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                <title>Cyber Security - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Cyber Security RSS Feed</description>
                
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                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184876/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/rajeev.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:31:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन : आत्मनिर्भर युवा, विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला </title>
                                    <description><![CDATA[ युवा शक्ति का कौशल से स्वावलंबन की ओर बढ़ता कदम ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184560/uttar-pradesh-skill-development-mission-under-the-leadership-of-chief"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-19.15.33.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong> -आदर अदीब पावेल बन्धु</strong><br /><strong>           (जिला सूचना अधिकारी)</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">युवा केवल किसी राष्ट्र की जनसंख्या का एक वर्ग नहीं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य की सबसे अमूल्य पूंजी होते हैं। जब उनके हाथों में कौशल, मन में आत्मविश्वास और सामने अवसरों का विस्तृत आकाश होता है, तब विकास का नया इतिहास रचा जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने इसी विचार को आधार बनाकर कौशल विकास को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। आज उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन लाखों युवाओं के सपनों को साकार करने वाला ऐसा सशक्त सेतु बन चुका है, जो उन्हें आत्मनिर्भरता, सम्मानजनक आजीविका और राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लिए कौशल विकास केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का सबसे सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को अधिक प्रभावी, आधुनिक और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया गया है। आज मिशन लाखों युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ते हुए प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का गठन उत्तर प्रदेश कौशल विकास नीति-2013 के अंतर्गत व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अधीन किया गया। मिशन का उद्देश्य 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। मिशन के अंतर्गत राज्य स्किल डेवलपमेंट फंड (SSDF), दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रोजेक्ट प्रवीण जैसी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रवीण के माध्यम से विद्यालयों के विद्यार्थियों को नियमित पाठ्यक्रम के साथ निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे शिक्षा के साथ-साथ रोजगारपरक दक्षता भी विकसित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन ने अभूतपूर्व उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। मिशन की स्थापना से अब तक 18 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जबकि 7 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रदेश सरकार कौशल विकास को सीधे रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने में सफल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है। अब तक 1,194 बृहद रोजगार मेलों के माध्यम से 4,52,976 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इनमें 8 जनपदों में आयोजित 8 वृहद रोजगार मेलों के माध्यम से 75,575 युवाओं को रोजगार मिला। इसके अतिरिक्त विश्व युवा कौशल दिवस (15 जुलाई) के अवसर पर प्रदेश के 75 जनपदों में आयोजित रोजगार मेलों के माध्यम से 10,283 युवाओं का सेवायोजन किया गया। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रदेश सरकार ने कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया है। प्रशिक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए 'कौशल दर्पण', 'कौशल दिशा', 'कौशल साथी' तथा 'कौशल दोस्त' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन, प्रशिक्षण, निगरानी, मूल्यांकन तथा रोजगार संबंधी सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही प्रशिक्षण केंद्रों और प्रशिक्षणार्थियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग से पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया है। नई तकनीकों, डिजिटल स्किल, ग्रीन एनर्जी, स्वास्थ्य सेवाओं तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 82 नए प्राइवेट ट्रेनिंग पार्टनर (PTPs) को मिशन से संबद्ध किया गया है। इससे युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्य सरकार ने उद्योग और कौशल विकास के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया है। प्रदेश की 53 बड़ी औद्योगिक कंपनियों के साथ मिशन के समझौते किए गए हैं, जिससे प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। यह पहल 'स्किल टू एम्प्लॉयमेंट' मॉडल को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए मिशन ने प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी साझेदारी की है। उच्च तकनीकी प्रशिक्षण हेतु IIT कानपुर, MNNIT प्रयागराज, IIT BHU, NIESBUD तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी जैसे संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित किया गया है। वहीं सॉफ्ट स्किल, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता विकास के लिए 7 संस्थानों के साथ एमओयू किए गए हैं। इससे युवाओं को तकनीकी ज्ञान के साथ व्यक्तित्व विकास और उद्यमिता का प्रशिक्षण भी प्राप्त हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0 के माध्यम से 1,182 दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसी प्रकार निराश्रित महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को भी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीकों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने पर विशेष बल दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), ड्रोन टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, आतिथ्य, परिधान निर्माण और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है। इससे प्रदेश के युवा भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बन रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong> नवभारत के निर्माण की नई दिशा </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश ने कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता-2026 के लिए प्रदेश से 1,09,249 युवाओं का पंजीकरण हुआ, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि बताती है कि प्रदेश के युवाओं में तकनीकी दक्षता और नवाचार की क्षमता निरंतर बढ़ रही है। आगामी वर्षों के लिए भी प्रदेश सरकार ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2026-27 में 4 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 1 जुलाई 2026 तक 2 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देने का उद्देश्य निर्धारित किया गया है। साथ ही 1M1B जैसी संस्थाओं के सहयोग से विभिन्न तकनीकी एवं फ्यूचरिस्टिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा रहा है। अंत्योदय परिवारों, दिव्यांगजनों तथा वंचित वर्गों के युवाओं को विशेष प्राथमिकता देते हुए कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है। निजी आईटीआई एवं अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ साझेदारी भी लगातार बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने यह सिद्ध कर दिया है कि कौशल ही आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार है। लाखों युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर मिशन ने प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति प्रदान की है। आधुनिक तकनीक, उद्योगों के साथ साझेदारी, डिजिटल नवाचार और रोजगारपरक प्रशिक्षण की बदौलत उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी कौशल विकास राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि युवा शक्ति के उज्ज्वल भविष्य का उद्घोष है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह मिशन लाखों युवाओं के सपनों को नई दिशा, नई गति और नई पहचान प्रदान कर रहा है। कौशल से समृद्ध युवा, आत्मनिर्भर परिवार, सशक्त समाज और विकसित प्रदेश—इन्हीं चार स्तंभों पर विकसित उत्तर प्रदेश का भव्य भविष्य निर्मित हो रहा है। यह यात्रा केवल रोजगार प्राप्त करने की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान, स्वाभिमान और समृद्धि की यात्रा है।</p>
<p style="text-align:justify;">          <br />          </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 22:58:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184373/anti-paper-leak-bill-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द करनी पड़ीं। इससे न केवल अभ्यर्थियों का समय और धन बर्बाद हुआ, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक विधेयक लाया, जिसे संसद की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है। पेपर लीक क्यों बना राष्ट्रीय चिंता का विषय?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />भारत में हर वर्ष करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर हमला है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, खरीदने, बेचने या प्रसारित करने को गंभीर अपराध माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />संगठित गिरोहों और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की कारावास और भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है।इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करने वालों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की गहन जांच के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। युवाओं को क्या मिलेगा लाभ? यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।<br />परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा। युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा। क्या केवल कानून बनाना पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके साथ-साथ कई अन्य सुधार भी आवश्यक हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए।</p>
<blockquote class="format2">
<p style="text-align:justify;"><br />डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जाए। परीक्षा केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से हो। परीक्षा कर्मचारियों का उचित सत्यापन किया जाए।<br />समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए। यदि कानून का क्रियान्वयन कमजोर रहा, तो कठोर दंड का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्यों की भूमिका अधिकांश भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकारें आयोजित करती हैं। इसलिए राज्यों को भी अपनी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस कानून का पूरा लाभ मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कानून का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।<br />एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संदेश देता है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार, परीक्षा एजेंसियां, जांच संस्थाएं और राज्य प्रशासन मिलकर इस कानून को ईमानदारी से लागू करें, तो लाखों युवाओं का विश्वास बहाल हो सकता है और प्रतियोगी परीक्षाएं वास्तव में निष्पक्ष एवं पारदर्शी बन सकती हैं। अंततः किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्ष चयन प्रणाली होती है, और उसे सुरक्षित रखना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर अपराध पर सख्त हुई सरकार, प्रदेश को साइबर सुरक्षा में नंबर-1 बनाने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184035/government-becomes-strict-on-cyber-crime-instructions-to-make-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-24-at-20.58.26.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करें तथा साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो साइबर अपराध मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता सामग्री को विभाग के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने सभी विभागों को इस संबंध में आवश्यक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की अधिसूचना शीघ्र जारी करने, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को जल्द क्रियाशील बनाने तथा राज्यव्यापी 'ऑपरेशन साइबर वज्र (CyVajra)' को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की स्थापना का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि एस4सी (S4C) के आठ में से छह घटक पहले ही संचालित हो चुके हैं, जबकि शेष दो पर कार्य तेजी से चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी जानकारी दी कि साइबर अपराध की त्वरित और स्थान-निरपेक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए विकसित किया जा रहा ई-जीरो एफआईआर तंत्र अंतिम चरण में है। शिकायत निवारण, धनराशि वापसी और समन्वय पोर्टलों के संचालन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि राज्यव्यापी आसूचना आधारित अभियान 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत प्रारंभिक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली है। वहीं, साइबर अपराध की जांच के लिए पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में साइट्रेन (CyTrain) प्लेटफॉर्म के उपयोग के मामले में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने प्रदेश में साइबर अपराध के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई जागरूकता सामग्री की भी सराहना की और निर्देश दिया कि इसे विभिन्न लक्षित समूहों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह, साइबर अपराध मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 21:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस ने साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया जागरूक*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)। </strong>साइबर जागरूकता अभियान  के तहत तरघौना गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने तरघौना गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182469/6a4527e1c7508"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260627-wa00051.