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                <title>Misuse of Government Funds - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;">  काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181682/fake-payment-of-rs-5-crore-using-ai-photo-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781878450387.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;"> काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह आरोप लगाया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर लगभग 5 करोड़ सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया है। सरकार की मंशा के उलट बड़े पैमाने पर पैसे का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 2.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781878450406.jpg" alt="सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान" width="1080" height="556"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> निर्माण स्थल की कुल लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।  सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है। अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> फर्जी फोटो और AI का इस्तेमालः काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है।जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं।ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और</div><div style="text-align:justify;">अनुशासनात्मक कार्रवाई विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है। यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को पत्र भेज कर की गई है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format2">इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए जो टीम गठित की गई थी ।इसी मंडल के ही अधिकारी शामिल थे । जबकि शासनादेश है कि जिस मंडल का मामला होता है उस मंडल के अधिकारियों को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए। जिसे शासन ने संज्ञान में लेते हुए जांच टीम निरस्त कर दी और दूसरी जांच टीम गठित कर दी है। यह जांच टीम सिद्धार्थनगर कभी धमक सकती है।</blockquote></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नरहरपुर में 194 कार्डधारको की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर प्रधान व रोजगारसेवक हो रहे मालामाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केकप्तानगंज ब्लाक अंतर्गत नरहरपुर में तालाब जिर्णोद्धार कार्य कागज मे चल रही है कार्ड धारको के नाम के सहारे प्रधान अपनी पूरी ताकत लगाकर भ्रष्टाचार करने में लगे हुए है। या यू कहे भ्रष्टाचार के जुनून में सरकार की साख को दाव पर लगा कर सिस्टम को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं । </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार विकासखंड कप्तानगंज के ग्राम पंचायत नरहरपुर में तालाब और नाला खुदाई कार्य मनरेगा के कागज में चल रहा है । तालाब खुदाई में 194 और नाला सफाई में 51 मजदूरों की हाजिरी पटल पर लगाई जा रही है ।</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180885/pradhans-and-employment-servants-are-getting-rich-by-registering-fake"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260609-wa0053.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले केकप्तानगंज ब्लाक अंतर्गत नरहरपुर में तालाब जिर्णोद्धार कार्य कागज मे चल रही है कार्ड धारको के नाम के सहारे प्रधान अपनी पूरी ताकत लगाकर भ्रष्टाचार करने में लगे हुए है। या यू कहे भ्रष्टाचार के जुनून में सरकार की साख को दाव पर लगा कर सिस्टम को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार विकासखंड कप्तानगंज के ग्राम पंचायत नरहरपुर में तालाब और नाला खुदाई कार्य मनरेगा के कागज में चल रहा है । तालाब खुदाई में 194 और नाला सफाई में 51 मजदूरों की हाजिरी पटल पर लगाई जा रही है । प्रधान व सचिव कागजी कोरमपूरा कर फर्जी हाजिरी लगवाकर सरकारी धन को लूटने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं। प्रधान एवं रोजगार सेवक द्वारा भटपुरवा ललहवा पर तिन्ना से पटा/पानी भरे तालाब व तैरती जलकुंभी में लगभग एक सप्ताह से फर्जी हाजिरी सरकारी रजिस्टर पर दर्ज की जा चुकी है । अगर जमीनी हकीकत की बात करे तो मजदूर कार्य करते नही मिले कार्य शून्य है । ग्रामीणों से पूछने पर मालूम हुआ कि प्रधान अपने चहेते रोजगार सेवक के सहारे भ्रष्टाचार की पटकथा लिखते हैं