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                <title>Administrative Negligence - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Administrative Negligence RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ग्राम पंचायत भवन में नहीं कर्मचारी नहीं बैठ रहे कर्मचारियों के बैठने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के दुबौलिया ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत भवनों को ग्राम सचिवालय के रूप में विकसित किया गया है। भवनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद कई स्थानों पर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से ग्रामीणों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसा ही मामला दुबौलिया विकासखंड के डिंगरापुर ग्राम सचिवालय का सामने आया है। डिंगरापुर जनकल्याण समिति ने ग्राम सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185661/employees-are-not-sitting-in-gram-panchayat-building-demand-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260819-wa00791.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के दुबौलिया ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत भवनों को ग्राम सचिवालय के रूप में विकसित किया गया है। भवनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद कई स्थानों पर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से ग्रामीणों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसा ही मामला दुबौलिया विकासखंड के डिंगरापुर ग्राम सचिवालय का सामने आया है। डिंगरापुर जनकल्याण समिति ने ग्राम सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समिति का आरोप है कि ग्राम सचिवालय भवन में कर्मचारियों के नियमित रूप से नहीं बैठने के कारण ग्रामीणों में असंतोष है। ग्रामीणों को यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है कि सचिवालय में कौन-कौन से कर्मचारी तैनात हैं और उनकी नियमित उपस्थिति हो रही है या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;">जनकल्याण समिति ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम सचिवालय में तैनात कर्मचारियों के नाम, पद, नियुक्ति/पदस्थापन, उपस्थिति तथा किए गए भुगतान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। समिति ने कहा कि यदि बिना कार्य किए अथवा वास्तविक उपस्थिति के बिना किसी कर्मचारी को भुगतान किए जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की वसूली भी कराई जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि ग्राम सचिवालय में पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्रामीणों को बेहतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। समिति ने प्रशासन से ग्राम सचिवालय में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने की भी मांग की है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 18:53:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसडीएम के आदेश के बाद भी दबंगकोटेदार संजय कुमार केखिलाफ नही किया कोई कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>उप जिलाधिकारी हरैया उमाकांत तिवारी ने पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज को 07 कार्य दिवस के अन्दर ग्राम पंचायत नरहरपुर कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने का निर्देश दिया था लेकिन 07 कार्य दिवस बीत जाने के बाद भी राशन वितरण में गड़बड़ी करने वाले कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  आपको बता दें कि ग्राम पंचायत नरहरपुर के ग्रामीणों ने कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ राशन वितरण में घटतौली करने का आरोप लगाया था । ग्रामीणों की शिकायत पर एडीओ पंचायत कप्तानगंज सुशील कुमार श्रीवास्तव ने सेक्टर प्रभारी अरुण कुमार पटेल</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184089/despite-sdms-order-no-action-was-taken-against-dabangkotedar-sanjay"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260724-wa0065-(2).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>उप जिलाधिकारी हरैया उमाकांत तिवारी ने पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज को 07 कार्य दिवस के अन्दर ग्राम पंचायत नरहरपुर कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने का निर्देश दिया था लेकिन 07 कार्य दिवस बीत जाने के बाद भी राशन वितरण में गड़बड़ी करने वाले कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> आपको बता दें कि ग्राम पंचायत नरहरपुर के ग्रामीणों ने कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ राशन वितरण में घटतौली करने का आरोप लगाया था । ग्रामीणों की शिकायत पर एडीओ पंचायत कप्तानगंज सुशील कुमार श्रीवास्तव ने सेक्टर प्रभारी अरुण कुमार पटेल व सचिव पंकज सिंह को जांच करके जांच रिपोर्ट प्रेषित करने का