाएं इस श्रेणी में </span><span class="cf0">चिन्हित</span><span class="cf0"> हैं। </span><span class="cf0">धीरे-धीरे</span><span class="cf0"> योजना को 1.80 लाख और 3 लाख वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं तक भी बढ़ाया जाएगा। राज्य में कुल महिलाओं की संख्या लगभग 45 लाख है।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">योजना का वार्षिक </span><span class="cf0">बजट</span></strong></p>
<p><span class="cf0">लाडो</span><span class="cf0"> लक्ष्मी योजना पर हरियाणा सरकार 5,000 करोड़ रुपये सालाना खर्च </span><span class="cf0">करेगी</span><span class="cf0">। यह राशि राज्य के वार्षिक </span><span class="cf0">बजट</span><span class="cf0"> में नियमित रूप से शामिल की जाएगी।</span></p>
<p><span class="cf0">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही पिछले महीने इस योजना का वर्चुअल शुभारंभ कर चुके हैं, जिसके दौरान 75 लाख महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये </span><span class="cf0">ट्रांसफर</span><span class="cf0"> किए गए थे।</span></p>
<p><strong><span class="cf0">सरकार ने अधिकारियों को दी निर्देश</span></strong></p>
<p><span class="cf0">मुख्यमंत्री नायब सिंह </span><span class="cf0">सैनी</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">हिसार</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">आयोजित</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">कार्यक्रम</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">स्पष्ट</span> <span class="cf0">संकेत</span> <span class="cf0">दिए</span> <span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> भविष्य में योजना </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> राशि साल में दो बार हस्तांतरित की जाएगी।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 10:35:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में लाडो लक्ष्मी योजना में हुआ बड़ा बदलाव, पढ़ें पूरी जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p></p><p><span class="cf0">Haryana Lado Laxmi Yojana: हरियाणा सरकार पंडित </span><span class="cf0">दीनदयाल</span> <span class="cf0">लाडो</span><span class="cf0"> लक्ष्मी योजना में बड़ा परिवर्तन </span><span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बदलाव</span> <span class="cf0">बिहार</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एनडीए</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जीत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">वहां</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">आर्थिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">सकारात्मक</span> <span class="cf0">असर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">प्रेरित</span><span class="cf0"> माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संकेत दिए हैं कि योजना के तहत </span><span class="cf0">मिलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">मासिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">राशि</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">अब</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दो</span> <span class="cf0">बार</span> <span class="cf0">एकमुश्त</span> <span class="cf0">किस्त</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">रूप</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दिया</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p><p><strong><span class="cf0">मासिक</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जगह</span> <span class="cf0">मिलेगी</span><span class="cf0"> 12,600 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">किस्त</span></strong></p><p><span class="cf0">वर्तमान</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">लाडो</span> <span class="cf0">लक्ष्मी</span> <span class="cf0">योजना</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">अंतर्गत</span> <span class="cf0">गरीब</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">महीने</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">रुपये</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160610/haryana-big-change-in-lado-lakshmi-yojana-in-haryana-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/lado-laxmi-yojana-(5).jpg" alt=""></a><br /><p></p><p><span class="cf0">Haryana Lado Laxmi Yojana: हरियाणा सरकार पंडित </span><span class="cf0">दीनदयाल</span> <span class="cf0">लाडो</span><span class="cf0"> लक्ष्मी योजना में बड़ा परिवर्तन </span><span class="cf0">करने</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">तैयारी</span> <span class="cf0">कर</span> <span class="cf0">रही</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">। </span><span class="cf0">यह</span> <span class="cf0">बदलाव</span> <span class="cf0">बिहार</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">एनडीए</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जीत</span> <span class="cf0">और</span> <span class="cf0">वहां</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">दी</span> <span class="cf0">गई</span> <span class="cf0">आर्थिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">सकारात्मक</span> <span