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                <title>हर्रैया तहसील - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>हर्रैया तहसील RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सूखी नहरे सूखे तालाब पानी की तलाश में भटक रहे बेजुबान जानवर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177402/dry-canals-dry-ponds-dumb-animals-wandering-in-search-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa0051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भीषण गर्मी तपती धूप में बेजुबान पानी बगैर तरस रहे हैं जिले में सुखी नहरे तालाब गड्ढे में पानी न होने से जंगली जानवर नील गाय पशु पक्षी बेजुबान पानी के लिए तरस रहे हैं जिला प्रशासन एक के कमरों में बैठकर आदेश देती रहती है लेकिन सूखी नारे सूखे तालाब बेजुबानों के लिए हलक सूख रहा है जिला प्रशासन बिजवानों के लिए ना तो नहरे में पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और ना ही तालाबों और नहरे में पानी छुड़वाने का काम कर रहे हैं कैसे बेजुबान जानवर भीषण तपती गर्मी में बेहाल नजर आ रहे हैं पानी के लिए तड़प रहे बेजुबान सूखी नहर तालाब जिम्मेदार बेपरवाह जिले के हरैया तहसील क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पशु पक्षियों की हालत गंभीर जंगली जानवर गांव की तरफ पलायन कर रहे हैं जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान होने की आशंका है नहर तालाब और पोखरे पूरी तरह सूख चुके  जिससे पानी के अभाव में जानवर दर-दर भटकने को मजबूर ग्रामीण क्षेत्रों में इनका आवागमन हो गया है पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे जानवर ग्रामीणों को नुकसान पहुंचा रहे हैं क्षेत्र में जलस्रोतों की हालत बद से बदतर हो चुकी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठकर सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित. धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कागजों में लाखों रुपए का जलाशय भराव के लिए पैसा खर्च हो जा रहा है लेकिन स्थित सुखी तालाब नहरे बयां कर रही है कि भ्रष्टाचार करके जल स्रोतों का भंडारण नहीं हो पा रहा है नदिया सुख रही है नदियों की सफाई नहीं की जा रही जिसके कारण पानी नहीं रख रहा हैजमीनी स्तर पर राहत के कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं पानी की तलाश में पशु-पक्षी गांव और सड़कों की ओर भटक रहे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पानी की व्यवस्था कराने और सूखे जलस्रोतों को भरवाने की मांग की व्यवस्था करनी चाहिए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थिति भयावह हो सकती है बड़ी संख्या में बेजुबान जानवरों की जान जा सकती हैसवाल यह है कि आखिर कब जागेगा जिला प्रशासन बेजुबानों को कब जल का व्यवस्था कराएगी सरकार केवल कागजों में तालाबों में पानी भरा जा रहा है नहरे में पानी सप्लाई हो रही है लेकिन सब सुखी नजर आ रही है कहीं पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है जिला प्रशासन आदेश देकर के अपने एक ऑफिस में बैठे रहते हैं जंगली जानवर और बेजुबान पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था सरकार नहीं कर पा रही है</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:45:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूर्ति लिपिक के खिलाफ खाद्य एवं रसद मंत्री से हुई शिकायत लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की विफलता है</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के आपूर्ति विभाग के बाबू नवीन कुमार चौधरी पिछले 18 सालों से एक ही पटल पर नौकरी कर रहे हैं कई बार शिकायत होने के बावजूद भी कार्रवाई न होना जिला प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है मंत्री खाद्य एवं रसद (आपूर्ति) विभाग उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से बस्ती जिले के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात पूर्ति लिपिक नवीन चौधरी की लम्बी तैनाती को लेकर शिकायत किया है और तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर स्थानांतरित करने की मांग की गई है । </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूर्ति लिपिक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176699/complaint-against-the-supply-clerk-to-the-food-and-logistics"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260420-wa0064.