निर्देश दिया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत के निर्देश पर एडीओ पंचायत को जांच टीम ने जांच कर के जांच रिपोर्ट दिनांक - 12-07-2026 को दिया था एडीओ पंचायत ने जांच रिपोर्ट प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी कप्तानगंज कृष्ण कुमार सिंह को दिनांक - 15-07-2026 को दिया था प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी ने जांच रिपोर्ट उप जिलाधिकारी हर्रैया उमाकांत तिवारी को दिनांक - 17-07-2026 को अग्रिम कार्यवाही हेतु भेजा था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उप जिलाधिकारी ने दिनांक - 17-07-2026 को पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज को 07 कार्य दिवस के अन्दर उक्त प्रकरण में की गई कार्यवाही को अवगत कराने का निर्देश था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एसडीएम के आदेश के 07 दिन बीतने के बाद भी पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज ने कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नही किया है जिसको लेकर जिले में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही है । मीडिया टीम ने फोन के माध्यम से पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज से कई बार फोन किया लेकिन पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज ने न तो मीडिया टीम के फोन को रिसीव किया और न ही मीडिया टीम को पुनः फोन नही किया ।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेवा के अंतिम दौर में बीडीओ ने 22 जून को तालाब व खेल मैदान पर लगवाया फर्जी हाज़िरी*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>कप्तानगंज बीडीओ चन्द्रभान उपाध्याय रिटायर्ड की रेखा पर खड़े हुए हैं ।और उनके द्वारा किए/कराए गए भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर बनी हुई है ।पिछले दिनों ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा पर तालाब खुदाई कार्य में हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीसी मनरेगा बस्ती द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया था ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साहब के आदेशों को पैर की जुती समझ कर 20 दिन बाद भी वीडीओ आख्या प्रेषित करना मुनासिब नहीं समझते। जिसका नतीजा यह है कि सचिव पंकज सिंह का भ्रष्ट्राचार रुक नहीं रहा है कार्यवाही न होने से पुनः एक बार फिर उसी साइड पर मस्टररोल जारी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182458/in-the-last-round-of-service-bdo-imposed-fake-attendance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260624-wa0090.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>कप्तानगंज बीडीओ चन्द्रभान उपाध्याय रिटायर्ड की रेखा पर खड़े हुए हैं ।और उनके द्वारा किए/कराए गए भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर बनी हुई है ।पिछले दिनों ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा पर तालाब खुदाई कार्य में हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीसी मनरेगा बस्ती द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साहब के आदेशों को पैर की जुती समझ कर 20 दिन बाद भी वीडीओ आख्या प्रेषित करना मुनासिब नहीं समझते। जिसका नतीजा यह है कि सचिव पंकज सिंह का भ्रष्ट्राचार रुक नहीं रहा है कार्यवाही न होने से पुनः एक बार फिर उसी साइड पर मस्टररोल जारी कर रोजगार सेवक सुनील राव ने फर्जी हाजिरी लगाना शुरू कर दिया ।रोजगार सेवक सुनील राव के हौसले इस कदर बुलंद है कि बिना काम फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है यदि यही आलम चलता रहा तो अन्य ग्राम पंचायत के रोजगार सेवक भी सुनील राव की तरह माल समेटने में जुट जाएंगे ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेवानिवृत होने वाले कप्तानगंज वीडीओ चंद्रभान उपाध्याय तो चले जाएंगे लेकिन आने वाले नवागत अधिकारी के ऊपर भ्रष्टाचार के कार्यवाहियों की तमाम चुनौतियां यादगार के लिए दे जा रहे है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त समाचार के अनुसार -खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज चंद्रभान उपाध्याय दिनांक 30 जून 2026 सायं 5 बजे कार्यकाल समाप्त हो रहा है ।विकास खंड कप्तानगंज में  जिस प्रकार से दर्जनों ग्राम पंचायतो में मनरेगा भ्रष्टाचार एवं शिकायत पर फर्जी रिपोर्ट लगना एव परिसर मयखाना में तब्बदील होने की लगातार खबरे प्रकाशित हो चुकी है तो वही स्थानीय मीडिया के साथ राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिला अध्यक्ष कृष्णा ननंद ने बीडीओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्ट्राचार को लेकर ऑन कैमरा बीडीओ की पोल खोली गयी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उससे हर कोई वाकिफ हैं। बीडीओ का गैर जिम्मेदाराना बयान मीडिया सहित आम जनता में चर्चा का माहौल दिनो दिन बढ़ता जा रहा है।