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                <title>साइबर अपराध - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>साइबर अपराध RSS Feed</description>
                
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                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184876/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/rajeev.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:31:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर अपराध पर सख्त हुई सरकार, प्रदेश को साइबर सुरक्षा में नंबर-1 बनाने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184035/government-becomes-strict-on-cyber-crime-instructions-to-make-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-24-at-20.58.26.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करें तथा साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो साइबर अपराध मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता सामग्री को विभाग के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने सभी विभागों को इस संबंध में आवश्यक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की अधिसूचना शीघ्र जारी करने, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को जल्द क्रियाशील बनाने तथा राज्यव्यापी 'ऑपरेशन साइबर वज्र (CyVajra)' को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की स्थापना का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि एस4सी (S4C) के आठ में से छह घटक पहले ही संचालित हो चुके हैं, जबकि शेष दो पर कार्य तेजी से चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी जानकारी दी कि साइबर अपराध की त्वरित और स्थान-निरपेक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए विकसित किया जा रहा ई-जीरो एफआईआर तंत्र अंतिम चरण में है। शिकायत निवारण, धनराशि वापसी और समन्वय पोर्टलों के संचालन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि राज्यव्यापी आसूचना आधारित अभियान 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत प्रारंभिक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली है। वहीं, साइबर अपराध की जांच के लिए पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में साइट्रेन (CyTrain) प्लेटफॉर्म के उपयोग के मामले में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने प्रदेश में साइबर अपराध के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई जागरूकता सामग्री की भी सराहना की और निर्देश दिया कि इसे विभिन्न लक्षित समूहों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह, साइबर अपराध मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 21:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फर्जी डिग्रियां, सरकारी दस्तावेज तैयार करने वाले तीन साईबर कैफे संचालकों को पुलिस ने किया गिरफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना कल्याणपुर क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले तीन साईबर कैफे संचालकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से तमाम आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र,टीसी, पेनकार्ड, सरकारी मोहरें, विधायकों की मोहरें, मार्कशीट आदि सरकारी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। ये तुरंत ग्राहक को आईडी बनाकर दे देते थे और उसके बदले मोटी रकम वसूलते थे।</p>
<div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस एम कासिम आबिदी ने बताया कि कुछ समय से मुखबिर के द्वारा सूचना मिल रही थी कि कल्याणपुर क्षेत्र में कुछ साईबर कैफे हैं जो कूटरचित दस्तावेज तैयार करके बेचते हैं।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183551/police-arrested-three-cyber-caf%C3%A9-operators-who-prepared-fake-degrees"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002103612.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना कल्याणपुर क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले तीन साईबर कैफे संचालकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से तमाम आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र,टीसी, पेनकार्ड, सरकारी मोहरें, विधायकों की मोहरें, मार्कशीट आदि सरकारी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। ये तुरंत ग्राहक को आईडी बनाकर दे देते थे और उसके बदले मोटी रकम वसूलते थे।</p>
<div style="text-align:justify;">यह जानकारी देते हुए पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस एम कासिम आबिदी ने बताया कि कुछ समय से मुखबिर के द्वारा सूचना मिल रही थी कि कल्याणपुर क्षेत्र में कुछ साईबर कैफे हैं जो कूटरचित दस्तावेज तैयार करके बेचते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज पुलिस ने इन कैफ़े पर छापा मारा तो तमाम सरकारी व अन्य संस्थाओं के फर्जी दस्तावेज बरामद किए। पुलिस ने इन कैफ़े के संचालकों तेजस पाल, नितेश और अनुराग को गिरफ्तार किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इनके पास कुछ अन्य लोग आते थे जो इनसे फर्जी दस्तावेज तैयार कराते थे और उसके बदले इनको कुछ पैसा देते थे और वो लोग इन दस्तावेजों के बदले लोगों से मोटी रकम वसूलते थे, पुलिस तलाश कर रही है कि ये लोग कौन थे, उनकी जानकारी की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस एम कासिम आबिदी ने बताया कि ये कैफ़े संचालक तजाकिस्तान के एक नंबर से संचालित अनधिकृत पोर्टल के माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि करीब 3-4 साल से ये लोग यह काम कर रहे हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 18:49:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपराध नियंत्रण को लेकर डीआईजी ने तीनों जिलों के पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>बस्ती।