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                <title>महिला अधिकार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>महिला अधिकार RSS Feed</description>
                
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                <title>मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> मिशन शक्ति फेज-5.0 के अंतर्गत भदोही पुलिस ने महिलाओं एवं बालिकाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति जागरूक किया। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में एंटी रोमियो टीमों व महिला पुलिसकर्मियों ने विद्यालयों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता अभियान चलाया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान महिलाओं को 1090, 112, 181, 1930, 108 और 1076 हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देते हुए पंपलेट वितरित किए गए। पुलिस ने बताया कि महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180998/women-were-made-aware-under-mission-shakti-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0055.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> मिशन शक्ति फेज-5.0 के अंतर्गत भदोही पुलिस ने महिलाओं एवं बालिकाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति जागरूक किया। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में एंटी रोमियो टीमों व महिला पुलिसकर्मियों ने विद्यालयों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता अभियान चलाया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस दौरान महिलाओं को 1090, 112, 181, 1930, 108 और 1076 हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देते हुए पंपलेट वितरित किए गए। पुलिस ने बताया कि महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्टिंग।। </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180992/objectionable-posting-against-aditi-yadav-on-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंच रही है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे कृत्य समाज में गलत संदेश देने के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा देते हैं। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए तथा उनके विरुद्ध साइबर अपराध और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में साइबर क्राइम प्रकोष्ठ को भी प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। समाजवादी अधिवक्ता सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी महिला के सम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है और कानून के दायरे में रहकर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली फिर शर्मसार : निर्भया के बाद भी क्यों नहीं थम रही महिलाओं के खिलाफ दरिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर ऐसी अमानवीय घटना की गवाह बनी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। चलती बस में एक महिला के साथ गैंगरेप की घटना ने लोगों को वर्ष 2012 के बहुचर्चित निर्भया कांड की भयावह यादें ताजा कर दीं। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता, कानून व्यवस्था की कमजोरी और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। राजधानी की सड़कों पर सात किलोमीटर तक चलती रही दरिंदगी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आज भी महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत आज</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179458/why-is-cruelty-against-women-not-stopping-even-after-delhis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001540406.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर ऐसी अमानवीय घटना की गवाह बनी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। चलती बस में एक महिला के साथ गैंगरेप की घटना ने लोगों को वर्ष 2012 के बहुचर्चित निर्भया कांड की भयावह यादें ताजा कर दीं। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता, कानून व्यवस्था की कमजोरी और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। राजधानी की सड़कों पर सात किलोमीटर तक चलती रही दरिंदगी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आज भी महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत आज विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर सेना तक, प्रशासन से लेकर उद्योग जगत तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। देश की बेटियां लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, सीमा पर देश की रक्षा कर रही हैं, बुलेट ट्रेन और मेट्रो चला रही हैं, बड़े-बड़े पदों पर कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद यदि एक महिला रात में सुरक्षित घर नहीं लौट सकती, तो यह विकास अधूरा है। किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से होती है। यदि वहां महिलाओं के साथ भय, हिंसा और अत्याचार जुड़ा हो, तो वह समाज आधुनिक नहीं कहलाया जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली में हुई यह