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                <title>High Court Order - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>High Court Order RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भी ब्लॉक-8 पार्क पर कार्रवाई नहीं, शासन पहुंची शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181568/government-did-not-take-action-on-block-8-park-even-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002015129.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन स्पेस के रूप में दर्ज भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे और निर्माण कार्य होते रहे, लेकिन संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय प्रकरणों का निस्तारण कागजों तक सीमित रखते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में ब्लॉक-8 स्थित पार्क में हुए निर्माण कार्यों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि जिस भूमि को पार्क एवं खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखा गया हो, वहां निर्माण और अतिक्रमण किस प्रकार होने दिया गया। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्कों और खुले स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए तथा किए गए अतिक्रमणों को हटाकर उन्हें उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकाश वीर आर्य का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति 29 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त कराए जाने के बावजूद अब तक पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने अथवा उसके मूल स्वरूप की बहाली के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत पार्क क्षेत्र में नई गतिविधियों और कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकरण का एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब केस्को को लिखित शिकायत और न्यायालयीय आदेशों की जानकारी दिए जाने के बावजूद पार्क में स्थित विवादित धार्मिक संरचना पर नया विद्युत संयोजन स्थापित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सार्वजनिक पार्क की विवादित भूमि पर स्थित संरचनाओं को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने से अवैध कब्जों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलता है तथा भविष्य में ऐसे कब्जों को स्थायित्व प्रदान करने का आधार तैयार होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र में पार्क में अवैध रूप से निर्मित कंक्रीट ढांचों एवं इंटरलॉकिंग को हटाकर पूरे क्षेत्र को पुनः पार्क के रूप में विकसित करने, नए कब्जों एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने, विद्युत संयोजन प्रकरण की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों एवं अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। नगर विकास मंत्री कार्यालय द्वारा मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भेजे जाने के बाद अब क्षेत्रीय नागरिकों की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेशों और शासन स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बाद भी पार्क को उसका मूल स्वरूप नहीं मिल पाता, तो यह सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वकील अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने के लिए PIL याचिकाकर्ता नहीं बन सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि कोई भी वकील, जिसके पास उसके क्लाइंट्स अपनी शिकायतों के निवारण के लिए आते हैं, उसे खुद याचिकाकर्ता बनकर अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने वाली जनहित याचिका (PIL) दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि ऐसा आचरण पेशेवर कदाचार माना जा सकता है, चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने एक वकील द्वारा दायर की गई PIL याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस याचिका में वकील ने प्रतिवादियों को यह निर्देश देने की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176405/lawyer-cannot-become-pil-petitioner-to-further-interests-of-his"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/allahabad-high-court_1623565927.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि कोई भी वकील, जिसके पास उसके क्लाइंट्स अपनी शिकायतों के निवारण के लिए आते हैं, उसे खुद याचिकाकर्ता बनकर अपने क्लाइंट्स के हितों को आगे बढ़ाने वाली जनहित याचिका (PIL) दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि ऐसा आचरण पेशेवर कदाचार माना जा सकता है, चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने एक वकील द्वारा दायर की गई PIL याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस याचिका में वकील ने प्रतिवादियों को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वे पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के आधार पर उद्योगों को प्राकृतिक गैस कनेक्शन उपलब्ध कराएं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में अपनी पहचान और साख बताते हुए याचिकाकर्ता ने अन्य बातों के साथ-साथ यह भी कहा था कि वह जिला फिरोजाबाद में वकालत करने वाला वकील है, कुछ उद्योगों का कानूनी सलाहकार है। साथ ही वह औद्योगिक प्राधिकरणों के समक्ष उद्योगों से जुड़े मामलों को देखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अतः, यह देखते हुए कि ऐसा आचरण पेशेवर कदाचार माना जा सकता है, खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को भविष्य में इस तरह के किसी भी प्रयास में शामिल न होने की चेतावनी देते हुए, PIL याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 20:57:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>“किशोर संबंधों में अक्सर लड़कों को भुगतने पड़ते हैं परिणाम”।</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक युवक की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया, जिसे निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 366 तथा पाक्सो एक्ट, 2012 की धारा 5(l) सहपठित धारा 6 के तहत एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी ठहराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस एन माला ने कहा कि यह मामला दो किशोरों के बीच सहमति से बने संबंध का प्रतीत होता है, जो अंततः माता-पिता के विरोध के कारण विवाद में बदल गया। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अक्सर परिणामों का सामना केवल लड़कों को करना पड़ता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173059/%E2%80%9Cboys-often-suffer-the-consequences-in-teen-relationships%E2%80%9D"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/627183-750x450408468-justice-gr-swaminathan-and-madurai-bench2.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक युवक की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया, जिसे निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 366 तथा पाक्सो एक्ट, 2012 की धारा 5(l) सहपठित धारा 6 के तहत एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी ठहराया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस एन माला ने कहा कि यह मामला दो किशोरों के बीच सहमति से बने संबंध का प्रतीत होता है, जो अंततः माता-पिता के विरोध के कारण विवाद में बदल गया। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अक्सर परिणामों का सामना केवल लड़कों को करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, “यह एक सामान्य मामला है जिसमें किशोरों के बीच सहमति से बने संबंध का अंत माता-पिता के मतभेद के कारण हुआ। ऐसे मामलों में अक्सर लड़की पर परिवार का दबाव होता है और बाद में उसकी शादी कहीं और करा दी जाती है, जिसके बाद लड़के के खिलाफ पाक्सो  के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है, जिससे उसे लंबी अवधि तक जेल में रहना पड़ता है।”</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि यदि पाक्सो  अधिनियम की धारा 43 के तहत कानून के प्रावधानों और उसकी कठोरता के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाई जाए तो ऐसे मामलों में कमी लाई जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि इस कानून के कठोर प्रावधानों की जानकारी के अभाव में इसका दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी संदर्भ में अदालत ने तमिलनाडु के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वे पाक्सो अधिनियम की धारा 43 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं और आम जनता, बच्चों तथा अभिभावकों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि सरकारी और निजी स्कूलों तथा कॉलेजों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि कानून और उसके परिणामों के बारे में जानकारी दी जा सके। यह मामला उस अपील से संबंधित था जिसमें आरोपी ने स्पेशल कोर्ट नागरकोइल के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे दोषी ठहराया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अभियोजन के अनुसार, घटना के समय लड़की की उम्र 16 वर्ष थी। आरोपी, जो लड़की के भाई का मित्र था, उससे परिचित हुआ और बाद में उससे प्रेम का इज़हार करते हुए विवाह की इच्छा जताई। लड़की ने बताया कि उसके माता-पिता उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी कराना चाहते हैं, जिसके बाद आरोपी उसे घर से ले गया और अपने रिश्तेदार के घर में उससे विवाह कर लिया। बाद में जिला बाल संरक्षण अधिकारी को एक गुमनाम कॉल मिलने पर दोनों को हिरासत में लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध था और लड़की ने स्वेच्छा से उसके साथ जाने का निर्णय लिया था। उसने यह भी कहा कि लड़की के शुरुआती बयानों में उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं था और निचली अदालत ने उसके विरोधाभासी बयान पर भरोसा करके गलती की।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने पाया कि लड़की की उम्र साबित करने के लिए अभियोजन ने जन्म प्रमाणपत्र और ट्रांसफर सर्टिफिकेट की केवल फोटोकॉपी पेश की थी, जबकि उनके मूल दस्तावेज उपलब्ध थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:50:55 +0530</pubDate>
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