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                <title>पत्रकार सुरक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पत्रकार सुरक्षा RSS Feed</description>
                
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                <title>अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता की वैश्विक चुनौतिया</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong> महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है और यह दिन लोकतंत्र की उस मूल भावना को उजागर करता है, जिसमें नागरिकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित यह दिवस 1991 के विंडहोक घोषणा पत्र से प्रेरित है, जिसने स्वतंत्र और बहुलतावादी मीडिया की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब हम 2026 के वैश्विक परिदृश्य पर दृष्टि डालते हैं, तो प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और डरावनी प्रतीत होती है। वैश्विक सूचकांक के आंकड़े</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177881/global-challenges-to-freedom-of-expression-and-impartial-journalism"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/free-press.webp" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong> महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है और यह दिन लोकतंत्र की उस मूल भावना को उजागर करता है, जिसमें नागरिकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित यह दिवस 1991 के विंडहोक घोषणा पत्र से प्रेरित है, जिसने स्वतंत्र और बहुलतावादी मीडिया की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब हम 2026 के वैश्विक परिदृश्य पर दृष्टि डालते हैं, तो प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और डरावनी प्रतीत होती है। वैश्विक सूचकांक के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि दुनिया के 180 देशों में से आधे से अधिक देशों में प्रेस की स्थिति या तो बहुत कठिन है या फिर बेहद गंभीर श्रेणी में जा चुकी है। यह जानकर हृदय कांप उठता है कि विश्व की 1 प्रतिशत से भी कम आबादी आज उन क्षेत्रों में निवास कर रही है जहाँ प्रेस को वास्तव में स्वतंत्र और सुरक्षित माना जा सकता है। पिछले 25 वर्षों का इतिहास गवाह है कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव निरंतर बढ़ा है और पत्रकारों के काम करने की गुंजाइश संकुचित हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पत्रकारिता आज एक ऐसा पेशा बन गया है जहाँ सच बोलने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में 129 पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की निर्मम हत्या कर दी गई, जो अब तक का सबसे बड़ा और विचलित करने वाला आंकड़ा है। यह संख्या केवल एक डेटा नहीं है, बल्कि उन आवाजों की खामोशी है जो समाज की विसंगतियों पर प्रहार कर रही थीं। सन 2000 से लेकर अब तक लगभग 1795 पत्रकारों ने अपने कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्यौछावर किए हैं, जो इस पेशे के बढ़ते जोखिमों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिंसा के साथ-साथ कानूनी उत्पीड़न भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मार्ग में एक बड़ी बाधा बनकर उभरा है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार विश्व भर की जेलों में लगभग 330 पत्रकार बंद हैं, जिनमें से 61 प्रतिशत पत्रकारों पर राष्ट्रविरोधी होने या देश की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे संगीन आरोप मढ़े गए हैं। विडंबना यह है कि जिन कानूनों का निर्माण राष्ट्र की सुरक्षा के लिए किया गया था, उनका उपयोग अक्सर उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है जो सत्ता की खामियों को उजागर करने का साहस करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पत्रकारिता को अपराध की तरह देखे जाने की यह प्रवृत्ति किसी भी सभ्य समाज के लिए घातक है। इससे भी अधिक चिंता का विषय वह न्यायहीनता है जो पत्रकारों के खिलाफ होने वाले अपराधों में व्याप्त है। एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार पत्रकारों की हत्या के लगभग 86 प्रतिशत मामलों में अपराधियों को कभी सजा नहीं मिलती। यह न्याय की विफलता न केवल अपराधियों का मनोबल बढ़ाती है बल्कि क्षेत्र में कार्यरत अन्य पत्रकारों के मन में भी भय का संचार करती है। जब सच के पहरेदारों को लगने लगता है कि उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और उनके हत्यारे खुलेआम घूम सकते हैं, तो वे आत्म-सेंसरशिप का रास्ता चुनने को मजबूर हो जाते हैं, जो अंततः लोकतंत्र की मृत्यु की शुरुआत होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस की स्वतंत्रता पर केवल भौतिक हमला ही