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के आपूर्ति विभाग के बाबू नवीन कुमार चौधरी पिछले 18 सालों से एक ही पटल पर नौकरी कर रहे हैं कई बार शिकायत होने के बावजूद भी कार्रवाई न होना जिला प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है मंत्री खाद्य एवं रसद (आपूर्ति) विभाग उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से बस्ती जिले के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात पूर्ति लिपिक नवीन चौधरी की लम्बी तैनाती को लेकर शिकायत किया है और तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर स्थानांतरित करने की मांग की गई है । </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूर्ति लिपिक पर आरोप है कि पूर्ति लिपिक नवीन चौधरी दिनांक- -04-12-2007 से लेकर अद्यतन से एक ही पटल पर रह कर मलाई काट रहा है पूर्ति लिपिक का स्थानांतरण नीति के अनुसार स्थानांतरण होना न्यायहित में आवश्यक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच हेतु खाद्य एवं रसद मंत्री से लिखित शिकायत की गई है और शिकायत पत्र में लिखा गया है कि जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में लंबे समय से गंभीर अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात पूर्ति लिपिक नवीन चौधरी विगत 18 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत है जो (वर्तमान समय में तहसील हर्रैया आपूर्ति कार्यालय से सम्बद्ध) है लेकिन आपूर्ति कार्यालय हर्रैया में डियूटी करने के बजाए जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में पूरा दिन जमा रहता है और सभी कार्यों में मनमानी कार्य करता है जिससे उसके प्रभाव और कार्यशैली को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप है कि एक कथित निजी व्यक्ति (प्राइवेट मुंशी) प्रवीण कुमार के माध्यम से कोटेदारों एवं अन्य संबंधित लोगों से अवैध वसूली भी करवाता है। यह भी कहा जा रहा है कि बिना अवैध लेन-देन के कोई कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाता है जिससे आम जनता और पात्र लाभार्थियों को सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> राशन कार्ड बनवाने या यूनिट बढ़ाने के बाद पर राशन कार्ड धारकों से मोटी रकम ऐंठता है यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है क्योंकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) जैसी महत्वपूर्ण योजना सीधे गरीब और जरूरतमंद वर्ग से जुड़ी है। यदि इस प्रकार की अनियमितताएं जारी रहेगी तो सरकार की साफ सुथरी छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उक्त प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को आवश्यकतानुसार हटाकर निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। दोषी पाए जाने पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। जनपद में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था स्थापित की जाए, जिससे पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> भाजपा नेता ने कहा कि हमें पूर्ण विश्वास है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेकर शीघ्र उचित कार्रवाई करेंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्याय या साजिश ? एसडीएम हर्रैया का आदेश सवालों कघेरेमें - ऐसे आदेश ही बनते हैं खूनी संघर्ष का कारण।