घटना केवल अपराधियों की विकृत मानसिकता का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक सोच को भी उजागर करती है, जिसमें महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने में अभी भी संकोच दिखाई देता है। आज भी कई लोग महिलाओं की स्वतंत्रता, पहनावे और जीवनशैली को अपराधों से जोड़ने की कोशिश करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि अपराध का कारण महिला नहीं, बल्कि अपराधी की मानसिकता होती है। जब तक समाज लड़कियों को सम्मान और लड़कों को संस्कार देने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं करेगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना कठिन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी दुखद है कि हर बड़ी घटना के बाद कुछ दिनों तक देश में आक्रोश दिखाई देता है, मोमबत्तियां जलाई जाती हैं, सोशल मीडिया पर अभियान चलाए जाते हैं, राजनीतिक बयान दिए जाते हैं, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है। अपराधी कुछ समय बाद कानून की प्रक्रियाओं का लाभ उठाने लगते हैं और पीड़िता न्याय के लिए वर्षों तक संघर्ष करती रहती है। यही कारण है कि अपराधियों में कानून का भय कम होता जा रहा है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में तेजी से और कठोर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसी मानसिकता और अपराध के लिए कोई जगह नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिल्ली की इस घटना का सबसे मार्मिक पक्ष पीड़िता की मजबूरी है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उसने इलाज छोड़कर घर लौटना उचित समझा, क्योंकि उसके बीमार पति और छोटे बच्चों की जिम्मेदारी उसी पर थी। यह केवल एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि देश की उन लाखों महिलाओं की सच्चाई है, जो अत्याचार सहने के बाद भी परिवार की जिम्मेदारियों के कारण टूट नहीं सकतीं। यह स्थिति हमारे सामाजिक ढांचे की भी पोल खोलती है, जहां पीड़िता को पर्याप्त सुरक्षा, आर्थिक सहायता और मानसिक सहारा नहीं मिल पाता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए समाज, परिवार, प्रशासन और सरकार सभी को मिलकर कार्य करना होगा। सबसे पहले बच्चों को बचपन से ही महिलाओं के प्रति सम्मान की शिक्षा देनी होगी। स्कूलों और कॉलेजों में नैतिक शिक्षा तथा संवेदनशीलता को बढ़ावा देना होगा। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में युवाओं के सामने जो सामग्री परोसी जा रही है, उसका भी मानसिकता पर प्रभाव पड़ता है। अश्लीलता, हिंसा और महिलाओं को वस्तु की तरह प्रस्तुत करने वाली प्रवृत्तियों पर रोक लगाने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार को भी महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाना समय की मांग है। बसों, टैक्सियों और अन्य वाहनों की नियमित जांच होनी चाहिए। जिन वाहनों पर नियमों के उल्लंघन के मामले दर्ज हों, उन्हें सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। दिल्ली की घटना में जिस बस का उपयोग हुआ, वह पहले से नियमों के उल्लंघन के कारण कार्रवाई का सामना कर चुकी थी। यदि समय रहते कठोर निगरानी होती, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस व्यवस्था को और अधिक सक्रिय और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है। महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। कई बार पीड़िताएं सामाजिक भय और पुलिस के व्यवहार के कारण शिकायत दर्ज कराने से भी डरती हैं। यदि उन्हें भरोसा और सम्मान मिले, तो अपराधों की रोकथाम में मदद मिल सकती है। शहरों में सीसीटीवी कैमरों, हेल्पलाइन और महिला पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">समाज में बढ़ती संवेदनहीनता भी चिंता का विषय है। लोग घटनाओं को केवल खबर की तरह पढ़ते हैं और कुछ समय बाद भूल जाते हैं। जबकि आवश्यकता इस बात की है कि हर नागरिक महिलाओं की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझे। यदि कहीं कोई महिला संकट में दिखाई दे, तो लोग आगे आकर मदद करें। चुप रहना भी अपराध को बढ़ावा देने जैसा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता केवल आक्रोश व्यक्त करने की नहीं, बल्कि स्थायी समाधान खोजने की है। देश की बेटियों को डर के साए में जीने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। महिलाओं की सुरक्षा केवल महिला का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के सम्मान का प्रश्न है। जब तक हर महिला बिना भय के घर से निकलकर सुरक्षित वापस लौटने का विश्वास महसूस नहीं करेगी, तब तक हमारा विकास अधूरा रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निर्भया कांड के बाद देश ने बहुत कुछ सीखा, कानून बदले, जागरूकता बढ़ी, लेकिन यदि आज भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो यह आत्ममंथन का समय है। अपराधियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के सामने एक उदाहरण स्थापित हो सके। साथ ही समाज को भी अपनी सोच बदलनी होगी। महिलाओं का सम्मान केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि व्यवहार और व्यवस्था में दिखाई देना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">भारत