class="cf0">असर</span> <span class="cf0">से</span> <span class="cf0">प्रेरित</span><span class="cf0"> माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संकेत दिए हैं कि योजना के तहत </span><span class="cf0">मिलने</span> <span class="cf0">वाली</span> <span class="cf0">मासिक</span> <span class="cf0">सहायता</span> <span class="cf0">राशि</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">अब</span> <span class="cf0">साल</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दो</span> <span class="cf0">बार</span> <span class="cf0">एकमुश्त</span> <span class="cf0">किस्त</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">रूप</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">दिया</span> <span class="cf0">जा</span> <span class="cf0">सकता</span> <span class="cf0">है</span><span class="cf0">।</span></p><p><strong><span class="cf0">मासिक</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">जगह</span> <span class="cf0">मिलेगी</span><span class="cf0"> 12,600 </span><span class="cf0">की</span> <span class="cf0">किस्त</span></strong></p><p><span class="cf0">वर्तमान</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">लाडो</span> <span class="cf0">लक्ष्मी</span> <span class="cf0">योजना</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">अंतर्गत</span> <span class="cf0">गरीब</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">को</span> <span class="cf0">हर</span> <span class="cf0">महीने</span><span class="cf0"> 2100 </span><span class="cf0">रुपये</span> <span class="cf0">की</span> <span class="cf0">आर्थिक</span><span class="cf0"> सहायता दी जाती है। लेकिन इसे बदलकर हर छह महीने में 12,600 रुपये की </span><span class="cf0">एकमुश्त</span><span class="cf0"> राशि देने पर विचार किया जा रहा </span><span class="cf0">है।एक</span><span class="cf0"> वर्ष में यह कुल राशि 25,200 रुपये बनती है।</span></p><p><span class="cf0">सरकार का मानना है कि </span><span class="cf0">एकमुश्त</span><span class="cf0"> राशि महिलाओं के लिए अधिक उपयोगी साबित होगी</span><span class="cf0">। यह राशि </span><span class="cf0">रोजगार शुरू करने, घर</span><span class="cf2">–</span><span class="cf0">परिवार की </span><span class="cf0">ज़रूरतों</span><span class="cf0"> या व्यक्तिगत कार्यों में यह रकम बेहतर तरीके से उपयोग की जा सकती है।</span></p><p><strong><span class="cf0">बिहार </span><span class="cf0">मॉडल</span><span class="cf0"> क्यों बना आधार?</span></strong></p><p><span class="cf0">बिहार में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10,000</span><span class="cf2">–</span><span class="cf1">10,000 </span><span class="cf0">रुपये दिए गए थे। इस आर्थिक सहायता ने चुनाव नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और महिलाओं का व्यापक समर्थन </span><span class="cf0">एनडीए</span><span class="cf0"> को मिला।</span></p><p><span class="cf0">हरियाणा सरकार भी इसी सफल </span><span class="cf0">मॉडल</span><span class="cf0"> को अपने राज्य में लागू करना चाहती है। बिहार में उस समय करीब 25 लाख महिलाओं के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (</span><span class="cf1">DBT) </span><span class="cf0">के माध्यम से राशि भेजी गई थी।</span></p><p><strong><span class="cf0">कितनी महिलाएं होंगी लाभार्थी?</span></strong></p><p><span class="cf0">हरियाणा में नवंबर से शुरू हुई योजना वर्तमान में उन महिलाओं को कवर कर रही है जिनके परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रुपये तक है। अब </span><span class="cf0">तक</span> <span class="cf0">करीब</span><span class="cf0"> 6 </span><span class="cf0">लाख</span> <span class="cf0">महिलाओं</span> <span class="cf0">के</span> <span class="cf0">खातों</span><span class="cf0"> में 2100-2100 रुपये डाले जा चुके हैं।</span></p><p><span class="cf0">पूरे राज्य में लगभग 20 लाख महिलाएं इस श्रेणी में </span><span class="cf0">चिन्हित</span><span class="cf0"> हैं। </span><span class="cf0">धीरे-धीरे</span><span class="cf0"> योजना को 1.80 लाख और 3 लाख वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं तक भी बढ़ाया जाएगा। राज्य में कुल महिलाओं की संख्या लगभग 45 लाख है।</span></p><p><strong><span class="cf0">योजना का वार्षिक </span><span class="cf0">बजट</span></strong></p><p><span class="cf0">लाडो</span><span class="cf0"> लक्ष्मी योजना पर हरियाणा सरकार 5,000 करोड़ रुपये सालाना खर्च </span><span class="cf0">करेगी</span><span class="cf0">। यह राशि राज्य के वार्षिक </span><span class="cf0">बजट</span><span class="cf0"> में नियमित रूप से शामिल की जाएगी।</span></p><p><span class="cf0">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही पिछले महीने इस योजना का वर्चुअल शुभारंभ कर चुके हैं, जिसके दौरान 75 लाख महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये </span><span class="cf0">ट्रांसफर</span><span class="cf0"> किए गए थे।</span></p><p><strong><span class="cf0">सरकार ने अधिकारियों को दी निर्देश</span></strong></p><p><span class="cf0">मुख्यमंत्री नायब सिंह </span><span class="cf0">सैनी</span> <span class="cf0">ने</span> <span class="cf0">हिसार</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">आयोजित</span> <span class="cf0">एक</span> <span class="cf0">कार्यक्रम</span> <span class="cf0">में</span> <span class="cf0">स्पष्ट</span> <span class="cf0">संकेत</span> <span class="cf0">दिए</span> <span class="cf0">कि</span><span class="cf0"> भविष्य में योजना </span><span class="cf0">की</span><span class="cf0"> राशि साल में दो बार हस्तांतरित की जाएगी।</span></p><p></p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/160610/haryana-big-change-in-lado-lakshmi-yojana-in-haryana-read</link>
