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                <title>सरकारी योजनाएं - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सरकारी योजनाएं RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोले ए.के. शर्मा, महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong>नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भदोही प्रवास के दौरान औराई ब्लॉक सभागार में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रेस वार्ता की। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आयोजित जनआक्रोश मार्च में भी भागीदारी की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों से समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि इसे पारित कराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन विपक्ष के असहयोग के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177456/ak-sharma-said-on-nari-shakti-vandan-act-there-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0027-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong>नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने भदोही प्रवास के दौरान औराई ब्लॉक सभागार में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रेस वार्ता की। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आयोजित जनआक्रोश मार्च में भी भागीदारी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों से समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि इसे पारित कराने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन विपक्ष के असहयोग के कारण यह संभव नहीं हो सका। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में यह विधेयक अवश्य पारित होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विपक्ष के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि महिला अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति करना स्वीकार्य नहीं है। सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में सांसद विनोद बिंद, विधायक दीनानाथ भास्कर, विधायक विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष प्रियंका जायसवाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख पूनम मौर्या, कार्यकारिणी सदस्य रेनू पांडे सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता भारत सुरक्षा विकास और विश्वास की नई विजयगाथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत ने लंबे समय तक जिस आंतरिक चुनौती का सामना किया वह नक्सलवाद के रूप में देश के अनेक हिस्सों में फैली रही। यह समस्या केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं थी बल्कि इसने सामाजिक आर्थिक और मानवीय जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया। दशकों तक आदिवासी क्षेत्रों में भय असुरक्षा और पिछड़ापन बना रहा। गांवों में विकास की रफ्तार थम गई और लोगों का भरोसा व्यवस्था से डगमगाने लगा। आज जब देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस परिवर्तन के पीछे की नीति संकल्प और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174668/india-moving-towards-the-end-of-naxalism-a-new-victory"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1926804-10.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत ने लंबे समय तक जिस आंतरिक चुनौती का सामना किया वह नक्सलवाद के रूप में देश के अनेक हिस्सों में फैली रही। यह समस्या केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं थी बल्कि इसने सामाजिक आर्थिक और मानवीय जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया। दशकों तक आदिवासी क्षेत्रों में भय असुरक्षा और पिछड़ापन बना रहा। गांवों में विकास की रफ्तार थम गई और लोगों का भरोसा व्यवस्था से डगमगाने लगा। आज जब देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस परिवर्तन के पीछे की नीति संकल्प और प्रयासों को समझा जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के नेतृत्व में बीते वर्षों में जो रणनीति अपनाई गई वह बहुआयामी रही। केवल सुरक्षा बलों की तैनाती तक सीमित न रहकर सरकार ने विकास और विश्वास दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया। यही कारण है कि जिन क्षेत्रों में कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी वहां आज स्कूल खुल रहे हैं सड़कें बन रही हैं और जीवन सामान्य हो रहा है। यह बदलाव अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे वर्षों की योजनाबद्ध मेहनत और स्पष्ट नीति रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नक्सलवाद की जड़ें अक्सर गरीबी और पिछड़ेपन से जोड़कर देखी जाती रही हैं। लेकिन वास्तविकता इससे अधिक जटिल रही है। कई ऐसे क्षेत्र भी थे जहां आर्थिक स्थिति कमजोर थी फिर भी वहां नक्सलवाद नहीं पनपा। इसका अर्थ यह है कि नक्सलवाद केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक वैचारिक और रणनीतिक चुनौती भी था। वामपंथी उग्रवाद ने आदिवासी समाज को अपने प्रभाव में लेकर उन्हें मुख्यधारा से दूर करने का प्रयास किया। स्कूलों को जलाना विकास कार्यों को रोकना और भय का वातावरण बनाना इस रणनीति का हिस्सा रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने इस सच्चाई को समझते हुए अपनी नीति तैयार की। सुरक्षा बलों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया। खुफिया तंत्र को मजबूत बनाया गया और स्थानीय पुलिस को सशक्त किया गया। इसके साथ ही आत्मसमर्पण की नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया जिससे बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौटे। यह केवल सैन्य सफलता नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्वास का भी उदाहरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्तर जैसे क्षेत्रों में जो परिवर्तन देखने को मिला वह इस नीति की सफलता का प्रमाण है। जहां कभी प्रशासन की पहुंच