तभी सच्चे अर्थों में विकसित और सभ्य राष्ट्र कहलाएगा, जब उसकी हर बेटी सुरक्षित, सम्मानित और निर्भय होकर जीवन जी सकेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">        <strong> *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:16:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधायक विनय वर्मा के नेतृत्व में  महिलाओं ने आक्रोश पदयात्रा निकाल भरी हुंकार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>नगर पंचायत शोहरतगढ़ में रविवार शाम को विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा व पत्नी बबिता वर्मा के साथ हजारों महिलाओं ने विधायक आवास संत रविदास नगर टीचर्स कॉलोनी से महिला आक्रोश पद यात्रा निकाल नारी शक्ति वंदन, नारी शक्ति, जिन्दाबाद, महिलाओं के अधिकार को लेकर आवाज़ बुलंद किया।  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुहिम को रोकने वाले विरोधियों पर महिलाएं व विधायक खूब गरजे। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में महिलाओं ने यात्रा में हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में अपनी एकजुटता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178051/under-the-leadership-of-mla-vinay-verma-women-took-out"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1777819120315.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>नगर पंचायत शोहरतगढ़ में रविवार शाम को विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा व पत्नी बबिता वर्मा के साथ हजारों महिलाओं ने विधायक आवास संत रविदास नगर टीचर्स कॉलोनी से महिला आक्रोश पद यात्रा निकाल नारी शक्ति वंदन, नारी शक्ति, जिन्दाबाद, महिलाओं के अधिकार को लेकर आवाज़ बुलंद किया।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुहिम को रोकने वाले विरोधियों पर महिलाएं व विधायक खूब गरजे। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में महिलाओं ने यात्रा में हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाई। पद यात्रा विधायक आवास से शुरू होकर  नगर पंचायत शोहरतगढ़ के तिरंगा तिराहा, पुलिस पिकेट, गोलघर, सोनारी मोहल्ला, भारत माता चौक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आदि का भ्रमण करते हुए पुनः वापस लौटी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाते हैं और जब अधिकार देने की बात आती है तो विरोध की राजनीति करते हैं। विधायक ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का आरक्षण कोई नहीं रोक पायेगा आधी आवादी अपना हक लेकर रहेगी विधायक पत्नी बबिता वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य हो रहा है और नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस महत्वपूर्ण कानून का विरोध कर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है, जिसे देश की मातृशक्ति कभी माफ नहीं करेगी। पद यात्रा में दौरान विधायक विनय वर्मा, विधायक पत्नी बबिता वर्मा, एसडीएम विवेकानंद मिश्रा, सीओ मयंक द्विवेदी, तहसीलदार प्रकाश सिंह, प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह ,शैलेन्द्र कौशल, विजय गुप्ता, अरविंद वर्मा, हरीश वर्मा , राजकुमारी, मुन्नी देवी आदि सहित हजारों की संख्या में महिलाओं की सहभागिता रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:17:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोले ए.के. शर्मा, महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong>नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भदोही प्रवास के दौरान औराई ब्लॉक सभागार में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रेस वार्ता की। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आयोजित जनआक्रोश मार्च में भी भागीदारी की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों से समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि इसे पारित कराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन विपक्ष के असहयोग के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177456/ak-sharma-said-on-nari-shakti-vandan-act-there-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0027-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong>नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भदोही प्रवास के दौरान औराई ब्लॉक सभागार में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रेस वार्ता की। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आयोजित जनआक्रोश मार्च में भी भागीदारी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों से समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि इसे पारित कराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन विपक्ष के असहयोग के कारण यह संभव नहीं हो सका। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में यह विधेयक अवश्य पारित होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विपक्ष के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि महिला अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति करना स्वीकार्य नहीं है। सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में सांसद विनोद बिंद, विधायक दीनानाथ भास्कर, विधायक विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष प्रियंका जायसवाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख पूनम मौर्या, कार्यकारिणी सदस्य रेनू पांडे सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डा.अंबेडकर का महिला अधिकारों के लिए समर्पण </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संसद से लेकर समाज  तक आज महिला अधिकारों और सशक्तिकरण की चर्चा जोरों पर है। क्या हम जानते हैं कि इसकी वैचारिक और विधायी नींव स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में ही डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रख दी गई थी?। डॉ. अंबेडकर स्वतंत्र भारत के उन विरले और दूरदर्शी राजनेताओं में अग्रणी थे, जिन्होंने महिलाओं की समानता को केवल एक सामाजिक सुधार का विषय न मानकर इसे राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त के रूप में देखा। उनका सुस्पष्ट मत था कि किसी भी समुदाय की प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175969/dr-bhimrao-ambedkar-creator-of-the-constitution-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)5.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संसद से लेकर समाज  तक आज महिला अधिकारों और सशक्तिकरण की चर्चा जोरों पर है। क्या हम जानते हैं कि इसकी वैचारिक और विधायी नींव स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में ही डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रख दी गई थी?। डॉ. अंबेडकर स्वतंत्र भारत के उन विरले और दूरदर्शी राजनेताओं में अग्रणी थे, जिन्होंने महिलाओं की समानता को केवल एक सामाजिक सुधार का विषय न मानकर इसे राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त के रूप में देखा। उनका सुस्पष्ट मत था कि किसी भी समुदाय की प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की स्थिति से किया जा सकता है। इसी दृष्टि के साथ उन्होंने न केवल सैद्धांतिक विमर्श किया, बल्कि विधायी और नीतिगत धरातल पर भी महिलाओं के उत्थान के लिए निर्णायक कदम उठाए और सतत् प्रयास किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान डॉ. अंबेडकर ने यह सुनिश्चित किया कि महिलाओं को पुरुष के समान नागरिक अधिकार प्राप्त हों। अनुच्छेद 14 और 15 के माध्यम से कानून के समक्ष समानता और लिंग आधारित भेदभाव के विरुद्ध सुरक्षा जैसे प्रावधान ऐतिहासिक मील के पत्थर साबित हुए। अंबेडकर का सबसे क्रांतिकारी और साहसिक प्रयास 'हिंदू कोड बिल' के रूप में सामने आया, जिसके माध्यम से उन्होंने महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, विवाह और तलाक में समानता तथा उत्तराधिकार के न्यायसंगत प्रावधान देने की पुरजोर वकालत की। उस दौर में इस विधेयक का रूढ़िवादी वर्गों द्वारा इतना तीव्र विरोध हुआ कि अंबेडकर ने अपने सिद्धांतों की रक्षा हेतु कानून मंत्री के पद से त्यागपत्र देना बेहतर समझा। हालांकि, कालांतर में इसी बिल के विभिन्न अंशों ने उन कानूनों का रूप लिया, जो आज भारतीय नारी के सम्मान और अधिकारों की आधारशिला बने हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​विधिक समानता के साथ-साथ डॉ. अंबेडकर ने श्रमिक महिलाओं के जीवन में भी गरिमापूर्ण परिवर्तन लाने की पहल की। उन्होंने मातृत्व लाभ, कार्य के निश्चित घंटे और खदानों व कारखानों में कार्यरत महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे प्रावधानों को श्रम कानूनों का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि आर्थिक सशक्तिकरण के बिना सामाजिक स्वतंत्रता अधूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों की केंद्र सरकार द्वारा 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना उसी लंबी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव प्रतीत होता है, जिसकी परिकल्पना दशकों पहले अंबेडकर ने की थी। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को आगामी जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के कारण इसकी समय-सीमा को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानूनी ढांचा तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा अपितु इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की वास्तविक इच्छाशक्ति और सामाजिक मानसिकता में आमूल-चूल परिवर्तन भी अपरिहार्य है। डॉ. अंबेडकर का संघर्ष आज भी हमें यह स्मरण कराता है कि वास्तविक प्रगति केवल नीतियों के निर्माण से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और समाज की व्यापक स्वीकार्यता से ही संभव होगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175969/dr-bhimrao-ambedkar-creator-of-the-constitution-of-india</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 19:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्त्री शिक्षा, सुरक्षा पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्रगति का आकलन उसकी आधी आबादी अर्थात स्त्रियों की स्थिति से किया जाता है। यह तथ्य आज केवल विचार नहीं बल्कि वैश्विक विकास सूचकांकों का आधार