जब मीडिया टिम ने फोन पर बीडीओ कप्तानगंज से ग्राम पंचायत नरहरपुर में ललहवा तालाब खुदाई के संबंधों में जानकारी लेनी चाहि तो माकूल जवाब नही मिला।22 जून को मनरेगा पटल पर 45 मजदूरों की फर्जी हाजिरी तो लगी है।बड़ा सवाल यह है कि बीडीओ की कार्यवाही एवं मीडिया के सवालो के जबाब जलेबी की तरह होती यदि कार्यवाही हुयी है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:50:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुविधा शुल्क के लिए सचिव ने पीड़ित का प्रमाण पत्र फार्म फाड़कर दिया फेंक -लगा आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के विकास खंड कप्तानगंज भारत सरकार भले ही भ्रष्टाचार मुक्ति का दावा करती है लाखों रुपए खर्च कर बैनरों पोस्टरों के माध्यम से ढिंढोरा पीटवा रही है ।सरकारी दावे महज दिखावा बनकर रह गया है। कप्तानगंज ब्लाक के चर्चित सचिव पंकज सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र फार्म फाड़कर फेंकने का ताजा मामला सुर्खियों में है।</div>
<div>  </div>
<div>सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म भरकर दिया था ।जिनका देहांत 4 जून को हुआ था ।सचिव द्वारा सुविधा शुक्ल की मांग की गई। मांग पूरा न करने पर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182099/for-convenience-fee-the-secretary-tore-the-victims-certificate-form"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260624-wa0090-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के विकास खंड कप्तानगंज भारत सरकार भले ही भ्रष्टाचार मुक्ति का दावा करती है लाखों रुपए खर्च कर बैनरों पोस्टरों के माध्यम से ढिंढोरा पीटवा रही है ।सरकारी दावे महज दिखावा बनकर रह गया है। कप्तानगंज ब्लाक के चर्चित सचिव पंकज सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र फार्म फाड़कर फेंकने का ताजा मामला सुर्खियों में है।</div>
<div> </div>
<div>सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म भरकर दिया था ।जिनका देहांत 4 जून को हुआ था ।सचिव द्वारा सुविधा शुक्ल की मांग की गई। मांग पूरा न करने पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए फार्म फाड़ कर फेंकने की घटना से पीड़ित आहत हैं। पीड़ित ने बताया कि जब तक सुविधा शुल्क नहीं मिलेगा तब तक आपको प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>ऑफिस से दुतकार खाने के बाद पीड़ित किसी तरीके से ₹200 लेकर साहब के चेंबर में पहुंचकर नजराना पेश किया। लगभग दो हफ्ते बीत चुका पीड़ित को अभी तक कागज नही मिल पाया है ।सवाल यह है कि क्या सचिव पंकज सिंह को सरकार वेतन नही देती हैं जो सरकारी कागज बनाने के नाम पर गरीब जनता से रिश्वत की डिमांड करते हैं । सवाल यह भी है कि सेवा के अंतिम दौर में पहुंचे बीडीओ चंद्रभान उपाध्याय चुप्पी साधे हुए क्यों है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:22:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भ्रष्टाचार छिपाने हेतु जांच अधिकारी अरुण कुमारपटेल नही प्रेषित कर रहे जांच रिपोट </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केकप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181852/to-hide-corruption-investigating-officer-arun-kumar-patel-is-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0099.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केकप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार के अनुसार बीडीओ कप्तानगंज के मातहत क्रमचारी ग्राम पंचायत नरहरपुर के पानी भरे तालाब में लगी फर्जी हाजिरी की जांच तो कर लिया है । किन्तु एक सप्ताह बाद भी आख्या प्रेषित नही किया गया है।उनका यह रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जांच आख्या को दबाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जानबूझकर हीला-हवाली की जा रही है वही जांच अधिकारी अरुण कुमारपटेल के बोल भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मीडिया से बातचीत में जांच अधिकारी अरुण कुमारपटेल ने बताया कि "आख्या नहीं दी जाएगी और कार्य शून्य होगा", जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि सुविधा शुल्क के भारी बोझ तले दबे होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी सचिव और रोजगार सेवक पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं ।यह रिपोर्ट साफ तौर पर दर्शाती है कि कैसे धरातल पर भ्रष्टाचार की जांच को दबाने के लिए 'सुविधा शुल्क' और प्रशासनिक सांठगांठ का सहारा लिया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले दोषियों को शह मिल रही है । वहीं बीडीओ का सचिव व रोजगार सेवक पर कानूनी कार्रवाई करने को हाथ कांप रहे हैं। सचिव रोजगार सेवक सुनील कुमार तथा प्रधान के द्वारा फर्जी हाजिरी लगाने का आरोप सत्य पाया गया लेकिन आज तक वीडियो द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं किया गया गम्भीर सवाल खड़ा हो रहा है</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 12:27:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भी ब्लॉक-8 पार्क पर कार्रवाई नहीं, शासन पहुंची शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181568/government-did-not-take-action-on-block-8-park-even-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002015129.