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                <title>Nation Building - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Nation Building RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>15 यूपी बटालियन एनसीसी के 303 कैडेट्स ने 'बी' प्रमाणपत्र परीक्षा  उत्तीर्ण की।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी के 303 कैडेट्स ने प्रतिष्ठित एनसीसी 'बी' प्रमाणपत्र परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बटालियन से संबद्ध विभिन्न शिक्षण संस्थानों के इन कैडेट्स ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान उत्कृष्ट समर्पण, अनुशासन और परिश्रम का परिचय दिया। परीक्षा में ड्रिल, हथियार प्रशिक्षण, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता तथा सैन्य जागरूकता सहित विभिन्न विषयों का मूल्यांकन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर 15 यूपी बटालियन एनसीसी की कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत, ने सभी सफल कैडेट्स को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181373/303-cadets-of-15-up-battalion-ncc-passed-b-certificate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0157.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी के 303 कैडेट्स ने प्रतिष्ठित एनसीसी 'बी' प्रमाणपत्र परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बटालियन से संबद्ध विभिन्न शिक्षण संस्थानों के इन कैडेट्स ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान उत्कृष्ट समर्पण, अनुशासन और परिश्रम का परिचय दिया। परीक्षा में ड्रिल, हथियार प्रशिक्षण, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता तथा सैन्य जागरूकता सहित विभिन्न विषयों का मूल्यांकन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर 15 यूपी बटालियन एनसीसी की कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत, ने सभी सफल कैडेट्स को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर्स (ए.एन.ओ.), स्थायी प्रशिक्षण स्टाफ (पी. आई. स्टाफ.), केयरटेकर ऑफिसर्स तथा संबंधित शिक्षण संस्थानों के योगदान की भी सराहना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने उद्बोधन में कर्नल ऋतु श्रीवास्तव रावत ने कहा,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">"यह उपलब्धि हमारे कैडेट्स के अनुशासन, समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रमाण है। 'बी' प्रमाणपत्र उनके व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्र के भावी नेतृत्वकर्ता बनने के लिए तैयार करता है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह सफलता बटालियन की राष्ट्र निर्माण के लिए अनुशासित, जिम्मेदार एवं देशभक्त युवाओं के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 20:58:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महती भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180815/important-role-of-rashtriya-swayamsevak-sangh-in-indias-development-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/rss-shatabdi-varsh-jan-sampark-abhiyaan-history.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत आज दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। जब देशवासी अपने देश की तरक्की की बातें सुनते हैं तो बेशक उन्हें बड़ी खुशी और गर्व होता है। भारत की इस विकास यात्रा में केंद्र व राज्यों की सरकारों के साथ-साथ देश के नागरिकों का भी अपना अथाह योगदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी तो आज हम दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहे हैं। भारत की विकास यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महती रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नकारा नहीं जा सकता है। बेशक कुछ संघ-विरोधी विचारधारा वाले लोगों को देश की विकास यात्रा में संघ का योगदान अचरज भरा भी लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को यह देश कभी भुला नहीं पाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस वक्त को याद कर कल्पना करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ तथाकथित सत्ता-स्वार्थी राजनेताओं की हुक्मरान बनने की चाहत के चलते जिस देश की आजादी धर्म के नाम पर की गई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ कितना खून-खराबा अपनों का अपनों के ही हाथों हुआ होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के उदय के साथ ही लाहौर से लेकर कराची तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी-पश्चिमी सीमाओं तक बसने वाले हिंदुओं के कत्लेआम की जो दास्तां देश ने देखी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी कल्पना मात्र से आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी से पहले भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखंड भारत की कल्पना को साकार करने की अलख जगाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहा था। कई मौकों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जन्मदाता और तत्कालीन प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ ने भी देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सभी बड़े तत्कालीन नेताओं से अखंड भारत बनाए रखने की लड़ाई लड़ने की बात कही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संघ विरोधी मानसिकता वाले कुछ लोगों ने हर बार संघ की बातों को नजरअंदाज करते हुए मुस्लिम लीग के जिन्ना की जिद के आगे नतमस्तक होकर आखिरकार अखंड भारत को धर्म के नाम पर टुकड़ों में बांट दिया था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्ना की मुस्लिम लीग के समर्थक गुंडों और पाकिस्तानी फौजी सिपाहियों ने पाकिस्तान के हर हिस्से में रह रहे हिंदुओं को वहाँ से भागने के लिए उन पर रक्तरंजित अत्याचार ही नहीं किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हिंदू बेटियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुओं और माताओं की अस्मिता को भी सरेआम लूटकर तार-तार किया था। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं की लाशों के ढेर इस बात के सबूत थे कि हिंदुओं के प्रति जिन्ना और उसके गुंडों ने सत्ता की लालच में लोगों के बीच कितना जहर भरा था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के उस रक्तरंजित दौर में पाकिस्तान में सबसे पहले हिंदू माँ-बहनों और बेटियों की अस्मिता को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ही आगे आए और जिन्ना के गुंडों तथा उसके सिपाहियों से अपनी जान की बाजी लगाकर जितना हो सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतने हिंदुओं को बचाने का भरसक प्रयास भी किया था। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विभाजन की त्रासदी से अपनी ही जमीन से बेदखल किए गए हिंदुओं की मदद हेतु जगह-जगह राहत शिविर खोलकर पाकिस्तान से बेदखल और प्रताड़ित किए गए हिंदुओं तथा उनके परिजनों को न केवल सुरक्षा दी</span>,</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयंसेवकों ने बिना सरकारी मदद के अपने दम पर महीनों तक उन हिंदुओं के भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी और स्वास्थ्य की भी व्यवस्था की थी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तो देश जानता है कि विभाजन के उस कठिन दौर में कैसे आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं को बचाया था। आजादी के दौर के बहुत से लोगों का मानना है कि यदि आजादी के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी नहीं लगाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिन्ना के गुंडे और गुंडागर्दी पर उतारू उसकी सेना नफरत की आग में पाकिस्तान से समूची हिंदू कौम का ही सर्वनाश कर देते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की आजादी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीयों में एकजुटता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महान उद्देश्य को लेकर बिना प्रचार-प्रसार के अपने कार्यकर्ताओं के बूते अलख जगाए रखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी परिणति यह है कि भारत आज दुनिया की महाशक्तियों को अपने आगे झुकाने वाला देश बन गया है। देश में जब-जब भी विपदाएँ आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब-तब सरकार से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से अपनी जान की परवाह किए बिना विपदाओं में उम्मीदों का सहारा बनकर खड़े हुए हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किए गए कार्यों की विपक्ष के नेता तक खुले मन से प्रशंसा करते रहे हैं। देश में जब भी कहीं भीषण बाढ़ आई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखा पड़ा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूकंप की त्रासदी हुई हो या फिर कोई गंभीर बीमारी ही क्यों न फैली हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता देश में आई हर विपदा में सबसे पहले सहारा बनकर खड़ा हो जाता है और बिना जाति-धर्म पूछे अपनी जान की बाजी लगाकर सेवा कार्यों में जुट जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस देश को जोड़ने और मजबूती प्रदान करने वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बिना जाति-धर्म का भेद किए देश के हर वर्ग और समाज के विकास में सहयोग प्रदान करता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस का दायरा समूचा देश और देश में रहने वाले सभी जाति-धर्मों के लोगों के बीच मानवीय प्रेम और राष्ट्रीय एकता बनी रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी महान उद्देश्य को लेकर दिन-रात उसके स्वयंसेवक कार्य करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र ऐसा संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने किए गए कार्यों का कभी दिखावा नहीं करता और न कभी अपना बखान करता है। देश की सेहत देखकर ही संघ की सक्रियता समझी जा सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश यदि आज दुनिया में सिरमौर बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसमें आरएसएस की भूमिका को भी खुले मन से स्वीकारना होगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रहित को समर्पित संगठन आरएसएस के करोड़ों कार्यकर्ता बेहद अनुशासित तरीके से अपने सरसंघचालक के हर शब्द को अपना सर्वस्व त्याग कर निस्वार्थ भाव से पूर्ण करते हैं। यह