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                <title>Social Awareness Campaign - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Social Awareness Campaign RSS Feed</description>
                
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                <title>लोटन में अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर गोष्ठी आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> विकास खण्ड अंतर्गत ब्लाक सभागार में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम उन्मूलन विषयक चर्चा एवं गोष्ठी का आयोजन श्रम विभाग एवं मानव सेवा संस्थान सेवा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिसमें श्रमिको का बीओसीडब्लू कार्ड बनाने के लिए शिविर का भी आयोजन किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गोष्ठी में बाल श्रम के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक जनजागरूकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी जितेंद्र कुमार ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181083/seminar-organized-on-international-day-prohibition-of-child-labor-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781274565666.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> विकास खण्ड अंतर्गत ब्लाक सभागार में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम उन्मूलन विषयक चर्चा एवं गोष्ठी का आयोजन श्रम विभाग एवं मानव सेवा संस्थान सेवा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिसमें श्रमिको का बीओसीडब्लू कार्ड बनाने के लिए शिविर का भी आयोजन किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गोष्ठी में बाल श्रम के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक जनजागरूकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी जितेंद्र कुमार ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्थान विद्यालय में है, न कि कार्यस्थलों पर। बाल श्रम रोकने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आने की आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, श्रमिक पंजीकरण, श्रमिक हित लाभ योजनाओं एवं विभागीय सुविधाओं की जानकारी देते हुए पात्र लोगों से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। एडीओ पंचायत सदानंद वर्मा ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों, पंचायतों और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पर जोर दिया। मानव सेवा संस्थान सेवा, गोरखपुर के फील्ड एरिया कंसल्टेंट अरुण मद्धेशिया ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी बाल श्रम के प्रमुख कारण हैं। फील्ड एरिया कंसल्टेंट सन्दीप कुमार ने बाल श्रम को गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता भी आवश्यक है। </div><div style="text-align:justify;"> गोष्ठी में ग्राम पंचायत अधिकारी रविन्द्र जाटव, ईश्वर देव, केशभान यादव, राहुल शर्मा, जगदम्बा प्रसाद, पवन मोदनवाल, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, संतोष गुप्ता,मदद फाउंडेशन से फिल्ड सुपरवाइजर बृजलाल यादव सहित अन्य</div><div style="text-align:justify;">अधिकारियों, कर्मचारियों एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"><div class="hp" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="eqJbab cZD3Qb"><br /></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 20:59:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी दिवस पर “शहीदों के सपनों की धरती को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> पृथ्वी दिवस के अवसर पर अमर शहीद झूरी सिंह के पपौत्र  समाजसेवी डॉ रामेश्वर सिंह ने  भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राण न्योछावर किए, उसकी रक्षा करना आज हर नागरिक का कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। “आज हम जिस तेजी से प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। यदि समय रहते हम नहीं चेते, तो इसके दुष्परिणाम बहुत गंभीर होंग।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176997/on-earth-day-it-is-the-responsibility-of-all-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0314.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> पृथ्वी दिवस के अवसर पर अमर शहीद झूरी सिंह के पपौत्र  समाजसेवी डॉ रामेश्वर सिंह ने  भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राण न्योछावर किए, उसकी रक्षा करना आज हर नागरिक का कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। “आज हम जिस तेजी से प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। यदि समय रहते हम नहीं चेते, तो इसके दुष्परिणाम बहुत गंभीर होंग।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमर शहीद झूरी सिंह जैसे वीरों ने देश की आज़ादी के लिए बलिदान दिया, और अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस आज़ाद देश की धरती को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित रखें। “देशभक्ति केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि अपने पर्यावरण की रक्षा में भी दिखाई देनी चाहिए,” </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने लोगों से अपील की कि वे प्लास्टिक का उपयोग कम करें, जल स्रोतों की रक्षा करें और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं द्वारा वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शपथ भी दिलाई गई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:36:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलती धरती पर करुणा की छांव: प्यासे परिंदों के लिए इंसानियत का सबसे सुंदर अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भीषण गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तब सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि हर जीव-जंतु उसके प्रभाव से जूझता है। जहां मनुष्य अपने लिए ठंडे पानी, पंखे, कूलर और एसी का इंतजाम कर लेता है, वहीं आकाश में उड़ने वाले छोटे-छोटे पक्षी, गिलहरियां और अन्य अबोल जीव प्यास से तड़पते हुए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। तपती धूप, सूखते जलस्रोत और कंक्रीट के फैलते जंगलों ने उनके लिए जीवन को और कठिन बना दिया है। ऐसे समय में यदि कोई उनके लिए पानी और दाने का छोटा सा इंतजाम कर दे, तो यह उनके लिए जीवनदान से कम नहीं</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176721/the-most-beautiful-campaign-of-humanity-to-provide-shade-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/198_1713365157661fe0a58ec77_07.