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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 10:14:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र मे मोदी नीतीश के नेतृत्व मे तीर चलेगा कमल खिलेगा - रविन्द्र प्रसाद सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>  गोपालगंज ( बिहार )- </strong>दिल्ली विधानसभा चुनाव मे बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र से एन डी ए समर्थित जनता दल यूनाइटेड के लोकप्रिय प्रत्याशी उम्मीदवार शैलेन्द्र कुमार के पक्ष मे शुक्रवार को संतनगर वार्ड संख्या 9 मे तोमर कालोनी, कमालपुर, कमल विहार एवं समता विहार के ब्लाक ए, बी, सी, डी, ई के दर्जनों गलियों मुहल्लो मे मतदाताओं से जनसम्पर्क कर बिहार सरकार के ग्रामीण मंत्री श्रवण कुमार,विधान पार्षद रविन्द्र प्रसाद सिंह, विधायक अजय चौधरी, प्रदेश महासचिव परमहंष कुमार, प्रमोद कुमार पटेल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव मै प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व मे भाजपा एन डी ए समर्थित जनप्रिय</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148053/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img-20250131-wa0297-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong> गोपालगंज ( बिहार )- </strong>दिल्ली विधानसभा चुनाव मे बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र से एन डी ए समर्थित जनता दल यूनाइटेड के लोकप्रिय प्रत्याशी उम्मीदवार शैलेन्द्र कुमार के पक्ष मे शुक्रवार को संतनगर वार्ड संख्या 9 मे तोमर कालोनी, कमालपुर, कमल विहार एवं समता विहार के ब्लाक ए, बी, सी, डी, ई के दर्जनों गलियों मुहल्लो मे मतदाताओं से जनसम्पर्क कर बिहार सरकार के ग्रामीण मंत्री श्रवण कुमार,विधान पार्षद रविन्द्र प्रसाद सिंह, विधायक अजय चौधरी, प्रदेश महासचिव परमहंष कुमार, प्रमोद कुमार पटेल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव मै प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व मे भाजपा एन डी ए समर्थित जनप्रिय उम्मीदवार शैलेन्द्र कुमार को आगामी 5 फ़रवरी को तीर छाप का बटन दवाकर भारी मतो से शैलेन्द्र कुमार को जिताने का अपील किया l</div>
<div> </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-01/img-20250131-wa0295.jpg" alt=" बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र मे मोदी नीतीश के नेतृत्व मे तीर चलेगा कमल खिलेगा - रविन्द्र प्रसाद सिंह" width="1600" height="1200"></img> जनता ने भरोशा और विश्वास दिलाया की हम लोग तीर को वोट देंगे l जनसम्पर्क गली गली घर घर तीर का पर्चा पहुंचाने और एक एक व्यक्ति से मिलने के अभियान मे जदयू प्रदेश उपाध्यक्ष रविन्द्र प्रसाद सिंह, प्रदेश महासचिव परमहंस कुमार, प्रमोद कुमार पटेल, अनिल कुमार, नागेंद्र सिंह पटेल मुखिया, बिरेन्द्र साह गोंड, अवधेश लाल देव, एजाज आलम, रौशन झा, सुनील कुमार सिंह, सहित सैकड़ो समर्थक मतदाता, एन डी ए कार्यकर्ता उपस्थित थे l</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/148053/%C2%A0</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 19:38:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM पद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार पर भड़की कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नेशनल डेस्क: </strong>नीतीश कुमार के रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने उनकी तुलना ‘‘गिरगिट'' से की और कहा कि राज्य के लोग इस ‘‘विश्वासघात'' के लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल राजेन्द्र वी आर्लेकर को रविवार सुबह अपना इस्तीफा सौंप दिया। वह राज्य में ‘महागठबंधन' से अलग हो गए। कुमार के इस कदम से ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' (इंडिया) को भी बड़ा झटका लगा है।</p>
<p><strong>गिरगिट से की नीतीश कुमार की तुलना </strong><br />कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नीतीश कुमार के इस कदम की आलोचना करते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138438/congress-angry-at-nitish-kumar-after-resigning-from-the-post"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/2024_1image_13_22_018223683nitishkumar-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नेशनल डेस्क: </strong>नीतीश कुमार के रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने उनकी तुलना ‘‘गिरगिट'' से की और कहा कि राज्य के लोग इस ‘‘विश्वासघात'' के लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल राजेन्द्र वी आर्लेकर को रविवार सुबह अपना इस्तीफा सौंप दिया। वह राज्य में ‘महागठबंधन' से अलग हो गए। कुमार के इस कदम से ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' (इंडिया) को भी बड़ा झटका लगा है।</p>