एकमात्र खतरा नहीं है, बल्कि आज के दौर में इसके स्वरूप बदल गए हैं। कई देशों में मानहानि और आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग एक सुनियोजित हथियार की तरह किया जा रहा है। इसके साथ ही आर्थिक दबावों के जरिए मीडिया संस्थानों की रीढ़ तोड़ने का प्रयास किया जाता है। विज्ञापन और वित्तीय संसाधनों के वितरण में पक्षपात करके उन संस्थानों को पुरस्कृत किया जाता है जो सत्ता के सुर में सुर मिलाते हैं, जबकि आलोचनात्मक रुख अपनाने वाले संस्थानों को आर्थिक रूप से पंगु बना दिया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बदलती दुनिया में डिजिटल युग ने जहाँ सूचना के प्रसार को पंख दिए हैं, वहीं पत्रकारों के लिए नई और जटिल चुनौतियां भी पैदा की हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार और गलत जानकारियों का जाल इतनी तेजी से फैलता है कि तथ्य और झूठ के बीच का अंतर मिटने लगता है। इसके साथ ही ऑनलाइन ट्रोलिंग, साइबर हमले और अवैध डिजिटल निगरानी ने पत्रकारों के निजी और पेशेवर जीवन को असुरक्षित बना दिया है। विशेष रूप से महिला पत्रकारों को ऑनलाइन माध्यमों पर जिस तरह के अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ता है, वह अत्यंत निंदनीय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण से जुड़ी रिपोर्टिंग का है, जो आज के समय में सबसे जोखिम भरे क्षेत्रों में से एक बन चुका है। पिछले 15 वर्षों में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जुड़ी खबरें कवर करने वाले कम से कम 749 पत्रकारों पर जानलेवा हमले हुए हैं। 2019 से 2023 के बीच इस तरह के हमलों में 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि जब पत्रकार भू-माफियाओं, अवैध खनन और कॉर्पोरेट जगत के भ्रष्टाचार पर कलम चलाते हैं, तो उन्हें कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूनेस्को और द गार्जियन जैसी संस्थाओं की रिपोर्टें इस भयावह वास्तविकता की पुष्टि करती हैं। यह तथ्य हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में उस सच को सुनने के लिए तैयार हैं जो हमारे अस्तित्व और प्रकृति की रक्षा से जुड़ा है। प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा केवल मीडिया घरानों या पत्रकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक स्वतंत्र मीडिया भ्रष्टाचार की परतों को खोलता है, सरकारी नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि जनता को सही और सटीक जानकारी मिले ताकि वे एक जागरूक नागरिक के रूप में अपने निर्णय ले सकें। इसके विपरीत जब मीडिया को सरकारी या कॉर्पोरेट नियंत्रण में ले लिया जाता है, तो जनता तक केवल वही सूचनाएं पहुँचती हैं जो एक खास एजेंडे को पुष्ट करती हैं। इससे समाज में भ्रम और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वाशिंगटन पोस्ट और स्टेटिस्टा जैसे मंचों से प्राप्त डेटा यह संकेत देता है कि प्रेस की आजादी में गिरावट का प्रभाव केवल कुछ विशिष्ट देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। भारत सहित दुनिया के कई बड़े लोकतांत्रिक देशों में भी प्रेस स्वतंत्रता के सूचकांक में गिरावट देखी गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक संस्थानों के भीतर असहमति के स्वरों के प्रति सहिष्णुता कम होती जा रही है। प्रेस की स्वतंत्रता दरअसल लोकतंत्र का वह दर्पण है जिसमें समाज अपनी असलियत देखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि इस दर्पण पर धूल जमा दी जाए या इसे धुंधला कर दिया जाए, तो समाज अपनी कमजोरियों को कभी सुधार नहीं पाएगा। अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हम उन साहसी पत्रकारों को श्रद्धांजलि दें जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान देकर सच की मशाल को जलाए रखा। यह दिन सरकारों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे प्रेस की आजादी के प्रति अपनी संवैधानिक और नैतिक प्रतिबद्धताओं को फिर से परिभाषित करें। यह आवश्यक है कि ऐसी नीतियां बनाई जाएं जो पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और न्याय प्रणाली को इतना मजबूत बनाया जाए कि पत्रकारों के खिलाफ अपराध करने वाला कोई भी व्यक्ति कानून की पकड़ से बाहर न रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना किसी एक समूह का दायित्व नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें यह समझना होगा कि यदि आज हम पत्रकारों की आवाज दबाने वाली शक्तियों के खिलाफ खड़े नहीं होंगे, तो भविष्य में हमारी अपनी आवाज भी छीन ली जाएगी। लोकतंत्र की जीवंतता के लिए यह अनिवार्य है कि प्रेस बिना किसी डर या प्रलोभन के अपना कार्य कर सके। जब तक दुनिया में एक भी पत्रकार को सच बोलने के लिए जेल भेजा जाएगा या उसकी हत्या की जाएगी, तब तक हमारा लोकतंत्र अधूरा रहेगा। प्रेस की आजादी की मशाल को प्रज्वलित रखना ही इस दिवस की सार्थकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां एक ऐसे समाज में सांस ले सकें जहाँ सूचना पर किसी का एकाधिकार न हो और सच बोलने का साहस करने वालों को सम्मान मिले, न कि सजा।