बन चुका है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्त्री की स्थिति एक ओर उल्लेखनीय प्रगति का संकेत देती है तो दूसरी ओर गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट करती है। स्त्री शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का आधार स्तंभ होती है, बीते कुछ दशकों में भारत में स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार देखने को मिला है, बालिका नामांकन दर में वृद्धि, माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक अंतर में कमी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173937/need-for-serious-discussion-on-womens-education-security"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्रगति का आकलन उसकी आधी आबादी अर्थात स्त्रियों की स्थिति से किया जाता है। यह तथ्य आज केवल विचार नहीं बल्कि वैश्विक विकास सूचकांकों का आधार बन चुका है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्त्री की स्थिति एक ओर उल्लेखनीय प्रगति का संकेत देती है तो दूसरी ओर गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट करती है। स्त्री शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का आधार स्तंभ होती है, बीते कुछ दशकों में भारत में स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार देखने को मिला है, बालिका नामांकन दर में वृद्धि, माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक अंतर में कमी और उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी ने सामाजिक संरचना को नया स्वरूप दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि शिक्षा स्त्री सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है, किंतु यह भी यथार्थ है कि ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में बालिकाओं की शिक्षा अब भी सामाजिक दबाव, घरेलू श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं से प्रभावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में स्त्री की स्थिति आधुनिक भारत की स्त्री आज शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में पहले की तुलना में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही है, पंचायत से लेकर संसद तक उसकी भागीदारी बढ़ी है और प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, इसके बावजूद घरेलू स्तर पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता, समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे अब भी पूर्ण समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, यह स्थिति इस तथ्य को रेखांकित करती है कि कानूनी अधिकार और सामाजिक स्वीकृति के बीच अभी भी एक स्पष्ट अंतर विद्यमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्त्रियों के विरुद्ध अपराध  चिंता का विषय है हाल के वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के स्वरूप में भी बदलाव आया है, पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराध,ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग से जुड़ी घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, दहेज से संबंधित मामले और सार्वजनिक स्थलों पर असुरक्षा की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि शहरीकरण और तकनीकी प्रगति के बावजूद सामाजिक मानसिकता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है, यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक चेतना के स्तर पर भी गंभीर आत्ममंथन की मांग करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कानूनी प्रावधान और प्रशासनिक दायित्व पर एक दृष्टि डालें तो भारत में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए सुदृढ़ कानूनी ढांचा उपलब्ध है, जिसमें घरेलू हिंसा निषेध अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून, दहेज निषेध अधिनियम तथा हाल के आपराधिक कानून संशोधन शामिल हैं, किंतु प्रशासनिक दृष्टि से चुनौती इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, त्वरित न्याय और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण की है, पुलिस, न्यायपालिका और स्थानीय प्रशासन के समन्वय के बिना केवल कानूनों का अस्तित्व पर्याप्त नहीं सिद्ध हो सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक सहभागिता और विकास की अनिवार्यता — स्त्रियों की आर्थिक भागीदारी को राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त के रूप में स्वीकार किया जा चुका है, स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म वित्त योजनाओं, ग्रामीण उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान किए हैं, फिर भी श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है, जिसका कारण सामाजिक जिम्मेदारियों का असमान बोझ, कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी और अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार की अधिकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया और सामाजिक दृष्टिकोण में मीडिया स्त्री की छवि निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, सकारात्मक उदाहरणों के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि स्त्री को संवेदनशीलता के साथ सम्मानजनक और संतुलित रूप में प्रस्तुत किया जाए, जिससे समाज में समानता और गरिमा का संदेश सुदृढ़ हो सके। भविष्य की दिशा और नीतिगत अपेक्षाएँ देखीं जाएं तो स्त्री की स्थिति में वास्तविक सुधार के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार को समग्र दृष्टिकोण से जोड़ना होगा, साथ ही सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन के लिए पुरुषों और बालकों को भी लैंगिक समानता के मूल्यों से जोड़ना अनिवार्य होगा, यह केवल महिला केंद्रित योजनाओं से नहीं बल्कि सामाजिक सहभागिता और प्रशासनिक संवेदनशीलता से संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्त्री की स्थिति किसी एक वर्ग या समुदाय का विषय नहीं बल्कि राष्ट्र की सामाजिक परिपक्वता और लोकतांत्रिक गुणवत्ता का दर्पण है, जब तक स्त्रियाँ भयमुक्त वातावरण में शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में समान अवसर प्राप्त नहीं करेंगी तब तक समावेशी विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा, इसलिए स्त्री सशक्तिकरण को नीतिगत प्राथमिकता के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में भी स्वीकार किया जाना समय की आवश्यकता है।<br /><br />संजीव ठाकुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:08:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला जनसुनवाई में 50 से अधिक मामलों की सुनवाई, पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय दिलाने के दिए निर्देश।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उ.प्र. राज्य महिला आयोग की  सदस्या । गीता विश्वकर्मा ने बुधवार को सर्किट हाउस के सभागार में महिला जनसुनवाई कर पीड़ित महिलाओं की समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई के दौरान घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, राजस्व विवाद, पुलिस संबंधित शिकायतें, अवैध कब्जा और साइबर अपराध सहित विभिन्न प्रकार के लगभग 50 मामले सामने आए। इनमें से कुछ मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजते हुए उनके गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनसुनवाई के दौरान सदस्या ने पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173198/more-than-50-cases-were-heard-in-mahila-jansunwai-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260311-wa0223.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उ.प्र. राज्य महिला आयोग की  सदस्या । गीता विश्वकर्मा ने बुधवार को सर्किट हाउस के सभागार में महिला जनसुनवाई कर पीड़ित महिलाओं की समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई के दौरान घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, राजस्व विवाद, पुलिस संबंधित शिकायतें, अवैध कब्जा और साइबर अपराध सहित विभिन्न प्रकार के लगभग 50 मामले सामने आए। इनमें से कुछ मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजते हुए उनके गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनसुनवाई के दौरान सदस्या ने पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि थानों में आने वाली महिलाओं की शिकायतों को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए तथा छोटे मामलों का निस्तारण थाने स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए अनावश्यक रूप से कोर्ट के चक्कर न लगाने पड़ें।</div>
<div style="text-align:justify;">जनसुनवाई में कई महत्वपूर्ण शिकायतें भी सामने आईं। प्रार्थिनी शर्मिला पुत्री अमरचंद्र पत्नी जयप्रकाश उर्फ सोनू, निवासी चाका गोसाई का तालाब, थाना नैनी ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट कर घर से बाहर निकालने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया। इस मामले में माननीय सदस्या ने दोनों पक्षों को 19 मार्च 2026 को राज्य महिला आयोग, लखनऊ में उपस्थित होने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी प्रकार करैलाबाग की निवासी कल्लो देवी पत्नी नरेश कुमार निषाद ने अपनी भूमिधरी जमीन गाटा संख्या 201 पर जबरन मिट्टी डालकर अतिक्रमण करने की शिकायत दर्ज कराई। इस पर सदस्या ने संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल कार्रवाई कर आयोग को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। वहीं शिवकुटी थाना क्षेत्र की निवासी रचना कुमारी ने मोहल्ले के पप्पू उर्फ उदय पासी और उनके परिवार द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की। इस मामले में भी संबंधित थानाध्यक्ष को एक सप्ताह के भीतर जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">करेली की निवासी मन्नो बानो ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ना और गाली-गलौज करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। इस पर सदस्या ने करेली थाना प्रभारी को मामले की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इसके अलावा पुराना कटरा की निवासी राखी जायसवाल ने अपने मकान में किराये पर दी गई दुकान को खाली कराने की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र दिया। इस पर माननीय सदस्या ने पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान माननीय सदस्या ने पिछली जनसुनवाई में आए मामलों की भी समीक्षा की और संबंधित विभागों से निस्तारित तथा लंबित मामलों की सूची उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से महिलाओं से संबंधित सरकारी योजनाओं, सहायता राशि तथा उनके लाभार्थियों की प्रगति की जानकारी भी मांगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि कोई महिला शिकायत लेकर थाने में आती है तो उसकी समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और आवश्यक कार्रवाई कर उसे संतुष्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम दिग्विजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इससे पूर्व सदस्या ने जिला कारागार के बंदी गृह का भी निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 21:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिलाओं व बेटियों के विकास में दिल खोल कर दान करें - सीमा देवी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>  प्रतापगढ़। </strong></div>
<div>  </div>
<div>बीते दिन तरुण चेतना एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में पट्टी तहसील क्षेत्र के भूलन गंज, रामपुर बेला में महिला में संचेतना के लिए महिला जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं व बालिकाओं के अधिकारों व उनसे सम्बंधित कानूनों पर खुल कर चर्चा की गई। इस अवसर पर तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी ने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की मुख्य थीम “दान से लाभ” रखी गई,</div>
<div>  </div>
<div>जिसका उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सहयोग, समर्थन और संसाधनों को साझा करने की भावना को बढ़ावा देना है, ताकि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173192/donate-openly-for-the-development-of-women-and-daughters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260308-wa0147.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong> प्रतापगढ़। </strong></div>
<div> </div>
<div>बीते दिन तरुण चेतना एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में पट्टी तहसील क्षेत्र के भूलन गंज, रामपुर बेला में महिला में संचेतना के लिए महिला जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं व बालिकाओं के अधिकारों व उनसे सम्बंधित कानूनों पर खुल कर चर्चा की गई। इस अवसर पर तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी ने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की मुख्य थीम “दान से लाभ” रखी गई,</div>
<div> </div>
<div>जिसका उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सहयोग, समर्थन और संसाधनों को साझा करने की भावना को बढ़ावा देना है, ताकि पूरे समाज को समानता और प्रगति का लाभ मिल सके। अंसारी ने जोर देकर कहा कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए समाज के सभी वर्गों को एक-दूसरे की मदद करने जागरूकता की जरूरत है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना, उनके सपनों को साकार करने में सहयोग देना और उन्हें समान अवसर प्रदान करना है।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर संस्था की मानव संसाधन अधिकारी हुश्ननारा बानो ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाएं समाज की आधी आबादी हैं और उनके बिना किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आपसी सहयोग से महिलाएं अपने अधिकारों को प्राप्त कर सकती हैं तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।मंच से संगीता शिवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित और सशक्त होंगी तभी परिवार, समाज और देश की प्रगति सुनिश्चित होगी।शोभावती ने अपने संबोधन में कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे एक-दूसरे का सहयोग करें और सामाजिक बंधनों से निकलकर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ें।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम में संजू देवी ने कहा कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समानता के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा होनी चाहिए।उन्होंने महिलाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीमा चौरसिया ने की, जिन्होंने बेटियों के सशक्तिकरण के लिए सबसे ज्यादा दान देने कि अपील की।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम का संचालन शकुंतला द्वारा किया गया । इस अवसर पर नाजरीन, गुलाब, लालसा, संगीता, शांति देवी, कलावती देवी, हकीम अंसारी, रजनीश कुमार, श्याम शंकर, गार्गी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे जिसमें महिलाओं की आवाज को बुलंद करने और उन्हें हर स्तर पर सहयोग प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया।</div>
<div>कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं व पुरुषों ने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की सामूहिक शपथ लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 21:18:42 +0530</pubDate>
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