<p><strong>गिरगिट से की नीतीश कुमार की तुलना </strong><br />कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नीतीश कुमार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह साफ है कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा' से ध्यान भटकाने के लिए यह ‘‘राजनीतिक नाटक'' किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जल्द ही बिहार में प्रवेश करने वाली राहुल गांधी की यात्रा से ‘‘घबराए हुए'' हैं। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘बार-बार राजनीतिक साझेदार बदलने वाले नीतीश कुमार रंग बदलने में गिरगिटों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।''</p>
<p><strong>जनता कभी माफ नहीं करेगी </strong><br />उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ‘‘विश्वासघात महारथी'' और उन्हें इशारों पर नचाने वालों को माफ नहीं करेगी। रमेश ने कहा, ‘‘बिलकुल साफ है कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा से प्रधानमंत्री और भाजपा घबराए हुए हैं और उससे ध्यान हटाने के लिए यह राजनीतिक नाटक रचा गया है।'' राज्यपाल ने नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नयी सरकार के गठन तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से शाम तक नयी सरकार के गठन की संभावना है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jan 2024 15:17:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> BJP  को भारी पड़ सकता है नीतीश को  NDA में शामिल करना-  प्रशांत किशोर का बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Bihar Politics: </strong>बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस्तीफे देने के बाद देश की राजनीति में खलबली मच गई है। जहां एक तरफ भाजपा के नेता नीतीश कुमार को बधाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन के नेता उनपर लगातार हमलावर हैं। इसी बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर  (Prashant Kishore) का भी बयान सामने आया है। </p>
<p><strong>"आज सभी का पलटू राम आया सामने"</strong><br />प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के द्वारा सीएम पद से इस्तीफा देने पर कहा कि आज जो घटना क्रम हुआ है वह हम पहले से कह रहे थे कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138437/including-nitish-in-nda-may-prove-costly-for-bjp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/2024_1image_14_30_415539614djdj-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Bihar Politics: </strong>बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस्तीफे देने के बाद देश की राजनीति में खलबली मच गई है। जहां एक तरफ भाजपा के नेता नीतीश कुमार को बधाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन के नेता उनपर लगातार हमलावर हैं। इसी बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर  (Prashant Kishore) का भी बयान सामने आया है। </p>
<p><strong>"आज सभी का पलटू राम आया सामने"</strong><br />प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के द्वारा सीएम पद से इस्तीफा देने पर कहा कि आज जो घटना क्रम हुआ है वह हम पहले से कह रहे थे कि यह होगा। नीतीश कुमार पलटू राम थे यह पूरी दुनिया जानती थी लेकिन आज के घटना क्रम में सभी का पलटू राम सामने आया है। नीतीश कुमार के साथ भाजपा और राजद भी पलटू राम है। जो भाजपा नीतीश कुमार को गाली दे रहे थे अब उनको सुशासन दिखेगा और राजद के लोग अब नीतीश को गाली देंगे। उन्होंने कहा कि एनडीए में नीतीश के शामिल होने पर भाजपा को लोकसभा चुनाव में जरूर फायदा होगा लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान होगा यह लिखकर रख लिजिए। </p>
<p><strong>2022 में BJP से नाता तोड़ने के बाद महागठबंधन में शामिल हुए थे नीतीश </strong><br />गौरतलब हो कि अगस्त 2022 में भाजपा से नाता तोड़ने के बाद नीतीश कुमार लालू प्रसाद की पार्टी राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हो गए थे। उस वक्त नीतीश ने भाजपा पर जद(यू) में विभाजन की कोशिश करने का आरोप लगाया था। नीतीश कुमार ने भाजपा को केंद्र में सत्ता से उखाड फेंकने के लिए देश भर में सभी विपक्षी दलों को एक साथ लाने का अभियान शुरू किया जिसकी परिणति विपक्षी गठबंधन ‘‘इंडिया'' के गठन के रूप में हुई। वहीं अब नीतीश के राजग में लौटने से विपक्षी गठबंधन को भी बड़ा झटका लगेगा। नीतीश ने एक तरह से तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए यह घोषणा की थी कि राजद नेता 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का नेतृत्व करेंगे। नीतीश की इस घोषणा के बाद जद(यू) में नाराजगी फैल गई जिसके कारण उपेन्द्र कुशवाहा जैसे उनके करीबी सहयोगी को पार्टी छोड़नी पड़ी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jan 2024 15:13:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपना मानसिक संतुलन खो बैठे है नितीश कुमार, इलाज की जरुरत: हिमंत बिस्वा </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>BJP: </strong>भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'जनसंख्या नियंत्रण' टिप्पणी पर उनकी माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए गुरुवार को राज्य विधानसभा में अपना विरोध जारी रखा। जैसे ही पार्टी ने अपना दावा दोहराया कि कुमार ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है, असम के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने मांग की कि उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जाए क्योंकि उन्हें आराम और उपचार की आवश्यकता है।</p>
