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                <title>डिजिटल सुरक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>डिजिटल सुरक्षा RSS Feed</description>
                
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                <title>अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्टिंग।। </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180992/objectionable-posting-against-aditi-yadav-on-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंच रही है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे कृत्य समाज में गलत संदेश देने के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा देते हैं। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए तथा उनके विरुद्ध साइबर अपराध और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में साइबर क्राइम प्रकोष्ठ को भी प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। समाजवादी अधिवक्ता सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी महिला के सम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है और कानून के दायरे में रहकर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता से साइबर ठगी के 3,800 रुपये पीड़ित को मिले वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong>  साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260609-wa0508.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong> साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने पर पता चला कि व्हाट्सएप अकाउंट हैक किया गया था और उनके साथ साइबर ठगी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने 12 मई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने पर थाना महराजगंज तराई की साइबर हेल्पडेस्क ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर आरोपी के खाते में पहुंची धनराशि को होल्ड करा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित बैंक को धनराशि वापस कराने के लिए एसओपी के अनुसार पत्राचार किया गया। बैंक द्वारा कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी 3,800 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रुपये वापस मिलने पर पीड़ित ने महराजगंज तराई पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई में साइबर हेल्पडेस्क के उपनिरीक्षक आदित्य कुमार, आरक्षी धीरज तिवारी तथा आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि वापस कराई जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां : डर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178738/fear-of-increasing-bomb-threats-in-rajasthan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/3vmjtsfo_jaipur-bomb-threat_625x300_09_december_25.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि समाज में बढ़ती असुरक्षा और डिजिटल अपराधों की गंभीर चेतावनी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा प्रभावित जयपुर रहा, जहां स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी परिसरों को उड़ाने की धमकियां दी गईं। कई बार पूरी इमारतों को खाली करवाना पड़ा, बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई, यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा और सुरक्षा एजेंसियों को घंटों जांच करनी पड़ी। बाद में अधिकांश धमकियां फर्जी साबित हुईं, लेकिन हर सूचना को गंभीरता से लेना प्रशासन की मजबूरी होती है क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं अपराधियों को भी नई ताकत दी है। पहले अपराधी फोन या पत्र के जरिए धमकी देते थे, लेकिन अब ई-मेल, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, वीपीएन और विदेशी सर्वर का उपयोग कर पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। कई बार अपराधी केवल अफवाह फैलाने या मजाक करने के उद्देश्य से भी ऐसे संदेश भेज देते हैं, लेकिन उनका यह मजाक हजारों लोगों को परेशानी में डाल देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्कूलों को मिलने वाली धमकियां सबसे अधिक चिंताजनक हैं। जब किसी स्कूल में बम होने की सूचना मिलती है तो तुरंत बच्चों को बाहर निकाला जाता है, अभिभावकों में डर फैल जाता है और पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन जाता है। छोटे बच्चों के मन पर इसका गहरा मानसिक प्रभाव पड़ता है। कई बार बच्चे लंबे समय तक भय महसूस करते हैं। इसी तरह एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन को धमकी मिलने पर सुरक्षा जांच इतनी सख्त करनी पड़ती है कि यात्रियों की लंबी कतारें लग जाती हैं और उड़ानें प्रभावित हो जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि असली और फर्जी धमकी में अंतर कैसे किया जाए। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संदेश को हल्के में नहीं ले सकतीं। यदि सूचना को नजरअंदाज किया गया और घटना सच निकली तो भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए हर ई-मेल, कॉल या सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की जाती है। बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और साइबर विशेषज्ञ तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। इससे प्रशासनिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान सरकार द्वारा विशेष मॉनिटरिंग यूनिट का गठन किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से ऐसे संदेशों की निगरानी की जा रही है। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अन्य शहरों में बम निरोधक दस्ते सक्रिय रखे गए हैं। इसके अलावा ई-मेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखने के लिए तकनीकी टीमों को मजबूत किया जा रहा है। फिर भी चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि अपराधी भी नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर ऐसे संदेश भेजने वाले पकड़े क्यों नहीं जाते। इसका मुख्य कारण डिजिटल दुनिया की जटिलता है। कई अपराधी फर्जी नाम से ई-मेल बनाते हैं, इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस छिपाने के लिए वीपीएन का उपयोग करते हैं या विदेशी सर्वर के जरिए संदेश भेजते हैं। कई बार वे साइबर कैफे, सार्वजनिक वाई-फाई या चोरी किए गए मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी वास्तविक पहचान तक पहुंचना कठिन हो जाता है। हालांकि यह असंभव नहीं है। साइबर विशेषज्ञ डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करके अपराधी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब कोई धमकी भरा ई-मेल आता है तो साइबर टीम सबसे पहले उसका आईपी एड्रेस और सर्वर जानकारी निकालने का प्रयास करती है। ई-मेल हेडर से कई तकनीकी जानकारियां मिलती हैं। सोशल मीडिया संदेशों के मामले में संबंधित प्लेटफॉर्म से डेटा मांगा जाता है। मोबाइल नंबर, लोकेशन, लॉगिन समय और डिवाइस की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ती है। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज, इंटरनेट उपयोग रिकॉर्ड और बैंकिंग जानकारी भी मददगार साबित होती है। यदि अपराधी ने कहीं गलती की हो तो पुलिस उसके करीब पहुंच जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई बार अपराधी किशोर या युवा भी होते हैं जो मजाक या ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा करते हैं। उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि उनकी हरकत कितनी गंभीर है। एक फर्जी धमकी के कारण हजारों लोग डर जाते हैं, सरकारी संसाधन बर्बाद होते हैं और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में साइबर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। युवाओं को यह समझाना होगा कि ऑनलाइन अपराध भी उतना ही गंभीर है जितना वास्तविक दुनिया का अपराध।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम लोगों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। यदि किसी को संदिग्ध ई-मेल, संदेश या सोशल मीडिया पोस्ट मिले तो उसे तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए। बिना पुष्टि के अफवाह फैलाना गलत है। कई बार लोग डर के कारण सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे दहशत और बढ़ जाती है। किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ नहीं लगाना चाहिए और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थानों में नियमित मॉक ड्रिल होनी चाहिए। प्रवेश द्वारों पर आधुनिक स्कैनर और निगरानी कैमरे लगाए जाने चाहिए। साइबर सेल को अत्याधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध कराने होंगे। सोशल मीडिया कंपनियों और ई-मेल सेवा प्रदाताओं को भी जांच एजेंसियों के साथ तेजी से सहयोग करना चाहिए ताकि अपराधियों की पहचान जल्दी हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानूनी स्तर पर भी सख्ती आवश्यक है। फर्जी धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और त्वरित सजा से दूसरों को भी संदेश जाएगा कि ऐसी हरकतें मजाक नहीं बल्कि गंभीर अपराध हैं। सूचना प्रौद्योगिकी कानून और आपराधिक कानूनों के तहत ऐसे मामलों में जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह डिजिटल युग की नई चुनौती का संकेत हैं। तकनीक का गलत उपयोग समाज में भय और अस्थिरता पैदा कर सकता है। इसलिए सरकार, पुलिस, तकनीकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि जागरूकता, तकनीकी क्षमता और कानूनी सख्ती को साथ लेकर चला जाए तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर हेल्प डेस्क की तत्परता से 53 हजार रुपये वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही</strong>।थाना सुरियावां स्थित साइबर हेल्प डेस्क ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक पीड़िता के खाते में गए 53,000 रुपये वापस कराए। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में आंचल यादव (निवासी हरिकरनपुर, थाना दुर्गागंज) के खाते से गलत ट्रांजेक्शन से गई धनराशि को एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से ट्रेस कर वापस कराया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राशि वापस मिलने पर पीड़िता ने भदोही पुलिस का आभार व्यक्त किया। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से सतर्क</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177448/53-thousand-rupees-returned-due-to-promptness-of-cyber-help"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260427-wa00291.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही</strong>।