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)। </strong>साइबर जागरूकता अभियान  के तहत तरघौना गांव में लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम ने तरघौना गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम के लिए शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:19:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस ने साइबर ठगी के शिकार युवक को दिलाए 65 हजार रुपये वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</div>
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<div><strong>बलरामपुर। </strong>थाना महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई से साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति को बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा ठगे गए 65 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है।</div>
<div>जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम जयनगरा निवासी फिरोज खान का मोबाइल 14 मई 2026 को हैक हो गया था, जिसके बाद उनके बैंक खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div>शिकायत प्राप्त होते ही साइबर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181507/maharajganj-terai-police-returned-65-thousand-rupees-to-a-youth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0621.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</div>
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<div><strong>बलरामपुर। </strong>थाना महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता और प्रभावी कार्रवाई से साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति को बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा ठगे गए 65 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है।</div>
<div>जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के ग्राम जयनगरा निवासी फिरोज खान का मोबाइल 14 मई 2026 को हैक हो गया था, जिसके बाद उनके बैंक खाते से 65 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।</div>
<div>शिकायत प्राप्त होते ही साइबर हेल्पडेस्क थाना महराजगंज तराई सक्रिय हो गई। उपनिरीक्षक आदित्य कुमार यादव और आरक्षी धीरज तिवारी ने त्वरित तकनीकी जांच करते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया। पुलिस की पहल पर ठगी गई धनराशि को आरोपी के खाते में तत्काल होल्ड कराया गया।</div>
<div>इसके बाद न्यायालय से रिलीजिंग आदेश प्राप्त कर बैंक के नोडल अधिकारी को भेजा गया। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 65 हजार रुपये की पूरी धनराशि सफलतापूर्वक पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई।</div>
<div>धनराशि वापस मिलने पर फिरोज खान ने खुशी जताते हुए थाना महराजगंज तराई पुलिस का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण उन्हें उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकी।</div>
<div>इस सराहनीय कार्रवाई में उपनिरीक्षक आदित्य कुमार यादव, आरक्षी धीरज तिवारी, आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा तथा महिला आरक्षी पूजा सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:33:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्टिंग।। </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180992/objectionable-posting-against-aditi-yadav-on-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव सुनील कुमार सरोज (एडवोकेट) के नेतृत्व में बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रयागराज को सौंपकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणियों और फोटो प्रसारण के मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग कर अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंच रही है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे कृत्य समाज में गलत संदेश देने के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न को बढ़ावा देते हैं। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए तथा उनके विरुद्ध साइबर अपराध और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में साइबर क्राइम प्रकोष्ठ को भी प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। समाजवादी अधिवक्ता सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी महिला के सम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है और कानून के दायरे में रहकर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस: मानव स्वतंत्रता की आखिरी परीक्षा का नाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2030 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यता</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भयावह</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आश्चर्यजनक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मोड़</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहुंचने</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाली</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दौर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब मस्तिष्क की अंतिम सीमाएँ भी टूट जाएँगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रेन-कंप्यूटर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इंटरफेस</span>  (<span lang="hi" xml:lang="hi">बीसीआई</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">अब</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दूर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कल्पना</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूरालिंक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चिप्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उतर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चुके</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिग्नल</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पढ़े</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहे</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और विचार सीधे क्रियाओं में बदल रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पैरालाइज्ड</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मात्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सोचकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर्सर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिला</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोबोटिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हाथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चला</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कल</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समाज</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नींव</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिला</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देगी।