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के तहसील हर्रैया के एसडीएम (न्यायिक) शशिबिंदु कुमार द्विवेदी इन दिनों अपने एक ऐसे कारनामे को लेकर चर्चा में हैं, जिसने न्याय व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक औद्योगिक भूमि का है, जिससे संबंधित भागीदार वर्ष 1992 में ही अपनी लायबिलिटी और एसेट से मुक्त हो चुके थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 34 साल बाद, 2026 में, उन्हीं को दोबारा नाजायज कब्जा दिलाने की कवायद शुरू कर दी  कि इस कार्रवाई में दो जालसाजों को उक्त औद्योगिक भूमि पर कब्जा दिलाने की मंशा से पहले से लागू स्टे को खत्म</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174998/justice-or-conspiracy-sdm-harraiyas-order-is-in-question"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260403-wa0028.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के तहसील हर्रैया के एसडीएम (न्यायिक) शशिबिंदु कुमार द्विवेदी इन दिनों अपने एक ऐसे कारनामे को लेकर चर्चा में हैं, जिसने न्याय व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक औद्योगिक भूमि का है, जिससे संबंधित भागीदार वर्ष 1992 में ही अपनी लायबिलिटी और एसेट से मुक्त हो चुके थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 34 साल बाद, 2026 में, उन्हीं को दोबारा नाजायज कब्जा दिलाने की कवायद शुरू कर दी  कि इस कार्रवाई में दो जालसाजों को उक्त औद्योगिक भूमि पर कब्जा दिलाने की मंशा से पहले से लागू स्टे को खत्म करने की योजना बनाई गई। और इसके लिए 2016 के एक मुकदमे को ही खारिज करने का रास्ता चुना गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब जब नीयत पहले से तय हो, तो तर्क जुटाने में भला कितना समय लगता है! साहब ने एक नहीं, कई आधार गढ़े और आनन फानन में मुकदमा खारिज भी कमुकदमे की खारिजी के साथ ही स्टे भी समाप्त हो गया, जो इन कथित जालसाजों के लिए सबसे बड़ी बाधा था। अब आगे क्या होगा ? यह तो किसी घटना के घटित होने के बाद कानून-व्यवस्था ही तय करेगी !</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और साहब भी इसके लिए याद जरूर किए जाएंगे। लेकिन मुंसिफ बस्ती के आदेश के आधार पर दाखिल इस मुकदमे को खारिज करने के जो आधार दिए गए, वे खुद अपने आप में गम्भीर सवाल खड़े करते हैंअपने आदेश में साहब लिखते हैं, "खतौनी में पक्षकारों में किसी भी पक्षकार का नाम फर्म के पार्टनर के रूप में अंकित नहीं है। इस प्रकार इस वाद बिन्दु का निस्तारण वादी के पक्ष में नकारात्मक रूप में किया जाता है।अब सवाल यह उठता है कि, क्या किसी भी खतौनी में भूमिधर के नाम के साथ “किसान” या “मकान मालिक” आदि लिखा रहता है? जमीन का स्वरूप और उपयोग तो स्वतः स्पष्ट होता है, यह एक सामान्य समझ की बात है। लेकिन जब नीयत ही कुछ और हो, तो सामान्य समझ भी बेअसर हो जाती आगे आदेश में उल्लेख है, "प्रतिवादी श्री प्रवीश चन्द्र धर द्विवेदी द्वारा शपथ पत्र के साथ अवगत कराया है कि, प्रकीर्ण वाद संख्या 76/11/2024 श्रीश चंद्र धर द्विवेदी बनाम प्रवीश चन्द्र धर द्विवेदी को निरस्त किया जा चुका है।"हकीकत यह है कि ऐसा कोई मुकदमा अस्तित्व में ही नहीं है। और न ही इस कथित मुकदमे का इस आदेश से कोई सीधा संबंध ही हो सकता है। लेकिन "निरस्त" शब्द का जादू ऐसा चला कि उसे भी आधार बना लिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साहब आगे लिखते हैं, "वास्तव में एक ऐसे आदेश के आधार पर अनुतोष की मांग की गई है जो वर्तमान में माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।" जबकि विधि का सामान्य सिद्धांत है कि किसी न्यायालय का आदेश तब तक प्रभावी रहता है, जब तक उस पर कोई नया आदेश पारित न हो जाए। केवल मुकदमे का विचाराधीन होना, आदेश को निष्प्रभावी नहीं करता। यहां जिस मुकदमे को आधार बताया गया, पात्रता के मुताबिक वह 2017 से अब तक केवल एडमिट अवस्था में ही पड़ा हुआ है। लेकिन आदेश लिखने के लिए आधार तो चाहिए थे, सो गढ़ लिएसाहब ने अपने आदेश में तर्क दिया कि, "वास्तव में प्रश्नगत वाद उभय पक्षों के मध्य भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के तहत साझेदारी विवाद से संबंधित है और वादी ने अभिलेखीय राजस्व दस्तावेजों से अपना कब्जा सिद्ध नहीं किया है।" साहब का यह तर्क स्पष्ट करता है कि, वे भी विपक्षियों