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भीषण गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तब सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि हर जीव-जंतु उसके प्रभाव से जूझता है। जहां मनुष्य अपने लिए ठंडे पानी, पंखे, कूलर और एसी का इंतजाम कर लेता है, वहीं आकाश में उड़ने वाले छोटे-छोटे पक्षी, गिलहरियां और अन्य अबोल जीव प्यास से तड़पते हुए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। तपती धूप, सूखते जलस्रोत और कंक्रीट के फैलते जंगलों ने उनके लिए जीवन को और कठिन बना दिया है। ऐसे समय में यदि कोई उनके लिए पानी और दाने का छोटा सा इंतजाम कर दे, तो यह उनके लिए जीवनदान से कम नहीं होता। यही सोच आज कई शहरों में एक संवेदनशील अभियान का रूप ले चुकी है, जहां महिलाएं और समाज के जागरूक लोग मिलकर प्यासे परिंदों के लिए राहत बन रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आठ साल पहले शुरू हुआ एक छोटा सा प्रयास आज जनआंदोलन का रूप ले चुका है। शुरुआत एक साधारण सी भावना से हुई थी, लेकिन इस भावना में इतनी सच्चाई और करुणा थी कि यह धीरे-धीरे सैकड़ों लोगों को अपने साथ जोड़ती चली गई। एक दिन कुछ महिलाओं ने देखा कि भीषण गर्मी में गौरैया, कबूतर और गिलहरियां पानी की तलाश में भटक रही हैं। वे कभी किसी सूखी नलकी के पास बैठतीं, कभी किसी गड्ढे में जमे गंदे पानी की ओर जातीं, लेकिन उनकी प्यास पूरी नहीं हो पाती। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि उसने उनके दिल को झकझोर दिया। उसी क्षण उन्होंने तय कर लिया कि वे इन अबोल जीवों के लिए कुछ करेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही संकल्प आगे चलकर एक संगठित अभियान में बदल गया। शुरुआत में कुछ ही महिलाओं ने अपने घरों की छतों और आस-पास के पेड़ों पर मिट्टी के छोटे-छोटे बर्तन रखकर पानी भरना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने पार्कों, मंदिरों, गौशालाओं और सार्वजनिक स्थानों पर भी ऐसे बर्तन लगाने शुरू किए। हर दिन इन बर्तनों में पानी भरना, उन्हें साफ रखना और आसपास दाना डालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। यह काम किसी दिखावे या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि सच्ची सेवा भावना से किया जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समय के साथ इस प्रयास ने लोगों का ध्यान खींचा। आसपास के लोग इस पहल से प्रभावित हुए और उन्होंने भी अपने घरों के बाहर पानी के बर्तन रखना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह छोटा सा प्रयास एक बड़े अभियान में बदल गया, जिसमें आज कई महिलाएं और परिवार जुड़े हुए हैं। हजारों की संख्या में ‘परिंदे’ यानी पानी के बर्तन अलग-अलग स्थानों पर लगाए जा चुके हैं। यह अभियान सिर्फ पक्षियों को पानी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के भीतर छिपी संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को भी जागृत करने लगा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसमें जुड़ी महिलाएं इसे सिर्फ एक सेवा नहीं मानतीं, बल्कि इसे अपना कर्तव्य समझती हैं। उनका मानना है कि पक्षी हमारे पर्यावरण का एक अहम हिस्सा हैं। वे न केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर ये पक्षी नहीं रहेंगे, तो इसका असर पूरे पर्यावरण पर पड़ेगा। इसलिए उनकी रक्षा करना और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब शहरों में हरियाली कम होती जा रही है और प्राकृतिक जलस्रोत सूखते जा रहे हैं, तब पक्षियों के लिए पानी ढूंढना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में यह अभियान उनके लिए जीवन की एक किरण बनकर सामने आया है। जिन इलाकों में पहले पक्षियों की चहचहाहट सुनाई नहीं देती थी, वहां अब फिर से उनकी आवाज गूंजने लगी है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा असर डाल सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अभियान के पीछे एक गहरी सोच और समझ भी है। पानी के लिए मिट्टी या सिरेमिक के बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं, क्योंकि ये धूप में जल्दी गर्म नहीं होते और पानी को ठंडा बनाए रखते हैं। बर्तनों को हमेशा छांव में रखा जाता है, ताकि पानी ज्यादा देर तक उपयोगी रहे। हर दिन पानी बदलने और बर्तन साफ रखने का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि पक्षियों को स्वच्छ पानी मिल सके। साथ ही, पानी के पास थोड़ा दाना भी रखा जाता है, जिससे उन्हें भोजन की भी सुविधा मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह पहल हमें यह सिखाती है कि इंसानियत केवल इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सच्ची मानवता वही है, जो हर जीव के प्रति करुणा और दया का भाव रखे। जब हम किसी प्यासे पक्षी के लिए पानी रखते हैं, तो यह केवल एक छोटा सा काम नहीं होता, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारे प्रेम और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि हम इस धरती पर अकेले नहीं हैं, बल्कि लाखों-करोड़ों जीवों के साथ इसे साझा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में, जब जीवन की भागदौड़ में लोग अपने आसपास की दुनिया को नजरअंदाज कर देते हैं, ऐसे अभियान हमें रुककर सोचने पर मजबूर करते हैं। वे हमें यह एहसास दिलाते हैं कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और प्रयास से हम किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि हम बहुत बड़े स्तर पर कुछ करें; एक छोटा सा कदम भी किसी