<p>सरमा ने मध्य प्रदेश में कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136961/nitish-kumar-has-lost-his-mental-balance-needs-treatment-himanta"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/assam-cm_large_1358_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>BJP: </strong>भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'जनसंख्या नियंत्रण' टिप्पणी पर उनकी माफी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए गुरुवार को राज्य विधानसभा में अपना विरोध जारी रखा। जैसे ही पार्टी ने अपना दावा दोहराया कि कुमार ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है, असम के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने मांग की कि उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जाए क्योंकि उन्हें आराम और उपचार की आवश्यकता है।</p>
<p>सरमा ने मध्य प्रदेश में कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस तरह का बयान दिया है। वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। मैं जेडीयू नेताओं से अनुरोध करता हूं कि उन्हें आराम दें और उचित इलाज कराएं। आपको सीएम पद के लिए मानसिक रूप से फिट होना चाहिए। सरमा ने कहा कि मुझे लगता है कि वह अभी इसके लिए फिट नहीं हैं। सरमा ने कहा कि उनकी टिप्पणी से पता चलता है कि वह बीमार हैं और ऐसे व्यक्ति को राज्य नहीं चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा देना चाहिए। खोए हुए मानसिक संतुलन वाला मुख्यमंत्री राज्य के लिए खतरा है।</p>
<p>बिहार विधानसभा में जनसंख्या नियंत्रण में शिक्षा के महत्व पर बोलते हुए नीतीश कुमार ने बड़े ही भद्दे अंदाज में बताया कि कैसे एक शिक्षित महिला अपने पति को संभोग के दौरान रोक सकती है। इस टिप्पणी पर आक्रोश बढ़ने के बाद उन्होंने बुधवार को माफी मांगी। हालाँकि, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनकी माफ़ी काम नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इस तरह महिलाओं का अपमान करता है, उसे सीएम रहने का कोई अधिकार नहीं है। उसे पद छोड़ देना चाहिए, माफी मांगने से काम नहीं चलेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 14:04:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के  महिलाओं पर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर भाजपा की महिला मोर्चा ने नीतीश का पुतला फूंका</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>हरदोई। </strong>बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधानसभा में महिलाओं पर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर हरदोई भाजपा की महिला मोर्चा नेत्री अनुराधा मिश्रा के नेतृत्व में सिनेमा चौराहे पर पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में सदन की कार्रवाई के दौरान महिलाओं पर आपत्तिजनक बयान दिया, जिससे पूरे देश में नीतीश कुमार के ऊपर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। इस मामले को भाजपा ने महिला सशक्तिकरण पर एक बड़े कुठाराघात के रूप में लेते हुए गांव से लेकर देश स्तर तक विरोध प्रदर्शन दर्ज करवाया। इसी मामले को लेकर हरदोई भाजपा की महिला मोर्चा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136927/bjps-mahila-morcha-burnt-the-effigy-of-bihar-chief-minister"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/img-20231108-wa1005.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>हरदोई। </strong>बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधानसभा में महिलाओं पर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर हरदोई भाजपा की महिला मोर्चा नेत्री अनुराधा मिश्रा के नेतृत्व में सिनेमा चौराहे पर पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में सदन की कार्रवाई के दौरान महिलाओं पर आपत्तिजनक बयान दिया, जिससे पूरे देश में नीतीश कुमार के ऊपर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। इस मामले को भाजपा ने महिला सशक्तिकरण पर एक बड़े कुठाराघात के रूप में लेते हुए गांव से लेकर देश स्तर तक विरोध प्रदर्शन दर्ज करवाया। इसी मामले को लेकर हरदोई भाजपा की महिला मोर्चा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका।</div>
<div> </div>
<div>महिला मोर्चा जिला महामंत्री रीना गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर आसीन नीतीश कुमार अपना दिमागी संतुलन खो चुके है। उन्हें ऐसे आपत्तिजनक बयान देने से पहले यह याद कर लेते कि उनके भी घर में मां, बेटी, पत्नी, बहू है। जब वह संवैधानिक संस्था में खड़े होकर ऐसा बोल सकते है तो अपने घर में किस तरह का व्यवहार करते होंगे। जिस प्रदेश में मुख्यमंत्री इस सोच का हो वहा महिलाओं की क्या हिफाजत होती होगी।</div>
<div> </div>
<div>भाजपा नेता अनुराधा मिश्र ने कहा कि समाज में आज भी महिलाओं को तिरिस्कृत करने की सोच रखने वाले लोग है। ऐसे लोगों के लिए कानून बनाकर सख्त सजा देनी चाहिए। मुख्यमंत्री के पद का गौरव को चुके है नीतीश कुमार, उन्हें तत्काल अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। भाजपा नेता पारिषा तिवारी ने कहा कि हमारे सामने एक ऐसा व्यक्ति है जो मर्यादा का सर्वोत्तम उदाहरण है। वह है, प्रधानमंत्री मोदी, जो महिलाओं को पूजते है, उन्हे सशक्त बनाने के लिए अभियान चला रखा है वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा व्यक्ति है जो सपने तो पीएम के देख रहा है पर मर्यादा रत्ती भर भी नहीं।</div>
<div> </div>