थाना सुरियावां स्थित साइबर हेल्प डेस्क ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक पीड़िता के खाते में गए 53,000 रुपये वापस कराए। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में आंचल यादव (निवासी हरिकरनपुर, थाना दुर्गागंज) के खाते से गलत ट्रांजेक्शन से गई धनराशि को एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से ट्रेस कर वापस कराया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राशि वापस मिलने पर पीड़िता ने भदोही पुलिस का आभार व्यक्त किया। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से सतर्क रहें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 19:42:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर अपराध का बदलता चेहरा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने मानव जीवन को जितना सरल और सुविधाजनक बनाया है, उतना ही जटिल और जोखिमपूर्ण भी बना दिया है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, खरीदारी और संचार तक लगभग हर काम इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से हो रहा है। इस तेज बदलाव के बीच अपराधियों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। पहले जहां चोरी और धोखाधड़ी के लिए भौतिक उपस्थिति जरूरी होती थी, वहीं अब एक मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठा व्यक्ति किसी को भी ठग सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल ठगी के मामलों में तेजी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176799/changing-face-of-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने मानव जीवन को जितना सरल और सुविधाजनक बनाया है, उतना ही जटिल और जोखिमपूर्ण भी बना दिया है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, खरीदारी और संचार तक लगभग हर काम इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से हो रहा है। इस तेज बदलाव के बीच अपराधियों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। पहले जहां चोरी और धोखाधड़ी के लिए भौतिक उपस्थिति जरूरी होती थी, वहीं अब एक मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठा व्यक्ति किसी को भी ठग सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है और चिंता की बात यह है कि इनका शिकार केवल अनपढ़ या ग्रामीण लोग ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षित और समझदार लोग भी हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल ठगी के नए तरीकों में सबसे खतरनाक रूप से उभर कर सामने आया है तथाकथित डिजिटल अरेस्ट। यह एक ऐसा छल है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी का कर्मचारी या किसी सरकारी विभाग का प्रतिनिधि बताकर व्यक्ति को डराता है। उसे बताया जाता है कि उसके नाम पर कोई गंभीर अपराध दर्ज है जैसे धन शोधन, अवैध लेनदेन या किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता। इसके बाद वीडियो कॉल या ऑडियो कॉल के माध्यम से व्यक्ति को कई घंटों तक अपने नियंत्रण में रखा जाता है। उसे यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह जांच के दायरे में है और उसे कहीं जाने या किसी से बात करने की अनुमति नहीं है। इस दौरान उसे मानसिक दबाव में रखा जाता है और अंततः पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में साइबर अपराध के लगभग 15 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 20 लाख के आसपास पहुंच गई। इनमें से एक बड़ा हिस्सा वित्तीय ठगी से जुड़ा है। औसतन हर दिन हजारों लोग इस तरह के अपराधों का शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में एक ही व्यक्ति से 50000 से लेकर 5000000 रुपये तक की ठगी की गई है। यह आंकड़े केवल दर्ज मामलों के हैं, वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि बहुत से लोग शर्म या डर के कारण शिकायत ही नहीं करते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल अरेस्ट जैसे घोटाले इतने प्रभावी इसलिए होते हैं क्योंकि वे मानव मनोविज्ञान पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जब किसी व्यक्ति को अचानक यह बताया जाता है कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस गया है, तो उसका पहला भाव डर और घबराहट का होता है। अपराधी इसी डर का फायदा उठाते हैं। वे अपनी भाषा, पहनावा और संवाद शैली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति उन्हें वास्तविक अधिकारी समझने लगता है। कई बार वे नकली पहचान पत्र, कार्यालय का बैकग्राउंड और वर्दी का भी उपयोग करते हैं ताकि उनकी बात और अधिक विश्वसनीय लगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार की ठगी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें समय का दबाव बनाया जाता है। पीड़ित को सोचने या सलाह लेने का अवसर नहीं दिया जाता। उसे कहा जाता है कि यदि उसने तुरंत सहयोग नहीं किया तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा या उसके परिवार के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस मानसिक दबाव में व्यक्ति बिना सत्यापन किए ही पैसे भेज देता है। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक सजगता और धैर्य भी उतना ही आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा 1930 हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध है जहां तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है। विभिन्न राज्यों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं और डिजिटल जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद अपराधों की संख्या में कमी नहीं आ रही है, जिसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी और तकनीक का तेजी से बदलता स्वरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ठगी को रोकने के लिए केवल कानून और तकनीक पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक करना आवश्यक है। परिवारों में इस विषय पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए, खासकर बुजुर्गों और युवाओं को इसके बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी शुरुआत से ही सतर्क रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यक्तिगत स्तर पर कुछ सरल सावधानियां अपनाकर इस प्रकार की ठगी से बचा जा सकता है। सबसे पहले किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करता है तो उसकी पहचान की पुष्टि करें। किसी भी स्थिति में अपने बैंक खाते, पासवर्ड, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। यदि कोई आपसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है तो पहले अपने परिवार या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से सलाह लें। याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से पैसे नहीं मांगती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल ठगी का बढ़ता हुआ खतरा केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विश्वास को भी कमजोर करता है। जब लोग बार बार ऐसे अपराधों का शिकार होते हैं तो उनका विश्वास संस्थाओं और तकनीक दोनों से उठने लगता है। यह स्थिति विकास की गति को भी प्रभावित कर सकती है क्योंकि डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने में लोग हिचकिचाने लगते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस समस्या का समाधान केवल तकनीकी उपायों में नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी में निहित है। सरकार, संस्थाएं और आम नागरिक सभी को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा। जागरूकता, सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ही इस लड़ाई के सबसे प्रभावी हथियार हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो डिजिटल ठगी का यह जाल और अधिक व्यापक और खतरनाक हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह समझना जरूरी है कि डिजिटल युग में सुरक्षा केवल पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य है। जितना हम तकनीक का उपयोग करते हैं, उतना ही हमें उसके जोखिमों को समझना भी आवश्यक है। सावधानी और समझदारी के साथ ही हम इस अदृश्य खतरे से स्वयं को और अपने समाज को सुरक्षित रख सकते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 17:54:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मऊआइमा पुलिस की तत्परता से साइबर फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को 25 हजार रुपये मिले वापस।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मऊआइमा। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना मऊआइमा पुलिस टीम ने एक सराहनीय कार्य किया है। साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक व्यक्ति के खाते से कटे 25,000 रुपये को पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वापस करवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>  थाना मऊआइमा साइबर पुलिस टीम ने प्रभावी कार्रवाई की।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार फरोग महमूद अंसारी पुत्र मंजूर अहमद अंसारी निवासी मोहल्ला आजमपुर थाना मऊआइमा, कमिश्नरेट प्रयागराज के खाते से साइबर ठगों द्वारा 25,000 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई थी। इस संबंध में पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173075/due-to-the-promptness-of-mauaima-police-the-victim-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0159.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मऊआइमा। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना मऊआइमा पुलिस टीम ने एक सराहनीय कार्य किया है। साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक व्यक्ति के खाते से कटे 25,000 रुपये को पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वापस करवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> थाना मऊआइमा साइबर पुलिस टीम ने प्रभावी कार्रवाई की।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार फरोग महमूद अंसारी पुत्र मंजूर अहमद अंसारी निवासी मोहल्ला आजमपुर थाना मऊआइमा, कमिश्नरेट प्रयागराज के खाते से साइबर ठगों द्वारा 25,000 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई थी। इस संबंध में पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत प्राप्त होते ही थाना मऊआइमा की साइबर पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्यवाही करते हुए पीड़ित के खाते से कटी पूरी धनराशि 25,000 रुपये वापस करा दी। पैसा वापस मिलने पर आवेदक फरोग महमूद अंसारी ने थाना मऊआइमा पुलिस तथा प्रयागराज पुलिस का आभार व्यक्त किया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 23:21:54 +0530</pubDate>
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