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:07:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जर्नलिस्ट प्रोटक्शन एसोसिएशन का पहला स्थापना दिवस 17 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में संगठन ने पत्रकार हितों की आवाज को मजबूती से उठाते हुए एक नई दिशा प्राप्त की है।उन्होंने न केवल पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता के मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करते हुए संगठन को सशक्त बनाने का कार्य भी किया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/403616.jpg" alt="जर्नलिस्ट प्रोटक्शन एसोसिएशन का पहला स्थापना दिवस 17 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा" width="1200" height="800" /></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उनके प्रयासों से पत्रकारों के अधिकारों के संरक्षण, कानूनी सहायता और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा और जागरूकता बढ़ी है। जर्नलिस्ट प्रोटक्शन एसोसिएशन आज उनके नेतृत्व में एक मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176026/the-first-foundation-day-of-journalist-protection-association-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/403619.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में संगठन ने पत्रकार हितों की आवाज को मजबूती से उठाते हुए एक नई दिशा प्राप्त की है।उन्होंने न केवल पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता के मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करते हुए संगठन को सशक्त बनाने का कार्य भी किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/403616.jpg" alt="जर्नलिस्ट प्रोटक्शन एसोसिएशन का पहला स्थापना दिवस 17 मई 2026 को आयोजित किया जाएगा" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके प्रयासों से पत्रकारों के अधिकारों के संरक्षण, कानूनी सहायता और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा और जागरूकता बढ़ी है। जर्नलिस्ट प्रोटक्शन एसोसिएशन आज उनके नेतृत्व में एक मजबूत मंच के रूप में उभर रहा है, जो पत्रकारों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का काम कर रहा है। विवेक प्रताप सिंह की सोच और कार्यशैली ने संगठन को नई ऊर्जा दी है, जिससे पत्रकार समुदाय में विश्वास और एकजुटता की भावना मजबूत हुई है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:46:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल पंप पर रिपोर्टिंग करते समय पत्रकार पर हमला, एसपी से मिलकर कार्यवाही की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केनगर थाना क्षेत्र के दुबखरा पेट्रोल पंप पर रिपोर्टिंग करते समय करूण सिंह द्वारा हमला किये जाने और कैमरा छीनने की कोशिश करने के मामले मे पत्रकारों ने पुलिस कप्तान से मिलकर सुसंगत धाराओं मे मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की मांग किया है। पुलिस कप्तान ने कार्यवाही का भरोसा दिलाते हुये नगर थाने की पुलिस को आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग किया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय व्यापार निर्देशिकाउपरोक्त प्रकरण में कार्यवाही न होने पर पत्रकारों ने आन्दोलन की चेतावनी दिया है। पुलिस कप्तान से मुलाकात करने वालों में वेदिक द्विवेदी, ऋषिक द्विवेदी, राहुल सिंह, राजकुमार पाण्डेय,</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174263/journalist-attacked-while-reporting-at-petrol-pump-demand-to-meet"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260326-wa0089.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केनगर थाना क्षेत्र के दुबखरा पेट्रोल पंप पर रिपोर्टिंग करते समय करूण सिंह द्वारा हमला किये जाने और कैमरा छीनने की कोशिश करने के मामले मे पत्रकारों ने पुलिस कप्तान से मिलकर सुसंगत धाराओं मे मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की मांग किया है। पुलिस कप्तान ने कार्यवाही का भरोसा दिलाते हुये नगर थाने की पुलिस को आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय व्यापार निर्देशिकाउपरोक्त प्रकरण में कार्यवाही न होने पर पत्रकारों ने आन्दोलन की चेतावनी दिया है। पुलिस कप्तान से मुलाकात करने वालों में वेदिक द्विवेदी, ऋषिक द्विवेदी, राहुल सिंह, राजकुमार पाण्डेय, अभिषेक गौतम, राहुल पटेल आदि पत्रकार शामिल थे। आपको बता दें बुधवार को दुबखरा पेट्रोल पंप पर रिपोर्टिंग