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती परिक्षेत्र में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से पुलिस उपमहानिरीक्षक बस्ती परिक्षेत्र बस्ती श्री संजीव त्यागी ने शनिवार को परिक्षेत्रीय कार्यालय सभागार में बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर जनपदों के पुलिस अधीक्षक व अपर पुलिस अधीक्षक के साथ मासिक अपराध समीक्षा गोष्ठी की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने अपराधों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में डीआईजी ने लंबित विवेचनाओं और आंशिक विवेचनाओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर, वांछित, पुरस्कार घोषित अपराधियों, जिला</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182197/dig-gave-strict-instructions-to-police-officers-of-all-three"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260627-wa00571.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>बस्ती।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती परिक्षेत्र में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से पुलिस उपमहानिरीक्षक बस्ती परिक्षेत्र बस्ती श्री संजीव त्यागी ने शनिवार को परिक्षेत्रीय कार्यालय सभागार में बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर जनपदों के पुलिस अधीक्षक व अपर पुलिस अधीक्षक के साथ मासिक अपराध समीक्षा गोष्ठी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने अपराधों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में डीआईजी ने लंबित विवेचनाओं और आंशिक विवेचनाओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर, वांछित, पुरस्कार घोषित अपराधियों, जिला बदर एवं गैर जमानती वारंट (NBW) वाले अभियुक्तों की शत-प्रतिशत गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने चोरी और वाहन चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने, गो-तस्करी रोकने, रात्रिकालीन सघन चेकिंग बढ़ाने तथा गंभीर अपराध, महिला अपराध, एससी/एसटी एक्ट और पाक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीआईजी ने साइबर अपराधों की रोकथाम को लेकर अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने साइबर एक्शन प्लान के तहत कार्रवाई, मोबाइल एवं आईएमईआई नंबरों को अधिक से अधिक ब्लॉक कराने, सीसीटीएनएस, आईजीआरएस, एनसीआरबी, आईसीजेएस, सीईआईआर सहित अन्य पोर्टलों के नियमित उपयोग और फीडिंग कराने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समीक्षा बैठक में बीट सूचनाओं को प्रभावी बनाने, थाना प्रभारी और क्षेत्राधिकारी स्तर से नियमित निगरानी कराने तथा मुख्यमंत्री जनता दर्शन, पब्लिक ग्रीवांस रिव्यू पोर्टल एवं अन्य उच्चस्तरीय शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराने पर भी चर्चा हुई। डीआईजी ने महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मिशन शक्ति केंद्रों और परिवार परामर्श केंद्रों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। साथ ही महिला अपहृता और गुमशुदा लोगों की शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित करने को कहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्तीकरण, गुंडा एक्ट की कार्रवाई, ऑपरेशन गैंगस्टर, ऑपरेशन दहन सहित विभिन्न अभियानों की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने 45 दिन से अधिक लंबित अभियोगों का शीघ्र निस्तारण कराने के निर्देश दिए। विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए डीआईजी ने लंबित विभागीय पत्रावलियों, प्रारंभिक जांच, मृतक आश्रित सेवायोजन और चिकित्सा प्रतिपूर्ति से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कर्मचारियों के प्रशिक्षण को लेकर साइट्रेन और आईगॉट ऐप पर लंबित प्रशिक्षण जल्द पूरा कराने को कहा। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर उन्होंने ट्रैफिक एक्शन प्लान तैयार कर प्रभावी कार्रवाई करने और मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। बैठक में पुलिस अधीक्षक बस्ती डॉ. यशवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर डॉ. अभिषेक महाजन, पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर श्री संदीप कुमार मीना, अपर पुलिस अधीक्षकगण सहित परिक्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 23:17:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर ठगी के संगठित गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181429/organized-gang-of-cyber-fraud-busted-five-accused-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निकालने का काम कर रहे थे। इस संबंध में थाना सरिता विहार में एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज की गई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है जांच में इस गिरोह के तार मुंबई में दर्ज एक बड़े साइबर ठगी मामले से जुड़े पाए गए हैं। मुंबई के एक निजी कंपनी के साथ कथित सीईओ/व्हाट्सएप प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) धोखाधड़ी के जरिए करीब 10.40 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। यह रकम 3 जून से 15 जून 2026 के बीच 63 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से निकाली गई थी। इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच के दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रकरण के तहत की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूरे वित्तीय नेटवर्क में संदिग्ध लेनदेन की राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास 22 वंश 2 फैयाज आलम 22 अमित 28 और बलवीर कुमार 23 के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस कार्रवाई को थाना सरिता विहार के प्रभारी निरीक्षक युधवीर सिंह, उपनिरीक्षक वैभव सिंह, उपनिरीक्षक सतीश भाटी, बीसी नितेश, कांस्टेबल ओम प्रकाश और मनीष की टीम ने अंजाम दिया। अभियान का पर्यवेक्षण एसीपी अनिल शर्मा ने किया, जबकि पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-द्वितीय जसबीर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 21:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181198/interstate-cyber-gang-committing-fraud-in-the-name-of-digital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002002752.