</span>  1.4 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आबादी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाला</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180744/brain-computer-interface-is-the-last-test-of-human-freedom"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/gettyimages-2255262571.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2030 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भयावह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आश्चर्यजनक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मोड़</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहुंचने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाली</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दौर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब मस्तिष्क की अंतिम सीमाएँ भी टूट जाएँगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रेन-कंप्यूटर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इंटरफेस</span> (<span lang="hi" xml:lang="hi">बीसीआई</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">अब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दूर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कल्पना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यूरालिंक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चिप्स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उतर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चुके</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिग्नल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पढ़े</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और विचार सीधे क्रियाओं में बदल रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पैरालाइज्ड</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मात्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सोचकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर्सर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोबोटिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हाथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समाज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नींव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देगी।</span> 1.4 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आबादी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्ति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सपने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अलग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्रांति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ज्यादा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">होने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विचारों की गोपनीयता का अंतिम किला भी ढहने के कगार पर है और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अभी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खतरे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीरता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ले</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीसीआई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जगत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वरदान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">साबित हो रहा है। लॉक-इन सिंड्रोम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एएलएस (एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) और गंभीर विकलांगता से जूझ रहे मरीजों को नई जिंदगी मिल रही है। अब केवल सोचकर बोलना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लिखना और चलना संभव हो गया है। लेकिन इसकी असली शक्ति संवर्धन में छिपी है। स्वस्थ व्यक्ति बेहतर स्मृति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असीमित एकाग्रता और सीधे मस्तिष्क से ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हासिल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कल्पना कीजिए—संपन्न वर्ग के बच्चे बीसीआई-सक्षम मस्तिष्क के साथ स्कूल जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गरीब बच्चा पारंपरिक शिक्षा </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">साथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">करेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहले</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ही</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">असमानता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">झेल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खाई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चिरस्थायी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> संवर्धित मस्तिष्क वाले लोग नई नौकरियों पर एकाधिकार कर लेंगे और बाकी पीढ़ियाँ </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछड़ती</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चली</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जाएगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि शुरुआती दशकों में यह मुख्य रूप से चिकित्सकीय उपयोग तक सीमित रह सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे खतरनाक हमला तो विचारों की निजता पर होगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बीसीआई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क की विद्युतीय तरंगों को पढ़कर न केवल इरादे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भावनाएं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि छिपे हुए भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इच्छाएँ और विरोध</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> भी उजागर कर सकता है। </span>2030 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक काफी परिपक्व और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने लगा होगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नौकरी के इंटरव्यू में बॉस सीधे मस्तिष्क से आपके फोकस और ईमानदारी की जाँच कर सकेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बीमा कंपनियाँ छिपे रोगों का अनुमान लगा लेंगी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। सरकार या राजनीतिक दल चुनावी सोच तक पहुंच जाएंगे। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैकिंग का खतरा और भयावह होगा—</span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई आपका पूरा व्यक्तित्व चुरा सकता है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाई-डायरेक्शनल बीसीआई केवल पढ़ता ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मस्तिष्क में सिग्नल भी भेज सकता है। हालांकि </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बाई-डायरेक्शनल बीसीआई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अभी मुख्यतः</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रीसर्च स्टेज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भावी चुनौतियों का संकेत देता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिकता और कानून की दुनिया में यह तकनीक बड़ा भूचाल ला रही है। जब मस्तिष्क </span>24 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे रिकॉर्ड हो रहा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब सहमति का अर्थ क्या रह जाएगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक रूप से कमजोर लोगों या कैदियों की सोच पर अधिकार किसका होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी कारण न्यूरो-राइट्स की मांग दुनिया भर में तेज हो रही है—</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> विचारों का मौलिक अधिकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक गोपनीयता का संरक्षण।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीन राज्य-नियंत्रित बीसीआई में तेजी से आगे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पश्चिम अभी गोपनीयता पर बहस में उलझा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुसार रास्ता चुनना होगा। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा डेटा प्रोटेक्शन कानून अभी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रारंभिक अवस्था में है। न्यूरल डेटा को अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखकर </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सख्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> कानून बनाना आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरना विदेशी कंपनियाँ भारतीय मस्तिष्कों का खुला शोषण कर सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत वर्तमान में इस वैश्विक दौड़ में काफी पीछे है। कुछ </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आईआईटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और स्टार्टअप प्रयास कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई स्पष्ट नीति या बड़ा मिशन नहीं दिखता।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> जबकि अवसर अपार हैं। सस्ते नॉन-इनवेसिव </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बीसीआई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से ग्रामीण शिक्षा </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में क्रांति लाई जा सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकलांगों को मुख्यधारा में लाया जा सकता है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और मेडिकल टूरिज्म को नई गति मिल सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन स्वदेशी तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत साइबर सुरक्षा और </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ठोस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिक ढांचे के बिना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हम सिर्फ उपभोक्ता बनकर रह जाएंगे। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्य इस क्षेत्र में सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम उन्हें सही दिशा और स्पष्ट रणनीति दें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस तकनीक के साथ सुरक्षा और नैतिक चुनौतियाँ भी महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय तक मस्तिष्क प्रत्यारोपण से संक्रमण और संकेत कमजोर होने की समस्या बनी रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर शोध आवश्यक है। बाई-डायरेक्शनल बीसीआई अभी शोध चरण में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भविष्य में मस्तिष्क नियंत्रण का जोखिम दिखाता है। इसी कारण न्यूरो-अधिकारों की मांग बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें न्यूरल डेटा को संवेदनशील मानकर कानूनी सुरक्षा की बात की जा रही है। भारत में नॉन-इनवेसिव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बीसीआई से ग्रामीण विद्यालयों में ध्यान निगरानी और व्यक्तिगत शिक्षण संभव हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शिक्षा असमानता घट सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आखिरकार सवाल यह है कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हम बीसीआई को मानवता की सेवा में लगाएंगे या </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसे नई गुलामी का साधन बनने देंगे</span>? 2030 <span lang="hi" xml:lang="hi">का भारत यदि तैयार नहीं हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी आने वाली </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पीढ़ियाँ ‘सोचने की स्वतंत्रता’ पूरी तरह खो देंगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसद में तुरंत गंभीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापक और निर्णायक बहस हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय बीसीआई मिशन की औपचारिक शुरुआत हो और देशव्यापी जनजागरण अभियान को युद्धस्तर पर चलाया जाए। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमें न सिर्फ तकनीक अपनानी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे भारतीय नैतिकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय संप्रभुता के सुदृढ़ व संतुलित ढाँचे में ढालना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि यह मानवता के हित में एक साधन बने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि नियंत्रण और शोषण का माध्यम।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव सभ्यता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ हर निर्णय भविष्य की दिशा तय करेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय अत्यंत सीमित है। आज हम जो नीतियां बनाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही कल हमारे विचारों की रक्षा करेंगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम सतर्क और सशक्त रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बीसीआई भारत को विश्वगुरु बनाने में सहायक बन सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्यथा यह नई डिजिटल गुलामी का माध्यम बन जाएगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हमने अपनी अंतिम स्वतंत्रता—विचारों की स्वतंत्रता—ही खो दी। अब निर्णय की घड़ी आ चुकी है। या तो हम इस परिवर्तन को दिशा देंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या यह हमें अपने नियंत्रण में ले लेगा। जागो भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अब सोचने का अवसर भी हाथ से फिसलता जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180744/brain-computer-interface-is-the-last-test-of-human-freedom</link>