संघ के सरसंघचालक के तपोबल का ही परिणाम है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री मोहन भागवत छठे सरसंघचालक हैं। इससे पूर्व डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुकर दत्तात्रेय देवरस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ और के. एस. सुदर्शन जी के त्याग और अनुशासन से संघ दुनिया भर के देशों में अपनी जड़ें मजबूती से जमाए हुए मानवीय सेवा के कार्यों हेतु समर्पित है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति के कुछ अवसरवादी सत्ता-स्वार्थी नेताओं ने अपने वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में आरएसएस को देश-विरोधी संगठन बताने से भी गुरेज नहीं किया है। इतना ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ राजनीतिक दलों ने सत्ता में आने के बाद जाति-धर्म के वोट बैंक के सहारे सत्ता में बने रहने की चाहत में अपने-अपने राज्यों में आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगा दिया था और आरएसएस से संबंध रखने वाले भारतीयों को प्रताड़ित भी किया जाता था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कुछ राज्यों में आज भी आरएसएस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर बंदिशें लगाई गई हैं। वर्तमान में राजनीति से जुड़े कुछ लोगों ने एक विशेष वर्ग के वोट बैंक पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए आरएसएस को केवल हिंदुओं का संगठन बता कर उसके खिलाफ आए दिन जहर उगला है। बेशक आरएसएस एक हिंदुत्ववादी विचारधारा वाला संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका महान उद्देश्य सभी धर्मों और जातियों के लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र को एकजुट और मजबूत बनाना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की विचारधारा के विरोधी जो भी लोग आज राजनीति में मौजूद होकर जात-पात की राजनीति करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जी से सीखना चाहिए कि उन्होंने देशहित के कार्यों में आरएसएस की दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समय-समय पर प्रशंसा भी की है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक श्री मोहन भागवत देश के सभी वर्गों और धर्मों के प्रमुखों के साथ मिलकर संघ के प्रति राजनीतिक दलों द्वारा जो दूषित धारणाएँ फैलाई गई थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें बहुत हद तक दूर कर संघ के सच्चे राष्ट्र हित के उद्देश्य से परिचित करवाकर अन्य धर्मों को भी संघ की विचारधारा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश इस वर्ष विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस की स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के मार्गदर्शन में देशभर में संघ के कार्यों से देश की नई पीढ़ी को अवगत कराने के कार्यक्रम जारी हैं। आरएसएस एक ऐसा सामाजिक संगठन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जाति-धर्म के नाम पर टुकड़ों में बंटे और बिखरे लोगों को एकजुट करता है तथा उनमें अपने राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा के लिए व्यक्ति निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक का पाठ सिखाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरएसएस की स्थापना भी सन </span>1925 <span lang="hi" xml:lang="hi">में विजयादशमी के दिन डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा इसी महान उद्देश्य को लेकर की गई थी। अपने सौ वर्षों के सफर में आरएसएस अपने कार्यकर्ताओं के समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और अनुशासन के बल पर आज एक वटवृक्ष बनकर दुनिया के अस्सी से ज्यादा देशों में फैल चुका है।</span>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक श्री मोहन भागवत की अगुवाई में संघ अपना सौवां जन्मोत्सव पिछली विजयादशमी को मनाया गया उस ऐतिहासिक पल का समूचा दे साक्षी बना!  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को पूरे वर्ष देशभर में हर्षोल्लास से मनाएगा और कार्यक्रमों के माध्यम से देश के विकास में संघ की भूमिका से उसके त्याग बलिदान और कर्तव्य निष्ठा से नवपीढ़ी को परिचित भी करवाएगा।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:29:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतवर्ष की गुरु-शिष्य सनातनी परंपरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180749/indias-guru-disciple-sanatani-tradition"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करवाया था ।जब खड़कपुर आईआईटी की स्थापना की गई थी तब उन्होंने अतिथि के रूप में अपने भाषण में कहा की भारत को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने का दायित्व इन्हीं आई,आई,टी की कक्षाओं शिक्षकों एवं छात्राओं का होगा, वे राष्ट्र को तकनीकी दिशा में मील का पत्थर बनाने में साबित होंगेl</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भारत आज अंतरिक्ष की बड़ी शक्तियों की कतार में शामिल हैl इसके पीछे भारत के कई वैज्ञानिक सीवी रमन ,विक्रम साराभाई, सतीश धवन जैसे बड़े वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इसरो संस्थान है जिसकी कक्षाओं में मंगल तक भारतीय तिरंगे को लहराया. भाभा एटॉमिक परमाणु शक्ति बन गया हैl वैश्विक स्तर पर हर बड़े स्पेस रिसर्च सेंटर पर भारत की इंजीनियर और वैज्ञानिक अपनी सेवाएं दे रहे हैंl</p>