की राह पर चलते हुए 'मुंसिफ बस्ती' के उस मूल आदेश को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं जो इस पूरे मुकदमे की बुनियाद है। ऐसे में साहब यह साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि, सच चाहे जो भी हो वे उसे हरगिज नहीं देखेंगे। और विपक्षियों के हित में इस मुकदमे का गला घोंटकर ही मानेंसाहब ने आधार गढ़ते समय प्रतिवादी का हवाला देते हुए राजस्व संहिता की सीमाओं से बाहर निकलकर इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 आदि पर भी लंबा व्याख्यान दे डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक्ट की धारा 63 का बाकायदा उल्लेख किया गया और प्रतिवादी की भाषा में यह स्थापित करने की कोशिश की गई कि रिटायरमेंट की सूचना सार्वजनिक नहीं की गई।  आदेश पढ़ते समय कई जगह ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रतिवादी बोल रहा हो और साहब केवल उसे लिख रहे हों। हैरत की बात यह है कि न तो यह जांचने की जरूरत समझी गई कि मूल मुकदमा क्या है? ना ही 27 अगस्त 2025 को फर्म आदि से संबंधित नामांतरण के लिए जारी "परिषदादेश" का अनुपालन करने की जरूरत समझी गई। और ना ही वाद के आधार, मुंसिफ के आदेश/ डिग्री को तरजीह दी गई। और न ही यह देखा गया कि, जिन आधारों पर साहब का आदेश टिका है, वे प्रासंगिक भी हैं या नहीं। सबसे अहम सवाल यह कि, प्रतिवादी सच बोल रहा है या झूठ ? इस पर तो मानो विचार करना भी जरूरी नहीं समझा गया। विडंबना यह भी है कि जिस प्रतिवादी के नाम के आगे साहब “श्री” लगाते नहीं थक रहे, उन्हीं पर आरोप है कि, उन्होंने मुकदमे के दौरान ही खतौनी में दर्ज अपने नामों का जमकर दुरुपयोग किया। फर्म की विवादित जमीन का नामांतरण कराया, खारिज-दाखिल कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और यहां तक कि समानांतर न्यायालय में बंटवारे का मुकदमा दाखिल कर एकपक्षीय प्राइमरी डिग्री तक हासिल कर ली। लेकिन इन सब तथ्यों का जिक्र आदेश में कहीं नहीं मिलता। कार्रवाई तो दूर की बात है।स्पष्ट है कि, आदेश की शुरुआत ही मुकदमे को खारिज करने की मंशा से हुई थी। और अंत तक प्रतिवादी के पक्ष को साधते हुए वही परिणाम हासिल भी कर लिया गया। अदालत अपनी थी, अधिकार अपने थे, तो परिणाम भी मनमाफिक ही आया। कुल मिलाकर साहब ने वही कहा और किया, जिसकी उम्मीद जालसाज विपक्षी करते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वादी के पक्ष में तो सिर्फ कृत्रिम कमियां ही गिनाई गईं। और उसके द्वारा प्रस्तुत तमाम साक्ष्यों को भी दबाकर साक्ष्यों का अभाव बता दिया जिला अदालत के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस आदेश को देखकर मुंह बिचकाते हुए इसे “पूर्व नियोजित ऑर्डर” तक कह डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और अंत में वही पुरानी बात याद आती है, "जब पैसे से वास्ता हो जाए, तो फिर इज्जत आबरू, न्याय अन्याय की चिंता भला कौन करता खैर, जीवन और जीविका की लड़ाई हर व्यक्ति पूरी ताकत से लड़ता है, और वादी भी लड़ेगा ही। यह जरूरी नहीं कि हर जगह ऐसे ही चेहरे बैठे हों। लेकिन असली चिंता इस बात की है कि, आखिर ये साहब कब तक न्यायिक चोला ओढ़कर न्याय का यूँ ही चीरहरण करते रहेंगे, और व्यवस्था देखती रहेगी ?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बस्ती में दवा के बहाने कराई जमीन की रजिस्ट्री! पीड़िता ने DM से लगाई न्याय की गुहार </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिले केहर्रैया तहसील क्षेत्र की  उभाई निवासिनी ज्ञानमती पत्नी स्वर्गीय सियाराम ने जिलाधिकारी को पत्र देकर न्यायालय नायब तहसीलदार सदर हर्रैया  द्वारा वाद सं0-07671/2018 सुखराम बनाम सियाराम का मुकदमा पैरवी के अभाव में  खारिज हो जाने के मामले में न्याय की गुहार लगाया </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डीएम को दिये पत्र में ज्ञानमती ने कहा है कि आराजी गाटा संख्या-657 रकबा 0.3290 हे0 स्थित मौजा उभाई, तप्पा रामगढ़, परगना अमोढ़ा, तहसील हरैया, जिला बस्ती में सहखातेदार संक्रमणीय भूमिधर है.  