के लिए बहुत मायने रख सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भीषण गर्मी के इन दिनों में, जब सूरज की तपिश हर चीज को झुलसा रही होती है, तब एक कटोरा पानी किसी प्यासे पक्षी के लिए अमृत के समान होता है। यह सिर्फ उसकी प्यास नहीं बुझाता, बल्कि उसे जीवन जीने की ताकत भी देता है। और जब वह पक्षी पानी पीकर चहचहाते हुए उड़ जाता है, तो वह दृश्य किसी भी इंसान के दिल को सुकून और खुशी से भर देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अभियान की सफलता यह साबित करती है कि जब समाज के लोग मिलकर किसी नेक काम के लिए आगे आते हैं, तो बदलाव निश्चित रूप से संभव होता है। यह पहल न केवल पक्षियों के लिए राहत बन रही है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणा बन रही है। बच्चे जब अपने घरों के बाहर पानी के बर्तन रखते देखते हैं, तो उनके मन में भी प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि प्यासे परिंदों के लिए पानी रखना केवल एक दया का कार्य नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन का एक आवश्यक हिस्सा होना चाहिए। यह प्रकृति के साथ हमारे रिश्ते को मजबूत बनाता है और हमें एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ाता है। जब हर घर, हर गली और हर मोहल्ले में ऐसे छोटे-छोटे प्रयास होंगे, तब न केवल पक्षियों की प्यास बुझेगी, बल्कि हमारी धरती भी और अधिक जीवंत और सुंदर बन जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 19:01:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिलाओं व बेटियों के विकास में दिल खोल कर दान करें - सीमा देवी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>  प्रतापगढ़। </strong></div>
<div>  </div>
<div>बीते दिन तरुण चेतना एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में पट्टी तहसील क्षेत्र के भूलन गंज, रामपुर बेला में महिला में संचेतना के लिए महिला जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं व बालिकाओं के अधिकारों व उनसे सम्बंधित कानूनों पर खुल कर चर्चा की गई। इस अवसर पर तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी ने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की मुख्य थीम “दान से लाभ” रखी गई,</div>
<div>  </div>
<div>जिसका उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सहयोग, समर्थन और संसाधनों को साझा करने की भावना को बढ़ावा देना है, ताकि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173192/donate-openly-for-the-development-of-women-and-daughters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260308-wa0147.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong> प्रतापगढ़। </strong></div>
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<div>बीते दिन तरुण चेतना एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में पट्टी तहसील क्षेत्र के भूलन गंज, रामपुर बेला में महिला में संचेतना के लिए महिला जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं व बालिकाओं के अधिकारों व उनसे सम्बंधित कानूनों पर खुल कर चर्चा की गई। इस अवसर पर तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी ने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की मुख्य थीम “दान से लाभ” रखी गई,</div>
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<div>जिसका उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सहयोग, समर्थन और संसाधनों को साझा करने की भावना को बढ़ावा देना है, ताकि पूरे समाज को समानता और प्रगति का लाभ मिल सके। अंसारी ने जोर देकर कहा कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए समाज के सभी वर्गों को एक-दूसरे की मदद करने जागरूकता की जरूरत है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना, उनके सपनों को साकार करने में सहयोग देना और उन्हें समान अवसर प्रदान करना है।</div>
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<div>इस अवसर पर संस्था की मानव संसाधन अधिकारी हुश्ननारा बानो ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाएं समाज की आधी आबादी हैं और उनके बिना किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आपसी सहयोग से महिलाएं अपने अधिकारों को प्राप्त कर सकती हैं तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।मंच से संगीता शिवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।</div>
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<div>उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और सशक्त होंगी तभी परिवार, समाज और देश की प्रगति सुनिश्चित होगी।शोभावती ने अपने संबोधन में कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे एक-दूसरे का सहयोग करें और सामाजिक बंधनों से निकलकर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ें।</div>
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<div>कार्यक्रम में संजू देवी ने कहा कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समानता के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा होनी चाहिए।उन्होंने महिलाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीमा चौरसिया ने की, जिन्होंने बेटियों के सशक्तिकरण के लिए सबसे ज्यादा दान देने कि अपील की।</div>
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<div>कार्यक्रम का संचालन शकुंतला द्वारा किया गया । इस अवसर पर नाजरीन, गुलाब, लालसा, संगीता, शांति देवी, कलावती देवी, हकीम अंसारी, रजनीश कुमार, श्याम शंकर, गार्गी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे जिसमें महिलाओं की आवाज को बुलंद करने और उन्हें हर स्तर पर सहयोग प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया।</div>
<div>कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं व पुरुषों ने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की सामूहिक शपथ लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 21:18:42 +0530</pubDate>
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