करते समय करूण नाम के गुण्डे ने अपने साथियों के साथ उन पर हमला कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भद्दी गालियां देते हुये हाथ ऐंठकर रिपोर्टिंग माइक और कैमरा छीनने का प्रयास किया। घटना को लेकर पत्रकारों और पत्रकार संगठनों मे रोष है। घटना की निंदा करते हुये पत्रकारों ने इसे सच की आवाज दबाने का लोकतांत्रिक मर्यादा के विरूद्ध बताया है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 19:47:50 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लालगंज पुलिस की कार्यशैली पर उठा सवाल, खूंखार बहरूपिया रमेश चौधरी के सामने नतमस्तक हुआ कानून </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही अपराधियों के गले में तख्ती लटकाकर सरेंडर कराने का दावा करती हो, लेकिन लालगंज थाना क्षेत्र में कानून की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। पत्रकार पर जानलेवा हमला करने वाला मुख्य आरोपी रमेश चौधरी उर्फ 'बहरूपिया' और उसका कुनबा पुलिस की 'मूक सहमति' के चलते आज भी खुलेआम घूम रहा है। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस की यह 'लाचारी' क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।​सत्ता की दलाली और 'बहरूपिया' का नकाब।</div>
<div style="text-align:justify;">​</div>
<div style="text-align:justify;">आरोपी रमेश चौधरी खुद को भाजपा का बड़ा नेता बताकर रसूख झाड़ता है,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174244/questions-raised-on-the-working-style-of-lalganj-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260326-wa0092.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही अपराधियों के गले में तख्ती लटकाकर सरेंडर कराने का दावा करती हो, लेकिन लालगंज थाना क्षेत्र में कानून की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। पत्रकार पर जानलेवा हमला करने वाला मुख्य आरोपी रमेश चौधरी उर्फ 'बहरूपिया' और उसका कुनबा पुलिस की 'मूक सहमति' के चलते आज भी खुलेआम घूम रहा है। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस की यह 'लाचारी' क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।​सत्ता की दलाली और 'बहरूपिया' का नकाब।</div>
<div style="text-align:justify;">​</div>
<div style="text-align:justify;">आरोपी रमेश चौधरी खुद को भाजपा का बड़ा नेता बताकर रसूख झाड़ता है, जबकि सच्चाई यह है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और संदिग्ध चरित्र के कारण भाजपा इसे काफी पहले ही दूध में से मक्खी की तरह निकाल बाहर कर चुकी है। सफेदपोश नेताओं के साथ पुरानी तस्वीरें दिखाकर यह बहरूपिया न सिर्फ जनता को डराता है, बल्कि पुलिस के आला अधिकारियों पर भी दबाव बनाने का काम कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​पत्रकार को मरा समझ नदी किनारे फेंका, रोंगटे खड़े कर देगी दरिंदगी।​घटना की रात रमेश चौधरी ने अपने भाई उमेश चौधरी, राकेश चौधरी और भांजे अंकित चौधरी के साथ मिलकर पत्रकार पर वहशीपन की सारी हदें पार कर दी थीं। लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से पीट-पीटकर अधमरा करने के बाद, आरोपी उसे मृत समझकर साक्ष्य मिटाने की नीयत से नदी किनारे फेंककर भाग निकले थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​CDR में 'खास' मददगारों के चेहरे बेनकाब, फिर भी हाथ खाली।​विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, घटना के समय और उसके बाद रमेश चौधरी के फोन की सीडीआर (CDR) में कई सफेदपोशों और पुलिस के 'करीबियों' के नाम सामने आए हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर वो कौन से रसूखदार 'आका' हैं, जो इस अपराधी को पुलिसिया शिकंजे से बचा रहे हैं? क्या लालगंज पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है या फिर खाकी की कमान अब अपराधियों के हाथ में गिरवी रख दी गई है?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 19:19:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस कमिश्नर  से मिला इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वेलफेयर क्लब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>शहर में पत्रकारों की सुरक्षा, कार्य में आने वाली बाधाओं और फर्जी पत्रकारों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इलाहाबाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वेलफेयर क्लब के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष धीरेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान पत्रकारों ने फील्ड में रिपोर्टिंग करते समय होने वाली दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासनिक सहयोग के अभाव में कार्य प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर “फर्जी पत्रकारों” की बढ़ती संख्या से वास्तविक पत्रकारों की साख को नुकसान पहुंच रहा है। क्लब</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173472/electronic-media-welfare-club-meets-police-commissioner"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260317-wa0195.