गाँव के ही सुखराम पुत्र जिलाजीत द्वारा उनके पति सियाराम से उनको दवा कराने के बहाने रजिस्ट्री दफ्तर हरैया में लाकर  26.11.2018 को एक</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173354/the-victim-got-land-registered-in-basti-on-the-pretext"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0040.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले केहर्रैया तहसील क्षेत्र की  उभाई निवासिनी ज्ञानमती पत्नी स्वर्गीय सियाराम ने जिलाधिकारी को पत्र देकर न्यायालय नायब तहसीलदार सदर हर्रैया  द्वारा वाद सं0-07671/2018 सुखराम बनाम सियाराम का मुकदमा पैरवी के अभाव में  खारिज हो जाने के मामले में न्याय की गुहार लगाया </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डीएम को दिये पत्र में ज्ञानमती ने कहा है कि आराजी गाटा संख्या-657 रकबा 0.3290 हे0 स्थित मौजा उभाई, तप्पा रामगढ़, परगना अमोढ़ा, तहसील हरैया, जिला बस्ती में सहखातेदार संक्रमणीय भूमिधर है.  गाँव के ही सुखराम पुत्र जिलाजीत द्वारा उनके पति सियाराम से उनको दवा कराने के बहाने रजिस्ट्री दफ्तर हरैया में लाकर  26.11.2018 को एक बैनामा करा लिया गया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इसके विरूद्ध उसने ने न्यायालय सिविल जज (जू०डि०) की अदालत में मूलवाद सं0-612/2025 ज्ञानमती बनाम सुखराम (दस्तावेज मंसूखी) का दाखिल किया है जो विचाराधीन है और तहसील हरैया में न्यायालय नायब तहसीलदार सदर हरैया में दाखिल खारिज वाद सं0-07671ध्2018 सुखराम बनाम सियाराम ने आपत्ति दाखिल किया था जिस पर न्यायालय नायब तहसीलदार हरैया सदर द्वारा पैरवी के आभाव में दिनांक 22.06.2023 को वाद खारिज कर दिया गया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और पत्रावली दाखिल दफ्तर हो गई पुनः वादी द्वारा कायमी प्रार्थना पत्र देकर बिना  आपत्तिकर्ता  को नोटिस समन दिये नायब तहसीलदार सदर हरैया को नाजायज लाभ देकर  27.02. 2026 को आदेश पारित कर दिया गया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उसके पास कुल 6 बच्चे है जिनमें 5 लड़किया है और 1 लड़का है उक्त आराजी गाटा संख्या-657 रकबा 0.3290 हे० ही उसके बच्चो के जीविको पार्जन का साधन है यदि उक्त आराजी पर विपक्षी सुखराम पुत्र जिलाजीत द्वारा कब्जा कर लिया गया तो उसके बच्चे सड़क पर आ जायेगें और जीवन जीने की उम्मीद समाप्त हो जायेगी. उसने नायब तहसीलदार हरैया शौकत अली के विरूद्ध आवश्यक कानूनी कार्यवाही करते हुए उक्त आदेश निरस्त किया जाने की मांग डीएम से किया है.</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 19:11:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आजादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद भी बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए आंसू बहा रहा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आजादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद भी बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए आंसू बहा रहा है वही इस संबंध में जिलाधिकारी बस्ती ने कहा मामला संज्ञान में आया है अगर ऐसी स्थित है तो जांच कर कर जनता की हर सुविधाओं को उसे गांव तक पहुंचाया जाएगा ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वही ग्रामीणों ने सीधा आरोप आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान सिर्फ अपना विकास कर रहे हैं और कैसे विकास कर रहे हैं जो सरकार की धरोहर जमीन है सब पर पट्टा करके अपना विकास करना है जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173112/even-after-78-years-of-independence-nagpur-kunwar-village-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0321.