सीमित थी वहां आज सरकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं। राशन की दुकानों से लेकर स्वास्थ्य केंद्र तक लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं। आधार और राशन कार्ड के माध्यम से लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों का विश्वास बढ़ा है और वे हिंसा से दूर होकर विकास की राह पर चलने लगे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके विपरीत यदि पिछले दशकों की स्थिति पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना रहा। सड़कें नहीं बनीं स्कूल नहीं खुले और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचीं। इस शून्य का लाभ उठाकर उग्रवादी संगठनों ने अपनी पकड़ मजबूत की। लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि व्यवस्था उनके खिलाफ है और हथियार उठाना ही एकमात्र रास्ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी देखा गया कि उस समय नक्सलवाद के खिलाफ स्पष्ट और कठोर नीति का अभाव था। कई बार राजनीतिक इच्छाशक्ति कमजोर दिखाई दी और समस्या को टालने का प्रयास किया गया। इससे नक्सलवाद का विस्तार हुआ और वह कई राज्यों तक फैल गया। देश के एक बड़े भूभाग में इसका प्रभाव देखा गया जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में स्थिति बदल चुकी है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि जो लोग भटक गए हैं उन्हें वापस लाने का अवसर मिले। इस संतुलित दृष्टिकोण ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और हिंसा की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।</div>
<div style="text-align:justify;">सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब आदिवासी समाज स्वयं इस बदलाव का भागीदार बन रहा है। वे समझ चुके हैं कि विकास और शांति ही उनके भविष्य का आधार है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के कार्यक्रमों ने उन्हें नई दिशा दी है। युवा पीढ़ी अब हथियार नहीं बल्कि शिक्षा और रोजगार को अपना लक्ष्य बना रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नक्सलवाद के अंत की यह यात्रा केवल सरकार की उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे समाज की जीत है। इसमें सुरक्षा बलों का साहस प्रशासन की प्रतिबद्धता और आम नागरिकों का सहयोग सभी शामिल हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि सही नीति और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य किया जाए तो सबसे जटिल समस्याओं का समाधान भी संभव है।आज जब देश इस चुनौती से लगभग मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है तब यह आवश्यक है कि इस उपलब्धि को बनाए रखा जाए। विकास की गति को निरंतर बनाए रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी क्षेत्र फिर से पिछड़ापन और असुरक्षा का शिकार न बने। यही सच्चे अर्थों में नक्सलवाद के अंत की स्थायी गारंटी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत ने एक लंबी और कठिन लड़ाई में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। गृह मंत्रालय के नेतृत्व में अपनाई गई रणनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि सुरक्षा और विकास साथ साथ चल सकते हैं। यह केवल एक समस्या का समाधान नहीं बल्कि नए भारत की दिशा का संकेत है जहां हर नागरिक को समान अवसर और सुरक्षित जीवन का अधिकार प्राप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है : जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div>  </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div>  </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173243/fisheries-can-become-an-important-and-profitable-medium-to-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773406513101-(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div>
<div> </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राणी विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन सिद्धार्थनगर के संयुक्त तत्वावधान में किसानों में  पैंगेसियस मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, व्यवसायिक संभावनाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्नत करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध सभागार में “पैंगेसियस मछली पालन किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे   जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी. एन. ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय बढ़ाने लिए  राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन  का यह  संयुक्त प्रयास  अत्यंत  महत्वपूर्ण और लाभकारी माध्यम बन सकता है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने विशेष रूप से पैंगेसियस मछली पालन को कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीक बताया। जिलाधिकारी ने किसानों को सरकार की विभिन्न मत्स्य योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों को अपना कर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। साथ ही उन्होंने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो कविता शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के लिए आयोजित यह  प्रशिक्षण कार्यक्रम  कृषि और मत्स्य क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम में प्राणी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों और यहां अध्ययन के लाभों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन विज्ञान  संकाय की अधिष्ठाता प्रो प्रकृति राय ने किया ।  </div>
<div> </div>