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन स्पेस के रूप में दर्ज भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे और निर्माण कार्य होते रहे, लेकिन संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय प्रकरणों का निस्तारण कागजों तक सीमित रखते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में ब्लॉक-8 स्थित पार्क में हुए निर्माण कार्यों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि जिस भूमि को पार्क एवं खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखा गया हो, वहां निर्माण और अतिक्रमण किस प्रकार होने दिया गया। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्कों और खुले स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए तथा किए गए अतिक्रमणों को हटाकर उन्हें उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकाश वीर आर्य का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति 29 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त कराए जाने के बावजूद अब तक पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने अथवा उसके मूल स्वरूप की बहाली के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत पार्क क्षेत्र में नई गतिविधियों और कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकरण का एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब केस्को को लिखित शिकायत और न्यायालयीय आदेशों की जानकारी दिए जाने के बावजूद पार्क में स्थित विवादित धार्मिक संरचना पर नया विद्युत संयोजन स्थापित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सार्वजनिक पार्क की विवादित भूमि पर स्थित संरचनाओं को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने से अवैध कब्जों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलता है तथा भविष्य में ऐसे कब्जों को स्थायित्व प्रदान करने का आधार तैयार होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र में पार्क में अवैध रूप से निर्मित कंक्रीट ढांचों एवं इंटरलॉकिंग को हटाकर पूरे क्षेत्र को पुनः पार्क के रूप में विकसित करने, नए कब्जों एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने, विद्युत संयोजन प्रकरण की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों एवं अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। नगर विकास मंत्री कार्यालय द्वारा मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भेजे जाने के बाद अब क्षेत्रीय नागरिकों की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेशों और शासन स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बाद भी पार्क को उसका मूल स्वरूप नहीं मिल पाता, तो यह सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पलामू माओवादी की आतंक में पति की हत्या, 19 वर्षों से दर-दर भटक रही विधवा महिला</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पलामू, झारखंड:-</strong> जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत ग्राम कानोदी टोला सोनपुरवा से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जो सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर कई सवाल खड़े करता है। गांव की विधवा महिला आशा कुंवर आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2007 में जब झारखंड के कई इलाकों में माओवादी गतिविधियां चरम पर थीं, उस दौरान उनके पति स्वर्गीय मुनी यादव की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि गांव में एक नहर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें मुनी यादव मुंशी के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181515/husband-killed-in-palamu-maoist-terror-widow-woman-wandering-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पलामू, झारखंड:-</strong> जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत ग्राम कानोदी टोला सोनपुरवा से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जो सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर कई सवाल खड़े करता है। गांव की विधवा महिला आशा कुंवर आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2007 में जब झारखंड के कई इलाकों में माओवादी गतिविधियां चरम पर थीं, उस दौरान उनके पति स्वर्गीय मुनी यादव की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि गांव में एक नहर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें मुनी यादव मुंशी के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि माओवादियों