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आजादी के 78 साल बीत जाने के बावजूद भी बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए आंसू बहा रहा है वही इस संबंध में जिलाधिकारी बस्ती ने कहा मामला संज्ञान में आया है अगर ऐसी स्थित है तो जांच कर कर जनता की हर सुविधाओं को उसे गांव तक पहुंचाया जाएगा ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वही ग्रामीणों ने सीधा आरोप आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान सिर्फ अपना विकास कर रहे हैं और कैसे विकास कर रहे हैं जो सरकार की धरोहर जमीन है सब पर पट्टा करके अपना विकास करना है जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गांव के विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर घर तक पहुंचे , लेकिन उनके अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण बस्ती जिले के हर्रैया तहसील व परशुरामपुर ब्लाक का गांव नागपुर कुंवर विकास के लिए तरस रहा है l</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यहाँ न तो नाली  है ना ही इस गांव में गांव के अंदर जाने के लिए कोई रास्ता है, यही है  विकास का दवा जहां केंद्र और प्रदेश सरकार बार-बार दावा करती है कि गांव में ग्राम प्रधान के माध्यम से गांव में विकास तेजी से किया जा रहा है नाली खरंजा सहित बिजली व शुद्ध पिए जल की  व्यवस्था भी हर गांव में किया जाय  ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> अगर आपको जमीनी हकीकत देखना हो तो बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लाक के गांव नागपुर कुंवर में देखिए इस गांव में ना तो गांव में घुसने के लिए रास्ता है ना ही इस गांव में सड़क है ना तो नाली है ना ही कहीं इंटरलॉकिंग लगी है ग्रामीणों ने सीधा आरोप ग्राम प्रधान पर लगाते हुए कहा इस गांव की ग्राम प्रधान द्वारा विकास कुछ भी नहीं किया जा रहा है ग्राम प्रधान की लापरवाही से हम लोगों के गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसको हम लोग चारपाई पर लेट कर गांव से बाहर लेकर जाते हैं तब एंबुलेंस या किसी अन्य गाड़ी के सहायता से हम किसी को अस्पताल पहुंच पाते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ग्राम प्रधान की लापरवाही से हमारे गांव में अंदर आने-जाने के लिए कोई सड़क नहीं बना है आप लोग आए हैं देखिए की सड़क कहां है इस गांव में ग्राम प्रधान क्यों नहीं सड़क बनवाया जा रहा है ,ग्रामीणों द्वारा बार-बार जिला अधिकारी बस्ती सहित खंड विकास अधिकारी परशुरामपुर और उप जिला अधिकारी हरैया कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया साथ ही तहसील दिवसों में हम ग्रामीणों के साथ कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है हम लोगों के सामने सड़क पानी नाली जैसी समस्याओं से हम लोग जूझ रहे हैं,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जबकि सरकार बार-बार दावा कर रही है कि गांव में सरकारी योजनाओं सहित सड़क नाली इंटरलॉकिंग सहित अन्य व्यवस्थाओं को भी गांव में विकास किया जा रहा है जिससे जनता को कोई दिक्कतों का सामना न करना पड़े ,  लेकिन यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है जहां आजादी के लगभग 78 साल हो चुके हैं लेकिन इस गांव में आजादी के बाद क्यों नहीं विकास हुआ क्या कारण है यह अपने आप में सबसे बड़ा सवाल खड़ा रहा है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पीड़ित शिवपूजन तिवारी ने कहा कि हमारे गांव में सड़क न होने से हम मरीजों को कैसे इलाज कराने ले जाएं हमारे पिताजी का इतना तबीयत खराब था कि हम लोग उनको गोदी में उठाकर यहां से 1 किलोमीटर दूरी तक ले गए तब हमको गाड़ी मिली जब सड़क नहीं है नाली नहीं है शुद्ध पीने का पानी नहीं है तो कैसा विकास का दावा किया जाता है सरकार द्वारा और  ग्राम प्रधान अपना विकास कर रहे हैं जो सरकारी जमीन बची है जिन-जिन लोगों के पास जमीन है खेत है घर है उनको पैसा लेकर पटा कर रहे हैं गांव का विकास नहीं कर पा रहे हैं अपना विकास कर रहे हैं ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वही इस संबंध में जिला अधिकारी बस्ती ने कहा मामला संज्ञान में आया है इसकी हम जांच कर कर वहां विकास कार्य कराया जाएगा । वही इस संबंध में ग्राम प्रधान से बात करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 13:45:41 +0530</pubDate>
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