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:37:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डिजिटल साक्षरता एवं साइबर सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में 'मिशन शक्ति' के अंतर्गत डिजिटल साक्षरता एवं साइबर सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन बुधवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय  में शासन के निर्देशानुसार 'मिशन शक्ति' विशेष अभियान फेज-5 के अंतर्गत 'डिजिटल साक्षरता एवं साइबर सुरक्षा' विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं विज्ञान संकाय की डीन प्रोफेसर प्रकृति राय  ने छात्र-छात्राओं  को वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा की अनिवार्यता पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को डिजिटल जगत में सतर्क और जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ० आशीष श्रीवास्तव असिस्टेंट प्रोफेसर,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177001/organization-of-digital-literacy-and-cyber-security-workshop"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1776866325809.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में 'मिशन शक्ति' के अंतर्गत डिजिटल साक्षरता एवं साइबर सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन बुधवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय  में शासन के निर्देशानुसार 'मिशन शक्ति' विशेष अभियान फेज-5 के अंतर्गत 'डिजिटल साक्षरता एवं साइबर सुरक्षा' विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं विज्ञान संकाय की डीन प्रोफेसर प्रकृति राय  ने छात्र-छात्राओं  को वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा की अनिवार्यता पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को डिजिटल जगत में सतर्क और जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ० आशीष श्रीवास्तव असिस्टेंट प्रोफेसर, जन्तु विज्ञान विभाग ने छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं और इससे बचाव के व्यावहारिक तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ० दीपक जायसवाल के स्वागत उद्बोधन से हुआ, कार्यक्रम का कुशल प्रबंधन डॉ० किरन गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ० अमरजीत यादव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन  प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ० सुनीता त्रिपाठी, संयोजक डॉ० रेनू त्रिपाठी व डॉ० रक्षा सहित डॉ० विनीता रावत, डॉ० अंकिता श्रीवास्तव, डॉ० दीप्ति गिरी, डॉ० जय सिंह, डॉ० हाफिज एवं अन्य शिक्षक व विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज में फर्जी शिक्षा बोर्ड का भंडाफोड़, मुख्य संचालक गिरफ्तार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">। साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज की टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था संचालित कर फर्जी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र व अंकपत्र जारी करने वाले मुख्य संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था तथा पुलिस उपायुक्त गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देशन में और अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साइबर क्राइम</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173071/fake-education-board-busted-in-prayagraj-chief-director-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0255.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">। साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज की टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था संचालित कर फर्जी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र व अंकपत्र जारी करने वाले मुख्य संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था तथा पुलिस उपायुक्त गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देशन में और अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साइबर क्राइम थाना में दर्ज मुकदमा संख्या 38/2024 धारा 318(4), 319(2), 338, 336(3), 340(2), 111(2)(b) भारतीय न्याय संहिता तथा 66, 66(D), 74 आईटी एक्ट के तहत वांछित अभियुक्त राजमन गोंड पुत्र कैलाश नाथ गोंड निवासी ग्राम रवनिया थाना बरदह जनपद आजमगढ़ (हाल पता: क्रिस्टल अपार्टमेंट, A विंग फ्लैट नं-104, थाना चिनहट, लखनऊ) को गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त की उम्र करीब 37 वर्ष बताई गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा अन्य लोगों के सहयोग से उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था चलाई जा रही थी। यह लोग <a href="http://www.upsosb.ac.in/">www.upsosb.ac.in</a>⁠� और <a href="http://www.upsosb.org.in/">www.upsosb.org.in</a>⁠� सहित अन्य वेबसाइटों के माध्यम से फर्जी अंकपत्र और हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र जारी कर रहे थे। इन वेबसाइटों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की तस्वीरों का भी अवैध रूप से उपयोग किया गया था ताकि लोगों को संस्था असली लगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह व्यक्तिगत लाभ के लिए इस फर्जी संस्था का संचालन कर रहा था और वेबसाइट के जरिए लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराकर उनसे धन उगाही करता था। इस प्रकार वह कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक एप्पल आईफोन, एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन, तीन सिम कार्ड और 1500 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह, उपनिरीक्षक दीपक कुमार भाटी, कांस्टेबल अतुल कुमार त्रिवेदी, कांस्टेबल रूप सिंह, कांस्टेबल विवेक सिंह यादव तथा सर्विलांस सेल के कांस्टेबल प्रवीण कुमार मिश्रा शामिल रहे।।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"><div class="aQH"><div class="aZK" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 23:13:24 +0530</pubDate>
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