<div>अपने दिए इस आपत्तिजनक बयान से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शर्म आनी चाहिए, पर अफसोस शर्म भी उनसे शरमा गई। महिलाओं के ऊपर हस हस कर आपत्तिजनक बयान देना दिखाता है कि महिलाओं के प्रति वह कितने असंवेदनशील हैं। उन्हे अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और बिहार सरकार को फौरन बर्खास्त कर देना चाहिए।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 11:19:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गठबंधन साथियों को धोखा देने वाली पार्टी है कांग्रेस: अखिलेश यादव </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Rajniti: </strong>इंडिया गठबंधन में बिखराव का एक और अध्याय सामने आ गया है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेद इतने गहरा गये हैं कि इसका असर लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के गठबंधन पर पड़ सकता है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांगेस पर उनकी पार्टी को ‘जातिवादी और वंशवादी’ बताने के लिए निशाना साधते हुए कहा है।</p>
<p>कि कांग्रेस अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जैसी ही भाषा बोल रही है। अखिलेश यादव ने साथ ही यह भी कहा है कि यह तो अच्छा हुआ कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136671/congress-is-the-party-that-betrays-its-alliance-partners-akhilesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/akhilesh-rahul_large_1257_23.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Rajniti: </strong>इंडिया गठबंधन में बिखराव का एक और अध्याय सामने आ गया है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतभेद इतने गहरा गये हैं कि इसका असर लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के गठबंधन पर पड़ सकता है। हम आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांगेस पर उनकी पार्टी को ‘जातिवादी और वंशवादी’ बताने के लिए निशाना साधते हुए कहा है।</p>
<p>कि कांग्रेस अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जैसी ही भाषा बोल रही है। अखिलेश यादव ने साथ ही यह भी कहा है कि यह तो अच्छा हुआ कि हमें पहले ही कांग्रेस की मंशा का पता चल गया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस का इतिहास गठबंधन साथियों को धोखा देने वाले का रहा है। अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी में कांग्रेस की ओर से सेंध लगाये जाने पर भी नाराजगी जताई।</p>
<p>हम आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए सपा का प्रचार करते हुए छतरपुर जिले के चंदला में कहा, ‘‘यह कांग्रेस ही थी जिसने मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सपा के साथ गठबंधन करने से इंकार कर दिया।’’ यादव ने कहा, ''कांग्रेस कहती है कि सपा ‘जातिवादी और वंशवादी’ पार्टी है, तो फिर उसमें और भाजपा में क्या अंतर है? वे दोनों एक ही भाषा बोलते हैं।’’ अखिलेश यादव ने कहा कि वंशवादी राजनीति हर पार्टी में मौजूद है। उन्होंने कहा कि जो भी सामाजिक न्याय की बात करेगा उसे जातिवादी होने का आरोप झेलना पड़ेगा।</p>
<p>राज्य में कांग्रेस द्वारा सपा उम्मीदवारों की खरीद-फरोख्त पर यादव ने कहा, ‘‘यह उनके इरादों को दर्शाता है...उन्हें ऐसा करने दीजिए। मध्य प्रदेश के लोगों ने देखा है कि यह कांग्रेस ही थी जिसने गठबंधन को खारिज कर दिया था।'' हम आपको बता दें कि अखिलेश यादव चंदला में पार्टी प्रत्याशी पुष्पेंद्र अहिरवार के समर्थन में एक आमसभा को संबोधित करने आये थे।</p>
<p>जनसभा को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि कुछ दल सपा को जातिवादी कह रहे हैं, लेकिन "समाजवादी कभी भी जातिवादी नहीं हो सकते क्योंकि वे सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं।" उन्होंने आश्वासन दिया कि जब भी सपा सत्ता में आएगी या उसके समर्थन से राज्य में सरकार बनेगी, तो सबसे पहले जातीय जनगणना कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि चंदला की जनता ने दो बार सपा प्रत्याशियों को आशीर्वाद दिया है और इस बार भी वह उसकी जीत सुनिश्चित करेगी।</p>
<p>बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के बारे में सपा प्रमुख यादव ने कहा कि इस पर लोकसभा चुनाव के समय चर्चा की जाएगी, क्योंकि केवल "पीडीए" (पिछड़ा, दलित और आदिवासी) की ताकत ही भाजपा को हरा सकेगी। उन्होंने एक प्रश्न पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कमलनाथ "बुजुर्ग" हैं, लेकिन सत्तारुढ़ भाजपा के पास मध्य प्रदेश में संभागों की संख्या से अधिक मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।</p>
<p>चुनाव के बाद किसी पार्टी को समर्थन देने पर यादव ने कहा कि वह केवल उसी पार्टी को समर्थन देने पर विचार करेंगे जो जातीय जनगणना कराएगी। हालाँकि, यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस बयान पर टिप्पणी करने से परहेज किया कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में कुछ भी नहीं हो रहा है, उन्होंने कहा कि वह इस बारे में बाद में बात करेंगे। सपा प्रमुख यादव ने कहा, ‘‘भाजपा भी अब पिछड़े वर्गों को अधिक टिकट देने की बात कर रही है।</p>