द्वारा लेवी की मांग की गई थी, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर उनकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद पलामू न्यायालय में मामला दर्ज हुआ, लेकिन 19 वर्ष बीत जाने के बावजूद परिवार को न्याय और सरकारी सहायता का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">विधवा आशा कुंवर बताती हैं कि पति की मौत के बाद उन्होंने अकेले अपने तीन बेटियों और दो बेटों का पालन-पोषण किया। मजदूरी कर बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और उनकी शादी-विवाह भी कराई। लेकिन संघर्ष का सिलसिला यहीं नहीं रुका। कुछ वर्ष पूर्व उनके बड़े पुत्र की किडनी की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। लगातार दुखों और आर्थिक संकटों का सामना करने के बावजूद उन्हें आज तक कोई विशेष सरकारी सहायता प्राप्त नहीं हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आशा कुंवर का आरोप है कि सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना, अंबेडकर आवास योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिला। जबकि उनके अनुसार गांव के कई अन्य लोगों को इन योजनाओं का लाभ दिया गया है। उनका घर जर्जर अवस्था में है, दरवाजे तक की समुचित व्यवस्था नहीं है और बरसात के दिनों में रहने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पति की माओवादी हत्या के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन उनकी स्थिति को समझेगा, लेकिन आज तक कोई अधिकारी उनकी समस्याओं का जायजा लेने उनके घर नहीं पहुंचा। आशा कुंवर ने पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से मांग की है कि उनकी स्थिति की जांच कर उन्हें अविलंब प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा किसी अन्य आवासीय योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:50:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार छिपाने हेतु जांच अधिकारी अरुण पटेल नही प्रेषित कर रहे जांच रिपोट</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181475/to-hide-corruption-investigating-officer-arun-patel-is-not-sending"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0108.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के कप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार के अनुसार बीडीओ कप्तानगंज के मातहत क्रमचारी ग्राम पंचायत नरहरपुर के पानी भरे तालाब में लगी फर्जी हाजिरी की जांच तो कर लिया है । किन्तु एक सप्ताह बाद भी आख्या प्रेषित नही किया गया है।उनका यह रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जांच आख्या को दबाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जानबूझकर हीला-हवाली की जा रही है वही जांच अधिकारी के बोल भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मीडिया से बातचीत में जांच अधिकारी ने बताया कि "आख्या नहीं दी जाएगी और कार्य शून्य होगा", जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि सुविधा शुल्क के भारी बोझ तले दबे होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी सचिव और रोजगार सेवक पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं ।यह रिपोर्ट साफ तौर पर दर्शाती है कि कैसे धरातल पर भ्रष्टाचार की जांच को दबाने के लिए 'सुविधा शुल्क' और प्रशासनिक सांठगांठ का सहारा लिया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले दोषियों को शह मिल रही है । वहीं बीडीओ का सचिव व रोजगार सेवक पर कानूनी कार्रवाई करने को हाथ कांप रहे हैं।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 19:50:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीएसए कार्यालयकी लापरवाही से अटका अनुदेशकों कामानदेय भुखमरी के कगार पर अनुदेशक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीमाननीय मुख्यमंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत प्रदेश के परिषदीय जूनियर विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जाना था उसी क्रम में जनपद बस्ती में भी सभी जूनियर विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को प्रशिक्षित करने के लिए खेल अनुदेशकों /प्रशिक्षकों को विद्यालय आवंटित किए गए थे । परियोजना कार्यालय के आदेश में यह स्प्ष्ट निर्देश था कि जैसे जैसे ऑनलाइन प्रशिक्षण जिन विद्यालयों पर पूर्ण होता रहेगा उस विद्यालय का प्रशिक्षण मानदेय का भुगतान वैसे - वैसे होता रहेगा।  जनपद बस्ती में भी पहले चरण में जिन विद्यालयों में प्रशिक्षण पूरा हुआ उस</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181329/instructors-honorarium-stuck-due-to-negligence-of-bsa-office-instructors"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0015.