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह पिछले लगभग 03 वर्षों से सक्रिय था तथा देशभर में लगभग 2,500 लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है। ठगी की धनराशि के लेनदेन हेतु 450 से अधिक फर्जी एवं किराए के बैंक खातों का उपयोग किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियुक्तों के कब्जे से 05 मोबाइल फोन, 01 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 02 चेकबुक एवं 12 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। गिरोह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश में भी शिकायतें दर्ज हैं। गिरफ्तार अभियुक्त: अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार एवं कमल हैं। अभियुक्तों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 308(2), 318(4) एवं आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। उल्लेखनीय कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को ₹25,000 के नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्टिंग।। </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180992/objectionable-posting-against-aditi-yadav-on-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंच रही है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे कृत्य समाज में गलत संदेश देने के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा देते हैं। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए तथा उनके विरुद्ध साइबर अपराध और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में साइबर क्राइम प्रकोष्ठ को भी प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। समाजवादी अधिवक्ता सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी महिला के सम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है और कानून के दायरे में रहकर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता से साइबर ठगी के 3,800 रुपये पीड़ित को मिले वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong>  साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260609-wa0508.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong> साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने पर पता चला कि व्हाट्सएप अकाउंट हैक किया गया था और उनके साथ साइबर ठगी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने 12 मई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने पर थाना महराजगंज तराई की साइबर हेल्पडेस्क ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर आरोपी के खाते में पहुंची धनराशि को होल्ड करा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित बैंक को धनराशि वापस कराने के लिए एसओपी के अनुसार पत्राचार किया गया। बैंक द्वारा कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी 3,800 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रुपये वापस मिलने पर पीड़ित ने महराजगंज तराई पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई में साइबर हेल्पडेस्क के उपनिरीक्षक आदित्य कुमार, आरक्षी धीरज तिवारी तथा आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि वापस कराई जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर हेल्प डेस्क कोइरौना ने लौटाए 13 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179824/cyber-help-desk-koirauna-returned-rs-13-thousand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260521-wa0021.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179824/cyber-help-desk-koirauna-returned-rs-13-thousand</link>
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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 19:30:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर हेल्प डेस्क ने पीड़ित के खाते में वापस कराए 10 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना ज्ञानपुर ने साइबर ठगी के शिकार युवक के खाते में 10 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">महरभा निवासी सचिन सिंह से खुद को बैंक अधिकारी बताकर बाइक की बकाया ईएमआई जमा कराने के नाम पर साइबर ठगी की गई थी। पीड़ित की ऑनलाइन शिकायत पर साइबर हेल्प डेस्क ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित माध्यमों से समन्वय कर धनराशि वापस कराई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राशि वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस एवं साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने तथा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179554/cyber-help-desk-returned-rs-10000-to-the-victims-account"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260519-wa0019.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना ज्ञानपुर ने साइबर ठगी के शिकार युवक के खाते में 10 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">महरभा निवासी सचिन सिंह से खुद को बैंक अधिकारी बताकर बाइक की बकाया ईएमआई जमा कराने के नाम पर साइबर ठगी की गई थी। पीड़ित की ऑनलाइन शिकायत पर साइबर हेल्प डेस्क ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित माध्यमों से समन्वय कर धनराशि वापस कराई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राशि वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस एवं साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने तथा किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179554/cyber-help-desk-returned-rs-10000-to-the-victims-account</link>
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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 18:53:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां : डर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178738/fear-of-increasing-bomb-threats-in-rajasthan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/3vmjtsfo_jaipur-bomb-threat_625x300_09_december_25.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि समाज में बढ़ती असुरक्षा और डिजिटल अपराधों की गंभीर चेतावनी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा प्रभावित जयपुर रहा, जहां स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी परिसरों को उड़ाने की धमकियां दी गईं। कई बार पूरी इमारतों को खाली करवाना पड़ा, बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई, यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा और सुरक्षा एजेंसियों को घंटों जांच करनी पड़ी। बाद में अधिकांश धमकियां फर्जी साबित हुईं, लेकिन हर सूचना को गंभीरता से लेना प्रशासन की मजबूरी होती है क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।</div>