और विना कार्य कराए सरकारी धन को लूटने के प्रयास में लगे रहते हैं । ग्रामीणों की बातो पर गौर करे तो प्रधान प्रतिदिन लगभग पच्चास हजार रुपए सरकारी धन का बंडरबांट करने में लगे हुए हैं । एक सप्ताह में लगभग पांच लाख रुपए बंदर बांट किए जा चुके हैं । रोजगार सेवक,प्रधान सचिव तथा जेई योजना बनाकर जाबकार्ड धारकों को रोजगार देने के नाम पर मुर्ख बनाया जा रहा है और उनके हक पर डांका डालकर सरकारी धन को हड़पने के फिराक में हैं । प्रधान अपना माल समझ कर सरकारी धन लूटने में लगे हैं ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 20:59:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती जनपद में  पचास के बजाय डेढ़ सौ मीटर नाली निर्माण कर सरकारी धन को बर्बाद कर रहे प्रधान तरेता </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केविकास खण्ड साऊँघाट की ग्राम पंचायत तरेता का नाली निर्माण इसलिए सुर्खियों में है कि जहाँ 50- 60 मीटर नाली निर्माण से जल निकासी हो जायेगी तो वहीं प्रधान द्वारा चुनावी रंजिश को लेकर 150 से 200 मीटर नाली निर्माण दिशा बदल कर प्रस्तावित है और पद के पावर का दुरपयोग करते हुए सरकारी धन के सहारे व्यक्तिगत रंजिश की भरपाई की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उच्चाधिकारियों को भेजे शिकायती पत्र में पीड़ित राम वृक्ष ने लिखा है कि प्रधान राम सुभाव और उनका चुनावी रंजिश है जिसके कारण जहाँ पचास - साठ मीटर नाली निर्माण से ही</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173508/pradhan-tareta-is-wasting-government-money-by-constructing-150-meter"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260318-wa0075.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केविकास खण्ड साऊँघाट की ग्राम पंचायत तरेता का नाली निर्माण इसलिए सुर्खियों में है कि जहाँ 50- 60 मीटर नाली निर्माण से जल निकासी हो जायेगी तो वहीं प्रधान द्वारा चुनावी रंजिश को लेकर 150 से 200 मीटर नाली निर्माण दिशा बदल कर प्रस्तावित है और पद के पावर का दुरपयोग करते हुए सरकारी धन के सहारे व्यक्तिगत रंजिश की भरपाई की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उच्चाधिकारियों को भेजे शिकायती पत्र में पीड़ित राम वृक्ष ने लिखा है कि प्रधान राम सुभाव और उनका चुनावी रंजिश है जिसके कारण जहाँ पचास - साठ मीटर नाली निर्माण से ही जल निकासी हो जायेगी , उसके बजाय नाली की दिशा मोड़कर उनके सहन को बर्बाद करते हुए 150 मीटर से ज्यादा नाली निर्माण सरकारी धन की बर्बादी करते हुए प्रस्तावित है और नाली निर्माण के बहाने पद का दुरपयोग करते हुए व्यक्तिगत व चुनावी रंजिश की भरपाई की जा रही है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 19:46:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर में वित्तीय अनियमितता उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173370/draft-add-your-title-financial-irregularities-exposed-in-pwd-sultanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1003411464.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सुल्तानपुर  - </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह खुलासा विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गए पत्र से हुआ है, जिसमें स्टोर संचालन में हो रही 'अवैध' गतिविधियों का जिक्र है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्र में बताया गया है कि PWD में निविदाएं 'वर्टिकल' आधार पर दी जाती हैं। इसका अर्थ है कि कार्य पूरा करने के लिए सभी सामग्री और सेवाओं की व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि, सुल्तानपुर के प्रांतीय खंड में नियमों के विपरीत विभागीय स्टोर का संचालन किया जा रहा है। सड़क निर्माण कार्यों के खाते में स्टोर से सामग्री की खरीद और उसके परिवहन का खर्च सीधे डाला जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंडल स्तर पर न तो कोई MAS (मासिक लेखा सारांश) खाता है और न ही स्टॉक तथा T&amp;P (उपकरण एवं संयंत्र) का कोई उचित हिसाब-किताब रखा जा रहा है। संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) ने इन लेनदेन को मुख्य लेखा बहियों से बाहर रखा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वित्त विभाग के वर्ष 2022 के शासनादेश के अनुसार, सीधी बुकिंग के माध्यम से बिटुमेन या इमल्शन जैसी सामग्री खरीदना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, यहां धड़ल्ले से विभागीय खरीद जारी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 