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>शहर में पत्रकारों की सुरक्षा, कार्य में आने वाली बाधाओं और फर्जी पत्रकारों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इलाहाबाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वेलफेयर क्लब के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष धीरेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान पत्रकारों ने फील्ड में रिपोर्टिंग करते समय होने वाली दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासनिक सहयोग के अभाव में कार्य प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर “फर्जी पत्रकारों” की बढ़ती संख्या से वास्तविक पत्रकारों की साख को नुकसान पहुंच रहा है। क्लब के सदस्यों ने कहा कि ऐसे लोग पत्रकारिता के नाम पर गलत गतिविधियों में लिप्त रहते हैं, जिससे पूरे पेशे की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन को एक प्रेस विज्ञप्ति भी सौंपते हुए मांग की कि फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। क्लब का कहना था कि जब तक ऐसे तत्वों पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा, तब तक निष्पक्ष और ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को एक विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि वास्तविक पत्रकारों को सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान क्लब के अध्यक्ष धीरेंद्र द्विवेदी (भारत समाचार), सर्वेश दुबे (न्यूज़ 18), इमरान (इंडिया टीवी), विनय सिंह रघुवंशी (टाइम्स नाउ नवभारत), शोएब रिजवी (इंडिया वॉइस), सौरभ मिश्रा (एबीपी), गुफरान (ज़ी न्यूज़), सचिन प्रजापति (दैनिक भास्कर), विवेक श्रीवास्तव, आरिफ राजू और अंकित समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 17:13:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रयागराज में मीडिया रिपोर्टर से मारपीट का आरोपी रईस खान गिरफ्तार, पुलिस ने भेजा जेल।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज:</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">शहर में मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। कवरेज के दौरान एक मीडिया रिपोर्टर के साथ मारपीट करने वाले आरोपी रईस खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर के सख्त निर्देश के बाद की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को एक मीडिया रिपोर्टर किसी घटना की कवरेज कर रहा था। इसी दौरान रईस खान नामक व्यक्ति ने रिपोर्टर के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट कर दी। घटना के बाद पत्रकारों और स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश देखने को मिला। मामले की सूचना</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173174/raees-khan-accused-of-assaulting-a-media-reporter-in-prayagraj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260311-wa0220.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज:</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शहर में मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। कवरेज के दौरान एक मीडिया रिपोर्टर के साथ मारपीट करने वाले आरोपी रईस खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर के सख्त निर्देश के बाद की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को एक मीडिया रिपोर्टर किसी घटना की कवरेज कर रहा था। इसी दौरान रईस खान नामक व्यक्ति ने रिपोर्टर के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट कर दी। घटना के बाद पत्रकारों और स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश देखने को मिला। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। शाहगंज थाने की पुलिस ने आरोपी रईस खान को गिरफ्तार कर लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे जेल भेज दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि मारपीट का आरोपी रईस खान पहले से ही आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ चोरी समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं, वह करोड़ों रुपये की ठगी के आरोपी और 25 हजार रुपये के इनामी अपराधी आदिल वसी का चाचा भी बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं इस घटना के बाद पत्रकारों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 16:33:20 +0530</pubDate>
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