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<div style="text-align:justify;">आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं अपराधियों को भी नई ताकत दी है। पहले अपराधी फोन या पत्र के जरिए धमकी देते थे, लेकिन अब ई-मेल, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, वीपीएन और विदेशी सर्वर का उपयोग कर पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। कई बार अपराधी केवल अफवाह फैलाने या मजाक करने के उद्देश्य से भी ऐसे संदेश भेज देते हैं, लेकिन उनका यह मजाक हजारों लोगों को परेशानी में डाल देता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">स्कूलों को मिलने वाली धमकियां सबसे अधिक चिंताजनक हैं। जब किसी स्कूल में बम होने की सूचना मिलती है तो तुरंत बच्चों को बाहर निकाला जाता है, अभिभावकों में डर फैल जाता है और पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन जाता है। छोटे बच्चों के मन पर इसका गहरा मानसिक प्रभाव पड़ता है। कई बार बच्चे लंबे समय तक भय महसूस करते हैं। इसी तरह एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन को धमकी मिलने पर सुरक्षा जांच इतनी सख्त करनी पड़ती है कि यात्रियों की लंबी कतारें लग जाती हैं और उड़ानें प्रभावित हो जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि असली और फर्जी धमकी में अंतर कैसे किया जाए। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संदेश को हल्के में नहीं ले सकतीं। यदि सूचना को नजरअंदाज किया गया और घटना सच निकली तो भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए हर ई-मेल, कॉल या सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की जाती है। बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और साइबर विशेषज्ञ तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। इससे प्रशासनिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">राजस्थान सरकार द्वारा विशेष मॉनिटरिंग यूनिट का गठन किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से ऐसे संदेशों की निगरानी की जा रही है। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अन्य शहरों में बम निरोधक दस्ते सक्रिय रखे गए हैं। इसके अलावा ई-मेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखने के लिए तकनीकी टीमों को मजबूत किया जा रहा है। फिर भी चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि अपराधी भी नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर ऐसे संदेश भेजने वाले पकड़े क्यों नहीं जाते। इसका मुख्य कारण डिजिटल दुनिया की जटिलता है। कई अपराधी फर्जी नाम से ई-मेल बनाते हैं, इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस छिपाने के लिए वीपीएन का उपयोग करते हैं या विदेशी सर्वर के जरिए संदेश भेजते हैं। कई बार वे साइबर कैफे, सार्वजनिक वाई-फाई या चोरी किए गए मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी वास्तविक पहचान तक पहुंचना कठिन हो जाता है। हालांकि यह असंभव नहीं है। साइबर विशेषज्ञ डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करके अपराधी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब कोई धमकी भरा ई-मेल आता है तो साइबर टीम सबसे पहले उसका आईपी एड्रेस और सर्वर जानकारी निकालने का प्रयास करती है। ई-मेल हेडर से कई तकनीकी जानकारियां मिलती हैं। सोशल मीडिया संदेशों के मामले में संबंधित प्लेटफॉर्म से डेटा मांगा जाता है। मोबाइल नंबर, लोकेशन, लॉगिन समय और डिवाइस की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ती है। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज, इंटरनेट उपयोग रिकॉर्ड और बैंकिंग जानकारी भी मददगार साबित होती है। यदि अपराधी ने कहीं गलती की हो तो पुलिस उसके करीब पहुंच जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई बार अपराधी किशोर या युवा भी होते हैं जो मजाक या ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा करते हैं। उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि उनकी हरकत कितनी गंभीर है। एक फर्जी धमकी के कारण हजारों लोग डर जाते हैं, सरकारी संसाधन बर्बाद होते हैं और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में साइबर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। युवाओं को यह समझाना होगा कि ऑनलाइन अपराध भी उतना ही गंभीर है जितना वास्तविक दुनिया का अपराध।</div>
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<div style="text-align:justify;">आम लोगों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। यदि किसी को संदिग्ध ई-मेल, संदेश या सोशल मीडिया पोस्ट मिले तो उसे तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए। बिना पुष्टि के अफवाह फैलाना गलत है। कई बार लोग डर के कारण सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे दहशत और बढ़ जाती है। किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ नहीं लगाना चाहिए और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थानों में नियमित मॉक ड्रिल होनी चाहिए। प्रवेश द्वारों पर आधुनिक स्कैनर और निगरानी कैमरे लगाए जाने चाहिए। साइबर सेल को अत्याधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध कराने होंगे। सोशल मीडिया कंपनियों और ई-मेल सेवा प्रदाताओं को भी जांच एजेंसियों के साथ तेजी से सहयोग करना चाहिए ताकि अपराधियों की पहचान जल्दी हो सके।</div>
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<div style="text-align:justify;">कानूनी स्तर पर भी सख्ती आवश्यक है। फर्जी धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और त्वरित सजा से दूसरों को भी संदेश जाएगा कि ऐसी हरकतें मजाक नहीं बल्कि गंभीर अपराध हैं। सूचना प्रौद्योगिकी कानून और आपराधिक कानूनों के तहत ऐसे मामलों में जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझते।</div>
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<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह डिजिटल युग की नई चुनौती का संकेत हैं। तकनीक का गलत उपयोग समाज में भय और अस्थिरता पैदा कर सकता है। इसलिए सरकार, पुलिस, तकनीकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि जागरूकता, तकनीकी क्षमता और कानूनी सख्ती को साथ लेकर चला जाए तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:42 +0530</pubDate>
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