<div> आचार्य डॉ. विनीता रावत, मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक नन्द किशोर प्रसाद,  एक्वा डॉक्टर सॉल्यूशंस कोलकाता के डॉ देब तनु  बर्मन, गौरव एक्वा यूनिवर्स, महाराजगंज के संस्थापक वीर गौरव, जंतु  विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने हैचरी प्रबंधन तथा सहायक आचार्य एवं सह-संयोजक डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने रोग निदान के विषय में प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो नीता यादव , अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो सौरभ , डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ विशाल गुप्ता, डॉ अविनाश प्रताप सिंह सहित लगभग एक सौ पचास  किसानों  ने  प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 19:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आजादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद भी बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए आंसू बहा रहा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आजादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद भी बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए आंसू बहा रहा है वही इस संबंध में जिलाधिकारी बस्ती ने कहा मामला संज्ञान में आया है अगर ऐसी स्थित है तो जांच कर कर जनता की हर सुविधाओं को उसे गांव तक पहुंचाया जाएगा ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वही ग्रामीणों ने सीधा आरोप आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान सिर्फ अपना विकास कर रहे हैं और कैसे विकास कर रहे हैं जो सरकार की धरोहर जमीन है सब पर पट्टा करके अपना विकास करना है जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173112/even-after-78-years-of-independence-nagpur-kunwar-village-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0321.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आजादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद भी बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए आंसू बहा रहा है वही इस संबंध में जिलाधिकारी बस्ती ने कहा मामला संज्ञान में आया है अगर ऐसी स्थित है तो जांच कर कर जनता की हर सुविधाओं को उसे गांव तक पहुंचाया जाएगा ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वही ग्रामीणों ने सीधा आरोप आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान सिर्फ अपना विकास कर रहे हैं और कैसे विकास कर रहे हैं जो सरकार की धरोहर जमीन है सब पर पट्टा करके अपना विकास करना है जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांव के विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर घर तक पहुंचे , लेकिन उनके अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण बस्ती जिले के हर्रैया तहसील व परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए तरस रहा है l</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यहाँ न तो नाली  है ना ही इस गांव में गांव के अंदर जाने के लिए कोई रास्ता है, यही है  विकास का दवा जहां केंद्र और प्रदेश सरकार बार-बार दावा करती है कि गांव में ग्राम प्रधान के माध्यम से गांव में विकास तेजी से किया जा रहा है नाली खरंजा सहित बिजली व शुद्ध पिए जल की  व्यवस्था भी हर गांव में किया जाय  ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> अगर आपको जमीनी हकीकत देखना हो तो बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक के गांव नागपुर कुंवर में देखिए इस गांव में ना तो गांव में घुसने के लिए रास्ता है ना ही इस गांव में सड़क है ना तो नाली है ना ही कहीं इंटरलॉकिंग लगी है ग्रामीणों ने सीधा आरोप ग्राम प्रधान पर लगाते हुए कहा इस गांव की ग्राम प्रधान द्वारा विकास कुछ भी नहीं किया जा रहा है ग्राम प्रधान की लापरवाही से हम लोगों के गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसको हम लोग चारपाई पर लेट कर गांव से बाहर लेकर जाते हैं तब एंबुलेंस या किसी अन्य गाड़ी के सहायता से हम किसी को अस्पताल पहुंच पाते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ग्राम प्रधान की लापरवाही से हमारे गांव में अंदर आने-जाने के लिए कोई सड़क नहीं बना है आप लोग आए हैं देखिए की सड़क कहां है इस गांव में ग्राम प्रधान क्यों नहीं सड़क बनवाया जा रहा है ,ग्रामीणों द्वारा बार-बार जिला अधिकारी बस्ती सहित खंड विकास अधिकारी परशुरामपुर और उप जिला अधिकारी हरैया कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया साथ ही तहसील दिवसों में हम ग्रामीणों के साथ कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है हम लोगों के सामने सड़क पानी नाली जैसी समस्याओं से हम लोग जूझ रहे हैं,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जबकि सरकार बार-बार दावा कर रही है कि गांव में सरकारी योजनाओं सहित सड़क नाली इंटरलॉकिंग सहित अन्य व्यवस्थाओं को भी गांव में विकास किया जा रहा है जिससे जनता को कोई दिक्कतों का सामना न करना पड़े ,  लेकिन यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है जहां आजादी के लगभग 78 साल हो चुके हैं लेकिन इस गांव में आजादी के बाद क्यों नहीं विकास हुआ क्या कारण है यह अपने आप में सबसे बड़ा सवाल खड़ा रहा है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पीड़ित शिवपूजन तिवारी ने कहा कि हमारे गांव में सड़क न होने से हम मरीजों को कैसे इलाज कराने ले जाएं हमारे पिताजी का इतना तबीयत खराब था कि हम लोग उनको गोदी में उठाकर यहां से 1 किलोमीटर दूरी तक ले गए तब हमको गाड़ी मिली जब सड़क नहीं है नाली नहीं है शुद्ध पीने का पानी नहीं है तो कैसा विकास का दावा किया जाता है सरकार द्वारा और  ग्राम प्रधान अपना विकास कर रहे हैं जो सरकारी जमीन बची है जिन-जिन लोगों के पास जमीन है खेत है घर है उनको पैसा लेकर पटा कर रहे हैं गांव का विकास नहीं कर पा रहे हैं अपना विकास कर रहे हैं ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वही इस संबंध में जिला अधिकारी बस्ती ने कहा मामला संज्ञान में आया है इसकी हम जांच कर कर वहां विकास कार्य कराया जाएगा । वही इस संबंध में ग्राम प्रधान से बात करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 13:45:41 +0530</pubDate>
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