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीमाननीय मुख्यमंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत प्रदेश के परिषदीय जूनियर विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जाना था उसी क्रम में जनपद बस्ती में भी सभी जूनियर विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को प्रशिक्षित करने के लिए खेल अनुदेशकों /प्रशिक्षकों को विद्यालय आवंटित किए गए थे । परियोजना कार्यालय के आदेश में यह स्प्ष्ट निर्देश था कि जैसे जैसे ऑनलाइन प्रशिक्षण जिन विद्यालयों पर पूर्ण होता रहेगा उस विद्यालय का प्रशिक्षण मानदेय का भुगतान वैसे - वैसे होता रहेगा।  जनपद बस्ती में भी पहले चरण में जिन विद्यालयों में प्रशिक्षण पूरा हुआ उस विद्यालय का प्रशिक्षण मानदेय का भुगतान कर दिया गया किन्तु दूसरे चरण में जो विद्यालय शेष थे उस पर खेल अनुदेशकों / प्रशिक्षकों ने अपना प्रशिक्षण ऑनलाइन समय से पूर्ण कर लिया किन्तु उसका भुगतान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा नही किया गया । जब खेल अनुदेशको /प्रशिक्षकों ने इसकी शिकायत डीसी बालिका अमित सोनी से की तो उनके द्वारा बताया गया कि भुगतान हेतु फ़ाइल बैंक भेजी गई है, उसके पश्चात जब  खेल अनुदेशकों ने इसके संदर्भ में  बैंक से जानकारी की तो पता चला कि जो पीपीए 102000 रुपये का भुगतान हेतु बैंक आया था वह फेल हो गया है क्योंकि वह 2 अप्रैल 2026 को भेजी गई जबकि किसी की भी वित्तीय वर्ष में भुगतान का अंतिम तारीख 30 मार्च होती है ।  डीसी बालिका अमित सोनी की लापरवाही से खेल अनुदेशकों /प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण मानदेय का भुगतान समय से न करने के कारण मानदेय का भुगतान आज तक नही हो पाया। एक तरफ तो सरकार अनुदेशकों के सम्मान का ढिढोरा पीट रही है और दूसरी तरफ उनके ही अधिकारी अनुदेशकों को प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी उनका प्रशिक्षण मानदेय का भुगतान नही करते और इतनी बड़ी घोर लापरवाही पर जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी के चुप्पी को लेकर जनपद में चर्चाओं का दौर जारी है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:51:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार रोकने में मुख्य विकास अधिकारी नाकाम धरातल पर 10 मजदूर, कागजों में 61 की हाजिरी गोरखर में मनरेगा कार्य की खुली रही पोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मेंमनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना केवल फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने तक पहुंच गयी है। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत गोरखर में सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहद तक नाला खुदाई एवं सफाई कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही है संबंधित मस्टर रोल में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है, जबकि मौके पर मात्र 10</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181316/chief-development-officer-failed-to-stop-corruption-attendance-of-61"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0018.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मेंमनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना केवल फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने तक पहुंच गयी है। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत गोरखर में सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहद तक नाला खुदाई एवं सफाई कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही है संबंधित मस्टर रोल में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है, जबकि मौके पर मात्र 10 मजदूर ही कार्य करते पाए गए।</div>
<div> </div>
<div>इतना ही नहीं, कार्यस्थल पर दो किशोर भी काम करते मिले, जो मनरेगा प्रावधानों एवं बाल संरक्षण कानूनों की सीधा उल्लंघन किया जा रहा है। शेष 51 मजदूरों को अनुपस्थित रहने के बावजूद हाजिर दर्शाया गया है। सरकारी अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टि कर सरकारी धन के दुरुपयोग उजागर हो रहा है। रोजगार सेवक रामतौल मौर्य एवं पंचायत सचिव अमरनाथ गौतम की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी लगाकर मनरेगा की धनराशि का गबन करने का प्रयास किया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>सरकारी धन के इस दुरुपयोग से न केवल मनरेगा की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है, बल्कि योजना के मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने को भी नुकसान पहुंच रहा है।सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि जब मौके पर केवल 10 मजदूर मौजूद थे तो 61 की हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गयी है और 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराने की अनुमति किसने दी? ब्लाक प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आखिर नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?