<p style="text-align:justify;">आज अमेरिका आर्थिक महाशक्ति बनने के पीछे उसके विश्वविद्यालय ,संस्थाएं हैं। हावर्ड बिजनेस स्कूल विश्व स्तरीय व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में से एक माना जाता हैl आर्थिक सामाजिक तथा वैज्ञानिक शोध संस्थाओं में अधिकाधिक धनराशि खर्च करके अमेरिका, रूस, ब्रिटेन ,चीन, ऑस्ट्रेलिया ,कनाडा ने विश्व में सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवी दिए हैंl यह तो तय है कि कोई भी देश का भाग्य तभी उन्नत तथा विकसित होगा जब वहां के छात्र शिक्षक एवं आमजन न्याय, समता ,प्रबुद्धता के प्रति अपनी अडिग प्रतिबद्धता रखें। आने वाली पीढ़ी यानी कि वर्तमान के बच्चे और भविष्य के नागरिक ही किसी देश का भविष्य निर्माण करते हैं और यह भी तय रहता है कि बुद्धिमान शिक्षक अपने छात्रों के माध्यम से किसी महान राष्ट्र की नींव रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी महान राष्ट्र का निर्माण रातों-रात नहीं होता है इसके लिए पीढीयो का योगदान और श्रेष्ठ शिक्षक एवं छात्रों की लग्न शीलता और मेहनत की प्रतिबद्धता होती है। 1960 और 70 के दशक में चीन में गठित सांस्कृतिक क्रांति कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों ,कारखानों को एकता में बांधकर सक्रिय नीति का प्रयोग कर सभी को एक सूत्र में बांधा गया था। जापान तो प्राथमिक कक्षाओं से उपजे राष्ट्रवाद, अनुशासन तथा कर्तव्य बोध के लिए सर्वश्रेष्ठ उदाहरण रहा है, जापान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पराजय का कड़वा घूंट पीने के पश्चात कमजोर एवं मृतप्राय जापान को एक शक्तिशाली आर्थिक राष्ट्र बना दिया। इसके विपरीत वर्तमान कक्षाएं प्रेम, अनुशासन ,करुणा जैसे पाठ ना सिखा कर ईर्ष्या, कंपटीशन, हिंसा ,कटुता जैसे अध्याय सिखा कर राष्ट्र के भविष्य को गर्त में ले जा रही है ।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के अनेक विश्वविद्यालय हड़ताल ,हिंसा, जाति भेदभाव, आपत्तिजनक नारों जैसे विसंगतियों का सामना कर रहे हैं। कक्षाओं का नैतिकता, सहिष्णुता ,अनुशासन से कटाव केवल भारत में नहीं पूरे विश्व में इसका फैलाव हो चुका है। अमेरिका तथा यूरोपीय देशों में स्कूलों का कक्षाओं में गोली कांड इसके बड़े विकृत उदाहरण हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने ट्रीस्ट विद डेस्टिनी के भाषण में भूख, भय ,बीमारी, अज्ञान से पूर्णता मुक्ति की बात को भारत की नियति या डेस्टिनी कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए की कक्षाओं को चरित्र निर्माण ,अनुशासन ,उत्कृष्ट नवाचार ,लोकतांत्रिक विचार संरचना का केंद्र बनाकर इसकी शिक्षा दीक्षा दी जानी चाहिए। कक्षाओं से बच्चे आर्थिक रूप से प्रौद्योगिकी स्थापित कर स्वयं अपने पैरों पर खड़े होकर आने वाले वर्षों में कई युवाओं को रोजगार देकर संपूर्ण मानवता ,पर्यावरण की रक्षा तथा राष्ट्र के उत्कर्ष को सही दिशा देने का काम करेंगे। जिससे राष्ट्रीय चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रीयता की भावना को एक मजबूत आधार प्राप्त हो सकेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:47:12 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रीय सेवा योजना सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है : प्रो. सत्येंद्र कुमार दूबे</title>
                                    <description><![CDATA[<div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173039/national-service-scheme-is-a-powerful-medium-for-development-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773061459179.jpg" alt=""></a><br /><div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं के चरित्र निर्माण, सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है। समाज को सकारात्मक दिशा देने में धैर्य, सहनशीलता और सेवा भाव जैसे गुणों का विशेष महत्व है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिन्हें एनएसएस के माध्यम से विकसित किया जाता है। मुख्य वक्ता डॉ. अरविन्द कुमार रावत (सहायक आचार्य, लोक प्रशासन विभाग) ने कहा कि आदर्श, मानव मूल्य और लोक संस्कृति के संरक्षण में राष्ट्रीय सेवा योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है। एनएसएस के स्वयंसेवक समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ एक आदर्श नागरिक के रूप में समाज निर्माण में सक्रिय योगदान देते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में डॉ. विशाल गुप्ता तथा डॉ. विमल चन्द्र वर्मा ने भी राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सौहार्द एवं स्वच्छता के महत्व पर विचार व्यक्त किए। संध्या सत्र में स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं द्वारा महिला दिवस, लोक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवन्त यादव के निर्देशन में हुआ। स्वागत एवं आभार डॉ. सरिता सिंह द्वारा व्यक्त किया गया।</div></div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:04:24 +0530</pubDate>
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