<p>यह मानसिकता में बड़े बदलाव को दर्शाता है। यहां तक कि कांग्रेस, जिसने आजादी के बाद जातीय जनगणना कराना बंद कर दिया था, अब इसके बारे में बात कर रही है...इसका मतलब है कि उन्हें पीडीए की ताकत का एहसास हो रहा है।’’ दलित या पिछड़े वर्ग के किसी सदस्य को मुख्यमंत्री बनाने के चुनावी वादे के बारे में पूछे जाने पर यादव ने दावा किया कि कांग्रेस और भाजपा दोनों कभी भी दलितों और पिछड़े वर्गों के पक्ष में निर्णय नहीं लेंगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 13:30:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जाति सर्वेक्षण के आँकड़े सार्वजानिक, किस जाति की कितनी जनसंख्या</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Bihar: </strong>बिहार में जाति सर्वेक्षण के आँकड़े सोमवार को सार्वजनिक कर दिए गए। राज्य में 27% पिछड़ा वर्ग है और 36% अत्यंत पिछड़ा वर्ग। जाति सर्वेक्षण के अनुसार 19 फीसदी से थोड़ी ज्यादा अनुसूचित जाति और 1.68 फीसदी अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या बताई गई है। बिहार सरकार द्वारा कराए गए जाति आधारित सर्वेक्षण में कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 बताई गई है। राज्य में कुल आबादी के 14 फ़ीसदी यादव हैं जबकि 3.45 फ़ीसदी राजपूत। बिहार में सवर्णों की तादाद 15.52 फीसदी है। सर्वेक्षण के अनुसार भूमिहार की आबादी 2.86 फीसदी, ब्रह्मणों की आबादी 3.66 फीसदी,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135422/caste-survey-data-is-public-how-much-population-of-which"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/62fa0bee5f05b.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Bihar: </strong>बिहार में जाति सर्वेक्षण के आँकड़े सोमवार को सार्वजनिक कर दिए गए। राज्य में 27% पिछड़ा वर्ग है और 36% अत्यंत पिछड़ा वर्ग। जाति सर्वेक्षण के अनुसार 19 फीसदी से थोड़ी ज्यादा अनुसूचित जाति और 1.68 फीसदी अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या बताई गई है। बिहार सरकार द्वारा कराए गए जाति आधारित सर्वेक्षण में कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 बताई गई है। राज्य में कुल आबादी के 14 फ़ीसदी यादव हैं जबकि 3.45 फ़ीसदी राजपूत। बिहार में सवर्णों की तादाद 15.52 फीसदी है। सर्वेक्षण के अनुसार भूमिहार की आबादी 2.86 फीसदी, ब्रह्मणों की आबादी 3.66 फीसदी, कुर्मी की 2.87 फीसदी और मुसहर की आबादी 3 फीसदी है।</p>
<p>बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज गांधी जयंती के शुभ अवसर पर बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना के आँकड़े प्रकाशित कर दिए गए हैं। उन्होंने जाति आधारित गणना के कार्य में लगी हुई पूरी टीम की तारीफ़ की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जाति आधारित गणना के लिए सर्वसम्मति से विधानमंडल में प्रस्ताव पारित किया गया था। बिहार विधानसभा के सभी 9 दलों की सहमति से निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराएगी 2 जून 2022 को मंत्रिपरिषद से इसकी स्वीकृति दी गई थी।</p>
<p>इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। विकास आयुक्त विवेक सिंह ने सर्वेक्षण के आँकड़ों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज गांधी जयंती के शुभ अवसर पर बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना के आँकड़े प्रकाशित कर दिए गए हैं। </p>
<hr />
<h5><strong><span style="color:rgb(230,126,35);">वर्गवार आबादी</span></strong></h5>
<ul>
<li><strong><span style="color:rgb(0,0,0);">पिछड़ा वर्ग - 27.12%</span></strong></li>
<li><strong>ओबीसी - 36.1%</strong></li>
<li><strong>सामान्य- 15.52%</strong></li>
<li><strong>एससी - 19.65%</strong></li>
<li><strong>एसटी - 1.68%</strong></li>
</ul>
<h5><strong><span style="color:rgb(230,126,35);">जातिवार आबादी</span></strong></h5>
<ul>
<li><strong>ब्राह्मण- 3.67%</strong></li>
<li><strong>राजपूत- 3.45%</strong></li>
<li><strong>भूमिहार - 2.89%</strong></li>
<li><strong>कायस्थ - 0.60%</strong></li>
<li><strong>यादव- 14.26%</strong></li>
<li><strong>कुर्मी- 2.87%</strong></li>
<li><strong>तेली- 2.81%</strong></li>
<li><strong>मुसहर- 3.08%</strong></li>
</ul>
<h5><strong><span style="color:rgb(230,126,35);">धर्मवार आबादी</span></strong></h5>
<ul>
<li><strong>हिन्दू- 81.99%</strong></li>
<li><strong>मुस्लिम- 17.70%</strong></li>
<li><strong>ईसाई-.05%</strong></li>
<li><strong>सिख- .01%</strong></li>
<li><strong>बौद्ध-.08%</strong></li>
</ul>
<hr />
<p>नीतीश ने कहा है कि 'स्वीकृति के आधार पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराई है। जाति आधारित गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है बल्कि सभी की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है। इसी के आधार पर सभी वर्गों के विकास एवं उत्थान के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।'</p>
<p>मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना को लेकर शीघ्र ही बिहार विधानसभा के उन्हीं 9 दलों की बैठक बुलाई जाएगी तथा जाति आधारित गणना के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जाएगा। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया है। उन्होंने कहा है कि अब सरकार की नीतियाँ और नीयत दोनों ही जाति आधारित सर्वे के इन आँकड़ों का सम्मान करेंगे।</p>
<p>जाति आधारित सर्वेक्षण काफ़ी कानूनी चुनौतियों और कुछ राजनीतिक दलों के विरोध का सामना करने के बाद हो पाया है। बिहार सरकार ने कहा कि सर्वेक्षण सामाजिक न्याय के लिए अहम है। इस सर्वेक्षण को अदालतों में ख़ूब चुनौतियाँ मिलीं। पटना उच्च न्यायालय ने राज्य में जाति-आधारित सर्वेक्षण कराने के बिहार सरकार के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएँ अगस्त में खारिज कर दी थीं।</p>
<p>और हाई कोर्ट के उस फ़ैसले के साथ ही नीतीश सरकार के उस सर्वे को जारी रहने का रास्ता साफ़ हो गया था। इससे पहले मई महीने में उच्च न्यायालय ने बिहार में जाति-आधारित सर्वेक्षण पूरा होने से 11 दिन पहले रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया था।</p>