यदि ऐसे ही फर्जी हाजिरी रजिस्टर में दर्ज होता रहेगा तो सरकारी धन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:40:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएचसी बनकटी पर कार्यरत लिपिक पर डियूटी से गायब रहने का लगा आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के बनकटी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनकटी, जनपद बस्ती में कार्यरत लिपिक द्वारा अनियमित उपस्थिति, कर्तव्यों में लापरवाही एवं संदिग्ध आचरण के संबंध में उच्च स्तरीय जांच कराए जाने हेतु प्रमुख सचिव (गृह) उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ से मांग की गई है और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई है आरोप है कि जनपद बस्ती के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनकटी में कार्यरत लिपिक शमीम द्वारा लंबे समय से ड्यूटी में अत्यंत गंभीर अनियमितता एवं घोर लापरवाही बरती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त कर्मचारी पूरे माह अनुपस्थित रहते हैं तथा केवल वेतन निर्माण ( पेरोल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177314/clerk-working-at-chc-bankati-accused-of-being-missing-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/420.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के बनकटी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनकटी, जनपद बस्ती में कार्यरत लिपिक द्वारा अनियमित उपस्थिति, कर्तव्यों में लापरवाही एवं संदिग्ध आचरण के संबंध में उच्च स्तरीय जांच कराए जाने हेतु प्रमुख सचिव (गृह) उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ से मांग की गई है और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई है आरोप है कि जनपद बस्ती के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनकटी में कार्यरत लिपिक शमीम द्वारा लंबे समय से ड्यूटी में अत्यंत गंभीर अनियमितता एवं घोर लापरवाही बरती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त कर्मचारी पूरे माह अनुपस्थित रहते हैं तथा केवल वेतन निर्माण ( पेरोल बनवाने) के समय (प्रत्येक माह लगभग 21 एवं 22 तारीख ) को ही कार्यालय में उपस्थित होते हैं,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिससे सरकारी कार्य प्रभावित हो रहा है एवं कार्यालय व्यवस्था बाधित हो रही है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉ० राजेश कुमार को भी अवगत कराया गया है कि उक्त कर्मचारी मूलतः जनपद बलिया जिले का निवासी है तथा उनका निवास गोरखपुर एवं लखनऊ में है। पारिवारिक कारणों से भी वे नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं रहते हैं। उक्त कर्मचारी का मानव संपदा कोड 235211 है। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी द्वारा स्वयं यह कथित रूप से कहा गया है कि वह अपने पूर्व में तैनाती वाले स्थानों पर भी नियमित रूप से ड्यूटी नहीं किया गया है तथा वह अपने अनुसार ही कार्यालय आता-जाता है। लिपिक शमीम का पूर्व सेवा विवरण 1. वर्ष 1995 में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गगहा, जनपद गोरखपुर में लिपिक पद पर तैनाती के दौरान भी नियमित उपस्थिति नहीं रहती थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2. दिनांक 30 जुलाई 2014 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, गोरखपुर में तैनाती रही। 3. दिनांक 11 सितम्बर 2014 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, देवरिया में तैनाती रही। 4. दिनांक 05 फरवरी 2015 को पुनः मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, गोरखपुर में तैनाती हुई। 5. दिनांक 05 अप्रैल 2018 को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पिपरौली, जनपद गोरखपुर में तैनाती हुई। 6. दिनांक 13 अगस्त 2021 से वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनकटी, जनपद बस्ती में कार्यरत हैं। उक्त कर्मचारी द्वारा यह भी कहा गया कि 'आज तक मुझे कोई नौकरी नहीं करवा पाया है, मैं अपने हिसाब से नौकरी करता हूं और मेरा प्रभाव विभाग के उच्च कार्यालय तक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार के कथन से सरकारी अनुशासन एवं कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। न्याय हित में शिकायत कर्ता ने कहा है कि उक्त प्रकरण को गंभीरता को देखते हुए 1. मामले की उच्च स्तरीय जांच (High &amp; Level Inquiry) कराई जाए। 2. संबंधित कर्मचारी की उपस्थिति, वेतन भुगतान एवं कार्यप्रदर्शन की विस्तृत जांच कराई जाए। 3. आवश्यकतानुसार संबंधित मोबाइल नंबर 9935310326 के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन कराया जाए। 