19:46:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरैया में विकास विभाग का भ्रष्टाचार तथा गौशाला नाम पर करोड़ रुपया जा रहा अधिकारियों के जेब में</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के सबसे बड़ी तहसील हरैया में विकास विभाग का भ्रष्टाचार तथा गौशाला नाम पर करोड़ रुपया जिले में पानी की तरह बह गया लेकिन छुट्टा पशु नेशनल हाईवे के किनारे घूमते नजर आ रहे हैं आए दिन जानवरों से कभी बाइक टकराती कभी  टकराती पशुओं के कारणलोग दुर्घटना ग्रस्त होते रहते हैंइस मामले पर खंड विकास अधिकारी हरैया को फोन करने पर फोन रिसीव नहीं होता। और ना ही कोई कर्मचारी इस मामले को संज्ञान लेता है l</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जबकि उसी रास्ते से जिम्मेदार अधिकारी खंड विकास अधिकारी सहायक विकास अधिकारी तथा ग्राम पंचायत अधिकारी के सामने रोड</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173163/corruption-of-development-department-in-haraiya-and-crores-of-rupees"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260311-wa0039.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के सबसे बड़ी तहसील हरैया में विकास विभाग का भ्रष्टाचार तथा गौशाला नाम पर करोड़ रुपया जिले में पानी की तरह बह गया लेकिन छुट्टा पशु नेशनल हाईवे के किनारे घूमते नजर आ रहे हैं आए दिन जानवरों से कभी बाइक टकराती कभी  टकराती पशुओं के कारणलोग दुर्घटना ग्रस्त होते रहते हैंइस मामले पर खंड विकास अधिकारी हरैया को फोन करने पर फोन रिसीव नहीं होता। और ना ही कोई कर्मचारी इस मामले को संज्ञान लेता है l</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जबकि उसी रास्ते से जिम्मेदार अधिकारी खंड विकास अधिकारी सहायक विकास अधिकारी तथा ग्राम पंचायत अधिकारी के सामने रोड पर डालते नजर आ रहे हैं फिर भी उनकोगौशालाओं में व्यवस्थित नहीं किया जा रहा चार के नाम पर हर महीने लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं एक ग्राम पंचायत में फिर भी इन पशुओं को गौशालयों में क्यों नहीं भेजा जा रहा है गौशाला के नाम पर चारा घोटाला बस्ती जनपद के सभी विकास करो में हो जमकर हो रहा है ना तो जिला प्रशासन इस मामले पर ध्यान दे रहा है ना ही खंड विकास अधिकारी इस मामले पर दे रहे हैं ध्यान जीवी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हरैया  विकासखंड के भदावल, संसारीपुर,खैरीऔझा ,बड़हर कला , चौकड़ी, आमा पांडे, भारगवा,गांव के सामने नेशनल हाईवे पर छुट्टा पशुओं का आतंक से लोग परेशान नजर आ रहे हैं आए दिन जानवरों से टकराकर घायल हो रहे हैं पुलिस प्रशासन अपना खाना पूर्ति करके वारा न्यारा कर देते हरैया विकासखंड के हाईवे के किनारे सड़कों पर डेरा डाले छुट्टा पशुहाईवे पर दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही है जिससे लोग आये दिन हो रहे हैं घायल जिम्मेदार नहीं दे रहे हैं ध्यानप्रशासन द्वारा छुट्टा पशुओं को पड़कर गौशाला भेजने का अभियान साबित हो सिर्फ  है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिखावा.छुट्टा पशुओं से सड़क व हाइवे पर लगातार बढ़ रही है दुर्घटनाएं फिर भी जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी नहींलेरहेहैंसंज्ञानकप्तानगंज  हरैया विकास खंड क्षेत्र के हाईवे पर लगातार छुट्टा पशुओं का है आतंक जिम्मेदार अधिकारी नहीं ले रहे हैं इस पर कोई संज्ञान  सभी अधिकारी कर्मचारी अपनी जेब भरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं यहां तक ग्राम पंचायत में फर्जी हाजिरी के सहारे भुगतान करवा रहे हैं जबकि सरकार द्वारा छुट्टा पशु  के लिए हर महीने लाखों का वारा न्यारा हो रहा है l</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिम्मेदार अधिकारी आंखें मुदे कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं कब होगी इन छुट्टा पशुओं को गौशाला में मैं भेजा जाएगा जिससे दुर्घटनाएं कम होगी  जिला अधिकारी के आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं ब्लॉक के कर्मचारी और अधिकारी इस मामले में मुख्य विकास अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हुए हैं सरकार का बजट गौशाला के धन का बंदर बढ़ हो रहा है छोटा पशुओं से टकराने के बाद लोगों की हो रही है मोते फिर भी शासन प्रशासन नहीं ले रहा संज्ञा न कब होगी इस भ्रष्टाचार की जांच कर्मचारी गौशाला से बंद जानवरों को छोड़ दिया जा रहा है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 22:39:38 +0530</pubDate>
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