<p>राज्य सरकार ने जाति सर्वेक्षण का पहला चरण 7 से 21 जनवरी के बीच पूरा किया और वह 15 अप्रैल से दूसरा चरण आयोजित कर रही थी, जिसे 15 मई को पूरा किया जाना था। पूरी प्रक्रिया इस साल मई तक पूरी करने की योजना थी। हालाँकि, 4 मई को हाई कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।<br />अगस्त महीने में जिन लोगों की याचिकाएँ हाई कोर्ट से खारिज कर दी गई थीं उन्होंने उस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बाद में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह बिहार सरकार को जाति सर्वेक्षण के डेटा या निष्कर्षों को प्रकाशित करने से नहीं रोक सकता, जब तक इस मामले में किसी संवैधानिक अधिकार के उल्लंघन या उसकी ओर से अक्षमता का मामला पहली नजर में न बनता हो। </p>
<p>बता दें कि विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. ने भी पूरे देश में जाति जनगणना कराने की मांग की है। बेंगलुरु में हुई 26 विपक्षी दलों की बैठक में जो कई अहम प्रस्ताव पास किए गए थे उनमें जाति जनगणना लागू करने की मांग भी थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उस बैठक के बाद इनकी घोषणाएं कीं। </p>
<p><br /><br /></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Oct 2023 17:29:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अवरोधों के बीच तैयार हुआ विपक्षी एकता का प्रारंभिक रोडमैप</title>
                                    <description><![CDATA[पटना में 12 जून को प्रस्तावित बैठक टलने के पीछे कांग्रेस और दोनों मेजबान क्षेत्रीय दलों के बीच कुछ गलतफहमियां थीं। राजद और जदयू के दूसरी-तीसरी श्रेणी के नेता अपने-अपने तरीके से विपक्ष की इस बैठक को भुनाने में जुट गए थे जो कांग्रेस को पसंद नहीं आया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130369/initial-roadmap-of-opposition-unity-prepared-amid-obstacles"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/rahul-gandgi.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>HighLights</strong></li>
<li><strong>भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दलों का प्रारंभिक रोडमैप तैयार</strong></li>
<li><strong>नीतीश के 'एक के खिलाफ एक' फार्मूले पर बढ़ चली चर्चा</strong></li>
<li><strong>अवरोधों के बीच तैयार हुआ विपक्षी एकता का रोडमैप</strong></li>
</ul>
<p> </p>
<p><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p><strong> </strong>अंतर्विरोधों के बावजूद भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने का प्रारंभिक रोडमैप तैयार कर लिया गया है। जदयू-राजद की सक्रियता और कोशिशों से कांग्रेस पर दबाव बढ़ा है। नीतीश कुमार ने समान विचारधारा वाले दलों से बात कर एक-एक कर सारे अवरोध हटाए। उन दलों को भी राजी किया, जो एक-दूसरे के लिए अछूत थे।</p>
<p>वामदलों को तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) को कांग्रेस के साथ लाना आसान नहीं था, किंतु राजद एवं जदयू के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से 23 जून को पटना में बैठक की घोषणा से साफ है कि गतिरोधों को हाशिये पर डालकर एकता की बात आगे बढ़ चली है।</p>
<h4><strong>लालू-नीतीश को करना पड़ा हस्तक्षेप</strong></h4>
<p>बात बिगड़ने लगी तो शीर्ष नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा। राजद के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से सहमति लेने के बाद ही 12 जून की तिथि तय हुई थी। बाद में कहा गया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे अनुपस्थित रहेंगे। इसलिए बैठक की तारीख आगे बढ़ाने और उसमें कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं में से किसी एक के उपस्थित रहने के लिए नीतीश और लालू ने सोनिया गांधी से स्वयं बात की, जिसके बाद बैठक की नई तिथि तय की गई।</p>
<h4><strong>भाजपा से मोर्चा के लिए चार सौ सीटें चिह्नित</strong></h4>
<p>भाजपा नेतृत्व वाले राजग को केंद्र की सत्ता से बाहर करने के लिए नीतीश ने एक के खिलाफ एक का फार्मूला दिया है। दावा किया जा रहा है कि अब तक लगभग चार सौ ऐसी सीटें चिह्नित की गई हैं, जहां इस फार्मूले पर आगे बढ़ा जा सकता है। नीतीश समेत विपक्षी एकता के पैरोकार इसे कम से कम पांच सौ सीटों तक ले जाना चाहते हैं। कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा और कौन सी सीट किस दल के हिस्से में जाएगी, इस पर अभी माथापच्ची होना है।</p>
<h4><strong>गलतफहमियां के चलते टली थी बैठक</strong></h4>
<p>सूत्रों के अनुसार पटना में 12 जून को प्रस्तावित बैठक टलने के पीछे कांग्रेस और दोनों मेजबान क्षेत्रीय दलों के बीच कुछ गलतफहमियां थीं। राजद और जदयू के दूसरी-तीसरी श्रेणी के नेता अपने-अपने तरीके से विपक्ष की इस बैठक को भुनाने में जुट गए थे, जो कांग्रेस को पसंद नहीं आया। इसलिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बैठक में आने से लाचारी जता दी। यह भी कहा गया कि बैठक हिमाचल प्रदेश की किसी ठंडी जगह में हो।</p>
<p>संभव है कि इसे सुलझाने को पहली बैठक में ही कुछ समितियां गठित कर दी जाएं। नीतीश के अनुभव एवं स्वीकार्यता को देखते हुए उन्हें समन्वयक बनाया जा सकता है। तर्क है कि लालू को छोड़ किसी नेता का रिश्ता कांग्रेस से मधुर नहीं है। ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, शरद पवार एवं उद्धव ठाकरे जैसे नेताओं को एक मंच पर लाना सबके बस का नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लोक सभा चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 21:01:36 +0530</pubDate>
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