4. जांच पूर्ण होने तक संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">5. यदि कोई वित्तीय प्रशासनिक अनियमितता पाई जाए तो विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि उक्त प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराते हुए आवश्यक कठोर कार्रवाई करने का कष्ट करें जिससे शासन की छवि एवं कार्यप्रणाली में सुधार हो सके। अब देखना यह है कि डियूटी से गायब लिपिक शमीर के खिलाफ क्या विभागीय जांच हो पाती है या जांच के नाम पर लेन देन करके मामले में लीपापोती कर मामले को रफा दफा कर दिया जायेगा ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 18:23:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विनियमितिकरण में देरी बनी जानलेवा? मानसिक दबाव में महामंत्री को हृदयाघात, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> जनपद में सीजनल संग्रह अमीनों के विनियमितिकरण में लगातार हो रही देरी अब गंभीर और संवेदनशील रूप लेती जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर लंबित प्रक्रिया और बढ़ते मानसिक दबाव के बीच सीजनल संग्रह अमीन कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के जिला महामंत्री संजय श्रीवास्तव को 8 अप्रैल की देर रात हृदयाघात (Heart Attack) हो गया। उन्हें तत्काल कार्डियोलॉजी संस्थान में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, 6 अप्रैल को जिलाधिकारी द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद कर्मचारियों ने अपना धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद विनियमितिकरण प्रक्रिया में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175987/delay-in-regulation-becomes-life-threatening-general-secretary-suffers-heart-attack"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001825101.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> जनपद में सीजनल संग्रह अमीनों के विनियमितिकरण में लगातार हो रही देरी अब गंभीर और संवेदनशील रूप लेती जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर लंबित प्रक्रिया और बढ़ते मानसिक दबाव के बीच सीजनल संग्रह अमीन कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के जिला महामंत्री संजय श्रीवास्तव को 8 अप्रैल की देर रात हृदयाघात (Heart Attack) हो गया। उन्हें तत्काल कार्डियोलॉजी संस्थान में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।</div>
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<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, 6 अप्रैल को जिलाधिकारी द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद कर्मचारियों ने अपना धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद विनियमितिकरण प्रक्रिया में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में असंतोष और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता गया।</div>
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<div style="text-align:justify;">संगठन के जिला अध्यक्ष प्रवीण वाजपेई ने बताया कि— “मानसिक एवं आर्थिक तनाव अत्यधिक बढ़ जाने के कारण ही महामंत्री जी को इस स्थिति का सामना करना पड़ा है। यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कई कर्मचारी हैं जो इसी दबाव में या तो दुनिया छोड़ चुके हैं या उस स्थिति की कगार पर हैं।”</div>
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<div style="text-align:justify;">वहीं, संगठन मंत्री अरविंद रावत ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि— “एडीएम (वित्त एवं राजस्व) और मुख्य राजस्व लेखाकार कार्यालय स्तर पर विनियमितिकरण की प्रक्रिया को जानबूझकर आगे नहीं बढ़ाया जा रहा। ऐसी स्थिति में मानसिक और आर्थिक तनाव स्वाभाविक है। हम लोग आज उस मोड़ पर खड़े हैं, जहां से कुछ भी संभव है। क्या प्रशासन हमारे बीते हुए समय और संघर्ष को वापस कर सकता है?”</div>
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<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते महामंत्री के इलाज के लिए विधायक निधि से सहायता लेनी पड़ी, जो इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को और उजागर करता है।वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि शासन स्तर से स्पष्ट आदेश और दिशा-निर्देश होने के बावजूद प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित है। जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा, जिससे यह मामला प्रशासनिक उदासीनता और  लापरवाही  का उदाहरण बनता जा रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">कई कर्मचारी सेवा के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ इस अधिकार की प्रतीक्षा में ही दुनिया छोड़ चुके हैं। इसके बावजूद संबंधित कार्यालयों में फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या विनियमितिकरण में यह देरी कर्मचारियों के जीवन पर भारी पड़ रही है? और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?यह मामला अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और कर्मचारियों के अस्तित्व से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 19:43:34 +0530</pubDate>
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